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व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू की गई ‘अग्निपथ’ योजना: राजनाथ सिंह

‘अग्निपथ’ योजना’ (Agnipath Sceme) को लेकर तेज होते विरोध प्रदर्शनों के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence minister Rajnath Singh) ने शनिवार को योजना का बचाव करते हुए कहा कि इसे पूर्व सैनिकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया गया है. सिंह ने कहा कि योजना के संबंध में राजनीतिक कारणों से ‘भ्रम’ फैलाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि यह योजना सैनिकों की भर्ती प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी. उन्होंने कहा कि योजना के तहत भर्ती कर्मियों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

सिंह ने टीवी 9 मीडिया समूह द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में कहा, ‘यह योजना सशस्त्र बलों की भर्ती प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी. कुछ लोग इसके बारे में गलतफहमी फैला रहे हैं. हो सकता है कि लोगों में कुछ भ्रम हो, क्योंकि यह एक नयी योजना है.’

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस योजना को पूर्व सैनिकों के साथ लगभग दो साल तक विचार-विमर्श करने के बाद लागू किया गया है और इस संबंध में आम सहमति के आधार पर निर्णय लिया गया है.

उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि लोगों में देश के लिए अनुशासन और गर्व की भावना हो.’ रक्षा मंत्री ने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना कहा कि ‘अग्निपथ’ योजना के खिलाफ कुछ विरोध प्रदर्शनों के राजनीतिक कारण हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, ‘राजनीति करने के लिए और भी बहुत सारे मुद्दे हैं. लेकिन हम चाहे विपक्ष में रहें या फिर सत्ता में में, जो भी राजनीति करते हैं, वह देश के लिए होती है.’

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘क्या हमें देश के जवानों का मनोबल गिराना चाहिए? यह सही नहीं है.’ अग्निपथ योजना के तहत चार साल के लिए अनुबंध के आधार पर जवानों की भर्ती की जाएगी, जिसके बाद उनमें से 75 प्रतिशत को पेंशन के बिना अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी. शेष 25 प्रतिशत को नियमित सेवा के लिए बरकरार रखा जाएगा. इन जवानों का चयन उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा.

योजना के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भर्ती किए जाने वाले कर्मियों को राज्य सरकारों, निजी उद्योगों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अर्धसैनिक बलों की विभिन्न नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी.

मां ने मुझे गरीब कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया, कभी रिश्वत न लेने को कहा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शनिवार को अपनी मां के 100वें जन्मदिन के अवसर उन्हें समर्पित एक ब्लॉग लिखा. इस ब्लॉग में उन्होंने अपनी मां के बलिदानों और उनके जीवन के ऐसे पहलुओं का जिक्र किया, जिन्होंने उनके (मोदी के) आत्म-विश्वास, मन एवं व्यक्तित्व को ‘‘गढ़ा’’.

मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘मां… यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, यह जीवन की वह भावना है, जिसमें स्नेह, धैर्य, विश्वास, कितना कुछ समाया हुआ है. मेरी मां हीराबा आज 18 जून को अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश कर रही हैं, उनका जन्म शताब्दी वर्ष प्रारंभ हो रहा है. इस विशेष दिन पर मैं अपनी खुशी और सौभाग्य साझा कर रहा हूं.’’

प्रधानमंत्री ने अपनी मां को शुभकामनाएं देने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए उनसे गुजरात में मुलाकात की.

मोदी ने ब्लॉग में लिखा, ‘‘मेरी मां जितनी सामान्य हैं, उतनी ही असाधारण भी. ठीक वैसे ही, जैसे हर मां होती है.’’

प्रधानमंत्री का यह ब्लॉग हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है.

मोदी ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें हमेशा गरीबों के कल्याण का एक मजबूत संकल्प लेने और इस ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया, जो उनकी सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं का मकसद है.

मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि अब तक दो बार ही ऐसा हुआ है, जब उनकी मां किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में उनके साथ रही हैं.

