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Covid-19 : ब्रिटेन में स्कूल खुलते ही अचानक बढ़े कोरोना के मामले, 24 घंटे में 45 हजार केस

ब्रिटेन में कोरोना संक्रमण एक बार फिर पैर पसार रहा है. गुरुवार को 45 हजार मामले सामने आए . इनमें सबसे बड़ी संख्या बच्चों की हैं.

आधिकारिक बयान के मुताबिक, गुरुवार को 45066 लोग संक्रमित मिले. ये 20 जुलाई के बाद सबसे ज्यादा हैं. लेकिन चिंता की बात ये है कि ब्रिटेन में स्कूल खुल चुके हैं और माना जा रहा है कि इसी वजह से केस के मामलों में तेजी आई है.

वैक्सीन के चलते पहली की लहरों की तुलना में यह संख्या कम नजर आ रही है. बीते कुछ सप्ताहों में कोरोना से मरने वालों की संख्या स्थिर रही है. लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौत के मामलों में इजाफा हो सकता है. गुरुवार को ब्रिटेन में 157 मौतें हुई है. ब्रिटेन में अब तक 1.38 लाख लोग महामारी में अपनी जान गंवा चुके हैं. यह यूरोप में रूस के बाद दूसरे नंबर पर है. ब्रिटेन में अब तक कोरोना के 8,317,439 मामले सामने आ चुके हैं. यहां अब तक 6,802,672 लोग ठीक हो चुके हैं. यहां 1,376,530 एक्टिव केस हैं. पिछले 24 घंटे में 37,043 लोग ठीक हो चुके हैं. (Agency Input)

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत बोले- सेना को आकार में छोटा और प्रभावी बनाने की चल रही प्रक्रिया

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं का पुनर्गठन कर उनका आकार छोटा करने तथा अधिक प्रभावी बनाने की प्रक्रिया में है. रावत ने कहा, सेना को आज के समय में लड़ी जाने वाली लड़ाई के लिए भी तैयार किया जा रहा है. इसमें साइबर हमले, इलेक्‍ट्रॉनिक युद्ध कौशल और कृत्रित बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीक से भी सेनाओं को लैस किया जा रहा है. जनरल बिपिन रावत ने कहा भारतीय सशस्‍त्र सेनाओं के बीच बेहतर समन्‍यवय और एकीकृत क्षमता बढ़ाने पर भी बल दिया जा रहा है.

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारत का ध्‍यान रक्षा उत्‍पादन के क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर बनाना है. हमारा फोकस क्षेत्रीय शक्ति बनने पर केंद्रित है. जनरल रावत ने कहा कि अब युद्ध करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. यही कारण है कि अब सेनाओं को आज के समय में लगी जाने वाली जंग के हिसाब से तैयार होने की जरूरत है. सेना सीमा पर घुसपैठ समेत कई मोर्चे पर चनौती का सामना कर रहा है. रावत ने कहा कि देश की सशस्त्र सेनाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए.

जनरल रावत ने कहा भारत के निजी उद्योग क्षेत्र को देश के सशस्त्र बलों की अभियान संबंधी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा उत्पाद मुहैया कराने की दिशा में काम करना होगा. उन्‍होंने कहा कि अंतरिक्ष और साइबर के क्षेत्र अब देश की सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्‍वपूर्ण हो चुके हैं.

भारतीय सेना इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नेतृत्व और मार्गदर्शन में आगे बढ़ रही है. चुनौती के इस समय में देश तथा सशस्‍त्र बलों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी उद्योगों को सहभागिता के साथ आगे बढ़ना होगा. (Source : News 18)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुनियादी ढांचे से जुड़े गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के लिए 100 लाख करोड़ रुपये के राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स की लागत कम करना और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करना है.

मोदी ने योजना के शुभारंभ के अवसर पर कहा कि पीएम गतिशक्ति योजना का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी, कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाना और कार्यान्वयन को तेज करना है.

उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य सभी संबंधित विभागों को एक मंच पर जोड़कर परियोजनाओं को अधिक शक्ति और गति देना है, और विभिन्न मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाओं का एक समान दृष्टि से निर्माण किया जाएगा तथा उनका कार्यान्वयन किया जाएगा.

मोदी ने आरोप लगाया कि पूर्व में विकास कार्यों में सुस्ती के साथ करदाताओं के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं किया जाता था और विभाग अलग-अलग काम करते थे, परियोजनाओं को लेकर उनमें कोई समन्वय नहीं था.

