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Ukraine Evacuation : एयर इंडिया का विमान 250 भारतीयों को लेकर बुखारेस्ट से रवाना

एअर इंडिया का एक विमान रूस के आक्रमण के चलते यूक्रेन में फंसे तकरीबन 250 भारतीयों को लेकर शनिवार दोपहर को बुखारेस्ट से मुंबई के लिए रवाना हो गया है. अधिकारियों ने बताया कि यूक्रेन में फंसे भारतीयों को लाने के लिए यह एयर इंडिया की पहली निकासी उड़ान है.

अधिकारियों ने बताया कि एयरलाइन की दूसरी निकासी उड़ान सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर दिल्ली से रवाना हुई और उसके भारतीय समयानुसार शाम करीब साढ़े छह बजे बुखारेस्ट पहुंचने की संभावना है.

उन्होंने बताया कि जो भी भारतीय नागरिक सड़क मार्ग से यूक्रेन-रोमानिया सीमा पर पहुंचे थे, उन्हें भारत सरकार के अधिकारी बुखारेस्ट ले गए ताकि उन्हें एअर इंडिया की उड़ान के जरिए स्वदेश लाया जा सके.

उन्होंने बताया कि पहली निकास उड़ान एआई1944 भारतीय समयानुसार दोपहर एक बजकर 55 मिनट पर बुखारेस्ट से रवाना हुई और उसके रात करीब नौ बजे तक मुंबई हवाईअड्डे पर पहुंचने की उम्मीद है.

उन्होंने बताया कि दूसरी निकासी उड़ान एआई1942 के 250 और भारतीय नागरिकों को लेकर रविवार तड़के दिल्ली लौटने की उम्मीद है.

एअर इंडिया यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए बुखारेस्ट और हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के लिए शनिवार को और उड़ानें संचालित करेगी.

बृहस्पतिवार को यूक्रेन के अधिकारियों ने यात्री विमानों के परिचालन के लिए अपने देश का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, इसलिए भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए ये उड़ानें बुखारेस्ट और बुडापेस्ट से परिचालित की जा रही हैं.

अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन में फिलहाल करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें ज्यादातर विद्यार्थी हैं.

यूक्रेन का हवाई क्षेत्र बंद होने से पहले एअर इंडिया ने 22 फरवरी को यूक्रेन की राजधानी कीव के लिए एक विमान भेजा था जिसमें 240 लोगों को भारत वापस लाया गया था. उसने 24 और 26 फरवरी को दो और उड़ानों के संचालन की योजना बनायी थी लेकिन रूस के 24 फरवरी को आक्रमण शुरू करने और इसके बाद यूक्रेन का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण ऐसा नहीं किया जा सका.

एअर इंडिया ने शुक्रवार रात को ट्वीट करके बताया कि वह दिल्ली और मुंबई से शनिवार को बी787 विमान बुखारेस्ट और बुडापेस्ट के लिए परिचालित करेगा.

यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को कहा कि वह रोमानिया तथा हंगरी से आने वाले मार्गों को निर्धारित करने का काम कर रहा है.

दूतावास ने कहा, ‘‘वर्तमान में, अधिकारियों की टीम उझोरोद के पास चोप-जाहोनी हंगरी सीमा, चेर्नीवत्सी के पास पोरब्ने-सीरेत रोमानियाई सीमा चौकियों पर पहुंच रही है.’’

दूतावास ने कहा कि इन सीमा जांच चौकियों के करीब रह रहे भारतीय नागरिकों, विशेष कर छात्रों को विदेश मंत्रालय के दलों के साथ समन्वय कर व्यवस्थित तरीके से रवाना होने की सलाह दी जाती है.

उसने कहा कि एक बार जब ये मार्ग चालू हो जाएंगे तो भारतीय नागरिकों को खुद से यात्रा करने के लिए सीमा जांच चौकियों की ओर बढ़ने की सलाह दी जाएगी.

