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हम भविष्य के संघर्षों की कुछ झलकियां देख रहे हैं : सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे

सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने चीन और पाकिस्तान की ओर से पेश राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर बृहस्पतिवार को कहा कि भारत अभी भविष्य के संघर्षों की कुछ झलकियां देख रहा है और उसके विरोधी अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयास लगातार जारी रखेंगे.

जनरल नरवणे ने एक संगोष्ठी को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि भारत अलग तरह की, कठिन तथा बहु-स्तरीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और उत्तरी सीमा पर घटनाक्रम ने पूरी तरह से तैयार और सक्षम बलों की जरूरत को रेखांकित किया है.

चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना सेना प्रमुख ने कहा कि परमाणु-सक्षम पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद साथ ही राज्य प्रायोजित छद्म युद्ध ने सुरक्षा तंत्र एवं संसाधनों के समक्ष चुनौतियां बढ़ा दी हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘ हम अभी भविष्य के संघर्षों की झलकियां देख रहे हैं. सूचना के क्षेत्र, नेटवर्क और साइबर स्पेस में भी हमें इसके सबूत दिखाई दे रहे हैं. विवादित सीमाओं पर भी ये सब दिखाई दे रहा है.’’

सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘ इन झलकियों के आधार पर हमें भविष्य के लिए तैयार होना होगा. यदि आप आस पास देखेंगे, तो आपको आज की हकीकत का एहसास होगा.’’

सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी सीमा पर ताजा घटनाक्रम देश की संप्रभुता एवं अखंडता को बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक वाले साजो-सामान से लैस सक्षम बलों की जरूरत को रेखांकित करते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे विरोधी अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयास जारी रखेंगे… जैसे राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक क्षेत्रों में ‘ग्रे ज़ोन’ गतिविधियों के जरिए संघर्ष उत्पन्न करना.’’

पूर्वी लद्दाख में गतिरोध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ 2020 की घटनाएं सभी क्षेत्रों में विविध सुरक्षा खतरों की गवाही देती है और इसने गैर-संपर्क (साइबर स्पेस आदि) और ग्रे ज़ोन युद्ध की ओर ध्यान आकर्षित किया है.’’

‘ग्रे-ज़ोन’ युद्ध से तात्पर्य राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने के लिए सावधानीपूर्वक कोई अभियान चलाना है. चीन का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ राष्ट्र विश्व स्तर पर स्वीकृत मानदंडों और नियम आधारित व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं.

जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम ने फिर से छद्म और सरकार से इतर तत्वों के इस्तेमाल पर ध्यान आकृष्ट किया है.

उन्होंने कहा कि थिएटर कमान बना कर तीन सेनाओं का एकीकरण करने पर काम चल रहा और भारतीय सेना इस बदलाव के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. सेना प्रमुख ने कहा कि हम अपने बलों के पुनर्गठन , पुनर्संतुलन आदि पर ध्यान केन्द्रित कर रहे  हैं.

देश में Covid-19 के 1,72,433 नए मामले, 1008 और लोगों की मौत

भारत में एक दिन में Covid-19 के 1,72,433 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस के कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,18,03,318 हो गई. वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 15,33,921 रह गई है.

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में 1008 और लोगों की संक्रमण से मौत के बाद, कोविड महामारी से जान गंवाने वालों संख्या बढ़कर 4,98,983 हो गई. इनमें से मौत के 500 मामले केरल के हैं. देश में अभी 15,33,921 लोगों का कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो संक्रमण के कुल मामलों का 3.67 प्रतिशत है. पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 87,682 कमी दर्ज की गयी. देश में मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 95.14 प्रतिशत है.

अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 10.99 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 12.98 प्रतिशत दर्ज की गई. देश में अभी तक कुल 3,97,70,414 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और Covid-19 से मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है.

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक Covid-19 रोधी टीकों की 167.87 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं.

देश में सात अगस्त 2020 को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी. संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे.

देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ के पार हो गए थे. पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ के पार और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी. इस साल 26 जनवरी को मामले चार करोड़ के पार पहुंच गए.

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण से मौत के 1008 मामले सामने आए. इनमें से केरल में 500 और कर्नाटक में 81 लोगों की जान गई.

