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अर्थव्यवस्था में आने लगा सुधार, संगठित क्षेत्र साल अंत तक कोविड-पूर्व स्तर पर पहुंच जाएगा: मोंटेक सिंह अहलूवालिया

जाने-माने अर्थशास्त्री और पूर्ववर्ती योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब निचले स्तर से धीरे-धीरे ऊपर आ रही है और संगठित क्षेत्र इस साल के अंत तक महामारी-पूर्व स्थिति में आ सकता है. अहलूवालिया ने ‘ऑनलाइन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वह पुरानी संपत्तियों को बाजार पर चढ़ाने (राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन) की योजना के पक्ष में हैं. इससे बिजली, सड़क और रेलवे समेत विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा संपत्ति का बेहतर उपयोग होगा और सही मूल्य सामने आएगा.

उन्होंने कहा, ‘‘एक अच्छी बात यह है कि अर्थव्यवस्था अब जितनी नीचे जाने थी उस स्तर से उबरने लगी है और धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है. संगठित क्षेत्र इस साल के अंत तक महामारी-पूर्व स्थिति में आ जाएगा. यह विभिन्न क्षेत्रों, सेवा क्षेत्रों आदि के लिये अलग-अलग हो सकता है.” अहलूवालिया ने कहा कि अगर संगठित क्षेत्र में तेजी लौटती है, तब असंगठित क्षेत्र भी इसके रास्ते पर आएगा. जब निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ता है, बेहतर आर्थिक पुनरूद्धार होता है.

उल्लेखनीय है कि कमजोर तुलनात्मक आधार और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में रिकार्ड 20.1 प्रतिशत रही. कोविड-महामारी की दूसरी लहर के बावजूद उच्च वृद्धि दर हासिल की जा सकी है. सरकार के बुनियादी ढांचा को लेकर हाल के कदम के बारे में अहलूवालिया ने कहा, ‘‘मैं एनएमपी (राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन) के पक्ष में हूं. अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, यह अच्छी चीज है.”

पिछले महीने, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 लाख रुपये की राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन की घोषणा की. इसका उद्देश्य सरकार की पुरानी संपत्तियों को बाजार पर चढ़ाकर ढांचागत क्षेत्र की नयी परियोजनाओं के लिये वित्त जुटाना है. कृषि क्षेत्र में सुधारों के बारे में उन्होंने कहा कि कृषि का आधुनिकीकरण वांछनीय है. अहलूवालिया ने कहा, ‘‘लेकिन जिस तरीके से तीन कृषि कानूनों को क्रियान्वित किया गया, इससे किसानों के बीच संदेह पैदा हुआ है.”

उल्लेखनीय है कि मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सैकड़ों किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमा पर डेरा जमाए हुए हैं. वे तीनों कृषि कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं.

Uttar Pradesh: धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार कलीम को 10 दिन की ATS हिरासत में भेजा गया

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते को अदालत से बृहस्पतिवार को मौलाना कलीम सिद्दीकी की 10 दिन की हिरासत मिली. एनआईए/एटीएस की अदालत ने धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार आरोपी सिद्दीकी को 10 दिन के लिए एटीएस की हिरासत में सौंपने का आदेश दिया है. हिरासत की अवधि 24 सितंबर की सुबह 10 बजे से शुरू होकर चार अक्टूबर की सुबह 10 बजे प्रभावी रहेगी.

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि सिद्दीकी को 21 सितंबर को मेरठ से गिरफ्तार करने के बाद बुधवार को अदालत में पेश किया गया था और अवैध धर्मांतरण मामले की जांच के लिए उसे 10 दिनों के लिए एटीएस की हिरासत में देने का अनुरोध किया गया था जिसे अदालत ने बृहस्पतिवार को स्वीकार लिया.

