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‘लव जिहाद कानून’ पर बोले ओवैसी- MSP और बेरोजगारी पर कानून बनाए सरकार

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को भाजपा नीत राज्य सरकारों पर गलत तरीकों से धर्मांतरण के खिलाफ अध्यादेश लाने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि ये संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं. ओवैसी ने केंद्र सरकार के नये कृषि कानूनों को भी ‘कठोर’ बताते हुए नरेंद्र मोदी सरकार को किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाले, रोजगार संबंधी कानून लाने की चुनौती दी. उन्होंने कहा कि कोई बालिग व्यक्ति जिससे चाहे, शादी कर सकता है और धर्मांतरण के खिलाफ इस तरह के कानून लाने की भाजपा की मंशा संविधान की खिल्ली उड़ाने की है.

वह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जबरन धर्मांतरण के खिलाफ लाये गये एक अध्यादेश के क्रियान्वयन और मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा मंगलवार को ऐसे ही एक कानून को मंजूरी दिये जाने का जिक्र कर रहे थे. ओवैसी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘भाजपा मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत का माहौल बना रही है.’’ उन्होंने कहा कि इस तरह के कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का स्पष्ट उल्लंघन हैं जो क्रमश: समानता के अधिकार, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार तथा धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित हैं.

ओवैसी ने यह भी कहा कि भाजपा को कृषि क्षेत्र में अध्यादेश लाने या देश के युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रयास करना चाहिए. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार ओवैसी ने कहा कि संविधान में कहीं भी लव जिहाद की कोई परिभाषा नहीं है. भाजपा शासित राज्य लव जिहाद कानूनों के माध्यम से संविधान का मजाक बना रहे हैं. यदि भाजपा शासित राज्य कानून बनाना चाहते हैं, तो उन्हें एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के लिए एक कानून बनाना चाहिए और रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए.
हैदराबाद के सांसद ने कहा, ‘‘मैं भाजपा को चुनौती देता हूं कि वे किसानों को एमएसपी देने पर कानून क्यों नहीं बनाते जो समय की जरूरत है. पिछले कुछ सप्ताह से हजारों किसान मोदी सरकार के इन कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.’’

उन्होंने दावा किया कि वे (भाजपा) ऐसा करने के बजाय धर्मांतरण के खिलाफ ये अध्यादेश ला रहे हैं. ओवैसी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनकी पार्टी चुनाव लड़ेगी चाहे मध्य प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव हों या गुजरात अथवा अन्य राज्यों के चुनाव हों.

Farmers Protest : केंद्र-किसानों के बीच बातचीत आज, प्रदर्शनकारी संगठन नए कानून वापस लेने की मांग पर डटे

केंद्र और आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के बीच ठहरी हुई बातचीत बुधवार को होगी वहीं प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने कहा कि चर्चा केवल तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने पर ही होगी. इस बीच केंद्र और किसानों के बीच छठे दौर की वार्ता से एक दिन पहले केंद्रीय मंत्रियों नरेन्द्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने वरिष्ठ भाजपा नेता एवं गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. सूत्रों ने बताया कि मंत्रियों ने इस बैठक में इस बारे में चर्चा की कि बुधवार को किसानों के साथ होने वाली वार्ता में सरकार का क्या रुख रहेगा.

कृषि मंत्री तोमर, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश किसानों के साथ वार्ता में केंद्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. तोमर ने सोमवार को कहा था कि उन्हें गतिरोध के जल्द दूर होने की उम्मीद है. केंद्र ने सोमवार को आंदोलन कर रहे 40 किसान संगठनों को सभी प्रासंगिक मुद्दों का “तार्किक हल’’ खोजने के लिए 30 दिसंबर को अगले दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया.

लेकिन किसान यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को केंद्र को लिखे पत्र में कहा कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने का मुद्दा वार्ता के एजेंडे का हिस्सा होना ही चाहिए.

मोर्चा ने आगे कहा कि बैठक के एजेंडे में एनसीआर एवं इससे सटे इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के संबंध में जारी अध्यादेश में संशोधन को शामिल किया जाना चाहिये ताकि किसानों को दंडात्मक प्रावधानों से बाहर रखा जा सके.

पत्र के जरिए मोर्चा ने वार्ता के लिए सरकार के आमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है.

