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सरकार अपने नागरिकों की बिल्कुल परवाह नहीं करती फिर सरकार ही क्यों है? पुष्पम प्रिया चौधरी ने सरकार पर लगाया प्रश्नचिन्ह !

प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने सरकार के अस्तित्व को लेकर सवाल खड़ा किया है कि यदि राज्य के नागरिक उनकी प्राथमिकताओं में नहीं हैं तो ऐसे सरकार के बने रहने का क्या अर्थ रह जाता है? अपने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है कि “बिहार में हेल्थ केयर पॉलिसी और उसका कार्यान्वयन दुनियाँ में सबसे ख़राब है. स्वास्थ्य सेवाओं की दशा भयानक है, गम्भीर बीमारियों के लिए कोई वास्तविक हेल्थ इंश्योरेंस जैसी चीज नहीं है, डॉक्टरों की भारी कमी है, ज़मीनी बुनियादी स्वास्थ्य केंद्र मृतप्राय हैं, अस्पतालों में फ़्री दवाईयाँ नहीं हैं, और बिचौलियों का ज़ोरदार कारोबार है. और ऐसी अनेक चीजें जो कैबिनेट के एक ज़िम्मेदार हस्ताक्षर और पॉलिसी बदलाव से आसानी से ठीक हो सकती हैं!” पर बिहार में यह लुप्तप्रायः हैं.

सरकार के लिए उनके नागरिक बस लोग मात्र है “और सरकार बिल्कुल परवाह नहीं करती फिर हमारे पास सरकार ही क्यों है.”
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि सरकारी लॉकडाउन की वजह से बिहार यात्रा बीच में स्थगित करनी पड़ी है और अगले 15 दिन जोर स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा बूथ-स्तरीय संगठन और प्रचार-प्रसार पर होगा और इधर वे बिहार के बंधनों, मिथकों और अवसरों को दूसरे औज़ारों से खोलते और तोड़ते रहेंगी. इसी के तहत पालीगंज यात्रा की एक घटना पर लिखा है जिसमें उन्होंने बताया कि राज्य अपने नागरिकों को नीतियों में कितना स्थान और कैसा सम्मान देती है.
पुष्पम प्रिया चौधरी ने लिखा “मैं सुनीता देवी से पालीगंज, पटना में मिली. हालाँकि मैं उन्हें अचानक किसी और के घर पर मिल गई, लेकिन वे मुझे देखकर काफ़ी उत्साहित दिखीं और हमारी टीम के एक सदस्य से उनके हाथ में रखे कागज के बारे में पूछा. जब उन्हें पता चला कि वह प्लुरल्स मेम्बरशिप फ़ॉर्म था, तो उन्होंने भी मेम्बर बनने में दिलचस्पी दिखाई. टीम के किसी सदस्य ने उन्हें एक भरा हुआ फ़ॉर्म दे दिया और कहा कि फ़ोटो ले सकते हैं. मैंने यह सुना तो कहा, “नहीं, उन्हें फ़ॉर्म भरने दीजिए, हमलोग इंतजार करेंगे.” और तब मैंने सुनीता जी की आवाज़ सुनी – “हाँ, मैं अपना फ़ॉर्म भरूँगी.” तेज आवाज़! मुझे पसंद है जब महिलाएँ तेज आवाज़ में बोलती हैं, वह भी बिहार में! मैंने सुनीता जी को कहा – “हाँ, डाँटिए जोर से, ये क्या बात हुई, सरकारी काम जैसा!
जब मैं बाहर निकली तो सुनीता जी मेरा इंतज़ार कर रही थीं और पूछ रही थीं कि क्या वे मुझसे बात कर सकती हैं! मैं देख सकती थी कि वे मुझे देखकर ख़ुश थीं. उन्होंने संकोच से पूछा – “क्या आप मेरे घर चलेंगे? बग़ल में ही है, मुझे बहुत अच्छा लगेगा.” कहने की ज़रूरत नहीं कि अगले ही पल मैं उनके साथ उनके घर जा रही थी. वह एक कमरे का घर था. जब मैं अंदर गई तो उन्होंने कहा – “जो है यही छोटा सा घर है मेरे पास.” रास्ते में बड़े गर्व के साथ उन्होंने मुझसे कहा था कि वे मुख्यमंत्री के लिए काम करती हैं. मैंने मुस्कुरा कर कहा था – “सच में?” उन्होंने कहा – “हाँ, मैं जीविका में काम करती हूँ.” मैंने उनको कहा कि मुझे पसंद है कि वे कितनी बोल्ड हैं और बिहार में मैं हमेशा उनकी जैसी बोल्ड महिलाओं को ढूँढती हूँ. उन्होंने तब ख़ुश होकर कहा कि वे ऐसी कई महिलाओं को जानती हैं और जब अगली बार आइएगा तो सब से मिलवाऊँगी.
उनका लड़का जो स्कूल में पढ़ता है, सो रहा था. मैंने कहा कि उसे डिस्टर्ब न करें. वे सच में बहुत ख़ुश थीं और उन्हें शायद पता नहीं था कि मैं भी बहुत ख़ुश थी. तब वे अपने पति के बारे में बताने लगीं, जो बाहर थे और हमारे आने पर घर आए थे – “मेरे पति को गम्भीर बीमारी है, इसलिए वे काम नहीं कर सकते. मैं ही एकमात्र कमाने वाली हूँ, जो भी थोड़े पैसे मिलते हैं, सब दवाई में खर्च हो जाते हैं.” थोड़े देर में जब मैं निकलने वाली थी, उन्होंने मेरी तरफ़ देखा और कहा – “मेरी ज़िंदगी बहुत कठिन है…..” और इतना कहते ही उनकी आँखों से आँसू बहने लगे, जो शायद बहुत देर से उन्होंने रोक कर रखा था. वही मेरी तेज स्त्री….इतनी बहादुर! उस मज़बूत आवरण और गर्मजोशी वाली मुस्कान के पीछे का दर्द मैं देख सकती थी, महसूस कर सकती थी. मेरा दिल टूट गया. उन्होंने कोई शिकायत नहीं की, उनकी कोई अपेक्षा नहीं थी, कुछ नहीं माँगा….वे खुश ही दिखना चाहती रहीं, लेकिन बहुत सारा दुःख लिए हुए!
इस राज्य के मुख्यमंत्री बहुत भाग्यशाली हैं क्योंकि बिहार में लोग बहुत सीधे हैं. सुनीता जी ने उनके विरूद्ध एक शब्द नहीं कहा. उनको शायद पता नहीं था कि अगर सही मायनों में एक अच्छी सरकार होती तो उनकी ज़िंदगी इतनी मुश्किल नहीं होती. लोग लम्बे समय से एक सक्षम सरकार से इतना वंचित रहे हैं कि उन्होंने अपनी परिस्थिति के साथ जीना सीख लिया है और संघर्ष को अपने जीवन का एक हिस्सा मान लिया है.
सरकार के लिए सुनीता जी बस ‘एक लोग’ हैं. लेकिन उनकी समस्या का बिहार में ‘अनेक लोगों’ के द्वारा समान रूप से सामना किया जाता है. और सरकार बिल्कुल परवाह नहीं करती. फिर हमारे पास सरकार ही क्यों है? मैं निश्चित नहीं हूँ कि सुनीता जी को पता है कि जब भी वे अपने मोड़ की दुकान से कुछ ख़रीदती हैं तो वे अपने मुख्यमंत्री और उनके प्रतिनिधियों और देश के नौकरशाहों के वेतन में अपना हिस्सा दे रही होती हैं. आप जितने लोगों से मिलेंगे, उनमें सुनीता जी सबसे सीधी और श्रेष्ठ लोगों में एक होंगी, और वे एक बेहतर जीवन की हक़दार हैं. जब भी मैं उनके बारे में सोचती हूँ मुझे उनके चेहरे की बड़ी-सी मुस्कुराहट और उसके पीछे का दुःख एक साथ दिखता है. सुनीता जी, आप अदम्य साहस और खूबसूरत दिल वाली एक बहादुर स्त्री हैं. प्लीज़ अपनी उम्मीदों को ज़िंदा रखिएगा, चीजें बहुत जल्दी बदलने वाली हैं.
उन्होंने अज्ञेय की रचना “नदी के द्वीप” के कुछ अंश से अपने नोट का समापन किया है.
“दुःख सब को माँजता है
और –
चाहे स्वयं सबको मुक्ति देना वह न जाने , किन्तु-
जिन को माँजता है
उन्हें यह सीख देता है कि सबको मुक्त रखें.”