केरल सरकार ने बताया कि राज्य में सामने आए मौत के 1008 मामलों में से 29 पिछले 24 घंटे में और 136 मामले पिछले कुछ दिनों में सामने आए थे, लेकिन दर्ज नहीं हो पाए थे. वहीं, मौत के 335 मामलों को केन्द्र तथा उच्चतम न्यायालय के नए दिशानिर्देशों के आधार पर Covid-19 से मौत के मामलों में जोड़ा गया है.

आंकड़ों के अनुसार, देश में संक्रमण से अभी तक कुल 4,98,983 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से महाराष्ट्र के 1,42,784, केरल के 56,100, कर्नाटक के 39,137, तमिलनाडु के 37,636, दिल्ली के 25,919, उत्तर प्रदेश के 23,254 और पश्चिम बंगाल के 20,687 लोग थे.

Pfizer ने पांच साल तक के बच्चों के लिए Covid-19 रोधी टीके को मंजूरी देने को कहा

फाइजर ने अमेरिका से पांच साल तक की आयु वाले बच्चों के लिए उसके Covid-19 रोधी टीके को स्वीकृति देने के लिए कहा है, जिससे बेहद कम उम्र के अमेरिकी बच्चों को भी मार्च तक टीके लगाने की शुरुआत हो सकती है.

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए फाइजर तथा उसके सहयोगी बायोएनटेक से पूर्व नियोजित कार्यक्रम से पहले ही आवेदन करने के लिए कहा था.

देश में पांच साल तक के आयुवर्ग के 1.9 करोड़ बच्चे ही कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण के योग्य नहीं है. कई अभिभावक बच्चों को भी टीके लगाने पर जोर दे रहे हैं खासतौर से ऐसे वक्त में जब ओमीक्रोन संक्रमण के कारण रिकॉर्ड संख्या में बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

अगर एफडीए स्वीकृति देता है तो फाइजर के टीके छह महीने तक के बच्चे को भी लगाए जा सकते हैं. इन टीकों की खुराक वयस्कों को दी जाने वाली खुराक का दसवां हिस्सा है. फाइजर ने बुधवार को कहा कि उसने एफडीए को आंकड़ें देना शुरू कर दिया है और उसे कुछ दिनों में यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है.

एक प्रमुख सवाल यह है कि इन बच्चों को कितनी खुराक देने की आवश्यकता होगी. प्रारंभिक जांच में शिशुओं के लिए दो खुराकें पर्याप्त मानी गयी लेकिन स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों के लिए यह पर्याप्त नहीं मानी गयी. फाइजर तीन खुराकों की जांच कर रहा है और अंतिम आंकड़ें मार्च अंत तक आने की उम्मीद है.

एफडीए ने ओमीक्रोन से अधिक संख्या में बच्चों के संक्रमित होने के कारण फाइजर से आवेदन देने के लिए कहा था. एजेंसी की एक प्रवक्ता ने बताया कि पांच साल तक की आयु के बच्चों में ओमीक्रोन स्वरूप के रिकॉर्ड मामले सामने आए हैं.

एफडीए का अंतिम फैसला कुछ महीनों के भीतर आ सकता है लेकिन यह एकमात्र बाधा नहीं हैं. रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र से भी मंजूरी लेनी होगी.

राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन बच्चों के लिए Covid-19 रोधी टीके की खुराक को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज करने की कोशिश कर रहा है. उसकी दलील है कि स्कूलों को फिर से खोलने तथा उन्हें खुला रखने के लिए इस आयु वर्ग का टीकाकरण महत्वपूर्ण है.

सरकार अपना ही गुणगान करने में मग्न, आम लोगों की समस्याओं की उसे परवाह नहीं : कांग्रेस

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर अपना ही गुणगान करते रहने एवं आम लोगों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के नेताओं ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि न तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद गंगा साफ हुई, न ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद वहां आतंकी हिंसा में कमी आई, उल्टे देश भर में महंगाई और बेरोजगारी ने कोविड के कारण पहले से ही परेशान आम लोगों की कमर तोड़ कर रख दी.

राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर उच्च सदन में चर्चा में हिस्सा लेते हुए सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया ‘‘राष्ट्रपति का यह अभिभाषण न तो कोई नीतिगत दस्तावेज है और न ही उसमें कोई दृष्टिकोण है. इसमें सरकार ने केवल अपनी उपलब्धियों का ही बखान किया है. जनता के बुनियादी मसले जैसे महंगाई, बेरोजगारी, अनुसूचित जाति जनजाति समुदाय के लोगों के साथ ज्यादतियां आदि यथावत हैं जिनका इसमें कोई जिक्र ही नहीं है.’’

