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मानवता के समक्ष खड़े प्रश्नों का उत्तर भारत के अनुभवों, सांस्कृतिक सामर्थ्य से ही निकल सकता है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के विभिन्न देशों में उपजे हालात की ओर इशारा करते हुए मंगलवार को कहा कि आज विश्व के सामने अनेक साझे संकट और चुनौतियां हैं और मानवता के समक्ष खड़े प्रश्नों का समाधान भारत के अनुभवों और उसके सांस्कृतिक सामर्थ्य से ही निकल सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी आवास पर शिवगिरि तीर्थ यात्रा की 90वीं वर्षगांठ और ब्रह्म विद्यालय की स्वर्ण जयंती के वर्ष भर चलने वाले संयुक्त समारोह के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 25 साल बाद देश जब आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा तो भारत की उपलब्धियां वैश्विक होनी चाहिए और इसके लिए उसकी दूरदृष्टि भी वैश्विक होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश, कई सभ्यताएं जब अपने धर्म से भटकीं, तो वहां आध्यात्म की जगह भौतिकतावाद ने ले ली लेकिन भारत के ऋषियों, संतों और गुरुओं ने हमेशा विचार और व्यवहार का शोधन किया और उनका संवर्धन किया.

उन्होंने कहा, ‘‘आज हम जो भारत देख रहे हैं, आजादी के 75 सालों की जिस यात्रा को हमने देखा है, यह उन्हीं महापुरूषों के चिंतन और मंथन का परिणाम है। आजादी के हमारे मनीषियों ने जो मार्ग दिखाया था आज भारत उन लक्ष्यों के करीब पहुंच रहा है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से 25 साल बाद देश अपनी आजादी के 100 साल मनाएगा और इसके मद्देनजर उन्होंने देशवासियों से नए लक्ष्य गढ़ने और नए संकल्प लेने का आह्वान किया.

उन्होंने कहा, ‘‘इन सौ सालों की यात्रा में हमारी उपलब्धियां वैश्विक होनी चाहिए और उसके लिए हमारा विजन भी वैश्विक होना चाहिए.’’

उन्होंने कहा कि आज विश्व के सामने अनेक साझी चुनौतियां हैं और साझे संकट भी हैं तथा कोरोना महामारी के समय दुनिया ने इसकी एक झलक भी देखी है.

उन्होंने कहा, ‘‘मानवता के सामने खड़े भविष्य के प्रश्नों का उत्तर भारत के अनुभवों और भारत के सांस्कृतिक सार्म्थय से ही निकल सकता है.’’

उन्होंने संतों और आध्यात्मिक गुरुओं से महान परंपरा को आगे बढ़ाने का आग्रह करते हुए कहा कि वह इसमें ‘‘बहुत बड़ी भूमिका’’ निभा सकते हैं.

शिवगिरि तीर्थयात्रा और ब्रह्म विद्यालय दोनों महान समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के संरक्षण और मार्गदर्शन के साथ शुरू हुए थे.

शिवगिरी तीर्थ यात्रा हर साल तीन दिनों के लिए 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक तिरुवनंतपुरम के शिवगिरी में आयोजित की जाती है. यह तीर्थयात्रा शिक्षा, स्वच्छता, धर्मपरायणता, हस्तशिल्प, व्यापार और वाणिज्य, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा संगठित प्रयास जैसे आठ विषयों पर केंद्रित है.

वर्ष 1933 में कुछ भक्तों द्वारा यह तीर्थयात्रा शुरू की गई थी लेकिन दक्षिण भारत में अब यह प्रमुख आयोजनों में से एक बन गई है। हर साल दुनिया भर से लाखों भक्त जाति, पंथ, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर तीर्थयात्रा में भाग लेने के लिए शिवगिरी आते हैं.

Covid-19: 5-12 आयुवर्ग के लिए कॉर्बेवैक्स, 6-12 आयुवर्ग के लिए कोवैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी

भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने 5 से 12 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों के लिए कोविड-19 (Covid-19) रोधी टीके ‘कॉर्बेवैक्स’ और 6 से 12 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों के लिए ‘कोवैक्सीन’ के टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दे दी है.

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोविड-19 वैश्विक महामारी पर गठित विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की सिफारिशों के बाद भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने इसके इस्तेमाल की अनुमति दी है.

एसईसी ने 5 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के वास्ते ‘बायोलॉजिकल ई’ के कोविड-19 रोधी टीके ‘कोर्बेवैक्स’ और 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए ‘कोवैक्सीन’ टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी (ईयूए) देने की पिछले सप्ताह सिफारिश की थी.

