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COVID-19 : देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 12 हजार के पार, 414 की मौत

देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस (COVID-19) संक्रमण के 941 नये मामले दर्ज किये जाने के साथ ही संक्रमितों की संख्या 12 हजार के पार हो गयी तथा इस दौरान इस संक्रमण के कारण 37 अन्य लोगों की मौत होने से मृतकों का आंकड़ा 414 पर पहुंच गया है.

देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना के अब तक कुल 12380 मामलों की पुष्टि हुई है जिनमें 76 विदेशी मरीज शामिल हैं. अभी तक कोरोना से संक्रमित 1489 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार सुबह जारी किये गये ताजा आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस का प्रकोप देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल चुका है. कोरोना से सबसे गंभीर रूप से प्रभावित महाराष्ट्र में अब तक 2916 लोग संक्रमित हुए हैं तथा पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में नौ लोगों की मौत के बाद इस महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 187 हो गयी है. प्रदेश में संक्रमण के 229 नए मामले सामने आए हैं.

संक्रमितों की संख्या के मामले में दूसरे स्थान पर देश की राष्ट्रीय दिल्ली है जहां पिछले 24 घंटाें में 17 नये मामले दर्ज किये जाने के कारण अब तक कुल 1578 लोग इस महामारी से संक्रमित हुए हैं तथा इस दौरान दो अन्य लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 32 हो गयी है और 40 मरीजों को उपचार के बाद अस्पाती से छुट्टी दे दी गई है. इसके बाद तमिलनाडु में 38 नये संक्रमित सामने आये है और संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 1242 हो गई हैं तथा राज्य में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है.

मध्य प्रदेश में भी संक्रमितों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि देखी गयी और वहां 257 नये लोगों के संक्रमित होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 987 हो गयी है जबकि राज्य में तीन और लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या 53 हो गयी है.
गुजरात में एक दिन में 116 लोग संक्रमित हुए हैं जिससे संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 766 हो गया तथा पांच और लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या 33 पहुंच गयी है. वहीं राजस्थान में पिछले 24 घंटों के दौरान 64 नये मामले सामने आये है और इनका आंकड़ा बढ़कर 1023 हो गया तथा अब तक तीन लोगों की मौत हुई है.

तेलंगाना में अब तक 647 लोग संक्रमित हुए हैं और 18 लोगों की मौत हुई है. केरल में 388 लोग संक्रमित हुए हैं और तीन लोगों की मौत हुई है. उत्तर प्रदेश में संक्रमण के 75 नये मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 735 हो गई है और 11 लोगों की मौत हुई है.

दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 525 और कर्नाटक में 279 लोग संक्रमित हैं तथा इन राज्यों में क्रमश: 14 और 12 लोगों की मौत हुई है. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में संक्रमितों की संख्या 300 है और चार लोगों की मौत हुुई है. इसके अलावा पंजाब में 13, पश्चिम बंगाल में सात, हरियाणा में तीन, झारखंड में दो तथा बिहार, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और असम में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है.

COVID-19 : शाहरुख खान ने महाराष्ट्र सरकार को मुहैया करायी 25000 PPE किट

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देश में इन दिनों कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते कोहराम मचा है.ऐसे में फ़िल्म अभिनेता शाहरुख खान ने महाराष्ट्र सरकार को 25 हज़ार पर्सनल प्रोटेक्टिव यूनिट (PPE ) किट दान किए हैं.

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे (Rajesh Tope) ने इसके लिए शाहरुख खान का आभार व्यक्त किया है.उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि उनकी ये कोशिश कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में सहयोग करेगी और इससे चिकित्सकों की सुरक्षा करने में भी हमें काफी आसानी होगी.


शाहरुख खान ने ट्वीट कर कहा कि सर, “आपका धन्यवाद सभी किट्स को सोर्स तक पहुंचाने में. हम सभी इस जंग में साथ हैं. खुशी है कि मैं लोगों के काम आ सका हूं. उम्मीद करता हूं कि आपका परिवार और टीम सेफ रहे और हेल्दी रहे.”