पत्र में यह भी कहा गया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए बिजली संशोधन विधेयक 2020 को वापस लिए जाने का मुद्दा भी वार्ता के एजेंडे में शामिल होना चाहिए.

अब तक हुई पांच दौर की बातचीत में पिछले दौर की वार्ता पांच दिसंबर को हुई थी. छठे दौर की वार्ता नौ दिसंबर को होनी थी, लेकिन इससे पहले गृह मंत्री शाह और किसान संगठनों के कुछ नेताओं के बीच अनौपचारिक बैठक में कोई सफलता न मिलने पर इसे रद्द कर दिया गया था.

कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने सोमवार को किसान संगठनों को लिखे पत्र में, उन्हें राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में बुधवार दोपहर दो बजे बातचीत के लिए आमंत्रित किया. किसानों ने इससे पहले 26 दिसंबर को भी वार्ता की एजेंडा सूची के संबंध में सरकार को पत्र लिखा था. हालिया पत्र में मोर्चा ने 26 दिसंबर के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि तब उसने भूलवश ‘वापसी’ के बजाय बिजली संशोधन विधेयक में ‘बदलाव’ का जिक्र किया था.

इस बीच, केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने बुधवार को सरकार के साथ होने वाली बातचीत के मद्देनजर अपना प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दिया है.

पंजाब, हरियाणा और देश के कुछ अन्य हिस्सों से आए हजारों किसान दिल्ली के निकट सिंघू बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले 31 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए.

इस बीच कांग्रेस ने कहा कि सरकार को मौखिक आश्वासन देने की बजाय संसद के जरिए कानून बनाकर किसानों की मांगों को पूरा करना चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने यह आरोप भी लगाया कि तीनों कृषि कानून लाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को खत्म करने की साजिश है.

शुक्ला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘किसानों के आंदोलन को राजनीतिक दलों का आंदोलन बताना गलत है. यह किसानों को बदनाम करने का प्रयास है. यह आंदोलन पूरी तरह से किसानों का आंदोलन है. सरकार को किसानों को बदनाम करने का प्रयास नहीं करना चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि सरकार किसानों को सुनें और उनकी मांगों को स्वीकार करे. ये मांगें संसद से पारित कानून का हिस्सा होनी चाहिए.’’

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, ‘‘जब किसी किसान संगठन ने इन कानूनों को बनाने की मांग नहीं की तो फिर किसके कहने पर ये काले कानून बनाए गए?’’ सच्चाई यह है कि एमएसपी को खत्म करने और खेती पर उद्योगपतियों का कब्जा कराने का षड्यंत्र है.’’

वहीं राकांपा प्रमुख और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्यों से विचार विमर्श किये बिना ही कृषि संबंधी तीन कानूनों को थोप दिया . उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठकर खेती के मामलों से नहीं निपटा जा सकता क्योंकि इससे सुदूर गांव में रहने वाले किसान जुड़े होते ह

शरद पवार ने किसान संगठनों के साथ बातचीत के लिये गठित तीन सदस्यीय मंत्री समूह के ढांचे पर सवाल उठाया और कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी को ऐसे नेताओं को आगे करना चाहिए जिन्हें कृषि और किसानों के मुद्दों के बारे में गहराई से समझ हो.

मोदी और योगी की तस्वीर के साथ किया मोबाइल का विज्ञापन, मंत्री के भाई के खिलाफ मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के मंत्री कपिल देव अग्रवाल के भाई के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लगाकर मोबाइल फोन का प्रचार करने के मामले में धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया है.

कांग्रेस ने मंत्री को बर्खास्त करने और मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि ललित अग्रवाल के खिलाफ गत 26 दिसम्बर को हजरतगंज कोतवाली में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया है.

गौरतलब है कि ललित, प्रदेश के कौशल विकास विभाग के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के भाई हैं.

इस बीच मंत्री अग्रवाल ने इस बारे में कहा कि उनके भाई को निशाना बनाया जा रहा है और इस मुकदमे में कोई दम नहीं है और उनके भाई सभी आरोपों से बरी हो जाएंगे.

आरोप है कि एक विज्ञापन एजेंसी के संचालक ललित अग्रवाल और उनके साथियों ने एक कथित स्वदेशी ब्रांड के मोबाइल फोन की लॉन्चिंग के लिए तैयार कराए गए होर्डिंग में अनाधिकृत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लगाई थी.