Bihar Assembly election 2020 : बिहार क्यों आईं है पुष्पम प्रिया चौधरी?

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के अवसर पर बिहार (Bihar) के राजनीतिक पटल पर एक नई राजनीतिक पार्टी के उदय की घोषणा हुई. पाटलिपुत्र (Pataliputra) के राजनीतिक गलियारों में हलचल थी, धनानंद का सिंहासन डोला था. पुष्पम प्रिया चौधरी ने भावी मुख्यमंत्री के तौर पर अपने नागरिकों के नाम एक पत्र लिखा था. बिहार के “पावर लॉर्डस” परेशान थे, हैरान थे कि लंदन में पढ़ने वाली सुश्री चौधरी बिहार क्यों आना चाहती है?

2018 और 2019 की बिहार की एंसेफलायटिस बुख़ार (Encephalitis Fever) ने, जिसमें सैंकड़ों बच्चों की मृत्यु हुई, उन्हें काफ़ी डिस्टर्ब किया. उस दौरान वे विकसित लोकतंत्रों के लिए बॉस्टन कन्सल्टिंग ग्रुप और एलएसई की पब्लिक-पॉलिसी के एक प्रॉजेक्ट पर काम कर रही थीं – बिहार में पब्लिक सर्विस और शासन की समस्याओं का आसानी से निराकरण हो सकता है. विकसित लोकतंत्रों की सरकारें अब ज़्यादा जटिल समस्याओं का समाधान कर रही हैं क्योंकि उन्होंने बुनियादी सेवाओं और शासन को बेहतर कर रखा है. अपने होम स्टेट की ठीक की जाने वाली समस्याओं से अवगत होते हुए दूसरे विकसित मुल्कों के लिए नीति निर्माण का काम करना उनके लिए नैतिक रूप से परेशान करने वाला था. बिहार के लिए कुछ न करने और उसे भ्रष्ट व अक्षम लोगों के हाथ में छोड़ देने के नैतिक बोझ के साथ वह जीना नहीं चाहती थी. वह मरने से पहले बिहार को अपने जीवन-काल में वैसा ही देखना चाहती थी इसलिए उन्होंने अपना सामान बांधा और अपनी मातृभूमि वापस आ गयी.

