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Bihar: सुशील मोदी का तंज, कहा- नीतीश कुमार सीएम कितने दिन रहेंगे कोई ठिकाना नहीं, लेकिन पीएम का देख रहे सपना

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi)  ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर निशाना साधते हुए कहा कि जदयू की उलटी गिनती शुरू हो गई है. भाजपा नेता ने नीतीश कुमार के पीएम उम्मीदवार के रूप में जदयू के नेताओं के प्रस्तुत किए जाने पर तंज कसते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री कितने दिन रहेंगे, इसका ठिकाना नहीं, लेकिन सपने 2024 में पीएम बनने के देख रहे हैं.

मोदी ने कहा कि राजद के विधायक अवध बिहारी चौधरी के विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद 45 विधायकों वाले जद-यू की उलटी गिनती शुरू हो गई है. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद जब चाहेंगे, नीतीश कुमार को हटा कर बेटे तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनवा देंगे. जिस दल को 115 विधायकों का समर्थन प्राप्त है और अध्यक्ष उसी दल के हैं, वह कभी भी बाजी पलट सकता है.

मोदी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने लिखा, पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद के साथ जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर फिर साबित किया कि यह दल एक डूबता हुआ बूढ़ा जहाज है. नीतीश कुमार ने एक पैर डूबते जहाज पर रखा और दूसरा उस पर जो उनकी छोटी नाव को कभी भी डुबो सकता है.

उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री कितने दिन रहेंगे, इसका ठिकाना नहीं, लेकिन सपने 2024 में पीएम बनने के देख रहे हैं.

Maharashtra: महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को जेल में आया चक्कर, अस्पताल में भर्ती

महाराष्ट्र (Maharashtra) के पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) शुक्रवार को अचानक से जेल में बेहोश होकर गिर पड़े. जिसके बाद उन्हें तुरंत जेजे अस्पताल (JJ Hospital) ले जाया गया. बताया जा रहा है कि अनिल देशमुख ने सीने में दर्द की शिकायत की थी जिसके बाद उनकी तबीयत खराब होने लगी. ऑर्थर रोड जेल प्रशासन द्वारा उनकी बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया. 

बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पिछले 9 महीने से ऑर्थर रोड जेल में बंद हैं. मुंबई (Mumbai) के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने उनके खिलाफ 100 करोड़ की रिश्वतखोरी का आरोप लगाया था.

परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने पुलिसवालों को महाराष्ट्र के रेस्टोरेंटों और बार मालिकों से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने का निर्देश दिया था. हांलाकि, देशमुख ने इन सभी आरोपों से इनकार किया था लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई को उनके खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. 

जिसके बाद सीबीआई ने देशमुख और उनके निजी सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत आरोप दायर किए थे. पुलिस ने उन्हें पिछले साल नवंबर में 2 नवंबर को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में न्यायिक हिरासत में ले लिया था और इस समय वह महाराष्ट्र की ऑर्थर रोड जेल में बंद  हैं. बता दें की ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच कर रही है. 

हांलाकि, अनिल देशमुख ने अदालत में अर्जी दाखिल कर राहत देने की अपील की थी लेकिन कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने देशमुख की न्यायिक हिरासत को 30 अगस्त के लिए बढ़ा दिया है. बता दें कि पिछले शुक्रवार 19 अगस्त को उनकी न्यायिक हिरासत खत्म हो रही थी. अनिल देशमुख को 30 अगस्त तक ऑर्थर रोड जेल में ही रहना पड़ेगा.

आमिर खान की फिल्म लाल सिंह चड्ढा की मुसीबत फिर बढ़ी, दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने के आरोप में केस दर्ज

आमिर खान की फिल्म लाल सिंह चड्ढा रिलीज होने से पहले ही काफी सुर्खियों में थीं. अब रिलीज के बाद भी फिल्म की मुसीबतें कम होती नहीं दिख रही. लाल सिंह चड्ढा को लेकर चल रहे विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं.  

दरअसल दिव्यांग लोगों का कथित रूप से उपहास करने के आरोप में बॉलीवुड फिल्म “लाल सिंह चड्ढा” और “शाबाश मिठू” के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है. 70 प्रतिशत लोकोमोटर डिसेबिलिटी से ग्रसित डॉक्टर्स के सह-संस्थापक शिकायतकर्ता डॉ सतेंद्र सिंह ने अपनी शिकायत पर कमिश्नर की अदालत द्वारा जारी नोटिस की कॉपी साझा की है.

