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Maharashtra: मारिया पटेल ने पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में रचा इतिहास, जीते 4 स्वर्ण पदक

महाराष्ट्र की मारिया पटेल ने 23वें राष्ट्रीय सब जूनियर पावर लिफ्टिंग और नेशनल बैंक प्रेस चैंपियनशिप में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मारिया ने चैंपियनशिप में 4 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही महाराष्ट्र पावर लिफ्टिंग टीम टूर्नामेंट में अपना दम ख़म दिखाते हुए कुल 12 पदक जीतने में कामयाब रही।

उत्तर प्रदेश पावर लिफ्टिंग एसोसिएशन द्वारा आयोजित 23वाँ राष्ट्रीय सब जूनियर पावर लिफ्टिंग और नेशनल बैंक प्रेस चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करने वाली मारिया पटेल का सपना है कि वे ओलंपिक में पदक जीतकर महाराष्ट्र को एक नई पहचान दें।

मारिया के इस सफलता के पीछे उनके परिवार ख़ासकर मां और पिता के अलवा मुंबई पुलिस ऑफिसर सुशील जाधव ने भी अहम भूमिका निभाई है। वे न सिर्फ़ युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते है बल्कि सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है। इसके अलावा सुशील जाधव सूमो रेसलिंग में अंतर्रष्ट्रिय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।

वहीं बात करें मारिया के संघर्ष की तो उन्हें भी अन्य महिला खिलाड़ियों की तरह कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना ध्यान लक्ष्य पर केंद्रित किया और आज वे पावर लिफ्टिंग में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

कहते हैं महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे हैं ऐसे में बात करें मारिया पटेल की तो शुरुआती दिनों में मारिया पटेल को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा समाज के उन लोगों की बातों को सहना पड़ा जो यह कहते थे कि मारिया एक लड़की है और उसके बावजूद वह पावरलिफ्टिंग गेम कैसे खेल रही है लेकिन उन सभी की परवाह न करते हुए मारिया पटेल ने अपने लक्ष्य की तरफ अग्रसर रही और यही वजह है कि मारिया ने आज राष्ट्रीय स्थरपर महाराष्ट्र का नाम उत्तर प्रदेश में जाकर रोशन किया है।

ईशा गुप्ता ने फिर की बोल्डनेस की हदें पार, रिवीलिंग ड्रेस में हुईं बेबाक

बॉलीवुड की ग्लैमरस गर्ल ईशा गुप्ता ने अपनी एक्टिंग से ज्यादा बोल्ड लुक्स के कारण सुर्ख़ियों में रहती हैं. ऐसे में अब फैंस को भी हमेशा ही उनकी फोटोज का इंतजार रहता है. तो वहीं ईशा भी वह सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस के साथ कनेक्टेड रहती हैं.

ईशा गुप्ता ने अपनी एक्टिंग से ज्यादा बोल्ड लुक्स के कारण सुर्खियां बटोरी हैं. ऐसे में अब फैंस को भी हमेशा ही उनकी फोटोज का इंतजार रहता है. हालांकि, इस मामले में ईशा अपने चाहने वालों का कभी दिल नहीं तोड़तीं. वह सोशल मीडिया के जरिए अपने चाहने वालों के साथ जुड़ी रहती हैं.

ईशा ने 36 साल की उम्र में पिछले लंबे वक्त से सोशल मीडिया पर तहलका मचाया हुआ है. लगभग हर दिन लोगों को उनका बोल्ड लुक देखने को मिल जाता है. अब एक बार फिर से ईशा ने बोल्डनेस की सारी हदें तोड़ दी हैं. 

Presidential polls: राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू होंगी राजग की उम्मीदवार

झारखंड की पूर्व राज्यपाल और आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) आगामी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार होंगी. भाजपा की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था, संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित संसदीय बोर्ड के अन्य सदस्य संसदीय बोर्ड की बैठक में शामिल हुए.

राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी दलों की ओर से संयुक्त उम्मीदवार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा गया है.

मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है. विपक्षी उम्मीदवार के रूप में सिन्हा के नाम की घोषणा के बाद अगले राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए 18 जुलाई को मतदान होना अब तय माना जा रहा है. राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया जारी है. 29 जून नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है.

गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में संख्या बल के आधार पर भाजपा नीत राजग मजबूत स्थिति में है और उसे यदि बीजद या आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों का समर्थन मिल जाता है तो उसकी जीत निश्चित हो जाएगी.

Assam flood fury: असम में बाढ़ से 11 और लोगों की मौत, गृहमंत्री अमित शाह ने की मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से बात

असम (Assam ) में सभी प्रमुख नदियों के उफान पर रहने के साथ ही बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है तथा 47 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं एवं और 11 की जान चली गई है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्य की स्थिति जानने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से बातचीत की. असम पिछले एक सप्ताह से विनाशकारी बाढ़ की चपेट में है तथा 36 में से 32 जिलों में 47,72,140 लोग उससे प्रभावित हुए हैं.

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन के अनुसार 11 और लोगों की मौत हो जाने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 82 हो गई. डर्रांग में तीन, नगांव में दो, कच्छार, डिब्रूगढ़, हैलकांडी , होजाई, कामरूप और लखीमपुर में एक एक व्यक्ति की जान चली गई. उदालगुरी एवं कामरूप में दो-दो तथा कच्छार, डर्रांग एवं लखीपुर में एक एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है.

सरमा ने ट्वीट किया कि माननीय गृहमंत्री अमित शाह जी ने असम की बाढ़ की स्थिति के बारे में पता करने के लिए सुबह से दो बार फोन किया. उन्होंने बताया कि गृहमंत्रालय शीघ्र ही अधिकारियों का एक दल प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए भेजेगा. उनकी मदद के लिए उनका आभार.

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि शाह का पहल कॉल बाढ़ की स्थित के बारे में जानने के लिए था और दूसरा कॉल यह बताने के लिए था कि केंद्रीय दल नुकसान आकलन के लिए शीघ्र भेजा जाएगा. इस बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता देवब्रत सैकिया ने प्रधानमंत्री से उन क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास के लिए 20000 करोड़ रूपये का केंद्रीय पैकेज मांगा जो पिछले तीन-चर सालों में बाढ़ के कारण तबाह हुए हैं. उन्होंने राज्य में बाढ़ एवं मृदा अपरदन की समस्या को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की अपील की.

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में भोजन और अन्य राहत सामग्री को हवाई मार्ग से गिराने का निर्देश दिया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. सरमा ने दिन में अपने कैबिनेट सहयोगियों और वरिष्ठ जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद यह निर्देश दिया. मृतकों में नगांव जिले के एक थाना प्रभारी सहित दो पुलिसकर्मी शामिल हैं, जो असहाय लोगों की मदद के लिए गए थे, लेकिन बाढ़ के पानी में बह गए. अधिकारियों ने बताया कि सोमवार तड़के उनके शव निकाले गए. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 36 में से 32 जिलों में 47,72,140 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.

सरमा ने अपने मंत्रियों, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और उपायुक्तों के साथ डिजिटल बैठक की. उन्होंने निर्देश दिया कि राहत और बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और इसमें कोई देरी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जहां बाढ़ की स्थिति गंभीर है और सेना, एनडीआरएफ या एसडीआरएफ की नौकाएं नहीं पहुंच पाई हैं, वहां राहत सामग्री हवाई मार्ग से गिराई जाए.”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले कुछ दिनों तक जिले के अधिकारियों को प्रक्रिया संबंधी नियमों से सरोकार नहीं रखना चाहिए बल्कि प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यदि कुछ क्षेत्रों को राहत नियमावली में शामिल नहीं किया गया है, तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वे राज्य के स्वामित्व वाली प्राथमिकता विकास योजनाओं और मुख्यमंत्री राहत कोष के अंतर्गत आएं।”

उन्होंने उपायुक्तों को स्वास्थ्य विभाग की टीम को तैयार रखने और बाढ़ प्रभावितों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में डॉक्टरों की दैनिक यात्रा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को नजदीकी अस्पतालों में भेजने के लिए एंबुलेंस को पहले से तैयार रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी जिला अस्पतालों में रात की पाली बढ़ाई जानी चाहिए और वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.

