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Bihar Assembly Election 2020 : आख़िर बिहार को प्लुरल्स क्यों होना चाहिए? 

सवाल यह है कि बिहार के राजनीतिक पटल पर प्लुरल्स क्यों आवश्यक है? प्लुरल्स की प्राथमिकता प्रोग्रेस (विकास) सभी के लिए है. प्लुरल्स प्रोग्रेसिव बिहार के लिए जरूरी है. प्लुरल्स सकारात्मक राजनीति की एक नई दुस्साहसी उड़ान की शुरुआत है. बिहार सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर बहुत नीचे आता है, अब इसे बदलने का वक़्त है. और, फिर इस बात का कोई सबूत भी तो नहीं है कि यह नहीं बदला जा सकता है, उल्टे इस बात का सबूत तो है कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के नेतृत्व से नहीं बदला जा सकता है. अगर बदलना होता तो बदल दिया जाता. अब वक़्त है सकारात्मक राजनीति की अब जरूरत है प्लुरल्स की.

प्लुरल्स महज़ एक राजनीतिक दल नहीं है बल्कि एक राजनीतिक क्रांति है जो इस विचार पर आधारित है कि हर एक ज़िंदगी क़ीमती है और इसे अपने आप में एक अंत की तरह देखा जाना चाहिए न कि महज़ एक साधन मात्र के रूप में. विविधता हमारी ताक़त है और प्रगति तभी सम्भव है जब सब का शासन हो. दशकों तक चली आज़ादी की लड़ाई के पीछे भी यही सोच थी जिसे हमने आख़िरकार उस समय जीत ही लिया. दुर्भाग्यवश, समय के साथ-साथ हम ‘अपने लोगों’ से शासित होने मात्र से ही संतुष्ट होकर थोड़े ढीले पड़ गए. निस्सन्देह, हमारे रंग समान हैं, या हम समान भाषा बोलते हैं, या हमारी तथाकथित ‘पहचान’ एक है, लेकिन क्या सच में ये हमारे ‘अपने लोग’ हैं? यह अतार्किक होगा कि हम उन सत्तानशीनों के साथ ख़ुद को जुड़ा हुआ पाएँ जिनमें शासन करने के सबसे बुनियादी गुण अर्थात ‘सहानुभूति’ तक का अभाव हो.

विगत वर्षों में बिहार की बहुसंख्यक आबादी के लिए प्रगति कर पाना कठिन हो गया है. सरकार सिर्फ़ उन लोगों की सुनती है जिनके ऊँचे सत्ताधारी लोगों से सम्पर्क हैं. राज्य के बाक़ी लोग पीछे छूट गए हैं. जीवन की गुणवत्ता अत्यंत दयनीय है और एक आम आदमी की ज़िंदगी का कोई मोल नहीं है. बड़ी संख्या में लोग मरते हैं, लापता हो जाते हैं, मार दिए जाते हैं या उनके साथ बलात्कार होता है, लेकिन वो समाचार की सुर्ख़ियाँ नहीं बन पाते. और अगर वो समाचार में आ भी जाते हैं तो सरकार अनसुना कर देती है. हाँ, सरकार परवाह करती है जब कुछ बड़ा बाहर आ जाता है. स्पष्ट है कि यह सोचना ख़ुद को गुमराह करना है कि यहाँ हम ‘सभी का शासन’ है और इसलिए सही मायनों में हम सच्ची आज़ादी से बहुत दूर हैं.

पूरी दुनियाँ काफ़ी तेज़ी से प्रगति कर रही है लेकिन बिहार दुनियाँ का सबसे पिछड़ा क्षेत्र बना हुआ है. हम अभी भी देश में भी सबसे निचले रैंक पर हैं. बात सिर्फ़ रैंक की नहीं है, महत्वपूर्ण है कि यह रैंक क्या बताता है. ग़रीबी, कुपोषण, निरक्षरता, बेरोज़गारी, और ऐसे सभी विकास के मापदंड जहाँ तुरंत पॉलिसी एक्शन की ज़रूरत है. ये मापदंड हर दिन बिहार में मौत की संख्या बढा रहे हैं.

आज़ादी के 73 सालों के बाद भी हम लगभग हर साल बाढ़ के कारण विस्थापित होते हैं, जिसे सरकार ने अन्य समस्याओं की तरह ही लाईलाज घोषित कर दिया है. ‘इसे रोका नहीं जा सकता और ये तो होता ही है’, आपदाओं में ऐसे सरकार के स्टैंडर्ड जवाब होते हैं (यदि वे जवाब देने की परवाह करें तो). यहाँ पब्लिक को ग़लत सूचना देकर अपनी नालायकी को छुपाना एक सामान्य सी बात है. सच्चाई क्या है? असली विकास सरकार के एजेंडा में कभी रहा ही नहीं है. आज़ादी के बाद सरकार राज्य की राजधानी तक में एक ड्रेनेज सिस्टम या बुनियादी इंफ़्रास्ट्रक्चर तक नहीं बना पाई, पूरे राज्य की तो बात ही छोड़ दें. मानव सभ्यता ने सी-लिंक, भूकम्परोधी बिल्डिंग और अंडर-सी ट्रेन तक बना लिए हैं और अब चंद्रमा तक जा रहे हैं. अगर 2020 में भी आपको लगता है कि पिछड़ापन ही वास्तविकता है तो मान लीजिए कि वे आपके साथ खेलने में जीत गए हैं. हम बेहतर के लायक़ हैं, और विश्वास कीजिए बेहतरी सम्भव है.
2020 में हमें एक विकल्प चुनना है – प्लुरल्स के साथ आगे बढ़ें और एक प्रगतिशील बिहार का निर्माण करें, या पिछड़े बने रहकर यथास्थिति बनाए रखें जिसमें सिर्फ़ अक्षम राजनेता और अपराधी ही मज़बूत होते रहेंगे. यह चुनाव हमें करना है. यही सच है और बहुत महत्वपूर्ण है.
क्या कारण बहुत स्पष्ट नहीं है? हम सबसे विकसित होने की सम्भावनाओं के बावजूद विश्व के सबसे पिछड़े प्रदेशों में एक हैं.