‘बायोलॉजिकल ई’ के ‘कॉर्बेवैक्स’ टीके की खुराक अभी 12 से 14 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों को दी जा रही है. वहीं, 24 दिसंबर, 2021 को डीसीजीआई ने 12 से 18 वर्ष के आयुवर्ग के लोगों के लिए ‘कोवैक्सीन’ को आपातकालीन इस्तेमाल की सूची (ईयूएल) में डाल दिया था.

भारत ने 16 मार्च को 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया.

देशभर में कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान 16 जनवरी 2021 को शुरू किया गया था, तब केवल स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगाए जा रहे थे. इसके बाद दो फरवरी 2021 से, अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों का टीकाकरण और एक मार्च 2021 से 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और गंभीर बीमारी से पीड़ित 45 या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू हुआ. 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए एक अप्रैल 2021 को टीकाकरण शुरू हुआ और 18 साल से अधिक आयु के लोगों को एक मई 2021 से कोविड-19 रोधी टीके देने शुरू किए गए.

देश में तीन जनवरी 2022 से 15 से 18 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ था. स्वास्थ्य कर्मियों तथा अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों और गंभीर बीमारी से पीड़ित 60 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को ‘एहतियाती खुराक’ 10 जनवरी 2022 से देनी शुरू की गई. देश में 10 अप्रैल 2022 से 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को ‘एहतियाती’ खुराक देनी शुरू कर दी गई थी.

प्रधानमंत्री के ‘मास्टर स्ट्रोक’ के कारण 45 करोड़ लोगों ने नौकरी की उम्मीद छोड़ दी : राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक खबर का हवाला देते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मास्टर स्ट्रोक’ के कारण देश के 45 करोड़ लोगों ने नौकरी की उम्मीद छोड़ दी है.

उन्होंने जिस खबर का हवाला दिया उसमें ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ (सीएमआईई) की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि साल 2017 से 2022 के बीच, कुल श्रम भागीदारी दर 46 प्रतिशत से घटकर 40 प्रतिशत हो गई, लगभग 2.1 करोड़ श्रमिकों ने काम छोड़ा और केवल 9 प्रतिशत पात्र आबादी को रोजगार मिला.

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में अभी 90 करोड़ लोग रोजगार के पात्र हैं जिनमें से 45 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अब काम की तलाश भी छोड़ दी है.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘न्यू इंडिया का न्यू नारा : हर-घर बेरोज़गारी, घर-घर बेरोज़गारी. 75 साल में मोदी जी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनके ‘मास्टर स्ट्रोक’ से 45 करोड़ से ज़्यादा लोग नौकरी पाने की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं.’’ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी इस रिपोर्ट को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि युवाओं के भविष्य के लिए इससे बड़ा खतरा कोई नहीं है.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘सबसे ज्यादा युवा आबादी वाले देश में अगर सरकार आशा और उम्मीदों के बजाय निराशा व हताशा के बीज बो रही है, तो देश एवं युवाओं के भविष्य के लिए इससे बड़ा खतरा कोई नहीं है.’’

प्रियंका गांधी ने यह भी कहा, ‘‘45 करोड़ लोगों ने हताश होकर रोजगार तलाशना छोड़ दिया. आज के दौर में यह हमारी सबसे बड़ी चिंता होनी चाहिए.’’

Sri Lanka Economic Crisis: श्रीलंका में इस साल बढ़ेगी गरीबी, विश्व बैंक की चेतावनी

विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि इस साल श्रीलंका में गरीबी बढ़ेगी. इसके साथ ही वैश्विक निकाय ने श्रीलंका से भारी कर्ज में कटौती, राजकोषीय घाटे को कम करने और गरीबों तथा कमजोरों को राहत देने की अपील की.

श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. यह संकट कुछ हद तक विदेशी मुद्रा की कमी के चलते है, जिसकी वजह से खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान करने में दिक्कत हो रही है.

विश्व बैंक ने कहा, ‘‘श्रीलंका में लगभग 11.7 प्रतिशत लोग प्रतिदिन 3.20 अमेरिकी डॉलर से कम कमाते हैं, जो निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए गरीबी रेखा है. यह संख्या 2019 के मुकाबले 9.2 प्रतिशत अधिक है.’’

विश्व बैंक ने कहा कि देश में गरीबी बढ़ने की एक वजह यह भी है कि सरकार का समृद्धि कार्यक्रम पर्याप्त नहीं था. इसके तहत देश में लगभग 12 लाख गरीब परिवारों को शामिल किया गया. कोविड महामारी के चलते श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था 2020 में करीब 3.6 प्रतिशत घटी.