सरमा ने अधिकारियों को राज्य के नौ मेडिकल कॉलेजों की मदद से क्षेत्र-वार मेगा स्वास्थ्य शिविरों की योजना बनाने का निर्देश दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बाढ़ के बाद की बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके. उन्होंने जिलों के उपायुक्तों को बाढ़ का पानी कम होते ही नुकसान का तुरंत आकलन शुरू करने और जल्द से जल्द काम पूरा करने का निर्देश दिया.

उन्होंने कहा कि राज्य सचिवालय में आवश्यक बाढ़ संबंधी कार्यों को छोड़कर सभी संरक्षक मंत्री और सचिव बाढ़ राहत कार्यों की निगरानी के लिए अपने-अपने जिला मुख्यालयों में होने चाहिए. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के एक बुलेटिन के अनुसार, राज्य पिछले एक सप्ताह से विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है, जिसमें 127 राजस्व मंडल और 33 जिलों के 5,137 गांव प्रभावित हैं.

करीब 1.90 लाख लोगों ने 744 राहत शिविरों में शरण ली है। शिविरों में नहीं जाने वाले प्रभावित लोगों को 403 अस्थायी केंद्रों से राहत सामग्री वितरित की गई है. अधिकारियों ने बताया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने अब तक करीब 30,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है.

केंद्रीय जल आयोग के बुलेटिन के अनुसार, कोपिली नदी नगांव जिले के कामपुर में और ब्रह्मपुत्र नदी निमाटीघाट, तेजपुर, गुवाहाटी, कामरूप, गोलपारा और धुबरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. सुबनसिरी, पुथिमारी, पगलाडिया, मानस, बेकी बराक और कुशियारा नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटे में बारपेटा, कछार, दरांग, गोलपारा, कामरूप (मेट्रो), करीमगंज, नलबाड़ी और उदलगुरी के शहरी इलाकों से बाढ़ की सूचना मिली है, जबकि कछार, दीमा-हसाओ, गोलपारा, हैलाकांडी, कामरूप (एम) और करीमगंज जिलों में भारी बारिश से भूस्खलन हुआ है.

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में आठ जानवर – सात हिरण और एक तेंदुए की डूबने और वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई है। केएनपी अधिकारी ने बताया कि वन अधिकारियों ने आठ हिरन और एक अजगर सहित दस अन्य को बचाया है.

MPPSC Prelims Exam 2022 : मप्र राज्य सेवा परीक्षा में कश्मीर को लेकर पूछे गए आपत्तिजनक सवाल पर विवाद

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (Madhya Pradesh Public Service Commission) द्वारा आयोजित राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा (State Service Preliminary Exam) में कश्मीर (Kashmir) को लेकर पूछे गए एक आपत्तिजनक सवाल (objectionable question) पर विवाद खड़ा हो गया है. 

सूत्रों ने बताया कि एमपीपीएससी की रविवार को आयोजित राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अभिरुचि परीक्षण के प्रश्नपत्र में कथन के रूप में सवाल किया गया कि क्या भारत को कश्मीर को पाकिस्तान को दे देने का निर्णय कर लेना चाहिए? इस सवाल पर पर्चे में पहला तर्क दिया गया, ‘‘हां, इससे भारत का बहुत-सा धन बचेगा.” दूसरा तर्क दिया गया, ‘‘नहीं, ऐसे निर्णय से इसी तरह की और भी मांगें बढ़ जाएंगी.”

प्रश्नपत्र में इस सवाल के जवाब के लिए परीक्षार्थियों को चार विकल्प दिए गए थे जिनमें से पहले विकल्प में पहले तर्क को सही बताया गया था, दूसरे विकल्प में दूसरे तर्क को सही बताया गया था, तीसरे विकल्प में पहले और दूसरे, दोनों तर्कों को सही बताया गया था और चौथे विकल्प के अनुसार, पहला और दूसरा, दोनों ही तर्क सही नहीं थे.

