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लंबे इंतजार के बाद परिजनों से मिले आईपीएल में हिस्सा लेने वाले आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में खेलने वाले आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सोमवार को जब अपने परिजनों से मिले तो उनके आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर सुकून साफ झलक रहे थे.

भारत में Covid—19 के मामलों और आईपीएल के बीच में स्थगित किये जाने के बाद आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और इस टूर्नामेंट से जुड़े अन्य सहकर्मी यात्रा प्रतिबंधों के कारण सीधे स्वदेश नहीं लौट पाये थे. उन्हें पहले कुछ दिन मालदीव में बिताने पड़े. आस्ट्रेलिया का 38 सदस्यीय दल दो सप्ताह पहले स्वदेश लौटा था.

तेज गेंदबाज पैट कमिन्स भी इन खिलाड़ियों में शामिल थे. वह होटल से बाहर निकले और अपनी गर्भवती हमसफर बेकी बोस्टन के गले लग गये. इसका वीडियो आस्ट्रेलिया की मशहूर खेल पत्रकार चोली अमांडा बेली ने अपने ट्विटर पर डाला है.

बेली ने वीडियो के साथ लिखा है, ‘दिन का खास वीडियो. आईपीएल के लिये आठ सप्ताह बाहर रहने के बाद पैट कमिन्स आखिर में होटल में पृथकवास से बाहर निकलकर अपनी गर्भवती साथी बेकी से मिले. भावनाओं का ज्वार हावी है. ‘ कमिन्स के अलावा स्टार बल्लेबाज स्टीव स्मिथ, आलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल और सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर भी उन खिलाड़ियों में शामिल थे जो आठ सप्ताह बाद अपने प्रियजनों से मिले.

आईपीएल को जैव सुरक्षित वातावरण में Covid—19 के मामले पाये जाने के बाद चार मई को स्थगित कर दिया था. यह लीग अब सितंबर में यूएई में होगी. क्रिकेट आस्ट्रेलिया के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी निक हॉकले ने कहा कि खिलाड़ियों की अपने घर जाने की भावना को कम करके नहीं आंका जा सकता है.

हॉकले ने कहा, ‘हम उन्हें संदेश भेज रहे थे. मैंने कुछ से समूहों में बात की. इसमें खिलाड़ी ही नहीं बल्कि कमेंटेटर, मैच अधिकारी और फिजियो भी शामिल थे. वे इस अनुभव से सकते में थे. यह अच्छा है कि वे अब घर लौट आये हैं. ‘ उनके चार्टर्ड विमान तथा मालदीव और सिडनी में प्रवास का खर्चा भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने उठाया और हॉकले ने इस मदद के लिये भारतीय बोर्ड का आभार व्यक्त किया.

हॉकले ने कहा, ‘मैं फिर दोहराता हूं कि बीसीसीआई ने सभी खिलाड़ियों और पूरे समूह को सुरक्षित घर पहुंचाने में अहम भूमिका निभायी और इसके लिये हम उनके आभारी हैं. ‘ चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलने वाले जैसन बेहरनडोर्फ भी पृथकवास से बाहर निकलने वाले खिलाड़ियों में शामिल थे.

उन्होंने कहा, ‘यह जानकर अच्छा लगा कि आखिरकार हम घर पहुंच रहे हैं. मैं घर पहुंचने और अपने परिजनों से मिलने के लिये और इंतजार नहीं कर सकता. ‘ मैक्सवेल को पृथकवास पूरा होने के बाद आस्ट्रेलिया के अपने साथी मार्कस स्टोइनिस के गले लगते हुए देखा गया.

आस्ट्रेलिया के अधिकतर खिलाड़ी अपने परिजनों के साथ लंबा समय नहीं बिता पाएंगे क्योंकि उन्हें जुलाई और अगस्त में वेस्टइंडीज और बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली श्रृंखलाओं के लिये टीम में चुना गया है.

उत्तर प्रदेश : पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान मृत कर्मियों के आश्रितों को सरकार देगी 30-30 लाख रुपये

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में जिन कर्मचारियों की मौत ड्यूटी के दौरान हुई है, उनके आश्रितों को सरकार 30-30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी. सोमवार को उत्तर प्रदेश की मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) ने इस फैसले को मंजूरी दे दी.