बिहार में राजनीति की बात करना आपको बहुत मुश्किल में डाल सकती है. लेकिन अगर आप यह नहीं करेंगे तो यह राजनीति बाक़ी सबों को समस्याग्रस्त बनाए रखेगी. अभिजात्य राजनीतिक वर्ग अपने फ़ायदे के लिए यथास्थिति बनाए रखने में सफल रहा है. राजनीति आज वैसी सभी चीज़ों का प्रतिनिधित्व करती है जिनसे एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति दूर रहना चाहेगा, और प्लुरल्स कोई अपवाद नहीं है. लेकिन यह वह राजनीति नहीं है जैसा इसे होना था. राजनीति भ्रष्टाचार, जोड़-तोड़ और धोखाधड़ी का कोई पर्याय नहीं है बल्कि सैद्धांतिक रूप से इसका मतलब सक्षम तरीक़े से उपलब्ध संसाधनों का पुनर्वितरण है. राजनेताओं ने हमारी राजनीति की समझ को इतना तोड़-मरोड़ दिया है कि यह विश्वास करना असम्भव हो गया है कि इससे कुछ भला हो सकता है या समाज के लिए बोलने वाले किसी व्यक्ति पर भरोसा किया जा सकता है – ‘यह हो ही नहीं सकता और ज़रूर इसका कुछ निहित स्वार्थ है’. नहीं? यह सच है कि राजनेताओं पर विश्वास न करने के लिए हमें गुनहगार नहीं माना जा सकता क्योंकि स्वतंत्रता के बाद उन सबों ने हमें असफल ही साबित किया है. लेकिन हम पर हाशिए पर बने रहने और सिर्फ़ अपने ड्रॉइंग रूम में या हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर राजनीति की सिर्फ़ बातें करते रहने का इल्ज़ाम ज़रूर है. हममें से ज़्यादातर तो वोट भी नहीं करते. जब हम लोग बड़े हो रहे हो रहे थे तो हमें वोट करने के बारे में सिखाने की ज़रूरत नहीं समझी गई क्योंकि यह कोई प्राथमिकता नहीं थी. और यही कारण है कि नेता लोग हमसे जीतते रहे हैं. हम पीड़ित लोगों से सहानुभूति रखते हैं और सोचते हैं कि हमें वैसी स्थिति में न जीना पड़े. लेकिन सही मायनों में हम वैसी स्थिति में हमेशा बने हुए हैं. हमारी मानसिक बनावट ऐसी हो गई है कि हम नज़र चुराते हैं, या मान चुके हैं कि चीज़ें ऐसी ही रहेंगी या कि हम इसके लिए कुछ नहीं कर सकते. आज जब यह लेख लिखा जा रहा है तो बिहार में बाढ़ और कोरोना की समस्या विकराल है. कई लोगों की जानें भी गई. हम सिर्फ़ प्रकृति की कृपा पर ही बचे हुए हैं न कि सरकार के प्रयासों से.

बिहार हर साल बाढ़ में डूबता है. आज जो हम भुगत रहे हैं, कोसी क्षेत्र के हमारे भाई-बहन साल-दर-साल वो झेलते रहे हैं. अगर बिहार के कम पीड़ित जिलों के हम निवासियों ने सरकार को तब से प्रश्न किया होता तो शायद आज हमें यह नहीं देखना पड़ता. साफ़ है कि हम तभी तक सुरक्षित हैं जब तक हमारी बारी नहीं आ जाती. हमारी वर्तमान सरकार और ‘हम जनता’ दोनों के पास पंद्रह साल थे इसके बारे में कुछ करने के लिए. यह एक लम्बा समय था जिसमें कुछ हो न सका. लेकिन अब अपने भविष्य और भावी पीढ़ियों के लिए ऐसा करना नैतिक रूप से अनिवार्य हो गया है. प्लुरल्स बिहार को अपने जीवन-काल में ही विकसित देखना चाहता है और बिहार के लिए देश में वो सम्मान दिलाना चाहता है जिसका वो हक़दार है.

पूरी दुनिया कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है. पॉलिसी के निर्माण के लिए विभिन्न विषयों की योग्यता एक अहम भूमिका रखती है ताकि पॉलिसी साक्ष्य और गहन विश्लेषण पर आधारित हो. दुनिया भर की सरकारें पॉलिसी के असर को उसे लागू करने से पहले और बाद में गहनता से अध्ययन करती हैं क्योंकि पब्लिक और पब्लिक के पैसे दोनों का बहुत महत्व है और इसलिए दूसरी जगहों पर पब्लिक भी यह सुनिश्चित करती है कि सरकारें ऐसा करें. पुनर्वितरण (रीडिस्ट्रिब्यूशन) किसी भी पब्लिक पॉलिसी के केंद्र में होती है. बिहार की मुख्य समस्या फ़ंड की नहीं है बल्कि फ़ंड के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और अपने लोगों को ख़ुश करने की रही है. हमारे पास सक्षम संस्थाओं तथा आधारभूत संरचनाओं का अभाव रहा है और निर्णय राजनीतिक वर्ग की मनमर्ज़ी से किए जाते हैं. उदाहरण के लिए, वर्तमान सरकार एक दिन जगी और उसने म्यूज़ीयम बनाने की सोची और बना भी डाला।.वह पैसा जिसे तत्काल किफ़ायती आवास, प्राथमिक शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं या कृषि आधारित उद्योगों के लिए उपयोग किया जा सकता था, उसे एक बिल्डिंग बनाने के लिए ख़र्च किया और ऐसा करके भी सरकार बच निकलती है क्योंकि वास्तव में कोई उनके कार्यकलाप पर पूछने वाला ही नहीं है. यह बात रोचक है कि बिहार का राजनीतिक वर्ग बिना मुद्दों की बारीकी समझे या उन्हें सुलझाने की समझ रखे ग़रीबी, न्याय, सुशासन और विकास जैसे शब्दों को अपने भाषणों में उछालता रहा है. पुराने राजनेताओं के कारण विकास का हमारा मापदंड इतना कम रहा है कि सरकार अगर नहीं के बराबर भी कुछ करती है, तो हमने ख़ुश रहना सीख लिया है. हमने वर्तमान सरकार को प्रश्न करना बंद कर दिया है और ख़ुद को किसी तरह समझा लिया है कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है.