आपत्तिजनक सवाल के बारे में पूछे जाने पर एमपीपीएससी के सचिव प्रबल सिपाहा ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘अगर कुछ गलत होता है, तो कार्रवाई तो की ही जाती है. विवादित प्रश्न के मामले को एमपीपीएससी के बोर्ड के सामने रखा जाएगा. इसके बाद इस विषय में उचित कदम उठाया जाएगा.”

कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक प्रश्न का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर आ गया है और आक्रोशित लोग एमपीपीएससी की परीक्षा में ऐसा सवाल किए जाने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं. (भाषा)

Sangli Suicide Case: महाराष्ट्र के सांगली में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 13 गिरफ्तार

महाराष्ट्र (Maharashtra) के सांगली जिले (Sangali District) में सोमवार को एक ही परिवार के नौ सदस्यों के मृत पाए जाने के बाद आत्महत्या (Suicide)  के लिए उकसाने के मामले में पुलिस ने साहूकार समेत 13 लोगों को गिरफ्तार (Arrested) किया है. 

पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक़ सांगली जिले के म्हैसाल गांव में दो भाइयों सहित परिवार के कुल नौ लोग सोमवार को दो मकानों में मृत पाए गए थे. दोनों भाइयों में एक शिक्षक था जबकि दूसरा भाई पशु चिकित्सक था. उन्होंने बताया कि राजधानी मुंबई से करीब 350 किलोमीटर दूर स्थित गांव में दोनों भाइयों के मकानों में ‘सुसाइड नोट’ भी मिले हैं. पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच से पता चला है कि दोनों भाइयों ने कई लोगों से काफी पैसा उधार लिया था.

सांगली के पुलिस अधीक्षक दीक्षित गेदाम ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘ सुसाइड नोट की विषयवस्तु यह दर्शाती है कि परिवार ने कुछ लोगों से धन उधार लिया था और उसे लौटाने में उन्हें मुश्किलें आ रही थीं.” अधिकारी ने कहा, ‘‘ उन्हें इस वजह से परेशान किया जा रहा था और इसी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है.” उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने किसी कारोबार के लिए धन उधार लिया था.

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘ हमने 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है जिनसे परिवार से धन उधार लिया था. परिवार को उन लोगों द्वारा परेशान किया जा रहा था,जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया.”

उन्होंने कहा कि पुलिस ने इन 25 लोगों में से 13 लोगों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले भी पैसे उधार देने के मामले दर्ज हैं. अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम बनाई गयी हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या परिवार ने एक साथ जहरीला पदार्थ खा लिया था, उन्होंने कहा कि इस संबंध में जांच चल रही है

प्रधानमंत्री ने युवाओं को बेरोजगारी के ‘अग्निपथ’ पर चलने को मजबूर किया: राहुल गांधी

सेना में भर्ती से संबंधित नयी योजना ‘अग्निपथ’ के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों की बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला और कहा कि बार-बार नौकरी की झूठी उम्मीद देकर उन्होंने युवाओं को बेरोजगारी के ‘अग्निपथ’ पर चलने के लिए मजबूर कर दिया है.

गांधी ने यह भी कहा कि आठ साल में 16 करोड़ नौकरियां दी जानी थीं, लेकिन युवाओं को केवल “पकौड़े तलने” का ज्ञान मिला.

उन्होंने आज यह बात तब कही जब पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा सहित कांग्रेस के सांसद और शीर्ष नेता अग्निपथ योजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं के प्रति एकजुटता प्रकट करने के लिए जंतर-मंतर पर “सत्याग्रह” पर बैठे हैं.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘बार-बार नौकरी की झूठी उम्मीद देकर प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं को बेरोजगारी के ‘अग्निपथ’ पर चलने के लिए मजबूर कर दिया है.’’

