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पीरियड्स के दौरान पेट में तेज दर्द और हेवी ब्लीडिंग को ना करें नज़रअंदाज़, तुरंत लें डॉक्टर की सलाह

महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेट में तेज दर्द और हैवी ब्लीडिंग की शिकायत होती है. इस असामान्य स्थिति को मेनोरेजिया कहते हैं. मेनोरेजिया में ब्लीडिंग इतनी तेज होती है कि हर घंटे पैड बदलने की जरूरत महसूस होती है. इसके अलावा मेनोरेजिया में पूरे समय पेट में दर्द रहता है और रोज के काम करने में भी दिक्कत महसूस होती है. आइए जानते हैं इसके लक्षण और बचाव.

मेनोरेजिया में महिलाओं को हर एक घंटे में पैड चेंज करना पड़ता है. रात में सोने के दौरान भी पैड चेंज करने की जरूरत महसूस होती है. कई बार हैवी ब्लीडिंग को रोकने के लिए एक समय में दो पैड लगाने की जरूरत महसूस होती है. दर्द की वजह से कोई भी काम करने में दिक्कत होती है. ब्लीडिंग में खून के थक्के आते हैं. 7 दिनों से ज्यादा हैवी ब्लीडिंग के साथ पीरियड्स चलते हैं. इस दौरान पूरे समय थकान रहती है और सांस लेने में भी दिक्कत होती है. कभी-कभी मेनोपॉज के बाद भी ब्लीडिंग होती है.

मेनोरेजिया से एनीमिया सहित और भी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. एनीमिया की वजह से शरीर में खून की कमी हो जाती है और सासं लेने में दिक्कत महसूस होती है. इसके अलावा मेनोरेजिया से और भी कई गंभीर समस्याएं होती हैं.ऐसे में इसे नज़रअंदाज ना करें और तुरंत ही इसे महिला रोग विशेषज्ञ को दिखाएं यही इस रोग से बचने के लिए बेहतर विकल्प है.

UPSC Prelims 202 : यूपीएससी ने कहा अब एग्जाम टालना असंभव, 30 सितंबर को होगी सुनवाई

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि अब सिविल सर्विल का प्रीलिम्स एग्जाम 2020 को टालना असंभव है क्योंकि इसके लिए सभी लॉजिस्टिक इंतजाम पहले ही किए जा चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट में आज यूपीएससी सिविल सर्विस प्रीलिम्स परीक्षा 2020 को स्थगित करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई थी. यूपीएससी ने शीर्ष अदालत से कहा कि परीक्षा को टालना या स्थगित करना असंभव है, क्योंकि सभी लॉजिस्टिक इंतजामों को पहले ही कर लिया गया है.

जस्टिस एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने यूपीएससी से कहा कि वह इस तथ्य को एफिडेविट में दिखाए और पूरी व्यवस्था का खाका प्रस्तुत करे.

शीर्ष अदालत में यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम को टालने को लेकर याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई हो रही थी और उन्होंने कोविड-19 महामारी का हवाला देते हुए इस एग्जाम को टालने की मांग की थी. बता दें कि यूपीएससी की परीक्षा आगामी 4 अक्टूबर को शेड्यूल्ड है.

20 यूपीएससी सिविल सर्विस अभ्यार्थियों ने इस याचिका को फाइल किया था. वहीं इससे पहले 24 सितंबर यानी बीते गुरुवार को कोर्ट ने एडवोकेट आलोक श्रीवास्तव को याचिका की कॉपी केंद्र और यूपीएससी को देने के लिए कहा था.

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि इस कोरोना संकटकाल में परीक्षा कराना उम्मीदवारों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकती है. जानकारी के लिए बता दें कि 72 शहरों में इस ऑफलाइन परीक्षा को आयोजित किया जा रहा है और इस एग्जाम में 6 लाख उम्मीदवारों के शामिल होने की संभावना है.