राज्‍य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक, पंचायत चुनाव के दौरान जिन कर्मचारियों की ड्यूटी करते हुए मौत हो गई उनके आश्रितों को सरकार की ओर से 30-30 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी.

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक ” ड्यूटी अवधि की जो परिभाषा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित की गई है, जिसके आधार पर राज्‍य निर्वाचन आयोग द्वारा गाइडलाइन तय की गई, उसमें Covid-19 की वजह से होने वाले संक्रमण व इसके फलस्‍वरूप होने वाली मृत्यु में जो समय लगता है उसका ध्यान नहीं रखा गया है. अत: अनुग्रह राशि की पात्रता के लिए निर्वाचन ड्यूटी की तिथि से 30 दिन के अंदर Covid-19 से होने वाली मृत्यु को पात्रता में लाया गया है.”

इस आधार पर निर्वाचन ड्यूटी की तारीख से 30 दिन के भीतर Covid-19 से होने वाली मौत को अनुग्रह राशि देने का मानक बनाया गया है. निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन में बदलाव कर ड्यूटी अवधि को 30 दिन माना जाएगा.

शासन ने चार मई के आदेश को राज्‍य निर्वाचन आयोग की संस्तुति के आधार पर Covid-19 से मृत्‍यु की दशा में अनुग्रह धनराशि को 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये किया है. इस प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.

गौरतलब है कि हाल ही में हुए पंचायत चुनाव के दौरान ड्यूटी करने वाले मृत कर्मचारियों का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है. कुछ दिनों पहले शिक्षक संगठन ने पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान 1,621 शिक्षकों की मौत होने का दावा किया था. तब सिर्फ तीन को ही मुआवजा देने की बात कही गई थी, लेकिन इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार ने गाइडलाइन में बदलाव किया है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से मुख्य सचिव को बुलाने का आदेश रद्द करने का अनुरोध किया

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को दिल्ली बुलाने के केंद्र के आदेश को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह आदेश वापस लेने का अनुरोध किया है. बनर्जी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार बंदोपाध्याय को कार्यमुक्त नहीं कर रही है.

बनर्जी ने प्रधानमंत्री को भेजे पांच पन्नों के पत्र में , मुख्य सचिव को तीन माह का सेवा विस्तार दिए जाने के बाद, उन्हें वापस बुलाने के केंद्र सरकार के फैसले पर पुन:विचार करने का अनुरोध किया है.

उन्होंने पत्र में कहा है ‘‘पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को दिल्ली बुलाने के एकतरफा आदेश से स्तब्ध और हैरान हूं. यह एकतरफा आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरने वाला, ऐतिहासिक रूप से अभूतपूर्व तथा पूरी तरह से असंवैधानिक है.’’

पांच पन्नों के पत्र में बनर्जी ने लिखा, ‘‘पश्चिम बंगाल सरकार इस गंभीर समय में मुख्य सचिव को कार्यमुक्त नहीं कर सकती, ना ही उन्हें कार्यमुक्त कर रही है.’’

मुख्यमंत्री ने पत्र में यह अनुरोध भी किया कहा कि केंद्र ने राज्य सरकार के साथ विचार विमर्श के बाद मुख्य सचिव का कार्यकाल एक जून से अगले तीन महीने के लिए बढ़ाने जो आदेश दिया था उसे ही प्रभावी माना जाए.

उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा, ‘‘मैं आपसे विनम्र अनुरोध करती हूं कि अपने फैसले को वापस लें और पुनर्विचार करें. व्यापक जनहित में तथाकथित आदेश को रद्द करें. मैं पश्चिम बंगाल की जनता की ओर से आप से अंतरात्मा से तथा अच्छी भावना से काम करने की अपील करती हूं.’’

उन्होंने कहा कि संघीय सहयोग, अखिल भारतीय सेवा तथा इसके लिए बनाए गए कानूनों के वैधानिक ढांचे का आधार स्तंभ है.

बनर्जी ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में लिखा, ‘‘मुख्य सचिव को 24 मई को सेवा विस्तार की अनुमति देने और चार दिन बाद के आपके एकपक्षीय आदेश के बीच आखिर क्या हुआ, यह बात समझ में नहीं आई.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा है कि नवीनतम आदेश (मुख्य सचिव का तबादला दिल्ली करने का) और कलईकुंडा में आपके साथ हुई मेरी मुलाकात का कोई लेना-देना नहीं है.’’

बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं सिर्फ आपसे बात करना चाहती थी, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच आमतौर पर जिस तरह से बैठक होती है उसी तरह से. लेकिन आपने अपने दल के एक स्थानीय विधायक को भी इस दौरान बुला लिया जबकि प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री की बैठक में उपस्थित रहने का उनका कोई मतलब नहीं है.’’

बनर्जी ने कहा कि केंद्र का आदेश राज्य के हितों के विरुद्ध है और इसकी वजह से मुख्य सचिव ने हाल ही में निजी तौर पर पीड़ा सही है लेकिन फिर भी वह अपनी ड्यूटी कर रहे हैं.

केंद्र ने एक आकस्मिक फैसले में 28 मई को बंदोपाध्याय की सेवाएं मांगी थीं और राज्य सरकार को प्रदेश के शीर्ष नौकरशाह को तत्काल कार्यमुक्त करने को कहा था.

1987 बैच के, पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी बंदोपाध्याय साठ साल की उम्र पूरी होने के बाद सोमवार को सेवानिवृत्त होने वाले थे. बहरहाल, उन्हें केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद तीन माह का सेवा विस्तार दिया गया.

Covid-19 के भारत में पाए गए स्वरूप का नया नाम होगा ‘डेल्टा’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के विभिन्न स्वरूपों की नामावली की नई व्यवस्था की घोषणा की है. इन स्वरूपों को अब तक उनके तकनीकी अक्षर-संख्या कोड के नाम से जाना जाता है या उन देशों के स्वरूप के रूप में जाना जाता है जहां वे सबसे पहले सामने आए थे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि एक निष्पक्ष एवं समझने योग्य संतुलन बनाने के लिए अब वायरस के सबसे ज्यादा ‘चिंताजनक’ स्वरूपों की पहचान यूनानी भाषा के अक्षरों के जरिए होगी.

इस तरह का एक स्वरूप जो सबसे पहले ब्रिटेन में नजर आया था और जिसे अब तक B.1.1.7 नाम से जाना जाता है उसे अब से ‘‘अल्फा’’ स्वरूप कहा जाएगा. वायरस का B.1.351 स्वरूप जिसे दक्षिण अफ्रीकी स्वरूप के नाम से भी जाना जाता है उसे ‘बीटा’ स्वरूप के नाम से जाना जाएगा.

ब्राजील में पाया गया तीसरा स्वरूप ‘गामा’ नाम से पहचाना जाएगा तथा भारत में सबसे पहले सामने आया वायरस का स्वरूप ‘डेल्टा’ कहलाएगा.

आगे आने वाले चिंताजनक स्वरूपों को इसी क्रम में नाम दिया जाएगा. डब्ल्यूएचओ ने कहा कि यह नई व्यवस्था विशेषज्ञों के समूहों की देन है. उसने कहा कि हालांकि वैज्ञानिक नामावली प्रणाली को खत्म नहीं किया जाएगा और नई व्यवस्था, स्वरूपों के ‘‘सरल, बोलने तथा याद रखने में आसान’’ नाम देने के लिए है.

डा. सुनिता दुबे और एक्टर गुरमीत चौधरी के प्रयास से मेडिस्केप इंडिया को जकार्ता से मिले आक्सीजन कांसेंट्रेटर

कोरोना की दूसरी लहर में भारत में सबसे ज्यादा कमी ऑक्सीजन की हुई और खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाके में ऑक्सीजन के कारण कई मरीजों की जान जाने की दुखद खबर सामने आई, सरकारी तंत्र के लगातार काम करने के बावजूद भी दूरदराज इलाकों में ऑक्सीजन की कमी लगातार बनी रही जिसके बाद मेडिस्कोप इंडिया को डा सुनिता दुबे के प्रयासों से जकार्ता के इंडिया क्लब जकार्ता की तरफ से 40 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की मदद मिली जिससे जिससे देश के ग्रामीण इलाकों में उन मरीजों तक ऑक्सीजन पहुंचाए जाने पर मदद मिलेगी जहां पर ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की जान जा रही है.