लखनऊ समेत कई शहरों में लगाई गई उन होर्डिंग को इस तरह तैयार किया गया था कि जैसे सरकार स्वदेशी मोबाइल फोन लॉन्च करने की तैयारी कर रही हो.

सूत्रों ने बताया कि 22 दिसम्बर को मोबाइल की लांचिंग एक पांच सितारा होटल में की गयी थी जिसमें कौशल विकास राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के अलावा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार,सुल्तानपुर के लंभुआ के विधायक देवमणि द्विवेदी और लखनऊ के विधायक नीरज वोरा भी शामिल हुये थे.

हालांकि मोबाइल की होर्डिंग में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की फोटो से उठे सवाल के बीच विज्ञापन एजेंसी ने 26 दिसम्बर को अपने इस कृत्य के लिये माफी मांग ली थी और होर्डिंग हटा लिये थे.

इस बीच, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.

उन्होंने एक बयान में कहा कि ‘लोकल फॉर वोकल’ की आड़ लेकर स्वदेशी के नाम पर जिस तरह सरकार के मंत्री ने पांच सितारा होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोबाइल फोन लांच किया और जनता को बताया कि यह मोबाइल पूरी तरह स्वदेशी होने के साथ-साथ सरकार के कौशल विकास योजना का हिस्सा है, उससे साबित होता है कि उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है.

लल्लू ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण में दोषियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ सीबीआई की जांच भी होनी चाहिए जिससे इस खेल में पर्दे के पीछे छिपे खिलाड़ी भी बेनकाब हो सकें.

मुंबई : धूमधाम से मनाया गया रतन टाटा का जन्मदिन

मशहूर उद्योगपति रतन टाटा का मुंबई में बड़े ही धूमधाम से जन्मदिन मनाया गया. आपको बता दें कि रतन टाटा इस वर्ष 83 साल के हो गए है. उनके 83 के जन्मदिन के मौके पर मुंबई में के रवि द्वारा बर्थडे सेलिब्रेशन का आयोजन किया गया, जहां पर समाज के तमाम जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की और रतन टाटा का केक काटकर बर्थडे सेलिब्रेट किया गया.

इस कार्यक्रम का आयोजन इंडिया मीडिया लिंक एंड इवेंट्स मैनेजमेंट द्वारा किया गया. इस मौके पर कोरोना काल मे किये गए कार्यों की सहराना करते हुए समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों डॉ बाबा साहब अंबेडकर कोरोना वारियर अवार्ड से नवाजा गया. इस कार्यक्रम मे मुंबई के वर्ली पुलिस स्टेशन के अधिकारी सुशील जाधव को भी कोरोना वॉरियर के अवार्ड से नवाजा गया. इस मौके पर बॉलीवुड कलाकार दिलीप सेन , फ़िल्म अभिनेता अली खान जैसे कलाकारों ने शिरकत की.

Oxford Astrazeneca का टीका कोरोनावायरस के नए म्यूटेंट पर भी होगा प्रभावी : रिपोर्ट

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित कोविड-19 का टीका बहुत तेजी से फैल रहे कोरोनावायरस के नए प्रकार पर प्रभावी होना चाहिए. यह दावा रविवार को ब्रिटेन की मीडिया में आई खबरों में किया गया है.

उल्लेखनीय है कि ऑक्सफोर्ड के टीके का भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) से करार है और बृहस्पतिवार से पहले ब्रिटेन में इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद सबसे असुरक्षित वर्गों के टीकाकरण में तेजी आएगी.

वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का बयान पर ‘दि संडे टाइम्स’ ने लिखा, ‘पहली प्राथमिकता 1.2 से 1.5 करोड़ लोगों के टीकाकरण की है, जिन्हें कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत होगी. एस्ट्राजेनेका के टीके की मंजूरी का अभिप्राय है कि हम वसंत ऋतु तक इन लोगों का टीकाकरण कर पाएंगे.’

सूत्रों ने चेतावनी दी है कि कोरोनावायरस के नये रूप (स्ट्रेन) ने पुराने वाले को पीछे छोड़ दिया है और वह ब्रिटेन में तेजी से फैल रहा है.

