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Varanasi: बाढ़ में डूबे घाट, गलियों में हो रहे हैं दाह संस्कार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताई चिंता

यूपी के वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी का जलस्तर बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है और यहां के हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाटों के पानी में डूब जाने से शवों का दाह संस्कार आस-पास की गलियों में करना पड़ रहा है. हालात के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिंता जताते हुए जरूरी निर्देश दिये हैं. यहां के सभी घाट और आस-पास के निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोग विस्थापन को मजबूर हैं.

एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा के बढ़ते जल स्तर और बाढ़ पीड़ितों के विस्थापन को लेकर बृहस्‍पतिवार को चिंता व्यक्त की और अधिकारियों को फोन कर राहत शिविरों में रह रहे लोगों को हर सम्भव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया.

प्रधानमंत्री ने जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा और आयुक्त दीपक अग्रवाल को फोन कर राहत शिविर में रह रहे लोगों को हर सम्भव सहायता प्रदान कराने के लिए कहा और आवश्यकता पड़ने पर सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से संपर्क करने का निर्देश दिया.

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शुक्रवार की सुबह आठ बजे वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.262 से बढ़कर 70.86 मीटर पर पहुंच गया, जो कि खतरे के निशान 71.262 मीटर से महज 0.40 मीटर नीचे है.

वरुणा नदी में भी जलस्तर उफान पर है. वरुणा के किनारे बसे रिहायशी इलाकों में पानी घुसना शुरू हो गया है. हालात को देखते हुए जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में भेजा जा रहा है। राहत शिविरों में विस्थापित लोगों को खाने-पीने के साथ ही चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.

वाराणसी के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी आ जाने से नगवा, सामने घाट, मारुति नगर, काशीपुरम, रमना आदि क्षेत्र जलमग्‍न हो गये हैं. सामने घाट निवासी वीरेंद्र चौबे ने बताया कि जैसे ही घरों में पानी घुसना शुरू हुआ, उन्होंने अपने परिवार को गांव भेज दिया पर खुद रुक कर मकान में रखे सामान की हिफाजत के लिए परेशानियों से जूझ रहे हैं.

हुकुलगंज निवासी चंद्रकांत सिंह ने बताया कि हुकुलगंज और नई बस्ती में 100 से अधिक घर बाढ़ से प्रभावित हैं. घरों में पानी लगने से काफी नुकसान हो चुका है. जिला प्रशासन बाढ़ से घिरे लोगों को राहत शिविर में ले जाने की तैयारी कर रहा है.

गंगा के बढ़ते जलस्तर से अस्सी घाट से लेकर नमो घाट तक पूरी तरह डूब चुके हैं. इलाके के लोगों ने बताया कि हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट पर पानी भर जाने से यहां शवदाह या तो आस-पास की गलियों या छतों पर करना पड़ रहा है. जगह कम होने से शवदाह करने आये लोगों को काफी इंतजार भी करना पड़ रहा है.

जिलाधिकारी और आयुक्‍त ने सरैया, ढेलवरिया सहित अन्य बाढ़ राहत शिविरों का निरीक्षण किया तथा मौके पर मौजूद अधिकारियों को राहत शिविरों में रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या न होने देने का निर्देश दिया.

जिला प्रशासन के अनुसार जिले में कुल 40 बाढ़ राहत शिविर तय किये गए हैं, जिनमे से अभी 11 बाढ़ राहत शिविर क्रियाशील हैं. बाढ़ राहत शिविर में बृहस्पतिवार तक कुल 280 परिवारों के 1290 लोग शरण लिए हैं, जिसमें 12 वर्ष से कम बच्चों की संख्या 382 और वृद्धों की संख्या 132 है.

प्रशासन ने दावा किया कि शिविर में रह रहे व्यक्तियों के भोजन-पानी का समुचित प्रबंधन करने के साथ ही साफ बिस्तर, प्रकाश, शौचालय, मेडिकल सुरक्षा आदि की व्यवस्था की गयी है. शिविर में विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है.

प्रत्येक बाढ़ राहत शिविर पर उपजिलाधिकारी, अपर नगर मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और नायब तहसीलदार को नोडल अधिकारी बनाया गया है. जनपद में राहत शिविरों के लिए कुल 40 मेडिकल टीम का गठन किया गया है.

