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Tokyo Olympics: सौरभ चौधरी और मनु भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल के दूसरे चरण में बाहर, मेडल की उम्मीदों को लगा झटका

भारतीय निशानेबाज सौरभ चौधरी और मनु भाकर टोक्यो ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा के क्वालीफिकेशन के दूसरे चरण में मंगलवार को यहां पहले चरण का प्रदर्शन दोहराने में नाकाम रहे और आखिर में उन्हें सातवें स्थान से संतोष करना पड़ा.

भारतीय जोड़ी ने क्वालीफिकेशन के पहले चरण में 582 अंक के साथ शीर्ष पर रहकर दूसरे चरण में जगह बनायी थी लेकिन सौरभ को मनु से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला जिससे टीम की पदक की उम्मीदें समाप्त हो गयी.

सौरभ ने दूसरे चरण में 194 (96 और 98) अंक बनाये लेकिन मनु 186 (92 और 94) अंक ही बना सकी. इस तरह से यह भारतीय जोड़ी 380 के कुल स्कोर के साथ सातवें स्थान पर रही.

सौरभ ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में भी क्वालीफिकेशन में शीर्ष पर रहकर फाइनल में जगह बनायी थी लेकिन तब भी उन्हें सातवें स्थान से संतोष करना पड़ा था.

चीन और रूस के निशानेबाजों ने पछाड़ाक्वालीफिकेशन के पहले चरण में सौरभ और मनु से एक अंक पीछे रहने वाले चीन के झियांग रैनझिन और वी पांग तथा रूसी ओलंपिक समिति (आरओसी) के वितालिना बातसराशकिना और आर्तम चेरनोसोव ने दूसरे चरण में क्रमश: 387 और 386 अंक बनाकर पहले दो स्थान हासिल किये। इनके बीच अब स्वर्ण पदक का मुकाबला होगा.

यूक्रेन की ओलिना कोस्तियेच और ओलेह ओमलेचुक तथा सर्बिया के जोराना अरुनोविच और दामिर मिकेच के बीच कांस्य पदक के लिये खेलेंगे. क्वालीफिकेशन के पहले चरण में भी सौरभ ने अच्छा प्रदर्शन किया था. उन्होंने 98, 100 और 98 के स्कोर के साथ कुल 296 अंक बनाये जबकि मनु ने 286 अंक (97, 94 और 95) अंक हासिल किये. चोटी की आठ टीमों ने अगले चरण में प्रवेश किया.

अभिषेक वर्मा और यशस्विनी सिंह देसवाल की एक अन्य भारतीय जोड़ी 564 अंक के साथ 17वें स्थान पर रहने के कारण पहले चरण में ही स्पर्धा से बाहर हो गयी. अभिषेक ने 283 (92, 94 और 97) जबकि यशस्विनी ने 281 (95, 95 और 91) अंक अर्जित किए.

प्रियंका गांधी का केंद्र पर निशाना, कहा- सरकार के पास ‘शहीद किसानों’ का आंकड़ा नहीं, कृषि कानून रद्द हो

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों का रिकॉर्ड नहीं होने के केंद्र के बयान के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार किसानों का अपमान कर रही है और कहा कि कानूनों को निरस्त करना चाहिए. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को संसद को बताया कि केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ साल 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन के दौरान मृत किसानों के बारे में सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने संसद में कहा कि न तो उसने ‘काले’ कृषि कानूनों पर किसानों की मंशा जानने की कोई कोशिश की और न ही उसके पास शहीद किसानों का कोई आंकड़ा है. अपने खरबपति मित्रों का चश्मा लगाकर आंखों का पानी मार चुकी यह सरकार बस किसानों का अपमान किए जा रही है.’’ प्रियंका ने ‘‘काले कृषि कानून वापस लो’’ हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए यह टिप्पणी की.

मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान तीनों कृषि कानूनों के विरोध में पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलनकारी किसानों में से 200 किसानों का एक समूह विशेष अनुमति मिलने के बाद अब मध्य दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहा है.