उन्होंने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें 2001 में चुना था, तब उनकी मां ने कहा था, ‘‘मुझे सरकार में तुम्हारा काम तो समझ नहीं आता, लेकिन मैं बस यही चाहती हूं कि तुम कभी रिश्वत नहीं लेना.’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘एक बार मैं जब एकता यात्रा के बाद श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराकर लौटा था तो अहमदाबाद में हुए नागरिक सम्मान कार्यक्रम में मां ने मंच पर आकर मेरा टीका किया था.’’

मोदी ने कहा, ‘‘दूसरी बार वह सार्वजनिक तौर पर मेरे साथ तब आई थीं, जब मैंने मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें जीवन की एक सीख दी कि औपचारिक शिक्षा ग्रहण किए बिना भी सीखना संभव है.

उन्होंने कहा कि वह एक बार अपनी सबसे बड़ी शिक्षिका अपनी मां समेत अपने सभी शिक्षकों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना चाहते थे, लेकिन उनकी मां ने इनकार कर दिया और कहा कि वह एक सामान्य व्यक्ति हैं.

मोदी के लिखा कि उनकी मां ने कहा, ‘‘मैं तो निमित्त मात्र हूं. तुम्हारा मेरी कोख से जन्म लेना लिखा हुआ था. तुम्हें मैंने नहीं भगवान ने गढ़ा है.’’

उन्होंने लिखा कि हालांकि मेरी मां उस समारोह में नहीं आईं, लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि वह उन्हें अक्षरज्ञान देने वाले अपने स्थानीय शिक्षक जेठाभाई जोशी के परिवार से किसी को आमंत्रित करें.

मोदी ने कहा, ‘‘अक्षर ज्ञान के बिना भी कोई सचमुच में शिक्षित कैसे होता है, ये मैंने हमेशा अपनी मां में देखा. उनके सोचने का दृष्टिकोण, उनकी दूरगामी दृष्टि, मुझे कई बार हैरान कर देती है.’’

उन्होंने कहा कि उनकी मां ने अपनी मां को बहुत कम उम्र में खोने के बाद बचपन में कई कठिनाइयों का सामना किया.

मोदी ने कहा कि उनकी मां को अपनी मां का चेहरा या उनकी गोद भी याद नहीं है, क्योंकि उन्होंने अपना पूरा बचपन उनके बिना बिताया. प्रधानमंत्री ने याद किया कि उनका परिवार मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत से बने छोटे घर में रहता था. उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनकी मां ने हर रोज मुश्किलों का सामना किया और उन पर सफल विजय पाई.

मोदी ने कहा, ‘‘बारिश में हमारे घर में कभी पानी यहां से टपकता था, कभी वहां से. पूरे घर में पानी न भर जाए, घर की दीवारों को नुकसान न पहुंचे, इसलिए मां जमीन पर बर्तन रख दिया करती थीं. छत से टपकता हुआ पानी उसमें इकट्ठा होता रहता था. उन पलों में भी मैंने मां को कभी परेशान नहीं देखा, खुद को कोसते नहीं देखा.’’

उन्होंने कहा कि उनकी मां न केवल घर के सारे काम स्वयं करती थीं, बल्कि कुछ पैसे कमाने के लिए कुछ घरों में बर्तन भी मांजा करती थीं और चरखा भी चलाया करती थीं.

मोदी ने कहा कि उनकी मां को सफाई भी बहुत पसंद थी और जब वडनगर में उनके घर के पास कोई नाली साफ करने आता था, तो उनकी मां उसे चाय पिलाए बिना नहीं जाने देती थीं.

उन्होंने कहा कि उनकी मां को अन्य लोगों की खुशियों में खुशी मिलती है और वह बहुत बड़े दिल वाली हैं.

मोदी ने याद किया कि उनके पिता अपने करीबी दोस्त के असामयिक निधन के बाद उनके बेटे अब्बास को घर ले आए थे.