बाढ़ से प्रभावित होने वाले पशुओं के लिए भूसा की व्यवस्था की गयी है तथा राहत शिविरों में पशु चिकित्साधिकारी तैनात किये गये हैं.

नीरज चोपड़ा का एतिहासिक कमाल, डायमंड लीग का खिताब जीतकर रचा इतिहास, इस बार इतनी दूर भाला फेंक विश्व को चौंकाया- Video

ओलंपिक चैम्पियन भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने शुक्रवार को एक बार फिर इतिहास रच दिया और वह डायमंड लीग (Lausanne Diamond League) मीट के लुसाने चरण का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बन गए.

इसी के साथ वह सात और आठ सितंबर को ज्यूरिख में डायमंड लीग के फाइनल में भी पहुंच गए हैं. वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय है, साथ ही उन्होंने हंगरी के बुडापेस्ट में 2023 में होने वाले विश्व चैम्पियनशिप के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है.

चोपड़ा (24) ने इस खिताब को हासिल करने के लिए पहले प्रयास में भाला 89.08 मीटर रिपीट 89.08 मीटर दूर फेंका। यह उनके करियर का तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रयास है. वह चोट के कारण बर्मिंघम में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भाग नहीं ले पाए थे.

हरियाणा में पानीपत के रहने वाले चोपड़ा डायमंड लीग का कोई खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं. चोपड़ा से पहले चक्का फेंक खिलाड़ी विकास गौड़ा डायमंड लीग मीट के शीर्ष तीन में जगह बनाने वाले इकलौते भारतीय हैं. बता दें कि चोट के कारण नीरड चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं बन पाए थे. 

राहुल गांधी पर पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए दबाव बनाएंगे: कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि राहुल गांधी की कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में वापसी के लिए प्रयास किया जाएगा, क्योंकि पार्टी में उनके अलावा कोई ऐसा नहीं है जिसकी अखिल भारतीय अपील हो. राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि पार्टी का नेतृत्व करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को पूरे देश में जाना जाना चाहिए और उसे कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर और पश्चिम बंगाल से गुजरात तक समर्थन प्राप्त होना चाहिए.

खड़गे ने शुक्रवार को यहां ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘वह (कांग्रेस अध्यक्ष को) पूरी कांग्रेस पार्टी में जाना-पहचाना, स्वीकृत व्यक्ति होना चाहिए। ऐसा (इस तरह के कद के साथ पार्टी में) कोई नहीं है.”

उन्होंने कहा कि सभी वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पार्टी में शामिल होने और काम करने के लिए ‘‘विवश” किया था और राहुल गांधी से ‘‘सामने आने और लड़ने” का अनुरोध किया था.

खड़गे ने पूछा, ‘‘आप मुझे विकल्प बताएं। (राहुल गांधी के अलावा पार्टी में अन्य) कौन है?” इन खबरों पर कि राहुल गांधी पद संभालने को तैयार नहीं हैं, खड़गे ने कहा कि उनसे अनुरोध किया जाएगा और उन्हें ‘‘पार्टी की खातिर, देश की खातिर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से लड़ने और देश को एकजुट बनाए रखने के लिए कार्यभार संभालने के लिए कहा जाएगा.”

खड़गे ने पार्टी की आगामी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का भी जिक्र किया और कहा कि ‘जोड़ो भारत’ के लिए राहुल गांधी की जरूरत है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हम उनसे पूछेंगे, हम उन्हें मजबूर करेंगे और उनसे (कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में लौटने के लिए) अनुरोध करेंगे। हम उनके साथ खड़े हैं. हमें उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे.”

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की तारीखों के कार्यक्रम को मंजूरी देने के लिए पार्टी की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) रविवार को एक डिजिटल बैठक करेगी.

सीडब्ल्यूसी की बैठक की अध्यक्षता सोनिया गांधी करेंगी. कई नेता राहुल गांधी को फिर से पार्टी प्रमुख बनने के लिए सार्वजनिक रूप से प्रोत्साहित कर रहे हैं. हालांकि, इस मुद्दे पर अनिश्चितता और रहस्य बरकरार है. पार्टी के कई अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी अपने रुख पर कायम हैं कि वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) अध्यक्ष नहीं बनेंगे.

