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सीएम योगी ने भूमि पूजन से पहले अयोध्या में लिया तैयारियों का जायजा, बोले- 500 सालों बाद यह एतिहासिक क्षण आया है

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अयोध्या का दौरा कर वहां पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया. अयोध्या में भूमि पूजन से पहले ने मुख्यमंत्री ने कहा कि 500 सालों बाद यह एतिहासिक क्षण आया है.

इसके अलावा उन्होंने सभी से अपील करते हुये कहा कि इस एतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिये चार और पांच अगस्त को अपने घर में मिट्टी के दीये जलाएं. यही नहीं उन्होंने कहा साधू-संत मंदिरों को सजाएं, दीपोत्सव के आयोजन के साथ अखंड रामायण का पाठ करें. उन्होंने कहा कि उन लोगों को जरूर याद करें जिन्होंने राम मंदिर के लिये स्वयं का बलिदान कर दिया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर के साथ हनुमानगढ़ी का भी निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि पांच अगस्त का दिन हमारे लिए काफी गौरवशाली व एतिहासिक है. इसके महत्व को समझते हुए, यहां अयोध्या में कार्यों का निरिक्षण करने के लिए मैं स्वयं आया हूं. अयोध्या के साथ-साथ देश और दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा जब प्रधानमंत्री मोदी जी अयोध्या में लगभग 500 वर्षों की इस परीक्षा के परिणाम के साथ भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखेंगे.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने यहां बताया कि मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से आयोजन स्थल पर तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली. मुख्यमंत्री को रविवार को अयोध्या जाना था लेकिन उप्र की कैबिनेट मंत्री कमला रानी वरूण के निधन के कारण उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया था.

Afghanistan : इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों का जेल पर हमला, 21 की मौत

पूर्वी अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत की एक जेल पर आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट का हमला सोमवार को भी जारी रहा. साथ ही अब तक इस हमले में 21 लोग मारे जा चुके हैं. जेल में इस आतंकवादी समूह के सैकड़ों सदस्य भी बंद हैं.

एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि इस हमले में अब तक 43 लोग घायल हो चुके हैं. नंगरहार प्रांत की राजधानी जलालाबाद में रविवार शाम को तब हमला शुरू हुआ था जब इस्लामिक स्टेट के एक आत्मघाती बम हमलावर ने विस्फोटक से लदे अपने वाहन को जेल के गेट से टकरा दिया. उसके बाद कई हमलावर गोलियां चलाने लगे.

नंगरहार प्रांत के गर्वनर के प्रवक्ता अताउल्ला खोग्यानी ने बताया कि तीन हमलावर मारे गए हैं. सोमवार को भी यह संघर्ष जारी है और जेल परिसर में रूक-रूक कर गोलीबारी हो रही है. खोग्यानी ने बताया कि मृतकों में जेल के कुछ कैदियों के अलावा आम नागरिक, जेल के गार्ड और अफगान सुरक्षा कर्मी शामिल हैं. पुलिस को संदेह है कि कुछ आतंकवादी समीप के रिहायशी परिसरों में पहुंच गये हैं जिससे उनका सफाया करना मुश्किल हो रहा है. खोग्यानी के अनुसार सुरक्षाबल बड़ी सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं ताकि आम नागरिक हताहत न हों.

बख्तरबंद गाड़ियों से आये अफगान सुरक्षा और रक्षा बल के कर्मियों ने जेल को घेर लिया है. यह जेल गवर्नर कार्यालय से महज 700 मीटर दूर है. सैनिक सोमवार को छिटपुट गोलीबारी के बीच लोगों को वहां से निकालते रहे. हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट समूह से संबद्ध एक संगठन ने ली है जिसे खुरासान प्रांत में आईएस के नाम से जाना जाता है. इस आतंकवादी संगठन का मुख्यालय नंगरहार प्रांत में है

जेल पर हमले का कोई कारण अभी साफ नहीं है. एक अधिकारी के अनुसार इस मुठभेड़ का फायदा उठाकर कुछ कैदी भाग भी गये. जेल में 1,500 कैदी बंद हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में आईएस से जुड़े हैं. खोग्यानी ने बताया कि पहले करीब 100 कैदी भाग गये थे लेकिन सुरक्षाबल उन्हें शहर में ढूंढ कर वापस ले आये थे. अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अभी कोई कैदी फरार है.

