Home Blog Page 134

उत्तर प्रदेश : 24 घंटे में मिले 959 मरीज, लखनऊ में सामने आए सबसे ज्यादा मामले

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में धीरे-धीरे कमी देखी जा रही है. बीते 24 घंटे में यहां कोरोना के 959 नए मरीजों की पुष्टि हुई है. इसके अलावा प्रदेश में 13 लोगों की मौत भी हुई है. राज्य में कोरोना से मृतकों की संख्या बढ़कर अब 8,306 हो गई है.

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा तीन मौतें लखनऊ में हुईं हैं. वहीं, वाराणसी में दो मरीजों की जान गई. स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि 24 घंटे में 1,391 मरीज पूरी तरह ठीक भी हुए हैं.

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सबसे ज्यादा 199 नए मरीज राजधानी लखनऊ में सामने आए हैं. इसके अलावा मेरठ में 64, वाराणसी में 62 और गाजियाबाद में 45 नए मरीजों के कोविड-19 से पीड़ित होने की पुष्टि की गई है. इस बीच, राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रिटेन, फ्रांस तथा अन्य देशों से प्रदेश आने वालों का पता लगाकर उनका आरटीपीसीआर पद्धति से जांच करवाने के एक बार फिर निर्देश दिए हैं. विदेशी पर्यटको को आइसोलेशन में भी रखने को कहा गया है.

योगी ने कहा कि विदेश से आए लोगों की सूची बनाकर उनकी जांच सुनिश्चित कराई जाए. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट आने तक ऐसे व्यक्तियों को घर में ही किसी अलग स्थान पर रखा जाए. योगी ने कहा कि प्रदेश में कोविड-19 से संबंधित आरटीपीसीआर व रैपिड एंटीजन जांच पूरी क्षमता के साथ किए जाएं, कोरोना वायरस के नए स्वरूप के दृष्टिगत जांच के लिए नए उपकरण मंगा लिए जाएं.

ब्रिटेन से गुजरात लौटे 12 लोग कोरोना संक्रमित, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी-दामाद-नाती की रिपोर्ट निगेटिव

ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों से 25 नवंबर से 23 दिसंबर के बीच गुजरात आए 1720 यात्रियों में से कुल 12 यात्री कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. इन मरीजों के नमूने पुणे में राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान और गांधीनगर के गुजरात जीवविज्ञान शोध केंद्र में भेजा गया है ताकि पता लगाया जा सके कि उनमें ब्रिटेन में मिला कोविड-19 का नया स्वरूप मौजूद है या नहीं. अगले आठ से दस दिनों में इसके परिणाम आ सकते हैं.

ब्रिटेन से 21 से 23 दिसंबर के बीच गुजरात आए यात्रियों की अलग-अलग एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर जांच की गयी. संक्रमित पाए गए लोगों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

इस बीच गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी, दामाद और नाती लंदन से यहां पहुंचे जिनकी आरटी-पीसीआर जांच की गई जिसमें वे नेगेटिव पाए गए हैं. भारत ने ब्रिटेन में कोविड-19 के नए प्रकार के उभरने के बाद 23 दिसंबर से वहां से विमानों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है.

वहीं ब्रिटेन से आंध्र प्रदेश में लौटने वाले छह यात्रियों समेत उनके संपर्क में आए चार व्यक्ति अब तक कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. ब्रिटेन से आंध्र प्रदेश में लौटे कुल 1216 यात्रियों में से 1187 की पहचान कर ली गई है और बाकी के 29 यात्रियों का पता लगाने का प्रयास जारी है.

कुल 1162 यात्रियों को क्वॉरंटाइन किया गया है. यहां से लौटे छह यात्री कोरोना की जांच में पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें से दो गुंटूर जिले से हैं और एक-एक क्रमश: गोदावरी, कृष्णा, अनंतपुर और नेल्लोर जिले के रहने वाले हैं.

अधिकारियों ने ब्रिटेन से लौटे यात्रियों के संपर्क में आए 3,282 लोगों की भी पहचान कर ली है और परीक्षण के लिए इनके नमूने भी भेज दिए गए हैं. इनमें से चार अब तक कोरोना पॉजिटिव निकले हैं. इनमें से एक गुंटूर जिले का है, जबकि एक नेल्लोर का रहने वाला है.