दूतावास ने भारतीयों को अपना पासपोर्ट, नकदी (प्राथमिक रूप से डॉलर में), अन्य आवश्यक वस्तुएं और कोविड टीकाकरण प्रमाणपत्र सीमा जांच चौकियों पर अपने पास रखने की सलाह दी है.

दूतावास ने कहा है, ‘‘भारतीय ध्वज का (कागज पर) प्रिंट निकाल लें और यात्रा के दौरान वाहनों तथा बसों पर उन्हें चिपका दें.’’

यूक्रेन की राजधानी कीव और रोमानिया की सीमा के बीच करीब 600 किलोमीटर का फासला है और सड़क मार्ग से यह दूरी तय करने में साढ़े आठ से 11 घंटे लगते हैं.

रोमानियाई सीमा जांच चौकी से बुखारेस्ट करीब 500 किलोमीटर की दूरी पर है तथा सड़क मार्ग से उसे तय करने में करीब सात से नौ घंटे लगते हैं.

वहीं, कीव और हंगरी की सीमा के बीच करीब 820 किमी की दूरी है और इसे सड़क मार्ग से तय करने में 12-13 घंटे लगते हैं.

UNSC में प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा न लेकर संबंधित पक्षों तक पहुंचने का विकल्प खुला रखा – भारत

यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस की निंदा वाले प्रस्ताव पर भारत ने मतदान नहीं करके बीच का कोई रास्ता निकालने तथा बातचीत और कूटनीति को बढ़ावा देने के लिए सभी संबंधित पक्षों तक पहुंचने का विकल्प खुला रखा है.

दरअसल यूक्रेन के खिलाफ रूस के ‘आक्रामक बर्ताव’ की ‘कड़े शब्दों में निंदा’ करने वाले एक प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मतदान हुआ, जिसमें भारत ने हिस्सा नहीं लिया. सुरक्षा परिषद में यह प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से पेश किया गया था.

यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में पारित नहीं हो सका क्योंकि परिषद के स्थायी सदस्य रूस ने इस पर वीटो किया. सूत्रों ने कहा कि भारत यूक्रेन में हुए हालिया घटनाक्रम से बेहद चिंतित है और वह मतभेदों का एकमात्र हल बातचीत के जरिए संभव है के अपने ‘‘सतत और संतुलित’’ रुख पर कायम है.

प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लेने पर भारत ने ‘एक्सप्लनेशन ऑफ वोट’ जारी किया जिसमें उसने ‘‘ कूटनीति के रास्ते पर वापस लौटने’’ की अपील की.

सूत्रों ने बताया कि भारत ने देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही, साथ ही हिंसा और युद्ध को तत्काल रोकने की मांग की,जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बातचीत में मोदी ने पुतिन से कहा था.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन पर रूस के हमले से पैदा हुई स्थिति के मद्देनजर बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की और तत्काल हिंसा रोकने की अपील करते हुए सभी पक्षों से कूटनीतिक बातचीत और संवाद की राह पर लौटने के ठोस प्रयास करने का आह्वान किया था.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर सूत्रों ने बताया कि भारत ने सभी सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की मांग की ,क्योंकि ये रचनात्मक मार्ग मुहैया कराते हैं.

Russia Ukraine Conflict : यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को रोमानिया के रास्ते एयरलिफ्ट करेगी सरकार, कल रवाना होंगे एयर इंडिया के 2 विमान

केंद्र सरकार ने यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी के लिए एयर इंडिया के 2 विमान भेजने का फैसला किया है. एयर इंडिया ये दोनों विमान रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट के रास्ते भारतीयों को एयरलिफ्ट करेंगे.

खबर आ रही है कि भारतीय निकासी दल रोमानियाई सीमाओं पर पहुंच गए हैं, जहां से महज 12 घंटे ड्राइविंग करके यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचा जा सकता है. ये बचाव दल यूक्रेन में फंसे लोगों को पहले बुखारेस्ट लेकर आएगी फिर उन्हें विमान से स्वदेश रवाना किया जाएगा.

गौरतलब है कि बीते गुरुवार को विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने यूक्रेन में फंसे भारतीयों के परिवारों को आश्वासन देते हुए कहा था कि सरकार भारतीयों को वापस लाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है.

