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तो भागवत मुसलमानों को ‘प्रताड़ित’ करने वालों को पद से हटाने का निर्देश दें : दिग्विजय

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत की टिप्पणी को लेकर सोमवार को कहा कि अगर संघ प्रमुख अपने विचारों के प्रति ईमानदार हैं तो उन्हें पहले उन लोगों को पद से हटाने का निर्देश देना चाहिए जिन्होंने मुसलमानों को ‘प्रताड़ित किया है.’ सिंह ने यह दावा भी किया कि भागवत ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि उनकी कथनी-करनी में अंतर है.

गौरतलब है कि भागवत ने रविवार को कहा कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है और मुसलमानों को ‘‘डर के इस चक्र में’’ नहीं फंसना चाहिए कि भारत में इस्लाम खतरे में है. उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मुसलमानों से देश छोड़ने को कहते हैं, वे खुद को हिन्दू नहीं कह सकते.

वह राष्ट्रीय मुस्लिम मंच द्वारा यहां ‘हिन्दुस्तानी प्रथम, हिन्दुस्तान प्रथम’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि लोगों में इस आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता कि उनका पूजा करने का तरीका क्या है.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भागवत के बयान का हवाला देते हुए ट्वीट किया, ‘‘यदि आप अपने व्यक्त किए गए विचारों के प्रति ईमानदार हैं तो भाजपा में उन सभी नेताओं को उनके पदों से तत्काल हटाने का आदेश दें जिन्होंने निर्दोष मुसलमानों को प्रताड़ित किया है. शुरूआत नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ से करें’’

उन्होंने कहा, ‘‘संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले कि हिंदू और मुस्लिम अलग नहीं…, सभी भारतीयों का डीएनए एक है. मोहन भागवत जी, यह विचार क्या आप अपने शिष्यों, प्रचारकों, विश्व हिंदू परिषद/ बजरंग दल कार्यकर्ताओं को भी देंगे? क्या यह शिक्षा आप मोदी -शाह जी व भाजपा मुख्यमंत्री को भी देंगे?’’

सिंह ने दावा किया, ‘‘मुझे मालूम है आप ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि आपकी कथनी और करनी में अंतर है.’’

कांग्रेस नेता कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘आपने सही कहा है कि हम पहले भारतीय हैं लेकिन हुज़ूर, अपने शिष्यों को तो पहले समझाएं। वे मुझे कई बार पाकिस्तान जाने की सलाह दे चुके हैं!! …. देखते हैं.’’

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘‘ आरएसएस के भागवत ने कहा “लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी”. इन अपराधियों को गाय और भैंस में फ़र्क़ नहीं पता होगा लेकिन क़त्ल करने के लिए जुनैद, अखलाक़, पहलू, रकबर, अलीमुद्दीन के नाम ही काफी थे. यह नफ़रत हिंदुत्व की देन है, इन मुजरिमों को हिंदुत्ववादी सरकार का संरक्षण हासिल है.’’

उन्होंने भीड़ द्वारा पीट पीट कर कथित तौर पर जान लेने की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए सवाल किया, ‘‘केंद्रीय मंत्री के हाथों अलीमुद्दीन के कातिलों का माल्यार्पण होता है, अखलाक़ के हत्यारे की लाश पर तिरंगा लगाया जाता है, आसिफ़ को मारने वालों के समर्थन में महापंचायत बुलाई जाती है, जहां भाजपा का प्रवक्ता पूछता है कि “क्या हम हत्या भी नहीं कर सकते?’’

ओवैसी ने दावा किया, ‘‘कायरता, हिंसा और क़त्ल करना गोडसे की हिंदुत्व वाली सोच का अटूट हिस्सा है. मुसलमानो की लिंचिंग भी इसी सोच का नतीजा है.’’

