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Lakhimpur Kheri Violence: सुप्रीम कोर्ट ने उप्र सरकार से पूछा, क्या आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह बताने के लिए कहा कि तीन अक्टूबर की लखीमपुर खीरी हिंसा के सिलसिले में किन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और उन्हें गिरफ्तार किया गया है या नहीं? इस घटना में आठ लोगों की मौत हो गई थी.

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए वकील को इस बारे में स्थिति रिपोर्ट में जानकारी देने का निर्देश दिया.

वकील ने पीठ से कहा कि घटना की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है और राज्य मामले में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेगा. शीर्ष अदालत ने मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की है.

लखीमपुर खीरी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में आठ लोग मारे गए थे.

इससे पहले, दोपहर में शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह उन दोनों वकीलों का पक्ष जानना चाहती है जिन्होंने लखीमपुर खीरी घटना में सीबीआई को शामिल करते हुए उच्च स्तरीय जांच का अनुरोध किया था.

Covid-19 Vaccination : कोरोना वायरस रोधी टीकाकरण अभियान जल्द ही 100 करोड़ का लक्ष्य पार करेगा – प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तरफ लगातार बढ़ रहा है और खासतौर पर कोरोना वायरस रोधी टीकाकरण अभियान बहुत जल्द अपने 100 करोड़ के लक्ष्य की ओर जा रहा है.

ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से, देशभर में पीएम केयर्स के तहत स्थापित 35 प्रेशर स्विंग एड्सॉर्प्शन (पीएसए) ऑक्सीजन संयंत्र राष्ट्र को समर्पित करने के बाद दिए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 100 साल के सबसे बड़े कोरोना वायरस संकट का भारत ने बहुत बहादुरी से सामना किया है जिसे दुनिया बहुत बारीकी से देख रही है.

मोदी ने कहा कि देश का सबसे बड़ा कोरोना वायरस रोधी टीकाकरण अभियान भारत की एकजुटता का प्रतीक बन गया है. उन्होंने कहा कि देश के लिए यह गर्व की बात है कि अभी तक कोरोना रोधी टीकाकरण की 93 करोड़ खुराक लगाई जा चुकी हैं. उन्होंने कहा, ‘‘बहुत जल्द हम 100 करोड़ के आंकडे को पार कर जाएंगे.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल एक जांच प्रयोगशाला से अब 3,000 प्रयोगशालाओं तक का नेटवर्क बन गया है. उन्होंने कहा ‘मेड इन इंडिया’ के अभियान के तहत आज हम दूरदराज के इलाकों तक वेंटिलेटर पहुंचा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने कोरोना वायरस की लड़ाई में बड़ी जनसंख्या के साथ ही अपने भूगोल के कारण भी दोहरी चुनौती का निरंतर सामना किया जिसे समझना हर देशवासी के लिए जरूरी है.

उन्होंने कहा कि भारत ने सामान्य दिनों में प्रतिदिन होने वाले 900 मीट्रिक टन मेडिकल लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन 10 गुना से ज्यादा बढ़ा दिया जो दुनिया के किसी भी देश के लिए ‘अकल्पनीय लक्ष्य’ था. लेकिन इसका परिवहन भी एक बड़ी चुनौती थी जिसके लिए विशेष टैंकरों का इस्तेमाल किया गया, ऑक्सीजन रेलगाडियां चलाई गईं, भारतीय वायुसेना के विमानों तथा डीआरडीओ के माध्यम से तेजस लडाकू विमानों की तकनीक का उपयोग किया गया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम केयर्स के तहत देशभर में 1150 ऑक्सीजन संयंत्र काम करना शुरू कर चुके हैं और अब देश का हर जिला पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र के दायरे में है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में 4,000 नए ऑक्सीजन संयंत्र देश को मिलने जा रहे हैं.