आपको बता दें कि यूक्रेन में उड़ानों पर ब्रेक लगने से बड़ी तादात में भारतीय फँसे हुए हैं. जिनमें यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे छात्रों की संख्या भी अच्छी ख़ासी है. तो वहीं रूस के हमले के बीच शुक्रवार को कई भारतीय नागरिकों ने कीव स्थित भारतीय दूतावास में शरण ली. हालाँकि दूतावास परिसर के आसपास गोलीबारी की भी खबरें हैं, लेकिन अभी तक किसी भी अप्रिय घटना की खबर नहीं है.

देश की रक्षा प्रणालियों में अनोखेपन और विशिष्टता का बहुत महत्व, घरेलू उत्पादन पर देना होगा जोर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि रक्षा प्रणालियों में अनोखेपन और विशिष्टता का बहुत महत्त्व है तथा दुश्मनों को सहसा चौंका देने वाले यह तत्व रक्षा उपकरणों में तभी संभव है, जब इन्हें अपने देश में विकसित किया जाए.

आम बजट-2022 में रक्षा क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधानों पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने साइबर जगत की चुनौतियों का भी उल्लेख किया और कहा कि साइबर सुरक्षा अब सिर्फ डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राष्ट्र की सुरक्षा का विषय बन चुकी है.

उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों से हथियार मंगाने की प्रक्रिया बहुत लंबी है, जिसकी वजह से हथियार भी समय की मांग के अनुकूल नहीं रहते और इसमें (हथियार सौदे में) भ्रष्टाचार तथा विवाद भी होते हैं, लिहाजा इसका समाधान ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ और ‘‘मेक इन इंडिया’’ में ही निहित है.

उन्होंने कहा कि वेबिनार का विषय ‘‘रक्षा में आत्मनिर्भरता, कॉल टू एक्शन’’ है और यह देश के इरादों को स्पष्ट करता है. उन्होंने कहा कि इस बार के आम बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधानों में से 70 प्रतिशत घरेलू उद्योगों के लिए रखा जाना सरकार की इसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा प्रणालियों में अनोखेपन और विशिष्टता का बहुत महत्त्व है क्योंकि यह दुश्मनों को सहसा चौंका देने वाले तत्त्व होते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘अनोखापन और चौंकाने वाले तत्त्व तभी आ सकते हैं, जब उपकरण को आपके अपने देश में विकसित किया जाये.’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘बीते कुछ वर्षों से भारत अपने रक्षा क्षेत्र में जिस आत्मनिर्भरता पर बल दे रहा है, उसकी प्रतिबद्धता इस बार के बजट में भी दिखी। इस साल के बजट में देश के भीतर ही शोध, डिजाइन और तैयारी से लेकर निर्माण तक का एक जीवंत माहौल बनाने का खाका है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा बजट में लगभग 70 प्रतिशत सिर्फ घरेलू उद्योगों के लिए रखा गया है.’’

मोदी ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने अब तक 200 से अधिक रक्षा प्लेटफॉर्म और उपकरणों की सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां जारी की हैं तथा इसके बाद स्वदेशी खरीद के लिये 54 हजार करोड़ रुपये की संविदाओं पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा 4.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की उपकरण खरीद प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब बाहर से हथियार मंगाये जाते हैं तो इसकी प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि सुरक्षाबलों तक पहुंचने तक उनमें से कई हथियार समय की मांग के अनुरूप नहीं रहते. उन्होंने कहा, ‘‘इसका समाधान भी ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ और ‘मेक इन इंडिया’ में ही है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले पांच-छह सालों में रक्षा निर्यात में छह गुणा की वृद्धि हुई है और आज भारत 75 से भी ज्यादा देशों को ‘‘मेड इन इंडिया’’ रक्षा उपकरण और सेवाएं मुहैया करा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘मेक इन इंडिया को यह सरकार के प्रोत्साहन का परिणाम है कि पिछले सात सालों में रक्षा निर्माण के लिए 350 से भी अधिक नए औद्योगिक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं. जबकि 2001 से 2014 तक, चौदह वर्षों में सिर्फ 200 लाइसेंस जारी हुए थे.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी से पहले और उसके बाद भी भारत की रक्षा निर्माण की ताकत बहुत ज्यादा थी और द्वितीय विश्व युद्ध में भारत में बने हथियारों ने बड़ी भूमिका भी निभाई थी.