अलंकार क्रिएशन और रोटरी क्लब की अनोखी पहल, कानूनी लड़ाई में महिलाओं को मिलेगा सुधा सिंह का साथ

‘नारी तू नारायणी’ के रूप में मानी जाने वाली महिलाओं को आए दिन समाज में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में महिलाओं के सम्मान के लिए अलंकार क्रिएशन और रोटरी क्लब मुंबई द्वारा एक अनोखा अभियान चलाया जा रहा है. महिलाओं को मुफ्त में लीगल एडवाइस देने के लिए अलंकार क्रिएशन की अध्यक्षा सुधा सिंह द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन अंधेरी के डीएन नगर इलाके में किया गया. जहां वरिष्ठ वकील आभा सिंह ने महिलाओं का मार्गदर्शन किया.

अलंकार क्रिएशन द्वारा महिलाओं के सम्मान में लगातार कई अनोखे कार्यक्रम किए जाते हैं. अलंकार क्रिएशन की अध्यक्षा सुधा सिंह द्वारा महिलाओं के साथ साथ नई प्रतिभाओं के सपनों को साकार करने की पूरी कोशिश की जाती है.

महिलाओं को अनेकों प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ऐसे में उनको कोई सही मार्ग नही मिलता है, लेकिन अब महिलाओं को मुफ्त में लीगल सलाह देने का काम सुधा सिंह और उनकी टीम करेगी. महिलाओं के सुख दुख में कंधे से कंधा मिलाकर उनको न्याय दिलाने के लिए इस अनोखे अभियान की शुरुआत की गई है.

वहीं इस कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता आभा सिंह ने महिलाओं से अपील की है कि अगर आप भी ऐसे की समस्या से परेशान हैं तो आइए हमारे इस कार्यक्रम में और आपकी समस्या को दूर करने की पूरी कोशिश और मार्गदर्शन किया जाएगा.

आपको बता दें कि वार्ड क्रमांक 67 की बीजेपी नगरसेविका सुधा सिंह द्वारा अपने एनजीओ अलंकार क्रिएशन के माध्यम से लगातार लोगों की भरसक मदद करने की कोशिश की जाती है. अलंकार क्रिएशन समय-समय पर नई प्रतिभाओं को प्लेटफार्म देने के साथ तमाम सामाजिक कार्यों के द्वारा लोगों को जोड़ने की कोशिश करता है.

Solar Eclipse 2021: साल 2021 में दिखेंगे इतने ग्रहण, पूर्ण चंद्रग्रहण से होगी शुरुआत

साल 2021 में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की चाल दुनियाभर के खगोल प्रेमियों को एक पूर्ण चंद्रग्रहण और एक पूर्ण सूर्यग्रहण समेत ग्रहण के चार रोमांचक दृश्य दिखाएगी. हालांकि, भारत में इनमें से केवल दो खगोलीय घटनाएं देखी जा सकेंगी.

उज्जैन की प्रतिष्ठित शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि अगले साल की इन खगोलीय घटनाओं का सिलसिला 26 मई को लगने वाले पूर्ण चंद्रग्रहण से शुरू होगा.

उन्होंने कहा, “नववर्ष का यह पहला ग्रहण सिक्किम को छोड़कर भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में दिखाई देगा, जहां चंद्रोदय देश के दूसरे इलाकों के मुकाबले जल्दी होता है. इस खगोलीय घटना के वक्त चंद्रमा पृथ्वी की छाया से 101.6 प्रतिशत ढक जाएगा.”

पूर्ण चंद्रग्रहण तब लगता है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और अपने उपग्रह चंद्रमा को अपनी छाया से ढक लेती है. चंद्रमा इस स्थिति में पृथ्वी की ओट में पूरी तरह छिप जाता है और उसपर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती है. इस खगोलीय घटना के वक्त पृथ्वीवासियों को चंद्रमा रक्तिम आभा लिए दिखाई देता है. लिहाजा इसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है.

