Home Blog Page 164

विपक्ष पर बरसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,बोले- बेनकाब हो रहे हैं गरीबों की लाश पर राजनीति करने वाले

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गरीबी और गरीबों की लाश पर राजनीति करने वाले कभी गरीबों के हितैषी नहीं हो सकते. ऐसे लोग बेनकाब हो रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को यहां अपने सरकारी आवास पर बांगरमऊ (उन्नाव) विधानसभा उपचुनाव के लिए आयोजित बूथ, सेक्टर और मंडल के पदाधिकारियों की वर्चुअल बैठक को संबोधित कर रहे थे.

बैठक के दौरान सीएम विपक्षी दलों पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि, “इन लोगों ने आजादी के बाद से गरीबों का कभी भला चाहा ही नहीं. इनके लिए गरीब और गरीबी उन्मूलन का नारा सिर्फ वोट बैंक रहा. आज भी इनकी मानसिकता जस की तस है. लिहाजा, गरीबों की लाश पर राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे. ऐसे चेहरे बेनकाब हो रहे हैं. सरकार एक-एक को पहचानकर कर उनसे कानून के अनुसार बेहद सख्ती से पेश आएगी.”

मुख्यमंत्री ने कहा कि, “हमारी सोच बिना भेदभाव के पूरी पारदर्शिता से सबकी तरक्की, सुरक्षा और सुशासन की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई और मार्गदर्शन में लगातार हम ये कर भी रहे हैं. पिछले छह सालों में देश में और करीब साढ़े तीन वषों में उत्तर प्रदेश में हर क्षेत्र (बुनियादी संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, कनेक्टिविटी, निवेश आदि) में अभूतपूर्व विकास हुआ है. इस आमूल-चूल बदलाव से उत्तर प्रदेश के बारे में नजरिया बदला है.”

सीएम ने कहा कि, “हमारे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है और राजनीति सेवा का जरिया. विपक्ष के लिए राजनीति दुकानदारी है. अपनी दुकान चलाने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं. सीएए के विरोध से लेकर हाल की कुछ घटनाएं इसका सबूत हैं. वह हर चीज को जाति, संप्रदाय, मजहब और क्षेत्र के चश्मे से देखते हैं. समाज को बांटकर अपना वोट बैंक बनाए रखने के लिए ये कोई भी हथकंडा अपना सकते हैं. पर इनके मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे.”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, “उन्नाव की धरती का पौराणिक महत्व है. चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारी, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जैसे महान रचनाकार की ये जन्मभूमि है. मां गंगा का सानिध्य गौरव की बात है. ऐसे महान लोगों की धरती का होना और उनसे जुड़ना खुद में गौरव की बात है. संयोग से कुछ दिन पहले उन्नाव दौरे के दौरान कई लोगों से मेरी निजी मुलाकात भी हुई थी.”

प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि, “विकास में बाधक ताकतों को बेनकाब करें. आप जिस विचारधारा से हैं, आप जिस नेतृत्व से प्रेरणा और मार्गदर्शन पाते हैं, उसकी विपक्ष से कोई तुलना नहीं है. आपकी ताकत और एकजुटता के नाते आपकी जीत सुनिश्चत है.”

विशेष विवाह कानून के तहत 30 दिन की नोटिस अवधि: अदालत ने सरकार से जवाब मांगा

0

दिल्ली उच्च न्यायालय ने विशेष विवाह कानून (एसएमए) के तहत विवाहों के लिए आपत्तियां मंगाने को लेकर जारी किए जाने वाले सार्वजनिक नोटिस के प्रावधानों को चुनौती वाली याचिका पर केंद्र और आप सरकार से बुधवार को जवाब मांगा.

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने विधि मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करके उनसे याचिका पर जवाब मांगा. एक अंतरधार्मिक जोड़े की इस याचिका में दावा किया गया है कि 30 दिवसीय नोटिस अवधि लोगों को दूसरे धर्म में विवाह करने से हतोत्साहित करती है.