अफगान खुफिया एजेंसी ने एक दिन पहले ही बताया था कि अफगान विशेष बलों ने जलालाबाद के निकट आईएस के एक शीर्ष आतंकी कमांडर को मार गिराया है. तालिबान के राजनीतिक प्रवक्ता सुहेल शाहीन ने ‘एपी’ को बताया कि जलालाबाद जेल हमले में उनका समूह शामिल नहीं है. अमेरिका ने तालिबान के साथ फरवरी में शांति समझौता किया था.

उन्होंने कहा, ‘’ हमारा संघर्ष विराम चल रहा है और देश में कहीं भी इस तरह के हमले में हम शामिल नहीं हैं.’’ तालिबान ने ईद के मद्देनजर शुक्रवार से तीन दिन के संघर्ष विराम का ऐलान किया था.

क्रिकेटर्स को Covid-19 से बचाने के लिए BCCI राहुल द्रविड़ को सौंप सकती है ये अहम जिम्मेदारी!

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) कोविड-19 को लेकर एक कार्यबल का गठन करेगा, जिसमें पूर्व कप्तान एवं राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रमुख राहुल द्रविड़ शामिल होंगे. बीसीसीआई ने राज्यों को भेजी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में राज्य संघों को इसकी जानकारी दी. एनसीए प्रमुख होने के नाते द्रविड़ इस कार्यबल के भी अध्यक्ष हो सकते हैं.

एसओपी के अनुसार खिलाड़ियों को अपने-अपने केंद्रों पर प्रशिक्षण शुरू करने से पहले एक सहमति फॉर्म पर हस्ताक्षर करना होगा. इसमें 60 वर्ष से अधिक उम्र या स्वास्थ संबंधी परेशानी का सामना कर रहे किसी व्यक्ति के शिविर में भाग लेने पर रोक है.

बेंगलुरू एनसीए में प्रशिक्षण बहाली के लिए, कोविड-19 कार्यबल में द्रविड़, एक चिकित्सा अधिकारी, एक स्वच्छता अधिकारी के अलावा बीसीसीआई एजीएम, क्रिकेट संचालन शामिल होंगे.

उनकी जिम्मेदारियों में ‘स्पष्ट और नियमित रूप से खिलाड़ियों के साथ संवाद करना, जोखिम को प्रबंधित करने के लिए किए जा रहे उपाय का उल्लेख करने के साथ कोविड-19 से जुड़े मामलों के बारे में जानकारी’ देना शामिल है. खिलाड़ियों और राज्यों के केन्द्र की तरह एनसीए में भी क्रिकेटरों को प्रशिक्षण शुरू करने से पहले एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करना होगा.

एसओपी के मुताबिक, ”प्रशिक्षण की बहाली से पहले कोविड-19 संक्रमण की संभावना का पता लगाने के लिए एनसीए के प्रशासनिक कर्मचारियों सहित सभी खिलाड़ियों और कर्मचारियों का कोविड-19 (आरटी-पीसीआर) परीक्षण किया जाएगा.”

एसओपी के अनुसार, ”राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के शुरू होने से पहले, खिलाड़ी इस एसओपी में निर्धारित सभी प्रोटोकॉल का पालन करने और कोविड-19 रोकथाम के संदर्भ में समय-समय पर जारी किए गए विभिन्न सरकारी आदेशों का पालन करने के लिए लिखित में सहमति देना होगा.”

क्रिकेट को फिर से शुरू करने पर बीसीसीआई द्वारा जारी किये गए दिशानिर्देश की प्रति पीटीआई-भाषा के पास भी है. इसके मुताबिक , ”खिलाड़ियों, कर्मचारियों और हितधारकों की स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधित चीजों की जिम्मेदारी राज्य क्रिकेट संघों की होगी.”