मोदी ने कहा कि टीकाकरण के मामले में भारत ने दुनिया को राह दिखाई है कि टीकाकरण कैसे किया जाता है. उन्होंने कहा, ‘‘पहाड़ हो या रेगिस्तान, जंगल हो या समंदर, 10 लोग हों या 10 लाख, हर क्षेत्र तक आज हम पूरी सुरक्षा के साथ टीके पहुंचा रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि इसके लिए देश भर में एक लाख 30 हजार से ज्यादा टीकाकरण केंद्र स्थापित हैं. उत्तराखंड भी विषम भूगोल के बावजूद जल्द शतप्रतिशत पहली डोज का पड़ाव पूरा करने वाला है जिसके लिए मुख्यमंत्री और उनकी टीम बधाई के पात्र हैं.

उन्होंने कहा, ‘’सरकारी मानसिकता को हम बाहर निकालने जा रहे हैं जिसमें नागरिक सरकार के पास नहीं बल्कि सरकार नागरिक के पास जा रही है.’’ इस संबंध में उन्होंने कहा कि गरीबों को पक्का घर, बिजली, पानी, शौचालय, गैस कनेक्शन, 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन, किसानों के बैंक खातों में सीधे हजारों करोड रू, पेंशन और बीमा सुविधा सभी नागरिकों तक पहुंचाने के प्रयास जैसे जनहित के काम तेजी से चल रहे हैं.

‘आयुष्मान भारत’ योजना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हम इसी रूख के साथ आगे बढ़ रहे हैं जहां गरीब और मध्यम वर्ग की बचत भी हो रही है और उसे सुविधा भी मिल रही है. उन्होंने कहा कि अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का प्रयास भी शुरू किया गया है.

उन्होंने कहा कि छह एम्स से बढ़कर अब हम 22 एम्स स्थापित करने के लक्ष्य की तरफ तेजी से बढ रहे हैं. सरकार का यह भी लक्ष्य है कि हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कालेज हो. इसके लिए पिछले सात वर्षों में देश में 170 नए मेडिकल कालेज शुरू किए गए हैं और दर्जनों मेडिकल कालेजों पर काम जारी है.

मोदी ने कहा कि बाबा केदारनाथ की भव्यता को और बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश—कर्णप्रयाग पर तेजी से काम चल रहा है जिससे श्रद्धालुओं को बहुत सुविधा होगी. देहरादून हवाई अडडे की यात्री क्षमता को 250 से बढाकर 1200 तक पहुंचाया गया.

उन्होंने कहा कि पानी की कनेक्टिविटी का लाभ उत्तराखंड की महिलाओं को मिलना शुरू हुआ है. केवल दो साल के भीतर जल जीवन मिशन के तहत राज्य के करीब छह लाख घरों को नल से जल मिला है.

देश की सुरक्षा में उत्तराखंड की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार फौजियों और पूर्व फौजियों के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही। इस संबंध में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ‘वन रैंक वन पेंशन’ की 40 साल पुरानी मांग पूरी की और दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाया।

उन्होंने कहा कि जब वीर सैनिकों के पास आधुनिक हथियार और उपकरण होते हैं तो वे दुश्मन से आसानी से मुकाबला कर पाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ का अभियान चलाया है, उससे भी हमारे फौजियों को मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि सरकार के इन सभी प्रयासों का लाभ उत्तराखंड को होगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम दशकों की उपेक्षा से देवभूमि को निकालने का पूरी गंभीरता और ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं. वीरान पड़े गांव अब आबाद होने लगे हैं. कोरोना काल में लोगों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि उनके घरों तक सड़क पहुंच चुकी है जिसके बाद उन्होंने वहां होमस्टे खोल दिए हैं.

मोदी ने कहा कि नए आधारभूत ढांचे से युवाओं के लिए पर्यटन और तीर्थाटन में नए अवसर खुलने वाले हैं. उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षो में उत्तराखंड अपने जीवन के 25वें वर्ष में प्रवेश करेगा और लोगों के लिए विकास कार्यों में जुट जाने का यही सही समय है.

इस संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्र की सरकार उत्तराखंड को पूरी मदद दे रही है. उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयास लोगों के सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं और यही डबल इंजन उत्तराखंड को नई बुलंदी देने वाला है.’’