उन्होंने बताया कि हिरासत अवधि के दौरान मौलाना सिद्दीकी से उसके संबंधों के बारे में और जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाएगी. एटीएएस की अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपी जेल से अदालत में उपस्थित हुआ. गौरतलब हैं कि 20 जून, 2021 को इस मामले की एफआईआर थाना एटीएस में उपनिरीक्षक विनोद कुमार ने दर्ज कराई थी. एटीएस ने 21 सितंबर को मेरठ के जाने-माने इस्लामिक विद्वान सिद्दीकी को कथित तौर पर “सबसे बड़ा धर्मांतरण सिंडिकेट” चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

एटीएस की अर्जी पर बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन तथा सात देशी व विदेशी सिमकार्ड बरामद हुए हैं. गौरतलब है कि दिल्ली के जामिया नगर निवासी मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी और मोहम्मद उमर गौतम को 20 जून को एटीएस द्वारा गिरफ्तार किया गया था जिसके तीन महीने बाद मौलाना सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया है .

एटीएस अब तक धर्मांतरण रैकेट के सिलसिले में 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, मौलाना सिद्दीकी 11 वां आरोपी है.
अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों पर उत्तर प्रदेश विधि विरूध्द धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2020 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

Assam : हिंसक झड़प में 2 लोगों की मौत, 9 पुलिसकर्मियों सहित कई घायल

असम के दरांग जिले के धौलपुर गोरुखुटी इलाके में स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प में कम से कम 2 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 9 पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की खबर है.

खबरों के अनुसार, स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच ये झड़प तब हुई, जब सुरक्षाकर्मियों की एक टीम कृषि परियोजना से संबंधित भूमि से अवैध अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए इलाके में गई थी.

इस झड़प में कम से कम 2 लोग मारे गए हैं और 9 पुलिसकर्मी समेत कई अन्य घायल हो गए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है.

गौरतलब है कि कुछ समय पहले असम कैबिनेट ने भूमि को पूरी तरह से अतिक्रमणकारियों से वसूलने और इसे राज्य कृषि परियोजना में बदलने का निर्णय लिया था.

IPL 2021 : रोहित शर्मा ने रचा इतिहास, कोलकाता के खिलाफ मैच में बनाया ये रिकार्ड

मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने एक खास कीर्तिमान अपने नाम कर लिया. उन्होंने अबु धाबी के शेख जायेद स्टेडियम में कोलकाता नाइट राइडर्स (MI vs KKR) के खिलाफ एक रिकॉर्ड बना दिया और वह इस टीम के खिलाफ लीग में 1000 या इससे ज्यादा रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए. खास बात है कि IPL में किसी एक टीम के खिलाफ 1000 रन बनाने वाले रोहित एकमात्र बल्लेबाज भी हैं.

रोहित शर्मा लीग के 14वें सीजन के यूएई चरण में अपना पहला मैच खेलने उतरे. उन्होंने मुंबई की कप्तानी संभाली. कोलकाता के कप्तान ऑयन मॉर्गन ने टॉस जीता और मुंबई को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया. रोहित ने मुंबई को शानदार शुरुआत दी और नीतीश राणा के पारी के पहले ओवर की पहली ही गेंद पर चौका जड़ा. उन्होंने सुनील नरेन के पारी के तीसरे ओवर में चौका लगाया और फिर वरुण चक्रवर्ती के अगले ही ओवर की शुरुआती दोनों गेंदों को बाउंड्री के पार भेजा.

जैसे ही रोहित ने चक्रवर्ती की गेंद पर दूसरा चौका लगाया उन्होंने निजी स्कोर 21 रन पहुंचा दिया. वह इस रिकॉर्ड से मात्र 18 रन पीछे थे और उन्होंने यह कीर्तिमान हासिल कर लिया. इस मैच के पहले तक रोहित ने केकेआर के खिलाफ 49.10 की औसत और 133.06 की स्ट्राइकरेट से 982 रन बनाए थे. मुंबई इंडियंस को यूएई चरण के उसके पहले मुकाबले में 3 बार की चैंपियन टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने 20 रन से हराया था, रोहित उस मैच में नहीं खेले थे.