हालांकि, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से इस मामले पर कोई पुष्टि नहीं मिली है. नोटिस के अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आयुक्त की अदालत ने आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ और तापसी पन्नू अभिनीत फिल्म ‘शाबाश मिठू’ के निर्देशकों से केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और संघ की जानकारी मांगी है.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं, जो विशेष रूप से दिव्यांग लोगों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करती हैं.

यूजीसी ने 21 यूनिवर्सिटी को किया ‘फर्जी’ घोषित, देखें पूरी लिस्ट

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश में चल रहे 21 विश्वविद्यालयों को फर्जी (Fake Universities) घोषित किया है. यूजीसी ने ऐसे विश्वविद्यालयों ( Universities) की सूची जारी की है, जिसमें उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बाद सबसे ज्यादा फेक यूनिवर्सिटी दिल्ली (Delhi) में बताई गई हैं. 

यूजीसी के मुताबिक, 21 स्वयंभू और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों, जो कि यूजीसी अधिनियम का उल्लंघन करने रहे हैं, उन्हें फर्जी विश्वविद्यालय घोषित किया गया है और उन्हें कोई डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है.

इन विश्वविद्यालयों को यूजीसी ने बताया फर्जी

  1. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंसेज, दिल्ली
  2. कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज, दिल्ली
  3. यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  4. वोकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  5. एडीआर सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  6. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, दिल्ली
  7. विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ इम्प्लॉयमेंट, दिल्ली
  8. आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, रोहिणी, दिल्ली
  9. वडागांवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी, कर्नाटक
  10. सेंट जोन्स यूनिवर्सिटी, केरल
  11. राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर
  12. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता
  13. इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, कोलकाता
  14. गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग, उत्तर प्रदेश
  15. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रो कॉम्पलेक्स होम्योपैथी, कानपुर
  16. नेताजी सुभाष चंद्र बोस ओपन यूनिवर्सिटी, अलीगढ़
  17. भारतीय शिक्षा परिषद, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
  18. नबाभारत शिक्षा परिषद, शक्ति नगर, राउरकेला
  19. नॉर्थ ओरीसा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, ओडिशा
  20. श्री बोधी एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, पुडुचेरी
  21. क्राइस न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, आंध्र प्रदेश

क्या है यूजीसी?

बता दें कि यूजीसी केंद्र सरकार का एक आयोग है जो विश्वविद्यालयों को मान्यता देता है. यह मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों अनुदान भी देता है. यूजीसी का मुख्यालय राजधानी दिल्ली में है और इसकी छह क्षेत्रीय शाखाएं- पुणे, भोपाल, कोलकाता, हैदराबाद, गुवाहाटी और बंगलुरु में हैं. यूजीसी राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा (NET) का भी कराता है जिसे पास करने वाले उम्मीदवार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्यापक बनाए जाते हैं.

आपको कोई एलर्जी है तो कम है कोरोना से संक्रमित होने का खतरा, नए रिसर्च में सामने आए दिलचस्प तथ्य

असरदार तरीके से कोविड का मुकाबला करने के लिए आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि किन लोगों को इससे संक्रमित होने और अधिक गंभीर बीमारी विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है. इसके लिए, वैज्ञानिकों और चिकित्सकों ने कोविड के साथ गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के कई जोखिम कारक स्थापित किए हैं, जिनमें वृद्धावस्था, मोटापा और कई अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियां शामिल हैं.

उच्च बॉडी मास इंडेक्स भी पहले स्थान पर कोविड से संक्रमित होने की बढ़ी हुई बाधाओं से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है. लेकिन अगर उन कारकों की बात करें, जो किसी के कोविड से संक्रमित होने की संभावना को कम कर सकते हैं? दिलचस्प बात यह है कि शोध से पता चलता है कि एलर्जी होने पर किसी के कोविड से संक्रमित होने के जोखिम को कम किया जा सकता है। एलर्जी बहुत आम है.