बिहार की वर्तमान दशा को कोई अनजान या असहाय व्यक्ति ही बर्दाश्त कर सकता है. आप जहाँ भी क़दम रखें वहाँ अराजकता ही है. मंत्री और राजनेता न सिर्फ़ अक्षम हैं बल्कि नैतिक रूप से भ्रष्ट भी हैं. मुज़फ़्फ़रपुर में सैकड़ों बच्चों की मृत्यु और बिहार की विनाशकारी बाढ़ के बाद भी सरकार में इतना दुस्साहस था कि उन्होंने इस नारे के साथ राजनीतिक अभियान शुरू किया कि “ठीके है” (सब कुछ बढ़िया है). यह अस्वीकार्य दुस्साहस इस मज़बूत विश्वास से आता है कि अधिकतर पीड़ित लोगों के पास बोलने के लिए मंच नहीं है या जो लोग सरकार को प्रश्न कर सकते हैं उन्हें राजनीति में रूचि नहीं है – वे वोट ही नहीं करेंगे और चुनाव लड़ने का तो सवाल ही नहीं है. सच में, वे ग़लत भी तो नहीं सोच रहे न! वैसे अधिकतर लोग जिन्हें जब पूरी तरह नज़रंदाज़ कर दिया जाता है और जिनके पास बोलने का कोई मंच नहीं होता, दूसरे लोग इससे मुँह चुरा लेते हैं. और इसी लिए यह इस ‘क्यों’ का जवाब है कि अब समय आ गया है कि घमंड और अन्याय को पराजित करने के लिए अनसुनी आवाज़ का प्रतिनिधित्व हो.

हम नाराज़ होते हैं जब हमारे अपने देशवासी हमें हमारे नेताओं के कारण एक ख़ास खाँचे में रख कर देखते हैं. हमारी प्रायः यह प्रतिक्रिया होती है कि कोई बिहार की परवाह नहीं करता. लेकिन बिहार हमारी भी तो ज़िम्मेदारी है. हम विकास की अपेक्षा कैसे रख सकते हैं जब हम इसकी माँग न करें. और कोई बिहार की परवाह क्यों करे जब हमें न हो. अब समय आ गया है कि हम आत्मनिर्भर प्रगतिशील राज्य बनने की बागडोर अपने हाथों में लें, सिर्फ़ राजनीतिक नारे के लिए नहीं बल्कि सच्चाई में. प्लुरल (अनेकांत) बनने के लिए पहला क़दम है स्वशासन की माँग करना. बिहार अपराधियों, नालायक़ नेताओं या मुट्ठी भर समृद्ध लोगों के राजनीतिक वर्ग की जागीर नहीं है. यह हमारा भी है, हम टैक्स दाता जो उस राजनीतिक वर्ग के मालिक हैं. वे और उनकी बंगलों, गाड़ियों और बॉडीगार्डों वाली विलासी ज़िंदगी हमारी वजह से है. हमने अपना धन राजनीतिक वर्ग को हमारे लिए काम करने के लिए दिया है, इसलिए अब समय आ गया है कि वे अपनी नालायकी के लिए स्पष्टीकरण दें.

बिहार के पास विश्व की सबसे उपजाऊ भूमि है, एक नौजवान मेहनती कार्यबल है और इसलिए एक सही पब्लिक पॉलिसी के साथ यह पिछड़ेपन को आसानी से पराजित कर सकता है. तब यह अभी तक क्यों नहीं हो पाया? तब क्यों यह कार्यबल अभी भी रोज़गार की तलाश में है या अशोभनीय वेतन पर खटने के लिए विवश है? हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया है कि बदलाव का पहला क़दम है – यथास्थितिवाद को चुनौती देना. यही वह विचारधारा है जिसका प्लुरल (अनेकांत) प्रतिनिधित्व करता है. अब वह समय है कि हम, प्लुरल की आर्मी, एक मज़बूत, सक्षम विपक्ष बन कर सरकार को प्रश्न करें और प्रगति की माँग करें. इस तेज़ी से बदलते विश्व में हम वहीं नहीं रूक रह सकते जहाँ हम अभी ठहरे हुए हैं. हमने शुरुआत कर दी है. और आप या तो प्लुरल हैं या अपने भविष्य के विरूद्ध हैं. तीसरा कोई विकल्प नहीं है.
हम में से कुछ अक्सर कहते हैं ” कृपया, मुझे राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है.” दुर्भाग्यवश, हम जितना अनुमान लगाते हैं राजनीति में उससे कंही अधिक ताकत है. यह हमें बर्बाद भी कर सकती है या हमारे लिए एक बेहतरीन भविष्य भी बना सकती है. यह मानना बचपना होगा अगर हम समझें कि हमारे पास राजनीति में रुचि न रखने का भी कोई विकल्प है. राजनीति नीति का निर्माण है, अवसरों तक पहुंचने का एक रास्ता है. एक अच्छी नीति का मतलब एक अच्छा भविष्य है. राजनीति को नियंत्रित करने में रुचि लें, वरना यह आपको नियंत्रित करती रहेगी.