आईपीएल में किसी एक टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने बाले बल्लेबाजों की बात करें तो इस लिस्ट में रोहित के बाद डेविड वॉर्नर का नाम आता है जिन्होंने पंजाब के खिलाफ कुल 943 रन और केकेआर के खिलाफ 915 रन बनाए हैं. वहीं, आरसीबी के कप्तान विराट कोहली ने दिल्ली के खिलाफ कुल 909 रन बनाए हैं.

Covid-19 से जान गंवाने वालों के परिवारों को 50 हजार रुपये का मुआवजा भद्दा मजाक: कांग्रेस

कांग्रेस ने Covid-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दिये जाने की सिफारिश को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि यह शोक संतप्त परिवारों के साथ भद्दा मजाक है तथा सरकार के अहंकार एवं असंवेदनशीलता का प्रमाण है.

पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र से यह आग्रह भी किया कि कोविड से मौतों का सही आंकड़ा पता करने के लिए फिर से सर्वेक्षण कराया जाए और संबंधित परिवारों को चिह्नित कर उन्हें पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने कोविड-19 से जान गंवा चुके लोगों के परिजन को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की सिफारिश की है.

केंद्र ने कहा कि कोविड-19 राहत कार्य में शामिल रहने या महामारी से निपटने के लिए तैयारियों से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहने के चलते संक्रमण से जान गंवाने वालों के परिजन को भी अनुग्रह राशि दी जाएगी.

सुप्रिया ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मोदी सरकार के ढोंग का एक बार फिर पर्दाफ़ाश हो चुका है. पहले तो सरकार की विफलता के चलते लाखों लोगों की कोरोना काल में जान चली गयी और अब शोक संतप्त परिवारों के घावों पर नमक-मिर्च रगड़ा जा रहा है। मृतकों के परिजन को मात्र 50,000 रुपये का मुआवज़ा देने की बात करना इन परिवारों के साथ भद्दा मज़ाक़ है.’’

सुप्रिया ने आरोप लगाया कि यह सरकार के अहंकार और असंवेदनशीलता का प्रमाण भी है. उन्होंने सवाल किया, ‘‘जिस सरकार ने एक साल में मात्र ईंधन पर कर से 4 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा कमाया है, क्या वह मात्र 22,000 करोड़ रुपये इन परिवारों को नहीं दे सकती?’’

कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘यह वही सरकार है जिसने सबसे पहले उच्चतम न्यायालय में यह कहा था कि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत कोविड महामारी को ‘आपदा’ ही नहीं कहा जा सकता है. इस कुतर्क को सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जून, 2021 के अपने फ़ैसले में पूर्णतः ख़ारिज कर दिया था.’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘न्यायालय के आदेश के बाद मोदी सरकार ने 22 सितंबर, 2021 को राज्य आपदा कोष से मात्र 50,000 रुपये दिए जाने का फ़ैसला किया. गृह मंत्रालय ने 8 अप्रैल, 2015 को एसडीआरएफ और एनडीआरएफ से संशोधित सूची और सहायता के मानदंड जारी किए थे जिसमें यह साफ़ तौर से अंकित है कि किसी भी आपदा के कारण हुई मृत्यु के लिए पीड़ित परिवार को बाक़ी राहत के अलावा 4 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाएगा। यानी मोदी सरकार ने अपने ही बनाए हुए क़ानून की भी अनदेखी कर दी।’’ सुप्रिया ने केंद्र से आग्रह किया, ‘‘हर मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए। मौत के आकड़ें छुपाने का प्रयास बंद हो। हर राज्य में कोरोना काल में होने वाली मृत्यु का फिर से सर्वेक्षण कर मुआवजे के दावों को स्वीकार किया जाए।’’

भारतीय प्रवासियों ने दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बनाई है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए भारतीय प्रवासियों की प्रशंसा की है.