उन्होंने कहा, ‘‘अब्बास एक तरह से हमारे घर में ही रहकर पढ़ा. हम सभी बच्चों की तरह मां अब्बास की भी बहुत देखभाल करती थीं. ईद पर मां, अब्बास के लिए उसकी पसंद के पकवान बनाती थीं. त्योहारों के समय आसपास के कुछ बच्चे हमारे यहां ही आकर खाना खाते थे. उन्हें भी मेरी मां के हाथ का बनाया खाना बहुत पसंद था.’’

मोदी ने कहा, ‘‘मैं अपनी मां की इस जीवन यात्रा में देश की समूची मातृशक्ति के तप, त्याग और योगदान के दर्शन करता हूं. मैं जब अपनी मां और उनके जैसी करोड़ों नारियों के सामर्थ्य को देखता हूं, तो मुझे ऐसा कोई भी लक्ष्य नहीं दिखाई देता जो भारत की बहनों-बेटियों के लिए असंभव हो.’’

प्रधानमंत्री ने अपनी मां को एक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बताया, जिन्होंने पंचायत से लेकर संसद तक हर चुनाव में मतदान किया.

उन्होंने कहा कि उनकी मां ने अत्यंत सफल जीवन व्यतीत किया और आज भी उनके नाम पर कोई सम्पत्ति नहीं है. मोदी ने कहा कि उनकी मां वर्तमान घटनाक्रम से अवगत हैं और उनकी याददाश्त अब भी तेज है.

मोदी ने कहा कि उनकी मां शुरू से कबीरपंथी रही हैं. उन्होंने कहा कि ईश्वर पर उनकी मां की अगाथ आस्था है, लेकिन वह अंधविश्वास से कोसों दूर रहती हैं.

उन्होंने कहा कि उन्होंने जब अपनी कम आयु में अपने माता-पिता को घर छोड़ने की इच्छा बताई तो उनके पिताजी बहुत दुखी हुए, लेकिन उनकी मां ने उन्हें समझा और उन्हें आशीर्वाद दिया. मोदी ने कहा कि बाद में उनके पिता भी उनके निर्णय को लेकर सहज हो गए और उन्होंने उन्हें आशीर्वाद दिया.

मोदी ने कहा, ‘‘दूसरों की इच्छा का सम्मान करने की भावना, दूसरों पर अपनी इच्छा न थोपने की भावना, मैंने मां में बचपन से ही देखी है. खासतौर पर मुझे लेकर वह बहुत ध्यान रखती थीं कि वह मेरे और मेरे निर्णयों को बीच कभी दीवार न बनें. उनसे मुझे हमेशा प्रोत्साहन ही मिला. वह बचपन से मेरे मन में एक अलग ही प्रकार की प्रवृत्ति पनपते हुए देख रहीं थीं.’’

UP Board 10th Result 2022: यूपी बोर्ड ने जारी किए 10वीं kiiपरीक्षा के नतीजे, देखें टॉप 10 छात्रों की सूची

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad) ने 10वीं का परिणाम घोषित कर दिया है. यूपी बोर्ड 10वीं कक्षा की परीक्षा में इस वर्ष छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों के मुकाबले कहीं बेहतर रहा है. शीर्ष 10 में सात लड़कियों ने अपनी जगह बनाई है, वहीं छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 91.69 रहा, जबकि छात्रों का 85.25 प्रतिशत रहा.

यहां यूपी बोर्ड के सभागार में हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम जारी करते हुए शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) डॉक्टर सरिता तिवारी ने बताया कि परीक्षा में कुल 11,69,488 छात्र और 10,53,257 छात्राएं उत्तीर्ण हुईं. उन्होंने बताया कि कानपुर नगर के प्रिंस पटेल 97.67 प्रतिशत अंकों के साथ प्रथम स्थान पर रहें, जबकि मुरादाबाद की संस्कृति ठाकुर ने 97.50 प्रतिशत के साथ दूसरे और कानपुर नगर की किरण कुशवाहा 97.50 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.