BJP अपनी कमजोरियों पर पर्दा डालने के लिए धर्मांतरण को राजनीतक रंग देना चाहती है: मायावती

बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को भाजपा पर आरोप लगाया कि वह देश के कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी कमजोरियों पर पर्दा डालने के लिए धर्मांतरण के मुद्दे को राजनीतिक रंग देना चाहती है.

मायावती ने एक बयान में कहा, “डरा-धमका कर या लालच देकर किसी का धर्म परिवर्तन कराना पूरी तरह अवैध है और ऐसे मामलों की सही जांच करा कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन एक सोची समझी रणनीति और साजिश के तहत इसकी आड़ में इसे जबरन हिंदू (बनाम) मुस्लिम मुद्दा बनाना तथा पूरे मुस्लिम समुदाय को शक की नजरों से देखना कतई उचित नहीं है. बसपा इसका डट कर विरोध करेगी.” उन्होंने कहा कि ऐसा दावा किया जा रहा है कि धर्मांतरण की आड़ में देश को नुकसान पहुंचाने की साजिश काफी पहले से चल रही थी और अगर यह सच है तो देश की खुफिया एजेंसियां अब तक क्या कर रही थी.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर अब जो कार्रवाई हो रही है, वह बहुत पहले हो जानी चाहिए थी.

बसपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया, “इसके पीछे हमें भाजपा का राजनीतिक स्वार्थ ज्यादा नजर आ रहा है और ऐसा लगता है कि अब वे देश के कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी कमजोरियों पर पर्दा डालने के लिए इसे राजनीतिक रंग देना चाहते हैं. अगर यह वाकई में कोई साजिश है तो अत्यंत निंदनीय है.” इसके अलावा मायावती ने यह भी कहा कि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने माफिया तत्व बता कर अब तक जिन लोगों की संपत्ति जब्त या ध्वस्त की है, उनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग प्रभावित हुए हैं और इससे समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है.

हालांकि, उन्होंने किसी के नाम का जिक्र किये बगैर यह कहा. गौरतलब है कि योगी सरकार ने मऊ से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी और उनके सहयोगियों के खिलाफ हाल में इस तरह की कार्रवाई की है.

ऑक्सीजन ऑडिट रिपोर्ट पर भाजपा ने केजरीवाल को घेरा, सिसोदिया ने आरोपों को किया खारिज

भाजपा ने आरोप लगाया कि कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की जरूरत से चार गुना अधिक मांग की थी और उनके इस ‘‘झूठ’’ के कारण कम से कम 12 राज्यों में जीवन रक्षक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हुई.

उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली में ऑक्सीजन का लेखाजोखा करने के लिए गठित की गई एक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ‘‘चार गुना झूठ’’ बोलकर ना सिर्फ ‘‘जघन्य अपराध’’ किया बल्कि ‘‘आपराधिक लापरवाही’’ की है.

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भाजपा के आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसी कोई रिपोर्ट है ही नहीं. उन्होंने यह पलटवार भी किया कि कथित रिपोर्ट भाजपा मुख्यालय में तैयार की गई है.

पात्रा ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी लहर के दौरान जब संक्रमण के मामले चरम पर थे तब दिल्ली सरकार ने 1,140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की थी जबकि वह 209 मीट्रिक टन का भी इस्तेमाल नहीं कर पायी थी.

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के फार्मूले के मुताबिक भी देखा जाए तो उसे 351 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी जबकि केंद्र सरकार के आकलन के मुताबिक जरूरत 209 मीट्रिक टन की थी और केजरीवाल सरकार ने 1,140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता जताई थी.

उन्होंने कहा, ‘‘कल्पना कीजिए , किस प्रकार का अपराध हुआ है. यह अरविंद केजरीवाल का जघन्य अपराध है. यह आपराधिक लापरवाही है जैसा कि समिति ने कहा है कि उन्होंने चार गुना अधिक ऑक्सीजन की मांग की थी. इस रिपोर्ट ने कोविड-19 के प्रबंधन में विफल होने पर दोष दूसरे पर मढ़ने की राजनीति का पर्दाफाश कर दिया है.’’