 

Bhagat Singh 113th Birth Anniversary: जेल में रहते हुए भी आजाद थे शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, जानिए क्यों तय समय से पहले दी गई थी फांसी

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 में हुआ और 23 मार्च 1931 को भारत मां का यह सपूत देश के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गया. अंग्रेजी हुकूमत को अपने अदम्य साहस से झकझोर देने वाले शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के रग-रग में देशभक्ति और क्रांति थी. वह कहते थे, “राख का हर एक कण, मेरी गर्मी से गतिमान है. मैं एक ऐसा पागल हूं, जो जेल में भी आजाद है.”

भगत सिंह का जन्म पाकिस्तान के एक सिख परिवार में हुआ. जब भगत सिंह पैदा हुए तो पिता किशन सिंह जेल में थे.उनके चाचा अजीत सिंह भी अंग्रेजी सरकार से लोहा ले रहे थे. अंग्रेजी सरकार ने अजीत सिंह पर 22 केस दर्ज किए थे. जिसके बाद उन्हें ईरान जाकर रहना पड़ा. जहां उन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना की और क्रांति का अलख जलाए रखा.

सरदार किशन सिंह और विद्यावती की कोख से जन्में भगत सिंह के दादा अर्जुन सिंह और दादी जयकौर ने उन्हें भाग्य वाला कह कर उनका नाम भगत सिंह रखा. बालक भगत को भाग्य वाला बच्चा इसीलिए माना गया था, क्योंकि उसके जन्म लेने के कुछ समय बाद ही, स्वतंत्रता सेनानी होने के कारण लाहौर जेल में बंद उनके पिता सरदार किशन सिंह को रिहा कर दिया गया और जन्म के तीसरे दिन दोनों चाचाओं को जमानत पर छोड़ दिया गया.

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी वाले दिन रौलट एक्ट के विरोध में देशवासियों की जलियांवाला बाग में सभा हुई. अंग्रेजी हुकूमत को यह बात पसंद नहीं आई और जनरल डायर के क्रूर और दमनकारी आदेशों के चलते निहत्थे लोगों पर अंग्रेजी सैनिकों ने ताबड़बतोड़ गोलियों की बारिश कर दी. इस अत्याचार ने देशभर में क्रांति की आग को और भड़का दिया.

12 साल के भगत सिंह पर इस सामुहिक हत्याकांड का गहरा असर पड़ा. उन्होंने जलियांवाला बाग के रक्त रंजित धरती की कसम खाई कि अंग्रेजी सरकार के खिलाफ वह आजादी का बिगुल फूंकेंगे. उन्होंने लाहौर नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर ‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना कर डाली.

एक वक्त ऐसा भी आया जब भगत सिंह पर घरवालों ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया लेकिन उनके लिए तो आजादी ही उनकी दुल्हन थी. घरवालों के दवाब से परेशान होकर उन्होंने घर भी छोड़ दिया था. उन्होंने घर छोड़कर जाते हुए कहा, ”मेरी जिंदगी बड़े मकसद यानी जिंदगी आजादी-ए-हिन्द के लिए समर्पित कर चुका हूं

इसलिए मेरी जिंदगी में आराम और दुनियावी ख्वाहिशों के लिए कोई जगह नहीं.” जब उन्हें बाद में शादी के लिए दवाब न दिए जाने का आश्वासन मिला तो वो घर लौटे.

अंग्रेजी सरकार के दमनकारी नीतियों के खिलाफ पंजाब केसरी लाला लाजपत राय शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे. तभी पुलिस अधीक्षक स्कॉट और उसके साथियों ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाई. इसमें लाला लाजपत राय बुरी तरह घायल हो गए और अंतत: 17 नवंबर को उनका देहांत हो गया. लाला लाजपत राय के देहांत के बाद आजादी के इस मतवाले ने पहले लाहौर में ‘सांडर्स-वध’ किया और उसके बाद दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में चंद्रशेखर आजाद और पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ बम-विस्फोट कर ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलंदी दी.