देश भर में ग्रामीण और शहरी इलाके में काम करने वाली संस्था मेडिस्केप इंडिया और व्ही डाक्टर्स संस्था की अध्यक्ष डा. सुनीता दुबे का कहना है कि ग्रामीण और दूर दराज इलाको में कोविड के मरीजो की जान बचाने के लिए एंबुलेंस और घर घर मेडिसिन किट पहुचना बहुत जरूरी है क्योकि ग्रामीण इलाके में होने वाली मौते ज्यादातर पैसे की कमी के चलते हास्पिटल तक ना जाना और जांच और ट्रीटमेंट ना होने की वजह से हो रही है जो दुखद है और इसके लिए और प्रयास जरूरी है.

तीसरी लहर के पहले भले ही शहरो में इंफ्रास्टक्चर बढा हो लेकिन ग्रामीण इलाके में अब भी कोविड की इस लड़ाई में स्वास्थ्य व्यवस्था पर काम करने की जरूरत है और एसे में संस्था ग्रामीण इलाके पर ज्यादा फोकस कर रही है जिससे कोरोना को हराया जा सके.

विद्या बालन की ‘शेरनी’ का टीजर हुआ रिलीज, 2 जून को अमेज़न प्राइम पर देख सकेंगे फ़िल्म

बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन की आने वाली फिल्म शेरनी का टीजर रिलीज हो गया है, जिसमें वह एक फॉरेस्ट ऑफिसर के किरदार में नजर आ रही है । अमित मसुरकर  द्वारा निर्देशित इस फिल्म में विद्या बालन मुख्य भूमिका में है।

फिल्म 2 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम पर रिलीज की जाएगी।

फिल्म में विद्या बालन के अलावा शरद सक्सेना, मुकुल चड्ढा, विजय राज, इला अरुण, ब्रजेंद्र काला जैसे सितारे भी महत्वपूर्ण भूमिका में है।

कनाडा: सबसे बड़े बोर्डिंग स्कूल में मिले 215 बच्चों के शव, 1978 से बंद है स्कूल, मचा हड़कंप

कनाडा में एक स्कूल से 215 बच्चों के शव मिले हैं जिनमें से कुछ की उम्र तो करीब तीन साल होगी। यह कभी कनाडा का सबसे बड़ा आवासीय विद्यालय हुआ करता था। ब्रिटिश कोलंबिया के सैलिश भाषा बोलने वाले एक समूह फर्स्ट नेशन की प्रमुख रोसेन कैसमिर ने एक समाचार विज्ञप्ति में कहा कि जमीन के नीचे की वस्तुओं का पता लगाने वाले रडार की मदद से गत सप्ताहांत ये शव मिले। 

उन्होंने शुक्रवार को बताया कि और शव मिल सकते हैं क्योंकि स्कूल के मैदान पर और इलाकों की तलाशी ली जानी है। उन्होंने कहा कि ये शव एक ऐसी क्षति है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती और कमलूप्स इंडियन रेजीडेंशियल स्कूल के दस्तावेजों में कभी इसका जिक्र नहीं किया गया।

गौरतलब है कि 19वीं सदी से 1970 के दशक तक फर्स्ट नेशन के 150,000 से अधिक बच्चों को उन्हें कनाडाई समाज में अपनाने के कार्यक्रम के तौर पर सरकार के वित्त पोषण वाले ईसाई स्कूलों में पढ़ना होता था।

उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तन के लिए विवश किया जाता और अपनी मातृ भाषा बोलने नहीं दी जाती थी। कई बच्चों को पीटा जाता था तथा उन्हें अपशब्द कहे जाते और ऐसा बताया जाता है कि उस दौरान 6,000 बच्चों की मौत हो गयी थी। ट्रूथ एंड रिकांसिलिएशन कमीशन ने पांच वर्ष पहले संस्थान में बच्चों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर विस्तृत रिपोर्ट दी थी।