उन्होंने कहा ‘‘ इस झूठ के कारण, 12 राज्यों को ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हुई क्योंकि सभी जगह से ऑक्सीजन की मात्रा कम कर दिल्ली भेजना पड़ा था.’’

पात्रा ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के कुप्रबंधन की वजह से राजधानी दिल्ली में उस वक्त ऑक्सीजन के टैंकर सड़क पर खड़े रहे जब लोगों को इसकी सबसे अधिक जरूरत थी. उन्होंने कहा, ‘‘अगर ये ऑक्सीजन दूसरे राज्यों में उपयोग होती तो कई लोगों की जान बच सकती थी. यह अरविंद केजरीवाल द्वारा किया गया जघन्य अपराध है.’’

भाजपा प्रवक्ता ने उम्मीद जताई कि इसके लिए उच्चतम न्यायालय में मुख्यमंत्री जिम्मेदार ठहराए जाएंगे और जो अपराध उन्होंने किया है, उसके लिए उन्हें दंडित किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘‘हिंदुस्तान की राजनीति में पहली बार चार गुना झूठे साबित हो रहे हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री. यह छोटी बात नहीं है. अरविंद केजरीवाल को जनता को जवाब देना होगा.’’

पात्रा ने कहा कि तीन मई को एक ही दिन मुंबई और दिल्ली में लगभग एक समान संक्रमण के मामले थे लेकिन मुंबई ने 275 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता जताई वहीं दिल्ली ने 900 मीट्रिक टन की मांग की थी.

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार 100 फीसदी विज्ञापन और जीरो प्रतिशत कोविड प्रबंधन के फार्मूले पर काम कर रही है.

पात्रा ने दावा किया कि अपनी नाकामी को छिपाने और केंद्र सरकार को दोषी ठहराने के लिए केजरीवाल ने ऑक्सीजन को लेकर झूठ बोला.

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार केजरीवाल कोविड-19 रोधी टीकों और घर-घर राशन पहुंचाने की योजना पर राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि राजधानी में टीकों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘जो व्यक्ति ऑक्सीजन के लिए इतना बड़ा झूठ बोल सकता है वह राशन के लिए कितना झूठ बोल सकता है?’’

राजधानी के जयपुर गोल्डेन अस्पताल और बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई लोगों की मौत के लिए भी पात्रा ने केजरीवाल सरकार को दोषी ठहराया.

पात्रा के आरोपों का जवाब देते हुए , दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भाजपा पर ऐसी रिपोर्ट को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है. हमने उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित ‘ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी’ के सदस्यों से बात की है. उन्होंने कहा कि ऐसी किसी रिपोर्ट पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं. भाजपा झूठी रिपोर्ट पेश कर रही है, जो उसकी पार्टी मुख्यालय में तैयार की गई है. मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि ऐसी रिपोर्ट पेश करें, जिस पर ‘ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी’ के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हों.’’

उन्होंने कहा कि ऐसा करके भाजपा केवल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का ही अपमान नहीं कर रही, बल्कि ‘‘उन लोगों का भी अपमान कर रही है जिन्होंने कोरोना वायरस के कहर के दौरान अपने परिवार वालों को खो दिया.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार के कुप्रबंधन के कारण ही ‘‘ऑक्सीजन का संकट उत्पन्न हुआ था.’’

दिल्ली में अप्रैल तथा मई में कोविड-19 की दूसरी लहर का बहुत बुरा असर हुआ था. इस दौरान शहर के विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण रोजाना कई लोगों की मौत हुई थी.

पहले जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और फिर चुनाव हो: पी. चिदंबरम

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि यह अजीबो-गरीब बात है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में पहले चुनाव कराना चाहती है और फिर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना चाहती है.

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और जम्मू-कश्मीर की दूसरी पार्टियां चाहती हैं कि पहले पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाए और फिर चुनाव कराया जाए.

पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम ने ट्वीट किया, ‘‘कांग्रेस और जम्मू-कश्मीर की दूसरी पार्टियां एवं नेता पहले पूर्ण राज्य का दर्जा चाहते हैं और फिर चुनाव चाहते हैं. सरकार का जवाब है कि पहले चुनाव और फिर पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा.’’

चिदंबरम ने कहा, ‘‘घोड़ा गाड़ी को खींचता है। पूर्ण राज्य में चुनाव कराना चाहिए। इस स्थिति में ही चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र होंगे। सरकार क्यों चाहती है कि गाड़ी आगे हो जाए और घोड़ा पीछे। यह अजीबो-गरीब बात है।’’

पिछले लगभग दो साल में पहली बार जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेतृत्व के साथ वार्ता का हाथ बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस केंद्र-शासित प्रदेश के भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए बृहस्पतिवार को वहां के 14 नेताओं के साथ एक अहम बैठक की.

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान निरस्त किए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद यह पहली ऐसी बैठक थी जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री मोदी ने की.

देश में Covid-19 Vaccination पर बोले राहुल गांधी बोले- ‘पीआर इवेंट’ से आगे नहीं बढ़ पा रही सरकार

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कोरोनावायरस कोविड-19 टीकाकरण को लेकर ‘पीआर इवेंट’ (प्रचार कार्यक्रम) से आगे नहीं बढ़ पा रही है. उन्होंने ट्वीट किया, कोरोना टीकाकरण जब तक निरंतर बड़े स्तर पर नहीं होता, तब तक हमारा देश सुरक्षित नहीं है। अफ़सोस, केंद्र सरकार पीआर इवेंट से आगे नहीं बढ़ पा रही.

केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया था कि 21 जून को 80 लाख से अधिक लोगों को टीके लगाए गए. कांग्रेस का दावा है कि कई भाजपा शासित राज्यों में 20 जून को बहुत सीमित संख्या में टीके लगाए गए और फिर 21 जून को लाखों की संख्या में टीके लगाए गए, ताकि टीकाकरण को रिकॉर्ड के तौर पर पेश किया जा सके.

उधर, राहुल गांधी ने एक अन्य ट्वीट में बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर चिंता प्रकट की और पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे जरूरतमंद लोगों की हरसंभव मदद करें. कांग्रेस नेता ने कहा, बिहार के बाढ़ पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं।

राहुल गांधी ने कहा, महामारी के समय में यह आपदा एक बड़ी त्रासदी है. मैं कांग्रेस के साथियों से अपील करता हूं कि राहत कार्य में हाथ बंटाएं। हमारा हर क़दम जन सहायता के लिए उठे- यही कांग्रेस विचारधारा की असली पहचान है.

महाराष्ट्र : जिला परिषद के शिक्षक गरीब बच्चों के लिए चला रहे हैं मुफ्त ऑनलाइन कक्षाएं

Covid-19 वैश्विक महामारी के कारण स्कूलों के बंद होने से जब सुविधाओं से वंचित बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो गया है, ऐसे में महाराष्ट्र के लातूर के जिला परिषद स्कूल के एक शिक्षक ने उन्हें मुफ्त में ऑनलाइन पढ़ाने की एक पहल शुरू कर एक नई उम्मीद जगाई.

साइनाथ माने पिछले सात महीने से निलंगा तहसील के बुजुर्गवाड़ी गांव में अन्य शिक्षकों के साथ मिलकर ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं. महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के पांचवी से नौंवी कक्षा तक के करीब 150 छात्र नियमित कक्षाओं में शामिल हो रहे हैं.

