Home Blog Page 99

महाराष्ट्र : उच्च न्यायालय ने शवों के अंतिम संस्कार पर महाराष्ट्र सरकार, बीएमसी से जवाब मांगा

बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि Covid-19 से जान गंवाने वालों के शव घंटों तक नहीं रखे जा सकते और इसके साथ उसने महाराष्ट्र सरकार तथा बीएमसी से राज्य तथा मुंबई में श्मशानों की स्थिति के बारे में अदात को अवगत कराने का निर्देश दिया.

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि कई श्मशानों में शव के अंतिम संस्कार के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है और पीड़ितों के रिश्तेदारों को श्मशान के बाहर कतार में लगे रहना पड़ता है.

अदालत ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र सरकार और अन्य नगर निकायों को इस मुद्दे के समाधान के लिए कुछ ठोस व्यवस्था तैयार करनी चाहिए. घंटों तक शव नहीं रखे जा सकते.’’

अदालत ने कहा कि अगर श्मशान में कतार लगी हुई है तो अस्पतालों से शव नहीं छोड़े जाने चाहिए.

न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने महाराष्ट्र के बीड जिले की एक घटना का हवाला दिया जहां कोविड-19 संक्रमण के शिकार 22 लोगों के शव को एक ही एंबुलेंस से श्मशान में पहुंचाया गया.

अदालत कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी, ऑक्सीजन की आपूर्ति, बेड की किल्लत और अन्य मुद्दों के संबंध में निर्देश देने का अनुरोध किया गया.

एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सिमिल पुरोहित ने अदालत से कहा कि श्मशानों में टोकन वितरित किए जा रहे हैं.

अदालत ने केंद्र सरकार को भी महाराष्ट्र को रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति और आवंटन पर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.

अदालत ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार अवगत कराए कि रेमडेसिविर का कितना आवंटन हुआ. कोविड-19 के मामलों के हिसाब से महाराष्ट्र शीर्ष पर है.’’

पीठ ने उस घटना पर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा है जिसमें भाजपा के सांसद सुजय विखे पाटिल ने दिल्ली से रेमडेसिविर की शीशियां मंगायी और महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में इनका वितरण किया.

अदालत ने कहा, ‘‘सांसद ने दिल्ली से रेमडेसिविर की 10,000 शीशियां मंगायी और अहमदनगर में इसका वितरण किया। क्या यह निजी वितरण की तरह नहीं है ? यह कैसे संभव हुआ. दिल्ली में भी संकट है और वहां पर रेमडेसिविर की कमी है.’’

मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने कहा कि अगर भविष्य में अदालत को ऐसी जानकारी मिलती है कि किसी व्यक्ति ने कंपनी से इंजेक्शन लेकर निजी तौर पर उसका वितरण किया तो ‘‘हम कार्रवाई करेंगे.’’

रूसी वैक्सीन Sputnik-V की पहली खेप 1 मई को पहुंचेगी भारत, सालाना 85 करोड़ डोज़ तैयार करने का है प्लान

नई रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-V की पहली खेप 1 मई को भारत को मिलने जा रही है.रशियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड के प्रमुख किरील दिमित्रीव ने इस बात की जानकारी दी है. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि इस खेप में वैक्सीन के कितने डोज शामिल होंगे. ग़ौरतलब है कि सरकार ने 1 मई से 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन लगाने का फैसला किया है.

दिमित्रीव ने कहा ‘पहले डोज 1 मई को डिलीवर होंगे.’ उन्होंने संभावना जताई है कि रूस की तरफ से मिलने वाली इस सप्लाई से भारत में कोरोना से जंग में मदद मिलेगी. RDIF ने 5 बड़े भारतीय निर्माताओं से सालाना 85 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज तैयार करने का समझौता किया है. रूप विश्व स्तर पर स्पूतनिक 5 की मार्केटिंग कर रहा है. संभावना जताई जा रही है कि भारत में जल्द ही स्पूतनिक 5 का उत्पादन शुरू हो सकता है. शुरुात में 5 करोड़ डोज प्रतिमाह का अनुमान है, जिसे आने वाले समय में बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

फिलहाल भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर जारी है. ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के चरमराने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं. हालांकि, अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई देश भारत की मदद के लिए आगे आए हैं. इन देशों ने तत्काल भारत को मदद भेजने का फैसला किया है. वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारत में बिगड़े कोविड हालात पर चिंता जताई है. साथ ही डब्ल्युएचओ ने मदद और एक्सपर्ट्स भेजने की बात कही है.