सूत्रों ने कहा, ‘नवीनतम आंकड़े ठीक नहीं है लेकिन औषधि एवं स्वास्थ्य सेवा उत्पाद नियामक एजेंसी (एमएचआरए) इस हफ्ते के मध्य तक ऑक्सफोर्ड के टीके के इस्तेमाल को हरी झंडी देगी.’

एस्ट्राजेनेका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पास्कल सोरियट ने कहा कि टीका संबंधी आंकड़े दिखाते हैं कि यह फाइजर और मॉडर्ना के टीकों की तरह ही प्रभावी है, जिन्हें 95 प्रतिशत तक प्रभावी होने की वजह से मंजूरी मिल चुकी है और यह टीका बहुत तबीयत खराब होने और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति से बचाने में 100 प्रतिशत कारगर है.

उन्होंने कहा कि उनका टीका अत्यधिक संक्रामक वायरस के नए रूप के खिलाफ भी प्रभावी ‘होना चाहिए’. गौरतलब है कि वायरस के इस नए प्रकार की वजह से पूरे इंग्लैंड में दोबारा पूर्ण लॉकडाउन लगाना पड़ा है.

इस दिन ज़रूर सुने श्री हरी विष्णु का ये चमत्कारिक भजन, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएँ

श्री हरी विष्‍णु की सच्चे मन से उपासना करने से भक्तों को समस्त कष्टों से मुक्ति मिलने के साथ ही सुख, समृद्धि, वैभव, धन और यश की भी प्राप्ति होती है. गुरुवार का दिन श्री हरी विष्णु की उपासना के लिए ख़ास महत्व रखता है इस दिन विष्णु भगवान की पूजा करने से विष्णु भगवान प्रसन्न होते हैं और सभी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.

NCP प्रमुख शरद पवार का बड़ा बयान, कहा- मनमोहन सिंह के साथ मिलकर हम करना चाहते थे कृषि क्षेत्र में सुधार, लेकिन…

राकांपा प्रमुख और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्यों से विचार विमर्श किये बिना ही कृषि संबंधी तीन कानूनों को थोप दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठकर खेती के मामलों से नहीं निपटा जा सकता क्योंकि इससे सुदूर गांव में रहने वाले किसान जुड़े होते हैं.

दिल्ली की सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के दूसरे महीने में प्रवेश करने और समस्या का समाधान निकालने के लिये पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बीच शरद पवार ने किसान संगठनों के साथ बातचीत के लिये गठित तीन सदस्यीय मंत्री समूह के ढांचे पर सवाल उठाया और कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी को ऐसे नेताओं को आगे करना चाहिए जिन्हें कृषि और किसानों के मुद्दों के बारे में गहराई से समझ हो.

शरद पवार ने ‘पीटीआई’ से साक्षात्कार में कहा कि सरकार को विरोध प्रदर्शनों को गंभीरता से लेने की जरूरत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किसानों के आंदोलन का दोष विपक्षी दलों पर डालना उचित नहीं है . उन्होंने कहा कि अगर विरोध प्रदर्शन करने वाले 40 यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ अगली बैठक में सरकार किसानों के मुद्दों का समाधान निकालने में विफल रहती है तब विपक्षी दल बुधवार को भविष्य के कदम के बारे में फैसला करेंगे.

यह पूछे जाने पर कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दावा किया है कि मनमोहन सिंह नीत संप्रग सरकार में तत्कालीन कृषि मंत्री के रूप में पवार कृषि सुधार चाहते थे लेकिन राजनीतिक दबाव में ऐसा नहीं कर सके, राकांपा नेता ने कहा कि वे निश्चित तौर पर इस क्षेत्र में कुछ सुधार चाहते थे लेकिन ऐसे नहीं जिस तरह से भाजपा सरकार ने किया है. पवार ने कहा कि उन्होंने सुधार से पहले सभी राज्य सरकारों से सम्पर्क किया और उनकी आपत्तियां दूर करने से पहले आगे नहीं बढ़े.

राकांपा नेता ने कहा, ‘‘ मैं और मनमोहन सिंह कृषि क्षेत्र में कुछ सुधार लाना चाहते थे, लेकिन वैसे नहीं जिस प्रकार से वर्तमान सरकार लाई. उस समय कृषि मंत्रालय ने प्रस्तावित सुधार के बारे में सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों और क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ चर्चा की थी.’’ उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों के मंत्रियों को सुधार को लेकर काफी अपत्तियां थी और अंतिम निर्णय लेने से पहले कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों के विचार जानने के लिये कई बार पत्र लिखे.