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के बिना विकास संभव नहीं है और सरकार ने अब इसे समग्र रूप से विकसित करने का संकल्प लिया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि गतिशक्ति मास्टर प्लान सड़क से लेकर रेलवे, उड्डयन से लेकर कृषि तक परियोजनाओं के समन्वित विकास के लिए विभिन्न विभागों को आपस में जोड़ता है.

उन्होंने कहा कि देश में लॉजिस्टिक्स, की ऊंची लागत जो जीडीपी का 13 प्रतिशत हिस्सा है, निर्यात में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही है और पीएम गति शक्ति का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स की लागत कम करना और कार्यान्वयन को तेज करना है.

उन्होंने कहा कि यह भारत को एक निवेश गंतव्य के रूप में बढ़ावा देगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के तहत भारत जिस गति और पैमाने को देख रहा है, वह आजादी के पिछले 70 वर्षों में कभी नहीं देखा गया था.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहली अंतर-राज्यीय प्राकृतिक गैस पाइपलाइन 1987 में चालू की गयी थी. तब से 2014 तक, 15,000 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन का निर्माण किया गया था. इस समय 16,000 किलोमीटर से अधिक नयी गैस पाइपलाइन का निर्माण किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, “27 साल में जो किया गया, हम वह काम उससे आधे से भी कम समय में कर रहे हैं.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले के पांच साल में 1,900 किलोमीटर रेल लाइन का दोहरीकरण किया गया था, जबकि पिछले सात वर्षों में 9,000 किलोमीटर रेल लाइन का दोहरीकरण हुआ है.

उन्होंने कहा कि 2015 में 250 किलोमीटर मेट्रो से अब मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार 700 किलोमीटर तक हो गया है तथा और 1,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है.

मोदी ने कहा कि पिछले सात वर्षों में डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क से जोड़ा गया है जबकि 2014 से पहले के पांच वर्षों में केवल 60 ग्राम पंचायतों में यह सुविधा थी.

उन्होंने कहा कि बंदरगाहों पर पोत संबंधी कार्यान्वयन के समय को 41 घंटे से घटाकर 27 घंटे कर दिया गया है तथा इसे और कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले पांच वर्षों में तीन लाख सर्किट किमी बिजली ट्रांसमिशन लाइन डाली गयी थीं जिसके मुकाबले पिछले सात वर्षों में 4.25 लाख सर्किट किमी लाइन बिछायी गयी है.

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में भी काफी विस्तार हुआ है.

Lakhimpur Kheri Violence: BJP मारे गए कार्यकर्ता को देगी शहीद का दर्जा – बृजेश पाठक

उत्तर प्रदेश के कानून मंत्री यूपी ब्रजेश पाठक ने बुधवार को लखीमपुर खीरी में तिकुनिया हिंसा में मारे गए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के ड्राइवर हरिओम मिश्रा और बीजेपी के मंडल मंत्री शुभम मिश्रा के परिवार से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने परिवारों को न्याय का भरोसा दिलाया साथ ही सभी मांगें पूरी करने की बात कही.

वहीं उन्होंने घटना में मारे गए जिले के अन्य 4 लोगों के परिजनों से मुलाकात नहीं की. इसमें दो किसान नछत्तर सिंह और लवप्रीत सिंह के अलावा बीजेपी कार्यकर्ता श्याम सुंदर निषाद और पत्रकार रमन कश्यप शामिल हैं. बता दें घटना में मारे गए दो अन्य किसान गुरविंदर सिंह और दिलजीत सिंह बहराइच जिले के निवासी हैं.

इस दौरान बृजेश पाठक ने कहा कि शुभम डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को रिसीव करने जा रहे थे. बीजेपी उन्हें अपनी पार्टी में शहीद का दर्जा देगी. कार्रवाई हो रही है. दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. जल्द गिरफ्तारियां होंगी. बीजेपी सदैव शुभम के परिवार के साथ खड़ी है. वहीं घटना में मारे गए अन्य लोगों के परिवार से मुलाकात के सवाल पर बृजेश पाठक ने कहा कि हालात सामान्य होने पर वह मिलने जरूर जाएंगे.