ऐसे सहायक कर्मचारी, अधिकारी जिनकी उम्र 60 साल से अधिक है या जो बीमार है, मैदान पर आने और प्रशिक्षिण शिविर में भाग लेने पर तब तक रोक होगी जब तब कि ‘सरकार द्वारा उपयुक्त दिशानिर्देश जारी नहीं किए जाते’. स्टेडियम में यात्रा से लेकर वहां प्रशिक्षण तक खिलाड़ियों को सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा. वर्ष 2019-2020 का घरेलू सत्र मार्च में ही खत्म हो गया था लेकिन अगस्त में शुरू होने वाला आगामी सत्र भी छोटा किया जायेगा. खिलाड़ियों को स्टेडियम जाते समय एन95 मास्क पहनना होगा. अभ्यास के दौरान चश्मे भी लगाने होंगे.

इसमें कहा गया, ”शिविर के पहले दिन वेबिनार और जानकारी देने के लिये कार्यशाला का संचालन राज्य ईकाइयों द्वारा नियुक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी करेंगे.”

खिलाड़ियों को अपने वाहन से स्टेडियम आने की सलाह दी गई है. मैदान पर सिर्फ खिलाड़ी, सहयोगी स्टाफ और मान्यता प्राप्त मैदानकर्मी, कैटरिंग और सुरक्षा स्टाफ ही आ सकेगा. स्टेडियम में प्रवेश सिर्फ एक द्वार से होगा. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि घरेलू सत्र कब शुरू होगा लेकिन सभी सरकारी दिशा निर्देशों का पालन करना होगा.

पुष्पम प्रिया चौधरी का नीतीश सरकार पर वार,कहा -ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में असफल रही सरकार

“बिहार का इतिहास गौरवशाली है, बहुमूल्य धरोहर हैं, पर्यटन की अपार संभावानाएँ हैं. इस तरह की बातें सुन-सुन कर कान पक गए. अगर यह सच है तो फिर धरोहर संरक्षित क्यों नहीं होते? टूरिज़म इंडस्ट्री क्यों नहीं बढ़ती? युवाओं को रोज़गार क्यों नहीं मिलता? लोकल इकॉनोमी क्यों नहीं विकसित होती है?” प्लुरल्स की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ऐतिहासिक विरासतों और धरोहरों को सरकारों द्वारा बर्बाद किए जाने को लेकर वह सवाल बिहार सरकार से कर रही थी.

उन्होंने आगे बताया कि दरअसल “इनको न करना है और न ही करना आता है. जमुई के इंदपै के पालक़ालीन धरोहर इसके जीते-जागते साक्ष्य हैं. इस पुरातात्विक स्थल की खुदाई तो दूर, सरकार ने संरक्षण तक नहीं दिया. हद तो यह है कि ठेकेदार सरकार ने इंदपै के पुरातात्विक स्थल के ऊपर स्कूल और कार्यालय बना दिया. यह बताता है कि सरकारें अपने पुरातात्विक-ऐतिहासिक स्थलों को कितना महत्वपूर्ण मानती है. इस सुशासन की व्यवस्था देखकर, राजा इंद्रदमन और इंडोलोजिस्ट अलेक्जेंडेर कनिंघम दोनों की आत्मा विचलित हो गयी होगी”. उन्होंने कहा कि “स्थानीय मान्यता के अनुसार इसके अंदर ख़ज़ाना हो न हो, 2020-30 में जमुई के अनछुए और बर्बाद कर दिए गए धरोहर टूरिज़म इंडस्ट्री के ख़ज़ाना बनेंगे, यह तय है”.

विरासतों की उपेक्षा सिर्फ जमुई में हो रही हो ऐसा नहीं है बल्कि इसकी अंतहीन श्रृंखला है. ब्रिटिश काल में पाये गये नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष अभी 60 एकड़ में हैं लेकिन इसके दूर गाँवों तक फैले विस्तार की खुदाई कभी हुई ही नहीं.अंतिम खुदाई 1982 तक हुई. नतीजा यह है कि आज भी आस-पास के गाँवों में मूर्तियाँ और महाविहार के दीवारों के अवशेष मिलते रहते हैं और चोरी होने से पहले गाँव वाले भरसक उसे बचाते रहते हैं. हाल में मिला शिवलिंग एक अस्थायी मंदिर में रखा है, और मूर्ति थाने में जमा करा दिया गया है. पुष्पम प्रिया चौधरी सरकार से अनुरोध करती है कि “कम-से-कम ज़मीन में दबे गौरव को ठीक से खोद भी दें तो नालंदा का वर्तमान समृद्ध हो जाएगा”.