शहीद भगत सिंह ने इन सभी कार्यो के लिए वीर सावरकर के क्रांतिदल अभिनव भारत की भी सहायता ली और इसी दल से बम बनाने के गुर सीखे. वीर स्वतंत्रता सेनानी ने अपने दो अन्य साथियों सुखदेव और राजगुरु के साथ मिलकर काकोरी कांड को अंजाम दिया, जिसने अंग्रेजों के दिल में भगत सिंह के नाम का खौफ पैदा कर दिया.

सेंट्रल असेम्बली पर बम फेंके जाने की घटना के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने स्वतंत्रता सेनानियों की धर पकड़ शुरू कर दी. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की गिरफ्तारी हुई. दोनों पर सेंट्रल असेम्बली में बम फेकने को लेकर केस चला. सुखदेव और राजगुरू को भी गिरफ्तार किया गया. 7 अक्टूबर 1930 को फैसला सुनाया गया कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर लटकाया जाए जबकि बटुकेश्वर दत्त को उम्रकैद की सजा हुई.

भगत सिंह को किताब पढ़ने का शौक था. उन्होंने आखिरी वक्त में ‘रिवॉल्युशनरी लेनिन’ नाम की किताब मंगवाई थी. उनके वकील प्राणनाथ मेहता उनसे मिलने पहुंचे. भगत सिंह ने किताब के बारे में पूछा. मेहता ने किताब दी और भगत सिंह फौरन उसे पढ़ने लगे. इसके बाद मेहता ने पूछा आप देश के नाम कोई संदेश देना चाहेंगे. भगत सिंह ने कहा, ”सिर्फ़ दो संदेश है साम्राज्यवाद मुर्दाबाद और ‘इंक़लाब ज़िदाबाद.”

थोड़ी देर बाद भगत सिंह समेत राजगुरु और सुखदेव को फांसी देने के लिए जेल की कोठरी से बाहर लाया गया. आजादी के मतवालों ने मां भारती को प्रणाम किया और आजादी के गीत गाते हुए फंदे पर झूल गए.

 

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बिग बॉस 13 फेम हिमांशी खुराना हुईं कोरोना वायरस से संक्रमित, सोशल मीडिया पर दी जानकारी

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बिग बॉस हिमांशी खुराना कोरोना वायरस से संक्रमित हो गई हैं. हिमांशी हाल ही में किसानों की रैली में शामिल हुईं थी उसके बाद उन्होंने कोरोना टेस्ट करवाया तो वह पॉजिटिव पाई गई हैं. हिमांशी ने अपने संपर्क में आए लोगों से अपना टेस्ट करवाने की सलाह दी है.

हिमांशी खुराना ने पोस्ट में लिखा- मैं आप सभी को बताना चाहती हूं कि मैं पूरी सावधानियां बरतने के बाद कोरोना पॉजिटिव हो गई हूं. जैसा की आप सब जानते हैं मैं दो दिन पहले प्रोटेस्ट में शामिल हुई थी और उस जगह पर बहुत सारे लोग थे तो शाम को शूट पर जाने से पहले मैंने टेस्ट कराने का सोचा.

 

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हिमांशी ने आगे लिखा- मैं अपने संपर्क में आए लोगों से कहना चाहती हूं कि वह अपना टेस्ट करवा लें और प्रोटेस्ट के दौरान पूरी सावधानियां बरतें. यह मेरी सभी से रिक्वेस्ट है कि यह बात ना भूलें की हम लोग महामारी से जूझ रहे हैं.  प्लीज अपना ध्यान रखें.

हिमांशी खुराना ने हाल ही में वीडियो शेयर करके किसान बिल पर अपनी राय साझा की थी.

 

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वर्कफ्रंट की बात करें तो हिमांशी का हाल ही में आसिम रियाज के साथ म्यूजिक वीडियो में नजर आईं थी. आसिम और हिमांशी की जोड़ी फैन्स को बहुत पसंद आई है. दोनों साथ में कई म्यूजिक वीडियो में नजर आ चुके हैं. बिग बॉस 13 में भी दोनों की जोड़ी को बहुत पसंद किया गया था.