दुनिया की पहली आर्टिफिशियल सैटेलाइट की तरह ही रूस ने वैक्सीन का नाम स्पूतनिक 5 रखा है. यह एडीनोवायरस आधारित वैक्सीन है, जिसका इस्तेमाल मॉस्को में बड़े स्तर पर टीकाकरण के लिए किया जा रहा है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतन ने कहा है कि उनकी एक बेटी इस वैक्सीन के दोनों डोज लगवा चुकी है. साथ ही इस वैक्सीन को 59 दशों में अनुमति मिल चुकी है. फिलहाल भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में तैयार हुई ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की अनुमति मिली है.

अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन कोरोना पॉजिटिव, एम्स में भर्ती

अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन कोरोना की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद उसे तिहाड़ जेल से एम्स में भर्ती कराया गया है. जहाँ उसकी हालत स्थिर बनी हुई है.

गौरतलब रहे 2015 में इंडोनेशिया के बाली से राजन का प्रत्यर्पण किया गया था. उसके बाद हुई अपनी गिरफ्तारी के वक्त से ही वो दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है. मुंबई में उसके खिलाफ दर्ज सभी मामले सीबीआई को ट्रांसफर कर दिए गए हैं और उस पर मुकदमा चलाने के लिए विशेष अदालत गठित की गई है.

सूत्रों की मानें तो तिहाड़ जेल में बंदियों के एक के बाद एक कोरोना पॉजिटिव के कई केस सामने आए हैं. जेएनयू का पूर्व छत्र उमर खालिद के भी कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आ रही है.

दूसरी ओर जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद बिहार के पूर्व सांसद मौहम्मद शहाबुद्दीन भी कोरोना पॉजिटिव हो गया है. शुरु में जेल के अस्पताल में उसका इलाज किया गया, लेकिन तबियत ज्यादा बिगड़ने पर दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

हालांकि तिहाड़ जेल प्रशासन ने कोरोना पॉजिटिव होने वाले बंदियों के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया है. बावजूद इसके दूसरे बंदियों में भी केस पाए जा रहे हैं. इस तरह के केस ने प्रशासन को डरा दिया है. सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों के लिए पैदा हो गया है जो जेल की सुरक्षा में लगे हुए हैं.

Rafael Nadal ने जीता बार्सिलोना ओपन, खिताबी भिड़ंत में Tsitsipas को दी शिकस्त

टेनिस में विश्व रैंकिंग में दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी स्पेन के राफेल नडाल ने वर्ल्ड नंबर 5 मिस्र के स्टेफानोस सितसिपास को 6-4, 6-7, 7-5 से हराकर करियर में 12वीं बार बार्सिलोना ओपन का खिताब जीत लिया. समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार नडाल ने इल्या इवाश्का, केई निशिकोरी, कैमरन नॉरी और पाब्लो कैरेनो बुस्टा अगुट को हराकर फाइनल में एंट्री की, जहां उन्होंने सितसिपास को मात देकर खिताब अपने नाम किया.

नडाल ने इससे पहले, 2018 में भी बार्सिलोना ओपन के फाइनल में सितसिपास को मात देकर यह खिताब जीता था. नडाल ने जीत के बाद कहा, ‘इस खिताब का मेरे लिए काफी महत्व है. एक साल बाद घरेलू दर्शकों के सामने खेलना सुखद एहसास है. स्टेफानोस एक अविश्वसनीय प्रतिद्वंद्वी है. वह इस साल के नंबर 1 हैं और मुझे पता था कि फाइनल बेहद कठिन होगा. उनके पास सब कुछ है, और मेरे लिए यह जीत बहुत महत्वपूर्ण है.’

20 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता नडाल के करियर का यह 87वां खिताब है. पिछले साल फ्रेंच ओपन खिताब जीतने के बाद से उनका यह पहला खिताब है. एटीपी 500 टूर्नामेंट खिताब जीतने के बाद नडाल एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 12 या उससे ज्यादा बार एक ही टूर्नामेंट को जीता है. उन्होंने 12 बार रोलां गैरों खिताब भी अपने नाम किया है.

नडाल का बार्सिलोना ओपन के सेमीफाइनल और फाइनल में अब 24-1 का रिकॉर्ड हो गया है. वह अब तक केवल एक ही बार 2019 में डोमिनीक थिएम से हारे हैं. नडाल ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ट्रॉफी के साथ तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें वह मास्क पहने  और हाथों में ट्रॉफी उठाए दिख रहे हैं.

Thailand : मास्क ना पहनने पर थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुथ चान ओचा (Prayuth Chan Ocha) पर लगा जुर्माना

थाइलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुथ चान ओचा (Prayuth Chan Ocha) पर मास्क न पहनने को लेकर 190 डॉलर तक़रीबन 14 हजार रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है.