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘आठ साल में 16 करोड़ नौकरियां दी जानी थीं, लेकिन युवाओं को पकौड़े तलने का ही ज्ञान मिला.’

उन्होंने कहा कि देश की इस हालत के लिए केवल प्रधानमंत्री जिम्मेदार हैं.

गांधी ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से रविवार को उनका जन्मदिन नहीं मनाने की अपील की. शनिवार रात नेताओं और कार्यकर्ताओं को भेजे संदेश में गांधी ने कहा कि देश के युवा आक्रोशित हैं तथा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उनके साथ खड़ा होना चाहिए.

केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के खिलाफ कई राज्यों हो रहे प्रदर्शनों के बीच इस योजना के तहत सेवानिवृत्त होने वाले जवानों के लिए रक्षा मंत्रालय और अर्धसैनिक बलों की नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण सहित कई प्रोत्साहनों की शनिवार को घोषणा की.

कोयले की सुगम आपूर्ति के लिए सरकार का बिजली उत्पादक कंपनियों को रैक खरीदने का निर्देश

सरकार ने बिजली उत्पादक कंपनियों (जेनको) को अपने खुद के इस्तेमाल (कैप्टिव) के लिए रैक की खरीद करने का निर्देश दिया है. इससे मानसून के सीजन में बिजली उत्पादक कंपनियों को कोयले की सुगम आपूर्ति सुनिश्चित हो पाएगी.

केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने कहा कि हर साल मानसून के दौरान घरेलू कोयले के उत्पादन में गिरावट आती है. यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार मानसून के दौरान उत्पादन और आपूर्ति के मुद्दों के मद्देनजर रैक की व्यवस्था कर रही है, मंत्री ने इसका सकारात्मक जवाब दिया.

सिंह ने कहा, ‘‘रैक एक और समस्या है.’ कोयला मंत्रालय कह रहा है कि कई ऐसे स्थान हैं जहां शुष्क ईंधन उपलब्ध है लेकिन उपलब्धता के अनुरूप इनका परिवहन नहीं हो पा रहा है.’’

उन्होंने कहा कि रैक की कमी के अलावा कुछ मार्गों पर ‘भीड़भाड़’ की वजह से भी आपूर्ति प्रभावित हो रही है.

सिंह ने कहा कि रेलवे को इन मार्गों पर भीड़भाड़ की समस्या के हल को कार्रवाई करने की जरूरत है, जिससे इन स्थानों से ज्यादा कोयला निकाला जा सके. कुछ ऐसे क्षेत्र जहां पर्याप्त रैक उपलब्ध हैं वहां कोयला मंत्रालय को उत्पादन बढ़ाना होगा.

उन्होंने कोई ब्योरे दिए बिना कहा, ‘‘भारतीय रेल अधिक रैक की खरीद कर रही है. ‘‘मैंने जेनको को रैक में निवेश करने का निर्देश दिया है.’’

मंत्री ने कहा कि यदि आपके पास अपना रैक होगा तो आपकी परिवहन की लागत बचेगी. रैक करीब 25-30 साल चलता है. एनटीपीसी के पास पहले से अपने रैक हैं। वे अपने रैक की संख्या बढ़ा रहे हैं। मैंने सभी राज्यों की बिजली उत्पादक कंपनियों से कहा है कि वे अपने रैक खरीदें. इससे रेलवे पर बोझ कम होगा.

उन्होंने कहा कि सरकार मानसून के दौरान बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार बढ़ाकर चार करोड़ टन पर पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अभी इन संयंत्रों के पास 2.29 करोड़ टन का भंडार है.

पुरुष, महिला एक साथ रहते हैं, तो कानून इसे विवाह जैसा मानेगा, बेटा पैतृक संपत्तियों में हिस्सा पाने का हकदार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक मामले में कहा कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक साथ रहते हैं तो कानून के अनुसार इसे विवाह जैसा ही माना जायेगा और उनके बेटे को पैतृक संपत्तियों में हिस्सेदारी से वंचित नहीं किया जा सकता है.