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि बाद के वर्षों में हमारी यह ताकत कमजोर होती चली गई, लेकिन यह प्रदर्शित करता है कि भारत में क्षमता की कमी ना तब थी, और ना अब है.’’

प्रधानमंत्री ने साइबर सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा, “अपनी अदम्य आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) शक्ति को हम अपने रक्षा क्षेत्र में जितना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, उतनी ही अधिक सुरक्षा के प्रति हम आश्वस्त होंगे.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियारों और उपकरणों के मामलों में जवानों के गौरव एवं उनकी भावना को ध्यान में रखने की जरूरत है और यह तभी संभव होगा, जब हम इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनेंगे.

Russia-Ukraine Crisis : रूस के हमले के बाद यूक्रेन में भारतीय छात्रों ने तहखाने में शरण ली,निकाले जाने की अपील की

यूक्रेन में रूस की सीमा से लगते सूमी शहर पर रूसी सैनिकों के कब्जे के बाद कम से कम 400 भारतीय छात्रों ने एक तहखाने में शरण ली है और भारत सरकार से उन्हें निकालने की अपील की है.

इनमें अधिकतर सूमी स्टेट मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं. उन्होंने कहा कि बाहर गोलियों की आवाजें सुनाई देने के कारण उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है.

छात्र ललित कुमार ने कहा, ‘‘ इस वक्त हम अपने छात्रावास के तहखाने में छिपे हुए हैं और हमें नहीं पता कि यहां हम कब तक सुरक्षित रह पाएंगे. हम भारत सरकार से हमें यूक्रेन के पूर्वी इलाके से सुरक्षित निकालने की अपील करते हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ अपने आप यात्रा करना संभव नहीं है. यहां मार्शल लॉ लागू है, जिसका मतलब है कि कोई बाहर नहीं जा सकता, कार, बस और निजी वाहन नहीं निकल सकते. एटीएम और सुपर मार्केट भी बंद हैं.’’

छात्रों ने उस तहखाने का वीडियो भी साझा किया जहां वे छिपे हुए हैं. कुमार ने कहा, ‘‘ हमारे पास यहां ज्यादा सामान नहीं है कि हम लंबे समय तक यहां नहीं टिक पाएंगे. भारत सरकार हमारी आखिरी उम्मीद है….हम अपने देश वापस जाना चाहते हैं और अपने लोगों से मिलना चाहते हैं. हमारी मदद कीजिए.’’ (With PTI Input)

हम परिवार वाले भले नहीं है मगर परिवार का दर्द समझते हैं : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने मुस्लिम बेटियों की पीड़ा को समझते हुए तीन तलाक रोधी कानून बनाया है; ‘‘ वह परिवार वाले भले नहीं हैं लेकिन हर परिवार के दर्द को समझते हैं.’’

मोदी ने बाराबंकी में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित एक जनसभा में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए उनका नाम लिए बगैर कहा, “जो दावा करते हैं कि वह तो परिवार वाले हैं मगर उन्हें तीन तलाक पीड़िताओं का दर्द क्यों नहीं दिखा. मेरी मुस्लिम बहनों, बेटियों को छोटे-छोटे बच्चे लेकर पिता के घर लौटना पड़ता था, तब तुम्हें परिवार का दर्द क्यों समझ नहीं आया. हम परिवार वाले नहीं हैं लेकिन हर परिवार के दर्द को पहचानते हैं.”

उन्होंने आरोप लगाया कि घोर परिवारवादी लोगों ने वोट बैंक की वजह से मुस्लिम बेटियों के जीवन की पहाड़ जैसी दिक्कतों को देखने की भी फुर्सत नहीं निकाली. उन्होंने कहा कि यह हमारी ही सरकार है जिसने इन मुस्लिम बहनों को तीन तलाक के कुचक्र से मुक्त किया है.