इसी बिहार ने राजकुमार सिद्दार्थ को गौतम बुद्ब बनाया था, इसी बिहार की धरती ने मोहनदास गांधी को महात्मा बनाया था, इसी धरती ने जयप्रकाश नारायण को लोकनायक बनाया था. आज बिहार उस मोड़ खड़ा है जंहा बिहारियों को प्लुरल्स के साथ खड़ा होकर विकसित बिहार के सपने को साकार करना होगा ताकि इतिहास इस परिवर्तन को बिहारी समाज के के विजय के रूप में दर्ज कर सके.
प्लुरल्स उनके लिए है जो बिहार से प्रेम करते हैं.

उत्तर प्रदेश : होम आइसोलेशन को योगी सरकार की मंजूरी, कोरोना मरीज घर पर रहकर करा सकेंगे इलाज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि ऐसे लोग जिनमें कोविड-19 के लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं वे अनजाने भय से अपनी बीमारी के छुपा रहे हैं जिससे अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि लोगों की इस मनोवृत्ति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तय किया है कि ऐसे व्यक्ति और उसके परिवार को तय प्रोटोकॉल के तहत घर में ही पृथक-वास में रहने की अनुमति दी जाएगी.

मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य में कोविड-19 मरीजों के लिए पर्याप्त संख्या में अस्पतालों में बिस्तर उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी मनोवृत्ति, उनके भय को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. अनलॉक 2.0 की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा, ”इस व्यवस्था को लागू करने के साथ-साथ लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव और उससे जुड़ी अन्य जानकारियां दी जाएं. लोगों को एहतियाती उपायों और अन्य बातों के बारे में जागरुक किया जाए ताकि उनका भय मिटे.”

उन्होंने कहा कि व्यापक जागरुकता अभियान चलाया जाए, इसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया सहित बैनर, होर्डिंग, पोस्टर तथा पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग किया जाए. उन्होंने अनिवार्य रूप से मास्क के उपयोग और दो गज की दूरी के नियम का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना आवश्यक ह. उन्होंने कहा कि लोगों को ‘आरोग्य सेतु’ ऐप तथा ‘आयुष कवच-कोविड’ ऐप को डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझाया जाए कि ‘आयुष कवच-कोविड’ ऐप में दी गई जानकारी की मदद से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है

मुख्यमंत्री ने कहा कि घर-घर जाकर सर्वेक्षण करना इस बीमारी से उन्मूलन के लिए आवश्यक प्रक्रिया है, इससे कोविड-19 के रोगियों को चिह्नित करने में मदद मिल रही है. उन्होंने सर्वेक्षण जारी करने का निर्देश देते हुए कहा कि इस दौरान अगर किसी व्यक्ति के संक्रमित होने का जरा सा भी संदेह हो तो उसकी तुरंत त्वरित एंटीजन जांच करायी जाए.

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कोविड-19 से होने वाली मौतों की संख्या में प्रभावी रूप से कमी लाने के लिए सभी मिलकर काम करें. उन्होंने कहा कि कोविड अस्पतालों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं.

उन्होंने कहा, ‘‘एल-1 कोविड चिकित्सालय में ऑक्सीजन तथा एल-2 कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन के साथ वेंटिलेटर की व्यवस्था जरुरत हो.’’उन्होंने कहा कि कोविड और गैर कोविड अस्पतालों तथा मरीजों के लिए अलग-अलग एम्बुलेंस की व्यवस्था हो ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम रहे. उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सक नियमित रूप से मरीजों की जांच करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि संक्रमण से चिकित्साकर्मियों का बचाव सुनिश्चित करने के लिए उन्हें लगातार नए तरीकों और उपायों का प्रशिक्षण दिया जाए.

राहुल गांधी पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का पलटवार, कहा- पीएम मोदी को बर्बाद करने में लगा है एक वंश

बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला करते हुए सोमवार को कहा कि वह ‘तथ्यों में कमजोर’ और ‘कीचड़ उछालने में मजबूत’ बयान देकर विदेश नीति के मुद्दों का राजनीतिकरण करने का प्रयास करते हैं.

जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि एक वंश वर्षों से प्रधानमंत्री को बर्बाद करने की कोशिश करता आ रहा है. नड्डा की यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी के उस बयान के बाद आई जिसमें उन्होंने लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध की पृष्ठभूमि में दावा किया कि यह सीमा विवाद से जुड़ा एक साधारण मामला भर नहीं है बल्कि प्रधानमंत्री की ‘56 इंच वाली छवि’ पर हमले की चीन की साजिश है.

बीजेपी अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा, ‘‘चाहे वह डोकलाम का मामला हो या अभी का, हाल के वर्षों में राहुलजी भारतीय सशस्त्र बलों पर विश्वास करने की बजाय चीन की ओर से दी गई जानकारी में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं. क्यों एक परिवार भारत को कमजोर और चीन को मजबूत देखना चाहता है. कांग्रेस में भी कई नेता एक वंश के इस छल को नापसंद करते हैं.’’

राहुल गांधी की ओर से सोमवार को लद्दाख गतिरोध पर जारी ताजा वीडियो को खुद को पुनः स्थापित करने का उनका असफल प्रयास करार देते हुए नड्डा ने कहा कि हमेशा की तरह इस बार भी वे तथ्यों के मामले में कमजोर और कीचड़ उछालने के अपने प्रयास में मजबूत दिखे.

नड्डा ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ‘‘रक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों के राजनीतिकरण का प्रयास एक वंश की 1962 में उनके द्वारा किए गए पूर्व के पापों से हाथ धोने और भारत को कमजोर करने की हताशा को दर्शाता है.’’

उन्होंने आरोप लगाया कि 1950 के दशक से ही चीन ने ‘एक वंश में रणनीतिक निवेश किया है जिसका उसे बड़ा लाभांश भी मिला है. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप चीन ने कांग्रेस-नीत संप्रग की सरकार के कार्यकाल में जमीन पर कब्जा किया.