धरोहरों और विरासतों के उपेक्षा की कहानी गया तक विस्तार पाती है. उन्होंने गया के गया के ऐतिहासिक धरोहर अनमोल हैं, बशर्ते कि उनको महत्व दिया जाय कुर्किहार के ब्रॉंज़, कॉपर और पत्थरों की बौद्ध मूर्तियों के भंडार स्थल को आज़ादी के बाद से खुदाई का इंतज़ार है. इस बीच एक चोरी की मूर्ति विदेश में 21 करोड़ में बिकी और बाक़ी की क़ीमत सैकड़ों करोड़ में है. जो बच रहे वो गाँव वालों के घर में हैं”.उन्होंने मुखिया भूषण सिंह का आभार जताया जिन्होंने मूर्तियों की सुरक्षा के लिए उसे गाँव के मंदिर में रखवा दिया.

पुष्पम प्रिया चौधरी ने कहा कि “बस विज़न की बात है कि यह जगह अगर आज यूरोप में होता तो क्या होता! वहाँ पटना में सैकड़ों करोड़ के कृत्रिम बुद्ध स्मृति पार्क नहीं बन रहे होते, बल्कि इस जगह पर हज़ारों रोज़गार और करोड़ों की हेरिटेज ईकोनोमी होती”.

उन्होंने दुख जताया कि सरकारो का पुरातात्विक धरोहरों के प्रति उपेक्षा के इसी भाव के कारण “रामपुरवा की धरती पर उस महानतम सम्राट का शौर्य लज्जित है जिनका साम्राज्य ग्रीस और श्रीलंका के बीच दहाड़ता था. क्योंकि, आज अशोक स्तम्भ का शेर कोलकाता के म्यूजियम में और बैल राष्ट्रपति भवन की सीढ़ियों की शोभा है.‘देवों के प्रिय’ की विरासत बिहार में ज़मींदोज़ है. “बुद्ध-अशोक की धरती” को अब जुमले से ज़मीन पर लाने की ड्यूटी है. नकली नेताओं में अशोक बनने की चाहत तो है पर नीयत नहीं.

बिहार : चमक खो चुके पीतल व्यवसाय से बदरंग होती कारीगरों की दुनिया 

“पीतल और कांसे के बर्तन बनाने वाले कारीगरों की जिंदगी सरकारी सहायता के आभाव में बदरंग होती जा रही है” यह बात प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी कह रही थी. वह राज्य भर में पीतल-कांसे के बर्तन बनाने वाले कारीगरों से मिल रही हैं. इसी सिलसिले में वह गोविन्दपुर, महुआ वैशाली और केनारचट्टी,गया पहुंची थी.कारीगरों की व्यथा सुनने के बाद पुष्पम प्रिया चौधरी ने बताया कि महुआ में मंजू देवी जी ने रोकर कहा “बहुत मेहनत का काम है मैडम, हमलोगों पर भी ध्यान दीजिएगा”.

पुष्पम प्रिया चौधरी बताती हैं कि “कैलाश साह, मंजू देवी जैसे फूल से लोग लोग पीतल-कांसे के फूल के बर्तन बनाते हैं, और दशरथ साह, रमाशंकर राम जी जैसे व्यापारी पीढ़ियों से काम रहे, लेकिन सब त्रस्त हैं! इस व्यवसाय का “मार्केट लिंक नहीं है,जिस काऱण मेहनत का दाम नहीं मिलता”.

उन्होंने बताया कि “अगर इनको मुरादाबाद की तरह नयी मशीन और तकनीक मिलती तो इस क्षेत्र को भी पीतल नगरी के रूप में विकसित किया जा सकता है”. गाँव में 100 से ज़्यादा परिवार हैं इस समुदाय आधारित व्यवसाय में लेकिन अब सब स्क्रैप का काम करने को मजबूर हैं”. उन्होंने सरकारों और विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि “जाति आधारित रैली करने में तो उस्ताद हैं, लेकिन उनके आर्थिक आधार की कब्र खोद कर रख दिया है है इन नक़ली नेताओं ने जिनको इनकी कोई फिक्र नहीं है”.

