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दिल्ली हिंसा : पुलिस के विरोध नहीं करने पर उच्च न्यायालय ने सफूरा ज़रगर को मानवीय आधार पर दी जमानत

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक निजी स्कूल के मालिक को पुलिस की याचिका पर जवाब देने के लिए वक्त दे दिया. पुलिस ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के एक मामले में स्कूल मालिक को जमानत देने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है.

शिव विहार इलाके में स्थित राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक समेत 18 लोगों को पड़ोस में बने डीपीआर कॉन्वेंट स्कूल में आगज़नी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने कहा कि चार दिन में जवाब दाखिल किया जाए और मामले को एक जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया.

उच्च न्यायालय ने फारूक को जमानत देने के निचली अदालत के आदेश पर सोमवार को रोक लगा दी थी और कहा था कि अगर आरोपी अब भी हिरासत में है तो अगले आदेश तक उन्हें रिहा नहीं किया जाए.दिल्ली पुलिस की ओर से जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने अपनी दलीलें रखनी शुरू कीं तो न्यायाधीश ने राज्य की ओर से पेश होने को लेकर सोमवार को उपजे विवाद के समाधान के बारे में पूछा और जानना चाहा कि इसमें क्यों अनावश्यक हस्तक्षेप हुआ था.

इस मामले में सोमवार को सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता (अपराध) राहुल मेहरा के बीच बहस हो गई थी. मेहरा ने कहा था कि केंद्र सरकार के पास निचली अदालत के 20 जून के आदेश के खिलाफ याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है.बाद में सालिसीटर जनरल के स्थान पर अमन लेखी इस मामले पेश हुये और उन्होंने कहा कि इस हालत में वह याचिका से अपना नाम वापस लेने की अनुमति चाहते हैं.

मंगलवार को अदालत के पूछने पर लेखी ने कहा कि वह दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए थे जो भी सोमवार को हुआ उससे बचा जा सकता था और यह अनावश्यक था.लेखी ने कहा कि उन्हें मामले पर पेश होने का निर्देश मिला था, इसलिए वह कल पेश हुए. आज की सुनवाई में राहुल मेहरा पेश नहीं हुए जो बताता है कि उनकी आपत्ति सही नहीं थी.

उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने 20 जून के आदेश को इसलिए चुनौती दी गई है क्योंकि यह पहली नजर में गैर जरूरी था. इस आदेश के तहत फारूक जमानत दी गई है. फारूक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने कहा कि पुलिस ने स्कूल मालिक को सोमवार को अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया और उन्हें हिरासत में ले लिया. उन्होंने याचिका पर जवाब देने के लिए वक्त मांगा.

दिल्ली पुलिस ने तीन जून को फारूक और 17 अन्य खिलाफ निजी स्कूल जलाने के आरोप में आरोप पत्र दायर किया था.निचली अदालत ने जमानत देने के अपने आदेश में कहा कि उनके खिलाफ दायर आरोप पत्र में उनके पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया, पिंजरा तोड़ समूह और मौलानाओं से संबंध दर्शाने वाले तथ्यों की कमी है.

स्थिति का जायजा लेने के लिए लद्दाख जाएंगे सेना प्रमुख जनरल नरवणे

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे( मंगलवार से दो दिन के लिए लद्दाख के दौरे पर होंगे और इस दौरान वह चीनी सेना के साथ छह सप्ताह से जारी गतिरोध पर वहां मौजूद सैन्य कमांडरों के साथ चर्चा करेंगे और पर्वतीय क्षेत्र में भारत की संपूर्ण सैन्य तैयारी का जायजा लेंगे. सेना के सूत्रों ने यह जानकारी दी.

सूत्रों ने कहा कि सेना प्रमुख अग्रिम चौकियों का दौरा करेंगे और वहां मौजूद सैनिकों से बातचीत करेंगे.पिछले सप्ताह वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने लद्दाख और श्रीनगर वायु सैनिक अड्डों का दौरा किया था और क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए भारतीय वायु सेना की तैयारियों का जायजा लिया था.

उच्च सैन्य कमांडरों के दो दिवसीय सम्मेलन के अंतिम सत्र में शामिल होने के तुरंत बाद जनरल नरवणे लेह के लिए रवाना होंगे.सोमवार को शुरू हुए सम्मेलन में कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर गंभीर चर्चा की.