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार को साल 2020 के बाद से कृषि कानून के विरोध के दौरान मारे गए किसानों की कुल संख्या के बारे में पता है. इस पर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था, ‘‘भारत सरकार के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है.’’ राज्यसभा में अपने लिखित उत्तर के दौरान उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने किसान संघों के साथ चर्चा के दौरान उनसे अपील की थी कि उस समय की ठंड और कोविड​​​​-19 की स्थिति को देखते हुए बच्चों और बुजुर्गों, विशेषकर महिलाओं को घर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए.

इसके अलावा, एक अलग जवाब में, तोमर ने कहा था, ‘‘इन कृषि कानूनों के कारण किसानों के मन में पैदा हुई आशंकाओं के कारणों का पता लगाने के लिए कोई अध्ययन नहीं कराया गया है.’’ उन्होंने कहा था कि केंद्र ने किसानों की आशंकाओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं.

महाराष्ट्र में भूस्खलन की घटनाओं के बाद 89 शव बरामद, 34 लोग लापता: एनडीआरएफ

महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण हुईं भूस्खलन की घटनाओं के बाद 89 शव बरामद किए गए हैं और 34 लोग लापता हैं.

एनडीआरएफ के महानिदेशक एस एन प्रधान ने राज्य के रायगढ़, रत्नागिरी और सतारा जिलों में चलाए जा रहे अपने अभियान पर ताजा आंकड़ों की जानकारी ट्वीट के माध्यम से दी.

आंकड़ों के अनुसार, एनडीआरएफ ने इन इलाकों से कुल 89 शव बरामद किए हैं जिनमें से सबसे अधिक 47 शव रायगढ़ की महाड तहसील के सबसे अधिक प्रभावित तालिये गांव से बरामद किए गए हैं.

एनडीआरएफ ने महाराष्ट्र के प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए 34 दलों को तैनात किया है। आंकड़ों के अनुसार, एनडीआरएफ दल रायगढ़ के तालिये, रत्नागिरी के पोरसे और पेढ़े तथा सतारा के मीरगांव, अंबेघर और ढोकवाले में भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही है.

महाराष्ट्र में बाढ़, भूस्खलन तथा बारिश से सम्बंधित अन्य घटनाओं में मरने वालों की संख्या रविवार को 113 पर पहुंच गई. राज्य सरकार ने बताया कि पिछले एक दिन में एक और व्यक्ति की मौत हो गई और 100 लोग लापता हैं. इन घटनाओं में अब तक 50 लोग घायल हो चुके हैं.

कोरोना अभी गया नहीं है, सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते रहना है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Covid-19 की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक बार फिर देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि कोरोना अभी गया नहीं है, लिहाजा उन्हें इससे जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते रहना चाहिए.

आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ताजा कड़ी में देशवासियों को आने वाले पर्व व त्योहारों की शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘पर्व और उत्सवों के समय यह जरूर याद रखिएगा कि कोरोना अभी हमारे बीच से गया नहीं है. कोरोना से जुड़े प्रोटोकॉल आपको भूलने नहीं हैं. आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें.’’

उल्लेखनीय है कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आ रही है, लेकिन विशेषज्ञों ने महामारी की तीसरी लहर की आशंका जताई है.

देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के 39,742 नए मामले सामने आए. इसके साथ ही देश में कोविड-19 के कुल मामले बढ़कर 3,13,71,901 हो गए हैं. देश में अब तक इस महामारी से 4,20,551 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रविवार सुबह आठ बजे अद्यतन किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 4,08,212 रह गई है और कोविड-19 से स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर 97.36 प्रतिशत है. पिछले 24 घंटों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 765 घटी है.

देश में कोविड-19 रोधी टीके की अब तक 43.31 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं.

महाराष्ट्र में बारिश बनी मुसीबत, अलग-अलग हादसों में अब तक 47 की मौत, पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान

महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते हुई अलग-अलग घटनाओं में अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है. मुंबई के नज़दीक ही रायगढ़ जिले के अंतर्गत महाड तहसील के तलाई गांव में भूस्खलन होने से 36 लोगों की मौत हो गई है. 

आशंका जताई जा रही है कि इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है.स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबे के नीचे और लोग भी दबे हो सकते हैं.’

