Home Blog Page 179

Covid-19: UN रिपोर्ट में खुलासा, साल 2021 तक 4.7 करोड़ महिलाएं अत्यधिक गरीबी की कगार पर पहुंच जाएंगी

कोविड-19 वैश्विक महामारी महिलाओं को बहुत ज्यादा प्रभावित करेगी और 2021 तक 4.7 करोड़ और महिलाओं एवं लड़कियों को अत्यधिक गरीबी की तरफ धकेल देगी. संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी नये डेटा में यह कहा गया है जिसके मुताबिक इस जनसांख्यिकी को गरीबी रेखा से ऊपर लाने के लिए दशकों में हुई प्रगति फिर पीछे की ओर चली जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र महिला एवं संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के इस नये आकलन में कहा गया कि कोविड-19 संकट महिलाओं के लिए गरीबी दर को बढ़ा देगा और गरीबी में रहने वाली महिलाओं एवं पुरुषों के बीच का अंतर बढ़ जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा, “वैश्विक महामारी 2021 तक 9.6 करोड़ लोगों को अत्यंत गरीबी की ओर धकेल देगी जिनमें से 4.7 करोड़ महिलाएं एवं लड़कियां होंगी. यह संकट बेहद गरीबी में रहने वाली कुल महिलाओं की संख्या को बढ़ाकर 43.5 करोड़ कर देगा जहां अनुमान दिखाते हैं कि 2030 तक यह संख्या वैश्विक महामारी से पहले के स्तर तक नहीं लौट पाएगी.”
अनुमान दिखाते हैं कि वैश्विक महामारी सामान्य तौर पर समूची वैश्विक गरीबी को प्रभावित करेगी लेकिन महिलाएं अत्यधिक प्रभावित होंगी और इनमें खासकर प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएं और भी प्रभावित होंगी. 2021 तक बेहद गरीबी में रह रहे 25 से 34 साल के 100 पुरुषों पर 118 महिलाएं होंगी. यह अंतर 2030 तक प्रति 100 पुरुष पर 121 महिलाएं हो जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र महिला (यूएन वीमन) संस्था की कार्यकारी निदेशक फुमजाइल म्लाम्बो नगकुका ने कहा, “महिलाओं की अत्यंत गरीबी में यह बढ़ोतरी, हमारे समाजों एवं अर्थव्यवस्थाओं को हमने जिन तरीकों से बनाया है उनमें गहरी खामियों को दिखाता है.”

COVD-19 : कोरोना वायरस के एक दिन में 11 लाख से ज्यादा टेस्ट, अबतक 4.55 करोड़ हुए टेस्ट

कोरोना का पता लगाने के लिए देश में अब तक कुल 4 करोड़ 55 लाख 09 हजार 380 टेस्ट किए जा चुके हैं. कल बुधवार को एक दिन में रिकॉर्ड 11 लाख 72 हजार 179 टेस्ट किए गए. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अधिकारियों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारत की प्रति दिन जांच करने की क्षमता 10 लाख के पार पहुंच गई है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, “भारत में जांच में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो रही है. पिछले 24 घंटों में 11,70,000 से अधिक जांचें की गईं. व्यापक क्षेत्रों में समय-समय पर निरंतर जांच का उच्च स्तर बनाए रखने से मामलों का जल्दी पता लगाने और संक्रिमतों को पृथक किए जाने और अस्पताल में भर्ती कराने में सुविधा होती है. इससे अंतत: मृत्यु दर घटती है.”

भारत में कोविड-19 के कारण मृत्यु दर और घटकर 1.75 प्रतिशत हो गई है जबकि देश में स्वस्थ होने वालों की दर बढ़कर 77.09 प्रतिशत हो गई है. देश में 8 लाख 15 हजार 538 लोग अब भी कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में हैं जो सभी मामलों का तकरीबन 21.16 प्रतिशत है.

मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक के डेटा के मुताबिक एक दिन में रिकॉर्ड 83,883 मामले मामले सामने आने के बाद बृहस्पतिवार को देश में कोविड-19 के कुल मामले बढ़कर 38,53,406 हो गए जबकि एक दिन में 1,043 लोगों की बीमारी से मौत होने के बाद मृतक संख्या 67,376 हो गई.