कन्नौज के अनिकेत शर्मा 97.33 प्रतिशत अंकों के साथ चौथे, कानपुर नगर की पलक अवस्थी 97.17 प्रतिशत अंकों के साथ पांचवें, प्रयागराज की आस्था सिंह 97.17 अंकों के साथ छठे, सीतापुर की एकता वर्मा 97 प्रतिशत अंकों के साथ सातवें, राय बरेली के अथर्व श्रीवास्तव 97 प्रतिशत अंकों के साथ आठवें, कानपुर नगर की नैंनी वर्मा नौवें और वहीं की प्रांशी द्विवेदी दसवें स्थान पर रहीं.

शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) डॉक्टर सरिता तिवारी ने बताया कि कुल 8,373 परीक्षा केंद्रों पर संपन्न हुई यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में कुल 25,20,634 परीक्षार्थी शामिल हुए जिसमें से 22,22,745 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए. इस प्रकार से कुल परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 88.18 रहा. 

Chhattisgarh: पति को प्रेमिका के साथ देख पत्नी ने खोया आपा, अर्धनग्न कर गांव में घुमाया

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में पति और उसकी कथित प्रेमिका को एक साथ देख पत्नी ने उनकी जमकर पिटाई की और पूरे गांव में र्धनग्न कर घुमाया. ये मामला उरिंदाबेड़ा गांव का है. इस घटना की जानकारी जैसे ही पुलिस को लगी, पुलिस ने मामले की छानबीन की और आरोपी पत्नी पर केस दर्ज कर लिया.

बताया जा रहा है कि पति और उसकी कथित प्रेमिका के साथ मारपीट करने और उन्हें अर्धनग्न कर गांव में घुमाने के आरोप में पुलिस ने पत्नी समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर​ लिया है.

पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है कि जिले के उरिंदाबेड़ा गांव में 11 जून को एक महिला ने पति को एक युवती के साथ संदिग्ध अवस्था में देख बहुत नाराज हो गयी और उसने ग्रामीणों के साथ मिलकर दोनों की जमकर पिटाई की एवं लकड़ी से हाथों को बांधकर अर्ध नग्न अवस्था में उन्हें गांव में घुमाया.

उन्होंने बताया कि घटना के बारे में जानकारी मिलने के बाद पुलिस दल को जांच के लिए उरिंदाबेड़ा गांव भेजा गया था. उन्होंने बताया कि पीड़ितों के बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है तथा पत्नी समेत चार ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है.

Covid-19 Vaccination In India : देश में अब तक कोविड-19 रोधी टीकों की 195.48 करोड़ से अधिक खुराक दी गईं

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने बताया कि कि देश में मंगलवार तक कोविड-19 रोधी टीकों (Covid-19 Vaccine) की 195.48 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं.

मंत्रालय के मुताबिक, केवल मंगलवार को शाम सात बजे तक 11 लाख से अधिक खुराक दी गईं. देर रात अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है. मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को शाम सात बजे तक 18-59 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को कुल 82,039 एहतियाती खुराक दी गईं और अब तक इस आयु वर्ग में कुल 35,55,347 लोगों को एहतियाती खुराक दी जा चुकी हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 12-14 वर्ष आयु वर्ग के 3.53 करोड़ बच्चों और 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के 5.99 करोड़ किशोरों को टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है.

देशभर में पिछले साल 16 जनवरी को टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था और पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों (Healthcare Workers) को टीके की खुराक दी गई थी. दो फरवरी से अग्रिम मोर्चे (Frontline Workers) पर तैनात कर्मचारियों का टीकाकरण शुरू हुआ. अगले चरण का टीकाकरण अभियान एक मार्च 2021 को शुरू हुआ और इसके तहत 60 साल से अधिक आयु वाले और 45 तथा उससे अधिक उम्र के बीमार लोगों को टीके की खुराक दी गईं.

देश में पिछले साल एक अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू हुआ. सरकार ने फिर पिछले साल एक मई से 18 साल से अधिक आयु के सभी लोगों को टीके की खुराक देने का फैसला किया.

भारत ने 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के किशोरों के लिए तीन जनवरी 2022 से टीकाकरण अभियान शुरू किया.