पुष्पम प्रिया चौधरी (Pushpam Priya Choudhary) अपनी उच्च शिक्षा यूनाइटेड किंग्डम (United Kingdom) में प्राप्त की जहाँ राजनीति, दर्शन और अर्थशास्त्र की विभिन्न विषय-वस्तुओं की पढ़ाई की. फिर ऐसी शिक्षा पा कर जब वह लंदन स्कूल ओफ़ एकनॉमिक्स (London School of Economics) के लिए बॉस्टन कन्सल्टिंग ग्रूप के साथ एक पब्लिक पॉलिसी प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी तब उन्होंने महसूस किया कि पूरी दुनिया कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है. पॉलिसी के निर्माण के लिए विभिन्न विषयों की योग्यता एक अहम भूमिका रखती है ताकि पॉलिसी साक्ष्य और गहन विश्लेषण पर आधारित हो. दुनिया भर की सरकारें पॉलिसी के असर को उसे लागू करने से पहले और बाद में गहनता से अध्ययन करती हैं क्योंकि पब्लिक और पब्लिक के पैसे दोनों का बहुत महत्व है और इसलिए दूसरी जगहों पर पब्लिक भी यह सुनिश्चित करती है कि सरकारें ऐसा करें. पुनर्वितरण (रीडिस्ट्रिब्यूशन) किसी भी पब्लिक पॉलिसी के केंद्र में होती है. बिहार की मुख्य समस्या फ़ंड की नहीं है बल्कि फ़ंड के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और अपने लोगों को ख़ुश करने की रही है.

उन्होंने आगे बताया कि हमारे पास सक्षम संस्थाओं तथा आधारभूत संरचनाओं का अभाव रहा है और निर्णय राजनीतिक वर्ग की मनमर्ज़ी से किए जाते हैं. उदाहरण के लिए, वर्तमान सरकार एक दिन जगी और उसने म्यूज़ीयम बनाने की सोची और बना भी डाला. वह पैसा जिसे तत्काल किफ़ायती आवास, प्राथमिक शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं या कृषि आधारित उद्योगों के लिए उपयोग किया जा सकता था, उसे एक बिल्डिंग बनाने के लिए ख़र्च किया जाना क्या एक असंवेदनशील सौदा नहीं कहा जाएगा? और ऐसा करके भी सरकार बच निकलती है क्योंकि वास्तव में कोई उनके कार्यकलाप पर पूछने वाला ही नहीं है (विपक्ष तो और चौपट है). बिहार के राजनेताओं को साक्ष्य-आधारित पॉलिसी बनाने का ज्ञान ही नहीं है. उनके लिए राजनीति व्यक्तिगत हमलों, अप्रासंगिक भाषणों और यथास्थिति बनाए रखने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है. मतलब कि लोगों को बेरोज़गार, अशिक्षित और ग़रीब बनाए रखा जाए ताकि वे बारंबार एक ही वादे कर के या ऐसे मुद्दे उछाल कर चुनाव जीतते रहें जिनसे लोगों की परेशान ज़िंदगी का कोई सरोकार न हो.

पुष्पम प्रिया चौधरी का कहना है कि ग़रीबी हटाना हर राजनीतिक दल के एजेंडे में पिछले 73 सालों से रहा है. वे अपनी बेमतलब की भाषण कला से हमारा मनोरंजन करते हैं और हम उन्हें ऐसा करने देते रहे हैं. लेकिन उनका काम हमारा मनोरंजन करना नहीं है. फिर इससे हमें क्या राहत मिलती है? दुनिया भर के अधिकतर देश जिनमें अलोकतांत्रिक देश भी शामिल हैं, वे सभी अब पॉलिसी निर्माण के उच्चतर स्तर पर पहुँच गए हैं. निस्सन्देह उनकी अपनी समस्याएँ हैं, लेकिन उन्होंने हमारी जैसी समस्याओं का दशकों पहले समाधान कर लिया है. दूसरी तरफ़, हम अभी तक व्यक्ति की उन बुनियादी ज़रूरतों से भी वंचित हैं जो जीवन-निर्वाह के लिए आवश्यक होती हैं. एक बिहारी के रूप में ऐसा महसूस करना असफलता का बोध कराता है. इस बात के बावजूद कि हम या आप बिहार या भारत के बाहर व्यक्तिगत रूप से ख़ूब सफल हों, एक बिहारी के रूप में हम सभी असफल हैं. और हम इस ज़िम्मेदारी से भाग नहीं सकते. इसी बात से परेशान बदहाल बिहार को बेहतरीन बिहार में बदलने हेतु वह बिहार आईं है.