हिंसा और नफरत से जुड़ी नीतियों का उल्लंघन करने पर फेसबुक ने भाजपा नेता टी राजा सिंह पर लगाया बैन

घृणा भरे भाषणों से निपटने के तौर-तरीकों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही फेसबुक ने हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाली सामग्री से जुड़ी अपनी नीतियों का उल्लंघन करने के मामले में भाजपा नेता टी. राजा सिंह को अपने मंच और ‘इंस्टाग्राम’ पर प्रतिबंधित कर दिया है.

फेसबुक के एक प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए जारी किए एक मेल में कहा, ‘हमारी नीति हिंसा को बढ़ावा देने या हिंसा में संलग्न होने वालों की हमारे मंचों पर उपस्थिति प्रतिबंधित करने की रही है और इसका उल्लंघन करने पर हमने राजा सिंह को फेसबुक पर प्रतिबंधित कर दिया है.’

बयान के अनुसार संभावित उल्लंघनों का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया व्यापक है और इसके जरिए फेसबुक ने भाजपा नेता का अकाउंट हटाने का निर्णय किया.

गौरतलब है कि हाल ही में ‘बीबीसी’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’, ‘रॉयटर्स ’ और ‘टाइम मैगजीन’ ने खबरें प्रकाशित की थीं जिनमें दावा किया गया था कि फेसबुक की भारतीय इकाई के कुछ पदाधिकारियों ने भाजपा को फायदा पहुंचाया है. इसके बाद से फेसबुक सवालों के घेरे में है.

भारत में 30 करोड़ से अधिक लोग फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं.वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि फेसबुक के कर्मचारी चुनावों में लगातार हार का सामना करने वाले लोगों तथा प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को ‘गाली’ देने वालों का समर्थन कर रहे हैं.

भारत सरकार ने पबजी समेत 118 अन्य चीनी मोबाइल एप्स पर लगाया प्रतिबंध

सरकार ने लोकप्रिय गेमिंग एप पबजी सहित 118 अन्य मोबाइल ऐप पर बुधवार को प्रतिबंध लगा दिया. इन्हें संप्रभुता, अखंडता और रक्षा के लिए खतरनाक मानते हुए इन पर पाबंदी लगायी गयी है.

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रतिबंधित एप में बायदू, बायदू एक्सप्रेस एडिशन, टेनसेंट वॉचलिस्ट, फेसयू, वीचैट रीडिंग और टेनसेंट वेयुन के अलावा पबजी मोबाइल और पबजी मोबाइल लाइट शामिल हैं.सूत्रों ने बताया कि ये सभी प्रतिबंधित एप चीन से जुड़ी कंपनियों के हैं.सरकार ने इससे पहले टिकटॉक और यूसी ब्राउजर समेत चीन के कई अन्य एप पर प्रतिबंध लगाया था.

बयान में कहा गया, ‘सरकार ने 118 ऐसे एप पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और शांति-व्यवस्था के लिए खतरा हैं.’इसमें कहा गया कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय को विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं. इन शिकायतों में एंड्रॉयड व आईओएस जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ मोबाइल एप के उपयोक्ताओं (यूजरों) का डेटा चुराकर देश से बाहर के सर्वरों पर भंडारित किये जाने की रपटें भी शामिल हैं.

बयान में कहा गया, ‘इन सूचनाओं का संकलन, इनका विश्लेषण आदि ऐसे तत्व कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की रक्षा के लिये खतरा हैं. यह अंतत: भारत की संप्रभुता और अखंडता पर जोखिम उत्पन्न करता है. यह बेहद गंभीर मसला है, जिसके लिये त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता थी.’

Sushant Singh Rajput Case : पहली बार साथ नज़र आई सुशांत सिंह की तीनों बहनें, दिल्ली में वकील विकास से की मुलाकात

सुशांत सिंह राजपूत की तीनों बहनें प्रियंका सिंह, मीतू सिंह और रानी सिंह आज पहली बार एक साथ नज़र आई.  सुशांत की बहनें अपने वकील विकास सिंह मिलने के लिए दिल्ली पहुंची हैं.

दरअसल मीतू सिंह से एक दिन पहले ही सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती और सुशांत के रिश्ते को लेकर पूछा था. वहीं, प्रियंका सिंह से भी सीबीआई ने पूछताछ की थी. उन्होंने सीबीआई की पूछताछ में कबूल किया था कि उन्हें सुशांत की बीमारी के बारे में पता था. बताया जा रहा है कि सीबीआई सुशांत के पूरे परिवार से पूछताथ करेगी. इसलिए तीनों बहनें पहली बार साथ मिलकर विकास सिंह से मिलने के लिए दिल्ली पहुंची हैं.

