Home Blog Page 60

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा सवाल, बोले कब होगी अजय मिश्रा की बर्खास्तगी और MSP पर कानून कब आएगा?

0

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को बताना चाहिए कि लखीमपुर खीरी हिंसा (Lakhimpur Kheri Incident) मामले को लेकर गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा (Union minister of state for home affairs Ajay Mishra) को कब बर्खास्त किया जाएगा, ‘शहीद किसानों’ के परिवारों को मुआवजा कब मिलेगा और न्यूतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर कानून कब तक बनेगा.

उन्होंने यह दावा भी किया कि ये कदम उठाने तक ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कृषि विरोधी कानून बनाने के लिए मांगी गई माफी’ अधूरी होगी.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘जब प्रधानमंत्री ने कृषि-विरोधी क़ानून बनाने के लिए माफ़ी मांग ली तो वह संसद में यह भी बतायें कि प्रायश्चित कैसे करेंगे- लखीमपुर मामले के मंत्री की बर्खास्तगी कब? शहीद किसानों को मुआवज़ा कितना-कब? सत्याग्रहियों के ख़िलाफ़ झूठे केस वापस कब? एमएसपी पर क़ानून कब? इसके बिना माफ़ी अधूरी!’’

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की गई थी. संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन इन कानूनों को निरस्त करने वाले विधेयक को दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा ने मंजूरी प्रदान कर दी.

पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक विर्क, उद्योगपति हरचरण सिंह रनौता सहित कई अन्य भाजपा में शामिल

आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election 2022) से पहले राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक सर्बदीप सिंह विर्क सहित कई जानीमानी हस्तियों ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया.

केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी के पंजाब चुनाव प्रभारी गजेंद्र सिंह शेखावत ने पार्टी में शामिल हुए नेताओं का स्वागत किया और कहा कि इनके आने से पंजाब में भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी.

विर्क के अलावा उद्योगपति हरचरण सिंह रनौता, पंजाब सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह जीरा, शिरोमणि अकाली दल के पूर्व नेता सरबजीत सिंह मक्कड़ और पंजाब की कुछ अन्य हस्तियां भाजपा में शामिल हुई हैं.

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा भाजपा में शामिल हुए थे.

कांग्रेस शासित पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं.

वित्तीय सशक्तिकरण के लिए वित्त प्रौद्योगिकी पहल को वित्त प्रौद्योगिकी क्रांति में बदलना जरूरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के हर नागरिक के लिए वित्तीय सशक्तिकरण सुनिश्चित करने की खातिर वित्त प्रौद्योगिकी पहल को वित्त प्रौद्योगिकी क्रांति में बदलने की जरूरत है.

प्रधानमंत्री ने ‘इन्फिनिटी मंच’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि वित्त प्रौद्योगिकी (फिनटेक) उद्योग का स्तर व्यापक हो गया है और इसने जनता के बीच स्वीकार्यता पायी है.

उन्होंने कहा, “अब, इन वित्त प्रौद्योगिकी (फिनटेक) पहल को वित्त प्रौद्योगिकी क्रांति में बदलने का समय आ गया है. वह क्रांति जो देश के हर एक नागरिक के वित्तीय सशक्तिकरण में मदद करेगी.”

मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी वित्त में एक बड़ा बदलाव ला रही है, और पिछले साल मोबाइल से किया जाने वाला भुगतान, एटीएम कार्ड से की जाने वाली पैसों की निकासी से अधिक था.

उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए कहा कि प्रत्यक्ष शाखा कार्यालयों के बिना काम करने वाले डिजिटल बैंक पहले से ही एक वास्तविकता हैं तथा एक दशक से भी कम समय में ये आम हो सकते हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, “जैसे-जैसे इंसान ने प्रगति की, वैसे-वैसे हमारे लेनदेन का रूप भी बदला. वस्तु विनिमय प्रणाली से धातु तक, सिक्कों से नोटों तक, चेक से लेकर कार्ड तक, आज हम यहां पहुंच गए हैं.”

यह देखते हुए कि भारत ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि प्रौद्योगिकी अपनाने के मामले में वह किसी से पीछे नहीं है, उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के तहत परिवर्तनकारी पहल ने शासन में लागू होने वाले नवोन्मेषी वित्त प्रौद्योगिकी समाधानों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं.

मोदी ने प्रौद्योगिकी के नेतृत्व में भारत के वित्तीय समावेशन अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि 2014 में 50 प्रतिशत से कम भारतीयों के पास बैंक खाते थे, भारत ने पिछले सात वर्षों में 43 करोड़ जन धन खातों के साथ इसे लगभग सार्वभौमिक बना दिया है.