सरकार पर ‘‘काम कम करने और प्रचार ज्यादा करने’’ का आरोप लगाते हुए खड़गे ने कहा ‘‘आज लोकतंत्र खतरे में है. स्थिति यह है कि सच बोलने वाले को देशद्रोही करार दे दिया जाता है. बार बार हम पर सवाल उठाया जाता है कि हमने 70 साल में क्या किया ? अगर हमने 70 साल में कुछ नहीं किया होता तो यह सवाल करने वाले लोग ऊंचे पदों पर नहीं बैठे होते.’’

उन्होंने कहा कि सरकार को बहुत कुछ विरासत में मिला लेकिन वह ‘‘हमारे किए गए कामों का श्रेय स्वयं ले रही है और हम पर इतने साल तक कुछ नहीं करने का आरोप लगाती है.’’

खड़गे ने बेरोजगारी का जिक्र करते हुए कहा ‘‘2014 में आपने कहा था कि हर साल दो करोड़ लोगों को नौकरियां दी जाएंगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. नौकरियां तो दी नहीं गईं, उल्टे बेरोजगारी ही तेजी से बढ़ी. आज करीब नौ लाख सरकारी पद खाली हैं. रेलवे में 15 प्रतिशत, रक्षा में 40 प्रतिशत पद खाली हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में भी रिक्तियां हैं. पांच साल में केवल 60 लाख लोगों को ही नौकरी मिली. ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 7.9 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में नौ प्रतिशत है. एमएसएमई क्षेत्र में 60 प्रतिशत इकाइयां बंद पड़ी हैं.’’

खड़गे जब अपनी बात रख रहे थे तब सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे.

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का जिक्र करते हुए खड़गे ने कहा ‘‘इसे कभी आपने (मोदी ने) हमारी विफलता का जीता-जागता स्मारक बताया था. लेकिन हमारा यही मनरेगा कोविड काल में गरीबों के लिए सबसे मददगार साबित हुआ. इसके बावजूद इसे 73 हजार करोड़ रुपये का आवंटन मिला. आपने 100 दिन के रोजगार का और कोविड काल में 150 दिन के रोजगार का वादा किया था लेकिन केवल 20 दिन का ही रोजगार दिया गया.’’

उन्होंने आरोप लगाया कि अभिभाषण में महंगाई का जिक्र ही नहीं है जबकि 2021 में 12 साल का रिकार्ड टूट गया और मुद्रास्फीति आज 14.23 प्रतिशत है. उन्होंने कहा ‘‘कच्चे तेल की कीमत घटने के बाद भी पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ते गए. सरकार ने पेट्रोल डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा कर 25 लाख करोड़ रुपये कमाए. लेकिन पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ते गए और इसकी वजह से हर चीज महंगी होती गई. एलपीजी के दाम 117 प्रतिशत बढ़े। 2014 में एक सिलिंडर की कीमत 414 रुपये थी जो आज 1000 रुपये हो गई. क्या यही अच्छे दिन हैं ?’’

खड़गे ने कहा कि महांगई इतनी बढ़ गई है कि आम आदमी के लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया है. ‘‘महंगाई, बेरोजगारी बढ़ रही है फिर अच्छे दिन कहां हैं? भुखमरी सूचकांक में 116 देशों में भारत 101 पायदान पर है.’’

उन्होंने कहा कि गहन विचार विमर्श के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा कानून ले कर आई थी.

उन्होंने कहा ‘‘2013 में चीन के साथ सीमा पर तनाव के दौरान तत्कालीन विपक्ष की ओर से कहा गया था कि सरकार लाल आंखें कर चीन को समझाए. लेकिन आज चीन हमारी जमीन पर अतिक्रमण कर रहा है तब सरकार की आंखें लाल क्यों नहीं होतीं? आज सरकार ने क्यों मौन धारण कर रखा है? सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए. सीमा पर भारत के कई सैनिकों की जान जा चुकी है. ’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा ‘‘2013 में चीन के साथ आयात तीन लाख आठ हजार करोड़ रुपये था. आज सात लाख 20 हजार करोड़ रुपये का आयात हो रहा है. जबकि व्यापार घाटा लगातार बढ़ा है. इसे आत्मनिर्भरता कहना ठीक होगा या चीन पर निर्भरता कहना ठीक होगा ? यह स्थिति ‘मेक इन इंडिया’ की घोषणा के बाद है. ’’ उन्होंने इसे सरकार की असफलता करार दिया.