उन्होंने बताया कि कांसे और पीतल का हज़ारों साल का काम, पूँजी और सरकारी सहायता के अभाव में बर्बादी के कगार पर है. बिना किसी सरकारी सहायता के भी केनारचट्टी, गया के पीतल उद्योग के सरजू साह कसेरा, पप्पू साह कसेरा, बालमुकुंद जी जैसे हीरे जैसे लोग, सोने जैसा काम कर रहे हैं.

कंचन देवी जी ने बताया कि पहले वह इन बर्तनों की मुरादाबाद तक सप्लाई करते थे परंतु अब सत्तू बेचते हैं, अब धीरे-धीरे लोग काम छोड़ रहे हैं. पहले 250 घर में काम था, अब 25 में भी नहीं हो रहा है.
“कुर्किहार में कांसे-पीतल के बुद्ध हज़ारों साल से ज़मीन में दबे पड़े हैं और बग़ल में केनारचट्टी, गया की काँसा-पीतल की हज़ारों साल की कारीगरी दफ़न होने की कगार पर है, लेकिन समय का चक्र घूमा है, अब बुद्ध भी मुस्कुराएँ और हमारे सोने जैसे कारीगरों के मुस्कुराने का समय है” पुष्पम प्रिया चौधरी ने बताया.

पीतल के बर्तनों में चमक लाने वाले कारीगरों का जीवन कब चमकेगा के सवाल पर प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने बताया कि “2020-30 में कारीगरों का उनके समस्याओं से पीछा छूटने और मर रही कारीगरी, डूब रहे उद्योग और बर्बाद हो रही जिंदगियों के बदलने का समय है”.

फारूख अब्दुल्ला की मांग- SC के रिटायर्ड जज से हो कश्मीरी पंडितों के पलायन की जांच

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीरी पंडितों के पलायन की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से कराने की रविवार को मांग की. एक वेबिनार के दौरान सवालों का जवाब देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि उनका मानना है कि कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अपूर्ण है और वह उन्हें ससम्मान वापस लाने की किसी भी प्रक्रिया का समर्थन करेंगे.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1990 के शुरुआत में आंतकवाद शुरू होने के बाद करीब 60 हजार कश्मीरी परिवारों ने प्रवासी के तौर पर अपना पंजीकरण कराया है. लोकसभा सदस्य और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि कश्मीरी पंडितों के पलायन के लिए तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन जिम्मेदार थे जो तीन महीने में वापसी का झूठा वादा कर उन्हें घाटी से बाहर लेकर गए.

इस वेबिनार का थीम ‘‘ पुराने आदेश रद्द कर नया आदेश लागू होना – अनुच्छेद 370 और 35 ए को निष्क्रिय करने के एक साल” बाद थी. इस दौरान अब्दुल्ला से पूछा गया कि क्या वह जनसंहार विधयेक का समर्थन करेंगे जो पनून कश्मीर नामक कश्मीरी पंडितों का एक संगठन लेकर आया है और इसमें प्रवासियों के लिए अलग प्रदेश की मांग की गई है. इस पर अब्दुल्ला ने कहा कि वह पहले विधेयक को पढ़ेंगे.

जम्मू-कश्मीर के तीन बार के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड, मेहनती और ईमानदार न्यायाधीश या न्यायाधीशों के दल को जांच करने दें और रिपोर्ट आने दीजिए. इससे युवा कश्मीरी पंडितों की बहुत स्थिति सी आशंकाएं दूर हो जाएंगी और पता चलेगा कि उन्हें कश्मीरी मुसलमानों ने बाहर नहीं निकाला था. अब भी कई कश्मीरी पंडित हैं जिन्होंने कभी घाटी नहीं छोड़ी और अब भी वहां रह रहे हैं.

नेशनल कांफ्रेस के नेता ने ऐसी कई घटनाओं का उल्लेख किया जिसमें 1947 से अब तक कश्मीरी पंडितों के लिए मुसलमान खड़े हुए. उन्होंने कहा कि, ‘‘क्या आप मानते हैं कि हम आपके (कश्मीरी पंडितों) जाने से खुश हैं? हमारा मानना है कि कश्मीर तब तक पूर्ण नहीं होगा जब तक हिंदू वापस नहीं लौटेंगे और शांति से फिर एक साथ नहीं रहेंगे.”