पुष्पम प्रिया चौधरी 2019 में बस एक लक्ष्य के साथ लौटीं – एक बेहतर बिहार बनाया जाए और अक्षम राजनीतिक व्यवस्था को बदला जाए. जिन लोगों के सामने वे खड़ी हैं वे हर जगह हैं – “जब मैं राजनीतिक वर्ग की बात करती हूँ तो मेरा मतलब सिर्फ़ राजनीतिज्ञों से नहीं होता, बल्कि इसका अर्थ भ्रष्टाचार के समूचे संरक्षक-मुवक्किल नेटवर्क (patron-client network) से है. वे सभी जगह हैं, अलग-अलग कामकाज में. लोग जो अपने कांटैक्ट के पावर का दुरुपयोग करते हैं.” पुष्पम प्रिया चौधरी का कहना है कि वह यह जानती हैं क्योंकि सिस्टम को दशकों तक जान-बूझ कर बर्बाद किया गया है और इसलिए भ्रष्टाचारियों का नेटवर्क काफ़ी मज़बूत है. “लेकिन इसे ठीक करना असम्भव नहीं है, उतना असम्भव तो नहीं ही है जितना चन्द्रमा पर जाना या मरूस्थल में बारिश कराना, वह भी आज हो गया है. जीवन भी मुश्किल ही है, लेकिन हम जीना तो नहीं छोड़ देते हैं ना? लोग सरकारों की नालायकी और अहंकार के कारण मरना डिज़र्व नहीं करते.

वह बताती हैं कि बिहार मेरा है और मेरे जैसे लोगों का है, और एक बिहारी के रूप में मैं इसे आगे और बर्बाद नहीं होने दूँगी चाहे इसके लिए जो करना पड़े. और फिर इस बात का कोई सबूत भी तो नहीं है कि यह नहीं बदला जा सकता, उल्टे इस बात का सबूत ज़रूर है कि इन राजनीतिज्ञों से नहीं हो सकता. मैं सबूत के आधार पर काम करती हूँ न कि अनुमानों और मान्यताओं पर. बहुत सारे ईमानदार, मेहनती लोग हैं जो काम करना चाहते हैं लेकिन जिन्हें सिस्टम में काम नहीं करने दिया जाता. मैं उन सबके लिए एक उत्साहवर्धक माहौल बनाना चाहती हूँ. जब संस्थाएँ मज़बूत होती हैं तो प्रतिभाएँ सतह पर अपने आप आ जाती हैं और जब वे कमजोर होती हैं तो ग़लत एवं भ्रष्ट लोग सही एवं निर्दोष लोगों की क़ीमत पर आगे बढ़ जाते हैं.”

पुष्पम प्रिया चौधरी एक प्रोग्रेसिव बिहार का विज़न रखती हैं – “मुझे अपने नागरिकों और मतदाताओं में यक़ीन है. हमने सालों तक बर्दाश्त किया है. अब बहुत हो गया. बिहार अब हमेशा के लिए बदलेगा और अब यह साक्ष्य-आधारित पब्लिक पॉलिसी एवं पॉज़िटिव पॉलिटिक्स से शासित होगा. और यह बिल्कुल तय है.”

हम तेजी से आगे बढ़ने में
यथास्थिति बर्दाश्त नहीं कर सकते
आगे बढ़ना चुनें’ इसी काम के लिए वह बिहार आईं है और यकीन करें ऐसा होकर रहेगा. बिहार बदलेगा. बिहार को प्लुरल्स बदलेगी. ऐतिहासिक दुस्साहस करने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी बिहार इसलिए आईं है.
औऱ रेणु के शब्दों में स्वयंभू ज्ञानी “जोतिखी काका’ लोग राजनीति का पतरा बांचते रह जाएँगे.

Election Commission ने राजनीतिक दलों से कोरोना के दौरान चुनाव प्रचार पर मांगे सुझाव, 31 जुलाई आखिरी तारीख

चुनाव आयोग (Election Commission) ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर कोरोना के दौरान देश में होने वाले आगामी चुनावों के प्रचार को लेकर ‘राय और सुझाव’ मांगे हैं. आयोग ने राजनीतिक दलों से 31 जुलाई तक जवाब देने के लिए कहा. आयोग ने ‘देश में कोविड-19 (COVID-19) के मौजूदा हालात’ की ओर इशारा करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) और कुछ अन्य कानूनों के तहत दिशा-निर्देश जारी कर चुकी हैं.

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को 31 जुलाई 2020 तक अपनी राय और सुझाव भेजने के लिए कहा है ताकि महामारी के दौरान होने वाले चुनावों में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा प्रचार किए जाने को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकें. दरअसल, इस साल कुछ राज्यों में उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव होने हैं.

बिहार के विपक्षी राजनीतिक दलों ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से कहा कि वह मतदाताओं को आश्वस्त करे कि आगामी विधानसभा चुनाव संक्रमण के फैलने का बड़ा कारण नहीं बनेंगे. साथ ही उन्होंने शारीरिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए हर मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या 250 तक सीमित करने का भी अनुरोध किया.