उन्होंने सरकार पर निजीकरण की ओर अधिक ध्यान देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा ‘‘एयर इंडिया तो घाटे में था. लेकिन एलआईसी तो घाटे में नहीं है. इसी तरह के, सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य उपक्रम हैं जिन्हें घाटे में बता कर निजीकरण की राह दिखाई जा रही है.’’

खड़गे ने कहा कि सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुना करने का वादा किया था. ‘‘लेकिन आज उनकी दोगुना आमदनी की बात तो छोड़ दें, अभिभाषण में उनका जिक्र ही नहीं है. तीन कृषि कानूनों के विरोध में एक साल से अधिक समय तक किसानों ने धरना दिया और इस दौरान सात सौ किसानों की जान गई. अगर सरकार तीनों कृषि कानून पहले ही वापस ले लेती तो इन किसानों की जान बच सकती थी.’’

उन्होंने कहा ‘‘किसानों की आमदनी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवार वालों को मुआवजा दिया जाना चाहिए. आंदोलन कर रहे किसानों के लिए आतंकवादी जैसे शब्दों का उपयोग किया गया और एक मंत्री के बेटे ने तो लखीमपुर में किसानों को वाहन से कुचल दिया. लेकिन यह सब करने वालों पर कोई कार्रवाई उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नहीं की गई.’’

नेता प्रतिपक्ष ने दलितों पर अत्याचार होने का दावा करते हुए कहा ‘‘2015 से लेकर 2020 के दौरान अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराध में 30 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अपराध में 26 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप की रकम छह करोड़ रुपये थी जो आज घटाकर आधे से भी कम की जा चुकी है. ईसाई समुदाय के लोगों पर धर्मांतरण और विभिन्न आरोपों में हमले बढ़े हैं. उनके पूजा स्थलों पर हमले हुए हैं. कर्नाटक में तो धर्मांतरण रोधी विधेयक लाया गया. यह अल्पसंख्यकों को परेशान करने वाली बात है. यह देश के लिए अच्छा नहीं है.’’

उन्होंने दावा किया कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में करीब 500 आतंकी घटनाएं हुई हैं तथा करोड़ों रूपये खर्च करने के बाद भी गंगा मैली ही है.

खड़गे ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह बड़ी आबादी के कोविड रोधी टीकाकरण का श्रेय ले रही है लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण में करीब 47 फीसदी टीकाकरण की बात कही गई है. उन्होंने सरकार पर कोविड से जान गंवाने वालों के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि गंगा नदी में शवों के बहने की तस्वीरें हृदय विदारक थीं. उन्होंने कोविड महामारी में जान गंवाने वालों को समुचित मुआवजा दिए जाने की मांग की. उन्होंने ‘‘पीएम केयर्स’’ कोष का हिसाब दिए जाने की मांग भी की.

उन्होंने तीन श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि ये कानून श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं. इन कानूनों के कारण श्रमिक न तो हड़ताल कर सकते हैं और न ही उनकी नौकरी सुरक्षित रह पाती है.

उन्होंने सरकार पर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सीबीआई, ईडी आदि का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा ‘‘सत्ताधारी दल से जब कोई विपक्षी दल में आता है तो उसके खिलाफ कई मामले खुल जाते हैं. लेकिन विपक्षी दल से जब कोई आपके दल में जाता है तो संबंधित राज्य में न केवल आपकी सरकार बन जाती है बल्कि उसके खिलाफ फाइल खुलती भी नहीं.’’

बजट का जोर गरीब, मध्यम वर्ग, युवाओं को आय के स्थायी समाधानों से जोड़ने पर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि संसद में मंगलवार को पेश किए गए आम बजट का जोर गरीब, मध्यम वर्ग और युवाओं को बुनियादी सुविधाएं देने और आय के स्थाई समाधानों से जोड़ने पर है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से वर्ष 2022-23 के आम बजट पर आयोजित कार्यक्रम ‘‘आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था’’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बहुत जरूरी है कि भारत आत्मनिर्भर बने और उस आत्मनिर्भर भारत की नींव पर एक आधुनिक भारत का निर्माण हो.

उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जैसे पूरी दुनिया बदल गई थी, उसी प्रकार कोरोना महामारी के बाद भी दुनिया में बहुत सारे बदलाव की संभावना है और एक नयी विश्व व्यवस्था तैयार होगी.

बजट के विभिन्न प्रावधानों का विस्तार से उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे ‘‘जीवन की सुगमता’’ और ‘‘व्यवसाय की सुगमता’’ को एक नया आयाम मिलेगा.

उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था दो लाख 30 हजार करोड़ रुपये की है और यह दर्शाता है कि ‘‘हमारी बुनियाद मजबूत हैं, दिशा सही है और गति तेज है’’.

कोरोना महामारी और उसके दुष्प्रभावों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संक्रमण का यह कालखंड पूरी दुनिया के लिए एक प्रकार से क्रांतिकारी परिवर्तन है और इससे बहुत सारे बदलाव होने की संभावना है.

वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले सात वर्ष में सरकार ने जो निर्णय लिए और जो नीतियां बनाईं तथा पहले की जिन नीतियों में सुधार किए, उसकी वजह से आज भारत की अर्थव्यवस्था का निरंतर विस्तार हो रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘सात-आठ साल पहले भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक लाख 10 हजार करोड़ रुपए था. आज भारत की अर्थव्यवस्था दो लाख 30 हजार करोड़ के आसपास की है.’’

उन्होंने कहा कि यह समय भारत के लिए नए सिरे से तैयारी का, नए अवसरों का और नए संकल्पों की सिद्धि का है.

उन्होंने कहा, ‘‘बहुत जरूरी है कि भारत आत्मनिर्भर बने और उस आत्मनिर्भर भारत की नींव पर एक आधुनिक भारत का निर्माण हो.’’

बजट घोषणा के विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों से आज देश में करीब-करीब 9 करोड़ ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचने लगा है और इसमें से करीब 5 करोड़ से ज्यादा पानी के कनेक्शन, जल जीवन मिशन के तहत पिछले 2 वर्ष में दिए गए हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘अब बजट में घोषणा की गई है कि इस साल करीब 4 करोड़ ग्रामीण घरों को पाइप से पानी का कनेक्शन दिया जाएगा. इस पर 60 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जाएंगे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस बजट का भी जोर गरीब, मध्यम वर्ग और युवाओं को बुनियादी सुविधाएं देने और आय के स्थाई समाधानों से जोड़ने पर है.’’

प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा नदी जोड़ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार के बजट में इसके लिए हजारों करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है और इससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर भी बदलने वाली है.

उन्होंने कहा, ‘‘अब बुंदेलखंड के खेतों में और हरियाली आएगी, घरों में पर्याप्त पीने का पानी आएगा, कृषि के लिए खेतों में पानी आएगा.’’

प्रधानमंत्री के संबोधन का एक बड़ा हिस्सा कृषि और किसानों को इस बजट से होने वाले फायदों पर केंद्रित रहा.

उन्होंने कहा कि देश की कृषि को प्रौद्योगिकी आधारित और रसायन मुक्त बनाने के लिए बड़े कदम इस बजट में उठाए गए हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले बजट में हमने किसान रेल और किसान उड़ान की सुविधा सुनिश्चित की और अब किसान ड्रोन किसान का नया साथी बनने वाला है.’’

ज्ञात हो कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया. इसमें किसानों को डिजिटल और हाई-टेक सेवाओं के वितरण के लिए किसान ड्रोन, रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने का प्रस्ताव किया गया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर अनेक प्रकार की बातें फैलाई गईं हैं लेकिन सरकार ने पिछले सालों एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीदी की है.

उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ धान की ही बात करें तो इस सत्र में किसानों को एमएसपी के रूप में डेढ़ लाख करोड़ रुपए से अधिक मिलने का अनुमान है.’’