लेह में जनरल नरवणे, चीन से लगी संवेदनशील सीमा की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली 14वीं कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह से बातचीत करेंगे.सोमवार को लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने चीन के साथ तनाव काम करने के लिए तिब्बत सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल ल्यू लिन के साथ 11 घंटे बैठक की थी.

वार्ता के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि बैठक में भारतीय पक्ष ने चीनी सैनिकों द्वारा गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर किए गए “पूर्वनियोजित” हमले के संबंध में कड़ा विरोध जताया और पूर्वी लद्दाख में गतिरोध के प्रत्येक बिंदु से चीनी सैनिकों के तत्काल पीछे हटने की मांग की.

बातचीत का उद्देश्य पेंगोंग सो समेत कई क्षेत्रों से दोनों पक्षों के सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया तय करना था जहां वे पिछले छह सप्ताह से गतिरोध की स्थिति में हैं.

सरकारी बाल संरक्षण गृह में सात लड़कियों के गर्भवती होने के मामले की हो जांच : अखिलेश

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav)ने कानपुर (Kanpur) के सरकारी बालिका संरक्षण गृह में रखी गई सात लड़कियों के गर्भवती होने के मामले की जांच की मांग की है.

अखिलेश ने सोमवार को एक ट्वीट में कहा “कानपुर के सरकारी बाल संरक्षण गृह से आई ख़बर से प्रदेश में आक्रोश फैल गया है। कुछ नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने का गंभीर खुलासा हुआ है. इनमें 57 कोरोना वायरस से और एक एड्स से भी ग्रसित पाई गयी है, इनका तत्काल इलाज हो.” प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि सरकार इन लड़कियों का शारीरिक शोषण करने वालों के ख़िलाफ़ तुरंत जांच कराये.

गौरतलब है कि कानपुर जिले में राज्य सरकार द्वारा संचालित बालिका संरक्षण गृह में रहने वाली 57 लड़कियों में से सात गर्भवती पाई गई हैं.

जिलाधिकारी ब्रह्मदेव राम तिवारी ने इसकी पुष्टि करते हुए रविवार को बताया कि गर्भवती पाई गई 5 पांच लड़कियां संक्रमित भी पाई गई हैं. इन लड़कियों को आगरा, एटा, कन्नौज, फिरोजाबाद और कानपुर की बाल कल्याण समितियों द्वारा कानपुर रेफर किया गया था.

उन्होंने बताया कि गर्भवती दो अन्य लड़कियां कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं पाई गई हैं और ये सभी लड़कियां जब कानपुर के बालिका संरक्षण गृह में लाई गई थीं उस समय भी गर्भवती थीं.

भारत-चीन टकराव पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने तोड़ी चुप्पी, दिया ये बड़ा बयान