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सभी मृतकों के परिजनों के लिए क्रमशः दो लाख और पांच लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है.

प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘महाराष्ट्र के रायगढ़ में भूस्खलन में हुए जान के नुकसान से दुखी हूं. पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं. घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं. भारी बारिश से महाराष्ट्र में पैदा हुई स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और प्रभावितों को हरसंभव मदद पहुंचाई जा रही है.’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी हादसे पर दुःख जताते हुए कहा कि बारिश से प्रभावित कोंकण के पहाड़ी एवं भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान के मुताबिक उन्होंने बचाव प्रक्रिया में लोगों से स्थानीय प्रशासन का सहयोग करने की अपील की.

मुख्यमंत्री ने मंत्रालय (राज्य सचिवालय) में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नियंत्रण कक्ष का दौरा किया और कोंकण तथा पश्चिम महाराष्ट्र में भारी बारिश एवं बाढ़ से उपजी स्थिति का जायजा लिया.

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण रायगढ़, रत्नागिरी, पालघर, ठाणे, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, सांगली और सतारा जैसे जिले बाढ़ की स्थित का सामना कर रहे हैं.

DRDO ने जमीन से हवा में मार करने वाली नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल का किया सफल परीक्षण

भारत ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित परीक्षण केंद्र से शुक्रवार को जमीन से हवा में मार करने वाली नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल (आकाश-एनजी) का सफल परीक्षण किया. डीआरडीओ ने यह परीक्षण तीव्र गति वाले एक मानवरहित हवाई लक्ष्य को निशाना बनाकर किया. इसे मिसाइल ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया.

डीआरडीओ के सूत्रों ने बताया कि मिसाइल का परीक्षण आईटीआर के लॉन्‍च पैड-3 से किया गया. इसके लिए बहुकार्य रडार, कमान, नियंत्रण, संचार प्रणाली और प्रक्षेपक सहित समूची प्रणाली तैनात की गई. संगठन के प्रवक्ता ने कहा, ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी यंत्र से लैस मिसाइल ने तीव्र गति वाले हवाई लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया.’

सूत्रों ने कहा कि दो दिन पहले 21 जुलाई को भी चांदीपुर स्थित आईटीआर के इसी लॉन्‍च पैड से जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया गया था, लेकिन इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी यंत्र का इस्तेमाल नहीं किया गया था. इस दौरान मिशन के सभी मानक प्राप्त कर लिए गए थे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, वायुसेना और संबंधित उद्यम को तीन दिन के भीतर आकाश-एनजी के दूसरे सफल परीक्षण पर बधाई दी.

‘विवादित बॉर्डर स्कीम’ हटाने, ग्रेड पे एवं साप्ताहिक अवकाश के लिए यूपी पुलिस के सिपाहियों ने ट्विटर पर छेड़ी मुहिम

उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान आज बॉर्डर स्कीम, साप्ताहिक अवकाश, ड्यूटी के घंटे तय करने और ग्रेड पे बढ़ाकर 2800 करने के साथ ही अन्य माँगों को लेकर ट्विटर पर सक्रिय नजर आए. दरअसल पुलिस के ये जवान लम्बें समय से विवादित ‘बॉर्डर स्कीम’ हटाने की मांग कर रहे है. इन जवानों का कहना है कि इससे वे मुस्तैदी से ड्यूटी करने के साथ ही अपने परिवार के साथ भी समय बिता सकेंगे.

ग़ौरतलब है कि साल 2010 में तत्कालीन मायावती सरकार ने इसे लागू किया था. जिसके तहत किसी कॉन्स्टेबल, हेड कॉन्स्टेबल, दरोगा या इंस्पेक्टर को अपने गृह जनपद और उसकी सीमा से पड़ोसी जिले में तैनाती नहीं मिल सकती है.

वहीं नाम न छापने की शर्त पर लखनऊ में तैनात एक यूपी पुलिस के जवान ने बताया कि हमारी ड्यूटी का कोई तय समय नहीं है. साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिल पाता है. वेतन भी उतना ही है जिससे पारिवारिक ज़रूरतें मुश्किल से ही पूरी हो पाती हैं. ऐसे में हमारा निवेदन है कि राज्य सरकार पुलिस के जवानों की इन बुनियादी ज़रूरतों पर भी ध्यान दे.