पीठ ने मामले की आगे सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की.दम्पत्ति की ओर से पेश हुए वकील उत्कर्ष सिंह ने कहा कि समान धर्म के लोगों के बीच विवाह संबंधी ‘पर्सनल कानूनों’ में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

केंद्र सरकार की स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा ने कहा कि गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘धनक फॉर ह्यूमैनिटी’ ने इसी प्रकार की याचिकाएं दायर की हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि इस याचिका के पीछे भी यही एनजीओ है. हालांकि पीठ ने कहा कि याचिका में कानूनी मसलों को उठाया गया है, जिस पर विचार किए जाने की आवश्यकता है. पीठ ने अरोड़ा से कहा कि वह याचिका के जवाब में अपनी आपत्तियों का जिक्र करें.

याचिका में दावा किया गया है कि दोनों में से किसी एक पक्ष के दिमागी रूप से स्वस्थ नहीं होने या विवाह की आयु नहीं होने जैसी उन आपत्तियों ’’का पता किसी सरकारी अस्पताल या किसी तय प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्रों के आधार पर लगाया जा सकता है’’, जो कानून की धारा चार के तहत उठाई जा सकती हैं.

याचिका में कहा गया है कि विवाह पर आपत्ति मंगाने के लिए 30 दिन की नोटिस अवधि याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों पर सीधे हमला है.

इसमें कहा गया है कि किसी पक्ष का कोई जीवित पति या पत्नी होने संबंधी आपत्ति कानून की धारा चार के तहत उठाई जा सकती है, लेकिन एक ही धर्म में विवाह करने पर यह लागू नहीं होता और भेदभावपूर्ण रवैया होने के कारण इसे दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाह के मामलों में ही लागू किया गया है. याचिका में आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिन की नोटिस अवधि के कानून के प्रावधान को अमान्य और असंवैधानिक करार दिए जाने का अनुरोध किया गया है.

याचिका में अनुरोध किया गया है कि केंद्र और दिल्ली सरकार को किसी सरकारी अस्पताल या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्रों के आधार पर आपत्तियों पर फैसला करने का निर्देश दिया जाए. याचिका में 30 दिन की नोटिस अवधि की अनिवार्यता खत्म करने और याचिकाकर्ताओं की शादी का पंजीकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है.

देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 72,049 नए मामले, संक्रमितों की संख्या 67,57,131 हुई

0

देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 72,049 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बुधवार को बढ़कर 67,57,131 हो गई, जिनमें से 57,44,693 लोगों के संक्रमणमुक्त होने के बाद स्वस्थ हुए लोगों की दर 85.02 हो गई. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 67,57,131 हो गई, जबकि 986 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 1,04,555 हो गई.

कोविड-19 से मृत्यु दर 1.55 फीसदी है.आंकड़ों के अनुसार, देश में 9,07,883 लोगों का इलाज चल रहा है, जो कि कुल मामलों का 13.44 फीसदी है.भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के अनुसार छह अक्टूबर तक 8,22,71,654 नमूनों की जांच हुई है और इनमें से मंगलवार को 11,99,857 नमूनों की जांच हुई.

भारत में कोविड-19 के मामले सात अगस्त को 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितम्बर को 40 लाख, 15 सितम्बर को 50 लाख के पार चले गए थे. देश में कोविड-19 के मामले 21 दिन में 10 लाख से 20 के पार हो गए। इसके बाद इसे 30 लाख के पार होने में 16 दिन, 40 लाख के पार होने में 13 दिन, 50 लाख के पार होने में 11 दिन और 60 लाख के पार होने में 12 दिन लगे.

वहीं देश में संक्रमितों की संख्या एक लाख तक पहुंचने में 110 दिन का समय लगा था जबकि 10 लाख पार होने में सिर्फ 59 दिन का समय लगा. पिछले 24 घंटे में 986 लोगों की मौत हुई, जिनमें से महाराष्ट्र में 370, कर्नाटक में 91, तमिलनाडु में 71, पश्चिम बंगाल में 63, उत्तर प्रदेश में 61, दिल्ली में 39, पंजाब में 38, आंध्र प्रदेश में 33, मध्य प्रदेश और केरल में 25-25, छत्तीसगढ़ में 23 और हरियाणा तथा असम में 18-18 लोगों की मौत हुई.

ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में 16-16, राजस्थान में 15, झारखंड और गुजरात में 10-10, उत्तराखंड, तेलंगाना और गोवा में आठ-आठ, हिमाचल प्रदेश में पांच, सिक्किम, पुडुचेरी, मणिपुर और चंडीगढ़ में तीन-तीन, मेघालय, बिहार और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई. वहीं अब तक कुल 1,04,555 लोगों की मौत संक्रमण से हो चुकी है. इनमें से महाराष्ट्र में 38,717, तमिलनाडु में 9,917, कर्नाटक में 9,461, उत्तर प्रदेश में 6,153, आंध्र प्रदेश में 6,052, दिल्ली में 5,581, पश्चिम बंगाल में 5,318, पंजाब में 3,679 और गुजरात में 3,519 लोगों की मौत हुई.

मध्य प्रदेश में 2,488, राजस्थान में 1,574, हरियाणा में 1,509, जम्मू-कश्मीर में 1,268, तेलंगाना में 1,189, छत्तीसगढ़ में 1,104, ओडिशा में 940, बिहार में 925, केरल में 884, असम में 778, झारखंड में 757 और उत्तराखंड में 677 लोगों की मौत हुई.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि संक्रमण से मरनेवाले 70 फीसदी से ज्यादा लोग पहले से ही अन्य बीमारियों से ग्रस्त थे.मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘ हमारे आंकड़ों का मिलना भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद से किया जा रहा है.’’

बिजली का तार टूटने से पावर सप्लाई ठप्प, मुंबई में लोकल ट्रेन सेवाएं बाधित हुई

मुंबई से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित नालासोपारा स्टेशन पर बिजली का एक तार (ओवरहेड वायर) टूट जाने के बाद मंगलवार सुबह पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेन सेवाएं बाधित हो गईं. राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के एक अधिकारी ने बताया कि इस समय मरम्मत का काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि, पालघर जिले के नालासोपारा स्टेशन पर सुबह साढ़े छह बजे के आसपास बिजली का तार टूट गया. जिसके बाद चर्चगेट की ओर जाने वाली फास्ट लाइन पर सेवाएं बाधित हो गईं.

जीआरपी अधिकारी के अनुसार इस तार से ही ट्रेन के संचालन के लिये विद्युत की आपूर्ति होती है. रेलवे के सूत्रों ने बताया कि नालासोपारा में मुंबई जाने वाली लंबी दूरी की एक ट्रेन भी रोकी गई हैं.

इस से अगले कुछ घंटों के लिए लोकल ट्रेनों के देरी से चलने की संभावना है. जिससे यात्री प्रभावित हो सकते हैं. पश्चिमी रेलवे दक्षिण मुंबई के चर्चगेट से पालघर के दहानू स्टेशन तक लोकल ट्रेन चलाता है.

पश्चिमी रेलवे वर्तमान में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आवश्यक सेवाओं के कर्मचारियों और राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 500 विशेष रेल सेवाओं का संचालन कर रहा है. जिनमें यात्रा करने से पहले यात्रियों को कई सुरक्षा नियमों का पालन करना होता है.

Nobel Medicine Prize 2020: Hepatitis C की खोज करने वाले हार्वे जे अल्‍टर, चार्ल्‍स एम राइस और माइकल हॉफटन को मिला मेडिसिन का नोबेल

0

साल 2020 का मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्‍कार (2020 Nobel Prize) की घोषणा कर दी गई है. हेपेटाइटिस सी वायरस (Hepatitis C virus) की खोज करने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक हार्वे जे अल्‍टर (Harvey J Alter), चार्ल्‍स एम राइस (Charles M Rice) और ब्रिटिश वैज्ञानिक माइकल हॉफटन (Michael Houghton) को इस साल मेडिसिन का नोबेल पुरस्‍कार दिया गया है. इन वैज्ञानिकों को हेपेटाइटिस सी वायरस की खोज के लिए संयुक्त रूप से दिया गया है. अल्‍टर और चार्ल्‍स राइस जहां अमेरिका से हैं, वहीं माइकल हॉफटन ब्रिटेन के हैं.