बाकी लोगों के परिजनों से मुलाकात नहीं करने पर बृजेश पाठक का कहना था कि बीजेपी कार्यकर्ता श्याम सुंदर निषाद और पत्रकार रमन कश्यप के परिजनों से भी मुलाकात करेंगे, चूंकि वह घटनास्थल के करीब रहते हैं, इसलिए वह इलाके में स्थितियां सामान्य होने पर वहां का दौरा करेंगे. वहीं किसान परिवारों से मुलाकात को लेकर भी उन्होंने कहा कि एक बार स्थितियां सामान्य हो जाएं तो वह उन परिवारों से भी बात करेंगे.

केंद्र सरकार का बड़ा फैसलाः इस श्रेणी की महिलाओं को मिली 6 महीने तक गर्भपात कराने की इजाजत

केंद्र सरकार ने गर्भपात संबंधी नए नियम अधिसूचित किये हैं जिसके तहत कुछ विशेष श्रेणी की महिलाओं के मेडिकल गर्भपात के लिए गर्भ की समय सीमा को 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह (पांच महीने से बढ़ाकर छह महीने) कर दिया गया है. गर्भ का चिकित्‍सकीय समापन (संशोधन) नियम, 2021 के अनुसार, विशेष श्रेणी की महिलाओं में यौन उत्पीड़न या बलात्कार या कौटुंबिक व्‍यभिचार की शिकार, नाबालिग, ऐसी महिलाएं जिनकी वैवाहिक स्थिति गर्भावस्था के दौरान बदल गयी हो (विधवा हो गयी हो या तलाक हो गया हो) और दिव्यांग महिलाएं शामिल हैं.

नए नियम में मानसिक रूप से बीमार महिलाओं, भ्रूण में ऐसी कोई विकृति या बीमारी हो जिसके कारण उसकी जान को खतरा हो या फिर जन्म लेने के बाद उसमें ऐसी मानसिक या शारीरिक विकृति होने की आशंका हो जिससे वह गंभीर विकलांगता का शिकार हो सकता है, सरकार द्वारा घोषित मानवीय संकट ग्रस्त क्षेत्र या आपदा या आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं को भी शामिल किया गया है.

यह नए नियम मार्च में संसद में पारित गर्भ का चिकित्‍सकीय समापन (संशोधन) विधेयक, 2021 के तहत अधिसूचित किए गए हैं.

पुराने नियमों के तहत, 12 सप्ताह (तीन महीने) तक के भ्रूण का गर्भपात कराने के लिए एक डॉक्टर की सलाह की जरुरत होती थी और 12 से 20 सप्ताह (तीन से पांच महीने) के गर्भ के मेडिकल समापन के लिए दो डॉक्टरों की सलाह आवश्यक होती थी.

नए नियमों के अनुसार, भ्रूण में ऐसी कोई विकृति या बीमारी हो जिसके कारण उसकी जान को खतरा हो या फिर जन्म लेने के बाद उसमें ऐसी मानसिक या शारीरिक विकृति होने की आशंका हो जिससे वह गंभीर विकलांगता का शिकार हो सकता है, इन परिस्थितियों में 24 सप्ताह (छह महीने) के बाद गर्भपात के संबंध में फैसला लेने के लिए राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा.

मेडिकल बोर्ड का काम होगा, अगर कोई महिला उसके पास गर्भपात का अनुरोध लेकर आती है तो उसकी और उसके रिपोर्ट की जांच करना और आवेदन मिलने के तीन दिनों के भीतर गर्भपात की अनुमति देने या नहीं देने के संबंध में फैसला सुनाना है.

बोर्ड का काम यह ध्यान रखना भी होगा कि अगर वह गर्भपात कराने की अनुमति देता है तो आवेदन मिलने के पांच दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी की जाए और महिला की उचित काउंसिलिंग की जाए.

सड़क दुर्घटना से बचने में विफल रहना लापरवाही नहीं मानी जाएगी : सुप्रीम कोर्ट

सड़क दुर्घटना से संबंधित एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि असाधारण सावधानी बरत कर वाहनों की टक्कर से बचने में सिर्फ विफल रहना अपने आप में लापरवाही नहीं है. कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्ति पर सड़क दुर्घटना में योगदान के लिए लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है उसमें उसकी किसी चूक की भूमिका तो होनी चाहिए. न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ एक महिला और उनके नाबालिग बच्चों की अपील पर अपने फैसले में यह टिप्पणी की.