मोदी के यहां पहुंचने पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. प्रधानमंत्री का विमान बुधवार को जैसे ही हवाई अड्डे पर उतरा, उसके तुरंत बाद भारतीय अमेरिकियों के एक समूह ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. इसके बाद मोदी ने होटल में समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद किया.

प्रधानमंत्री ने भारतीय-अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ अपने संवाद की तस्वीरें ट्वीट कीं और लिखा, ‘‘मैं गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय समुदाय का आभारी हूं. भारतीय प्रवासी हमारी ताकत हैं.’’

मोदी ने कहा, ‘‘ भारतीय प्रवासियों ने जिस प्रकार दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बनाई है, वह प्रशंसनीय है.’’

प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों की सभाएं तथा बैठकें उनके कार्यक्रम का अहम हिस्सा रही हैं, लेकिन कोविड-19 संबंधी मौजूदा हालात के कारण प्रधानमंत्री इस बार कोई बड़ी सभा संभवत: नहीं करेंगे. भारतीय-अमेरिकियों के बीच मोदी खासे लोकप्रिय हैं. अमेरिका की जनसंख्या में 1.2 प्रतिशत से अधिक लोग भारतीय-अमेरिकी हैं. यह समुदाय अमेरिकी राजनीति समेत कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से सातवीं बार अमेरिका की यात्रा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक भागीदारी और जापान तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ संबंधों को मजबूत करने का अवसर होगी.

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मुलाकात के अलावा मोदी का ऑस्ट्रेलिया के अपने समकक्ष स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करने का कार्यक्रम है.

Delirium के मरीज़ों के लिए खारनक साबित को सकता है Covid-19, हो सकती है ये समस्‍या : स्‍टडी रिपोर्ट

अमेरिका में कोविड-19 महामारी की शुरुआत में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हुए 150 मरीजों के एक अध्ययन में यह पाया गया कि 73 प्रतिशत मरीजों को डिलीरियम (Delirium) नामक बीमारी थी. डिलीरियम चित्तविभ्रम की एक गंभीर स्थिति है जिसमें दिमाग के ठीक तरह से काम न करने के कारण व्यक्ति भ्रम, उत्तेजना में रहता है और स्पष्ट रूप से सोच-समझ नहीं पाता. पत्रिका ‘बीएमजे ओपन’ में प्रकाशित अध्ययन में यह पाया गया कि डिलीरियम के मरीज उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों से भी पीड़ित रहते हैं और उनमें कोविड-19 संबंधी लक्षण अधिक गंभीर दिखाई देते हैं.

अमेरिका में मिशिगन विश्वविद्यालय में अध्ययन के लेखक फिलिप व्लीसाइड्स ने कहा, ‘‘कोविड का संबंध कई अन्य प्रतिकूल नतीजों से भी है जिससे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है और स्वस्थ होना मुश्किल हो जाता है.”अध्ययनकर्ताओं ने मार्च और मई 2020 के बीच आईसीयू में भर्ती रहे मरीजों के एक समूह को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उनके मेडिकल रिकॉर्ड्स और टेलीफोन पर किए गए सर्वेक्षण का इस्तेमाल किया. अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि डिलीरियम से ही दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है और साथ ही खून के थक्के जम सकते हैं और आघात आ सकता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता खो सकती है. उन्होंने बताया कि डिलीरियम के मरीजों में दिमाग में सूजन बढ़ गयी. दिमाग में सूजन से भ्रम और बेचैनी बढ़ सकती है.

अध्ययन में यह भी पाया गया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी सोचने-समझने की क्षमता चले जाने की स्थिति बनी रह सकती है. करीब एक चौथाई मरीज अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी डिलीरियम से पीड़ित पाए गए. कुछ मरीजों में ये लक्षण महीनों तक रहे. इससे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद स्वस्थ होने की प्रक्रिया और अधिक मुश्किल हो सकती है.फिलिप ने कहा कि निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि कोविड-19 के गंभीर लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों के अवसाद ग्रस्त और डिलीरियम से पीड़ित होने की संभावना बहुत अधिक है.उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर यह अध्ययन दिखाता है कि क्यों टीका लगवाना और गंभीर रूप से बीमार पड़ने से बचना इतना महत्वपूर्ण है. इसके तंत्रिका संबंधी दीर्घकालीन असर हो सकते हैं जिसके बारे में संभवत: हम इतनी बात नहीं करते जितनी हमें करनी चाहिए.”