Rajasthan: राजस्थान में आरक्षण की मांग को आंदोलन तेज, जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम

राजस्थान (Rajasthan) के भरतपुर जिले में नौकरी और उच्च शिक्षा में 12 प्रतिशत आरक्षण (Reservation) की मांग को लेकर समाज विशेष के लोगों का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा. इन लोगों ने जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर अरोदा गांव में चक्का जाम कर रखा है.

 भरतपुर (Bharatpur) प्रशासन ने जिले की चार तहसीलों- नदबई, उच्चैन, वैर, भुसावर में मोबाइल इंटरनेट सेवा को बुधवार सुबह 11 बजे तक निलंबित कर दिया है. भरतपुर के संभागीय आयुक्त सांवरलाल वर्मा ने बताया कि मोबाइल इंटरनेट सेवा के निलंबन की अवधि को बुधवार सुबह 11 बजे तक बढा दिया गया है.

राजस्थान के पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने आरक्षण की मांग कर रहे आरक्षण संघर्ष समिति के नेताओं के वार्ता के लिये नहीं पहुंचने पर मंगलवार को कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती.. उन्हें वार्ता के लिये आना चाहिए.  भरतपुर में संभागीय आयुक्त कार्यालय मे संवाददाताओं से बातचीत में सिंह ने कहा, ‘‘ताली दो हाथ से बजती है.. आप ताली एक हाथ से नहीं बजा सकते और वही हाल आज हो रहा है ताली एक हाथ से बजाने की कोशिश हो रही है. ”

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने अपनी तरफ से प्रयास किये हैं और हम बातचीत के लिये संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल का इंतजार कर रहे हैं. ”उन्होंने कहा,‘‘मैं अपील करता हूं कि आप (प्रतिनिधिमंडल) भतरपुर आये ताकि आम आदमी को राहत मिल सके और आपकी बात आगे पहुंचायी जा सके.  मुझे तो लगता है कि इनमें (आरक्षण संघर्ष समिति में ) कोई नेता है ही नहीं.  यदि मुरारी सैनी नेता बन रहे हैं तो उन्हे आगे आना चाहिए.. दिक्कत कहां है. ”

उल्लेखनीय है कि आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी सैनी ने सरकार और प्रशासन से बातचीत के लिये एक प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है.  राजस्थान में 12 प्रतिशत अलग से आरक्षण देने की मांग को लेकर सैनी, माली, कुशवाहा, शाक्य, मौर्य आरक्षण संघर्ष समिति के नेतृत्व में आंदोलन शुरू किया गया.  समाज के नेताओं का कहना है कि वर्तमान में इन लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल किया गया है और इस श्रेणी में अन्य जातियों के होने के कारण उनके समाज को फायदा नहीं मिल रहा है. 

वादा था हर साल दो करोड़ नौकरी देने का, अब 2024 तक सिर्फ 10 लाख नौकरी देगी केंद्र सरकार: कांग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा सभी विभागों और मंत्रालयों में अगले डेढ़ साल के दौरान 10 लाख लोगों की भर्ती करने के लिए दिए गए निर्देश को लेकर कांग्रेस (Congress) ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया है.

कांग्रेस ने कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरी देने का वादा करने के बाद अब सरकार ने वर्ष 2024 तक सिर्फ 10 लाख नौकरी देने की बात की है.

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘‘वादा था दो करोड़ नौकरी हर साल देने का, आठ साल में देनी थीं 16 करोड़ नौकरियां. अब कह रहे हैं साल 2024 तक केवल 10 लाख नौकरी देंगे. 60 लाख पद तो केवल सरकारों में खाली पड़े हैं, 30 लाख पद केंद्र सरकार में खाली पड़े हैं। जुमलेबाजी कब तक?’’

प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों से कहा है कि वे ‘‘मिशन मोड’’ में काम करते हुये अगले डेढ़ साल में दस लाख लोगों की भर्ती करें। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी.