गौरतलब है कि शाहरूख कोरोना वायरस की जंग में लगातार सरकार को मदद कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने और उनकी पत्नी गौरी खान ने अपने 4 मंजिला निजी ऑफिस को क्वारंटीन (Quarantine) के लिए दिए जाने का फैसला किया था. इसके अलावा शाहरुख ने हाल ही में पीएम केयर्स फंड और महाराष्ट्र मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक योगदान दिया है.

Coronavirus Lockdown : मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर अफवाह के कारण उमड़ी भीड़, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

मुंबई (Mumbai) के बांद्रा रेलवे स्‍टेशन (Bandra Railway Station) पर मंगलवार दोपहर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. लॉकडाउन (Lockdown) के बावजूद भारी संख्‍या में लोग रेलवे स्‍टेशन पर इकट्ठा हो गए. लोग घर भेजे जाने को लेकर रेलवे स्‍टेशन पर हंगामा करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया. ऐसा बताया जा रहा है कि आस-पास की बस्तियों में अफवाह फैली कि बाहर के लोगों को घर भेजा जाएगा. जिसके बाद लोग रेलवे स्‍टेशन पर जमा होने लगे.

कोविड-19 (COVID-19) के प्रसार को रोकने के लिए पिछले महीने लॉकडाउन लागू होने के बाद से दिहाड़ी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं. इससे उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि अधिकारियों और गैर-सरकारी संगठनों ने उनके भोजन की व्यवस्था की है, लेकिन उनमें से अधिकतर पाबंदियों के चलते हो रही दिक्कतों के चलते अपने मूल स्थानों को वापस जाना चाहते हैं.

पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार करीब 1000 दिहाड़ी मजदूर अपराह्न करीब तीन बजे रेलवे स्टेशन के पास मुंबई उपनगरीय क्षेत्र बांद्रा पश्चिम (Bandra West) ) बस डिपो पर एकत्रित हो गए और सड़क पर बैठ गए. दिहाड़ी मजदूर पास के पटेल नगरी इलाके में झुग्गी बस्तियों में किराए पर रहते हैं, वे परिवहन सुविधा की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने मूल नगरों और गांवों को वापस जा सकें. वे मूल रूप से पश्चिम बंगाल (West Bengal) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) जैसे राज्यों के रहने वाले हैं.

एक मजदूर ने अपना नाम बताये बिना कहा कि एनजीओ और स्थानीय निवासी प्रवासी मजदूरों को भोजन मुहैया करा रहे हैं लेकिन वे लॉकडाउन के दौरान अपने मूल राज्यों को वापस जाना चाहते हैं क्योंकि बंद से उनकी आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई है.

उसने कहा, ‘अब, हम भोजन नहीं चाहते हैं, हम अपने मूल स्थान वापस जाना चाहते हैं, हम (लॉकडाउन बढ़ाने की) घोषणा से खुश नहीं हैं.’ पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले असदुल्लाह शेख ने कहा, ‘हमने लॉकडाउन (Lockdown) के पहले चरण में अपनी बचत पहले ही खर्च कर दी है. अब हमारे पास खाने को कुछ नहीं है, हम केवल अपने मूल स्थान वापस जाना चाहते हैं, सरकार को हमारे लिए व्यवस्था करनी चाहिए.’


कोरोना वायरस (Corona Virus) से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ा दिया गया है. इस पूरी घटना पर महाराष्‍ट्र सरकार में मंत्री आदित्‍य ठाकरे (Aaditya Thackeray)  ने ट्वीट कर केंद्र सरकार पर आरोप लगाए. उन्‍होंने कहा कि वर्तमान में बांद्रा स्‍टेशन (Bandra Station) से मजदूरों को हटा दिया गया है. अभी हाल ही में सूरत (Surat) में भी ऐसा ही हुआ था. केंद्र सरकार मजदूरों को घर भेजने का फैसला नहीं ले पायी है. वे लोग भोजन और आश्रय नहीं चाहते हैं, वे घर वापस जाना चाहते हैं.