किसानों को उनकी आजीविका, संपत्ति से वंचित करना संविधान का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कानून के अधिकार के बिना किसानों को उनकी आजीविका और संपत्ति से वंचित करना संविधान का उल्लंघन होगा. न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की पीठ ने कहा कि सड़कों को चौड़ा करने के लिए किसानों को मुआवजा नहीं देने का कोई औचित्य नहीं है. पीठ ने कहा, ‘सड़क का निर्माण या चौड़ीकरण नि:संदेह एक सार्वजनिक उद्देश्य होगा, लेकिन मुआवजे का भुगतान न करने का कोई औचित्य नहीं है, प्रतिवादियों की कार्रवाई मनमानी, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 300 ए का स्पष्ट रूप से उल्लंघन है.’

शीर्ष अदालत का फैसला केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ आठ किसानों द्वारा दायर याचिका पर आया जिसमें उनकी अपील खारिज कर दी गई थी. अपीलकर्ता विवादित भूमि के मालिक हैं, जिसकी माप 1.7078 हेक्टेयर है. अपीलकर्ताओं के अनुसार, पंचायत ने उनसे सुल्तान बथेरी बाईपास सड़क के निर्माण या चौड़ीकरण के लिए उनकी भूमि का उपयोग करने का अनुरोध किया था और उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उन्हें भूमि के बदले पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि हालांकि, सड़क के निर्माण के समय किसी भी मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया. जब निर्माण चल रहा था और इसके पूरा होने के बाद भी अपीलकर्ताओं ने विभिन्न अभिवेदन किए, लेकिन जब उनके अनुरोध पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. शीर्ष अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता किसान हैं और इस मामले में उपयोग की गई भूमि कृषि भूमि थी.

इसने कहा, ‘यह उनकी आजीविका का हिस्सा थी. कानून के अधिकार के बिना उन्हें उनकी आजीविका और उनकी संपत्ति से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 300 ए का उल्लंघन होगा.’ शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 300 -ए हालांकि मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन इसे संवैधानिक या वैधानिक अधिकार होने का दर्जा प्राप्त है.

पीठ ने किसानों द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए कहा, ‘अगर पंचायत और लोक निर्माण विभाग कोई सबूत पेश करने में विफल रहे कि अपीलकर्ताओं ने स्वेच्छा से अपनी जमीन का समर्पण किया है, तो अपीलकर्ताओं को संपत्ति से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 300-ए का उल्लंघन होगा.’

रवि शास्त्री का बड़ा खुलासा, कहा- भारत में जलने वाले लोग चाहते थे मैं विफल हो जाऊं

भारत के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) ने इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (England and Wales Cricket Board) के नए क्रिकेट निदेशक बनाए गए रॉबर्ट की को सलाह देते हुए कहा है कि इंग्लैंड के इस पूर्व सलामी बल्लेबाज को ड्यूक गेंद की तरह ‘मोटी चमड़ी’ विकसित करने की जरूरत है जैसे उन्होंने ‘जलने वाले लोगों’ का सामना करने के लिए किया था.

रवि शास्त्री साल 2014 से 2021 के बीच एक साल को छोड़कर बाकी समय भारत के कोचिंग स्टाफ के प्रमुख रहे. इस एक साल के दौरान अनिल कुंबले को मुख्य कोच नियुक्त किया गया था. ब्रिटेन के ‘द गार्डियन’ समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में शास्त्री ने कहा कि भारत में ‘जलने वाले लोगों का गुट’ था जो हमेशा चाहता था कि वह विफल हो जाएं. 

शास्त्री की तरह रॉबर्ट की भी लंबे समय से प्रतिष्ठित कमेंटेटर हैं और उनके पास कोई कोचिंग डिग्री नहीं है. शास्त्री ने कहा, ‘‘मेरा पास भी कोई कोचिंग डिग्री नहीं थी. लेवल एक? लेवल दो? और भारत जैसे देश में हमेशा आपसे जलने वाले लोग या लोगों का गुट होता है जो चाहते हैं कि आप विफल हो जाओ. मेरी मोटी चमड़ी (लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देने वाला) है, आप जिस ड्यूक गेंद का इस्तेमाल करते हैं, उससे भी मोटी.”