गुप्त ने भारतीय संदर्भ में की गई कालगणना के हवाले से बताया कि 10 जून को लगने वाला वलयाकार सूर्यग्रहण देश में दिखाई नहीं देगा. इस खगोलीय घटना के वक्त सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाएगा. इस कारण पृथ्वीवासियों को सूर्य “रिंग ऑफ फायर” (आग का चमकदार छल्ला) के रूप में 94.3 प्रतिशत ढका नजर आएगा.

उन्होंने बताया कि 19 नवंबर को लगने वाले आंशिक चंद्रग्रहण को अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ भागों में बेहद कम समय के लिए निहारा जा सकेगा. इस खगोलीय घटना के चरम पर चंद्रमा का 97.9 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढका दिखाई देगा.

तकरीबन दो सदी पुरानी वेधशाला के अधीक्षक ने बताया कि चार दिसंबर को लगने वाले पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा कुछ इस तरह आ जाएगा कि सौरमंडल का मुखिया सूर्य 103.6 प्रतिशत ढका नजर आएगा. हालांकि, वर्ष 2021 के इस अंतिम ग्रहण को भारत में नहीं निहारा जा सकेगा.

समाप्ति की ओर बढ़ रहे वर्ष 2020 में दो सूर्यग्रहण और चार चंद्रग्रहण समेत ग्रहण के छह रोमांचक दृश्य देखे गए.

कोयला खनन में निजी क्षेत्र का प्रवेश, कोल इंडिया की नए क्षेत्रों में कदम रखने की तैयारी

कोरोना वायरस महामारी संकट और इससे निपटने के लिए लोगों को घर से निकलने पर कड़ी सार्वजनिक रोक से कोयला बाजार में मांग वर्ष के दौरान नरम रही. सरकार ने इस दौरान कोयला उत्खनन और विपणन में निजी कंपनियों को प्रवेश देने के लिए 19 कोयला प्रखंडों की नीलामी की.

वर्ष 2020 में देश में कोयले की मांग पिछले वर्ष से पांच प्रतिशत कम रहने का अनुमान है. विश्लेषकों का अनुमान है कि 2021 में इस क्षेत्र में मांग की कमजोरी की चुनौती बनी रहेगी.

बाजार में भविष्य में प्रतिस्पर्धा की स्थिति और स्वच्छ ऊर्जा पर जोर के बीच सरकारी कंपनी सीआईएल कारोबार के विविधीकरण की तैयारी में है.

कोयला सचिव अनिल कुमार जैन ने कहा, ‘‘2021 में हमारा प्रयास होगा कि कोल इंडिया (सीआईएल) कोयला उत्खनन के अलावा दूसरे प्रकार के कारोबार में भी जाए. यह (सीआईएल) कोयला उत्खनन के इतर दूसरे क्षेत्रों में बड़ा निवेश करेगी. इससे कंपनी को खनिज ईंधन के कारोबार की दुनिया से निकलने की तैयारी का अच्छा अवसर मिलेगा.’’

जैन ने कहा कि कोल इंडिया नवीकरणीय ऊर्जा, एल्युमीनियम और स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश करने वाली है. उन्होंने कहा कि सीआईएल ने ढाई लाख करोड़ रुपये की निवेश योजनाएं तैयार कर रखी है. इसमें से एक बड़ा हिस्सा स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी और नए क्षेत्र में जाएगा.

जैन ने 2020 में निजी क्षेत्र को कोयले के वाणिज्यक उत्खनन के लिए कोयला प्रखंडों की नीलामी को 2020 की बड़ी उपलब्धि बताया. इसके लिए जोरदार होड़ लगी.

उन्होंने कहा कि इन 19 कोयला प्रखंडों के चालू होने पर इनसे हर साल सरकार को 7,000 करोड़ रुपये राजस्व मिलने का अनुमान है. साथ ही 69,000 से अधिक लोगों को नौकरी भी मिलेगी.

वैसे सरकार ने कुल 38 प्रखंड निजी क्षेत्र को नीलाम करने के लिए अधिसूचित किए थे. 23 प्रखंडों के लिए कुल 42 कंपनियों ने बोली में हिस्सा लिय. इनमें 40 निजी क्षेत्र की थीं. इन प्रखंडों के लिए कुल 76 बोलियां प्राप्त हुई थीं.