इन वैज्ञानिकों को करीब 11 लाख 20 हजार डॉलर की धनराशि पुरस्कार मिलेगी. यह धनराशि तीनों को समान रूप से वितरित की जाएगी. नोबेल पुरस्‍कार देने वाली संस्‍था ने कहा कि इस साल यह पुरस्‍कार खून से पैदा होने वाले Hepatitis से लड़ाई में योगदान देने के लिए तीनों वैज्ञानिकों को द‍िया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि दुनिया भर में हेपेटाइटिस के 70 मिलियन से अधिक मामले हैं और हर साल 400,000 मौतें होती हैं. संस्‍था ने कहा कि इस Hepatitis से दुनियाभर में बड़ी संख्‍या में लोगों को सिरोसिस और लीवर कैंसर होता है.

आपको बता दें कि यह पुरस्कार नोबेल फाउंडेशन द्वारा दिया जाता है. यह स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बनार्ड नोबेल (Alfred Nobel) की याद में दिया जाता है. Alfred Nobel की राशि स्वीडिश बैंक में जमा है और इस पर जो ब्याज बनता है उससे हर साल नोबेल फाउंडेशन नोबेल पुरस्कार देता है. पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में शांति के लिए दिया गया था.

 

शिरडी वाले साईं बाबा के बारे में क्या ये बातें जानते हैं आप?

दुनिया साईं बाबा को एक योगी, संत और फकीर के तौर पर जानती है. लेकिन साईं बाबा का जन्म कब हुआ था, इसके लेकर कई तरह के मतभेद है लेकिन मान्यताओं के मुताबिक हर साल सितंबर महीने में साईं बाबा का जन्मोत्सव मनाया जाता है.

मान्यता है कि महाराष्ट्र के पथरी में साईं बाबा का जन्म हुआ था और  16 साल की उम्र में साईं बाबा शिरडी पहुंचे थे और कई सालों तक वहां निवास किया. साईं बाबा के चमत्कारों की वजह से लोगों ने उन्हें संत का दर्जा दिया. इन्हीं चमत्कारों के कारण साईं बाबा से लोग जुड़ने लगे और उनके भक्त बनते गए. भक्तों का बाबा पर आज भी अटूट विश्वास देखा जाता है.

माना जाता है कि शिरडी में रहने के बाद साईं कुछ समय के लिए वहां से अचानक से चले गए थे. जब दोबारा कुछ सालों के बाद साईं शिरडी वापस आए तो एक मंदिर के पुजारी ने साईं को देखते ही कहा ‘आओ साईं. इसके बाद से ही शिरडी का फकीर ‘साईं बाबा’ कहा जाने लगा.

आपको बता दें कि  शिरडी आने के बाद साईं जिस नीम के पेड़ के नीचे विश्राम करने के लिए बैठे थे, उसी जगह को आज शिरड़ी साईं धाम में गुरु स्थान के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इस नीम के पेड़ की पत्ती अब काफी मीठी हो गई हैं.

 

पश्चिम बंगाल में पुलिस स्टेशन के पास BJP नेता की गोली मारकर हत्या, राज्यपाल ने सीएम-डीजीपी को भेजा समन

0

उत्तर 24 परगना जिले के टीटागढ़ के पास एक स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता मनीष शुक्ला की रविवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई. घटना स्थानीय पुलिस स्टेशन से मुश्किल से कुछ मीटर की दूरी पर बीटी रोड पर हुई. पुलिस सूत्रों ने कहा कि शुक्ला को पीठ और शरीर के ऊपरी हिस्से में कई बार गोली मारी गई. उन्हें तुरंत ईएम बाईपास पर स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर मोटरसाइकिल पर आए थे और उन्होंने मास्क और हेलमेट लगा रखा था. हमले के दौरान शुक्ला को बचाने के प्रयास में दो अन्य भाजपा कार्यकतार्ओं को भी गोली लगी है. भाजपा की पश्चिम बंगाल यूनिट ने हत्या के विरोध में पहले ही सोमवार को बैरकपुर क्षेत्र में सांकेतिक बंद का आह्वान किया है.