शीर्ष अदालत ने केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि विवाह के सबूत के अभाव में एक साथ रहने वाले पुरुष और महिला का ‘‘नाजायज’’ बेटा पैतृक संपत्तियों में हिस्सा पाने का हकदार नहीं है.

न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा, ‘‘यह अच्छी तरह से स्थापित है कि अगर एक पुरुष और एक महिला पति और पत्नी के रूप में लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, तो इसे विवाह जैसा ही माना जायेगा. इस तरह का अनुमान साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के तहत लगाया जा सकता है.’’

केरल उच्च न्यायालय के 2009 के उस फैसले के खिलाफ एक अपील पर अदालत का यह यह निर्णय सामने आया, जिसमें एक पुरुष और महिला के बीच लंबे समय तक चले रिश्ते के बाद पैदा हुए एक व्यक्ति के वारिसों को पैतृक संपत्तियों में हिस्सा देने संबंधी निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया गया था.”

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे पर हमले में दो लोग घायल

अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल (Blast) में शनिवार को एक गुरुद्वारे (Gurudwara) में कई विस्फोट हुए और गोलीबारी भी हुई जिसमें कम से कम दो लोग घायल हो गए.

‘टोलो न्यूज’ ने धमाके का वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया कि विस्फोट काबुल के कार्ते परवान इलाके में हुआ और इलाके में गोलीबारी की भी खबर है.

कार्ते परवान गुरुद्वारा जिस क्षेत्र में स्थित है वह अफगान हिंदू और सिख समुदायों का केंद्र है.

‘टोलो न्यूज’ की खबर के अनुसार, देश के गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अज्ञात हमलावरों ने इलाके में घुसने की कोशिश की, जिसमें दो लोग घायल हो गए.

नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट किया, ‘हम काबुल शहर में एक पवित्र गुरुद्वारे पर हुए हमले की घटना से बहुत चिंतित हैं. हम स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और आगे की घटना के बारे में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं.’

विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने ट्वीट में कहा, ‘गुरुद्वारा कार्ते परवान पर कायरतापूर्ण हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की जानी चाहिए. हमले की खबर मिलने के बाद से हम घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए हैं. हमारी पहली और सबसे महत्वपूर्ण चिंता समुदाय के कल्याण के लिए है.’

‘द एसोसिएटेड प्रेस’ के अनुसार, तालिबान के गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त प्रवक्ता अब्दुल नफी ताकोर ने इस हमले की पुष्टि की है.

गुरुद्वारे पर हुए इस हमले की फिलहाल किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है. अतीत में इस्लामिक स्टेट इन खोरासन (आईएस-के) देशभर में मस्जिदों और अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है.

चीन की स्थानीय समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से कहा, ‘हमने स्थानीय समयानुसार सुबह करीब छह बजे कार्ते परवान इलाके में विस्फोट की आवाज सुनी. पहले विस्फोट के लगभग आधे घंटे के बाद दूसरा विस्फोट हुआ. फिलहाल पूरे इलाके को सील कर दिया गया है.’

उसने बताया कि सुरक्षाबलों ने एहतियात के तौर पर इलाके की घेराबंदी कर दी है.

प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, विस्फोट के कारण आसमान में धुएं का गुबार फैल गया. हमले के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. उसने कहा, “विस्फोट में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की आशंका है. सुरक्षाबलों द्वारा चेतावनी के लिए कई गोलियां दागी गईं.’

सिख समुदाय के नेताओं का अनुमान है कि तालिबान शासित अफगानिस्तान में सिर्फ 140 सिख बचे हैं, जिनमें से ज्यादातर पूर्वी शहर जलालाबाद और राजधानी काबुल में हैं.

इससे पहले, मार्च 2020 में काबुल के एक गुरुद्वारे में हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 25 सिख मारे गए थे और आठ अन्य घायल हुए थे. यह हमला अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक सिख समुदाय पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक था.

शोर बाजार इलाके में हुए इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने ली थी.