Maharashtra : ठाणे में गड्ढे के कारण मौत होने पर सड़क ठेकेदारों के खिलाफ होगी कार्रवाई

महाराष्ट्र के ठाणे में गड्ढों के कारण लोगों की मौत के मामले में सड़क ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी. नारपोली पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक मालोजी शिंदे ने बृहस्पतिवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि ठाणे जिले के काशेली, अंजुरफाटा, भिवंडी, मनकोली और अन्य इलाकों में सड़कों में कई गड्ढे हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं और कई बार लोगों की मौत भी होती है. इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए भिवंडी के पुलिस उपायुक्त (जोन- 2) योगेश चव्हाण ने बुधवार को सरकारी अधिकारियों और संबंधित राजनीतिक नेताओं के साथ बैठक की. विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में चव्हाण ने कहा कि गड्ढों के कारण लोगों की मौत होने पर संबंधित सड़क ठेकेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि गड्ढों की समस्या का समाधान निकालने और खराब सड़कों की उचित मरम्मत सुनिश्चित करने के लिए वह जल्द ही संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. बैठक के दौरान लोक निर्माण विभाग के एक कार्यकारी अभियंता ने कहा कि गड्ढों को दैनिक आधार पर भरा जा रहा है, और ऐसी सड़कों को सीमेंट से ठीक करने तथा इन पर टोल संग्रह को निलंबित करने के लिए सरकार की मंजूरी के वास्ते एक प्रस्ताव भेजा गया है. ऐसे ही एक मामले में मंगलवार को ठाणे शहर के घोडबंदर रोड पर गायमुख टोल बूथ के पास एक मोटरसाइकिल के गड्ढे में गिरने से 23 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी. पुलिस ने यह जानकारी दी थी.

उन्होंने बताया था कि 16 सितंबर को मुंबई-नासिक राजमार्ग पर मनकोली नाका पर मोटरसाइकिल के गड्ढे में गिरने से एक महिला और उसके बेटे की मौके पर ही मौत हो गई. वे गणपति उत्सव के दौरान अपने एक रिश्तेदार के घर पूजा करके अपने घर लौट रहे थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसदीय चुनावों में जीत के लिए कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को बधाई दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कनाडाई समकक्ष जस्टिन ट्रूडो को मिली चुनावी सफलता पर उन्हें बधाई दी और कहा कि वह भारत-कनाडा संबंधों को और मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम जारी रखने के इच्छुक हैं.

कनाडा के संसदीय चुनावों में ट्रूडो की लिबरल पार्टी को जीत मिली है लेकिन बहुमत हासिल करने की उनकी मंशा पूरी नहीं हो पायी है. बहरहाल, ट्रूडो अल्पमत वाली एक स्थिर सरकार का नेतृत्व करेंगे जिसे निकट भविष्य में गिरा पाना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा.

मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘चुनावों में जीत के लिए प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को बधाई. मैं भारत-कनाडा संबंधों को और मजबूत करने के साथ ही वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर सहयोग के लिए साथ मिलकर काम जारी रखने का इच्छुक हूं.’’

ट्रूडो के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी ने किसी भी पार्टी की तुलना में सबसे अधिक सीटें हासिल की हैं. लिबरल पार्टी 2019 में जीती गयी सीटों से एक अधिक यानी 158 सीटों पर जीत के कगार पर है। वह हाउस ऑफ कॉमंस में बहुमत के लिए आवश्यक 170 सीटों से अभी 12 सीट दूर है. कंजरवेटिव पार्टी ने 119 सीटें जीती हैं. पिछले संसदीय चुनाव में भी वह इतनी ही सीटें जीत सकी थी. ऐसा प्रतीत नहीं होता कि ट्रूडो पर्याप्त सीटें जीत पाएंगे लेकिन वह एक स्थिर अल्पमत की सरकार बनाने की स्थिति में हैं.