Source : News 18

वर्तमान परिदृश्य में अम्बेडकर की पत्रकारिता की प्रासंगिकता

“भारत में पत्रकारिता पहले एक पेशा थी. अब वह एक व्यापार बन गई है. अख़बार चलाने वालों को नैतिकता से उतना ही मतलब रहता है, जितना कि किसी साबुन बनाने वाले को. पत्रकारिता स्वयं को जनता के ज़िम्मेदार सलाहकार के रूप में नहीं देखती. भारत में पत्रकार यह नहीं मानते कि बिना किसी प्रयोजन के समाचार देना, निर्भयतापूर्वक उन लोगों की निंदा करना – जो ग़लत रास्ते पर जा रहे हों – फिर चाहे वे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, पूरे समुदाय के हितों की रक्षा करने वाली नीति को प्रतिपादित करना उनका पहला और प्राथमिक कर्तव्य है.” (बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर, संपूर्ण वाङ्मय: खंड 1, पृ. 273). यह आज की पत्रकारिता के लिए मशाल और मिसाल का काम करती जो इसकी दशा और दिशा तय करेगी, परन्तु अफ़सोस, भारतीय मुख्यधारा की मीडिया इससे कोसो दूर है. पत्रकारिता के मिशन से प्रोफेशन और अंत में कमीशन तक की यात्रा की परिकल्पना बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने बहुत पहले कर ली थी. 31 जनवरी 1920 को मूकनायक पाक्षिक के प्रथम संपादकीय ले लिखा था – “मुंबई से निकलने वाले समाचारपत्रों को बारीकी से देखा जाए तो पता चलता है कि उनमें अधिकतर किसी विशिष्ट जाति के हितों को संरक्षित करते हैं. दूसरी जातियों को उन्हें परवाह नहीं. इतना ही नहीं, कभी-कभी उन्हें नुकसान पहुँचाने वाली बातें भी उन पत्रों में दिखाई देती है (‘मूकनायक’ पृष्ट 34).  जाति को लेकर पूर्वाग्रह तब भी था और आज भी जाति लो लेकर पूर्वाग्रह है. रोबिन जेफ्री जब भारतीय न्यूज रूम में जातिगत संरचना पर सवाल उठाते हैं कि दलितों का प्रतिनिधित्व क्यूँ नहीं है? ऑक्सफेम और न्यूजलौंड्री द्वारा मीडिया में विविधता पर किये गए सर्वे से पता चलता है कि न्यूजरूम में नेतृत्व करने वाले 121 ओहदों में से दलित और आदिवासी नदारथ हैं जबकि  सवर्ण जातियों के पास 106 पद और पिछड़ी जातियों के पास 5 और 6 पद अल्पसंख्यक लोगों के पास है. ‘अस्पृश्यों के पास कोई प्रेस नहीं है’ यह आज भी सच साबित होती दिखती है दलितों-आदिवासी और पिछड़े लोगों की ख़बरें हाशिये पर दिखती हैं. न तो उनके मुद्दे प्रमुखता से उठाये जाते हैं और न उनको मुख्यधारा में जगह मिलती है. मीडिया की जात क्या है? क्या मीडिया की भी कोई जाति होती है? यदि नहीं तो मीडिया में दलितों (पिछड़े-मुस्लिम-महिला) के मुद्दे क्यों नहीं सार्थकता से उठती हुई दिखाई/सुनाई देती है? हाशिये पर खड़े समाज  पर मीडिया समाज क्यों ध्यान नहीं देता? भुत-प्रेत, राखी-मीका, जुली-मटुकनाथ पर पैकेज बनाने वाला मीडिया क्यों दलितों की अनदेखी करता है? जो कुछ सरोकारों के साथ चलने का दावा करते हैं उनके प्रयास भी महज रस्म अदायगी क्यों होते हैं? क्या बाजारवाद के इस दौर में महज इसलिए दलितों की खबरों को जगह नहीं मिलती है क्योकिं उनके सरोकार मध्यवर्गीय विज्ञापन देने वाली कंपनियों के सरोकारों से मेल नहीं खाती? तो क्या बाजारवाद के इस दौर में मीडिया “समाचार वही जो व्यापार बढ़ाये” के मुनाफे के तहत काम करती है?क्या भारतीय मीडिया नवपूंजीवाद के लाभ-हानि के दवाब के तहत काम करती है? यह सभी मीडिया के लिए भले सही न हो परन्तु भूमंडलीकरण के इस दौर में लोकतांत्रिक आग्रह कमजोर हुएं है. इसी का परिणाम है की मीडिया मिशन से कमीशन की तरफ छलांग लगा चुका है. लोगों से सवाल पूछने वाला मीडिया समूह खुद सवालों के घेरे में आ गया है.क्यों नहीं दलितों के प्रति भारतीय मीडिया का रवैया अभी भी बदला है?न किसी सफाई कर्मचारी की मौत को लेकर सवाल उठाये जातें हैं और न ही कोई पैकेज बनाएं जातें है?क्यों नहीं दलितों के प्रति  हिंसा और बलात्कार की घटना पर्याप्त ध्यान खीच पाती हैं?क्यों नहीं आदिवासी महिलायों की खबरें जगह पाती है? क्यों नहीं मुस्लिमों की बेगुनाह रिहाई खबर बन पाती है?भारतीय मीडिया क्यों नहीं दलितों-पीड़ितों-शोषितों तरफ अपने आप को खड़ा पाता है? मीडिया में जाति की हिस्सेदारी पर बहस खड़ा करना मेरे लेख का मतलब नही है. मेरा मूल प्रश्न यह है कि मीडिया में दलितों के मुद्दे को जगह क्यों नहीं दी जाती है? खैरलांजी घटना इसका उदहारण है जिसको भारतीय मीडिया ने शुरू में कवर नहीं किया था. समकालीन भारत में बाबासाहेब को लगा कि समाचारपत्रों में दलित और हाशिये के समाज को  प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है इसके लिए उन्होंने मूकनायक (1920), बहिष्कृत भारत (1924), समता (1928), जनता (1930), आम्ही शासनकर्ती जमात बनणार (1940), प्रबुद्ध भारत (1956) समाचारपत्रों का संपादन और लेखन किया. बाबा साहेब ने आधुनिक प्रजातांत्रिक व्यवस्था में अच्छी सरकार के लिए समाचारपत्र को मूल आधार माना है. वो समाचारपत्र को इक ऐसी व्यवस्था के रूप में देखते थे जो वैसे लोगों को शुद्धिकरण की तरफ ले जा सकती है जो अपने राजनीतिक दिशा में गलत दिशा की तरफ गए हैं. उनका मानना था कि ‘समाचारपत्र न केवल मतदाताओ को प्रशिक्षित करते हैं बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं की जिसे उन्होंने अपने मत से चुना है, वे उनके साथ खड़े हैं, अपना कर्तव्य ठीक ढंग से निभा रहे हैं.” वो मानते थे कि बॉम्बे विधानसभा में चुनाव में जीत की भूमिका उनके समाचार पत्र के संपादन का परिणाम था. लोकतंत्र में चुनाव और राजनीति व्यवस्था के प्रशिक्षण के तौर पर समाचारपत्रों की भूमिका को अग्रिणी मानते थे. “व्यक्ति-पूजा उनका मुख्य कर्तव्य बन गया है.” समकालीन दौर में यह इतनी अधिक प्रासंगिक हो गई है कि इसने ‘इंदिरा इज इंडिया’ के दौर को पीछे छोड़ दिया है. मीडिया के चारण काल की परिकल्पना समयपूर्व कर लेना बाबा साहेब की प्रासंगिकता प्रमाणित करती है. “भारतीय प्रेस में समाचार को सनसनीख़ेज बनाना, तार्किक विचारों के स्थान पर अतार्किक जुनूनी बातें लिखना और ज़िम्मेदार लोगों की बुद्धि को जाग्रत करने के बजाय गैर-ज़िम्मेदार लोगों की भावनाएं भड़काना आम बात है.”आज की मीडिया इस निकष पर कितनी सटीक बैठती है. इसपर विवाद की कोई गुंजाइश नहीं है. परन्तु, इंटरनेट के प्रवाह ने बाबा साहेब अम्बेडकर के विचारों को लोकतांत्रिकरण करने में बड़ी भूमिका निभाई है, परन्तु सफ़र जारी है. मुकेश कुमार (लेखक पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से पीएचडी रिसर्च स्कॉलर हैं. यह लेखक के निजी विचार हैं)  