दो बार कृषि मंत्रालय का दायित्व संभालने वाले पवार ने कहा कि कृषि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा होता है और इसके लिये राज्यों के साथ विचार विमर्श करने की जरूरत होती है. पवार ने कहा कि कृषि से जुड़े मामलों से दिल्ली में बैठकर नहीं निपटा जा सकता है क्योंकि इससे गांव के परिश्रमी किसान जुड़े होते हैं और इस बारे में बड़ी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है. और इसलिये अगर बहुसंख्य कृषि मंत्रियों की कुछ आपत्तियां हैं तो आगे बढ़ने से पहले उन्हें विश्वास में लेने और मुद्दों का समाधान निकालने की जरूरत है.

पवार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस बार न तो राज्यों से बात की और विधेयक तैयार करने से पहले राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ कोई बैठक बुलाई. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि संबंधी विधेयकों को संसद में अपनी ताकत की बदौलत पारित कराया और इसलिये समस्यां उत्पन्न हो गई.

पवार ने कहा, ‘‘ राजनीति और लोकतंत्र में बातचीत होनी चाहिए. ’’ उन्होंने कहा कि सरकार को इन कानूनों को लेकर किसानों की आपत्तियों को दूर करने के लिये बातचीत करनी चाहिए थी. पवार ने कहा, ‘‘ लोकतंत्र में कोई सरकार यह कैसे कह सकती है कि वह नहीं सुनेगी या अपना रूख नहीं बदलेगी. एक तरह से सरकार ने इन तीन कृषि कानूनों को थोपा है. अगर सरकार ने राज्य सरकारों से विचार विमर्श किया होता और उन्हें विश्वास में लिया होता तब ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती.

उन्होंने कहा कि किसान परेशान है क्योंकि उन कानूनों से एमएसपी खरीद प्रणाली समाप्त हो जायेगी और सरकार को इन चिंताओं को दूर करने के लिये कुछ करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बातचीत के लिये शीर्ष से भाजपा के उन नेताओं को रखना चाहिए जिन्हें कृषि क्षेत्र के बारे में बेहतर समझ हो. कृषि क्षेत्र के बरे में गहरी समझ रखने वाले किसानों के साथ बातचीत करेंगे तब इस मुद्दे के समाधान का रास्ता निकाला जा सकता है. उन्होंने हालांकि किसी का नाम नहीं लिया.

पवार ने कहा, ‘‘ अगर किसान सरकार की प्राथमिकता होती तब यह समस्या इतनी लम्बी नहीं खिंचती और अगर वे कहते है कि विरोध करने वालों में केवल हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान हैं, तब सवाल यह है कि क्या इन्होंने देश की सम्पूर्ण खाद्य सुरक्षा में योगदान नहीं दिया है.’’

BJP नेता एवं गुजरात से सांसद मनसुख वसावा ने पार्टी छोड़ी

जनजातीय मामलों पर मुखर रहने वाले गुजरात से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मनसुख वसावा ने मंगलवार को भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वह संसद के बजट सत्र के बाद लोकसभा के सदस्य के तौर पर भी इस्तीफा दे देंगे.

वसावा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछले सप्ताह पत्र लिखकर मांग की थी कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की नर्मदा जिले के 121 गांवों को पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने संबंधी अधिसूचना वापस ली जाए.

भरूच से छह बार सांसद रहे वसावा ने गुजरात भाजपा अध्यक्ष आर सी पाटिल को लिखे पत्र में कहा, ‘‘मैं इस्तीफा दे रहा हूं, ताकि मेरी गलतियों के कारण पार्टी की छवि खराब न हो. मैं पार्टी का वफादार कार्यकर्ता रहा हूं, इसलिए कृपया मुझे माफ कर दीजिए.’’

Mansukh Vsava Resigns

वसावा ने 28 दिसंबर को पाटिल को लिखे पत्र में कहा कि वह संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद भरूच से सांसद के तौर पर इस्तीफा दे देंगे.

वसावा ने कहा कि उन्होंने पार्टी का वफादार बने रहने और पार्टी के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने की पूरी कोशिश की.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अंतत: एक मनुष्य हूं और मनुष्य गलतियां कर देता है. पार्टी को मेरी गलतियों के कारण नुकसान नहीं हो, यह सुनिश्चित करने के लिए मैं पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं और पार्टी से माफी मांगता हूं.’’