उन्होंने कहा कि हर साल लाखों करोड़ रुपए खाद्य तेल खरीदने के लिए विदेश भेजा जाता है, लिहाजा इसका लाभ देश के किसानों को मिले, इसके लिए विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने का एक बड़ा अभियान निरंतर चल रहा है, जिसके माध्यम से खेत में ही सोलर पैनल लगाने के लिए मदद दी जा रही है. अब हम प्राकृतिक खेती गलियारे पर काम कर रहे हैं. यह गलियारा 2500 किलोमीटर का होगा. उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मां गंगा के किनारे 5 किलोमीटर चौड़ा नेचुरल फार्मिंग का कॉरिडोर तैयार किया जाएगा.’’

बजट में पर्वतमाला परियोजना की घोषणा का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इससे हिमालय के क्षेत्रों में आधुनिक संपर्क और आधुनिक अवसंरचना को विस्तार मिलेगा.

उन्होंने कहा कि बजट में सीमा पर मौजूद गांवों के विकास के बारे में नए सिरे से सोचा गया है और ऐसे गावों में हर प्रकार की सुविधा हो, बिजली-पानी-सड़क का इंतजाम हो, इसके लिए बजट में विशेष ‘‘वाइब्रेंट विलेज (जीवंत ग्राम)’’ कार्यक्रम की घोषणा की गई है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सस्ता और तेज इंटरनेट भारत की पहचान बन चुका है और बहुत जल्द सभी गांव तक ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ लिया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छोटे व मझोल उद्यमियों का भी उल्लेख किया और कहा कि कोरोना काल में छोटे उद्यमियों को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन ‘‘रिण गारंटी’’ योजना शुरू की गई थी.

उन्होंने कहा, ‘‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि इस योजना से एमएसएमई क्षेत्र में लगभग डेढ़ करोड़ नौकरियां सुरक्षित हुई हैं और करीब 6 करोड़ लोगों की जीविका सुरक्षित हुई है.

उन्होंने कहा कि भाजपा युवा आकांक्षाओं और युवा सपनों को समझती है और यह इस बजट में भी स्पष्ट रूप से दिखता है.

उन्होंने कहा, ‘‘इस बजट में स्टार्ट अप्स के लिए टैक्स सुविधाओं को आगे बढ़ाया गया है.’’

Education Budget 2022 : शिक्षा के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी शुरू की जाएगी – वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में शिक्षा प्रदान करने के लिए एक डिजिटल यूनिवर्सिटी के गठन का प्रस्ताव रखते हुए मंगलवार को कहा कि इसका निर्माण हब एवं स्पोक मॉडल के आधार पर किया जाएगा.

सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए कहा कि Covid-19 महामारी के दौरान लगी पाबंदियों से औपचारिक शिक्षा को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार स्कूली बच्चों को अनुपूरक शिक्षा मुहैया कराने की योजना पर काम कर रही है. इसके लिए ‘एक क्लास-एक टीवी चैनल’ की व्यवस्था लागू की जाएगी.

वित्त मंत्री ने कहा कि लघु एवं मध्यम क्षेत्रों की तरफ से दी जाने वाली आतिथ्य सेवाएं अभी तक सामान्य स्थिति में नहीं पहुंच पाई हैं.

उन्होंने कहा कि नारी शक्ति की महत्ता को ध्यान में रखते हुए तीन योजनाएं महिलाओं एवं बच्चों के समेकित विकास के लिए शुरू की गई थीं.

Brazil Floods : ब्राजील में भूस्खलन, बाढ़ में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 24 हुई

ब्राजील के साओ पाउलो राज्य में भारी बारिश से आयी बाढ़ और भूस्खलन में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर सोमवार को 24 हो गयी. दमकलकर्मी मलबे में से शव निकालने में लगे हुए हैं.

नागरिक रक्षा प्राधिकरण के एक बयान के अनुसार, ब्राजील के सबसे घनी आबादी वाले राज्य में सप्ताहांत जोरदार बारिश हुई और हजारों लोगों को अपने घरों को छोड़ना पड़ा. रविवार को मृतकों की संख्या 19 थी.

सिसेरो पेरेरा (54) ने फ्रांको द रोचा शहर में आपदा स्थल पर कहा, ‘‘मैं अपने भतीजे, उसकी पत्नी और दो साल के बच्चे की तलाश कर रहा हूं. उन्होंने कहा है कि शव अब भी कीचड़ में फंसे हैं लेकिन अभी तक वे शव बाहर नहीं निकाल सके हैं.’’