मोदी ने कहा कि माता-पिता और भाई बड़े अरमानों के साथ बेटी की शादी कर उसे विदा करते हैं लेकिन वही बेटी पांच 10 साल बाद तीन तलाक सुनकर घर लौट आती है तो आप कल्पना कर सकते हैं कि उस बेटी के मां-बाप और भाई पर क्या बीतती होगी. उन्होंने कहा, ‘‘तुम परिवार वाले हो अरे तुम्हें तो इस दर्द का पता चलना चाहिए था लेकिन तुम्हें नहीं पता चला क्योंकि तुम्हें सिर्फ बैलट बॉक्स ही दिखता है, तुम्हें किसी की जिंदगी नहीं दिखती.”

गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पिछले दिनों बिजनौर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान परिवारवाद के आरोप पर मोदी को जवाब देते हुए कहा था कि जिनके पास परिवार होता है वे ही एक परिवार का दर्द समझ सकते हैं.

प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों पर उत्तर प्रदेश के सामर्थ्य के साथ इंसाफ नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश में इतने दशकों तक जिन घोर परिवारवादियों की सरकारें रहीं उन्होंने उत्तर प्रदेश के सामर्थ्य के साथ इंसाफ नहीं किया. इन परिवारवादियों ने उत्तर प्रदेश के लोगों को कभी खुलकर अपना सामर्थ्य दिखाने का अवसर ही नहीं दिया.”

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का सामर्थ्य बढ़ाने में यहां की 10 करोड़ से अधिक हमारी बहनों और बेटियों की बहुत बड़ी भूमिका है. उन्होंने कहा कि अगर हमारी बेटियां बंधन में रहेंगी, उनका जीवन अगर मुसीबतों से भरा रहेगा तो उत्तर प्रदेश तेज विकास की गति प्राप्त नहीं कर सकता.

मोदी ने कहा कि हमारी बहनों और बेटियों की समस्याओं को इन लोगों ने छोटा समझा, मगर हमने इन्हें छोटा नहीं समझा, इन्हें सशक्त करना हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है फिर चाहे घरों में शौचालय हो, गैस कनेक्शन हो बिजली, पानी का कनेक्शन हो.

मोदी ने दावा करते हुए कहा कि जितनी सुविधाएं हमने बहनों को दी हैं यह किसी की जाति या मजहब देखकर नहीं दी है. उन्होंने कहा कि अगर इन योजनाओं का सबसे अधिक फायदा किसी को मिला है तो हमारी दलित माताओं, बहनों, पिछड़े समाज की माताओं बहनों और मुस्लिम समाज के बहनों को मिला है.

उन्होंने दावा किया कि पांच साल पहले उत्तर प्रदेश में करीब 11,000 महिला पुलिसकर्मी थीं जबकि गत पांच साल में ही भाजपा सरकार ने लगभग 20,000 नई बेटियों को भर्ती दी है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि सिर्फ पुलिस में ही नहीं बल्कि सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों तथा सेना में भी बेटियों की भागीदारी का विस्तार किया जा रहा है.

Board Exams 2022 : 10वीं, 12वीं कक्षाओं की ऑफलाइन बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने की याचिका पर आज सुनवाई

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह 10वीं और 12वीं कक्षाओं के लिए सीबीएसई और कई अन्य बोर्ड की ऑफलाइन बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करेगा.

न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘पाठ्यक्रम पूरा किए बिना परीक्षा कैसे करायी जा सकती है.’’

इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा था कि Covid-19 की स्थिति में सुधार हुआ है लेकिन पाठ्यक्रम अभी पूरा नहीं हुआ है.

पीठ ने कहा कि याचिका की अग्रिम प्रति केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और अन्य संबंधित प्रतिवादियों के स्थायी वकील को दी जाए। उसने कहा, ‘‘हम इस पर कल सुनवाई करेंगे.’’