बीते दिन सीबीआई ने मीतू सिंह से मुंबई में किसी अलग जगह पर पूछताछ की थी. लोग इसे लेकर भी सवाल उठा रहे थे. लेकिन ऐसा इसलिए हुआ, रिया चक्रवर्ती और उनका परिवार मुख्य आरोपी हैं, जबकि मीतू सिंह बतौर गवाह सीबीआई के सामने पेश हुई थीं. सीबीआई ने मीतू से सुशांत-रिया के रिश्ते से लेकर घटना के बाद क्या कुछ देखा और सुना उससे जुड़े हुए कई सवाल पूछे थे.

आपको बता दें कि मीतू सिंह मुंबई में ही रहती है इस वजह से ऐसा माना जा रहा है की सुशांत से जुड़ी हुई काफी अहम जानकारियां उनके पास मौजूद हो सकती है. यही वजह है कि सीबीआई ने सबसे पहले अपनी पूछताछ में परिवार की तरफ से मीतू सिंह को ही पेश होने को कहा. मीतू सिंह परिवार की वह सदस्य हैं जो घटना से पहले यानी सुशांत की मौत से पहले भी सुशांत के साथ थी और जब सुशांत की मौत हुई उसके बाद ही घर में पहुंचने वाली परिवार की पहली सदस्य थीं.

Bihar Assembly Election 2020 : बिना गठबंधन राज्य की सत्ता तक पहुंचना नामुमकिन – सुशील मोदी

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि आज कोई भी एक दल अपने बलबूते पर चुनाव जीतकर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है.’ उन्होंने कहा कि बिहार में गठबंधन की राजनीति एक ‘वास्तविकता’ है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इसके त्रिकोण हैं तथा इनमें से किसी को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि वह अपने बूते चुनाव जीतकर सरकार बना सकता है.

बिहार भाजपा के कद्दावर नेता मोदी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सामने राजद के नेतृत्व वाला विपक्षी महागठबंधन दूर-दूर तक नहीं टिकता और अगला विधानसभा चुनाव राजग के सभी घटक दल मिलकर लड़ेंगे और सफलता हासिल करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘भाजपा जदयू और राजद बिहार की राजनीति के त्रिकोण हैं और गठबंधन एक वास्तविकता है. इसे लेकर किसी को कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए. आज कोई भी एक दल अपने बलबूते पर चुनाव जीतकर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है.’

उन्होंने कहा कि 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा अलग चुनाव लड़कर देख चुकी है, जबकि 2014 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू लोकसभा का अलग चुनाव लड़कर देख चुका है.मोदी ने कहा, ‘भाजपा को अपनी ताकत के बारे में कोई गलतफहमी नहीं है. हम मजबूत हैं और हमारा संगठन भी है. लेकिन मिलजुलकर चुनाव लड़ेंगे तभी हम लोगों को सफलता मिलेगी. इसे लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में भी कहीं कोई भ्रम नहीं है.’

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बीच के दो-ढाई साल छोड़ दें तो बिहार के अंदर ये गठबंधन बहुत ही मजबूती के साथ 1996 से चल रहा है. एक बेहतर तालमेल के साथ इस गठबंधन ने बिहार में एक अच्छी सरकार दी है.ग़ौरतलब है कि इसी महीने बिहार विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा होने की संभावना है. बिहार चुनाव, कोरोना वायरस महामारी के दौरान होने वाले भारत के पहले विधानसभा चुनाव होंगे. मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को समाप्त हो रहा है.

राजग के घटक दलों जदयू और लोजपा के बीच चल रहे वाकयुद्ध और कुछ मुद्दों पर एक दूसरे की असहमतियों को उन्होंने क्षणिक करार दिया और उम्मीद जताई कि समय आने पर इसका भी समाधान हो जाएगा.उन्होंने कहा, ‘सभी दलों का नेतृत्व बहुत परिपक्व और समझदार है. इसलिए सब ठीक हो जाएगा. लोजपा जदयू और भाजपा के गठबंधन में कोई दरार नहीं आएगी. मिलजुलकर चुनाव लड़ेंगे.’