कुछ प्रखंड निजी क्षेत्र में अडाणी, वेदांता, हिंडालको और जिंदल (जिंदल पावर) समूहों की कंपनियों को गए हैं.

कोयले वाणिज्यक उत्खनन में निजी उद्यमियों को प्रवेश देने के लिए कानून में संशोधन किया गया है तथा सरकार ने कारोबार सुगमता और पर्यावरण संरक्षण के नए प्रावधान किए हैं. खनिज कारोबार अनुमति नियमावली 1960 में संशोधन की जरूरत को भी पूरा किया गया.

कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि कंपनी इस वित्त वर्ष में 65-66 करोड़ टन कोयला उत्पादन कर रही है. नवंबर तक 33.4 करोड़ टन उत्पादन हुआ था.

कोयला सचिव जैन ने 2021 की संभावनाओं के बारे में कहा कि कोयला बाजार के लिए नया वर्ष अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति पर निर्भर करेगा।

कोयले का उपभोग 2018 की तुलना में 2020 में सात प्रतिशत यानी 50 करोड़ टन घटने का अनुमान हे। 2019 में वैश्विक मांग 1.8 प्रतिशत घटी थी.

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस का अनुमान है कि 2021 में भारत और चीन सहित एशिया के प्रमुख देशों में कोयले की मांग में सुधार होगा. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) का कहना है कि 2025 तक भारत में कोयले की खपत बढने की सबसे अधिक संभावना है. उसके अनुसार देश में इस्पात , बिजली और सीमेंट की मांग बढने से कोयले की मांग बढ़ेगी. अनुमान है कि 2021 में कोल इंडिया का उत्पादन में 3.8 प्रतिशत बढ़ेगा.

CEBR का दावा- 2025 तक पाचवीं और 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा भारत

भारत 2025 तक ब्रिटेन को पछाड़ कर फिर दुनिया की पाचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 2030 तक तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा.

कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक पायदान नीचे खिसक कर छठे स्थान पर आ गयी है।भारत 2019 में ब्रिटेन से ऊपर निकल कर पाचवे स्थान पर पहुंच गया था.

ब्रिटेन के प्रमुख आर्थिक अनुसंधान संस्थान सेंसटर फार इकोनॉमिक एंड बिजनस रिसर्च (सीईबीआर) की वार्षिक रपट में कहा गया है, ‘भारत महामरी के असर से रास्ते में थोड़ा लड़खड़ा गया है. इसी का परिणाम है कि भारत 2019 में ब्रिटेन से आगे निकलने के बाद इस साल ब्रिटेन से पीछे हो गया है. ब्रिटेन 2024 तक आगे बना रहेगा और उसके बाद भारत आगे निकल जाएगा.’

ऐसा लगता है कि रुपये के कमजोर होने से 2020 में ब्रिटेन इस लिए पुन: भारत से ऊपर आ गया. रपट में अनुमान है कि 2021 में भारत की वृद्धि 9 प्रतिशत और 2022 में 7 प्रतिशत रहेगी.

सीईबीआर का कहना है कि ‘यह स्वाभाविक है कि भारत जैसे जैसे आर्थिक रूप से अधिक विकसित होगा, देश की वृद्धि दर धीमी पड़ेगी और 2035 तक यह 5.8 प्रतिशत पर आ जाएगी.

आर्थिक वृद्धि की इस अनुमानित दिशा के अनुसार अर्थव्यवस्था के आकार में भारत 2025 में ब्रिटेन से ,2027 में जर्मनी से और 2030 में जापान से आगे निकल जाएगा.

संस्थान का अनुमान है कि चीन 2028 में अमेरिका से ऊपर निकल कर विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगा.

संस्थान ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की गति कोविड19 से पहले ही मंद पड़ने लगी थी. 2019 में वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत रह गयी थी जो दस साल की न्यूनतम वृद्धि थी.