याचिकाकर्ता अनुभा श्रीवास्तव सहाय की ओर से पेश वकील ने मामले को रखा और पीठ से इस पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के संबंध में 2020 और 2021 तथा इस साल भी आदेश पारित किए थे, मुख्य समस्या यही है.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल आपके समक्ष एक योजना रखी गयी थी. इस साल भी हमें ऐसा ही समाधान चाहिए, वरना यह खींचने जा रहा है.’’ उन्होने कहा कि इससे आगे दाखिलों पर असर पड़ेगा और छात्रों का भविष्य भी खतरे में होगा.

पीठ ने वकील से पूछा कि परीक्षाएं शुरू हो गयी है या शुरू होनी है. इस पर उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश बोर्ड की परीक्षा शुरू हो गयी है. उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना की स्थिति में सुधार आया है लेकिन कक्षाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं…पाठ्यक्रम पूरा होने से पहले आपको परीक्षा नहीं करानी चाहिए. सीबीएसई ने कोई योजना का प्रस्ताव नहीं रखा है.’’

याचिका में सीबीएसई और अन्य शिक्षा बोर्ड को अन्य माध्यमों से परीक्षा कराने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. सीबीएसई और अन्य शिक्षा बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के लिए ऑफलाइन माध्यम से बोर्ड परीक्षाएं कराने का प्रस्ताव दिया है.

सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं कक्षा के लिए 26 अप्रैल से बोर्ड परीक्षाएं कराने का फैसला किया है.

‘संसद रत्न पुरस्कार’ के लिए सुप्रिया सुले और अमर पटनायक समेत 11 सांसदों का चयन

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सुप्रिया सुले और बीजू जनता दल (बीजद) के अमर पटनायक सहित 11 सांसदों को इस साल का ‘संसद रत्न पुरस्कार’ दिया जाएगा.

‘प्राइम प्वांइट फाउंडेशन’ की निर्णायक समिति ने तमिलनाडु से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एच.वी. हांडे और कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार के लिए नामित किया है.

इसके साथ ही कृषि, वित्त, शिक्षा और श्रम से संबंधित संसद की चार समितियों को उनके योगदान के लिए पुरस्कृत किया जाएगा.

फाउंडेशन ने एक बयान में कहा कि जिन 11 सांसदों का चयन ‘संसद रत्न पुरस्कार’ के लिए किया गया है, उनमें लोकसभा के आठ और राज्यसभा के तीन सदस्य शामिल हैं.

बयान के मुताबिक, राकांपा की सुप्रिया सुले, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन.के. प्रेमचंद्रन और शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बार्ने को उनके सतत उत्कृष्ट कामकाज के लिए ‘संसद विशिष्ट रत्न’ पुरस्कार दिया जाएगा.

तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, कांग्रेस सांसद कुलदीप राय शर्मा (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह), भाजपा के विद्युत बरन महतो (झारखंड), हिना गावित (महाराष्ट्र) और सुधीर गुप्ता (मध्य प्रदेश) के नामों को 17वीं लोकसभा में उनके कामकाज के लिए ‘‘संसद रत्न पुरस्कार’’दिया जाएगा.

बीजद के अमर पटनायक और राकांपा की फौजिया अहमद खान को ‘वर्तमान सदस्य’ की श्रेणी में इस पुरस्कार के लिए सूचीबद्ध किया गया है. माकपा सदस्य केके रागेश को उनके कार्यकाल के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2021 में ‘अवकाशप्राप्त सदस्य’ की श्रेणी में इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया है.

‘प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन’ के संस्थापक प्रमुख के. श्रीनिवास ने बताया कि वर्तमान लोकसभा के आरंभ से लेकर पिछले साल हुए शीतकालीन सत्र के दौरान कामकाज के आधार पर सांसदों को इस पुरस्कार के लिए सूचीबद्ध किया गया है.

संसद रत्न पुरस्कार समिति की अध्यक्षता संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सह-अध्यक्षता पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति ने की.