Coronavirus Lockdown : 20 अप्रैल से कुछ क्षेत्रों में मिलेगी Lockdown से रियायत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना (Coronavirus) की वैश्विक महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाने की घोषणा के साथ यह भी कहा कि जिन इलाकों में हॉटस्पॉट नहीं बनेंगे उन क्षेत्रों में 20 अप्रैल से कुछ रियायतें दीं जाएंगी.
प्रधानमंत्री माेदी ने मंगलवार को यहां राष्ट्र के नाम अपने संदेश में यह जानकारी देते हुए कहा कि किसानों और दिहाड़ी मजदूरों को ध्यान रखते हुए ये रियायतें दीं जाएंगीं जो सशर्त होगीं और यदि वहां काेरोना विषाणु के संक्रमण के मामले बढ़े तो ये रियायतें तुरंत वापस ले लीं जाएंगी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले एक सप्ताह में कोरोना (Coronavirus) के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी. COVID-19 पर कल नये दिशा-निर्देश जारी होंगे. बीस अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को परखा जाएगा, वहां लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, उस क्षेत्र ने कोरोना से खुद को कितना बचाया है, ये देखा जाएगा.
उन्होंने कहा, “जो क्षेत्र इस अग्निपरीक्षा में सफल होंगे, जो हाॅटस्पॉट में नहीं होंगे, और जिनके हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका भी कम होगी, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है. इसलिए न खुद कोई लापरवाही करनी है और न ही किसी और को लापरवाही करने देना है.”
उन्होंने कहा, “कल इस बारे में सरकार की तरफ से एक विस्तृत दिशानिर्देश जारी किये जायेंगे. अब नये दिशानिर्देश बनाते समय भी उनके हितों का पूरा ध्यान रखा गया है.”प्रधानमंत्री ने कहा, “जो रोज कमाते हैं, रोज की कमाई से अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, वो मेरा परिवार हैं. मेरी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में एक, इनके जीवन में आई मुश्किल को कम करना है. इस समय रबी फसल की कटाई का काम भी जारी है. केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर, प्रयास कर रही हैं कि किसानों को कम से कम दिक्कत हो.”