यूपी पुलिस के इन जवानों का कहना है कि बॉर्डर स्कीम को लेकर तर्क दिया जाता है कि घर के नजदीक पोस्टिंग मिलने से हम कानून-व्यवस्था प्रभावित कर सकते हैं. जबकि ऐसा नहीं है राजस्थान इसका बेहतरीन उदाहरण है जहां जवानों को गृह जनपद में भी तैनाती मिलती है, लेकिन वहां कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने सम्बंधी कोई समस्या सामने नहीं आई. तो हमारे साथ ही ऐसा क्यों? जबकि आईपीएस अधिकारियों को यह बात लागू नहीं होती, उन्हें गृह और पड़ोसी जिलों में भी तैनाती की छूट है.

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी यूपी पुलिस के जवानों की इन माँगों का समर्थन किया है. उन्होंने एक वीडियो ट्वीट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के लिए बॉर्डर स्कीम एक अभिशाप की तरह है. जहाँ आईपीएस अफ़सर, पीपीएस अफसर अपने निवास स्थान पर रह सकते हैं/जन्म स्थान पर रह सकते हैं, वहीं बॉर्डर स्कीम के कारण सिपाही और दरोगा काफी दूर तैनात होते हैं. इससे उनकी परेशानियाँ बढ़ी रहती है. अनावश्यक रूप से स्कीम लागू करके उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों को इससे प्रताड़ित होने के अलावा कोई लाभ नहीं हो रहा है. साथ ही उन्होंने बॉर्डर स्कीम समाप्त करने की मांग की है.

आपको बता दें कि विवादित बॉर्डर स्कीम को साल 2010 में मायावती सरकार के कार्यकाल के दौरान लागू किया गया था……हालंकि मार्च 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे हटा दिया था, लेकिन 2014 में बॉर्डर स्कीम एक बार फिर से लागू कर दी गई. इसके बाद से ही पुलिसकर्मी इस स्कीम को हटाने की मांग करते आ रहे हैं.

हार्ट संबंधी टेस्ट से मिल सकता है Covid-19 रोगियों में मौत के जोखिम का संकेत – रिसर्च

अस्पताल में भर्ती कोविड संक्रमित मरीजों के दिल से जुड़ी समस्याओं को लेकर टेस्ट के जरिये इसका पता चल सकता है कि उनकी मौत को लेकर खतरा कितना गंभीर है. हालांकि सार्स-सीओवी-2, कोविड-19 का कारण बनने वाला वायरस, मुख्य रूप से श्वसा नली को प्रभावित करता है, यह गंभीर अतालता, तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम, मायोकार्डिटिस और फुफ्फुसीय अन्त: शल्यता सहित हृदय संबंधी जटिलताओं को भी जन्म देता है.

इटली में सालेर्नो विश्वविद्यालय के शोधकतार्ओं की एक टीम ने 1,401 रोगियों की जांच की, जिनमें कोविड की पुष्टि के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लगभग 226 (16.1 प्रतिशत) ने प्रवेश के 48 घंटों के भीतर ट्रान्सथोरासिक इकोकार्डियोग्राफी करवाई. इनमें 68 रोगियों (30.1 प्रतिशत) में अस्पताल में मौत हुई.

कम बाएं वेंट्रिकुलर इजेक्शन अंश (एलवीईएफ), कम ट्राइकसपिड कुंडलाकार विमान सिस्टोलिक भ्रमण, और तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम स्वतंत्र रूप से अस्पताल में मृत्यु दर से जुड़े थे.

सालेर्नो विश्वविद्यालय के प्रमुख लेखक एंजेलो सिल्वरियो ने कहा, “रोग की गंभीरता के क्लिीनिकल और इकोकार्डियोग्राफिक पैरामीटर यह निर्धारित करने में मदद कर सकते हैं कि कोविड रोगियों में अस्पताल में मृत्यु दर के लिए उच्च जोखिम है.”