Farmers Protest : सशर्त बातचीत के लिए तैयार किसान संगठन, 29 दिसंबर को अगले दौर की बैठक का दिया प्रस्ताव

कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने शनिवार को सरकार के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला किया और अगले दौर की वार्ता के लिए 29 दिसंबर की तारीख का प्रस्ताव दिया है. किसान नेता राकेश टिकैत ने यह जानकारी दी.

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे 40 किसान यूनियनों के मुख्य संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की एक बैठक में यह फैसला किया गया.

भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता टिकैत ने हालांकि कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए तौर-तरीके और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए गारंटी का मुद्दा सरकार के साथ बातचीत के एजेंडे में शामिल होना चाहिए. टिकैत ने कहा, ‘‘ हमने 29 दिसंबर को सरकार के साथ वार्ता करने का फैसला किया है.”

दिल्ली की तीन सीमाओं – सिंघू, टीकरी और गाजीपुर में हजारों किसान लगभग एक महीने से डेरा डाले हुए हैं. वे सितंबर में लागू तीन कृषि कानूनों को पूरी तरह से रद्द करने और एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं.

सरकार ने इन नए कृषि कानूनों को बड़े सुधार के रूप में पेश किया है, जिसका मकसद किसानों की मदद करना है. वहीं, प्रदर्शनकारी किसानों की आशंका है कि इससे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी, जिससे उन्हें बड़े कॉरपोरेटों की दया पर निर्भर रहना पड़ेगा.

Farmers Protest : कृषि कानून के विरोध में RLP अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने एनडीए से तोड़ा नाता

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से शनिवार को नाता तोड़ लिया. आरएलपी के संयोजक एवं नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने शाहजहांपुर में किसान रैली को संबोधित करते हुए यह घोषणा की. बेनीवाल ने केंद्र के तीनों कृषि कानूनों को किसानों के खिलाफ बताया है.

उन्होंने अलवर के शाहजहांपुर में किसान रैली में कहा, ‘‘भारत सरकार द्वारा लाए गए कृषि विरोधी कानूनों के कारण आज आरएलपी राजग गठबंधन से अलग होने की घोषणा करती है.’’ बेनीवाल ने कहा, ‘‘मैं राजग के साथ ‘फेविकोल’ से नहीं चिपका हुआ हूं. आज मैं खुद को राजग से अलग करता हूं.’’

उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘देश के अन्नदाताओं के सम्मान में आज आरएलपी ने राजग से अलग होने का निर्णय लिया है. तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं.’’

उल्‍लेखनीय है कि बेनीवाल ने कृषि कानूनों के विरोध में शुक्रवार को किसानों के समर्थन में दिल्ली कूच का ऐलान किया था. जयपुर-दिल्ली राजमार्ग पर राजस्थान-हरियाणा की सीमा के पास शाहजहांपुर में किसान पिछले 14 दिन से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं.

कृषि कानूनों को लेकर केंद्र में सत्‍तारूढ़ राजग से अलग होने वाली आरएलपी दूसरी पार्टी है. इससे पहले शिरोमणि अकाली दल भी इसी मुद्दे को लेकर राजग से अलग हो चुका है.

बेनीवाल ने इससे पहले 19 दिसंबर को किसान आंदोलन के समर्थन में संसद की तीन समितियों, उद्योग संबंधी स्थायी समिति, याचिका समिति व पेट्रो‍लियम व गैस मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य पद से त्यागपत्र देने की घोषणा की थी और कहा था कि वह 26 दिसंबर दो लाख किसानों के साथ दिल्ली की ओर कूच करेंगे.

गौरतलब है कि आरएलपी व भाजपा ने गत लोकसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था जिसके तहत भाजपा ने राज्य में 25 में से एक सीट आरएलपी को दी थी. इस नागौर सीट से बेनीवाल सांसद चुने गए थे. विधानसभा में आरएलपी के तीन विधायक हैं.

इस बीच, कृ‍षि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन भी और जोर पकड़ गया है. किसान 14 दिन से शाहजहांपुर के पास जयपुर-दिल्‍ली राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर डेरा डाले हुए हैं. अब तक इस मार्ग पर दिल्ली से जयपुर आने वाली लेन खुली थीं लेकिन शनिवार को किसानों ने राजमार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया.