मोदी की आलोचना पर पलटवार करते हुए नड्डा ने कहा, ‘‘सालों से एक परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बबार्द करने की कोशिश करता रहा है. उनके लिए दुखद यह है कि प्रधानमंत्री मोदी का 130 करोड़ भारतीय जनता से गहरा जुड़ाव है. वे उनके लिए जीते हैं और काम करते हैं. जो उन्हें बर्बाद करना चाहते हैं वे खुद अपनी ही पार्टी को तबाह कर देंगे.’’

उत्तर प्रदेश : देवरिया में वार्ड ब्वॉय की शर्मनाक हरकत, 30 रुपये ना देने पर मासूम को खींचना पड़ा स्ट्रेचर

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक शर्मनाक घटना सामने आई है. जहां अस्पताल में वॉर्ड ब्वाय को रिश्वत ना देने पर 6 साल के मासूम को अपने नाना को ले जाने के लिए स्ट्रेचर पर धक्का लगाना पड़ा. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही अस्पताल  प्रशासन ने आरोपी वार्ड ब्वॉय को हटा दिया है.

करीब 8 सेकेंड के इस वीडियो में 6 साल का बच्चा एक स्ट्रेचर को पीछे से धक्का दे रहा है, जबकि आगे से उसकी मां स्ट्रेचर खींच रही है. आपको बतादें कि देवरिया के बरहज इलाके के गौरा गांव के छेदी यादव को पहले चोट लगने के कारण जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती कराया गया था. छेदी यादव की पत्नी पार्वती और बेटी बिंदू उसकी तीमारदारी में लगी थीं.

बिंदू का आरोप है कि वार्ड ब्वॉय हर बार पिता की मरहम-पट्टी करवाने के लिये स्ट्रेचर पर ले जाने के एवज में 30 रुपये रिश्वत मांगता था. बिंदू ने कहा कि रुपये देने से मना करने पर वार्ड ब्वॉय ने मेरे पिता को ड्रेसिंग के लिये ले जाने से इनकार कर दिया. इस पर मैं खुद उनका स्ट्रेचर खींचकर डॉक्टर के पास ले गई. इस दौरान मेरे 6 साल के बेटे शिवम ने पीछे से स्ट्रेचर को धक्का लगाया.

वीडियो वायरल होने के बाद जिला अधिकारी अमित किशोर सोमवार को अस्पताल पहुंचे. डीएम के निर्देश पर आरोपी वार्ड ब्वॉय को ड्यूटी से हटा दिया गया. इसके अलावा उन्होंने उप जिलाधिकारी-सदर और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की संयुक्त जांच टीम गठित कर उसे जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा है.

अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा, BJP पर लगाया ये गंभीर आरोप

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Rajasthan Chief Minister Ashok Gehlot) ने सचिन पायलट (Sachin Pilot) आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि उन्होंने कांग्रेस (Congress) की पीठ में छुपो घोंपने का काम किया है कांग्रेस ने काफ़ी काम उम्र में उन्हें बहुत कुछ दिया था.

अशोक गहलोत ने यह भी कहा कि हमने कभी सचिन पायलट पर सवाल नहीं किया, सात सालों में राजस्थान ही ऐसा राज्य है जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने की मांग नहीं की गई. हम जानते थे कि वो निकम्मे थे, नकारा थे लेकिन मैं यहां बैंगन बेचने नहीं आया हूं, मुख्यमंत्री बनकर आया हूं. हम नहीं चाहते हैं कि उनके खिलाफ कोई कुछ बोले, सभी ने उनको सम्मान दिया है.

अशोक गहलोत यहीं नहीं रुके उन्होंने ये भी बताया कि ये जो खेल अभी हुआ है, वो दस मार्च को होना था. 10 मार्च को मानेसर गाड़ी रवाना हुई थी, लेकिन तब हमने उस मामले को सभी के सामने लाए. अशोक गहलोत ने कहा कि वो कांग्रेस का अध्यक्ष बनना चाहते थे, बड़े बड़े कॉरपोरेट उनकी फंडिंग कर रहे हैं. बीजेपी (BJP) की ओर से फंडिंग की जा रही है. वहीं मुख्यमंत्री के क़रीबियों पर की जा रही छापेमारी को लेकर उन्होंने कहा कि मुझे दो दिन पहले ही पता लग गया था कि मेरे करीबियों के छापे पड़ेंगे.

राहुल गांधी : 2426 कम्पनियों की लूट, क्या दोषियों को सज़ा देगी सरकार ?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ( Former Congress President Rahul Gandhi) ने आरोप लगाया कि 2,426 कंपनियों ने लोगों की बचत के 1.47 लाख करोड़ रुपए बैंकों से ‘लूट’ लिए. इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार दोषियों को सजा देने के लिए इसकी जांच कराएगी? राहुल गांधी ने बिना विवरण दिए रविवार (19 जुलाई, 2020) को ट्वीट कर कहा, ‘2,426 कंपनियों ने लोगों की बचत के 1.47 लाख करोड़ रुपए बैंकों से लूट लिए. क्या ये सरकार इस लूट की तहकीकात करके दोषियों को सजा देगी?’उन्होंने कहा, ‘या इन्हें भी नीरव मोदी (Nirav Modi) और ललित मोदी (Lalit Modi) जैसे फरार होने देगी?

गांधी का हमला उन मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने 2,426 ऐसे खातों की सूची जारी की है जो ‘जानबूझ कर कर्ज नहीं चुकाने’ वाली श्रेणी में हैं और इनमें बैंकों का 1,47,350 करोड़ रुपए बकाया है. कांग्रेस नेता के ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स भी जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. इसके अलावा एक वीडियो सन्देश में राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर हमला बोलते हुए कहा है कि वह चीन के दबाव में आ गए हैं. राहुल ने कहा कि चीन जानता है कि मोदी को अपनी फर्जी छप्पन इंची छवि को बचाने की फिक्र ज्यादा है और पड़ोसी देश इसी का फायदा उठा रहा है.