इसमें बताया गया कि दुर्व्यवहार एवं लापरवाही के कारण कम से कम 3200 बच्चों की मौत हो गई। इसमें बताया गया कि कैमलूप्स स्कूल में 1915 से 1963 के बीच कम से कम 51 मौत हुई थी। कनाडाई सरकार ने 2008 में संसद में माफी मांगी थी और स्कूलों में शारीरिक तथा यौन शोषण की बात स्वीकार की थी। ब्रिटिश कोलंबिया के प्रमुख नेता जॉन होर्गन ने कहा कि इन शवों के मिलने के बारे में जानकर वह “भयभीत” हैं और उनका ‘‘दिल टूट गया है।’

इंजेक्शन की किल्लत के बीच 15 प्रतिशत मरीजों के मस्तिष्क तक पहुंचा ब्लैक फंगस

ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) के चलते यहां शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) में भर्ती होने वाले करीब 15 प्रतिशत मरीजों के मस्तिष्क में इस बीमारी का संक्रमण मिला है।

एमवायएच के न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया, ‘हमारे अस्पताल में ब्लैक फंगस के अब तक कुल 368 मरीज भर्ती हो चुके हैं। शुरुआती अध्ययन के अनुसार इनमें से करीब 55 मरीजों के मस्तिष्क में इस बीमारी का संक्रमण मिला है। सीटी स्कैन और एमआरआई की जांचों में इसकी पुष्टि हुई है।’

गुप्ता ने बताया कि इनमें से ज्यादातर मरीजों के मस्तिष्क में छोटे आकार का ब्लैक फंगस संक्रमण मिला, जबकि चार अन्य गंभीर मरीजों के मस्तिष्क की बड़ी सर्जरी की गई ताकि घातक संक्रमण की रोकथाम कर उनकी जान बचाई जा सके।

उन्होंने दावा किया कि सर्जरी से गुजरने वाले मरीज ‘देरी से’ एमवायएच पहुंचे थे और उनके अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही ब्लैक फंगस का संक्रमण उनके साइनस से होता हुआ मस्तिष्क तक पहुंच गया था।

बहरहाल, एक अन्य अधिकारी ने स्वीकारा कि ब्लैक फंगस के इलाज में प्रमुख तौर पर इस्तेमाल होने वाले एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की शहर में किल्लत बरकरार रहने से इसके मरीजों के इलाज पर बुरा असर पड़ रहा है।

जानकारों ने बताया कि ब्लैक फंगस संक्रमण के मस्तिष्क तक पहुंचने के शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द और उल्टी होना शामिल है। बाद में मस्तिष्क में इसका संक्रमण बढ़ने पर मरीज बेहोश होने लगता है।

उन्होंने बताया कि इन दिनों ब्लैक फंगस का संक्रमण कोविड-19 से उबर रहे और स्वस्थ हो चुके लोगों में से कुछेक में मिल रहा है। हालांकि, ब्लैक फंगस के चुनिंदा मरीज ऐसे भी हैं जिन्हें कोविड-19 होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

दिल्‍ली : 7 जून तक बढ़ा Lockdown, लेकिन कुछ शर्तों के साथ मिलेगी ये छूट

अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में लॉकडाउन 7 जून तक बढ़ा दिया है, लेकिन अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 31 मई से लॉकडाउन में आंशिक रूप से ढील देने का फैसला किया गया है. इस दौरान काम के घंटे, लगातार जांच और कोविड उपयुक्त व्यवहार की निगरानी से विनिर्माण और निर्माण गतिविधियों को फिर से शुरू किया जाएगा.

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा सात जून तक बढ़ाए गए लॉकडाउन के दौरान विनिर्माण इकाइयों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों को आवाजाही के लिए ई-पास ले जाने की आवश्यकता होगी.

बहरहाल, शनिवार को जारी डीडीएमए के एक आदेश में कहा गया है कि सोमवार से स्वीकृत औद्योगिक क्षेत्रों में बंद परिसर के भीतर विनिर्माण इकाइयों के संचालन और कार्य स्थलों के भीतर निर्माण गतिविधियों की अनुमति दी गई है. इससे पहले शुक्रवार को डीडीएमए की बैठक में उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाग लिया, जिसमें अन्य सभी प्रतिबंधों को जारी रखने के लिए निर्णय लिया गया, लेकिन कारखानों और निर्माण स्थलों को फिर से खोलने की अनुमति दी गई.