उन्होंने 69 करोड़ रुपे कार्ड जैसी पहल का भी उल्लेख किया जिसमें पिछले साल 1.3 अरब लेनदेन हुए थे.

मोदी ने इसके अलावा यूपीआई की भी बात की और कहा कि यूपीआई के जरिए पिछले महीने लगभग 4.2 अरब लेनदेन हुए. उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी (माल एवं सेवा कर) पोर्टल पर हर महीने 30 करोड़ बिल अपलोड किए जा रहे हैं.

उन्होंने वित्तीय समावेशन को वित्तीय प्रौद्योगिकी क्रांति का चालक बताते हुए कहा कि वित्तीय प्रौद्योगिकी चार स्तंभों – आय, निवेश, बीमा और संस्थागत ऋण पर टिकी हुई है.

प्रधानमंत्री ने कहा, “जब आय बढ़ती है, तो निवेश संभव हो जाता है. बीमा कवरेज अधिक जोखिम लेने की क्षमता और निवेश को सक्षम बनाता है. संस्थागत ऋण विस्तार का मौका देता है. और हमने इनमें से हर स्तंभ पर काम किया है. जब ये सभी कारक एक साथ आते हैं, तो आप अचानक देखते हैं कि और भी लोग वित्तीय क्षेत्र से जुड़ चुके हैं.”

उन्होंने जनता के बीच इन नवोन्मेषों की व्यापक स्वीकृति के आलोक में वित्त प्रौद्योगिकी में विश्वास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आम भारतीय ने डिजिटल भुगतान और ऐसी तकनीकों को अपनाकर पारिस्थितिकी तंत्र में काफी विश्वास दिखाया है.

मोदी ने कहा, “यह विश्वास एक जिम्मेदारी है. विश्वास का मतलब है कि आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि लोगों के हित सुरक्षित हैं. वित्त प्रौद्योगिकी नवोन्मेष, वित्त प्रौद्योगिकी सुरक्षा संबंधी नवोन्मेष के बिना अधूरा होगा.”

उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभवों और विशेषज्ञता को दुनिया के साथ साझा करने और उनसे सीखने में भी विश्वास रखता है.

प्रधानमंत्री ने कहा, “सार्वजनिक बुनियादी ढांचे संबंधी हमारे डिजिटल समाधान दुनिया भर के लोगों के जीवन में सुधार कर सकते हैं. यूपीआई और रुपे जैसे साधन हर देश के लिए एक असाधारण अवसर प्रदान करते हैं. यह अवसर एक किफायती और विश्वसनीय ‘रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली’ के साथ-साथ घरेलू कार्ड योजना और धन प्रेषण प्रणाली प्रदान करने से जुड़ा है.”

मोदी ने कहा कि वित्त एक अर्थव्यवस्था की जान है और प्रौद्योगिकी उसका वाहक है, मोदी ने कहा कि दोनों ही ‘अंत्योदय और सर्वोदय’ हासिल करने के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं.

उन्होंने कहा, “हमारा प्रमुख इन्फिनिटी मंच, उद्योग के असीम भविष्य का पता लगाने के लिए वैश्विक फिनटेक उद्योग के सभी प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाने के हमारे प्रयास का हिस्सा है.”

Maharashtra : महाराष्ट्र सरकार ने परमबीर सिंह को निलंबित किया, अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू

महाराष्ट्र सरकार ने आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह और पुलिस उपायुक्त रैंक के एक अधिकारी को निलंबित कर दिया, जिनके खिलाफ जबरन वसूली के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त और 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी सिंह को निलंबित करने के आदेश को उस दिन मंजूरी दी गई थी, जिस दिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को 12 नवंबर को रीढ़ की सर्जरी के बाद यहां एक निजी अस्पताल से छुट्टी मिली थी. एक अधिकारी ने कहा कि निलंबन आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार ने उनके खिलाफ ‘‘कुछ अनियमितताओं और खामियों’’ को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है, जिसमें ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति शामिल है.

सूत्रों ने कहा कि सिंह पिछले छह महीने में महाराष्ट्र होमगार्ड प्रमुख नियुक्त किए जाने के बाद पेश नहीं हुए. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें 29 अगस्त तक की छुट्टी दी गई थी, लेकिन उसके बाद भी वह ड्यूटी पर नहीं आए. सिंह ने मार्च में राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे, जब उन्हें एंटीलिया विस्फोटक सामग्री घटना के बाद मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटा दिया गया था.

उन्होंने देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुंबई में रेस्तरां और बार से एक महीने में 100 करोड़ रुपये लेने के लिए कहा था.हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता ने इस आरोप से इनकार किया था.