COVID-19 : PM Narendra Modi ने देशव्यापी लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ( Narendra Modi ) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) को फैलने से रोकने के लिये लागू देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) को 3 मई तक बढ़ाने की मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा कि इस महामारी को परास्त करने के लिये यह जरूरी है.

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि राज्यों एवं विशेषज्ञों से चर्चा और वैश्विक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत में लॉकडाउन को अब 3 मई तक और बढ़ाने का फैसला किया गया है.गौरतलब है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लागू 21 दिन के लॉकडाउन का वर्तमान चरण आज (14अप्रैल) समाप्त हो रहा है .

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ अगले एक सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी. 20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को परखा जाएगा कि वहां लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, उस क्षेत्र ने कोरोना से खुद को कितना बचाया है.’’ मोदी ने कहा कि जो क्षेत्र इस अग्नि परीक्षा में सफल होंगे, जो हॉटस्पाट में नहीं होंगे, और जिनके हॉटस्पाट में बदलने की आशंका भी कम होगी, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है .

प्रधानमंत्री ने इस संबंध में राज्यों के साथ अपनी चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि सभी का यही सुझाव है कि लॉकडाउन को बढ़ाया जाए. कई राज्य तो पहले से ही लॉकडाउन को बढ़ाने का फैसला कर चुके हैं.उन्होंने कहा, ‘‘ 3 मई तक हम सभी को, हर देशवासी को लॉकडाउन में ही रहना होगा. इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालन करना है, जैसे हम करते आ रहे हैं .

साथ उन्होंने कहा कि हमें अधिक संवेदनशील स्थानों को लेकर बहुत ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी. जिन स्थानों के हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका है, उन पर भी हमें कड़ी नजर रखनी होगी. नए हॉटस्पॉट का बनना, हमारे लिए और चुनौती खड़ी करेगा.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ हम धैर्य बनाकर रखेंगे, नियमों का पालन करेंगे तो कोरोना जैसी महामारी को भी परास्त कर पाएंगे.’’ मोदी ने लोगों से 7 विषयों पर सहयोग भी मांगा जिसमें बुजुर्गो का ध्यान रखने, गरीबों के प्रति संवेदनशील नजरिया अपनाना आदि शामिल है.