दुनिया भर में कम से कम 40 करोड़ लोग किसी चीज को छूने से होने वाली एलर्जी, या हे फीवर से प्रभावित हैं. लगभग 30 करोड़ लोग एलर्जिक अस्थमा (सांस के रास्ते होने वाली एलर्जी) से पीड़ित हैं, जबकि खाद्य एलर्जी लगभग 25 करोड़ लोगों को प्रभावित करती है. कई लोगों को कुछ दवाओं से भी एलर्जी होती है. एलर्जी की प्रतिक्रिया हल्के (शायद त्वचा पर कुछ लाली और सूजन) से लेकर गंभीर (एनाफिलेक्टिक शॉक, जो मौत का कारण बन सकती है) तक हो सकती है.

एटोपिक रोग एलर्जी से उत्पन्न स्थितियों के एक समूह को दिया गया नाम है और इसमें हे फीवर, एक्जिमा और डर्मेटाइटिस शामिल हैं. शोध से पता चला है कि एटोपिक रोगों वाले लोगों में कोविड के संपर्क में आने कर संभावना 25% कम होती है. एटोपिक रोग और अस्थमा वाले लोगों में, इन स्थितियों के बिना वाले लोगों की तुलना में कोविड का जोखिम 38% कम है. एक अलग अध्ययन से पता चला है कि खाद्य एलर्जी वाले लोगों में कोविड से संक्रमित होने की संभावना 50% कम थी.

एलर्जी वाले लोगों को कम जोखिम क्यों होता है?

शुरू में हमने सोचा था कि एलर्जी वाले लोगों में कोविड होने की संभावना कम हो सकती है क्योंकि वे दूसरों से अधिक अलग-थलग हो सकते हैं. यह अस्थमा के लिए सही हो सकता है क्योंकि इस स्थिति वाले लोगों को पहले महामारी से बचाने की सलाह दी गई थी. लेकिन अधिकांश एटोपिक रोगों, जैसे कि एक्जिमा के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता है. और क्या आप खाद्य एलर्जी वाले लोगों से अपेक्षा कर सकते हैं, कि वे कम खाएं, महामारी के दौरान अनुसंधान से पता चला है कि खाद्य एलर्जी वाले घरों में अन्य घरों की तुलना में समुदाय में कोविड का जोखिम का स्तर थोड़ा कम था.

शरीर को संक्रमित करने में सक्षम होने के लिए, सार्स-कोव-2 (वायरस जो कोविड-19 का कारण बनता है) एसीई2 रिसेप्टर नामक एक विशिष्ट प्रोटीन से जुड़ जाता है. यह प्रोटीन वायरस को मानव कोशिकाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को संक्रमित करने के लिए प्रवेश बिंदु प्रदान करता है. एसीई2 रिसेप्टर्स की अधिक मात्रा होने से कोविड संक्रमण के लिए संवेदनशीलता बढ़ जाती है. जो लोग धूम्रपान करते हैं, उन्हें मधुमेह या उच्च रक्तचाप है (जिनमें से सभी गंभीर कोविड की उच्च संभावना से जुड़े हैं) में एसीई2 रिसेप्टर्स अधिक होते हैं.

इस बीच, यह देखा गया है कि टाइप 2 प्रदाह – एक सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जो संक्रमण या परजीवी के संपर्क में आने पर हो सकती है, लेकिन एलर्जी की स्थिति में भी प्रमुख रूप से होती है – वायुमार्ग में एसीई2 को कम करती है. यह संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता को कम करता है, और इसे प्राथमिक कारण माना जाता है कि एलर्जी वाले लोगों में कोविड होने का जोखिम कम होता है। ऐसे कई अन्य कारक भी हैं जो एलर्जी वाले लोगों में कोविड संक्रमण के जोखिम को कम करने में योगदान दे सकते हैं.

उदाहरण के लिए, अस्थमा से पीड़ित लोगों में दूसरों की तुलना में अधिक बलगम बनती है, जिसे सार्स-कोव-2 को वायुमार्ग में प्रवेश करने से रोकने के लिए अहम समझा जाता है. और अच्छी खबर इसलिए हमें एलर्जी और अस्थमा से पीड़ित लोगों में कोविड होने का जोखिम कम दिखाई देता है. लेकिन ये स्थितियां किसी कोविड संक्रमण की गंभीरता को कैसे प्रभावित करती हैं?

अस्थमा से पीड़ित लोगों में कोविड का खतरा कम?