इन आरोपों की जांच कर रहे आयोग ने सिंह को अपना बयान दर्ज करने के लिए पेश होने का निर्देश दिया था, लेकिन आईपीएस अधिकारी पिछले महीने ही उसके समक्ष पेश हुए थे.

निलंबन आदेश के अनुसार निलंबन की अवधि के दौरान, सिंह को यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर कि वह किसी अन्य रोजगार, व्यवसाय, पेशे या व्यवसाय में नहीं लगे हुए हैं, अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 4 के तहत स्वीकार्य निर्वाह भत्ता, महंगाई भत्ता और अन्य भत्ते का भुगतान किया जाएगा.

आदेश में यह भी कहा गया है कि इस अवधि के दौरान वह राज्य के पुलिस महानिदेशक की अनुमति के बिना अपने मुख्यालय, डीजी होमगार्ड के कार्यालय को नहीं छोड़ेंगे. अधिकारी ने बताया कि पुलिस उपायुक्त पराग मानेरे को भी निलंबित कर दिया गया है. मानेरे के निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय नागपुर एसपी कार्यालय होगा.

Bangladesh: बांग्लादेश में छह छात्रों को पीट-पीटकर जान से मारने के मामले में 13 को मृत्युदंड, 19 को आजीवन कारावास

बांग्लादेश की एक अदालत ने दस साल पहले राजधानी ढाका के बाहरी इलाके में छह छात्रों को लुटेरे समझकर पीट-पीटकर जान से मारने के मामले में 13 दोषियों को मौत और 19 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

ढाका के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की न्यायाधीश इसमत जहां ने यह आदेश सुनाया. न्यायाधीश ने मौत की सजा पाने वाले दोषियों पर 20-20 हजार टके जबकि आजीवन कारावास की सजा पाने वालों पर 10-10 हजार टके का जुर्माना भी लगाया.

इस मामले में 60 लोगों हत्या के आरोपी थे. सुनवाई के दौरान तीन लोगों की मौत के बाद आरोप पत्र से उनका नाम हटा दिया गया.

अभियोजन पक्ष के वकीलों ने कहा कि 57 में 40 आरोपी जेल में है जबकि एक जमानत पर है. शेष को भगोड़ा मानकर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया। न्यायाधीश ने इनमें से 25 को बरी कर दिया.

ढाका के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ रहे सात दोस्त 18 जुलाई 2011 को शब-ए-बारात पर ढाका के बाहरी इलाके में सावर थानांतर्गत अमीन बाजार ब्रिज गए थे. इस दौरान स्थानीय लोगों के एक समूह ने लुटेरे होने का आरोप लगाकर उनमें से छह को पीट-पीटकर जान से मार डाला.

Mumbai : BMC ने हवाई अड्डा अधिकारियों को महाराष्ट्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने हवाईअड्डा अधिकारियों के लिये जारी अपने पिछले दिशा-निर्देशों को रद्द करते हुए उन्हें राज्य सरकार द्वारा जारी संशोधित निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया.

महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप को लेकर वैश्विक चिंताओं के मद्देनजर बृहस्पतिवार को हवाई यात्रा नियमों में संशोधन किया है, जिसके मद्देनजर बीएमसी ने उक्त निर्णय लिया.

राज्य सरकार के संशोधित हवाई यात्रा नियमों में केवल तीन “उच्च-जोखिम” वाले देशों दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना और जिम्बाब्वे के यात्रियों के लिये सात दिन का संस्थागत पृथकवास अनिवार्य किया है, जबकि घरेलू यात्रियों को यात्रा के लिए पूर्ण टीकाकरण प्रमाण या फिर विमान में सवार होने से 72 घंटे पहले की कोविड-19 नेगेटिव आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पेश करनी होगी.

मुंबई नगर निगम के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को अपने दिशानिर्देशों में संशोधन करने के तुरंत बाद नगर प्रशासन ने मुंबई हवाईअड्डे के अधिकारियों को नए आदेश जारी किए.

मुंबई नगर निकाय ने बुधवार को शहर के हवाई अड्डे पर पहुंचने वाले सभी घरेलू यात्रियों के लिए आरटी-पीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट लेकर आना अनिवार्य कर दिया था. बीएमसी ने कहा था कि यह जांच रिपोर्ट 72 घंटे से ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए.

बीएमसी ने एक परिपत्र में मुंबई हवाई अड्डे के संचालक को नए नियम के बारे में सभी घरेलू विमान कंपनियों को अवगत कराने को कहा था. इसके अलावा उसने और भी दिशा-निर्देश जारी किये थे.