 

वास्तु शास्त्र : घर में इस दिशा में रखें धातु की चीजें, करियर, बिजनस और सेहत पर होंगे ये असर

वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे धातु की चीज़ें सही दिशा में रखने के बारे में. वास्तु शास्त्र में हर एक चीज़ को रखने के लिये एक सही दिशा निर्धारित होती है, जिससे उस चीज़ के और उस दिशा के शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं. उसी प्रकार धातु की चीज़ों को रखने के लिये भी एक सही दिशा निर्धारित है.

आपको बता दें वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में धातु की चीज़ें रखने के लिये सबसे सही दिशा पश्चिम और वायव्य कोण, यानी उत्तर-पश्चिम दिशा है. इन दोनों ही दिशाओं में धातु की कोई चीज़ रखना शुभ फलदायी होता है. पश्चिम दिशा में धातु रखने के क्या फायदे हैं, पहले ये मैं आपको बता देता हूं. पश्चिम दिशा में धातु की चीज़ें रखने से सबसे अधिक फायदा घर की छोटी बेटी को होता है.

इससे उनका हर्ष तत्व मजबूत होता है और उनकी खुशी बनी रहती है. साथ ही मुंह से जुड़ी परेशानियां नहीं होती और चेहरे का निखार बना रहता है.

धरती पर 250वां इंसान है कोरोना पॉजिटिव, दुनियाभर में कुल मामलों की संख्या पहुंची 3.24 करोड़ के पार

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पूरी दुनिया में कोविड-19 महामारी (Covid-19) का कहर तेजी से फैल रहा है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक हर 250वां इंसान कोरोना पॉजिटिव है. तो वहीं दूसरी तरफ़ कोरोनावायरस के कुल मामले बढ़कर 3.24 करोड़ पहुंच गए है. जो पृथ्वी की कुल आबादी का 0.4 प्रतिशत है. IANS की खबर के मुताबिक, सितंबर 2020 तक दुनिया की आबादी 7.8 अरब तक पहुंच चुकी है. यह डाटा वल्डरेमीटर की डीटेल जानकारी के आधार पर संयुक्त राष्ट्र के हाल के एक अनुमान पर आधारित है.

दुनिया में एक्टिव केस भी काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. इस सप्ताह यह आंकड़ा 5 लाख तक पहुंच गया. कुल मामलों में से अब 23.3 प्रतिशत केस एक्टिव केस की कैटेगरी में है. तास न्यूज एजेंसी ने शनिवार को जानकारी दी कि बीते सात दिनों में कोरोना से 37,000 लोगों की मौत हो गई. महामारी से मरने वालों की अब कुल संख्या 9,83,000 हो चुकी है.

तेज़ी से बदल रहे हालातों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि सफल वैक्सीन के इस्तेमाल होने तक दुनियाभर में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 20 लाख तक पहुंच सकती है. चीन में कोरोना का पहला मामले आने के नौ महीने बाद कोरोनावायरस से मौतों का आंकड़ा काफी तेजी से 10 लाख के करीब पहुंच रहा है.

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक, अमेरिका दुनिया में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है. यहां इस महामारी से 203,657 लोगों की मौत हो चुकी है और कुल मामले 70,32,524 है. कोरोना से संक्रमितों के मामलों में भारत दूसरे स्थान पर है. यहां अबतक 58,18,570 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि देश में इस महामारी से 92,290 लोगों की मौत हो चुकी है.

अब मिठाई बेचने वालों को बतानी होगी एक्सपायरी डेट, FSSI ने दिया ये निर्देश

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Food Safety and Standards Authority of India -FSSAI) ने मिठाइयों की बिक्री से जुड़ा एक नया नियम बनाया है. इस नए नियम से अब ग्राहकों को बाजार में बिकने वाली खुली मिठाइयों के एक्सपायरी डेट की जानकारी मिल सकेगी यानी अब दुकानदारों को बताना होगा कि ये मिठाई कब तक ताजी रहेगी. ये नियम 1 अक्टूबर से लागू होंगे.जो भी दुकानदार ऐसे नहीं करेगा. उसके खिलाफ खाद्य नियामक (एफएसएसएआई) कार्रवाई करेगा.

FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों (commissioner of food safety) को एक पत्र लिखा है. जिसमें कहा गया है कि सभी के हित में ध्यान रखते हुए यह तय किया गया है कि खुली मिठाइयों के मामले में बिक्री के लिए आउटलेट पर मिठाई रखने वाली ट्रे के साथ 1 अक्टूबर 2020 से अनिवार्य रूप से उत्पाद की बेस्ट बिफोरडेट (Best Before Date) लिखी जाए. पत्र में ये भी कहा गया है कि मिठाई बनाने की तारीख लिखनी होगी, लेकिन यह जरूरी नहीं होगा. यह मिठाई बनाने वाले दुकानदारी की मर्जी है कि वो मिठाई बनाने की तारीख लिखे या फिर नहीं.

FSSAI का कहना है कि विभिन्न प्रकार की मिठाइयों के उपयोग की बेहतर समयसीमा के बारे में उसके वेबसाइट पर भी सांकेतिक रूप से जानकारी दी गई है.अभी तक दुकानदार बिना समय सीमा बताये धड़ल्ले से मिठाइयों को बेचते आ रहे हैं लेकिन अब खाद्य नियामक ने नियमों में बदलाव कर दिया है.

आपको बता दें कि आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले सरसों तेल में किसी दूसरे खाद्य तेलों की मिलावट करने पर एक अक्ट्रबर से पूरी तरह रोक लगा दी गई है. FSSAI ने इस बारे में भी आदेश जारी किया है. FSSAI ने कहा है, भारत में किसी भी अन्य खाद्य तेल के साथ सरसों तेल के मिश्रण पर 1 अक्टूबर, 2020 से पूरी तरह रोक होगी.

आज से कैफियत एक्सप्रेस (Kaifiyat Express) की सेवाएं बहाल, जानिए क्या है ट्रेन का शिड्यूल ?

भारतीय रेलवे ने पुरानी दिल्ली जंक्शन से आजमगढ़ तक और आजमगढ़ से दिल्ली पहुंचने वाली स्पेशल कैफियत एक्सप्रेस (Kaifiyat Express) ट्रेन की सेवाओं को बहाल करने का फैसला लिया है.मिली जानकारी के मुताबिक, यह स्पेशल रेल सर्विस 27 सितंबर की बजाए 28 सितंबर को दिल्ली जंक्शन से और 28 सितंबर की बजाए 29 सितंबर से आजमगढ़ रेलवे स्टेशन से अपनी रेल सर्विस शुरू हो जाएगी.

आपको बता दें कि कैफियत एक्सप्रेस आजमगढ़ से दिल्ली जाने वाली एकमात्र ट्रेन है. मशहूर शायर कैफी आजमी के नाम पर इस ट्रेन को शुरू किया गया था. कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते ये ट्रेन भी सर्विस से बाहर हो गई थी. इस ट्रेन में फस्ट एसी, सेकेंड एसी और 3 एसी क्लास के डिब्बों के साथ ही स्लीपर के डिब्बे भी होंगे. इस ट्रेन में सफर करने के लिए आपको कोविड 19 को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए हेल्थ प्रोटोकॉल का भी पालन करना होगा. इस ट्रेन में सफर के लिए टिकटों की बुकिंग IRCTC की टिकटिंग वेबसाइट irctc.co.in के जरिए या रेलवे के टिकट काउंटर पर जा कर की जा सकेगी.

यह ट्रेन पुरानी दिल्ली से शाम 7.10 बजे चलेगी. जो कि अगले दिन सुबह 9:30  बजे ये ट्रेन आजमगढ़ पहुंच जाएगी. वापसी में ये ट्रेन आजमगढ़ से शाम 4.25 बजे चलेगी जो कि अगले दिन सुबह 07:05 बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाएगी. यह ट्रेन दिल्ली, गाजियाबाद, अलीगढ़, इटावा, कानपुर सेंट्रल, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रुदौली, फैजाबाद, अयोध्या, अकबरपुर, मालीपुर, शाहगंज, खोरासन रोड, सराय मीर और आजमगढ़ स्टेशनों पर रुकेगी.