किसानों के आंदोलन को देखते हुए पुलिस व प्रशासन ने इस राजमार्ग पर आ रहे वाहनों को पावटा बानसूर व बहरोड़ खैरथल मार्ग से निकालना शुरू किया है ताकि लोगों को परेशानी न हो.

अलवर की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने कहा, ‘‘राजमार्ग को शनिवार को दोनों तरफ से बंद कर दिया गया. दिल्‍ली से वाहनों को भिवाड़ी-धारूहेड़ा मार्ग पर भेजा जा रहा है. वाहनों के वैकल्पिक मार्गों से संचालन की व्‍यवस्‍था की गई है.’’

मथुरा: ब्रिटेन से आए 14 यात्रियों की हुई पहचान, जांच के बाद आइसोलेशन में भेजे गए 6 लोग

ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन पाए जाने के बाद सतर्क स्वास्थ्य विभाग ने मथुरा आए 14 लोगों की पहचान की है. ये वो लोग हैं जिन्होंने हाल-फिलहाल में ब्रिटेन की यात्रा की है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस काम में खुफिया तंत्र भी मदद कर रहा है.

सूचना के मुताबिक, 14 लोगों में तीन व्यक्ति वापस लौट गए हैं और 6 लोगों की जांच के बाद उन्हें अगले दो हफ्ते के लिए आइसोलेशन में भेज दिया गया है. हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार उनकी रिर्पोट निगेटिव आई है फिर भी ऐहतियात के तौर पर यह निर्णय किया गया है.

सरकारी सूत्रों ने कहा कि हाल ही में विदेश से आए लोगों की दोबारा जांच कराई जा सकती है, स्वास्थ्य विभाग में बाहर से आने वाले लोगों की डेस्क बनाई जा रही है. कोविड-19 जांच, उपचार एवं रोकथाम के लिए बनाई गई त्वरित प्रतिक्रिया टीम (आरआरटी) के प्रभारी डॉ. भूदेव ने बताया,‘‘जिले में 14 ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है जो हाल ही में ब्रिटेन की यात्रा कर लौटे हैं. इनमें 6 लोगों के नमूने लेकर उन्हें पृथकवास में भेज दिया गया है. हालांकि, इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है जबकि तीन वापस ब्रिटेन लौट गए हैं.’’

उन्होंने बताया, ‘‘पांच अन्य लोगों में से दो राजस्थान के टोंक स्थित अपने घर चले गए हैं. शेष तीन में एक का नमूना भेजा गया है जबकि दो की जानकारी नहीं मिल रही है.’’

31 दिसंबर को जारी होगा 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का शेड्यूल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने दी जानकारी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने शनिवार को कहा कि कक्षा दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान 31 दिसंबर को होगा.

उन्होंने ट्वीट किया, ” वर्ष 2021 में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों की परीक्षाएं कब शुरू होंगी, इसकी घोषणा मैं 31 दिसंबर को करूंगा.” इस सप्ताह की शुरुआत में निशंक ने कोविड-19 महामरी की परिस्थितियों के मद्देनजर दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को फरवरी तक आयोजित किए जाने से इंकार किया था.

वैसे आम तौर पर प्रायोगिक परीक्षाएं जनवरी में शुरू हो जाती हैं और लिखित परीक्षाएं फरवरी में होती हैं. रमेश पोखरियाल निशंक ने गत मंगलवार को कहा था कि कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं अगले वर्ष फरवरी तक नहीं होंगी और फरवरी के बाद परीक्षाएं कब कराईं जायेंगी, इस पर विचार विमर्श कर जल्द जानकारी दी जायेगी.

बोर्ड परीक्षा के आयोजन के बारे में डिजिटल माध्यम से शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए निशंक ने कहा था कि जनवरी- फरवरी माह तक बोर्ड परीक्षा कराना संभव नहीं होगा. फरवरी के बाद परीक्षाएं कब कराईं जा सकती हैं, इस पर विभिन्न पक्षकार विचार विशर्म करेंगे और आगे सूचना दी जाएगी.