पाकिस्तान : बलूचिस्तान में भूकंप से 22 लोगों की मौत, 300 से ज़्यादा घायल

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के पहाड़ी इलाके में बृहस्पतिवार तड़के आए 5.9 तीव्रता के भूकंप में कई माकन ढह गए, जिससे कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक लोग घायल हो गए.

‘जियो न्यूज’ की खबर के अनुसार, आपदा प्रबंधन अधिकारियों का कहना है कि मृतक संख्या अभी और बढ़ सकती है.

भूकंप विज्ञान केन्द्र के अनुसार, भूकंप का केन्द्र हरनाई में 15 किलोमीटर की गहराई पर था. भूकंप से हुए नुकसान का अभी तक आकलन नहीं लगाया जा सका है. भूकंप के झटके बलूचिस्तान के क्वेटा, सिबी, हरनाई, पिशिन, किला सैफुल्ला, चमन, जियारत और झोब में महसूस किए गए. इससे सबसे अधिक लोग उत्तर-पूर्वी जिले हरनाई में हताहत हुए हैं.

अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 5.9 मापी गई है और इसका केन्द्र उथली गहराई पर ही था. ऐसे में इससे अधिक नुकसान होने की आशंका है.

हरनाई के उपायुक्त सुहैल अनवर हाशमी के बताया कि भूकंप संबंधी घटनाओं में 22 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से छह बच्चे हैं.

प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने कहा कि मृतकों में कई महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.

समाचार पत्र ‘डॉन’ की खबर के अनुसार, सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों में क्वेटा में भूकंप के बाद लोग सड़कों पर नजर आ रहे हैं.

भूकंप के बाद कई इलाकों में झटके महसूस किए जा रहे हैं. शुरुआती झटके तड़के तीन बजकर 20 मिनट पर महसूस किए गए थे, जिससे घबराए लोग घरों से बाहर निकल आए.

हाशमी के अनुसार, कई लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. हरनाई में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं. कई लोग मलबे में भी दब गए. 100 से अधिक मिट्टी के मकान भी ढह गए, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं. इलाके में बिजली आपूर्ति भी निलंबित है.

बलूचिस्तान के मुख्‍यमंत्री जाम कमाल खान आल्‍यानी ने कहा कि वहां मदद मुहैया कराई जा रही है और लोगों को निकालने के प्रयास भी जारी हैं.

उन्होंने ट्वीट किया कि रक्त की व्यवस्था की गई है, एम्बुलेंस मौजूद हैं, हेलीकॉप्टर सहित अन्य आपात सेवाओं और अन्य आवश्यक चीजों का इंतजाम किया गया है. सेना ने एक बयान में कहा कि सैनिक हरनाई के भूकंप प्रभावित इलाके में पहुंच गए हैं और तलाश एवं बचाव कार्य में जुटे हैं.

बयान में कहा गया कि खाद्य पदार्थ एवं अन्य आवश्यक समान भूकंप प्रभावित लोगों के लिए भेजा गया है. सेना के चिकित्सक तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मी आवश्यक दवाइयों के साथ मौके पर पहुंचे हैं और नगर प्रशासन की मदद कर रहे हैं.

प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) के महानिदेशक नसीर अहमद नासिर ने ‘जियो न्यूज’ को बताया कि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन भी हुए हैं.

गृह मंत्री मीर जियाउल्ला लांगोवे ने बताया कि पांच से छह जिलों में ‘‘व्यापक स्तर’’ पर नुकसान हुआ है और उसका अब भी आकलन किया जा रहा है.

पाकिस्तान, भारतीय और यूरेशियन ‘टेक्टोनिक प्लेटों’ के बीच है और सिंधु-त्सांगपो सिवनी क्षेत्र पर स्थित है, जो ‘हिमालय फ्रंट’ से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर में है, जो इस क्षेत्र को भूकंप के लिए अतिसंवेदनशील बनाता है.

गौरतलब है कि आठ अक्टूबर 2005 को आए भीषण भूकंप में 74,000 से अधिक लोग मारे गए थे.

Uttar Pradesh : किसानों और उप्र सरकार में समझौता, मृतकों के परिजनों को 45-45 लाख रुपये और नौकरी मिलेगी

उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की कि उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच करेंगे और घटना में मारे गए चार किसानों के परिवारों को 45-45 लाख रुपये के मुआवजे के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाएगी.