दरअसल थाइलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुथ चान ओचा ने फेसबुक पेज पर अपनी फोटो पोस्ट की थीं, जिसमें वह एक मीटिंग में बिना मास्क के नज़र आ रहे थे.जिसके बाद उनपर जुर्माना लगाया गया.

आपको बता दें कि थाइलैंड में कोरोना की रफ्तार पर नकेल कसने के लिए सरकार ने लोगों पर बड़ा जुर्माना लगाने का फैसला किया है. जिसके चलते थाइलैंड के सभी 48 प्रांतों में मास्क न लगाने वालों से 640 डॉलर (करीब 47 हजार रुपये से अधिक) का जुर्माना वसूला जाएगा.

दुनिया के अन्य देशों की तरह थाईलैंड में भी कोरोना की नई लहर देखी जा रही है. ऐसे में सम्भावित ख़तरे को टालने के लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं.

घबराने की जरूरत नहीं, भारत में ऑक्सीजन का पर्याप्त भंडार: गृह मंत्रालय

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश में मेडिकल ऑक्सीजन का पर्याप्त भंडार है, लेकिन भारी मांग वाले क्षेत्रों में इनकी आपूर्ति करने का मुद्दा है जिसका समाधान करने का प्रयास किया जा हरा है.

मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना के परिवहन विमान की मदद से ऑक्सीजन लाने वाले टैंकरों के गंतव्य स्थल तक पहुंचने के समय को चार-पांच दिन से घटाकर एक-दो घंटे कर दिया गया है.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारे पास ऑक्सीजन का पर्याप्त भंडार है। मुद्दा ढुलाई का है जिसका समाधान करने का प्रयास हम कर रहे हैं.’’देश में ऑक्सीजन की बढ़ती मांग के बीच गोयल ने कहा, ‘‘ऑक्सीजन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम उत्पादक राज्यों से भारी मांग वाले इलाकों में ऑक्सीजन की ढुलाई करने के मुद्दे को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं.’’

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार जीपीएस के माध्यम से ऑक्सीजन लाने वाले टैंकरों को लाने-ले जाने की स्थिति पर नजर बनाए हुए है तथा अस्पतालों को कम से कम समय में ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जा रहा है.

गत शुक्रवार से गृह मंत्रालय देश में विभिन्न हिस्सों में मौजूद ऑक्सीजन भरने के स्टेशनों तक खाली टैंकरों एवं कंटेनरों को ले जाने के लिए प्रयासों में समन्वय कर रहा है ताकि जरूरतमंद कोरोना मरीजों तक ऑक्सीजन जल्द से जल्द पहुंचाई जा सके.

देश में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति गंभीर बनी हुई है. पिछले 24 घंटे में Covid-19 के 3,52,991 नए मामले आने के बाद सोमवार को संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,73,13,163 हो गई और संक्रमण से 2,812 लोगों की मौत होने से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 1,95,123 हो गया.

Corona Vaccination : 1 मई से CoWin या Aarogya Setu एप पर रजिस्‍ट्रेशन कराने पर ही लगेगी कोरोना वैक्‍सीन

देश में 1 मई से केंद्र सरकार की ओर से टीकाकरण अभियान का तीसरा चरण शुरू होने वाला है. इस चरण में देश के 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को कोरोना वैक्‍सीन लगाई जाएगी.

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्‍यों को पत्र लिखकर इसके संबंध में जानकारी दी है. सरकार की ओर से कहा गया है कि 18 से 45 साल की उम्र के लोगों के लिए कोविन वेब पोर्टल (CoWin) पर पंजीकरण कराना और टीकाकरण के लिए समय लेना अनिवार्य होगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि शुरुआत में टीकाकरण केन्द्र पर पंजीकरण कराने की अनुमति नहीं है. आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि हालांकि 45 से अधिक आयु के लोग टीकाकरण केन्द्र पर पंजीकरण कराकर टीका लगवा सकते हैं. गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में अचानक भारी वृद्धि होने के मद्देजनजर 18 वर्ष के अधिक आयु के सभी लोगों को एक मई से टीका लगाने का निर्णय लिया गया है.

एक अधिकारी ने कहा, ”सभी को टीके लगाने की शुरुआत होने के बाद टीकों की मांग में वृद्धि होने का अनुमान है. भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 18 से 45 साल की आयु के लोगों के लिए कोविन ऐप पर पंजीकरण कराना और टीका लगवाने के लिये समय लेना अनिवार्य किया गया है. प्रारंभ में टीकाकरण केन्द्रों पर पंजीकरण कराने की अनुमति इसलिए नहीं होगी ताकि गहमागहमी न हो.”