पीएमओ ने कहा कि सभी सरकारी विभागों एवं मंत्रालयों में मानव संसाधन की स्थिति की समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री का यह निर्देश आया है।

प्रधानमंत्री ने अगले डेढ़ साल में 10 लाख लोगों की भर्ती का निर्देश दिया : PMO

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों से कहा है कि वे ‘‘मिशन मोड’’ में काम करते हुये अगले डेढ़ साल में दस लाख लोगों की भर्ती करें.

पीएमओ ने कहा कि सभी सरकारी विभागों एवं मंत्रालयों में मानव संसाधन की स्थिति की समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री का यह निर्देश आया है.

बेरोजगारी के मसले पर विपक्ष की ओर से सरकार की लगातार की जा रही आलोचना के बीच प्रधानमंत्री का यह फैसला आया है. विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में खाली पड़े पदों का मुद्दा भी पिछले कुछ समय से सुर्खियों में रहा है.

अगले 18 महीनों में 10 लाख पदों को भरे जाने का मतलब है कि केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास 2024 के आगामी लोकसभा चुनाव में बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष की हर आलोचना की काट के लिए एक ठोस जवाब रहेगा.

लोकसभा का अगला चुनाव वर्ष 2024 के अप्रैल-मई महीने में होने की संभावना है.

पीएमओ ने ट्वीट करके कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने सभी सरकारी विभागों एवं मंत्रालयों में मानव संसाधन की स्थिति की समीक्षा की और मिशन मोड में अगले डेढ़ साल में दस लाख लोगों की भर्ती करने का निर्देश दिया.’’

वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग द्वारा वेतन व भत्तों पर जारी ताजा वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार के कुल नियमित सिविल कर्मचारियों (केंद्र शासित प्रदेशों सहित) की संख्या एक मार्च 2020 की अवधि तक 31.91 लाख थी जबकि स्वीकृत पदों की कुल संख्या 40.78 लाख थी। इस हिसाब से करीब 21.75 प्रतिशत पद रिक्त थे.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल श्रम शक्ति का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा पांच प्रमुख मंत्रालयों या विभागों के अंतर्गत आता है, इनमें रेलवे, रक्षा (सिविल), गृह कार्य, डाक और राजस्व शामिल हैं.

कुल 31.33 लाख पदों की निधार्रित संख्या (संघ शासित प्रदेशों को छोड़कर) में रेलवे की हिस्सेदारी 40.55 प्रतिशत, गृह मामलों की 30.5 प्रतिशत, रक्षा (सिविल) की 12.31 प्रतिशत, डाक की 5.66 प्रतिशत, राजस्व की 3.26 प्रतिशत और अन्य मंत्रालयों व विभागों की 7.72 प्रतिशत है.

संघ शासित प्रदेशों और दूतावासों सहित केंद्र सरकार के नियमित सिविल कर्मचारियों के वेतन व भत्तों पर कुल खर्च (प्रोडक्टिविटी-लिंक्ड बोनस या तदर्थ बोनस, मानदेय, अर्जित छुट्टियों का नकदीकरण और यात्रा भत्ता को छोड़कर) वर्ष 2019-20 में 2,25,744.7 करोड़ रुपये था जबकि मार्च 2018-19 में यह आंकड़ा 2,08,960.17 करोड़ रुपये था.

इस रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय सुरक्षा बलों में कुल स्वीकृत पदों 10.16 लाख के मुकाबले मार्च 2020 में 9.05 लाख कर्मचारी थे.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक विभिन्न विभागों और मंत्रालयों से रिक्त पदों की विस्तृत जानकारी मांगी गयी थी, और इसकी पूरी समीक्षा करने के बाद प्रधानमंत्री ने 10 लाख लोगों की भर्ती के निर्देश दिए.

पिछले विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों ने बेरोजगारी के मुद्दे को जोरशोर से उठाया था लेकिन भाजपा ने कल्याणकारी योजनाओं और विकास के साथ हिन्दुत्व के मुद्दों को आगे रखते हुए विपक्षी आक्रमण की धार कुंद कर दी थी और सफलता हासिल की थी.