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान को लेकर उनकी आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि मोदी को अपने बयान से चीन के षड्यंत्रकारी रुख को ताकत नहीं देनी चाहिए तथा सरकार के सभी अंगों को मिलकर मौजूदा चुनौती का सामना करना चाहिए. सिंह ने यह भी कहा कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति एवं मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता तथा यह सुनिश्चित होना चाहिए कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाए. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन तनाव विषय पर शुक्रवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कहा था कि न कोई हमारे क्षेत्र में घुसा और न ही किसी ने हमारी चौकी पर कब्जा किया है.उनके इस बयान को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय ने शनिवार को कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सर्वदलीय बैठक में की गई टिप्पणियों की कुछ हलकों में ‘‘शरारतपूर्ण व्याख्या’’ की कोशिश की जा रही है. पूर्व प्रधानमंत्री सिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘15-16 जून, 2020 को गलवान घाटी में भारत के 20 बहादुर जवानों ने वीरता के साथ अपना कर्तव्य निभाते हुए देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इस सर्वोच्च बलिदान के लिए हम इन साहसी सैनिकों एवं उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञ हैं. लेकिन उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए.’’ सिंह ने कहा, ‘‘आज हम इतिहास के एक नाजुक मोड़ पर खड़े हैं. हमारी सरकार के निर्णय एवं सरकार द्वारा उठाए गए कदम तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियां हमारा आकलन कैसे करेंगी. जो देश का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके कंधों पर कर्तव्य का गहन दायित्व है.’’उनके मुताबिक हमारे प्रजातंत्र में यह दायित्व देश के प्रधानमंत्री का है. प्रधानमंत्री को अपने शब्दों व घोषणाओं द्वारा देश की सुरक्षा एवं सामरिक तथा भूभागीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति सदैव बेहद सावधान होना चाहिए. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘चीन ने अप्रैल, 2020 से लेकर आज तक भारतीय सीमा में गलवान घाटी एवं पांगोंग सो झील इलाके में अनेकों बार घुसपैठ की है। हम न तो उनकी धमकियों एवं दबाव के सामने झुकेंगे और न ही अपनी भूभागीय अखंडता से कोई समझौता स्वीकार करेंगे.’’उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को अपने बयान से उनके षड्यंत्रकारी रुख को ताकत नहीं देनी चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार के सभी अंग इस खतरे का सामना करने तथा स्थिति को और ज्यादा गंभीर होने से रोकने के लिए परस्पर सहमति से काम करें.’’ सिंह ने कहा, ‘‘यही समय है जब पूरे राष्ट्र को एकजुट होना है तथा संगठित होकर इस दुस्साहस का जवाब देना है। हम सरकार को आगाह करेंगे कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति तथा मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता। पिछलग्गू सहयोगियों द्वारा प्रचारित झूठ के आडंबर से सच्चाई को नहीं दबाया जा सकता.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री एवं केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि वे वक्त की चुनौतियों का सामना करें और कर्नल बी. संतोष बाबू एवं हमारे सैनिकों की कुर्बानी की कसौटी पर खरा उतरें, जिन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ एवं ‘भूभागीय अखंडता’ के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी.’’ पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे कुछ भी कम किया जाना जनादेश से ऐतिहासिक विश्वासघात होगा.

योग एकता की एक शक्ति के रूप में उभरा है, यह भेदभाव नहीं करता : PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को कहा कि योग एकता की एक शक्ति के रूप में उभरा है और यह नस्ल, रंग, लिंग, धर्म और राष्ट्रों के आधार पर भेदभाव नहीं करता है. छठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अपने संदेश में उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण दुनिया को योग की आवश्यकता पहले के मुकाबले कहीं अधिक महसूस हो रही है.

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है तो इससे इस बीमारी को हराने में काफी मदद मिलेगी. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए योग में कई तकनीक, विभिन्न ‘आसन’ हैं.’’

मोदी ने कहा कि कोविड-19 (COVID-19) हमारे श्वसन तंत्र पर हमला करता है जो ‘प्राणायाम’ या सांस लेने संबंधी अभ्यास से मजबूत होता है. उन्होंने कहा, ‘‘योग एक स्वस्थ ग्रह पाने की हमारी चाह बढ़ाता है. यह एकता के लिए एक ताकत के रूप में उभरा है और मानवता के बंधन को और गहरा करता है. यह भेदभाव नहीं करता। यह नस्ल, रंग, लिंग, धर्म और राष्ट्रों के परे है. योग को कोई भी अपना सकता है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अगर हम सेहत और उम्मीद के बीच तालमेल बैठा लें तो वह दिन दूर नहीं जब विश्व स्वस्थ और खुशहाल मानवता की सफलता का गवाह बनेगा. योग निश्चित तौर पर इसे साकार करने में हमारी मदद कर सकता है.’’

उन्होंने कहा कि काम करना और अपने कर्तव्यों का उचित तरीके से निर्वहन करना भी योग है. कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बिना जन समूहों के डिजिटल मीडिया माध्यमों के जरिए ही मनाया जा रहा है.

इस बार की थीम ‘घर पर योग और परिवार के साथ योग’ है. संयुक्त राष्ट्र ने 11 दिसंबर 2014 को घोषणा की थी कि हर साल 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाया जाएगा.

शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखने में मदद कर सकता है योग : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को कहा कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की बीच योग करने से शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि योग का प्राचीन विज्ञान दुनिया को भारत का बड़ा तोहफा है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘यह देखकर खुशी हो रही है कि अधिक से अधिक लोग इसे अपना रहे हैं.’’ उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें भी साझा की जिसमें वह योग करते हुए दिखाई दे रहे हैं. राष्ट्रपति ने एक अन्य ट्वीट किया, ‘‘तनाव और संघर्ष खासतौर से कोविड-19 के बीच योग करने से शरीर को स्वस्थ और दिमाग को शांत रखने में मदद मिल सकती है. राष्ट्रपति भवन के एक अधिकारी ने बताया कि कोविंद रोज योग अभ्यास करते हैं.कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बिना जन समूहों के डिजिटल मीडिया माध्यमों के जरिए ही मनाया जा रहा है. इस बार की थीम ‘घर पर योग और परिवार के साथ योग’ है. संयुक्त राष्ट्र ने 11 दिसंबर 2014 को घोषणा की थी कि हर साल 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाया जाएगा.

बीएसएफ ने जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया

जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने शनिवार को आधुनिक राइफल और कुछ छोटे बमों से लैस पाकिस्तान के एक ड्रोन को मार गिराया. जम्मू क्षेत्र में यह पहली ऐसी घटना है जब बीएसएफ ने हथियारों और विस्फोटकों से लैस ड्रोन को मार गिराया है. इसके साथ ही ड्रोन के जरिए केंद्र शासित प्रदेश में हथियारों की तस्करी करने की पाकिस्तान की कोशिश नाकाम कर दी गई है.

अधिकारियों ने बताया कि बीएसएफ के एक गश्ती दल ने सुबह करीब पांच बजकर 10 मिनट पर सीमा चौकी पंसार के क्षेत्र में आसमान में एक ड्रोन को मंडराते देखा.उन्होंने बताया कि बीएसएफ जवानों ने नौ गोलियां चलाई और ड्रोन को भारतीय क्षेत्र में 250 मीटर अंदर की ओर मार गिराया.

अधिकारियों ने प्रारंभिक सूचना देते हुए कहा कि ड्रोन में एक अत्याधुनिक राइफल, दो मैगजीन, 60 गोलियां और सात छोटे बम रखे गए थे जिन्हें पाकिस्तानी एजेंटों को देना था.ऐसा माना जा रहा है कि पंसार सीमा चौकी के सामने अग्रिम चौकियों पर तैनात पाकिस्तानी रेंजर ड्रोन को नियंत्रित कर रहे थे.

इस बीच अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने सुबह करीब आठ बजकर 50 मिनट पर हीरानगर सेक्टर में बबिया चौकी पर गोलियां चलाईं. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात बीएसएफ ने जवाबी कार्रवाई नहीं की. स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है.

किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं: वायु सेना प्रमुख

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने शनिवार को यहां कहा कि वायुसेना लक्ष्य पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार तथा उपयुक्त जगह पर तैनात है.

यहां डुंडीगल में वायुसेना अकादमी (एएफए) में कम्बाइंड ग्रैजुएशन परेड (सीजीपी) को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वायुसेना लक्ष्य पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है और वह लद्दाख की गलवान घाटी में हमारे शूरवीरों के बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देगी.

उन्होंने कहा, ‘‘यह बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए कि हम पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिये उपयुक्त जगह पर तैनात हैं. मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम लक्ष्य पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं तथा गलवान के अपने शूरवीरों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे.’’

उनका यह बयान सोमवार रात को लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के साथ हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों के शहीद होने के बाद आया है.

भदौरिया ने कहा, ‘‘हमारे क्षेत्र में सुरक्षा परिदृश्य हमारे सशस्त्र बलों को हर समय तैयार और सतर्क रहने को कहता है. लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति इस बात का छोटा सा नजारा है कि बेहद कम समय में स्थिति से निपटने के लिए हमें की क्या करने की जरूरत है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘सैन्य वार्ता के दौरान हुए समझौतों के बाद चीन की अस्वीकार्य कार्रवाई और उसके परिणामस्वरूप जान के नुकसान के बावजूद सभी प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा स्थिति शांतिपूर्ण तरीके से हल हो जाए.’’

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि चीनी बलों के साथ झड़प के दौरान हमारे सैनिकों की वीरता ने किसी भी कीमत पर अपने देश की संप्रभुता की रक्षा करने के संकल्प को दर्शाया है.