कोरोना महामारी के दौरान राज्य सरकार के प्रबंधन और प्रवासी मजदूरों को लेकर राज्य सरकार के रवैये पर उठे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘कोई नाराजगी नहीं है. प्रारंभ में किसको मालूम था कि कितने मजदूर आएंगे. लॉकडाउन लगेगा ये किसी को मालूम था क्या? शुरूआती दिनों में जरूर कुछ अव्यवस्थाएं रहीं, लेकिन 10 दिनों में सब कुछ नियंत्रित कर लिया गया.’

गठबंधन में भाजपा कब नेतृत्व की भूमिका में आएगी, इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने प्रतिप्रश्न करते हुए कहा कि भाजपा ने बिहार की राजनीति में आज जो जगह बनाई है, वह कम थोड़े ही है. साथ ही उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री कौन बनेगा यह पार्टी ने तय कर दिया है. पहले से ही नीतीश जी मुख्यमंत्री हैं. बार-बार कोई मुख्यमंत्री थोड़े ही बदला जाता है. नीतीश जी को लेकर कोई किन्तु-परन्तु नहीं है. हम उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे. भाजपा न सिर्फ अपने उम्मीदवारों को बल्कि सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को भी जिताने में जी जान से काम करेगी.’

राजद, कांग्रेस और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) सहित कुछ अन्य दलों के विपक्षी ‘महागठबंधन’ को मोदी ने आगामी विधानसभा चुनाव में ‘‘कोई बड़ी चुनौती’’ मानने से इनकार किया.

उन्होंने कहा, ‘विपक्ष का गठबंधन हमारे गठबंधन के सामने कहीं भी दूर-दूर तक नहीं टिकता है.’उन्होंने कहा, ‘उनकी न विश्वसनीयता है, न कोई नेतृत्व है न ही नेतृत्व की कोई विश्वसनीयता है. न पारदर्शिता है. पूरा नेतृत्व भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है.’

तेजस्वी पर तंज कसते हुए मोदी ने कहा, ‘ट्वीटर और फेसबुक पर बयान देने से केवल कोई नेता नहीं हो जाता. महागठबंधन से हमारा मुकाबला कोई पहली बार नहीं हो रहा है. इस महागठबंधन से हमलोगों ने पिछले पांच चुनाव लड़े हैं और हर बार इनको पराजित करने का काम किया है.’

उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव परिणामों को देखा जाए तो दोनों गठबंधनों के मतों में कम से कम 12 से 13 प्रतिशत का अंतर है. पिछले लोकसभा चुनाव में तो यह अंतर 23 प्रतिशत तक पहुंच गया. जब 2010 में भाजपा और जदयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था तो उस समय भी 14 प्रतिशत मतों का अंतर था.उन्होंने कहा, ‘कई राज्यों में तो एक प्रतिशत से हार जीत का फैसला होता है. हमारा तो इतना बड़ा अंतर है.’

मोदी 2005 से लेकर जून 2013 तक बिहार सरकार में उप मुख्‍यमंत्री-सह वित्त मंत्री रहे. साल 2017 में जब जदयू-राजद गठबंधन की सरकार गिरी तब मोदी फिर से बिहार के उपमुख्यमंत्री बने.लंबे समय से नीतीश के सहयोगी के रूप में काम कर रहे मोदी ने इस बात से इंकार किया कि बिहार की जनता में मुख्यमंत्री को लेकर कोई ऊब जैसी स्थिति है.

मोदी ने बिहार के सर्वांगीण विकास के लिए 15 सालों के राजग शासन को नाकाफी बताया और कहा कि 2005 में जब जदयू-भाजपा गठबंधन सत्ता में आया उस वक्त यदि बिजली, सड़क और पानी जैसी आधारभूत संरचनाएं मिल जाती तो ‘आज हम बिहार को कहां से कहां पहुंचा देते’.उन्होंने आरोप लगाया कि 40 साल बिहार में कांग्रेस ने राज किया, 15 साल कांग्रेस और राजद ने मिलकर राज किया लेकिन कोई काम नहीं किया. बिहार के 55 साल इन लोगों ने ‘बर्बाद’ कर दिए.