PM Kisan Yojana : केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के बाद अब तक किसानों के खाते में भेजे 16621 करोड़ रुपये

केंद्र सरकार ने लॉकडाउन( Lockdown) शुरू होने के बाद से अब तक देशभर में 8.31 करोड़ किसानों को 16,621 करोड़ रुपये वितरित कर दिए हैं. कोरोना वायरस (Coronavirus)  के प्रसार को रोकने के लिये देशभर में 24 मार्च से लॉकडाउन लागू किया गया. मिली जानकारी के मुताबिक़ लॉकडाउन के दौरान पीएम किसान योजना (PM Kisan Yojana)  के तहत जो पूरी राशि जारी की गई है उसमें पिछले वित्त वर्ष की बकाया राशि 1674.43 करोड़ रुपये भी शामिल है. यह राशि 83.77 लाख लाभार्थी किसानों को जारी की गई.

योजना के तहत शेष राशि मौजूदा वित्त वर्ष के लिये पहली किस्त के तौर पर 14,945 करोड़ रुपये की राशि 7.47 करोड़ किसानों को जारी की जा चुकी है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (Kisan Samman Nidhi ) योजना के तहत किसानों को एक वित्त वर्ष में दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में कुल 6000 रुपये की नकद सहायता दी जाती है सीधे किसानों के बैंक खातों में डाली जाती है. केवल कुछ ऊंची आय वाले किसानों को ही इससे बाहर रखा गया है.

बहरहाल सरकार ने 27 मार्च से तीन सप्ताह के लिए लागू लॉकडाउन को देखते हुए तुरंत सहायता देने के लिए पीएम किसान योजना के 8.69 करोड़ लाभार्थी किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में ही 2000 रुपये की पहली किस्त जारी करने का वादा किया. इसी वादे के तहत अब तक 16,621 करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में डाले गए है.

देश में जो संपूर्ण लॉकडाउन लगाया गया था उसका कल आखिरी दिन है. लेकिन कल ही सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करेंगे. कोरोना वायरस को लेकर ये पीएम मोदी का राष्ट्र को तीसरा संबोधन होगा. माना जा रहा है कि कल लॉकडाउन का बढ़ाने का पीएम मोदी एलान कर सकते हैं. कहा जा रहा है कि इसे बढ़ाकर 30 अप्रैल तक कर दिया गया है. अभी तक तमिलनाडु (Tamil Nadu), महाराष्ट्र (Maharashtra), ओडिशा (Odisha), पंजाब (Punjab) और अरुणाचल प्रदेश (Arunanchal Pradesh) ने लॉकडाउन को बढ़ाकर 30 अप्रैल तक कर दिया है.

Janhvi Kapoor ने ‘उमराव जान’ के गाने पर किया डांस, देखें Video

बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर(Janhvi Kapoor ) का फिल्म ‘उमराव जान’ के गाने पर किया गया डांस काफ़ी पसंद किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर लोग इसे जमकर शेयर कर रहे है.

देश में कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन है. इस वजह से पूरे बॉलीवुड में काम ठप्प पड़ा है. सेलेब्स भी घर में रहकर इस खतरनाक कोरोना वायरस से अपनी-अपनी जंग लड़ रहे हैं. जाह्नवी कपूर घर में बंद रहने के बावजूद अपने इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रही हैं. हाल ही में उनका एक डांस वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
इस वीडियो में जाह्नवी कपूर क्लासिकल डांस करती नजर आ रही हैं. जाह्नवी वीडियो में ऐश्वर्या राय की फिल्म ‘उमराव जान’ के फेमस और सुपरहिट सॉन्ग ‘सलाम’ पर डांस कर रही हैं. वीडियो में जाह्नवी के एक्सप्रेशन्स फैन्स का खूब दिल जीत रहे हैं.