ब्रिटेन के समाचार पत्र ने इस पूर्व भारतीय मुख्य कोच के हवाले से कहा, ‘‘आपको इसका सहारा लेना होता है. रॉब (रॉबर्ट की) जब काम करना शुरू करेगा तो वह इसे विकसित करना सीखेगा क्योंकि प्रत्येक दिन आपके काम को लेकर टिप्पणियां होंगी. मुझे खुशी है कि केंट के साथ खेलने के दौरान उसे कप्तानी का काफी अनुभव है क्योंकि खिलाड़ियों के साथ संवाद सर्वोच्च होता है.”

भारतीय टीम के साथ काम करने के अपने अनुभव के आधार पर शास्त्री का मानना है कि दुनिया भर के क्रिकेट जगत में सभी राष्ट्रीय टीम लगभग एक ही तरह से संचालित होती हैं. शास्त्री ने टीम संस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया में लगातार दो श्रृंखला जीतने के दौरान यह भारतीय टीम का अहम हिस्सा थी.

उन्होंने कहा, ‘‘इससे पता चलता है कि हम कैसे खेलना चाहते हैं: आक्रामक होकर और विरोधी टीम को कोई मौका नहीं देना, फिटनेस का शीर्ष स्तर, तेज गेंदबाजों का समूह तैयार करना जो विदेशों में 20 विकेट चटका सकें, और यह आपके रवैये से भी जुड़ा है विशेषकर जब आप ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते हैं. मैंने लड़कों से कहा कि अगर आपको एक अपशब्द कहा जाता है तो आप तीन वापस कीजिए: दो हमारी भाषा में और एक उनकी भाषा में.”

शास्त्री का मानना है कि रॉबर्ट की को पूर्व टेस्ट कप्तान जो रूट के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने की जरूरत है जिससे कि समझ सकें कि सारा काम कैसे किया जाता है. शास्त्री का साथ ही मानना है कि इंग्लैंड के नए कप्तान के रूप में बेन स्टोक्स आदर्श पसंद होंगे. उन्होंने कहा, ‘‘उसे इसकी जरूरत नहीं है लेकिन कप्तानी का जोश उसे वह अभी जितना बेहतरीन खिलाड़ी है उससे भी बेहतर बना सकता है. कप्तान के साथ रिश्ता महत्वपूर्ण होता है- जैसे ही मनमुटाव होता है, चीजें खराब होने लगती हैं.”

शास्त्री ने कहा, ‘‘लेकिन चीजें ठीक होंगी क्योंकि मैंने पिछले साल देखा कि इंग्लैंड के पास प्रतिस्पर्धा देने के लिए पर्याप्त प्रतिभा और कौशल है. इसे लेकर मेरे मन में कोई संदेह नहीं है. यह सब मानसिकता से जुड़ा है.”

पर्पल ड्रेस में भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा की कातिलाना अदाओं ने उड़ाए फैंस के होश

भोजपुरी क्वीन मोनालिसा इन दिनों सुर्ख़ियों में हैं. वजह हैं सोशल मीडिया में वायरल हो रही उनकी तस्वीरें. इन तस्वीरों में मोनालिसा पर्पल ड्रेस में नज़र आ रही हैं तो वहीं उनकी कातिलाना अदाएं फैंस के दिलों पर बिजलियाँ गिरा रही हैं.

मोनालिसा ने इन तस्वीरों को ख़ुद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया है. पर्पल ड्रेस में मोनलिसा बेहद ही ख़ूबसूरत नज़र आ रही हैं. उन्होंने टॉप के साथ मैचिंग का थाई हाई स्लिट गाउन पहना है. साथ ही बालों को स्ट्रेट कर खुला रखा है. इसके अलावा कानों में चमकदार एयरिंग्स उनकी ख़ूबसूरती में चार चाँद लगा रहे हैं.

Janhvi Kapoor Hot Photos: जाह्नवी कपूर के लेटेस्ट फोटोशूट की तस्वीरें हुई वायरल, फैंस का हुआ ये हाल

बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर के लेटेस्ट फोटोशूट की तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं. इन तस्वीरों में जाह्नवी ट्रेडिशनल और हॉट अवतार में नजर आ रही हैं. वायरल हो रही इन तस्वीरों को एक इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया गया है.

वैसे जाह्नवी अक्सर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं जो उनके फ़ैन्स के लिए किसी ट्रीट से काम नही हैं. आपको बता दें कि इंस्टाग्राम पर जाह्नवी के 16.5 मिलियन फ़ॉलोअर हैं.

चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी जांच जारी रख सकती है पुलिस : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि पुलिस के पास जांच का मुक्त अधिकार है और ऐसी जांच सीआरपीसी की धारा 173 (2) के तहत आरोप पत्र दाखिल किए जाने और उस पर संज्ञान लिए जाने के बाद भी जारी रह सकती है. जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा और जस्टिस दीपक वर्मा की पीठ ने आगरा के सुबोध कुमार द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की.

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि एक बार आरोप पत्र दाखिल होने और उस पर संज्ञान लिए जाने के बाद जांच समाप्त हो जाती है. इसके बाद, संबंधित मजिस्ट्रेट की अनुमति के बगैर पुलिस के लिए आगे की जांच का विकल्प खुला नहीं रहता और चूंकि इस तरह की कोई अनुमति नहीं ली गई, पुलिस की यह कार्रवाई, याचिकाकर्ता के उत्पीड़न के समान है.

याचिकाकर्ता के वकील की इस दलील से असहमति जताते हुए अदालत ने कहा, “कानून के प्रावधान यह व्यवस्था देते हैं कि सीआरपीसी की धारा 173 (2) के तहत मजिस्ट्रेट के पास रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद एक अपराध के संबंध में कोई भी चीज आगे की जांच नहीं रोकती.”

अदालत ने आगे कहा, “कानून के प्रावधान यह व्यवस्था भी देते हैं कि ऐसे मामले में जहां आगे की जांच की जाती है और कुछ मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य मिलते हैं तो एक पूरक रिपोर्ट संबंधित मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराई जाएगी. पुलिस अधिकारी संज्ञेय मामलों में स्वतः ही आगे की जांच कर सकता है.”

उल्लेखनीय है कि इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में आरोप है कि रपट दर्ज कराने वाला व्यक्ति नौ मार्च, 2019 को अपने भतीजे की बारात में शामिल होने खंडवई गांव गया हुआ था. दोपहर करीब ढाई बजे वह एक कमरे में आराम कर रहा था, जहां एक अज्ञात लड़का मौजूद था.

इसके मुताबिक, वह लड़का अचानक उठा और उस व्यक्ति का बैग लेकर बाहर भागा और फिर दूसरे लड़के की मोटरसाइकिल पर सवार होकर वहां से फरार हो गया. बैग में 1.4 लाख रुपये नकदी, सोने-चांदी के गहने एवं मोबाइल फोन था.

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उसका मुवक्किल लूट के मामले में दर्ज प्राथमिकी में नामजद नहीं था और पुलिस ने जांच के बाद चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया तथा उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जिसका संज्ञान संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा लिया गया.

गिरफ्तार आरोपियों में से एक आरोपी के पिता ने बयान दिया कि उसके बेटे ने लूटे गए आभूषण याचिकाकर्ता की दुकान में बेच दिए थे जिस पर पुलिस ने उसका उत्पीड़न करना शुरू कर दिया.

Madhya Pradesh: पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पालेंगे कड़कनाथ मुर्गे, भेजे गए 2,000 चूजे

मध्यप्रदेश की एक सहकारी फर्म ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के आर्डर पर प्रोटीन से भरे ‘कड़कनाथ’ नस्ल के 2000 मुर्गे झारखंड के रांची स्थित उनके फार्म पर भेजे हैं. मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के काले कड़कनाथ मुर्गे को छत्तीसगढ से कानूनी लड़ाई के बाद 2018 में जीआई टैग मिला है. यह मुर्गा, इसके अंडे और मांस दूसरी नस्ल से महंगे दाम में बेचा जाता है.

झाबुआ के कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने बताया कि धोनी ने एक स्थानीय सहकारी फर्म को 2000 कड़कनाथ मुर्गो का आर्डर दिया था जो एक वाहन से रांची भेज दिये गए हैं . उन्होंने कहा ,‘‘ यह अच्छा कदम है कि धोनी जैसे सितारे ने कड़कनाथ मुर्गे की नस्ल में रूचि जताई है. कोई भी आनलाइन आर्डर कर सकता है जिससे इस नस्ल के मुर्गे पालने वाले आदिवासियों को फायदा होगा.”

झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख आई एस तोमर ने कहा कि धोनी ने कुछ समय पहले यह आर्डर दिया था लेकिन बर्ड फ्लू फैला होने के कारण भेजा नहीं जा सका. धोनी ने विनोद मेदा को आर्डर दिया जो झाबुआ के रूंडीपाड़ा गांव में कड़कनाथ नस्ल के मुर्गे के पालन से जुड़ी सहकारी संस्था चलाते हैं. मेदा ने कहा कि झाबुआ की आदिवासी संस्कृति के परिचायक तीर कमान भी धोनी को भेजे जायेंगे.