विपक्षी दलों ने कल शाम आयोग के अधिकारियों के साथ डिजिटल बैठक की थी. इससे पहले उन्होंने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य में कोरोना वायरस (Coronavirus) से उत्पन्न हालात की ओर ध्यान दिलाया था.

उत्तराखंड के इन चार बड़े जिलों में शनिवार और रविवार को रहेगा लॉकडाउन

उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) ने शुक्रवार को चार बडे़ जिलों में, कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के बढ़ रहे मामलों को देखते हुए दो दिन, शनिवार और रविवार को लॉकडाउन घोषित कर दिया. प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह (Chief Secretary Utpal Kumar Singh) द्वारा यहां देर रात जारी एक आदेश में कहा गया है कि चार बडे जिलों देहरादून (Dehradun), हरिद्वार (Haridwar), नैनीताल (Nainital), उधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar) में शनिवार और रविवार को लॉकडाउन रहेगा लेकिन इस दौरान आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी.

हांलांकि, इस लॉकडाउन का असर बडे उद्योगों पर नहीं होगा. हवाई जहाज और रेलगाडियों से आ रहे लोगों को भी गंतव्य पर जाने से नहीं रोका जाएगा. इससे पहले, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Chief Minister Trivendra Singh Rawat) ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के बढते मामलों के मद्देनजर शनिवार और रविवार को लॉकडाउन किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, ‘‘कल अचानक 200 मामले आ गये जो देर रात तक और बढ गए. इसके लिए एक ही समाधान है कि अंतराल बनाया जाए और संक्रमण चक्र को तोड़ा जाए. व्यापारियों की भी मांग थी कि बाजार केवल पांच दिन ही खोला जाए और हालात भी यही कह रहे हैं. इसलिए शनिवार और रविवार को लॉकडाउन किया जा रहा है.’’ उन्होंने कहा कि कोविड—19 (COVID-19) के मामलों में कमी लाने के लिए सैनिटाइज करना भी जरूरी है और शनिवार और रविवार को लॉकडाउन से इसके लिए भी समय मिलेगा.

हालांकि, उन्होंने साफ किया कि फिलहाल शनिवार और रविवार को बंद करने का फैसला केवल इसी सप्ताह के लिए लिया गया है और जरूरत पडने पर इसे आने वाले सप्ताहांतों के लिए लागू करने पर बाद में विचार किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण की प्रदेश में स्थिति को लेकर अधिकारी रोज बैठकें कर रहे हैं और वह स्वयं भी साप्ताहिक तौर पर इसकी समीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आगे भी हालात के अनुरूप फैसले लिए जाएंगे.

उधर, देहरादून के व्यस्ततम और प्रमुख बाजार पल्टन बाजार में जूते की एक दुकान के सेल्समैन में कोविड-19 की पुष्टि के बाद करीब आधे बाजार को सील कर दिया गया और पूरे क्षेत्र को सैनिटाइज किया गया. देहरादून के एक और प्रमुख बाजार, आढत बाजार के व्यापारियों ने भी आज से सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक ही दुकानें खोलने का फैसला लिया है .

उत्तराखंड में पिछले एक सप्ताह में कोविड 19 मरीजों की संख्या में तेजी आई है . 11 जुलाई को 45 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी लेकिन 12 जुलाई को 120 लोगों में, 13 जुलाई को 71 में , 14 जुलाई को 78 में, 15 जुलाई को 104 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई और वहीं बृहस्पतिवार को मरीजों की संख्या एक दिन में रिकार्ड 199 तक पहुंच गयी.

Bihar : पटना-गया रेलखंड पर ट्रेन की चपेट में आई कार, दो की मौके पर मौत, 5 साल के मासूम की हालत गंभीर

गया रेलखंड (Patna-Gaya railway block) के पोठही स्टेशन के पास आज एक भीषण हादसा हुआ है. जनशताब्दी ट्रेन से स्विफ्ट कार टकरा गई जिसमें मौके पर दो की मौत हो गई, वहीं एक की हालत गंभीर बताई जा रही है. यह घटना धरहरा अवैध रेलवे क्रॉसिंग के पास रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान हुआ है. बताया जाता है कि पटना निवासी सुमित और नीलिमा देवी अपने घर धरहरा जा रहे थे, वहीं रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान कार का पिछला चक्का ट्रैक में फंस गया. उसी वक्त जन शताब्दी ट्रेन तेजी से आई और गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और कार में सवार दो लोगों की मौके पर मौत हो गई.

घटना में एक 5 साल का बच्चा भी घायल हुआ है जिसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है. उसे पीएमसीएच रेफर किया गया है मौके पर पहुंची घटना की खबर पाते ही मौके पर अधिकारी और पुलिस के जवान पहुंच गए  और कार में मौजूद लोगों को बाहर निकाला.  पुलिस मामले की छानबीन मे जुटी है.

बताया जा रहा है कि ट्रेन के कार से टकराने पर भयानक आवाज हुई. इस दौरान ट्रेन भी पूरी तरह हिल गई. आवाज सुन आसपास के लोग दौड़े. उन्‍होंने बोलेरो सवार लोगों को तत्‍काल मदद दी,  कितने लोग सवार थे, फिलहाल स्पष्ट नही हो सका है.