मोदी ने दावा कि पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में जो वादे किए थे उसका लगभग 80 फीसद पूरा कर दिया है.उन्होंने कहा, ‘चाहे बिजली, पानी और सड़क का मुद्दा हो या कृषि का क्षेत्र, हम लोगों ने अभूतपूर्व काम किया है. केवल घोषणा नहीं. 80 फीसद काम हमने पूरा कर लिया बाकी भी काम चल रहा है.’उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि यदि उसमें हिम्मत है तो वह बिजली, पानी व सड़क को चुनावी मुद्दा बनाए.उन्होंने कहा कि देश के हर राज्य के चुनाव में बिजली, पानी व सड़क एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहता है. आज बिहार के अंदर एक भी घर नहीं बचा है, जहां बिजली नहीं पहुंची है. पूरे बिहार में सड़कों का जाल बिछा दिया गया है. यहां तक कि देश का पहला राज्य होगा बिहार जहां सौ से अधिक की आबादी वाले हर टोले को बारहमासी सड़क से जोड़ा जा रहा है.

गौरतलब है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जदयू राजग से बाहर हो गया. इसके बाद 2015 के विधानसभा चुनाव में उसने राजद के साथ विधानसभा चुनाव लड़ा. इस चुनाव में भाजपा 53 सीटें ही जीत सकी थी. तब राजद 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. जदयू को 71 सीटें मिली थीं.

नीतीश कुमार एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने और लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री. हालांकि यह सरकार लंबे समय तक नहीं चल सकी. जदयू फिर राजग के साथ आ गया. नीतीश मुख्यमंत्री बने और मोदी उपमुख्यमंत्री. लिहाजा भाजपा और जदयू जहां पिछले चुनाव में आमने- सामने थे, इस बार मिलकर वे महागठबंधन को चुनौती देंगे.

कोरोनावायरस महामारी बना किसानों के लिए मुसीबत, बढ़ सकती है भुखमरी

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक कोरोनावायरस महामारी कई किसानों के लिए मुश्किल समय लेकर आई है और इससे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का संकट पैदा हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ मंगलवार को शुरू हो रहे ऑनलाइन कांफ्रेंस में इसी मुद्दे पर मंथन करेंगे. वे भुखमरी के उन्मूलन और एशिया-प्रंशात क्षेत्र में स्थिति को बिगड़ने से रोकने के तरीकों पर चर्चा करेंगे. यह चुनौती महामारी और लाखों नौकरियां खत्म होने से दोगुनी हो गई है.

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने पूर्वानुमान लगाया कि इस साल कोरोना वायरस की महामारी की वजह से दुनिया भर में कुपोषित लोगों की संख्या में 13.2 करोड़ की वृद्धि होगी जबकि अत्यंत कुपोषित बच्चों की संख्या में भी 67 लाख की वृद्धि होगी.

फएओ के महानिदेशक क्यू दोंगयू ने डिजिटल बैठक से पहले टिप्पणी की, ‘हम दो महामारी का सामना कर रहे हैं.

कोविड-19 स्वास्थ्य के नुकसान से परे जीविकोपार्जन को कुचल रही है और भूख को बढ़ा रही है जो इस दशक के अंत तक भुखमरी को खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय समुदाय के संकल्प पर कुठाघात है.’

बैठक से पहले तैयार रिपोर्ट में एफएओ ने कहा कि महामारी, कारोना और यात्रा पर रोक की वजह से फसलों की कटाई नहीं हो सकी क्योंकि असहाय प्रवासी मजदूर अपने काम पर नहीं जा सके, कृषक परिवार द्वारा पशुधन बेचने और उपकरणों को लाने के लिए परिवहन आदि की व्यवस्था करने में व्यवधान उत्पन्न हुआ.

बिहार : पूर्व नगर आयुक्त अनुपम कुमार सुमन ने दी सफ़ाई, राजधानी में जलजमाव के लिए मुख्यमंत्री को ठहराया ज़िम्मेदार 

पटना में जलजमाव के एक वर्ष बाद पूर्व नगर आयुक्त अनुपम कुमार सुमन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि साल 2019 में जब पटना जलजमाव की स्थिति थी उस समय मैं पटना नगर निगम में आयुक्त के पद पर नहीं था और सरकार ने जो आरोप लगाए हैं वह अतार्किक, भ्रामक और बेबुनियाद हैं.