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव (India-China border dispute) के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर (Rahul Gandhi attacks PM Modi) बेहद तल्ख हमला बोला है. राहुल ने कहा कि पीएम मोदी की मजबूत नेता की गढ़ी गई ‘झूठी छवि’ कभी उनकी सबसे बड़ी ताकत थी लेकिन आज यही भारत की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है. राहुल ने कहा कि पीएम को बस अपनी छप्पन इंची छवि की फिक्र है और चीन इसी का फायदा उठा रहा है.

Bihar : प्राकृतिक झीलों को मौत के मुंह में ढकेल “जल जीवन हरियाली योजना” का उत्सव मना रही है सरकार, प्लुरल्स ने दिया संरक्षण का ब्लूप्रिंट

‘जब तक जल और हरियाली है तभी तक जीवन सुरक्षित है’ का दावा करने वाली बिहार सरकार (Bihar Government) ने एशिया (Asia) में ताजे पानी की सबसे बड़ी गोखुर झील (Gokhur Jheel) और आर्द्रभूमि क्षेत्र वाले कांवर झील (Kanwar Lake) को सरकारी उपेक्षा वाली धीमा जहर देकर मौत की तरफ धकेल दिया. जो अपनी आखिरी सांसे गिन रहा है. बिहार सरकार ऐसे प्राकृतिक धरोहरों के कब्र पर 24524 करोड़ के जल जीवन हरियाली योजना का उत्सव मना रही है.

प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्मम प्रिया चौधरी (Plurals Party President Pushpam Priya Choudhary) ने बिहार सरकार को आड़े हाथों लेते हुए लिखा “पूरे बिहार में हर जगह यही देखा कि आपकी 25524 करोड़ की जल-जीवन-हरियाली परियोजना के नाम पर ठेकेदारी वाले कृत्रिम तालाब खुद रहे हैं! लेकिन साहब, यहाँ तो पूरी की पूरी झील मरी जा रही है! एशिया की सबसे बड़ी गोखुर झील! यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO World Heritage) भरतपुर वेटलैंड (Bharatpur wetland) से भी तीन गुना बड़ी झील! डॉक्टर सलीम अली (Dr. Salim Ali) के पक्षी विज्ञान की ऐतिहासिक प्रयोगशाला! सैकड़ों दुर्लभ प्रवासी पक्षियों, देशी पक्षियों, अनगिनत जीवों और पौधों का अद्भुत स्वर्ग! सब आज सर्वनाश है. 1989 में 15000 एकड़ क्षेत्र को वेटलैंड और बर्ड सैंकचुअरी नोटिफ़ाई किया जाता है और तब से लेकर आज तक 30 साल में पूरा वेटलैंड सिकुड़ कर 5000 एकड़ भी नहीं रह जाता है, पानी और पक्षी तो कब के उड़ गए! मछुआरों की आजीविका मछली गई, सो अलग! किसान भी खेती करके राजा नहीं हो गए, संघर्ष ही कर रहे!”

पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिहार सरकार के नीति निर्धारकों को नीति निर्माण के दिशा में चुनौती देते हुए कावर झील के संरक्षण और संवर्धन हेतु एक ब्लूप्रिंट जारी किया है और चुनौती देते हुए कहा “चलिए अब आपको पॉलिसी-मेकिंग सिखाते हैं और एक शर्त लगाते हैं! आपके जल-जीवन-हरियाली बजट के 20% का एक “कावर रेजुवनेशन प्रॉजेक्ट (Kanwar Rejuvenation Project)” बनाते हैं, हुए कुल 5000 करोड़! उससे 2400 करोड़ में कावर और उसके कैनाल का कम्प्लीट रेस्टोरेशन और बर्ड सैंकचुअरी डेवेलपमेंट, 1000 करोड़ में बेगुसराय (Begusarai) में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट (International Airport) और हॉस्पिटैलिटी (Hospitality) एंड टुरिज़म इन्फ़्रास्ट्रक्चर (Tourism Infrastructure) के लिए पीपीपी सीड कैपिटल (PPP Seed Capital), 500 करोड़ “नेबरहुड ऑर्गैनिक एग्रीकल्चर एंड फार्मर फ़ंड (Neighbourhood Organic Agriculture and Farmers Fund) ” के लिए, 400 करोड़ “मंझौल ब्लॉक नेबरहुड रुरल डेवेलपमेंट (Manjhaul Block Neighbourhood Rural Development)” के लिए, 400 करोड़ “फ़िशरीज़ एंड कम्यूनिटी कैपिटल फ़ंड (Fisheries and Community Capital Fund)” के लिए और 300 करोड़ “जयमंगलागढ़ हेरिटेज डेवेलपमेंट एंड ट्रस्ट फंड” के लिए. यह हुई पॉलिसी, 30 महीने में टोटल प्रॉजेक्ट इम्पलिमेंटेशन (Total Project Implementation) और शर्त यह कि अगले 5 साल में सिर्फ़ इस प्रॉजेक्ट के इफ़ेक्ट से बेगुसराय से मिनिमम 25000 करोड़ की एडिशनल रेवेन्यू. हज़ारों रोज़गार, लाखों लोगों के कम्यूनिटी डेवेलपमेंट (Community Development) और बेगुसराय के अर्बन डेवेलपमेंट (Urban Development) को नहीं जोड़ते हैं.”

गंगा और बूढ़ी गंडक नदियों के बीच बेगूसराय जिले में करीब एक हजार एकड़ में फैला कावर झील के बारे में लिखा कि “साहब यह महज़ झील नहीं हैं, यह उस बेगुसराय की लाइफ़लाइन है जो कभी सेंट्रल बिहार की ईकोनोमिक पाइपलाइन हुआ करती थी. लेकिन यह सब आपसे अगले 30 साल में भी नहीं होगा.”