झारखंड में अब तक करीब 50 लोगों की मौत, संक्रमितों की संख्या 5 हजार के पार

झारखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के संक्रमण से जमशेदपुर, हजारीबाग, गोड्डा और रामगढ़ में एक-एक और व्यक्ति की मौत हो गयी जिन्हें मिलाकर राज्य में इस वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 हो गयी है. इसी अवधि में कोरोना संक्रमण के 313 नये मामले सामने आये हैं जिन्हें मिलाकर राज्य में कोविड-19 महामारी के संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 5096 हो गयी.

स्वास्थ्य विभाग की जारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में जमशेदपुर, गोड्डा, रामगढ़ एवं हजारीबाग में एक-एक और कोरोना संक्रमितों की मौत हो गयी जिसे मिलाकर राज्य में इस वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 तक पहुंच गयी है. इसके अलावा राज्य में कोरोना संक्रमण के पिछले 24 घंटों में 313नये मामले दर्ज किये गये हैं जिन्हें मिलाकर अब राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 5096 हो गयी है.

राज्य के 5,096 मरीजों में से 2,577 अब तक ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं. इसके अलावा 2473 अन्य संक्रमितों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है जबकि 46 अन्य की मौत हो चुकी है. पिछले 24 घंटों में प्रयोगशालाओं में कुल जांच 5137 नमूनों की हुई जिनमें 313 संक्रमित पाये गये.

देशभर में लगातार बढ़ रहा कोरोना का संक्रमण 10,03,832 के पार पहुंच चुका है. वर्तमान में देश में 3,42,473 से ज्यादा संक्रमित लोग अपना इलाज करवा रहे हैं. वहीं 6,35,756 लाख से ज्यादा संक्रमित लोगों का इलाज सफल रहा है. देश में अबतक 25 हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमण की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं.

Rajasthan : कांग्रेस के बागी विधायकों पर स्पीकर की कार्रवाई पर 21 जुलाई शाम 5 बजे तक रोक

राजस्थान हाई कोर्ट ( Rajasthan High Court) में कांग्रेस (Congress) के बागी विधायकों की याचिका पर आज की सुनवाई करते हुए मंगलवार शाम पांच बजे तक स्पीकर की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार 20 जुलाई को सुबह दस बजे होगी.

बता दें कि सचिन पायलट (Sachin Pilot ) और कांग्रेस के अन्य 18 बागी विधायकों की याचिका की पैरवी हरीश साल्वे ने की. हरीश साल्वे (Harish Salve) ने कहा कि स्पीकर पक्षपात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्पीकर की मंशा ठीक नहीं लग रही है. वहीं मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi ) ने कहा कि पायलट गुट ने विद्रोह नहीं किया है. विधायकों ने पार्टी के भीतर आवाज उठाई है. अयोग्य ठहराने का मामला नहीं बनता है. मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायकों को परेशान किया जा रहा है.

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhv) ने दलील पेश की. विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि स्पीकर का नोटिस देना सही है. पार्टी लाइन के खिलाफ बयान दिया इसलिए नोटिस जारी किया गया. विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया है. वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों की याचिका को प्रीमेच्योर बताया और याचिका खारिज करने की मांग की.

ग़ौरतलब है कि यह नोटिस सचिन पायलट, रमेश मीणा, इंद्राज गुर्जर, गजराज खटाना, राकेश पारीक, मुरारी मीणा, पी. आर. मीणा, सुरेश मोदी, भंवर लाल शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया, हरीश मीणा, बृजेन्द्र ओला, हेमाराम चौधरी, विश्वेन्द्र सिंह, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह और गजेंद्र शक्तावत को भेजा गया है.

किर्गिस्तान में फंसे बिहारियों के घर वापसी हेतु पुष्पम प्रिया चौधरी ने विदेश मंत्री को लिखा पत्र

प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी (Pushpam Priya Choudhary,President,Plurals) ने किर्गिस्तान (Kyrgyzstan) में फंसे बिहार के छात्रों (Bihari Students) की सुरक्षित वापसी के संबंध में विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर (Subrahmanyam Jaishankar,External Affairs Minister) को पत्र लिखा है. कोरोना महामारी ( Corona Pandemic) के कारण बिहारी छात्र जो किर्गिस्तान में रहकर मेडिकल (Medical) की पढ़ाई करते हैं पिछले तीन माह से परेशानी का सामना कर रहे हैं. उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त कई नौकरशाहों (Bureaucrats) से भी संपर्क किया परंतु राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की. मेडिकल कॉलेज छात्रसंघ नेता अब्दुल खालिक खान ने राज्य सरकार से अपील की थी परंतु सरकार को इन प्रतिभाओं की कोई फ़िक्र ही नहीं है.

एशियन मेडिकल कॉलेज (Asian Medical Institute-ASMI) में पढ़ने वाले कमल हासन के पिता मोहम्मद मोइनुद्दीन ने भी सरकार से अपील की थी परंतु परिणाम कुछ  भी नही निकला. अंतत, किर्गिस्तान में फंसे एक मेडिकल छात्र कुमार गौरव ने प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी से बिहार वापिस लाने की गुहार लगाई. इसके बाद पुष्पम प्रिया चौधरी ने विदेश मंत्री को पत्र लिखा.