सूत्रों ने कहा कि भाजपा की एक केंद्रीय टीम सोमवार को शुक्ला के आवास पर जाएगी. टीम में महासचिव संजय सिंह, सांसद अर्जुन सिंह, सौमित्र खान, जगन्नाथ सरकार और शंकु देब पांडा शामिल हैं. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस को भी तलब किया है.

राज्यपाल ने रविवार रात को 11.40 ट्वीट किया, “ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल पुलिस डीजीपी को पार्षद मनीष शुक्ला की टीटागढ़ नगर पालिका राजनीतिक पार्टी कार्यालय में हत्या के मद्देनजर बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर कल सुबह 10 बजे समन जारी किया गया है.”

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “हम पुलिस की भूमिका की सीबीआई जांच की मांग करते हैं. अर्जुन सिंह का जीवन भी खतरे में है. ममता बनर्जी आतंक के साथ राज्य पर शासन नहीं कर सकती हैं.”

बैरकपुर में एक लोकप्रिय नेता शुक्ला ने दो साल पहले तृणमूल कांग्रेस से संबंध तोड़ लिए थे. बैरकपुर के भाजपा सांसद अर्जुन सिंह के निकट सहयोगी के रूप में जाने जाने वाले शुक्ला ने बाद में भाजपा का दामन थाम लिया था. भाजपा के बैरकपुर लोकसभा सांसद अर्जुन सिंह ने भी 2018 में तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था.

Big Boss 14 Preview: कंटेस्टेंट्स के टास्क को लेकर आपस में भिड़े सिद्धार्थ शुक्ला और गौहर खान

0
बिग बॉस 14 (Big Boss 14) के घर में पहला दिन काफी नाटकीय था. शो में लड़ाई झगड़ा भी देखने को मिला बीते एपिसोड में आपने देखा कि जैस्मीन भसीन और निक्की तंबोली के बीच बर्तन की सफाई को लेकर झगड़ा हुआ, लेकिन आने वाले एपिसोड में आपको बिग बॉस के घर में और भी बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलेगा यानी शो के दूसरे दिन आपको स्पेशल ऑडियंस यानी सिद्धार्थ शुक्ला और गौहर खान आपस में लड़ते दिखाई देंगे. दरअसल कंटेस्टेंट्स को टास्क देने और उनसे पुराना कराने की वजह से इन दोनों के बीच में यह आपसी लड़ाई होने वाली है. वहीं दूसरी तरफ शो के पहले दिन आपने देखा कि इस शो में कंटेस्टेंट के आपस में चुगली और लड़ाई का सिलसिला भी शुरू हो गया है. यह कुछ कंटेस्टेंट ऐसे भी हैं जो रियल लाइफ में कुछ अलग है. लेकिन बिग बॉस के घर में आने के बाद अपने आप को कुछ अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.
 
View this post on Instagram
 

👉Follow Fast for for biggboss14 updates FOLLOW ME FOR BIGGBOSS14 DAILY UPDATES 👉Follow @biggboss14jasoos 👉Follow @biggboss14jasoos 👉Follow @biggboss14jasoos Follow this page 👉Like 👉Comment 👉Share ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Exclusively on . @biggboss14jasoos Stay tuned  for more updates #BiggBoss #BB14 #biggboss14 #devoleenabhattacharjee #sidharthshukla #dipikakakar #rashmidesai #hinakhan #gauharkhan #salmankhan #shehnazgill #asimriaz #KhatronKeKhiladi #rodiesrevolution #rodies #EijazKhan #JasminBhasin #NishantSinghMalkani #abhinavshukla #NikkiTamboli #ShehzadDeol #rubinadilaik #RahulVaidya #pavitraPunia #SaraGurpal #shardulpandit #shardulpandit #JaanSanu ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ . . . . **FAIR USE** Copyright Disclaimer under section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, education and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. Non-profit, educational or personal use tips the balance in favor of fair Use.