हाईकोर्ट ने कहा था कि महिला के दिवंगत पति भी लापरवाही के दोषी हैं. ट्रक से टक्कर में संलिप्त कार इस महिला के पति चला रहे थे और वह भी लापरवाही में योगदान के दोषी हैं. अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में महिला और उनके नाबालिग बच्चे मुआवजे की निर्धारित राशि के केवल 50 प्रतिशत के हकदार हैं. हालांकि, शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय का निर्णय पलटते हुए कहा कि कुछ असाधारण सावधानी बरतकर टक्कर से बचने में नाकामी अपने आप में लापरवाही नहीं है.

पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का निष्कर्ष ऐसे किसी सबूत पर आधारित नहीं है. यह महज एक अनुमान है कि यदि कार का चालक सतर्क होता और यातायात नियमों का पालन करते हुए वाहन सावधानीपूर्वक चलाता, तो यह दुर्घटना नहीं होती. पीठ ने छह अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि यह जताने के लिए रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं था कि कार का चालक मध्यम गति से गाड़ी नहीं चला रहा था या उसने यातायात नियमों का पालन नहीं किया था. इसके विपरीत, उच्च न्यायालय का मानना ​​है कि यदि ट्रक को राजमार्ग पर खड़ा नहीं किया गया होता तो कार की गति तेज होने पर भी दुर्घटना नहीं होती.

पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले को संशोधित किया और नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ कुल 50,89,96 रुपये के मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया. इस मामले में 10 फरवरी, 2011 को मृतक की कार एक ट्रक से उस समय सामने से टकरा गयी जब उसके चालक ने किसी संकेत के बगैर अपना वाहन अचानक ही रोक दिया था. इस हादसे में कार चला रहे मृतक को गंभीर चोटें लगीं थीं और उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गयी थी. याचिकाकर्ताओं ने ट्रक चालक की लापरवाही के कारण यह दुर्घटना होने का दावा करते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 54,10,000 रुपये के मुआवजे का दावा किया था.

एंटीबॉडी इंजेक्शन से Covid-19 के जोखिम में जोखिम में देखने को मिली कमी ,एस्ट्राजेनेका स्टडी की रिपोर्ट का दावा

ब्रिटिश-स्वीडिश बायोफार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) ने कहा कि एक इंजेक्शन के माध्यम से दिये गये एंटीबॉडी ( Antibody) उपचार ने कोविड-19 के प्रकोप (coronavirus outbreak) या इस बीमारी से मृत्यु के जोखिम में महत्वपूर्ण तरीके से कमी दिखाई है. हल्के से मध्यम लक्षण वाले कोविड-19 के ऐसे रोगियों को दिये गये उपचार की तुलना में ये परिणाम प्रभावी हैं जो अस्पताल में भर्ती नहीं हैं. कंपनी ने कहा कि एजेडडी7422 (AZD7442) के लिए टैकिल तृतीय चरण कोविड-19 उपचार परीक्षण ने दिखाया है कि प्राथमिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है.

कंपनी ने कहा है कि इंजेक्शन से एजेडडी7442 की 600 मिलीग्राम की एक खुराक ने गंभीर कोविड-19 होने या (किसी भी कारण से) मृत्यु होने के जोखिम को सात दिन या इससे कम अवधि के लिए लक्षण वाले अस्पताल में भर्ती नहीं किये गये रोगियों को दिये गये उपचार की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम किया है. एजेडडी7442 को तीसरे चरण के आंकड़ों के साथ पहली दीर्घकालिक सक्रिय एंटीबॉडी बताया गया है.

एस्ट्राजेनेका के बायोफार्मास्युटिकल्स आरएंडडी के कार्यकारी उपाध्यक्ष मेने पंगालोज ने कहा, ‘एजेडडी7442, हमारे दीर्घकालिक सक्रिय एंटीबॉडी समुच्चय के लिए ये महत्वपूर्ण परिणाम कोविड-19 की रोकथाम और उपचार दोनों में इस पद्धति के उपयोग के लिए साक्ष्यों को बढ़ाते हैं.’