पत्र में पुष्पम प्रिया चौधरी ने लिखा कि कोविड महामारी के बढ़ते खतरे को देखते हुए यह अनुरोध है कि 2000 छात्रों को उनके जन्मभूमि वापिस लाया जाए जो भारत के नागरिक के रूप में उनका अधिकार है, जो किर्गिस्तान में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं. ओश मेडिकल कॉलेज (Osh medical College ), एशियन मेडिकल कॉलेज समेत अन्य कई कॉलेजों में बिहार के लगभग 2000 छात्र  मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं. किर्गिस्तान की सरकार ने छात्रों को घर जाने का निर्देश दे दिया है पर बिहार के छात्रों के लिए बड़ी समस्या यह है की वंदे भारत मिशन (Vande Bharat Mission) के तहत बिहार की कोई उड़ान नहीं है जबकि दूसरे राज्यों ने यह सेवा बहाल कर दी है. कोरोना के कारण स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है. सिवान जिले (Siwan District) के पवन कुमार गुप्ता की मृत्यु कोरोना से 10 जुलाई को हो गई थी. इससे छात्रों में दहशत का माहौल व्याप्त है पर बिहार सरकार को अपने नागरिकों की कोई चिंता नहीं है.

उन्होंने पत्र में आगे लिखा है ‘यह सामान्य प्रोटोकॉल है कि मंत्रालय तभी जवाब देता है जब राज्य सरकार औपचारिक अनुरोध करती है.’ सुश्री चौधरी ने लिखा क्या नागरिको के अनुरोध को केवल इसलिए अनसुना कर देना चाहिए, क्योंकि राज्य सरकार इस मामले में अनुरोध करने में विफल रही है.

दरअसल बिहार सरकार अभी बदहवास अवस्था में है उनके पास कोई अधिकृत आंकड़े भी नहीं हैं कि बिहार के कितने छात्र किर्गिस्तान में फंसे हैं. वह छात्रों को बिहार लाने में कोई रुचि भी नहीं दिखा रही है.  छात्रों के कई अपीलों-अनुरोधों के बाद भी सरकार ने  ध्यान नहीं दिया. ओश स्टे्ट यूनिवर्सिटी (Osh State University) में प्रथम वर्ष के छात्र प्रिंस कुमार ने सवाल किया कि ‘बिहारी छात्रों के साथ हमेशा भेदभाव क्यों होता है? दूसरे राज्यों के छात्रों को उनकी सरकारें वापिस बुला रही है पर हमें नहीं बुलाया जा रहा है.’

वंदे भारत मिशन के तहत राज्यों की पहल पर विदेश मंत्रालय काम करती है. दरअसल विदेश मंत्रालय को इसके लिए बिहार सरकार द्वारा कोई भी अनुरोध नहीं किया गया है. बिहार सरकार (Bihar Government) इस मामले में सुस्त रवैया अपना रही है. पुष्पम प्रिया चौधरी ने सुब्रमण्यम जयशंकर से अपील करते हुए लिखा कि ‘मुझे बहुत उम्मीद है कि आप छात्रों की आवश्यकता के साथ सहानुभूति रखेंगे और उन्हें सुरक्षित रूप से अपनी मातृभूमि लौटने में मदद करेंगे.’ उन्होंने वंदे भारत मिशन के तहत किर्गिस्तान से बिहार के बीच सीधी उड़ान व्यवस्था हेतु अनुरोध किया है.

पुष्पम प्रिया का मानना है कि अगर उड़ानो की व्यवस्था हो जाती है तो बिहार के छात्र चरणबद्ध तरीके से अपने घर वापिस आ सकेंगे. बिहार सरकार के लिए उनके नागरिक बस “लोग” मात्र हैं बस “वोट” मात्र, उन्हें नागरिकों की कोई चिंता नहीं है.

‘जब सरकल’ पर काजल राघवानी और खेसारी का जबरदस्त रोमांस, 2 करोड़ लोगों ने देखा ये भोजपुरी वीडियो

भोजपुरी (Bhojpuri) सिनेमा में खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) की धूम है. आए दिन उनके भोजपुरी गाने (Bhojpuri Song) सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं. खेसारी यूं ही भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार नहीं कहे जाते, उनके भोजपुरी गाने आते ही यू-ट्यूब पर धमाका कर देते हैं. हाल ही में उनका एक गाना ताबड़तोड़ व्यूज बटोर रहा है. इस गाने में खेसारी के साथ जानी-मानी एक्ट्रेस काजल राघवानी (Kajal Raghwani) नजर आ रही हैं. इस गाने में मोनालिसा और खेसारी का डांस और रोमांस लोगों को खूब भा रहा है. ये गाना काफी पुराना है लेकिन आज भी सोशल मीडिया (Social Media) पर आए दिन ट्रेंड करता दिखाई दे रहा है.