2019 में संसदीय चुनावों में पार्टी के लगातार दूसरी हार का सामना करने के बाद उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था. सोनिया गांधी, जिन्होंने अंतरिम अध्यक्ष के रूप में फिर से पार्टी की बागडोर संभाली, ने भी अगस्त 2020 में जी-23 नाम से जाने जाने वाले नेताओं के एक वर्ग द्वारा खुले विद्रोह के बाद पद छोड़ने की पेशकश की, लेकिन सीडब्ल्यूसी ने उनसे पद पर बने रहने का आग्रह किया था.

“आपके सरकारी स्कूल देखने कब आऊं”; केजरीवाल का असम सीएम हिमंत विश्व शर्मा पर तंज

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal) और उनके असम के समकक्ष के बीच ट्विटर पर जारी जंग शनिवार को भी जारी रही. केजरीवाल ने हिमंत विश्व शर्मा से पूछा कि बताइये असम के स्कूलों को देखने कब आना है. डिजिटल मंच पर दोनों नेताओं के बीच बहस बुधवार को तब शुरू हुई थी जब केजरीवाल ने ट्वीट किया कि स्कूल बंद करना कोई समाधान नहीं है तथा देश में और स्कूल खोलने की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने असम में कुछ स्कूलों को ‘‘बंद किये जाने” का दावा करने वाली एक खबर साझा की.

पिछले तीन दिन से केजरीवाल और शर्मा के बीच ट्विटर पर जुबानी जंग जारी है. आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल ने शनिवार को ट्वीट किया, ‘‘हमारे यहाँ कहावत है. कोई पूछे “मैं कब आऊँ” और आप कहें “कभी भी आ जाओ” इसका मतलब होता है “कभी मत आओ”. मैंने आपसे पूछा “आपके सरकारी स्कूल देखने कब आऊँ” आपने बताया ही नहीं. बताइए कब आऊँ, तभी आ जाऊँगा.”

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने यह ट्वीट शर्मा द्वारा शुक्रवार को दिए गए बयान के बाद किया. शर्मा ने सिलसिलेवार ट्वीट करके दिल्ली और असम के बीच अंतर बताया था और केजरीवाल का मजाक उड़ाया था. शर्मा का ट्वीट था, ‘‘प्रिय केजरीवाल जी, आपकी अज्ञानता दुखी करने वाली है. मैं आपकी मदद करता हूं. असम दिल्ली से 50 गुना बड़ा है. हमारे 44,521 स्कूलों में 65 लाख छात्र पढ़ते हैं और आपके यहां एक हजार से कुछ ही ज्यादा स्कूल हैं. हमारे यहां दो लाख से अधिक समर्पित शिक्षकों की फौज है और 1.18 लाख मध्याह्न भोजन के कर्मचारी हैं.”

भारत-बांग्लादेश सीमा पर महिला से रेप के आरोप में BSF के दो कर्मी गिरफ्तार, BJP-TMC में जुबानी जंग

भारत से अवैध रूप से बांग्लादेश में घुसने की कोशिश कर रही एक महिला से बलात्कार के आरोप में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के दो जवानों को गिरफ्तार किया गया है. बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि बीएसएफ के सहायक उपनिरीक्षक और कांस्टेबल को शुक्रवार देर रात गिरफ्तार करने के बाद कानूनी कार्रवाई के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस को सौंप दिया गया. बीएसएफ के दक्षिण बंगाल सीमांत के अधिकारी ने बताया कि आरोपियों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ का आदेश दिया गया है.

उन्होंने बताया कि घटना 26 अगस्त की सुबह पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में बगदा सीमा चौकी के निकट हुई. अधिकारी ने बताया, ”बीएसएफ कांस्टेबल ने भारत से बांग्लादेश में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक दलाल और एक महिला को पकड़ा था. कांस्टेबल महिला को पास के एक खेत में ले गया और उससे कथित तौर पर बलात्कार किया, जबकि सहायक उपनिरीक्षक ने उसे अपराध में कथित तौर पर मदद की.”

महिला द्वारा पुलिस में शिकायत कराने के बाद यह घटना सामने आई.