माने ने कहा, ‘‘ स्कूल बंद होने के बाद कई गरीब छात्र अपनी शिक्षा को लेकर चिंतित हो गए थे. मैंने शुरू में केवल अपने स्कूल के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की थीं. इन बच्चों ने दूसरे बच्चों को भी इस पहल के बारे में बताया. अब नांदेड़, बीड, नासिक, सिंधुदुर्ग, पुणे और मुंबई के विभिन्न जिलों के छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल हो रहे हैं.’’

उन्होंने बताया कि हर दिन करीब साढ़े तीन घंटे कक्षाएं ली जाती हैं. आधे घंटे उन्हें केवल अंग्रेजी सिखाई जाती है. ‘‘काफी कम समय में बच्चे अच्छी अंग्रेजी बोलने लगे हैं.’’ माने ने कहा, ‘‘ मेरे छात्रों के अभिभावक खुश हैं. वे हमें कहते हैं कि भले ही फीस लें, पर कक्षाएं जारी रखें. हम उनसे किसी चीज की उम्मीद नहीं करते क्योंकि हमारा लक्ष्य केवल छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है.’’

टीकाकरण ने पकड़ी रफ्तार, देश में अब तक 29 करोड़ से अधिक लोगों को लगाए गए टीके

भारत में कोविड-19 का कुल टीकाकरण कवरेज 29 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी. शाम सात बजे की अनंतिम रिपोर्ट के अनुसार, आज टीके की 53.4 लाख से अधिक खुराक दी गईं

मंत्रालय के अनुसार, 18-44 वर्ष की आयु वर्ग में मंगलवार को टीके की 32,81,562 से अधिक खुराक पहली खुराक के रूप में और 71,655 दूसरी खुराक के रूप में दी गई.

टीकाकरण अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत के बाद से कुल मिलाकर, 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस आयु वर्ग के 6,55,38,687 से अधिक लोगों ने अपनी पहली खुराक प्राप्त की है और 14,24,612 से अधिक लोगों ने अपनी दूसरी खुराक प्राप्त की है.

ओमान में Covid-19 के मामले बढ़ने पर फिर लॉकडाउन लगाया गया

कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों पर काबू पाने की कोशिश कर रहे ओमान ने फिर से सख्त रात्रिकालीन लॉकडाउन लगा दिया है.

टीकाकरण अभियान के बीच ज्यादातर पाबंदियां हटाने के महज कुछ ही हफ्तों बाद देश ने शनिवार को आवाजाही पर व्यापक प्रतिबंध और सभी सार्वजनिक स्थानों तथा गैर आवश्यक उद्योगों को रात आठ बजे से सुबह चार बजे तक बंद करने की घोषणा की.

इस अरब देश में कोरोना वायरस संक्रमण के दैनिक मामले पिछले महीने की तुलना में तीन गुना अधिक हैं. प्रमुख अस्पतालों में बिस्तरों और कर्मचारियों की कमी हो गयी है और डॉक्टरों को बड़ी संख्या में पहुंच रहे मरीजों का इलाज करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

अधिकारियों ने इस हफ्ते Covid-19 मरीजों में ‘‘ब्लैक फंगस’’ के कई मामलों का पता लगाया. यह एक जानलेवा संक्रमण है जो भारत में महामारी के कई मरीजों में भी तेजी से फैला है. ओमान में कोरोना वायरस संक्रमण के 2,42,700 से अधिक मामले सामने आए हैं और 2,600 लोगों की मौत हुई.

ब्रिटेन में मिले 11 करोड़ साल पहले के अंतिम डायनासोरों के पदचिह्न

ब्रिटेन में केंट की धरती पर 11 करोड़ साल पहले के आखिरी डायनासोरों की कम से कम छह विभिन्न प्रजातियों के पैरों के निशान मिले हैं. अनुसंधानकर्ताओं ने एक नयी रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है.