टीका लगवाने के इच्छुक 18 से 45 साल की आयु के लोगों के लिए 28 अप्रैल से कोविन पोर्टल और आरोग्य सेतू ऐप पर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. टीकाकरण की प्रक्रिया और टीका लगवाने के लिए पेश किए जाने वाले दस्तावेज वही रहेंगे.

फिलहाल निजी कोविड-19 टीकाकरण केन्द्र सरकार से टीकों की खुराकें लेकर 250 रुपये प्रति खुराक के हिसाब से लोगों को दे रहे हैं. एक मई से यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी और निजी अस्पतालों को सीधे टीका निर्माताओं से खुराकें खरीदनी होंगी. राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण रणनीति के अनुसार सरकारी टीकाकरण केन्द्रों में स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों और 45 साल से अधिक आयु के लोगों को केन्द्र सरकार की ओर से निशुल्क टीके लगाए जाते रहेंगे.

COVID-19 मरीजों का इलाज कर रहे बगदाद के अस्पताल में लगी आग, 23 की मौत

कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज कर रहे बगदाद के एक अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से आग लगने के कारण शनिवार देर रात 23 लोगों के मारे जाने की सूचना है.

अधिकारियों ने बताया कि दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की और इब्न अल-खातिब अस्पताल से मरीजों को बाहर निकाला. इस अस्पताल के आईसीयू में Covid-19 के गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा था.

घटनास्थल पर मौजूद डॉ. सबा अल-कुजै ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि कितने लोग मारे गए हैं, अस्पताल में कई जगह जले हुए शव हैं.’’

चिकित्सा और सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार 23 लोगों के मारे जाने के अलावा कम से कम 36 लोग घायल हैं. ईराकी अधिकारियों ने हताहतों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है.

अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि आग लगने के वक्त अस्पताल में कम से कम 120 मरीज मौजूद थे.

ऐसा बताया जा रहा है कि आग अस्पताल में कम से कम एक ऑक्सीजन सिलेंडर के फटने से लगी. ईराक में Covid-19 के रोज 8,000 से अधिक नए मामले आ रहे हैं. सरकार लोगों से टीका लगवाने का अनुरोध कर रही है, लेकिन देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और टीकों पर भरोसा न होने के कारण लोग आगे नहीं आ रहे हैं.

आगरा : पति को मुंह से सांस देती रही महिला, फिर भी नहीं बचाई जा सकी जान

सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहे अपने पति को लेकर तीन-चार अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद रेणू सिंघल एक ऑटो रिक्शा से एक सरकारी अस्पताल पहुंची और उन्होंने अपने पति को मुंह से भी सांस देने की कोशिश की लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शहर के आवास विकास सेक्टर सात की रहने वाली रेणू सिंघल अपने पति रवि सिंघल को सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) एंड हॉस्पिटल लेकर आयी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उसके पति को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और उसे बचाने की जुगत में रेणू ने उसे अपने मुंह से भी सांस देने की कोशिश की. रेणू को एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं हो पाई. एसएनएमसी के डॉक्टरों ने रवि को मृत घोषित कर दिया.

इससे पहले तीन-चार निजी अस्पतालों ने रेणू के पति को भर्ती करने से इनकार कर दिया. अस्पतालों में भर्ती करने से इनकार करने की घटनाएं शहर में आम हो गई है. आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरसी पांडे ने कहा कि जिले में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी है. उन्होंने कहा, ‘‘हम उपलब्धता के अनुसार व्यवस्था कर रहे हैं.’’

बहरहाल उन्होंने दावा किया कि आगरा के अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए बिस्तर उपलब्ध हैं.

कई लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें एक बिस्तर की तलाश में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर काटते हुए घंटों तक इंतजार करने के लिए मजबूर किया गया.

शनिवार को एक निवासी ने शिकायत की कि उसकी सास को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया गया जिससे उनकी मौत हो गई.

गढ़ी भदौरिया की 52 वर्षीय मरीज मीरा देवी की एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध न होने के कारण मौत हो गई। वह कोरोना वायरस से संक्रमित थीं और उनका आगरा के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था.

उनके बेटे महेंद्र पाल सिंह ने कहा, ‘‘तीन से पांच निजी अस्पतालों ने मेरी मां को भर्ती करने से इनकार कर दिया और उन्हें सरकारी अस्पतालों में भी भर्ती नहीं किया गया. किसी तरह उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां वेंटिलेटर न होने के कारण उनकी मौत हो गई.’’

(Source : Bhasha)