उन्होंने कहा, ”घटना का पता लगते ही हमने दोनों कर्मियों को पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया. पुलिस ने दोनों को सेवाओं से निलंबित कर दिया और घटना की जांच के आदेश दिए हैं.”

उक्त घटना के बाद से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया.

टीएमसी ने ट्वीट किया, ”हमारा देश भाजपा के कुशासन के तहत महिलाओं के लिए असुरक्षित होता जा रहा है! श्रीमान अमित शाह (केन्द्रीय गृह मंत्री) आपकी निगरानी में, बीएसएफ अधिकारी और जवान ने एक महिला के साथ बलात्कार किया और आवाज उठाने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी। वास्तव में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक चमकदार उदाहरण!”

उधर, भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि इस तरह की छिटपुट घटनाओं के कारण टीएमसी को पूरी बीएसएफ की छवि को धूमिल नहीं करना चाहिए.

भाजपा प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा, ”टीएमसी की इस तरह की टिप्पणियां अस्वीकार्य हैं. आप इस तरह की छिटपुट घटनाओं के कारण पूरी बीएसएफ को बदनाम नहीं कर सकते. अगर किसी ने अपराध किया है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जायेगी.”

Coronavirus India Update: देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 9,520 नए मामले, 24 घंटे में 41 की मौत

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भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के 9,520 नए मामले सामने आने से देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,43,98,696 हो गई, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 87,311 रह गई है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में संक्रमण से 41 और लोगों की मौत होने के बाद मृतक संख्या बढ़कर 5,27,597 पर पहुंच गई. इन 41 मृतकों में वे चार लोग भी शामिल हैं, जिनके नाम केरल ने कोविड-19 (Covid-19) से मौत के आंकड़ों का पुन: मिलान करते हुए संक्रमण से जान गंवाने वाले लोगों की सूची में डाले हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 87,311 रह गई है, जो कुल मामलों का 0.20 प्रतिशत है. पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 3,396 की कमी दर्ज की गई है। वहीं, मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर बढ़कर 98.62 प्रतिशत हो गई है.

अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, दैनिक संक्रमण दर 2.50 प्रतिशत, जबकि साप्ताहिक संक्रमण दर 2.80 प्रतिशत है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक 4,37,83,788 कोविड-19 से उबर चुके हैं, जबकि संक्रमण से मौत की दर 1.19 प्रतिशत है. देश में अब तक कोविड-19 टीके की 211.91 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण से जिन लोगों की मौत हुई, उनमें हरियाणा के छह, महाराष्ट्र और पंजाब के चार-चार, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के तीन-तीन, दिल्ली, गुजरात और ओडिशा के दो-दो तथा चंडीगढ़, गोवा, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश का एक-एक मरीज शामिल है.

गौरतलब है कि देश में सात अगस्त 2020 को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी. संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे.

देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गए थे. पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी. इस साल 25 जनवरी को संक्रमण के मामले चार करोड़ के पार हो गए थे.

(Source: Bhasha)

न्यायमूर्ति ललित छठे ऐसे सीजेआई होंगे, जिनका कार्यकाल सौ दिन से भी कम रहेगा

भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ग्रहण करने वाले न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित भारतीय न्यायपालिका के छठे ऐसे प्रमुख होंगे, जिनका कार्यकाल 100 दिन से कम होगा.

न्यायमूर्ति ललित का कार्यकाल 74 दिन का होगा और वह आठ नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे.

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु होने पर सेवानिवृत्त होते हैं.

25 नवंबर 1991 से 12 दिसंबर 1991 तक प्रधान न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति कमल नारायण सिंह का कार्यकाल 18 दिन था.

वहीं, दो मई 2004 से 31 मई 2004 तक सीजेआई के रूप में सेवाएं देने वाले न्यायमूर्ति एस राजेंद्र बाबू का कार्यकाल 30 दिन का था.

न्यायमूर्ति जे सी शाह 36 दिन तक प्रधान न्यायाधीश रहे। उनका कार्यकाल 17 दिसंबर 1970 से 21 जनवरी 1971 तक था.

वहीं, न्यायमूर्ति जी बी पटनायक आठ नंवबर 2002 से 18 दिसंबर 2002 तक सीजेआई रहे। प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल 41 दिन का था.