 

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#missing the class room. But anywhere and everywhere can be a classroom no? 🌈

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जाह्नवी ने वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “मैं अपने क्लासरूम को बहुत मिस कर रही हूं. लेकिन कहीं भी और किसी भी जगह को क्लासरूम बनाया जा सकता है, है ना.” जाह्नवी कपूर ,करण जौहर (Karan Johar) की मल्टीस्टारर फिल्म ‘तख्त में नजर आयेगी. जिसमें रणवीर सिंह भी एक महत्वपूर्ण किरदार को निभाते दिखेंगे. इसके अलावा जाह्नवी कपूर रूही अफजानी (Roohi Afzani) और गुंजन सक्सेना (Gunjan Saxena) की बायोपिक में भी नजर आएंगी.

महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु में COVID-19 संक्रमितों का आंकड़ा चार हजार के पार

महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु में कोरोना वायरस (COVID 19) संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है और तीनों राज्यों में कोरोना के मामले चार हजार से अधिक हो चुके हैं जिन्हें मिलाकर देश में संक्रमितों की कुल संख्या नौ हजार को पार कर गयी है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सोमवार शाम जारी आंकड़ों के अनुसार देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 9352 हो गयी है तथा इसके कारण मरने वालों की संख्या 324 पर पहुंच गई है. अब तक 980 लोगों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

COVID-19 : देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 9352 हुयी, 324 की मौत

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देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस (COVID-19) संक्रमण के 996 नये मामले दर्ज किये जाने के साथ ही संक्रमितों की संख्या बढ़कर 9352 हो गयी तथा इस दौरान इस संक्रमण के कारण 51 और लोगों की मौत होने से मृतकों का आंकड़ा 324 तक पहुंच गया है.

देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना वायरस से संक्रमितों के अब तक कुल 9352 मामलों की पुष्टि हुई है जिनमें 71 विदेशी मरीज शामिल हैं. अभी तक कोरोना संक्रमित 980 लोग स्वस्थ हो चुके हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सोमवार रात जारी किये गये आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस का प्रकोप देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल चुका है. कोरोना वायरस से सबसे गंभीर रूप से प्रभावित महाराष्ट्र में अब तक 1985 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 149 लोगों की मौत हो गयी है. महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे के दौरान 22 लोगों की मौत हुई और 224 लोग संक्रमित हुए हैं.

संक्रमितों की संख्या के मामले में दूसरे स्थान पर दिल्ली है जहां पिछले 24 घंटाें में 85 नये मामले दर्ज किये जाने के कारण कुल 1154 लोग इससे पीड़ित हुए हैं. इस दौरान पांच और लोगों की मौत के बाद यहां मृतकों की संख्या छह बढ़कर 24 हो गयी है. इसके बाद तमिलनाडु में सबसे अधिक 1043 लोग संक्रमित हैं और पिछले 24 घंटों में एक और व्यक्ति की मौत के साथ मरने वालों की संख्या 11 हो गयी है.

राजस्थान में एक दिन में 112 लोग संक्रमित हुए और इनका आंकड़ा बढ़कर 812 हो गया तथा अब तक तीन लोगों की मौत हुई है. गुजरात में 539 लोग संक्रमित हैं तथा 26 लोगों की मौत हुई है. पिछले 24 घंटे के दौरान गुजरात में 107 लोग संक्रमित हुए हैं तथा चार और लोगों की मौत हुयी है. मध्य प्रदेश में भी संक्रमितों की संख्या में वृद्धि देखी गयी और वहां रविवार के 532 लोगों की तुलना में लगभग 72 की बढ़त के साथ 604 हो गयी. राज्य में मृतकों की संख्या 43 हो गयी है.

तेलंगाना में अब तक 562 लोग संक्रमित हुए हैं और 16 लोगों की मौत हुई है. केरल में 376 लोग संक्रमित हुए हैं और तीन लोगों की मौत हुई है. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 483 लोग संक्रमित हैं और पांच लोगों की मौत हुई है. दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 432 और कर्नाटक में 247 लोग संक्रमित हैं तथा इन राज्यों में क्रमश: सात और छह लोगों की मौत हुई है. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में संक्रमितों की संख्या 245 है और चार लोगों की मौत हुुई है. इसके अलावा पंजाब में 11, पश्चिम बंगाल में सात, हरियाणा में तीन, झारखंड में दो तथा बिहार, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और असम में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है.