A post shared by BIGGBOSS 14 JASOOS (@biggboss14jasoos) on

इस बारे में शहजाद देओल ने बताया कि सारा गुरपाल जिस तरह से बिहेव कर रही हैं वह वैसी है नहीं दरअसल वह राहुल वैद्य को यह बात बता रहे थे. वहीं दूसरी तरफ निक्की तंबोली भी राहुल वैद्य के कई राज खुल रही है. जैसे वह उन्हें फोन पर वॉइस मैसेज भेजते हैं. यह खुलासा उन्होंने जान कुमार सानू के सामने किया है यानी यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में और भी बड़े धमाके हमें शो में देखने को मिलेंगे.    

Big Boss14 Review: राधे मां ने सिद्धार्थ शुक्ला को गुस्सा कम करने की दी सलाह और करियर में आगे बढ़ने के लिए दिया आशीर्वाद

0
बिग बॉस 14 के पहले ही दिन एपिसोड में राधे मां की एंट्री हुई राधे मां की एंट्री स्पेशल गेस्ट के तौर पर हुई थी यानी वह बिग बॉस के घर में कंटेस्टेंट के तौर पर नहीं आई है जिसके बाद उन्होंने कंटेस्टेंट्स को कई सारी सलाह दी कंटेस्टेंट्स को ब्लेसिंग दी राधे मां की खास ब्लेसिंग पाने वालों में जान कुमार सानू का नाम शामिल था.
वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सिद्धार्थ शुक्ला को भी खास ब्लेसिंग दी ताकि उनका गुस्सा कम हो सके और उनको करियर में आगे और सफलता मिल सके जिसके बाद सिद्धार्थ शुक्ला ने पैर छूकर राधे मां से आशीर्वाद लिया वही बिग बॉस ने भी राधे मां को सेट पर आने के लिए शुक्रिया कहा जिसके बाद राधे मां सेक्सी चली गई.

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘अटल सुरंग’ का उद्घाटन किया, विपक्ष पर रक्षा हितों के साथ समझौते का लगाया आरोप

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं के विकास से जुड़ी परियोजनाओं को नजरअंदाज करने के लिए कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि देश ने लंबे समय तक एक ऐसा दौर भी देखा जब रक्षा हितों के साथ समझौता किया गया.

उन्होंने कहा कि देश की रक्षा जरूरतों और रक्षा हितों का ध्यान रखना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है.प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में 10 हजार फीट की ऊंचाई पर निर्मित ‘‘अटल सुरंग’’ के उद्घाटन के बाद यहां एक समारोह को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं.

मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ने वाली 9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है. सामरिक रूप से महत्वपूर्ण यह सुरंग हिमालय की पीर पंजाल श्रृंखला में औसत समुद्र तल से 10,000 फीट की ऊंचाई पर अति-आधुनिक विशिष्टताओं के साथ बनाई गई है.

मोदी ने कहा कि हमेशा से यहां अवसंरचनाओं को बेहतर बनाने की मांग उठती रही, लेकिन लंबे समय तक देश में सीमा से जुड़ी विकास की परियोजनाएं या तो योजना के स्तर से बाहर ही नहीं निकल सकीं. उन्होंने कहा कि जो (परियोजनाएं) निकली भी वो या तो अटक गईं या फिर लटक गईं और भटक गईं.

अटल सुरंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि साल 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस सुरंग के लिए अप्रोच रोड का शिलान्यास किया था, लेकिन उनकी सरकार जाने के बाद इस काम को भी भुला दिया गया.

उन्होंने कहा, ‘‘हालत ये थी कि साल 2013-14 तक सुरंग के लिए सिर्फ 1300 मीटर का काम हो पाया था. विशेषज्ञ बताते हैं जिस रफ्तार से उस समय अटल सुरंग का काम हो रहा था, उसी रफ्तार से यदि काम होता तो यह 40 साल में जाकर शायद पूरा हो पाता.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि अवसंरचना की इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण में देरी से देश का हर तरह से नुकसान होता है. इससे लोगों को सुविधा मिलने में तो देरी होती ही है, इसका खामियाजा देश को आर्थिक स्तर पर भी उठाना पड़ता है.