अब्दुल्ला ने कहा कि वह अपनी पार्टी की इस विचारधारा पर कायम रहेंगे चाहे कोई किसी भी धर्म का को मानता हो उनके लिए सभी एक समान है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ मेरे पिता ने कभी भी दो राष्ट्र के सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया. वह कभी नहीं मानते थे कि मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध और अन्य धर्म अलग हैं. हम सभी को आदम और हव्वा की संतान मानते हैं. सभी की जरूरतें एक हैं और उन्होंने एकता के लिए काम किया मैं आखिरी दम तक तक उस रास्ते पर कायम रहूंगा और सभी को एकजुट करने के लिए काम करता रहूंगा.’’

महाराष्ट्र में एक दिन में सामने आए कोरोना के 9509 नए मामले, बीते 24 घंटे में हुई 260 की मौत

महाराष्ट्र में लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. रविवार को एक दिन में 9,509 नए संक्रमित सामने आए और बीते 24 घंटे में 260 लोगों की मौत हो गई.

राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक कुल 4,41,228 लोग कोरोना संक्रमित हुए है जिसमें से अब तक 2,76,809 लोग स्वस्थ हो चुके हैं. राज्य में रिकवरी दर 62.74 फीसदी हो गई है जबकि मृत्युदर 3.53 फीसदी है. महाराष्ट्र में अब तक कोरोना से 15,576 लोगों की मौत हो चुकी है. आंकड़ों के अनुसार राज्य में संस्थागत क्वरंटीन लोगों की संख्या भी धीरे-धीरे कम हो रही है.

मुंबई में रविवार को 49 की मौत हुई जबकि 1105 नए मरीज सामने आए. मुंबई में अब तक कुल 1,16,436 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं जिसमें से 88,299 लोग स्वस्थ हो चुके हैं. वहीं, मृतकों की संख्या 6,447 हो गई है.जबकि एक्टिव मरीजों की संख्या 21,394 है.
मुंबई की अपेक्षा   ठाणे और पुणे में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. मुंबई सटे ठाणे जिले में 96,120 कोरोना संक्रमित हुए हैं जिसमें से 61,516 लोग स्वस्थ हो चुके हैं. वहीं, 2674 लोगो की जान जा चुकी है. जबकि एक्टिव मरीजों की संख्या 31,929 है. तो वहीं पुणे में संक्रमितों का आंकड़ा 94,911 हो गई है जिसमें से 48,481 लोग स्वस्थ हुए हैं. एक्टिव मरीजों की संख्या 44,204 है और अब तक 2226 की मौत हो चुकी है.

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं को एक-एक हजार रुपये देने की घोषणा की

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रक्षाबंधन अवसर पर प्रत्येक आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता को एक-एक हजार रुपये की सम्मान राशि दिये देने की रविवार को घोषणा की. इससे लगभग 50 हजार आंगनबाङ़ी और आशा कार्यकर्ता लाभान्वित होंगी.

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री रावत के निर्देश पर पहले भी आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को एक-एक हजार रुपये की सम्मान राशि दी गई थी. रक्षाबंधन के अवसर पर की गयी यह घोषणा उसके अतिरिक्त है.

रावत ने कहा, ”कोरोना वायरस महामारी के कारण हम रक्षाबंधन के अवसर पर इकट्ठा नहीं हो पा रहे हैं, ऐसे में भी हमारी हजारों आगनबाड़ी और आशा बहनें अग्रिम मोर्चे पर रह कर कोविड-19 के खिलाफ सतर्क करने का काम कर रही हैं.” उन्होंने कहा, ”मेरी उन सभी बहनों के लिए बहुत ही शुभकामनाएं हैं. वे सब स्वयं भी स्वस्थ रहें, तभी वे औरों के स्वास्थ्य का ख्याल रख सकती हैं.”

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ महिलाओं की सुविधा के लिये रक्षाबंधन के अवसर पर उन्हें उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा करने की सुविधा प्रदान की गई है।’’ उन्होंने सभी लोगों से आवश्यक एहतियात बरतते हुए रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने की अपील की.