दिसंबर 2020 में ब्रिटिश स्वास्थ्य नियामक से मंजूरी मिलने के पहलेे ही ब्रिटिश ड्रग्स ग्रुप एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोविड-19 वैक्सीन (Corona Vaccine) ने दावा किया था कि उन्‍होंने ‘जीत का फॉर्मूला’ हासिल कर लिया है. कंपनी के सीईओ पास्कल सोरियोट ने ‘संडे टाइम्स न्यूजपेपर’ को यह बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि यह वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षित है. पास्कल ने कहा कि जहां एक तरफ Pfizer-BioNtech वैक्सीन 95 प्रतिशत और मॉडर्ना 94.5 प्रतिशत प्रभाती हैं. तो वहीं हमारी ये वैक्सीन 100 प्रतिशत प्रभावी है.

Lakhimpur Kheri Violence: 12 घंटे की पूछताछ के बाद केंद्रीय मंत्री का बेटा आशीष मिश्रा गिरफ्तार, जेल भेजा गया

उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) ने तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष मिश्रा को शनिवार को करीब 12 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया और आधी रात के बाद उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व कर रहे पुलिस उप महानिरीक्षक (मुख्यालय) उपेंद्र अग्रवाल ने शनिवार रात लगभग 11 बजे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की जानकारी दी. अग्रवाल ने बताया, ‘‘मिश्रा ने पुलिस के सवालों का उचित जवाब नहीं दिया और जांच में सहयोग नहीं किया। वह सही बातें नहीं बताना चाह रहे हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया.’’

आशीष मिश्रा की शनिवार देर रात चिकित्सीय जांच कराई गई और आधी रात के बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में पेश किया गया. वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) एसपी यादव ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आशीष को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में लखीमपुर खीरी जिला जेल भेज दिया है. यादव ने बताया कि आशीष की पुलिस रिमांड के लिए अर्जी दी गयी थी और अदालत ने इस अर्जी पर सुनवाई के लिए 11 अक्टूबर की तारीख तय की है.

पुलिस लाइन के आसपास के इलाके में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया और अवरोधक लगाए गए. एसआईटी द्वारा आशीष से पूछताछ के दौरान अजय मिश्रा लखीमपुर खीरी में अपने सांसद कार्यालय में वकीलों के साथ मौजूद थे और बाद में वह अपने समर्थकों को शांत कराने के लिए बाहर आए. बड़ी संख्या में केंद्रीय मंत्री के समर्थक उनके आवास के बाहर एकत्रित हो गए थे और उनके तथा उनके बेटे के समर्थन में नारे लगा रहे थे.

मंत्री ने समर्थकों के समक्ष दावा किया कि आशीष निर्दोष है और वह बेदाग साबित होगा. गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मामले में राज्य सरकार की कार्रवाई पर गहरी नाराजगी प्रकट की थी.

तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी की हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत के मामले में आशीष और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या समेत अन्‍य संबंधित धाराओं में तिकुनिया थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है.

घटना के बाद आशीष पर आरोप लगा कि वह उन वाहनों में से एक में सवार था जिसने गत रविवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे पर प्रदर्शन कर रहे चार किसानों को कुचल दिया था, जिसके बाद प्राथमिकी में उसका नाम जोड़ा गया.

आशीष पूर्वान्ह लगभग 11 बजे एसआईटी के समक्ष पेश हुआ. उसे शुक्रवार को पुलिस ने दूसरा नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए शनिवार पूर्वान्ह 11 बजे तक पेश होने को कहा था. आशीष शुक्रवार को लखीमपुर खीरी में पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ था, इसलिए उसके घर के बाहर दूसरा नोटिस चस्पा किया गया था.

लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया थाने में बहराइच जिले के निवासी जगजीत सिंह की ओर से सोमवार को दर्ज कराई गई प्राथमिकी में मंत्री के पुत्र आशीष उर्फ मोनू पर 15-20 अज्ञात लोगों के साथ किसानों के ऊपर जीप चढ़ाने और गोली चलाने का आरोप लगाया गया है.

जगजीत सिंह की शिकायत पर सोमवार को तिकुनिया थाने में आशीष तथा 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 (उपद्रव), 148 (घातक अस्त्र का प्रयोग), 149 (भीड़ की हिंसा), 279 (सार्वजनिक स्थल से वाहन से मानव जीवन के लिए संकट पैदा करना), 338 (दूसरों के जीवन के लिए संकट पैदा करना), 304 ए (किसी की असावधानी से किसी की मौत होना), 302 (हत्या) और 120 बी (साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

वहीं, कांग्रेस की पंजाब इकाई के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने मंत्री के बेटे के पूछताछ के लिए पेश होने के बाद अपना ‘‘मौन धरना’’ शनिवार को समाप्त कर दिया.

केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अजय मिश्रा को बर्खास्त करने और उनके बेटे की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विपक्ष और किसान नेताओं ने शनिवार को भी सत्तारूढ़ दल भाजपा पर दबाव बनाए रखा. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत किसान नेताओं ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा.

इस मामले में सिद्धू ने निघासन तहसील में स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप के घर के बाहर शुक्रवार शाम छह बजकर 15 मिनट से अपना ‘‘मौन धरना’’ शुरू किया था. कश्यप की तीन अक्टूबर की घटना में मौत हो गई थी. सिद्धू ने बाद में पत्रकारों से कहा, ‘‘यह सत्य की जीत है. कोई व्यक्ति राजा हो सकता है, लेकिन न्याय से बड़ा कोई नहीं है. न्याय है तो शासन है, और यदि न्याय नहीं है तो कुशासन है. यह किसानों के परिवारों, लवप्रीत सिंह के परिवार और रमन कश्यप के परिवार की जीत है.’’ मारे गए चार किसानों में लखीमपुर के पलिया गांव के लवप्रीत सिंह भी शामिल हैं.

प्रियंका गांधी ने इस मामले में शनिवार को ट्वीट किया, ‘‘पीड़ित किसान परिवारों की एक ही मांग है, उन्हें न्याय मिले.’’ कांग्रेस महासचिव ने कहा कि मंत्री की बर्खास्तगी और हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के बिना न्याय मिलना असंभव है. सरकार आरोपी को हाजिर होने का निमंत्रण भेजकर क्या संदेश देना चाहती है. सरकार दोषियों को संरक्षण नहीं, सजा दे.

अखिलेश यादव ने शनिवार को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा नीत सरकार लखीमपुर हिंसा के मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के आरोपी बेटे को समन भेजने के बजाय ‘फूलों का गुलदस्ता’ दे रही है.’’

यादव ने लखनऊ में पत्रकारों से कहा, ‘‘जिस तरह से पहले किसानों को कुचला गया, अब कानून को कुचलने की तैयारी चल रही है. आपने देखा होगा कि कैसे एक वाहन ने किसानों को कुचल दिया, जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे थे. दोषी व्यक्ति अभी तक पकड़े नहीं गए हैं. उन्हें समन देने के बजाय, फूलों का गुलदस्ता दिया जा रहा है. समन केवल नाम में है, वास्तव में ‘सम्मान’ दिया जा रहा है.’’

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने आरोप लगाया कि पूर्व नियोजित साजिश के तहत हिंसा की गई. किसान संघों ने कहा कि अगर सरकार 11 अक्टूबर तक उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वे मारे गए किसानों की अस्थियों को लेकर लखीमपुर खीरी से ‘शहीद किसान यात्रा’ निकालेंगे. एसकेएम ने 18 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक देश भर में ‘रेल रोको’ आंदोलन और 26 अक्टूबर को लखनऊ में ‘महापंचायत’ करने का आह्वान किया.

एसकेएम के नेता योगेंद्र यादव ने दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अजय मिश्रा को ‘‘मंत्रिपरिषद से बर्खास्त किया जाना चाहिए और उन्हें हत्या और साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया जाना चाहिए.’’ (PTI Input)

Pakistan : भारत चाहे तो खत्म हो सकता है PCB का अस्तित्व, ICC को वही से मिलता है 90 प्रतिशत राजस्व

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख रमीज राजा ने कहा है कि अगर भारत चाहे तो उनके बोर्ड का संचालन ‘बिखर’ सकता है क्योंकि आईसीसी (ICC) का 90 प्रतिशत राजस्व वही (भारत) से आता है और इसका प्रभावी तौर पर यही मतलब है कि इस खेल को ‘भारत के व्यापारिक घरानों’ द्वारा चलाया जा रहा है.

रमीज ने खुलासा किया है कि बोर्ड के बजट का 50 प्रतिशत हिस्सा आईसीसी से मिलने वाले अनुदान से आता है.

पीसीबी अध्यक्ष ने इस्लामाबाद में अंतर प्रांतीय मामलों की सीनेट की स्थाई समिति के समक्ष पेश होने के बाद कहा कि समय आ गया है कि पीसीबी आईसीसी से मिलने वाले कोष पर अपनी निर्भरता कम करे और स्थानीय बाजार से जरूरत पूरी करे.