पुष्मम प्रिया चौधरी ने इसके संरक्षण हेतु जो ब्लूप्रिंट दिया है उसमें बताया गया है कि प्लुरल्स की सरकार अगले 5 साल में जो करेगी उसे “आप बेगुसराय के रुरल (Rural), इंडस्ट्रियल (Industrial), अर्बन (Urban)और इन्वायरॉन्मेंटल (Environmental) बदलाव को पहचान नहीं पाएँगे!”उन्होंने आगे लिखा कि “कावर तो बस एक सैम्पल है, बग़ल में सिमरिया भी है, गंगा भी है, कुम्भ भी है, दिनकर भी हैं, विशाल एग्रीकल्चरल लैंड भी है, डेयरी फ़ार्मिंग भी है, इंडस्ट्रियल हिस्ट्री भी है और कल्चरल-एजूकेशनल-इंटिलेक्चुअल लिगेसी भी, सब अपने को ईकोनोमिक मैग्नेट बनाने को बेक़रार हैं!.”

 पक्षी विज्ञानियों (Ornithologist) का मानना है कि कावर झील में 59 विदेशी और 107 देशी पक्षियों का आशियाना था, प्लुरल्स की पहल से यह फिर से गुलज़ार होगा. क्योंकि “अब बिहार में प्रवासी पक्षियों (Migrant Birds) की वापसी का समय आ गया है, उनके साथी मनुष्यों की तरह!”

पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन (Environmental Crisis and Climate Change) के खिलाफ अभियान शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनने की लालसा हो या कावर झील को विश्व धरोहरों में शामिल करने की कामना करने वाली सरकार ने धरातल पर कावर झील को मरने दिया और इसके साथ ही मरी इसके आस पास बसी सभ्यता और उनकी आजीविका. 1984 में 6786 हेक्टेयर में फैला होने वाला यह क्षेत्र 2012 में 2032 हेक्टेयर में सिमट गया. इसके सिमटते आकर ने न केवल एक झील को मारा बल्कि उम्मीदों औऱ आशाओं को भी मारा. प्लुरल्स के ब्लूप्रिंट से पुरातात्विक, प्राकृतिक और धार्मिक बिंदुओ की यह त्रिवेणी बिहार में विकास के नए आयाम स्पर्श करेगी.

परंतु 2 अक्टूबर 2019 को प्रारंभ यह जल जीवन हरियाली योजना (Jal Jeevan Hariyali Yojana) दरअसल क्लाईमेट नहीं, अब सरकारों की नीयत चेंज्ड होने की योजना है. हम प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण इस धरती को अपने आनेवाली पीढियों के लिए संरक्षित रखने का दावा करने वाली सरकार ने कावर झील के लिए एक योजना तक नहीं बनाई.कावर झील के हज़ारों हेक्टेयर, लाखों पक्षी-सरकारी उपेक्षा से जलीय-पर्यावरण विनाश का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया. अब समय आ गया है कि लुप्त होती जलीय धरोहर को ज़िंदा कर लाखों रोज़गार की बड़ी अर्थव्यवस्था में बदला जाय.

भारत में कोविड-19 के एक दिन में सर्वाधिक 38,902 मामले, 3,73,379 लोग अब भी संक्रमित

भारत में एक दिन में कोविड-19 के सर्वाधिक 38,902 मामले आने के साथ ही रविवार को संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 10,77,618 हो गई जबकि इस बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या 6,77,422 पर पहुंच गई है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार एक दिन में इस बीमारी से 543 लोगों की मौत के साथ मृतकों की संख्या 26,816 हो गई. पिछले 24 घंटों में 23,672 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है.देश में अब भी 3,73,379 लोग संक्रमित हैं। संक्रमितों की कुल संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

यह लगातार चौथा दिन है जब कोरोना वायरस के एक दिन में 30,000 से अधिक मामले सामने आए हैं.पिछले 24 घंटों में जिन 543 लोगों की मौत हुई है उनमें से 144 की महाराष्ट्र, 93 की कर्नाटक, 88 की तमिलनाडु, 52 की आंध्र प्रदेश, 27 की पश्चिम बंगाल, 26 की दिल्ली, 24 की उत्तर प्रदेश, 17 की हरियाणा, 16 की गुजरात और नौ लोगों की मध्य प्रदेश में मौत हुई.

बिहार, पंजाब और राजस्थान में सात-सात लोगों ने जान गंवाई। इसके बाद तेलंगाना में छह, जम्मू कश्मीर में पांच, ओडिशा और पुडुचेरी में तीन-तीन, असम, त्रिपुरा और केरल में दो-दो जबकि चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में एक-एक व्यक्ति की मौत संक्रमण से हुई है.

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ का दावा- सितंबर में चरम पर पहुंच सकते हैं COVID-19 के मामले

देश में कोविड-19 (COVID-19) के मामले  बीच सितंबर (September) में चरम पर पहुंच सकते हैं. अब मुख्य काम इस वायरस को खासतौर पर गांवों में फैलने से रोकने का होना चाहिए, जहां देश की दो-तिहाई आबादी रहती है. पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो के श्रीनाथ रेड्डी (Public Health Foundation of India president Dr K Srinath Reddy) ने शनिवार को यह कहा.

हालांकि, उन्होंने यह चिंता भी जताई कि वायरस कहीं अधिक तेजी से फैल रहा है. भारत में इस सप्ताह की शुरूआत में संक्रमण के मामले 10 लाख के आंकड़े को पार कर गये और इस महामारी (Pandemic) से मरने वाले लोगों की संख्या 25000 से अधिक हो गई है.