उत्तर प्रदेश के BJP अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कोरोना पॉजिटिव, घर पर हुए होम क्वॉरंटीन

उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ( Uttar Prdesh BJP President Swatantra Dev Singh) की रविवार कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव (Corona Report Positive) आई. उन्होंने ये जानकारी ट्वीट कर दी. सिंह ने कोरोना के शुरुआती लक्षण के बाद शनिवार को टेस्ट करवाया था. ट्वीटर पर जानकारी देते हुये उन्होंने लिखा कि डॉक्टर की सलाह पर मैं अपने आवास पर होम क्वारंटीन हूं. इसके अलावा उन्होंने सभी से अपील की पूरी सावधानी बरतें और सरकार की गाइडलाइन्स का पालन करें.

प्रदेश अध्यक्ष ने ट्वीट करते हुये लिखा कि ”मुझे कोरोना के शुरुआती लक्षण दिख रहे थे जिसके चलते मैंने अपनी कोविड-19 (COVID-19) की जाँच कराई. जाँच में मेरी रिपोर्ट कोरोना पॉज़िटिव आई है. मुझसे संपर्क में आने वाले सभी लोगों से मेरा निवेदन है कि वह गाइडलाइन के अनुसार स्वयं को क्वारंटाइन कर ले और आवश्यकता अनुसार अपनी जाँच करा ले.”

इसके अलावा उन्होंने लिखा कि ”डॉक्टर की सलाह पर मैं वर्तमान में अपने आवास पर होम क्वारंटाइन हूँ। मेरा सभी प्रदेश्वासियों से निवेदन है कि पूरी सावधानी बरतें और सरकार की गाइडलाइन का सख़्ती से पालन करे”.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर उनके जल्द ठीक होने की कामना की. इससे पहले रविवार को उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मंत्री कमला रानी वरुण (Kamal Rani Varun) का निधन हो गया. उनका लखनऊ स्थित एसपीजीआई में इलाज चल रहा था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. कमला रानी यूपी की प्राविधिक शिक्षा मंत्री थीं. कमला रानी को 2017 में घाटमपुर सीट से विधायक चुना गया था. वह 18 जुलाई को कोरोना संक्रमित हो गई थीं जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया.

अभिनेता अनुपम श्याम के इलाज के लिए 20 लाख रुपए देगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीवी कलाकार अनुपम श्याम को इलाज के लिए 20 लाख रुपए की सहायता देने का ऐलान किया है. राज्य सरकार के प्रवक्ता ने रविवार को यहां बताया कि यह सहायता राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष से दी जाएगी. उन्होंने बताया कि योगी ने श्याम के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है.

टेलीविजन धारावाहिक ‘प्रतिज्ञा’ में सज्जन सिंह का किरदार निभा कर चर्चा में आए फिल्म एवं टीवी कलाकार अनुपम श्याम उत्तर प्रदेश स्थित प्रतापगढ़ के निवासी हैं. वह गुर्दे (किडनी) की बीमारी से ग्रसित हैं. चिकित्सकों ने उन्हें गुर्दा प्रतिरोपित कराने की सलाह दी है.

आपको बता दें कि छोटे पर्दे के मशहूर कलाकार अनुपम श्याम ओझा मूल रूप से यूपी के प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं. किडनी के समस्या के चलते उनकी तबीयत अचानक बीते दिनों खराब हो गयी थी, उनका इलाज मुंबई के एक निजी अस्पताल में चल रहा है.

गौरतलब है कि मशहूर टीवी कलाकार को डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी है. लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के वजह से ओझा इलाज कराने में असमर्थ थे. सोशल मीडिया पर उनकी बीमारी की खबर फैलने के बाद अनुपम श्याम ओझा के लिए कई एक्टर्स, नेता मदद के लिये आगे आये हैं. यही नहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने भी उनके इलाज के लिये पांच लाख रुपये दिये हैं.

टीवी धारावाहिक प्रतिज्ञा में अनुपम श्याम ओझा ने ठाकुर सज्जन सिंह का किरदार निभाकर काफी लोकप्रियता हासिल की थी. इसके बाद वे सुर्खियों में आ गये थे. इसके अलावा उन्होंने बॉलिवुड की फिल्मों में भी छोटे-बड़े किरदार निभाये हैं. इस बीच अच्छी खबर भी है. ओझा के परिजनों का कहना है कि उनकी तबियत में सुधार हुआ है. उन्हें आईसीयू से निकालकर डायलिसिस के लिए प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया है.