महामारी की शुरुआत में, यह माना गया था कि अस्थमा से पीड़ित लोगों को कोविड से बहुत बीमार होने का अधिक खतरा हो सकता है, क्योंकि वायरल संक्रमण आमतौर पर अस्थमा को बढ़ा देता है. लेकिन अब यह अच्छी तरह से स्थापित हो गया है कि हल्का या अच्छी तरह से नियंत्रित अस्थमा, कोविड के साथ गंभीर बीमारी के जोखिम को नहीं बढ़ाता है और इस बात का भी सबूत नहीं है कि अधिक गंभीर अस्थमा जोखिम को बढ़ाता है.

इसी तरह, गंभीर कोविड के लिए एटोपिक रोग को जोखिम कारक नहीं माना जाता है. यदि आप अस्थमा या एलर्जी के साथ अन्य बीमारियों से भी पीड़ित हैं, तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि इससे कोविड की गंभीरता बढ़ सकती है।रोकथाम बहुत जरूरी है.

कोविड संक्रमण को रोकने के सर्वोत्तम तरीकों में टीकाकरण, उचित फिटिंग वाले मास्क से चेहरे को ढंकना और शारीरिक दूरी बनाना शामिल है. इस बीच, यदि आपको एलर्जी है, तो इसका प्रबंधन होना आवश्यक है. सुनिश्चित करें कि आपका उपचार सही ढंग से हो रहा है और जरूरत पड़ने पर आपके पास दवाएं उपलब्ध हैं.”

Bharat Biotech’s ROTAVAC vaccine: बच्चों को डायरिया से बचाने में उपयोगी, भारत बायोटेक का रोटावैक टीका पेश, नाइजीरिया में 14 प्रतिशत बच्चे हर साल

भारत बायोटेक ने बुधवार को कहा कि उसने अपनी रोटावायरस ओरल वैक्सीन (टीका) रोटावैक को नाइजीरिया में पेश किया है. यह वैक्सीन बच्चों को जानलेवा डायरिया बीमारी से बचाती है.

इस समय रोटावायरस से दुनिया में होने वाली मौतों में नाइजीरिया की 14 प्रतिशत हिस्सेदारी है. नाइजीरिया में हर साल पांच साल से कम उम्र के करीब 50,000 बच्चों की मौत रोटावायरस संक्रमण के कारण होती है.

भारत बायोटेक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने एक बयान में कहा, ‘‘हम विकासशील देशों में बच्चों के बीच संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध हैं और अफ्रीकी महाद्वीप में नाइजीरिया जैसे देशों में बच्चों तथा कमजोर आबादी के लिए किफायती दवाओं की पेशकश कर रहे हैं.’’ यह वैक्सीन अब एशिया, अफ्रीका, लातिनी अमेरिका और पश्चिम एशिया के कई देशों में उपलब्ध है.

Esha Gupta Bold Video: ईशा गुप्ता ने बेड पर दिया हॉट पोज, बोल्ड वीडियो हुआ वायरल

बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा गुप्ता अपनी अदाकारी के साथ ही अपने बेहद सेक्सी और बोल्ड अवतार के लिए भी जानी जाती हैं. ईशा ने हाल ही में सेक्सी सिल्वर गाउन में अपना बोल्ड फोटोशूट कराया है जिसकी तस्वीरें फैंस के बीच तेजी से वायरल हो रही हैं. ईशा का एक वीडियो अब इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो बोल्ड स्टाइल में बेड पर लेटकर पोज करती हुई नजर आई. देखें ईशा का ये लेटेस्ट हॉट वीडियो:

Pegasus Spyware: 29 फोन में से 5 में मिले मैलवेयर लेकिन जासूसी के सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

पेगासस (Pegasus Spyware) के कथित अनधिकृत इस्तेमाल की पड़ताल के लिए उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा नियुक्त पैनल ने जांच किये गये 29 मोबाइल फोन में से पांच में कुछ ‘‘मालवेयर’’ पाए हैं, लेकिन यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका है कि ये ‘‘मालवेयर’’ इजराइली ‘स्पाइवेयर’ के हैं या नहीं.

किसी कम्प्यूटर या मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने, उसे बाधित या नष्ट करने के मकसद से विशेष रूप से बनाए गए सॉफ्टवेयर को ‘‘मालवेयर’’ कहा जाता है. प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण ने शीर्ष न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आर. वी. रवींद्रन द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर गौर करने के बाद इस बात का भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने पेगासस मामले की जांच में सहयोग नहीं किया.