बेरोजगारी के मुद्दे पर भाजपा विपक्ष के आरोपों को लगातार यह कहकर भी खारिज करती रही है कि सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों से देश में उद्यमिता और रोजगार निर्माण को बढ़ावा मिला है.

Uttar Pradesh: शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक 227 लोग गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक 227 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी.

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने यहां बयान जारी कर बताया, “इस संबंध में राज्य में 227 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसमें प्रयागराज में 68, हाथरस में 50, सहारनपुर में 48, अंबेडकरनगर में 28, मुरादाबाद में 25 और फिरोजाबाद में आठ लोग शामिल हैं.”

इस बीच, हिंसा करने वालों को परोक्ष चेतावनी देते हुए, उप्र के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा, “उपद्रवी याद रखें, हर शुक्रवार के बाद एक शनिवार ज़रूर आता है…”

कुमार ने अपने ट्वीट के साथ एक इमारत को ध्वस्त करते हुए एक बुलडोजर की तस्वीर भी ट्वीट की.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा, ‘विगत दिनों प्रदेश के विभिन्न शहरों में माहौल बिगाड़ने के लिए हुए अराजक प्रयासों में शामिल समाजविरोधी तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी. ऐसे असामाजिक लोगों के लिए सभ्य समाज मे कोई स्थान नहीं है। यह ध्यान रखें कि किसी भी निर्दोष का उत्पीड़न न हो, लेकिन दोषी एक भी न बचे.’

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और सहारनपुर समेत कई जिलों में पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ भाजपा की निलंबित नेता नुपुर शर्मा की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर कल जुमे की नमाज के बाद लोगों ने नारेबाजी और पथराव किया था.

लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और लखनऊ जिलों से नमाज के बाद नारेबाजी की सूचना मिली थी. उन्होंने कहा कि सहारनपुर, मुरादाबाद और रामपुर में जुमे की नमाज के बाद लोगों ने सड़कों पर नारेबाजी की थी. पुलिस के मुताबिक लखनऊ के चौक इलाके में स्थित टीले वाली वाली मस्जिद के अंदर भी कुछ देर के लिए नारेबाजी हुई थी.

सहारनपुर से मिली सूचना के अनुसार नमाज के बाद कुछ लोगों ने हाथों मे तख्तियां लेकर नारेबाजी की थी. पुलिस ने बताया कि नेहरू बाजार इलाके में कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जबकि देवबंद में भी नमाज के बाद मदरसे के कुछ छात्रों ने पोस्टर—बैनर लेकर नारेबाजी की थी.

गौरतलब है कि गत तीन जून को जुमे की नमाज के बाद कानपुर के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़क गई थी क्योंकि दो समुदायों के सदस्यों ने एक टीवी बहस के दौरान भाजपा की तत्कालीन प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित रूप से “विवादित” टिप्पणी किए जाने के विरोध में दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया था और इस दौरान ईंट-पत्थर फेंके गये थे.

Chhattisgarh : बोरवेल में गिरे बच्चे को बचाने पिछले लगभग 24 घंटे से बचाव कार्य जारी

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में सूखे बोरवेल में गिरे 11 वर्षीय बच्चे को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान पिछले लगभग 24 घंटे से जारी है.

अधिकारियों ने बताया कि बच्चे को बाहर निकालने के लिए बोरवेल से कुछ दूरी पर एक समांतर गड्ढा खोदा जा रहा है. बचाव कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और भारतीय सेना के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है.

उन्होंने बताया कि जिले के मालखरौदा विकासखंड के पिहरिद गांव में शुक्रवार दोपहर बाद राहुल साहू घर के पिछले हिस्से में खेलते समय एक खुले, सूखे पड़े बोरवेल में गिर गया था. राहुल बोरवेल में 60 से 70 फुट नीचे फंसा हुआ है.

जांजगीर चांपा के जिलाधीश जितेंद्र शुक्ला ने बताया, ‘‘जिला और पुलिस प्रशासन को शुक्रवार दोपहर बाद राहुल के बोरवेल में ​गिरने की जानकारी मिली और तत्काल बचाव कार्य शुरू किया गया.’’