Covid-19 : अमेरिका में संक्रमण और मौत के मामले बढ़े, बाइडन का घर पर जांच का आग्रह

अमेरिका में कोरोना वायरस से मार्च के बाद से पहली बार एक दिन में औसतन 1,900 से अधिक मरीजों की मौत हुई और विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण एक अलग समूह यानी टीके की खुराक न लेने वाले 7.1 करोड़ अमेरिकियों को अपना निशाना बना रहा है.

देश के राष्ट्रपति जो बाइडन कोविड-19 की इस जानलेवा लहर से निपटने में मदद के लिए लोगों से घर पर संक्रमण की जांच करने का अनुरोध कर रहे हैं. महामारी के कारण अस्पताल क्षमता से अधिक भरे पड़े हैं और देशभर में स्कूलों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है.

स्प्रिंगफील्ड-ब्रैनसन इलाके में कॉक्सहेल्थ अस्पतालों में एक हफ्ते में ही 22 लोगों की मौत हो गयी. पश्चिमी वर्जीनिया में सितंबर के पहले तीन हफ्तों में 340 लोगों की मौत हो चुकी है. जॉर्जिया में हर दिन 125 मरीज जान गंवा रहे हैं जो कैलिफोर्निया या किसी अन्य घबी आबादी वाले राज्य से अधिक है.

जॉन्स हॉप्किंस यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक, अब अमेरिका की करीब 64 प्रतिशत आबादी ने कोविड-19 रोधी टीके की कम से कम एक खुराक ले ली है. पिछले दो हफ्तों में हर दिन औसतन जान गंवाने वाले मरीजों की संख्या 40 प्रतिशत तक बढ़ गयी है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले और जान गंवाने वाले लोगों की बड़ी तादाद टीका न लगवाने वाले लोगों की है. अमेरिका के कई हिस्सों में दवा की दुकानों में जांच किट खत्म होती दिखायी दे रही है और दवा निर्माताओं ने आगाह किया कि इसका उत्पादन बढ़ाने में उन्हें हफ्तों का वक्त लगेगा.

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों के बाद से जांच की कम होती भूमिका, संक्रमण के कम होते मामलों और टीकाकरण की बढ़ती दर ने लोगों को लापरवाह कर दिया. साथ ही स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह सलाह दी कि टीका लगवा चुके लोग जांच से बच सकते हैं. अधिकारियों ने डेल्टा स्वरूप के कारण संक्रमण और मौत के मामले बढ़ने पर इस सलाह को वापस ले लिया था.

अमेरिका ने घर पर रैपिड जांच करने की तकनीक को अपनाने में अधिक जांच परख कर कदम उठाया है जबकि ब्रिटेन जैसे देशों ने इसे व्यापक रूप से लागू किया है. खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने ऐसी करीब छह जांचों को मंजूरी दी है. एफडीए समेत कई विशेषज्ञ अब भी प्रयोगशाला में होने वाली जांच को अधिक उपयुक्त मानते हैं क्योंकि इससे संक्रमण के कम से कम स्तर का भी पता चल जाता है.

बहरहाल, बाइडन ने इस महीने अपने भाषण में रैपिड जांच पर जोर देते हुए कहा था कि सरकार 28 करोड़ जांच किट खरीदेगी और साथ ही उन्होंने सभी स्कूलों से नियमित जांच कार्यक्रम चलाने का भी आह्वान किया. उन्होंने कहा कि संघीय सरकार रक्षा उत्पादन अधिनियम का इस्तेमाल करेगी ताकि दवा निर्माताओं को जांच किट बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल मिल सकें.