उच्चतम न्यायालय ने नेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की लक्षित निगरानी के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा इजराइली स्पाइवेयर के इस्तेमाल के आरोपों की पिछले साल जांच का आदेश दिया था. साथ ही, शीर्ष न्यायालय ने पेगासस विवाद की जांच के लिए तकनीकी और निगरानी समितियां गठित की थी.

शीर्ष न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि पैनल ने तीन हिस्सों में अपनी ‘‘लंबी’’ रिपोर्ट सौंपी है. इसके एक हिस्से में नागरिकों के निजता के अधिकार तथा देश की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन करने का सुझाव दिया गया है.

पीठ ने कहा, ‘‘उन्होंने (समितियों ने) कहा है कि भारत सरकार ने सहयोग नहीं किया. आप यहां वही रुख अपना रहे हैं, जो आपने वहां अपनाया था.’’ पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी शामिल हैं.

पीठ ने तकनीकी पैनल की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि यह ‘‘थोड़ी चिंताजनक’’ है, क्योंकि जांच के लिए तकनीकी समिति के पास जमा किए गए 29 फोन में से पांच में ‘‘कुछ तरह का मालवेयर’’ पाया गया, लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि ‘‘ये पेगासस के कारण थे.’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जहां तक तकनीकी समिति की रिपोर्ट की बात है ऐसा प्रतीत होता है कि जिन व्यक्तियों ने अपने मोबाइल फोन दिये थे उन्होंने अनुरोध किया है कि रिपोर्ट साझा नहीं की जाए…ऐसा लगता है कि करीब 29 फोन दिये गये थे और पांच फोन में, उन्होंने कुछ ‘मालवेयर’ पाया लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि यह पेगासस का ‘मालवेयर’ है….’’

पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति रवींद्रन की रिपोर्ट में नागरिकों के निजता के अधिकार की सुरक्षा, भविष्य में उठाए जा सकने वाले कदमों, जवाबदेही, निजता की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कानून में संशोधन और शिकायत निवारण तंत्र पर सुझाव दिए गए हैं.

न्यायालय ने कहा कि वह निगरानीकर्ता न्यायाधीश रवींद्रन की रिपोर्ट में कुछ सुधारात्मक उपायों का सुझाव दिया गया है और इनमें एक यह है कि ‘‘मौजूदा कानूनों में संशोधन तथा निगरानी पर कार्यप्रणाली और निजता का अधिकार होना चाहिए.’’

पीठ ने कहा, ‘‘दूसरा यह कि राष्ट्र की साइबर सुरक्षा बढ़ाई जाए और उसे बेहतर किया जाए.’’ न्यायालय ने कहा कि रिपोर्ट में अवैध निगरानी की शिकायतें करने के लिए नागरिकों के वास्ते एक तंत्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है.

पीठ ने कहा, ‘‘यह एक बड़ी रिपोर्ट है. देखते हैं कि हम कौन सा हिस्सा मुहैया करा सकते हैं.’’ साथ ही, पीठ ने कहा कि रिपोर्ट जारी नहीं करने का अनुरोध भी किया गया है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ये सब तकनीकी मुद्दे हैं. जहां तक न्यायमूर्ति रवींद्रन की रिपोर्ट की बात है, हम इसे वेबसाइट पर अपलोड करेंगे.’’

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और राकेश द्विवेदी ने पीठ से वादियों के लिए ‘‘संपादित रिपोर्ट’’ जारी करने की अपील की. रिपोर्ट का जिक्र करते हुए पीठ ने जब कहा कि केंद्र ने सहयोग नहीं किया है, इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

न्यायालय अब चार सप्ताह बाद विषय की सुनवाई करेगा.

तकनीकी समिति में साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, नेटवर्क और हार्डवेयर पर तीन विशेषज्ञ शामिल हैं. इस समिति से यह जांच करने और यह पता लगाने को कहा गया है कि क्या पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल नागरिकों की जासूसी के लिए किया गया और उनकी जांच की निगरानी न्यायमूर्ति रवींद्रन करेंगे.

समिति के सदस्यों में नवीन कुमार चौधरी, प्रभारन पी. और अश्विन अनिल गुमस्ते शामिल हैं.

निगरानीकर्ता पैनल की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रवींद्रन ने की. तकनीकी पैनल की जांच की निगरानी में उनकी सहायता भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी आलोक जोशी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ संदीप ओबराय ने की.