डीडीएमए के आदेश में कहा गया है कि कार्यस्थल पर केवल बिना लक्षण वाले श्रमिकों और कर्मचारियों को ही अनुमति दी जाएगी. सभी जिला मजिस्ट्रेट नियमित रूप से इन निर्माण इकाइयों और निर्माण स्थलों पर पर्याप्त संख्या में बिना किसी क्रम के लोगों की आरटी-पीसीआर/आरएटी जांच सुनिश्चित करेंगे. बता दें कि कोविड-19 की दूसरी लहर बढ़ने के कारण दिल्ली में 19 अप्रैल को लॉकडाउन लगाया गया था, जिसे पांचवीं बार बढ़ा दिया गया है.

इससे पहले दिल्‍ली के सीएम केजरीवाल ने कहा था कि 31 मई से हम अनलॉक की प्रक्रिया शुरू करेंगे. इस दौरान सबसे पहले समाज के गरीब तबके का ध्‍यान रखना है, जो कि गरीब और प्रवासी हैं. इसी वजह से सोमवार से एक हफ्ते के लिए कंस्‍ट्रक्‍शन और फैक्ट्रियों को खोला गया है. हालांकि इस दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है.

देश में कोरोना की दूसरी लहर के लिए ‘प्रधानमंत्री की नौटंकी’ जिम्मेदार: राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में कोरोना रोधी टीकाकरण की कथित तौर पर धीमी गति होने को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह से ‘नौटंकी’ की और अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, उस कारण कोरोना वायरस की दूसरी लहर आई.

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर ‘झूठ बोलने’ के बजाय सच्चाई देश को बतानी चाहिए तथा विपक्ष के सुझावों को सुनना चाहिए क्योंकि विपक्ष सरकार का दुश्मन नहीं है.

राहुल गांधी ने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘कोरोना संकट को लेकर हमने सरकार को एक के बाद एक सलाह दी, लेकिन सरकार ने हमारा मजाक बनाया. प्रधानमंत्री ने समय से पहले यह घोषित कर दिया कि कोरोना को हरा दिया गया है. सच्चाई यह है कि सरकार और प्रधानमंत्री को कोरोना की समझ नहीं है और आज तक समझ नहीं आई है.’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘कोरोना एक बदलता हुआ वायरस है. इस वायरस को जितना समय आप देंगे, जितनी जगह देंगे यह उतना ही खतरनाक बनता जाएगा. मैंने पिछले साल कहा था कि कोरोना को समय और जगह मत दीजिए.’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘कोरोना को रोकने के तीन-चार तरीके हैं. इनमें से एक तरीका टीकाकरण है. लॉकडाउन एक हथियार है, लेकिन यह अस्थायी समाधान है. सामाजिक दूरी और मास्क भी अस्थायी समाधान है. टीका स्थायी समाधान है. अगर आप तेजी से टीका नहीं लगाते हैं तो वायरस बढ़ता जाएगा.’’

उन्होंने कहा , ‘‘कुछ ही समय पहले मैंने देखा कि विदेश मंत्री ने कहा कि हम ‘टीका कूटनीति’ कर रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं. आज स्थिति क्या है? देश के सिर्फ तीन फीसदी लोगों को टीका लगाया गया. यानी 97 फीसदी लोगों को कोरोना पकड़ सकता है। इस सरकार ने कोरोना के लिए दरवाजा खुला छोड़ रखा है.’’

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘अमेरिका ने अपनी आधी आबादी को टीका लगा दिया. ब्राजील जैसे देश ने आठ-नौ फीसदी लोगों को टीका लगा दिया. हम टीका बनाते हैं, लेकिन हमारे यहां सिर्फ तीन फीसदी लोगों को टीका लगा है.’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘दूसरी लहर प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री ने जो नौटंकी की, अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की, उसका कारण दूसरी लहर है.’’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आगाह किया कि अगर मौजूदा गति से टीकाकरण हुआ तो और भी लहर आएगी क्योंकि वायरस का स्वरूप बदलता जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘‘जिस मृत्यु दर की बात की जा रही है वो झूठ है. यह झूठ सरकार फैला रही है. यह राजनीतिक मामला नहीं है, यह देश के भविष्य और देश के लोगों की जान बचाने का मामला है. विपक्ष सरकार का दुश्मन नहीं है. विपक्ष उनको रास्ता दिखा रहा है.’