ये गाना खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी का की सुपरहिट भोजपुरी ‘मुकद्दर’ का है. यूं तो इस फिल्म के सारे गाने खूब पसंद किए गए हैं लेकिन इसके एक गाने ‘जब सरकल’ को दर्शकों का कुछ ज्यादा ही प्यार मिला है. इस भोजपुरी गाने को अब तक 21,107,224 व्यूज मिल चुके हैं. इस गाने को 2 करोड़ से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है. वहीं खेसारी और काजल का ये धमाकेदार गाना सोशल मीडिया पर आए दिन ट्रेंड करता दिखाई दे जाता है.

इस गाने में खेसारी और काजल राघवानी की शानदार कैमिस्ट्री लोगों को खूब पसंद आ रही है. इस गाने में काजल राघवाली की खूबसूरत अदाएं भी लोगों का दीवाना बना रहा है. खेसारी का डांस और काजल के डांस और रोमांस ने ही इस गाने को सुपरहिट बनाया है.

आम तौर पर खेसारी की जोड़ी भोजपुरी एक्ट्रेस काजल राघवानी के साथ सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. जिस फिल्म या गाने में ये दोनों साथ में नजर आ जाते हैं, उसे पहले से ही सुपरहिट मान लिया जाता है. वहीं इस इस सुपरहिट भोजपुरी गाने ने एक बार फिर से ये बात साबित कर दी है.

पाक ने कुलभूषण जाधव को राजनयिक संपर्क मुहैया कराया, भारत ने दावे पर उठाए सवाल

पाकिस्तान ने मौत की सजा का सामना कर रहे भारतीय कैदी कुलभूषण जाधव को गुरुवार को राजनयिक संपर्क मुहैया कराया. पाक विदेश कार्यालय ने दावा किया कि भारतीय उच्चायोग के दो अधिकारियों का जाधव से बेरोक-टोक और निर्बाध संपर्क मुहैया कराया गया. पाक के दावे पर भारत ने कहा कि मुलाकात के लिए इंतजाम उसके आश्वासन के अनुरूप नहीं थे.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘राजनयिक अधिकारियों को जाधव से बेरोक-टोक, निर्बाध और बिना शर्त संपर्क नहीं करने दिया गया. भयादोहन करने की भाव-भंगिमा के साथ पाकिस्तानी अधिकारी जाधव के आसपास मौजूद थे. जबकि भारत की ओर से इसका विरोध किया गया.’’ मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान में कहा, ‘‘जाधव तनाव में नजर आ रहे थे और यह राजनयिक अधिकारियों को साफ-साफ दिखाई दिया. वहां किए गए इंतजाम उनके बीच स्वतंत्र बातचीत की अनुमति नहीं दे रहे थे.’’

उन्होंने कहा कि भारतीय अधिकारी जाधव से उनके कानूनी अधिकारों के बारे में बात नहीं कर सके. उन्हें कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने के लिए उनकी लिखित सहमति लेने से रोक दिया गया. लिहाजा, भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मुहैया कराया गया राजनयिक संपर्क न तो सार्थक था और न ही विश्वसनीय.’’ आपको बता दें कि जाधव को राजनयिक संपर्क मुहैया कराने का कदम पाकिस्तान ने पुनर्विचार याचिका दायर करने की समय सीमा समाप्त होने से महज कुछ दिन पहले उठाया है.

पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने बयान में कहा कि जाधव को मुहैया कराया गया यह दूसरा राजनयिक संपर्क है. पहला राजनयिक संपर्क 2 सितंबर 2019 को मुहैया कराया गया था. बयान में कहा गया है, ‘‘पाकिस्तान आईसीजे के 17 जुलाई 2019 के फैसले का पूरी तरह से क्रियान्वयन करने के लिए प्रतिबद्ध है. उसे उम्मीद है कि भारत इस फैसले को पूर्ण रूप से प्रभावी बनाने में पाकिस्तानी अदालत का सहयोग करेगा.’’ बाद में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश कार्यालय की प्रवक्ता आयशा फारूकी ने कहा कि पाकिस्तान आईसीजे के फैसले को लागू करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने 20 मई को एक अध्यादेश जारी किया, ताकि भारत सरकार, जाधव या उनके कानूनी प्रतिनिधि 60 दिनों के अंदर एक पुनर्विचार याचिका दायर कर सकें. हालांकि, नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने इस बात का जिक्र किया कि जाधव को एक हास्यास्पद मुकदमे के जरिए सजा सुनाई गई, ताकि वो अपने मामले में पुनर्विचार याचिका नहीं दायर करने को मजबूर हो जाएं. श्रीवास्तव ने कहा, “पाकिस्तान ने आईसीजे के फैसले का पालन नहीं किया और अपने अध्यादेश के तहत कदम उठाने में भी नाकाम रहा.”

उन्होंने कहा, ‘‘हम जाधव की भारत सुरक्षित वापसी कराने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहे हैं .’’ पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षाकर्मियों ने जाधव को अशांत बलूचिस्तान प्रांत से 3 मार्च 2016 को गिरफ्तार किया था. हालांकि, भारत का कहना है कि जाधव का ईरान से अपहरण कर लिया गया. जाधव वहां नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद कारोबार के सिलसिले में गए थे.