हेस्टिंग म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी के एक क्यूरेटर और यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के एक वैज्ञानिक ने ऐसे पदचिह्नों की खोज की है जो ब्रिटेन में आखिरी डायनासोरों के हैं. ये पदचिह्न केंट के फोकस्टोन में तटीय क्षेत्र और चट्टानों पर मिले हैं. यहां तूफानी परिस्थितियों के कारण चट्टानों और तटीय जलीय क्षेत्र के प्रभावित होने से लगातार नए जीवाश्मों का पता चलता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ में पुराजैविकी के प्रोफेसर डेविड मार्टिल ने कहा, ‘‘यह पहली बार है जब ‘फोकस्टोन फॉर्मेशन’ नामक चट्टानी सतह पर पैरों के ये निशान मिले हैं और यह बेहद महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि ये डायनासोर विलुप्त होने से पहले देश में आखिरी रहे होंगे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे उस जगह के करीब घूम रहे थे जहां अब डोवर की सफेद चट्टान हैं. अगली बार जब आप नौकायन पर निकलें और इन शानदार चट्टानों को देखें तो बस आस-पास उनकी मौजूदगी की कल्पना करें.’’

संबंधित रिपोर्ट ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द जियोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन’ पत्रिका के इस सप्ताह के अंक में प्रकाशित हुई है. डायनासोरों के पैरों के कुछ निशान फोकस्टोन संग्रहालय में भी प्रदर्शित किए गए हैं. हेस्टिंग्स म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी से जुड़े क्यूरेटर फिलिप हाडलैंड इसके मुख्य लेखक हैं.

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा: अनलॉक प्रक्रिया सावधानीपूर्वक व्यवस्थित हो

केंद्र सरकार ने राज्यों से अपील की है कि वह Covid-19 महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन खोलते समय कोविड अनुकूल व्यवहार, जांच-निगरानी-इलाज, टीकाकरण जैसी ‘अति महत्वपूर्ण’ पांच रणनीतियां अपनाए.

सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे संदेश में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि संक्रमण के प्रसार की कड़ी को तोड़ने के लिए मौजूदा परिदृश्य में Covid-19 रोधी टीकाकरण बेहद अहम है.

उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य और केंद्र शासित प्रदेश टीकाकरण की गति तेज करें. गृह सचिव ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और कइयों ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए.

उन्होंने कहा, ‘‘ संक्रमण के मामलों में कमी को देखते हुए कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने प्रतिबंधों में राहत देना शुरू किया है, ऐसे में मैं यह रेखांकित करना चाहूंगा कि लॉकडाउन खोलने की प्रक्रिया सावधानीपूर्वक व्यवस्थित और जमीनी स्थिति के आकलन के आधार पर हो.’’

गृह सचिव ने कहा कि संक्रमण से निपटने के लिए अनुकूल व्यवहार की नियमित निगरानी की जरूरत है ताकि खामियों से बचा जा सके. उन्होंने कहा कि इस व्यवहार में मास्क का इस्तेमाल, हाथ धोना, सामाजिक दूरी और बंद स्थलों का हवादार होना सुनिश्चित करना शामिल है.

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ राज्यों में प्रतिबंधों में राहत से बाजार में भीड़ जमा हो गई और Covid-19 से बचाव संबंधी नियमों का पालन नहीं किया गया.’’

उन्होंने कहा कि संक्रमण के प्रसार पर सतत आधार पर नियंत्रित करने के लिए यह आवश्यक है कि जांच-निगरानी-इलाज जैसी रणनीति का सहारा लिया जाए और खास तौर पर यह सुनिश्चित हो कि जांच दर में कमी न होने पाए.

भल्ला ने कहा कि चूंकि महामारी की स्थिति में बदलाव होता रहता है, ऐसे में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में वृद्धि या फिर संक्रमण दर में वृद्धि की शुरुआती संकेत पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि लघु स्तर पर एक ऐसा तंत्र बनाने की जरूरत है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जब कभी भी भी छोटे स्थलों पर मामले बढ़ने शुरू हो, उससे वहीं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दिशानिर्देशों के अनुसार स्थानीय नियंत्रण कदमों के जरिए निपटा जाए.