भाजपा प्रवक्ता भरत पंड्या ने कहा कि पार्टी को सोशल मीडिया के जरिए इस्तीफा मिला.

पंड्या ने कहा, ‘‘पाटिल ने उनसे बात की है और उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी हर समस्या का समाधान किया जाएगा. वसावा गुजरात में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद हैं और हम उनकी सभी समस्याओं को सुलझाएंगे.’’

दिल्ली सरकार मध्याह्न भोजन योजना के तहत अपने छात्रों को छह महीने तक सूखा राशन देगी : CM अरविंद केजरीवाल

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली सरकार मध्याह्न भोजन योजना के तहत अपने छात्रों को छह महीने तक सूखा राशन देगी.

Covid-19 वैश्विक महामारी के कारण स्कूलों के मार्च से बंद होने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है.

मंडावली इलाके के एक सरकारी स्कूल में सूखा राशन बांटने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में केजरीवाल ने कहा, ‘‘ जब स्कूल बंद थे, तो हमने मध्याह्न भोजन योजना के लिए अभिभावकों को पैसे भेजने का फैसला किया था, लेकिन अब हमने छात्रों को छह महीने तक सूखा राशन देने का निर्णय किया है.’’

देश में कोविड-19 के मद्देनजर मार्च से स्कूल बंद है। 15 अक्टूबर को कुछ राज्यों में आंशिक रूप से स्कूल खोले गए थे.

दिल्ली सरकार ने हालांकि कहा है कि कोरोना वायरस का टीका आने तक राष्ट्रीय राजधानी में स्कूल नहीं खुलेंगे.

बांदा : जेई पर 10 साल तक 50 बच्चों से यौन शोषण का आरोप, CBI ने किया पत्नी को गिरफ्तार

यूपी के बांदा में बाल यौन शोषण मामले में जेल में बंद सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) के परिवार पर सीबीआई अपना शिकंजा कस रही है. सीबीआई ने सोमवार को जेई की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद रिमांड मजिस्ट्रेट ने उसे चार जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

पॉक्सो अदालत के सहायक शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) मनोज दीक्षित ने बताया, “सीबीआई के उपाधीक्षक (सीओ) अमित कुमार ने बाल यौन शोषण के आरोप में 18 नवंबर से जेल में बंद सिंचाई विभाग के जेई रामभवन की पत्नी दुर्गावती को उसके नरैनी कस्बे के निजी आवास से गिरफ्तार किया है.”

उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त को रिमांड मजिस्ट्रेट सिविल जज (सीनियर डिवीजन) भारतेंदु प्रकाश गुप्ता की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे चार जनवरी तक के लिए जेल भेज दिया गया है. बाल यौन शोषण का आरोपी जेई भी चार जनवरी तक की न्यायिक हिरासत में है. दीक्षित ने आगे बताया कि जेई की पत्नी दुर्गावती पर पॉक्सो अधिनियम की धारा-17 (बाल यौन शोषण अपराध में मदद करना और छिपाना) और 120बी (षड्यंत्र में शामिल होना) के तहत आरोप है.

गौरतलब है कि सीबीआई ने कथित तौर पर 50 बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो व फोटो पॉर्न साइटों को बेचने के मामले 16 नवंबर को जेई रामभवन को गिरफ्तार किया था. उस पर करीब 10 साल से इस कृत्य को करने का गंभीर आरोप है. सीबीआई की टीम ने चित्रकूट में जूनियर इंजीनियर और उसके साथियों के आवास की तलाशी ली थी. तलाशी के दौरान करीब आठ लाख रुपया नकद, 12 मोबाइल फोन, लैपटॉप, वेब-कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस मिले थे.

जूनियर इंजीनियर बांदा, चित्रकूट और आसपास के जिलों में बच्चों के यौन शोषण में शामिल था. आरोपी कथित तौर पर ऑनलाइन वीडियो और फोटोग्राफ की बिक्री भी करता था. जनवरी में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्‍यूरो (NCRB) के डाटा के अनुसार, भारत में हर रोज 100 से अधिक बच्‍चों का यौन शोषण होता है. पिछले साल के मुकाबले इसमें करीब 22 फीसदी का उछाल आया है.