न्यायमूर्ति एल एम शर्मा का कार्यकाल 86 दिन रहा. वह 18 नवंबर 1992 से 11 फरवरी 1993 तक प्रधान न्यायाधीश के पद पर थे.

(Source: Bhasha)

“खून की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे”; बीजेपी पर निशाना साधते हुए बोले झारखंड सीएम हेमंत सोरेन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को दावा किया कि ‘‘शैतानी ताकतें” उनकी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही हैं. साथ ही, उन्होंने कहा कि ‘‘वह अपने खून की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे.”

मुख्यमंत्री महुआडांड़ के टूटूआपानी में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा पर जमकर बरसे और आरोप लगाया, ‘‘भाजपा वाले पिछले पांच माह से मुझे सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे हैं. मेरे खिलाफ हर तरह के हथियार चला रहे हैं, ये मेरी गर्दन पर आरी तक चलाने का प्रयास किये लेकिन हर औजार ही टूट जा रहा है.’

सोरेन ने कहा, ‘‘मैं आदिवासी का बेटा हूं, झारखंड का बेटा हूं. कोई इतना आसानी से मुझे नहीं तोड़ सकता है.” इससे पहले, सोरेन के कार्यकाल के दौरान उनके नाम से रांची में खनन पट्टा आवंटित करने के मामले में उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर निर्वाचन आयोग की राय बंद लिफाफे में झारखंड के राजभवन बृहस्पतिवार को पहुंच गयी. अब राज्यपाल रमेश बैस के फैसले का इंतजार है. राजभवन से इस सिलसिले में कोई निर्देश शीघ्र ही आने की संभावना है.

सोरेन ने आरोप लगाया, ‘‘राजनीतिक रूप से हमारे साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं, हमारे प्रतिद्वंद्वी संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग कर रहे हैं. वे हमारी सरकार को अस्थिर करने के लिए ईडी, सीबीआई, लोकपाल और आयकर विभाग का दुरुपयोग कर रहे हैं. लेकिन हम इसके बारे में चिंतित नहीं हैं. हमें जनादेश विरोधियों द्वारा नहीं बल्कि लोगों द्वारा मिला है.”

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य दो साल तक कोविड-19 से प्रभावित रहा. अब, जब हमने अपने विकास की गति को तेज किया है, तो शैतानी ताकतें हमारी गति को रोकने के लिए अपने बिल से बाहर आ गई हैं. ऐसी ताकतें कुछ भी कर सकती हैं लेकिन मुझे अपने लोगों के लिए काम करने से वे कभी नहीं रोक सकती हैं. ”

सोरेन ने दावा किया कि झारखंड में ‘‘बाहरी ताकतों का एक गिरोह” सक्रिय है. उन्होंने कहा, ‘‘इस गिरोह ने पिछले 20 वर्षों से राज्य को तबाह करने का काम किया था. 2019 में जब उन्हें सत्ता से बेदखल किया गया, तो साजिशकर्ता इसे बर्दाश्त नहीं कर सके. अगर हम यहां रहते हैं, तो उनके लिए आगे मुश्किल समय आने वाला है.’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम सत्ता के भूखे नहीं हैं. हम यहां सिर्फ लोगों के कल्याण के लिए, काम करने के लिए एक संवैधानिक व्यवस्था के तहत हैं. क्या कभी किसी ने सोचा था कि हर बूढ़ी, विधवा और एकल महिला को पेंशन मिलेगी? यह आपके सबके आशीर्वाद से संभव हुआ है.”

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) के मौके पर देश के प्रधानमंत्री और आदिवासी राष्ट्रपति ने देश के आदिवासी समाज को शुभकामनाएं देना भी मुनासिब नहीं समझा. उनकी नजर में हम आदिवासी नहीं बल्कि ‘वनवासी’ हैं.”

जाह्नवी कपूर (Jahnvi Kapoor) का साड़ी में दिखा बेहद ही हसीन अवतार, Photos देखकर फैंस के छूटे पसीने..

बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा जाह्नवी कपूर सोशल मीडिया पर अपने बोल्ड और सेक्सी अंदाज से बवाल मचा रही हैं. एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर अपने बोल्ड अवतार में सेक्सी साड़ी पहनकर अपना हॉट वीडियो पोस्ट किया है जिसमें वो बेहद आकर्षक अंदाज में पोज करती हुई दिखाई दे रही हैं. 