Covid-19 : Germany में टीकाकरण न करवाने वालों के लिये सार्वजनिक गतिविधियों में भाग लेने पर पाबंदी

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने बृहस्पतिवार को कहा कि टीका नहीं लगवाने वाले लोगों को सार्वजनिक गतिविधियों में भाग नहीं लेने दिया जाएगा और संसद टीकाकरण को अनिवार्य बनाने के लिये एक आदेश जारी करने पर विचार कर रही है. जर्मनी में बीते 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 70 हजार नए मामले सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है.

संघीय राज्यों के नेताओं के साथ बैठक के बाद मर्केल ने कहा कि यह कदम इस बात को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है कि और अधिक लोगों के कोरोना वायरस की चपेट में आने से जर्मनी के अस्पतालों पर भार बढ़ जाएगा क्योंकि टीका नहीं लगवाने वाले लोग इससे गंभीर रूप से संक्रमित हो सकते हैं.

मर्केल ने बर्लिन में पत्रकारों से कहा, ”हमारे देश में स्थिति गंभीर है.उन्होंने देशवासियों से राष्ट्रीय एकजुटता प्रकट करने की अपील की.

मर्केल ने कहा कि अधिकारियों ने स्कूलों में मास्क अनिवार्य करने, निजी बैठकों के लिये नयी सीमा तय करने और साल के अंत तक तीन करोड़ लोगों को टीका लगाने के लक्ष्य को हासिल करने पर भी सहमति जतायी.

चांसलर ने कहा कि टीकाकरण अनिवार्य करने को लेकर आदेश जारी करने की संभावना पर संसद में चर्चा की जाएगी और यह आदेश फरवरी तक लागू किया जा सकता है.

देश में Covid-19 के 6,990 नए मामले, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 1,00,543 हुई

देश में एक दिन में कोविड-19 के 6,990 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,45,87,822 हो गई. पिछले 551 दिन में सामने आए ये सबसे कम दैनिक मामले हैं. वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 1,00,543 हो गई, जो 546 दिन में सबसे कम है.

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण से 190 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 4,68,980 हो गई. देश में लगातार 53 दिन से कोविड-19 के दैनिक मामले 20 हजार से कम हैं और 155 दिन से 50 हजार से कम दैनिक मामले सामने आ रहे हैं. उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 1,00,543 हो गयी है, जो संक्रमण के कुल मामलों का 0.29 प्रतिशत है. पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 3,316 की कमी दर्ज की गयी है. मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.35 प्रतिशत है, जो मार्च 2020 के बाद से सर्वाधिक है.

आंकड़ों के अनुसार, दैनिक संक्रमण दर 0.69 प्रतिशत दर्ज की गयी, जो पिछले 57 दिन से दो प्रतिशत से कम है. साप्ताहिक संक्रमण दर 0.84 प्रतिशत दर्ज की गयी, जो पिछले 16 दिन से एक प्रतिशत से कम है. देश में अभी तक कुल 3,40,18,299 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और कोविड-19 से मृत्यु दर 1.36 प्रतिशत है. राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 123.25 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है.

देश में पिछले साल सात अगस्त को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितंबर को 40 लाख से अधिक हो गई थी. वहीं, संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर को 50 लाख, 28 सितंबर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे. देश में 19 दिसंबर को ये मामले एक करोड़ के पार, इस साल चार मई को दो करोड़ के पार और 23 जून को तीन करोड़ के पार चले गए थे.

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले 24 घंटे में जिन 190 लोगों की संक्रमण से मौत हुई, उनमें से केरल के 117 और महाराष्ट्र के 21 लोग थे.

केरल सरकार ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि राज्य में मौत के 117 मामलों में से 59 पिछले कुछ दिनों में सामने आए. वहीं, मौत के 58 मामलों को केन्द्र तथा उच्चतम न्यायालय के नए दिशा-निर्देशों के आधार पर कोविड-19 से मौत के मामलों में जोड़ा गया है.

आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी तक संक्रमण से 4,68,980 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से महाराष्ट्र के 1,40,962 लोग, केरल के 39,955 लोग, कर्नाटक के 38,203 लोग, तमिलनाडु के 36,472 लोग, दिल्ली के 25,098 लोग, उत्तर प्रदेश के 22,910 लोग और पश्चिम बंगाल के 19,473 लोग थे.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अभी तक जिन लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हुई है, उनमें से 70 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को अन्य बीमारियां भी थीं.