शीर्ष न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि जांच समिति को इस बारे में पड़ताल करने की शक्तियां प्राप्त होंगी कि केंद्र ने पेगासस के स्पाइवेयर के जरिये भारतीय नागरिकों के व्हाट्सऐप अकाउंट हैक किये जाने के बारे में 2019 में खबरें प्रकाशित होने के बाद क्या कदम उठाये या क्या कार्रवाई की.

साथ ही, क्या केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी सरकारी एजेंसी ने भारत के नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए पेगासस के स्पाइवेयर को हासिल किया था.

उल्लेखनीय है कि एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संघ ने दावा किया था कि पेगासस स्पाइवेयर के जरिये कथित जासूसी के संभावित लक्ष्यों की सूची में 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल फोन नंबर शामिल थे.

Uttar Pradesh: तीन मंजिला बिल्डिंग में लगी भीषण आग, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, शादी में शामिल होने आए थे मुरादाबाद

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद (Moradabad) में आज गुरुवार को तीन मंजिला इमारत में आग लग गई. इसमें एक ही परिवार के पांच लोगों ने जान गंवा दी. इसके अलावा सात लोग जख्मी हुए हैं. मुरादाबाद के डीएम शैलेंद्र सिंह ने बताया कि 3 मंजिला इमारत में एक ही परिवार के लोग रहते थे. इस अग्निकांड में 5 लोगों की मृत्यु हुई है और 7 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है. आग लगने के कारण की जांच की जा रही है.

आगजनी के पीड़ित परिवार को जिला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. वहां इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने बताया था कि वहां दो बच्चे और दो वयस्कों को मृत हालत में लाया गया था. उनकी आग में जलने की वजह से मौत हुई थी. बाकियों का इलाज चल रहा है.

पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया, ‘नाफिया 7, इबाद 3 वर्ष, शमा परवीन 35 वर्ष, क़मर आरा 65 वर्ष, उमेमा 12 वर्ष की मौत हुई है, जबकि सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.’ मौके पर डीएम और एसएसपी मौजूद हैं.

टायर कारोबारी इरशाद कुरैशी के मकान के नीचे बने गौदाम में आग लग गई. फिलहाल 5 फायर ब्रिगेड की टीम ने आग बुझा दी है. ये घटना थाना गलशहीद इलाके के लंगड़े की पुलिया की है. बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के रानीखेत से दो भतीजी की शादी में सरकारी स्कूल टीचर शमा परवीन आई थी. वह मां क़मर आरा के घर रुकी थी. शमा परवीन के 3 बच्चों की भी हुई आग में जलने से मौत हो गई.

“रिसर्च और इनोवेशन को जीने का तरीका बनाना होगा”…, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छात्रों को सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुरुवार को कहा कि ‘रिसर्च और इनोवेशन’ को जीने का तरीका बनाना होगा. प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्ष के ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन'(Smart India Hackathon)  के फाइनल में भाग लेने वाले छात्रों को गुरुवार रात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि समाज में नवाचार और उद्यम को अब और अधिक स्वीकृति मिल रही है. उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, डिजिटल, कृषि, शिक्षा, रक्षा क्षेत्रों में क्रांति हो रहीं हैं और नवोन्मेषकों के लिए नये अवसर उभर रहे हैं.

स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के अपने संबोधन के दौरान ‘जय अनुसंधान’ का जिक्र करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के प्रतिभागी इसके ध्वजवाहक हैं. मोदी ने ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन’ को जन भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण करार दिया. हैकाथॉन एक राष्ट्रव्यापी पहल है जिसके तहत लोगों के दैनिक जीवन में पेश आ रही समस्याओं का समाधान तलाशने के लिये छात्रों को मंच प्रदान किया जाता है और इसके माध्यम से नवाचार की संस्कृति का पोषण किया जाता है.

इस पहल का उद्देश्य छात्रों के बीच उत्पाद संबंधी नवाचार, समस्या-समाधान और लीक से हटकर सोचने की संस्कृति विकसित करना है. शिक्षा मंत्रालय स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन का सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर संस्करण 15 हजार से अधिक छात्रों के लिये आयोजित कर रहा है. ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन हार्डवेयर ग्रैंड फिनाले’ 25 से 29 अगस्त तक निर्धारित है जबकि साफ्टवेयर संस्करण 25 से 26 अगस्त तक आयोजित होगा.