भारत में एक दिन में COVID-19 के सबसे ज़्यादा मामलों के साथ संक्रमितों की संख्या पहुंची 4 लाख के करीब

भारत (India) में शनिवार को कोविड-19 (COVID-19) के एक दिन में सर्वाधिक 14,516 नए मामलों के सामने आने के साथ देश में संक्रमितों की कुल संख्या 3,95,048 हो गई है वहीं मौत के 375 नए मामलों के साथ अब तक 12,948 लोग इस संक्रमण से जान गंवा चुके हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आज सुबह आठ बजे जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार स्वस्थ हो रहे रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और अब तक 2,13,830 लोग संक्रमण से उबर चुके हैं, वहीं 1,68,269 मरीजों का अब भी इलाज चल रहा है. एक रोगी देश छोड़कर जा चुका है. एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इस तरह अब तक करीब 54.12 फीसदी संक्रमित स्वस्थ हो चुके हैं.’’ संक्रमण के कुल मामलों में विदेशी भी शामिल हैं.देश में लगातार नौवें दिन संक्रमण के 10 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं. गत एक जून से 20 जून के बीच देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण के दो लाख से अधिक मामले सामने आए हैं. महाराष्ट्र (Maharashtra), तमिलनाडु (Tamil Nadu), दिल्ली (Delhi), गुजरात (Gujarat) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कोविड-19 के मामलों में सबसे अधिक इजाफा देखा गया है.

शरजील इमाम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राज्यों का जवाब देखे बिना नहीं दिया जा सकता अंतरिम आदेश

उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने शुक्रवार को कहा कि कथित रूप से भड़काने वाले भाषण देने की वजह से देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू के छात्र (JNU Student) शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की याचिका पर सभी पांच राज्यों के जवाब देखे बगैर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता. शरजील इमाम ने याचिका में इस तरह के आरोपों में दर्ज सभी प्राथमिकी मिला कर एक करने का अनुरोध किया है. शीर्ष अदालत को सूचित किया गया कि शरजील की याचिका पर अभी तक दिल्ली (Delhi) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) ने जवाब दाखिल कर दिया है जबकि असम (Assam), मणिपुर (manipur) और अरूणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) ने कोई जवाब नहीं दिया है.

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘हम अन्य राज्यों के जवाब देखे बगैर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर सकते.’’ असम के वकील ने कहा कि उसे जवाब दाखिल करने के लिये कुछ और वक्त चाहिए. पीठ ने कहा, ‘‘हम समय देंगे.’’ इसके साथ ही पीठ ने असम , मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश को इस याचिका पर जवाब दााखिल करने के लिये दो सप्ताह का समय दे दिया.

पीठ ने कहा कि इन राज्यों का जवाब आने के बाद एक सप्ताह के भीतर इनका प्रत्युत्तर दाखिल किया जाये. पीठ ने इसके साथ ही यह मामला तीन सप्ताह बाद सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया. नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship (Amendment) Act -CAA) का मुखर विरोध करने वाले शरजील इमाम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज ये सारे मामले एक में मिला दिये जायें.

शीर्ष अदालत ने 26 मई को इस याचिका पर उत्तर प्रदेश, असम, अरूणाचल प्रदेश और मणिपुर से जवाब मांगा था जबकि दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया था. शरजील ने उसके खिलाफ दर्ज सारे मामले दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का भी अनुरोध अपनी याचिका में किया है.

शरजील के खिलाफ दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh) में दिये गये उसके दो भाषणों को लेकर पांच राज्यों में मामले दर्ज किये गये हैं. आरोपी के वकील ने इससे पहले न्यायालय से कहा था कि इमाम के खिलाफ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, असम, अरूणाचल प्रदेश और मणिपुर में देशद्रोह के आराप में प्राथमिकियां दर्ज की गयी हैं.

दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (Unlawful Activities (Prevention) Act -UAPA) के तहत भी मामला दर्ज किया है. दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 28 जनवरी को शरजील इमाम को जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Milia Islamia) और अलीगढ़ में कथित भड़काने वाले भाषण देने के कारण दर्ज देशद्रोह के मामले में बिहार (Bihar) के जहानाबाद (Jahanabad)  से गिरफ्तार किया था.