लखीमपुर खीरी में हिंसा में किसानों की मौत के बाद उप्र शासन के अधिकारियों और किसानों के बीच समझौता हो गया है और उनकी सभी मांगे मान ली गयी हैं.

अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने बताया, “किसानों के बीच समझौते के तहत लखीमपुर में मारे गये चार किसान परिवारों को 45-45 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को स्थानीय स्तर पर योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी भी दी जाएगी. जबकि घायलों को बेहतर इलाज के लिये 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. किसानों की मांग पर मामले की न्यायिक जांच उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायधीश से करायी जायेंगी.’ उन्होंने कहा कि किसानों की मांग पर पूरे मामले की प्रभावी जांच जल्द से जल्द करायी जायेंगी.

लखीमपुर में भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत की मौजूदगी में अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने घायलों को मुआवजा, नौकरी और आर्थिक मदद देने के सरकार के फैसले की घोषणा की.

लखीमपुर में संवाददाता सम्मेलन में अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि इस मामले में दोषी कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी.

उन्होंने कहा कि किसान नेताओं से समझौते के बाद अब मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और धार्मिक रीति रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार करवाया जाएगा.

कुमार ने कहा, “अधिकारी किसानों के अन्य मुद्दों को हल करने के लिए किसानों की एक समिति के संपर्क में रहेंगे.”

उधर लखीमपुर में संवाददाता सम्मेलन में मौजूद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.

गौरतलब है कि रविवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पैतृक गांव में आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में शिरकत करने के विरोध को लेकर भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई.

आरोप है कि मिश्रा के बेटे आशीष ने किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी जिससे उनकी मौत हुई. इस मामले में आशीष समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

Covid-19 : अमेरिका में मृतकों की संख्या 7,00,000 के आंकड़े पर पहुंची

अमेरिका में कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या शुक्रवार को 7,00,000 के आंकड़े पर पहुंच गयी. वहीं, अत्यधिक संक्रामक डेल्टा स्वरूप के मामलों में कमी आनी शुरू हो गयी और अस्पतालों में मरीजों की भीड़ कुछ कम हुई है.

अमेरिका में डेल्टा स्वरूप के कारण मृतकों की संख्या 6,00,000 से 7,00,000 पहुंचने में महज साढ़े तीन महीने का वक्त लगा. डेल्टा स्वरूप का संक्रमण उन लोगों में ज्यादा फैला जिन्होंने कोविड-19 रोधी टीके की खुराक नहीं ले रखी थी. मृतकों की संख्या बोस्टन की आबादी से कहीं ज्यादा है.

मृतकों का यह आंकड़ा स्वास्थ्य नेताओं और चिकित्सकों के लिए परेशान करने वाला है क्योंकि टीके सभी अमेरिकियों को लगभग छह महीने से उपलब्ध हैं और टीके की खुराक उन्हें अस्पताल में भर्ती होने तथा मरने से बचा सकती है।.ऐसा अनुमान है कि सात करोड़ योग्य अमेरिकियों ने अभी टीके की खुराक नहीं ली है.

बहरहाल, मृतकों की बढ़ती संख्या के बावजूद सुधार के कुछ संकेत हैं. देशभर में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की संख्या करीब 75,000 है जबकि सितंबर की शुरुआत में यह संख्या 93,000 थी. संक्रमण के नए मामलों में कमी आ रही है. मृतकों की संख्या भी कम होती दिखायी दे रही है. संक्रमण और मृतकों की संख्या कम होने की वजह अधिक लोगों के मास्क पहनने और टीका लगवाना है.

वहीं, दवा कंपनी मर्क ने शुक्रवार को कहा कि उसकी कोविड-19 से संक्रमित लोगों के लिए प्रायोगिक गोली ने अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों और मृतकों की संख्या आधी कर दी. अगर इसे दवा नियामकों से मंजूरी मिल जाती है जो यह कोरोना वायरस का इलाज करने में कारगर पहली दवा होगी.