उन्होंने कहा, ‘‘अगर उसी रफ्तार से काम चला होता तो ये सुरंग साल 2040 में जाकर पूरा हो पाती. आपकी आज जो उम्र है, उसमें 20 वर्ष और जोड़ लीजिए, तब जाकर लोगों के जीवन में ये दिन आता, उनका सपना पूरा होता.’’

मोदी ने कहा  कि उस वक्त के लिहाज से इसके निर्माण में तीन गुना से अधिक खर्च आया. ‘‘अंदाजा लगाइए जब इसमें 20 साल और लग जाते तो क्या स्थिति होती.’’

उन्होंने सवाल किया, ‘‘लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी के रूप में सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण एयर स्ट्रिप 40-45 साल तक बंद रही. क्या मजबूरी थी, क्या दबाव था. क्यों राजनीतिक इच्छाशक्ति नजर नहीं आई? मैं ऐसे दर्जनों परियोजनाएं बता सकता हूं, जो सामरिक दृष्टि से, सुविधा की दृष्टि से भले ही कितनी महत्वपूर्ण रही हों, लेकिन वर्षों तक नजरअंदाज की गई.’’

इस क्रम में प्रधानमंत्री ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण असम के डिब्रूगढ़ शहर के पास बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने बोगीबील पुल और बिहार में कोसी महासेतु का जिक्र किया और कहा कि 2014 में केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इन परियोजाओं की गति में तेजी लाई गई और उन्हें पूरा किया गया.

उन्होंने कहा, ‘‘देश के हर हिस्से में संपर्क की बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का यही हाल रहा, लेकिन अब स्थिति बदल रही है. इस दिशा में अभूतपूर्व प्रयास किया गया है। सीमा क्षेत्र के विकास के लिए पूरी ताकत लगा दी गई है.’’

उन्होंने दावा किया कि इतने बड़े स्तर पर इन क्षेत्रों में देश में पहले कभी काम नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि पिछले छह सालों में सरकार के द्वारा किए गए कामों का बहुत बड़ा लाभ सामान्य जन के साथ फौजी भाई-बहनों को भी हो रहा है.

उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में भी देश की रक्षा से जुड़े सारे साजों सामान दूसरे छोर पर आसानी से पहुंचाएं जा सके, इसके लिए सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘देश की रक्षा जरूरतों, रक्षा करने वालों की जरूरतों का ध्यान रखना, उनके हितों का ध्यान रखना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनक सरकार के फैसले साक्षी हैं कि जो वह कहती है, करके दिखाती है. उन्होंने कहा, ‘‘देश हित से बड़ा, देश की रक्षा से बड़ा हमारे लिए और कुछ नहीं. लेकिन देश ने लंबे समय तक वो दौर भी देखा है जब देश के रक्षा हितों के साथ समझौता किया गया.’’

उन्होंने कहा कि देश में ही आधुनिक अस्त्र-शस्त्र बने, मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत हथियार बनें, इसके लिए बड़े सुधार किए गए हैं. उन्होंने पिछले छह सालों में देश की सेनाओं की मजबूती के लिए उठाए गए कदमों का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की सेनाओं की आवश्यकताओं के अनुसार साजों सामान जुटाए जा रहे और उत्पादन भी किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘आत्मनिर्भर भारत का आत्मविश्वास जनमानस का हिस्सा बन चुका है.’’

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, थल सेना प्रमुख एम एम नरवणे और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

गौरतलब है कि अटल सुरंग से मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय भी चार से पांच घंटे कम हो जाएगा. अटल सुरंग को अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ प्रतिदिन 3000 कारों और 1500 ट्रकों के यातायात घनत्‍व के लिए डिजाइन किया गया है.

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने रोहतांग दर्रे के नीचे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस सुरंग का निर्माण कराने का निर्णय किया था और सुरंग के दक्षिणी पोर्टल पर संपर्क मार्ग की आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गई थी. मोदी सरकार ने दिसम्बर 2019 में पूर्व प्रधानमंत्री के सम्मान में सुरंग का नाम अटल सुरंग रखने का निर्णय किया था, जिनका निधन पिछले वर्ष हो गया.