शुक्ला ने बताया कि राहुल को बाहर निकालने में मदद के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को बुलाया गया है. वहीं, चिकित्सकों के दल ने राहुल के लिए बोरवेल के भीतर ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की.

जिलाधीश ने बताया कि बोरवेल से कुछ दूरी पर जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से समांतर गड्ढा किया जा रहा है. इस गड्ढे से एक सुरंग बनाकर राहुल को बाहर निकालने की कोशिश की जाएगी.

उन्होंने बताया, ‘‘अभी तक लगभग 50 फुट का गड्ढा किया जा चुका है तथा इस कार्य में अभी पांच से छह घंटों का समय और लग सकता है.’’

शुक्ला ने बताया कि राहुल की स्थिति का पता लगाने के लिए बोरवेल में रस्सी के सहारे एक कैमरा लगाया गया है. बीती रात लगभग 12 बजे तक राहुल ने हलचल की थी, इसके बाद उसने सुबह हलचल की है. वहां मौजूद चिकित्सकों के अनुसार राहुल की हालत ठीक है हालांकि, समय बीतने के साथ ही उसमें कुछ कमजोरी के लक्षण भी दिख रहे हैं. बोरवेल में रस्सी के सहारे राहुल के लिए केला और जूस पहुंचाया गया है और परिजन भी आवाज लगा रहे हैं, जिससे उसका मनोबल बना रहे.

जिले के अन्य अधिकारियों ने बताया कि राहुल को बाहर निकालने के लिए चल रहे बचाव अभियान में सेना के विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है.

अधिकारियों ने बताया कि लड़के के पिता लाला राम साहू के मुताबिक उसने कुछ समय पहले घर के पिछले हिस्से में सब्जी की बाड़ी के लिए लगभग 80 फुट गहरे बोरवेल की खुदाई करवाई थी. जब बोरवेल में पानी नहीं निकला तब उसे बिना इस्तेमाल किए छोड़ दिया गया। शुक्रवार को बाड़ी में खेलने के दौरान राहुल इस सूखे, खुले पड़े बोरवेल में गिर गया.

राज्य के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस तरह की दुर्घटना को रोकने के लिए सभी जिलाधीशों और पुलिस अधीक्षकों से खुले बोरवेल को बंद करवाने का निर्देश दिया है.

अधिकारियों ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री कार्यालय से सभी जिलाधीशों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि कोई बोरवेल खुला न हो जिससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं. ऐसे बोरवेल को तुरंत बंद करें तथा नियमित रूप से जिलों में इसकी समीक्षा की जाए.’’

मुख्यमंत्री बघेल ने ट्वीट किया, ‘‘हम राहुल को बचाने के लिए रोबोट की भी मदद लेने का प्रयास कर रहे हैं. सूरत के रोबोट विशेषज्ञ से संपर्क करने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. सूरत के महेश अहीर ने अपने इनोवेशन बोरवेल रेस्क्यू रोबेट की विशेषता को लेकर ट्वीट कर इस बचाव अभियान में मदद की पेशकश की थी.’’

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘अभी मैंने राहुल के माता-पिता से वीडियो कॉल के माध्यम से बात की है. मैं उनकी मनोदशा को समझ सकता हूँ. बच्चे का बोरवेल में गिरना दुखद है. हम सब उसे बचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. हमें विश्वास है कि ईश्वर हमारा साथ देंगे.’’

बघेल ने कहा, ‘‘साथ ही ऐसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए हम राज्य में ऐसे खुले बोरवेल को बंद करने का अभियान चलाएँगे. ग्रामीणों से भी सहयोग की उम्मीद रहेगी कि जहां भी वे खुला बोरबेल देखें हमें सूचित करें. इसके लिए हम एक अलग हेल्पलाइन जारी करेंगे. स्थानीय प्रशासन की ज़िम्मेदारी भी सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी सूचना मिलने पर फ़ौरन कार्रवाई करे. लेकिन इस सब में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है, मुझे विश्वास है कि हमेशा की तरह जनता का सहयोग मिलेगा.’’