देश के 68 हजार से अधिक गांवों के 3.82 लाख लोग टीबी से ग्रसित, खांसी हो तो न करें नजरअंदाज

देशभर के 68,000 से अधिक गांवों में घर-घर जाकर 1 करोड़ से अधिक लोगों की टीबी की जांच की गई है. 1 करोड़ लोगों में से 3,82,811 लोगों में टीबी पाई गई है.

भारत के 174 जनजातीय जिलों में टीबी के सक्रिय मामलों का पता लगाने के लिए यह खास अभियान इस वर्ष 7 जनवरी को शुरू किया गया. इसे महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में शुरू किया गया था. इस पहल के तहत कुल 68,019 गांवों में टीबी की घर-घर जाकर जांच की गई.

1 करोड़ 3 लाख से अधिक व्यक्तियों की मौखिक जांच के आधार पर 3,82,811 लोगों में टीबी होने की पहचान की गई थी. इनमें से 2,79,329 (73 प्रतिशत) नमूनों की टीबी के लिए जांच की गई और 9,971 लोग टीबी के लिए पॉजिटिव पाए गए जिनका भारत सरकार के प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया गया.

केद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा टीबी प्रभाग ने 24 अगस्त को राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान (एनटीआरआई), नई दिल्ली में ‘जनजातीय टीबी पहल’ के तहत 100 दिवसीय आश्वासन अभियान की विशेषताओं का प्रचार करने के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया.

‘जनजातीय टीबी पहल’ जनजातीय कार्य मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के केंद्रीय टीबी प्रभाग की एक संयुक्त पहल है, जिसे यूएसएआईडी द्वारा एक तकनीकी भागीदार और पीरामल स्वास्थ्य द्वारा कार्यान्वयन भागीदार के रूप में समर्थन प्राप्त है.

जनजातीय कार्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव, डॉ. नवलजीत कपूर ने कहा कि आश्वासन अभियान लगभग 2 लाख सामुदायिक प्रभावशाली व्यक्तियों को एक मंच पर लाया है, जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए भाग लिया.

आदिवासी नेता, आदिवासी उपचारकर्ता, पीआरआई सदस्य, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और आदिवासी क्षेत्रों के युवा शामिल हैं, जो जांच (स्क्रीनिंग) प्रक्रिया और सामुदायिक जागरूकता के इस अभियान का हिस्सा थे.

विवेकानंद गिरी, डीडीजी केंद्रीय टीबी डिवीजन ने सीटीडी की जनजातीय टीबी पहल प्रस्तुत की. एडीजी डॉ. रघुराम राव ने कहा कि केंद्रीय टीबी प्रभाग टीबी से निपटने लिए जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है.

आश्वासन अभियान के माध्यम से जो डेटा सामने आया है, उसके साथ सीटीडी टीबी के प्रमुख केंद्रों का मानचित्रण करेगा और उसका शुरूआती बिंदु के रूप में उपयोग करेगा.

भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, 75 अधिक बोझ वाले जनजातीय जिलों को आगामी महीनों में ध्यान केंद्रित करने के लिए चुना गया है. ऐसे 75 जिलों के लिए एक त्रिस्तरीय रणनीति प्रस्तुत की गई है.

इसके तहत समुदाय को एकजुट करने, टीबी लक्षणों, प्रसार और उपचार प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने तथा इस कलंक को मिटाने और टीबी से जुड़े भय को दूर करने के लिए इस प्रक्रिया के दौरान शामिल किए गए हैं. सामुदायिक प्रभावकों के साथ निरंतर जुड़ाव के माध्यम से टीबी सेवाओं की मांग का सृजन करना भी उद्देश्य है.

आगे के मार्ग के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. शोभा एक्का, चीफ ऑफ पार्टी, पीरामल स्वास्थ्य, जनजातीय टीबी पहल ने कहा कि पीरामल स्वास्थ्य भारत में रहने वाले लाखों आदिवासी लोगों के स्वास्थ्य और भलाई के लिए मजबूती के साथ प्रतिबद्ध है और इसका यह मानना है कि भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए टीबी मुक्त जनजातीय समुदाय प्रमुख आधारशिला हैं.