सरकार के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने शुक्रवार को आगाह किया कि कुछ लोग टीका न लगवाने की वजह के तौर पर कुछ उत्साहजनक प्रवृत्तियों को देख सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘यह अच्छी खबर है कि संक्रमण के मामले कम हो रहे हैं. यह टीके की खुराक लेने की आवश्यकता के मुद्दे से बचने का बहाना नहीं है.’’

Rajasthan : राजस्थान सरकार ने निलंबित आरपीएस अधिकारी, महिला कांस्टेबल को बर्खास्त किया

राजस्थान सरकार ने राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) के निलंबित अधिकारी और एक महिला कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. यह अधिकारी व महिला कांस्टेबल हाल में एक आपत्तिजनक वीडियो को लेकर विवाद में आए थे जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था.

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक एम एल लाठर ने इन दोनों को सेवाओं से बर्खास्त किए जाने की पुष्टि की. उन्होंने बताया, ‘‘बर्खास्तगी के आदेश आज उन्हें दे दिए जाएंगे.’’ सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद इन दोनों के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है. अधिकारी व महिला कांस्टेबल इस समय न्यायिक हिरासत में हैं.

ब्यावर, अजमेर के वृत्ताधिकारी रहे आरोपी अधिकारी हीरा लाल सैनी का जयपुर में तैनात एक महिला कांस्टेबल के साथ का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया था. इसमें वे एक स्वीमिंग पूल में यौन गतिविधियों में संलिप्त नजर आए. महिला कांस्टेबल का छह साल का बेटा भी उस समय उसी पूल में खेल रहा था. राज्य के पुलिस महानिदेशक ने अधिकारी और महिला कांस्टेबल को विभागीय जांच के बाद नैतिक दुराचरण के मामले में आठ सितंबर को निलंबित कर दिया.

इस कार्रवाई के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक मामला दर्ज किया क्योंकि यह कथित वीडियो बाल अधिकारों के खिलाफ अपराध वाला कृत्य दिखाता है. अधिकारी व महिला की बाद में गिरफ्तारी हुई और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं. इस प्रकरण में सैनी व महिला कांस्टेबल के साथ साथ मामले को दबाने की कोशिश करने व प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के लिए आरपीएस के दो अधिकारियों व दो थाना प्रभारियों को भी निलंबित कर दिया गया है.

सात दशक में हर घर जल पहुंचाने के लिए जो काम हुआ था पिछले दो साल में उससे ज्यादा काम हुआ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के बाद सात दशक में भी देश की बड़ी आबादी तक नल से जल पहुंचाने की ‘‘विफलता’’ के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि तत्कालीन नीति निर्माताओं को बिना पानी की जिंदगी के दर्द का एहसास नहीं था.

केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन पर ग्राम पंचायत और पानी समितियों या ग्रामीण जल और स्‍वच्‍छता समितियों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संवाद के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने दावा किया कि आजादी के बाद के सात दशकों में हर घर जल पहुंचाने के लिए जो काम हुआ था, सिर्फ पिछले दो साल में उससे भी ज्यादा काम उनकी सरकार ने करके दिखाया है.

इस अवसर पर उन्होंने पानी की प्रचुरता में रहने वाले देश के हर नागरिक से पानी बचाने के ज्यादा से ज्यादा प्रयास करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि इसके लिए निश्चित तौर पर लोगों को अपनी आदतें भी बदलनी ही होंगी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत सी ऐसी फिल्में, कहानियां और कविताएं हैं जिनमें विस्तार से यह बताया गया है कि कैसे गांव की महिलाएं और बच्चे पानी लाने के लिए मीलों दूर चलकर जा रहे हैं और इन्हें देखकर कुछ लोगों के मन में गांव का नाम लेते ही यही तस्वीर उभरती है.

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन बहुत कम ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इन लोगों को हर रोज किसी नदी या तालाब तक क्यों जाना पड़ता है? आखिर क्यों नहीं पानी इन लोगों तक पहुंचता? मैं समझता हूं, जिन लोगों पर लंबे समय तक नीति-निर्धारण की जिम्मेदारी थी, उन्हें ये सवाल खुद से जरूर पूछना चाहिए था. लेकिन यह सवाल पूछा नहीं गया.’’

पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय के नीति-निर्माताओं ने पानी की किल्लत नहीं देखी थी और बिना पानी की जिंदगी का दर्द क्या होता है, उन्हें पता ही नहीं था, क्योंकि उनके घरों में, स्विमिंग पूल में पानी ही पानी होता था.

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे लोगों ने कभी गरीबी देखी ही नहीं थी. इसलिए गरीबी उनके लिए एक आकर्षण रही. साहित्य और बौद्धिक ज्ञान दिखाने का जरिया बन गया. इन लोगों में एक आदर्श गांव के प्रति मोह होना चाहिए था लेकिन यह लोग गांव के अभावों को ही पसंद करते थे.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी से लेकर वर्ष 2019 तक देश में सिर्फ तीन करोड़ घरों तक ही नल से जल पहुंचता था और 2019 में जल जीवन मिशन शुरू होने के बाद से पांच करोड़ घरों को पानी के संपर्क से जोड़ा गया है.

उन्होंने कहा, ‘‘आज देश के लगभग 80 जिलों के करीब सवा लाख गांवों के हर घर में नल से जल पहुंच रहा है. यानी पिछले सात दशकों में जो काम हुआ था, आज के भारत ने सिर्फ दो साल में उससे ज्यादा काम करके दिखाया है. वह दिन दूर नहीं नहीं जब किसी बहन बेटी को पानी भरने के लिए रोज रोज दूर-दूर तक पैदल नहीं जाना होगा.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास में पानी की कमी बाधा ना बने, इसके लिए काम करते रहना सभी का दायित्व है और यह सभी के प्रयास से ही संभव है.

उन्होंने कहा, ‘‘हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के प्रति भी जवाबदेह हैं. पानी की कमी से हमारे बच्चे अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में ना लगा पाएं और उनका जीवन पानी की किल्लत से ही निपटने में बीत जाए, यह हम नहीं होने दे सकते. इसके लिए युद्धस्तर पर काम करते रहना होगा. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के किसी हिस्से में टैंकरों व ट्रेनों से पहुंचाने की नौबत ना आए.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन की दृष्टि सिर्फ लोगों तक पानी पहुंचाने का ही नहीं है बल्कि यह विकेंद्रीकरण का भी बहुत बड़ा आंदोलन है.

उन्होंने कहा, ‘‘यह गांवों और महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाला आंदोलन है. इसका मुख्य आधार, जनआंदोलन और जनभागीदारी है.’’

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर जल जीवन मिशन एप और राष्‍ट्रीय जल जीवन कोष की भी शुरुआत की.

इस एप का उद्देश्‍य विभिन्‍न हितधारकों के बीच जागरूकता बढाना और मिशन के अंतर्गत जारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और उत्‍तरदायी बनाना है जबकि राष्‍ट्रीय जल जीवन कोष में कोई भी व्‍यक्ति, संस्‍थान, कंपनी या समाज सेवी, चाहे वह भारत में हो या विदेश में, अंशदान कर सकता है। इस कोष का उपयोग गांव में प्रत्‍येक घर, स्‍कूल, आंगनवाडी केन्‍द्र और अन्‍य सार्वजनिक संस्‍थानों में नल से पानी की सुविधा उपलब्‍ध कराना है.

प्रधानमंत्री ने हर घर को नल से स्‍वच्‍छ पानी उपलब्‍ध कराने के उद्देश्य से 15 अगस्‍त, 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी और अटल मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी’ और ‘कायाकल्प एवं शहरी सुधार के लिए अटल मिशन’ के दूसरे चरण की शुक्रवार को शुरुआत की.

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री की दृष्टि के अनुरूप स्वच्छ भारत मिशन 2.0 और ‘अमरुत 2.0’ को सभी शहरों को कचरा मुक्त करने और जल संरक्षण के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए तैयार किया गया है.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि स्वच्छ भारत मिशन और अटल मिशन भारत में तेजी से शहरीकरण की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ने का संकेत देने के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्य 2030 की उपलब्धि में योगदान करने में भी मददगार होंगे.