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बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे JDU में हुए शामिल, यहां से लड़ सकते हैं चुनाव

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बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे (Gupteshwar Pandey) आज यानी रविवार की शाम को नीतीश कुमार की अगुवाई वाली पार्टी जनता दल (Janata Dal (United)- JDU) में  शामिल हो गए. कुछ दिनों पहले उन्होंने अपने पद से VRS  ले लिया था.जिसके बाद सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा जोरो पर थी कि वो जल्द हीं किसी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. रविवार की शाम गुप्तेश्वर पांडे ने पटना में सीएम नीतीश कुमार के आवास पर JDU में शामिल हो गए.

पूर्व DGP गुप्तेशवर पांडे ने कहा कि मैं शुरू से ही उनसे (नीतीश कुमार) प्रभावित रहा हूं जिस तरह से पुलिस को सहयोग करने का काम, आपराधिक और असामाजिक तत्वों के प्रति पूरी सख्ती बरतने के आदेश दिए. किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में किसी भी तरह का हस्तक्षेप उन्हें बर्दाश्त नहीं था ये बात मुझे बहुत अच्छी लगी. पांडे ने ये भी कहा कि आगे मेरे दल के नेताओं का जो आदेश होगा उसके हिसाब से मैं काम करूंगा. मैं दल का अनुशासित सिपाही हूं. चुनाव लड़ना या नहीं लड़ना ये मेरा फैसला नहीं हो सकता.

आपको बता दें कि VRS लेने के बाद वो खुलकर किसी पार्टी में शामिल होने और चुनाव लड़ने का दावा नहीं कर रहे थे लेकिन, पार्टी ज्वाइन करने के बाद अब ये तय माना जा रहा है कि वो आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुप्तेश्वर पांडेय ने शनिवार को JDU के प्रदेश मुख्यालय जाकर सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar)  से मुलाकात की. पांडे की नीतीश कुमार से करीब 30 मिनट तक बातचीत हुई थी. इसके बाद उनके JDU में शामिल होकर तीर चलाने और प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गईं थीं.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पांडे के लिए वाल्मीकी नगर लोकसभा सीट (Valmiki Nagar Lok Sabha seat) से विचार विमर्श किया जा सकता है. इस सीट पर उपचुनाव होने हैं. यहां के सांसद वैद्यनाथ महतो के निधन के कारण यह सीट खाली हुई है.

1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय का कार्यकाल पांच महीने बाद समाप्त होने वाला था. 31 जनवरी 2019 को उन्हें सूबे का डीजीपी बनाया गया था. राज्य के पुलिस महानिदेशक के रूप में गुप्तेश्वर पांडेय का कार्यकाल 28 फरवरी 2021 को पूरा होने वाला था.

बिहार में एकजुट है NDA, मिलकर लड़ेंगे विधानसभा चुनाव- रविशंकर प्रसाद

चुनाव आयोग ने बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को कहा कि बिहार में राजग एकजुट है और गठबंधन के सभी घटक दल साथ मिलकर आसन्न विधानसभा चुनाव लडे़ंगे. हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अगली सरकार में ‘सक्षम बिहार-स्वावलंबी बिहार’ का नारा देते हुए सात निश्चय योजना के पार्ट-2 की घोषणा की थी.

केंद्रीय कानून और न्याय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री रविशंकर ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की ओर से किए गए विकास कार्यों के कारण, राज्य के लोग विधानसभा चुनावों में निर्णायक जनादेश के साथ राजग को आशीर्वाद देंगे.

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को बिहार चुनाव के लिए एक कार्यक्रम की घोषणा की जो तीन चरणों में किया जाएगा. नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया एक अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि मतदान 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को होगा. मतों की गिनती 10 नवंबर को होगी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ लोजपा प्रमुख चिराग पासवान की ओर से की गई टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर रविशंकर ने कहा कि राजग एक है, हम एक साथ चुनाव लड़ेंगे. अगर कुछ समस्या है, तो इसे हल किया जाएगा… बिहार में, हमने 2015 के विधानसभा चुनाव और पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव लड़े हैं.