यह शोध यूरोपियन जर्नल ऑफ क्लिीनिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित हुआ था.

अध्ययन से पता चलता है कि प्रारंभिक एलवीईएफ घातक परिणाम की उच्च संभावना वाले रोगियों की पहचान करने के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है क्योंकि हृदय संबंधी जटिलताएं कोविड के रोगियों के परिणामों पर निगेटिव प्रभाव डाल सकती हैं.

शोध के एक बढ़ते शरीर से पता चलता है कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग वाले कुछ लोग एक बार कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बाद अधिक गंभीर लक्षण और जटिलताएं विकसित कर सकते हैं.

मैक्सिको: पेगासस ‘स्पाइवेयर’ खरीदने के लिए पूर्व प्रशासन ने सरकारी कोष से खर्च किए 30 करोड़ डॉलर

मैक्सिको की वित्तीय खुफिया इकाई के प्रमुख सैंटियागो नीतो ने बताया कि 2012 से 2018 के बीच पूर्व प्रशासन के अधिकारियों ने इज़राइल के एनएसओ से ‘स्पाइवेयर’ खरीदने के लिए सरकारी कोष से 30 करोड़ डॉलर खर्च किए थे.

ऐसा प्रतीत होता है कि पेगासस स्पाइवेयर जैसे कार्यक्रमों के ‘बिल’ में अतिरिक्त भुगतान शामिल हैं, जिन्हें शायद रिश्वत के रूप में पूर्व सरकारी अधिकारियों को वापस भेज दिया गया होगा. मैक्सिको की वित्तीय खुफिया इकाई के प्रमुख सैंटियागो नीतो ने बुधवार को कहा कि यह जानकारी मेक्सिको में अभियोजकों को दी जा रही है.

भुगतान की गई राशि और जिस तरह से उन्हें भुगतान किया गया था, वह सरकारी भ्रष्टाचार के संकेत देती है. जिसमें पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और विपक्षी हस्तियों को लक्षित किया गया था और इसमें देश राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर और उनके करीबी भी शामिल है.

नीतो ने कहा कि लोपेज ओब्राडोर ने एक दिसम्बर 2018 को राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभाला और ‘स्पाइवेयर’ का इस्तेमाल ना करने का संकल्प किया. तभी से मौजूदा प्रशासन द्वारा ऐसी किसी गतिविधि को अंजाम देने के सबूत भी नहीं मिले हैं.

इस बीच, मोरक्को सरकार ने उन खबरों का खंडन किया है कि जिनमें कहा गया है कि देश के सुरक्षा बलों ने संभवत: फ्रांस के राष्ट्रपति और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के सेलफोन पर नजर रखने के लिए इजराइल के एनएसओ समूह द्वारा बनाए गए स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया होगा.

मोरक्को सरकार ने मंगलवार देर रात एक बयान में कई देशों में पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनेताओं को लक्षित करने के लिए एनएसओ के पेगासस स्पाइवेयर के संदिग्ध व्यापक उपयोग की जांच कर रहे एक वैश्विक मीडिया समूह पर निशाना साधा. सरकार ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

समूह के एक सदस्य, फ्रांसीसी अखबार ‘ले मोंडे’ ने बताया कि राष्ट्रपति फ्रांस के एमैनुएल मैक्रों और फ्रांसीसी सरकार के 15 तत्कालीन सदस्यों के सेलफोन 2019 में मोरक्को की सुरक्षा एजेंसी की ओर से पेगासस स्पाइवेयर द्वारा निगरानी के संभावित लक्ष्यों में से शामिल हो सकते हैं. फ्रांसीसी सार्वजनिक प्रसारक ‘रेडियो फ्रांस’ ने बताया कि मोरक्को के राजा मोहम्मद षष्ट्म और उनके दल के सदस्यों के फोन भी संभावित लक्ष्यों में शामिल थे.

बयान में कहा गया, ‘‘मोरक्को साम्राज्य लगातार झूठे, बड़े पैमाने पर और दुर्भावनापूर्ण मीडिया अभियान की कड़ी निंदा करता है.’’ सरकार ने कहा कि वह ‘‘इन झूठे और निराधार आरोपों को खारिज करती है.’’