बारिश से करीब 27 शहर प्रभावित हुए हैं जिनमें से फ्रांको द रोचा शहर में सबसे अधिक संख्या में लोगों ने जान गंवाई है. गवर्नर जोआओ डोरिया ने रविवार को प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और इन शहरों को 28 लाख डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की.

रेलवे छोटे किसानों, एमएसएमई के लिए नये उत्पाद विकसित करेगा : सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि रेलवे छोटे किसानों, एमएसएमई के लिए नये उत्पाद विकसित करेगा.

लोकसभा में सीतारमण ने 2022-23 का आम बजट पेश करते हुए इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रयासों के कारण रोजगार एवं उद्यम अवसरों में वृद्धि हो रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गो का 2022-23 में 25,000 किमी विस्तार किया जाएगा और सड़क परिवहन मास्टर प्लान के लिए 2022-23 में ‘पीएम गति शक्ति’ को अंतिम रूप दिया जाएगा.

वित्त मंत्री ने 400 नयी वंदे भारत ट्रेन शुरू किए जाने का प्रस्ताव किया और कहा कि अगले वित्त वर्ष में चार बहु-मॉडल पार्क के लिए अनुबंध दिए जाएंगे.

उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा, ‘‘एक उत्पाद एक रेलवे स्टेशन को लोकप्रिय बनाया जाएगा, 400 नयी वंदे भारत ट्रेन शुरू की जाएंगी.’’

सीतारमण ने कहा कि अगले तीन वर्ष में 100 ‘पीएम गति टर्मिनल’ स्थापित किए जाएंगे.

Budget 2022: 3.8 करोड़ घरों को नल से जल के कनेक्शन के लिये 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि 2022-23 में 3.8 करोड़ घरों में नल के पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

केंद्रीय बजट 2022-23 पेश करते हुए, उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने कर प्रोत्साहन का लाभ उठाने के लिए स्टार्टअप्स के लिए निगमन की अवधि को एक वर्ष बढ़ाकर 31 मार्च, 2023 करने का निर्णय लिया है.

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) में योगदान पर कर कटौती को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती है.

CISF Recruitment 2022: सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) ने निकाली बंपर वैकेंसी, 40 हजार प्रतिमाह मिलेगी सैलरी, जल्द करें आवेदन

सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) द्वारा असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के कई पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया गया है. ASI के कुल 647 पदों पर भर्तियां की जाएंगी, इन पदों पर भर्ती के इच्छुक व योग्य अभ्यर्थी CISF की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं.

सैलरी और योग्यता 
ASI के पदों पर सिलेक्ट होने वाले अभ्यर्थियों को सैलरी के रूप में 40 हजार रुपये तक की सैलरी मिलेगी. देश की किसी भी रजिस्टर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थी इन पदों पर भर्ती के लिए अप्लाई कर सकते हैं. एक अगस्त 2021 तक 18 से 35 साल की उम्र के अभ्यर्थी इन पदों पर भर्ती के लिए अप्लाई कर सकते हैं. 

लास्ट डेट से पहले करें अप्लाई
ASI के पदों पर भर्ती के लिए अप्लाई करने वाले अभ्यर्थी 5 फरवरी 2022 तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. अभ्यर्थियों का सिलेक्शन फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, ट्रायल टेस्ट और प्रोफिशिएंसी टेस्ट के आधार पर होगा. 

यहां से करें आवेदन
इन पदों पर भर्ती के इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी CISF की ऑफिशियल वेबसाइट cisf.gov.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अभ्यर्थी नोटिफिकेशन जरूर देखें, जहां उन्हें एप्लीकेशन स्टेप्स मिल जाएंगी.

पांच फेज में होगा सिलेक्शन 
फर्स्ट फेज में अभ्यर्थी का सर्विस रिकॉर्ड देखा जाएगा, सेकंड फेज में रिटन एग्जाम, थर्ड फेज में फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट, चौथे फेज में फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट और लास्ट में मेडिकल टेस्ट होने के बाद कैंडिडेट का फाइनल सिलेक्शन किया जाएगा. 

CISF Recruitment 2022 से जुड़ी ज़्यादा जानकारी के लिए CISF की ऑफिशियल वेबसाइट cisf.gov.in पर लॉग इन करें.