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ (Public Health Expert) ने कहा, ‘‘हम इसे इस स्तर पर पहुंचने से रोक सकते थे, लेकिन अभी भी हम अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश कर सकते हैं और इसके प्रसार को यथाशीघ्र रोक सकते हैं. ’’ रेड्डी ने कोविड-19 के मामले बढ़ने के बारे में कहा, ‘‘अलग-अलग स्थानों (राज्यों) में संक्रमण के अपने चरम पर पहुंचने का समय अलग-अलग होगा.’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि जन स्वास्थ्य (Public Health) के लिये बेहतर उपाय किये जाते हैं और यदि लोग मास्क पहनने और आपस में दूरी रखने जैसे एहतियात बरतते हैं तो कोविड-19 के मामले कम से कम दो महीने में अपने चरम पर होंगे.

यह पूछे जाने पर क्या वह इस बारे में आश्वस्त हैं कि मामले दो महीने में अपने चरम पर होंगे, उन्होंने कहा, ‘‘जो कुछ किये जाने की जरूरत है, उसे यदि हर कोई करता है तो…. ’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘यह लोगों के व्यवहार और सरकार के कदमों पर निर्भर करता है.’’

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( All India Institute Of Medical Sciences) में हृदय रोग विभागाध्यक्ष रह चुके रेड्डी ने कहा कि दूसरे चरण के लॉकडाउन तक नियंत्रण के उपाय बहुत सख्त थे क्योंकि भारत ने वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने की कोशिश की.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लेकिन तीन मई के बाद, जब पाबंदियों में छूट देना शुरू किया गया, तब घर-घर जाकर सर्वेक्षण करना, शीघ्र जांच करना और संक्रमितों को पृथक रखना और संक्रमित मरीजों के संपर्क में आये लोगों का जोरशोर से पता लगाना सहित दूसरे उपाय बरकरार रखे जाने चाहिए थे.

उनके मुताबिक, वे सभी एहतियात…जन स्वास्थ्य उपाय, सार्वजनिक स्थानों पर व्यवहार संबंधी व्यक्तिगत एहतियाती उपाय , तब से नजरअंदाज किये जाने लगे और लॉकडाउन पूरी तरह से हटने के बाद वे और अधिक नजरअंदाज कर दिए गए. उन्होंने कहा कि यह ऐसा नजर आया कि ‘हम अचानक ही आजाद हो गये हैं. ’जैसे कि स्कूली परीक्षाओं के बाद छात्रों का जश्न मनाया जाना, भले ही परिणाम आने में कुछ महीने की देर हो.’

डॉ. रेड्डी अभी हावर्ड (Harvard) में अध्यापन कार्य से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘हमने बहुत अधिक समय अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता पर बिताया…यह भी जरूरी था, लेकिन संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आये लोगों का पता लगाने का पूरा कार्य पुलिसकर्मियों पर छोड़ दिया गया, जबकि इसे जन स्वास्थ्य कार्य के रूप में नहीं देखा गया.’’

डॉ. रेड्डी ने कहा कि संक्रमितों के संपर्क में आये लोगों का कहीं अधिक तत्परता से पता लगाया जाना, कोविड-19 के लक्षणों वाले लोगों का घर-घर जाकर पता लगाना, उनकी शीघ्रता से जांच कराने…ये सभी उपाय कहीं और अधिक किये जा सकते थे. उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुख्य कार्य अब वायरस को ग्रामीण इलाकों में फैलने से रोकने का होना चाहिए. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों को अवश्य ही यथासंभव बचाना चाहिए, खास तौर पर ग्रामीण इलाकों को क्योंकि वहां दो-तिहाई भारत रहता है. यदि हम इसे रोक सकें, तो हम अभी भी नुकसान को टाल सकते हैं.’’

Sushant Singh Death Case: कंगना रनौत का दावा, ‘अगर मैं झूठ साबित हुई तो वापस कर दूंगी पद्मश्री अवार्ड

सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड मामले (Sushant Singh Rajput Suicide Case) में फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) का बड़ा बयान अब सामने आया है. कंगना रनौत ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को दिए अपने इंटरव्यू में इस पूरे मामले पर विस्तार से बात की है.

कंगना रनौत ने कहा है कि इस पूरे मामले पर अभी तक उन्होंने जो कुछ कहा है अगर वो गलत साबित होता है तो वो अपना पद्म श्री अवार्ड (Padma Shri Award) वापस कर देंगी. कंगना ने कुछ दिन पहले इसे ‘प्लांड मर्डर’ (Planned Murder) बताया था. इससे पहले कंगना ने कहा, था कि बॉलीवुड में एक सुसाइड गैंग (Suicide Gang) चल रहा है जो सुशांत की मौत का जिम्मेदार है.

कंगना ने मुंबई पुलिस (Mumbai Police) की जांच पर भी सवाल उठाया है कि मुंबई पुलिस महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) को पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाती है. महेश भट्ट रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) और सुशांत सिंह राजपूत के बीच क्या कर रहे थे? उन्होंने आदित्य चोपड़ा (Aditya Chopra) को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि पुलिस को उनसे भी पूछताछ करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस करण जौहर (Karan Johar), राजीव मसंद (Rajeev Masand), आदित्य चोपड़ा और महेश भट्ट के बयान इसलिए नहीं ले रही क्योंकि वे पावरफुल लोग हैं. तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों के अलावा, कंगना रनौत को इस साल की शुरुआत में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.

आगे कंगना ने सवाल किया.क्या इस मामले में CBI (Central Bureau of Investigation) जांच नहीं होगी पुलिस ने मुझे समन जरूर भेजा था तब मैं मनाली में थी, लेकिन बाद में पुलिस ने मुझसे संपर्क नहीं किया, आपको बता दें, बॉलीवुड में स्टार किड्स और भाई-भतीजावाद और पक्षपात के खिलाफ कई कंगना समेत कलाकारों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है, लेकिन कंगना शुरू से ही इस पर मुखर हो कर बोलती आई हैं.