इन पुरस्कारों की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सुझावों के मद्देनजर की गई थी. उनका सुझाव भारतीय संसद में ‘‘सबसे बेहतरीन प्रदर्शन’’ करने वाले सांसदों को सम्मानित करने का था.

यह ‘‘प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन’’ और ई-पत्रिका प्रीसेंस द्वारा 2010 में स्थापित एक निजी पुरस्कार है. पहला पुरस्कार कार्यक्रम 2010 में चेन्नई में हुआ था. अभी तक 75 सांसदों को इस पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.

भाजपा के लिए मतदान करें, यह चुनाव मणिपुर के अगले 25 सालों का भविष्य तय करेगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार ने पूरी ईमानदारी से मणिपुर के विकास का प्रयास किया है और बड़ी ‘‘मेहनत’’ से आगामी 25 साल के लिए उसके विकास की एक ‘‘ठोस नींव’’ तैयार की है.

एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि पिछले पांच साल में राज्य में स्थिरता और शांति बहाल करने की जो प्रक्रिया शुरु हुई है, उसे अब स्थायित्व देना है और इसके लिए भाजपा की सरकार बनाना जरूरी है.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले महीने मणिपुर ने अपनी स्थापना के 50 साल पूरे किए. इस अवधि में राज्य की जनता ने बहुत सारी सरकारें देखीं और उनके कामकाज देखे. लेकिन कांग्रेस शासन के दशकों बाद भी मणिपुर को असमानता और असंतुलित विकास ही मिला.’’

मोदी ने कहा कि पिछले पांच वर्ष में राज्य की जनता ने भाजपा का ‘‘सुशासन’’ और विकास के प्रति उसका ‘‘नेक इरादा’’ भी देखा है. उन्होंने कहा, ‘‘बीते पांच साल में भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने मणिपुर के विकास का पूरी ईमानदारी से प्रयास किया है. हमने जो मेहनत की है, उसने आने वाले 25 साल के लिए इस राज्य के विकास की एक ठोस नींव बनाई है. इसलिए यह चुनाव आने वाले 25 साल का भविष्य निर्धारित करेगा.’’

प्रधानमंत्री ने पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं का आह्वान किया कि वे इस बार के चुनाव में ‘‘कमल’’ का बटन दबाएं क्योंकि वे सरकार के एजेंडे में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.

मोदी ने कहा, ‘‘स्थिरता और शांति की जो प्रक्रिया इन पांच सालों में शुरु हुई है, उसे अब हमें स्थायित्व देना है. इसलिए मणिपुर में भाजपा के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बननी आवश्यक है.’’

अहमदाबाद में 2008 में हुए बम धमाकों के मामले में 38 दोषियों को मृत्युदंड, 11 को उम्रकैद की सजा

अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने शहर में 2008 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में 38 दोषियों को मौत की सजा सुनायी. इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गयी थी और 200 से अधिक घायल हो गए थे.

अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के प्रावधानों ओर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 49 दोषियों में से 38 को मौत की सजा सुनायी. बाकी के 11 दोषियों को मौत तक उम्रकैद की सजा सुनायी गयी.

न्यायाधीश ए आर पटेल ने धमाकों में मारे गए लोगों को एक-एक लाख रुपये तथा गंभीर रूप से घायलों में से प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये तथा मामूली रूप से घायलों को 25-25 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया.

अदालत ने 48 दोषियों में से प्रत्येक पर 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.

न्यायाधीश पटेल ने हत्या, राजद्रोह और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने समेत भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों और यूएपीए तथा विस्फोटक पदार्थ कानून के प्रावधानों के तहत कुल 78 आरोपियों में 49 को आठ फरवरी को दोषी ठहराया था.

गौरतलब है कि शहर में सरकारी सिविल अस्पताल, अहमदाबाद नगर निगम द्वारा संचालित एलजी हॉस्पिटल, बसों में, पार्किंग में खड़ी मोटरसाइकिलों, कारों तथा अन्य स्थानों पर 26 जुलाई 2008 को एक के बाद एक धमाके हुए थे जिसमें 58 लोगों की मौत हो गयी थी.