अनुपम कुमार सुमन ने कहा कि मेरी प्रतिनियुक्ति 22 अगस्त 2019 को खत्म हो गई थी और पटना में जलजमाव की स्थिति सितंबर के अंतिम सप्ताह आई, जब मैं उस समय पद पर था ही नहीं तो मैं किस प्रकार इसके लिए जिम्मेदार हूँ. और जब अगले पांच-सात दिनों में जब पानी निकाला गया तो नाला सफाई कार्य में पर्यवेक्षण का अभाव कैसे माना जा सकता है”

साथ ही उन्होंने कहा कि मुझपर संवादहीनता का आरोप लगाया जाता रहा है परंतु यह आरोप सही नहीं है. सरकार में संवाद का सबसे बेहतर तरीका पत्राचार होता है. मंत्रीजी द्वारा उनका मौखिक आदेश को न मानना किस तरह की संवादहीनता की श्रेणी में आता है यह मेरे समझ से परे है.

अनुपम कुमार सुमन के मुताबिक़ पटना शहर में जल-जमाव के लिए गठित उच्चस्तरीय जाँच समिति की गठित की गई थी. जिसमें सरकार ने आरोप लगाते हुए कहा है कि अनुपम सुमन और विभिन्न साझेदारों के बीच संवादहीनता की स्थिति थी, नाला सफाई कार्य में पर्यवेक्षण का अभाव था, पटना नगर निगम क्षेत्र में जल निकासी का मूल दायित्व पटना नगर निगम का होते हुए भी जल निकासी के लिए उन्होंने बुडको से समुचित समन्वय स्थापित नहीं किया और उनके द्वारा मानसून पूर्व अग्रिम तैयारी नहीं की गई थी.

आपको बता दें कि अनुपम कुमार सुमन भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी थे जो प्रतिनियुक्ति पर बिहार आए थे, इन्होंने पूर्व विशेष सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय के तौर पर भी सेवा दी है.

JEE Mains NEET और NDA Exam : बिहार में अभ्यर्थियों के लिए रेलवे चलाएगी विशेष रेलगाड़ियां, रेल मंत्री ने ट्वीट कर दी जानकारी

रेलवे ने नीट और जेईई के अभ्यर्थियों को परीक्षा वाले दिन मुंबई में विशेष उपनगरीय सेवाओं का लाभ उठाने की अनुमति देने के एक दिन बाद बिहार में इन परीक्षाओं में शामिल होने वालों की सुविधा के लिए दो से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला किया.

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह सुविधा नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को भी दी जाएगी.

मंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘भारतीय रेलवे ने बिहार में जेईई मेन्स, नीट और एनडीए में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए दो से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी एमईएमयू/डीईएमयू स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है.’’

आपको बता दें कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 13 सितम्बर को जबकि इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन एक से छह सितम्बर तक आयोजित करने की योजना बनायी गई है. कॉमन एनडीए 2020 परीक्षा छह सितम्बर को निर्धारित है.

राहुल का मोदी सरकार पर वार, कहा- अर्थव्यवस्था की बर्बादी नोटबंदी से शुरू हुई थी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीडीपी विकास दर में भारी गिरावट को लेकर मंगलवार को सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि अर्थव्यवस्था की बर्बादी नोटबंदी से शुरू हुई थी और उसके बाद से एक के बाद एक गलत नीतियां अपनाई गईं.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ जीडीपी -23.9 प्रतिशत हो गई. देश की अर्थव्यवस्था की बर्बादी नोटबंदी से शुरू हुई थी. तब से सरकार ने एक के बाद एक ग़लत नीतियों की लाइन लगा दी.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने आरोप लगाया कि सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था डुबो दी. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘आज से 6 महीने पहले राहुल गांधी जी ने आर्थिक सुनामी आने की बात बोली थी. कोरोना संकट के दौरान हाथी के दांत दिखाने जैसा एक पैकेज घोषित हुआ. लेकिन आज हालत देखिए. जीडीपी -23.9 प्रतिशत तक गिर गई. BJP सरकार ने अर्थव्यवस्था को डुबा दिया.’’

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘मोदी जी, अब तो मान लीजिए कि जिसे आपने “मास्टरस्ट्रोक” कहा, वास्तव में वो “डिजास्टर स्ट्रोक” थे! नोटबंदी, ग़लत जीएसटी, और देशबंदी (तालाबंदी).’’

गौरतलब है कि कोविड-19 संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष 2020-21 की अप्रैल-जून तिमाही में 23.9 प्रतिशत की भारी गिरावट आयी है.

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े सोमवार को जारी किए. इन आंकड़ों में जीडीपी में भारी गिरावट दिखी है. सकल घरेलू उत्पाद में पिछले वर्ष 2019-20 की इसी तिमाही में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.