पीसीबी प्रमुख ने कहा, ‘‘आईसीसी राजनीतिक रंग में रंगी संस्था है जो एशियाई और पश्चिमी गुटों में बंटी है और इसका 90 प्रतिशत राजस्व भारत से आता है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ एक तरह से भारत के व्यापारिक घराने पाकिस्तान क्रिकेट को चला रहे हैं और अगर कल भारतीय प्रधानमंत्री फैसला करते हैं कि वह पाकिस्तान को कोई राजस्व नहीं लेने देंगे, तो इससे हमारा क्रिकेट बोर्ड बिखर सकता है.’’

रमीज ने कहा कि आसीसी ‘इवेंट मैनेजमेंट कंपनी’ की तरह बन गई है और अगर न्यूजीलैंड और इंग्लैंड की पुष्ट श्रृंखला के रद्द होने जैसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकना है तो पीसीबी को अपनी बात रखनी होगी.

उन्होंने कहा, ‘‘न्यूजीलैंड ने जो किया वह अस्वीकार्य है क्योंकि उन्होंने अब तक हमारे साथ कोई सूचना साझा नहीं की है कि किस आधार पर उन्होंने पाकिस्तान में श्रृंखला रद्द की. लेकिन अब वह श्रृंखला का कार्यक्रम दोबारा तय करने का प्रयास कर रहे हैं. ’’

रमीज ने संकेत दिए कि एक सप्ताह के अंदर न्यूजीलैंड के खिलाफ स्थगित श्रृंखला से जुड़ी अच्छी खबर आ सकती है.वरिष्ठ सीनेटर रजा रब्बानी ने सुझाव दिया कि पाकिस्तान को अब न्यूजीलैंड के खिलाफ नहीं खेलना चाहिए और किसी भी श्रृंखला से इनकार कर देना चाहिए, लेकिन रमीज ने कहा कि यह संभव नहीं होगा क्योंकि देश एक बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समुदाय का हिस्सा है.

Lakhimpur Kheri Violence: कानून हाथ में लेने की छूट किसी को नहीं, लेकिन दबाव में कोई कार्रवाई नही होगी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर की घटना के आरोपी तथा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी की विपक्ष की मांग पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि कानून हाथ में लेने की छूट किसी को नही होगी, लेकिन किसी के दबाव में कोई कार्रवाई नही होगी.

एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में योगी ने कहा, ‘लखीमपुर खीरी की घटना दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण हैं, सरकार उसकी तह तक जा रही है. लोकतंत्र में हिंसा के लिये कोई स्थान नही है जब कानून सबको सुरक्षा प्रदान करने की गारंटी दे रहा है तो किसी को भी अपने हाथ में कानून लेने का अधिकार नही है, चाहे वह कोई भी हो.’

गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के पुत्र को बचाने की कोशिश के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘कोई वीडियो इस प्रकार का नही है, हमने नंबर भी जारी किया है कि अगर किसी के पास कोई साक्ष्य है तो इस पर अपलोड करें. दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा. अन्याय किसी के साथ नहीं होगा. कानून हाथ में लेने की छूट किसी को नही होगी लेकिन किसी के दबाव में कोई कार्रवाई नही होगी.’

उन्होंने कहा कि माननीय उच्च्तम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि गिरफ्तारी से पहले आपके पास पर्याप्त साक्ष्य भी होने चाहिये. हम किसी व्यक्ति के आरोप पर अनावश्यक किसी को गिरफ्तार भी नहीं करेंगे, लेकिन हां अगर कोई दोषी है तो उसको छोड़ेंगे भी नहीं, चाहे कोई भी व्यक्ति क्यों न हो.’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमने पूरे उप्र में यहीं किया है, जिनके खिलाफ भी कार्रवाई हुई है, जिनके खिलाफ भी साक्ष्य मिले हैं, हमने उनके खिलाफ कार्रवाई करने में कोई गुरेज नही किया है. लखीमपुर खीरी की घटना में भी सरकार यही कर रही है.’

गौरतलब है कि तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया क्षेत्र में हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी. आरोप है कि इन किसानों को वाहन से टक्कर मारी गयी थी.

इस मामले में दर्ज एफआईआर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष का नाम भी हैं. उन्हें पुलिस के सामने पेश होने को कहा गया था लेकिन अभी तक वह पेश नही हुये हैं.