स्वच्छ भारत मिशन सभी शहरों को ‘कचरा मुक्त’ बनाने और अटल मिशन के अंतर्गत आने वाले शहरों के अलावा अन्य सभी शहरों में धूसर और काले पानी के प्रबंधन को सुनिश्चित करने, सभी शहरी स्थानीय निकायों को खुले में शौच से मुक्त बनाने की परिकल्पना करता है, जिससे शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित स्वच्छता के लक्ष्‍य को पूरा किया जा सके.

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, अटल मिशन के दूसरे चरण का लक्ष्य लगभग 2.64 करोड़ सीवर कनेक्शन प्रदान करके लगभग 2.68 करोड़ नल कनेक्शन और 500 अमृत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज का शत-प्रतिशत कवरेज करते हुए लगभग 4,700 शहरी स्थानीय निकायों में सभी घरों में पेयजल की आपूर्ति का शत-प्रतिशत कवरेज प्रदान करना है. मुताबिक इससे शहरी क्षेत्रों में 10.5 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ होगा.

इस अवसर पर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के शहरी विकास मंत्री भी मौजूद थे.

रोमानिया के अस्पताल में आग लगने से नौ लोगों की मौत

रोमानिया के बंदरगाह शहर कोन्स्तांता के एक अस्पताल में शुक्रवार सुबह लगी आग में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई.

रोमानिया के आपातकालीन स्थिति निरीक्षण कार्यालय ने कहा कि सभी मरीजों को संक्रामक रोगों के कोन्स्तांता अस्पताल से निकाल लिया गया है और मध्याह्न तक आग बुझा ली गई थी.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा गया कि 113 मरीज अस्पताल की चिकित्सा इकाई में थे, जिनमें से 10 गहन चिकित्सा इकाई के मरीज थे.

1.9 करोड़ की आबादी वाले यूरोपीय संघ के देश रोमानिया में पिछले एक साल के भीतर दो अन्य अस्पताल में घातक आग लगी है, जिसने देश के पुराने अस्पतालों के बुनियादी ढांचों के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं.

पिछले नवंबर में, उत्तरी शहर पियात्रा नीमत में कोविड-19 रोगियों के लिए गहन देखभाल इकाई में आग लगने से 10 लोगों की मौत हो गई थी. जनवरी में एक और आग ने बुखारेस्ट के मातेइ बाल्स अस्पताल के एक वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसमें कम से कम पांच लोग मारे गए थे.

मातेइ बाल्स की आग के बाद, राष्ट्रपति क्लाउस इओहानिस ने तत्काल और “गहन” सुधार का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह की त्रासदी “फिर से नहीं होनी चाहिए.”

Gupta Murder Case : आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर अखिलेश ने उठाये सवाल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर में कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि इसके पीछे “वसूली तंत्र” से जुड़े होने की पूरी आशंका है.

अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, ‘‘‘मनीष गुप्ता हत्याकांड’ में पुलिसवालों की गिरफ्तारी नहीं होना ये दर्शाता है कि वो फरार नहीं हुए हैं उन्हें फरार कराया गया है. दरअसल कोई आरोपियों को नहीं बल्कि खुद को बचा रहा है क्योंकि इसके तार ‘वसूली-तंत्र’ से जुड़े होने की पूरी आशंका है. ‘जीरो टालरेंस’ भी भाजपाई जुमला है.’’

गौरतलब है कि सोमवार देर रात को गोरखपुर जिले के रामगढ़ ताल इलाके में पुलिस ने एक होटल में तलाशी ली थी. आरोप है कि किसी अन्य व्यक्ति के पहचान पत्र के आधार पर होटल के एक कमरे में रुके तीन व्यवसायियों से पूछताछ के दौरान पुलिस ने उन्हें मारा पीटा था. सिर में चोट लगने से उनमें से मनीष गुप्ता नामक कारोबारी की गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी.

मामले में आरोपी सभी छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें निलंबित कर दिया गया है. घटना के वक्त गुप्ता अपने दो दोस्तों के साथ होटल में ठहरे हुए थे.