टीकाकरण के इस चरण में इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दिया जवाब

केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने इस चरण में कोविड-19 टीका दिए जाने को अनिवार्य नहीं बनाया है. साथ ही, कहा कि औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) द्वारा क्लीनिकल ट्रायल से संबंधित सभी डेटा और टीकाकरण के डेटा जिसे कानून के अनुसार जारी किया जाना आवश्यक है और जारी किया जा सकता है, वे पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं. केंद्र द्वारा शीर्ष अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कहा गया है कि इस समय केंद्र और राज्य सरकारों का पूरा ध्यान टीकाकरण अभियान पर होना चाहिए और लोगों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.

सरकार ने कहा है, ‘इसलिए, इस समय यह वांछनीय नहीं है कि करोड़ों नागरिकों के महामारी से बचाव के अधिकार का उल्लंघन करने की कीमत पर राष्ट्र हित के खिलाफ कदम उठाने का प्रयास करने वाले कुछ तत्वों के पीछे के उद्देश्यों का पता लगाने में समय लगाया जाए.’ केंद्र ने कहा कि कोविड-19 टीकों की मंजूरी के संबंध में निर्णय विशेषज्ञ समितियों द्वारा लिया गया है, जिसमें टीका निर्माताओं द्वारा आपूर्ति किए गए डेटा, जानकारी के आधार पर और इसके असर तथा सुरक्षा पर विचार करने के बाद फैसला किया गया.

सरकार ने कहा, ‘बैठकों और अनुमति के पहले समिति के विचार-विमर्श के विवरण पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं. कोविड-19 टीकों की मंजूरी के संबंध में निर्णय निर्माताओं द्वारा प्रदान किए गए डेटा, सूचना के सत्यापन के बाद और इसके असर तथा सुरक्षा पर विचार करने के बाद विशेषज्ञ समितियों द्वारा लिए गए हैं.’

हलफनामे में कहा गया है कि टीकाकरण के बाद दुष्प्रभाव के मामलों का डेटा पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और संबंधित अधिकारी लगातार इस डेटा की निगरानी और जांच कर रहे हैं और ‘केंद्र सरकार ने इस स्तर पर कोविड-19 टीका दिए जाने को अनिवार्य नहीं किया है.’ सरकार ने कहा कि क्लीनिक ट्रायल से संबंधित सभी डेटा और टीकाकरण के डेटा जिसे कानून के अनुसार जारी किया जाना आवश्यक है और जारी किया जा सकता है, वे पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है.

केंद्र ने जैकब पुलियेल की एक याचिका के जवाब में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि यह याचिका कथित तौर पर एक जनहित याचिका के रूप में दायर की गई है और अगर इस पर विचार किया जाता है तो यह जनहित के लिए नुकसानदेह होगा. सरकार ने कहा, ‘इसलिए यह उल्लेख किया जाता है कि 2019 के नियमों तथा औषधि और प्रसाधन सामग्री कानून, 1940 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और प्रख्यात वैज्ञानिक विशेषज्ञों के बीच विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सभी आवश्यक सावधानी बरतते हुए कोविड-19 महामारी के मद्देनजर प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग के लिए कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीकों को मंजूरी दी गई है.’

तुर्की के इस्तांबुल शहर में तूफान के कारण चार लोगों की मौत, कई घायल

तुर्की के इस्तांबुल शहर और अन्य हिस्सों में सोमवार को आए भीषण तूफान में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए. तूफान के कारण शहर के करीब 1.5 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं. तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू ने यह जानकारी दी.

अनाडोलू की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ितों में इस्तांबुल के एसेन्युर्ट जिले में मरने वाली एक महिला भी शामिल है, जहां तेज हवा के कारण छत का एक हिस्सा टूट गया और वह उस पर और उसके बच्चे पर जा गिरी. इसके कारण बच्चा घायल हो गया.

इस्तांबुल के गवर्नर के कार्यालय ने कहा कि शहर में एक विदेशी नागरिक सहित तीन अन्य लोग मारे गए। तूफान के कारण कुल 19 लोग घायल हो गए, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बनी हुई है.

टेलीविजन की तस्वीरों में दिखाया गया है कि तेज आंधी ने एक घंटाघर को भी गिरा दिया. इस्तांबुल नगरपालिका के अनुसार तेज हवाओं के कारण 33 छतें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुईं, 192 पेड़ उखड़ गए, 52 ट्रैफिक लाइट और सड़क के संकेत टूट गए जबकि 12 कारें क्षतिग्रस्त हो गईं.

तुर्की एयरलाइंस के प्रवक्ता के मुताबिक इस्तांबुल शहर में आने वाली कम से कम छह उड़ानों के मार्ग में परिवर्तन किया गया और उन्हें अंकारा और इजमिर जैसे शहरों की ओर भेजा गया.