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यहां राजा हर साल करता है एक कुंवारी लड़की से शादी, देखें तस्वीरें

दुनियाभर में पहले राजशाही व्यवस्‍था रही है, लेकिन राजाओं के कर्मों के चलते पूरी दुनिया से यह व्यवस्‍था समाप्त हो गई. हालांकि आज भी दुनिया का एक आखिरी देश बचा है जहां पूरी तरह राजशाही सत्ता लागू है. यह देश है, स्वाजिलैंड, लेकिन हाल ही में यहां के राजा मस्वति तृतीय ने देश का नाम बदलकर किंगडम ईस्वातिनि रख दिया है.

 दुनियाभर में पहले राजशाही व्यवस्‍था रही है, लेकिन राजाओं के कर्मों के चलते पूरी दुनिया से यह व्यवस्‍था समाप्त हो गई. हालांकि आज भी दुनिया का एक आखिरी देश बचा है जहां पूरी तरह राजशाही सत्ता लागू है. यह देश है, स्वाजिलैंड, लेकिन हाल ही में यहां के राजा मस्वति तृतीय ने देश का नाम बदलकर किंगडम ईस्वातिनि रख दिया है.

यह देश अफ्रीका महाद्वीप में दक्षिण अफ्रीका से सटा हुआ है. दक्षिण अफ्रीका के लोगों को क्रिकेट के चलते भारत में काफी लोग जान गए हैं. उसी दक्षिण अफ्रीका और मोजैंबिक की सीमाओं से लगे हुए इस देश की चर्चा हाल में एक अफवाह के चलते चर्चा में आ गया था.

 यह देश अफ्रीका महाद्वीप में दक्षिण अफ्रीका से सटा हुआ है. दक्षिण अफ्रीका के लोगों को क्रिकेट के चलते भारत में काफी लोग जान गए हैं. उसी दक्षिण अफ्रीका और मोजैंबिक की सीमाओं से लगे हुए इस देश की चर्चा हाल में एक अफवाह के चलते चर्चा में आ गया था.

असल में द गॉर्जियन सरीखी कई वेबसाइटों ने लिखा है कि यहां के राजा मस्वति तृतीय ने अपने राज्य में यह संदेश दिया है कि अगर वहां किसी भी पुरुष के पास पांच से कम पत्नियां हुईं तो उन्हें कैदखाने में डाल दिया जाएगा, लेकिन राजा ने इसका खंडन कर दिया.

 असल में द गॉर्जियन सरीखी कई वेबसाइटों ने लिखा है कि यहां के राजा मस्वति तृतीय ने अपने राज्य में यह संदेश दिया है कि अगर वहां किसी भी पुरुष के पास पांच से कम पत्नियां हुईं तो उन्हें कैदखाने में डाल दिया जाएगा, लेकिन राजा ने इसका खंडन कर दिया.

इस मारफत राजा मस्वति तृतीय ने खुद अब तक कुल 15 शादियां कर चुका हैं. फिलहाल उसके पास कुल 14 पत्नियां हैं. 15 में से एक पत्नी सेंतनी मसान्गो (37 वर्ष) ने पिछले साल ही कथ‌ित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. असल में उसके हर पत्नी चुनने का रिवाज की काफी भर्तस्ना होती हैं.

 इस मारफत राजा मस्वति तृतीय ने खुद अब तक कुल 15 शादियां कर चुका हैं. फिलहाल उसके पास कुल 14 पत्नियां हैं. 15 में से एक पत्नी सेंतनी मसान्गो (37 वर्ष) ने पिछले साल ही कथ‌ित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. असल में उसके हर पत्नी चुनने का रिवाज की काफी भर्तस्ना होती हैं.

इस देश में करीब सितंबर माह के इर्द-गिर्द में यहां राजा देश की सभी कुंवारी लड़कियों की एक परेड कराता है. इसमें लड़कियों को टॉपलेस रखा जाता है. इसमें जिस भी लड़की को राजा चाहता है अपनी पत्नी बना लेता है.

 इस देश में करीब सितंबर माह के इर्द-गिर्द में यहां राजा देश की सभी कुंवारी लड़कियों की एक परेड कराता है. इसमें लड़कियों को टॉपलेस रखा जाता है. इसमें जिस भी लड़की को राजा चाहता है अपनी पत्नी बना लेता है.



पिछले साल देश की कई युवतियों ने इसका विरोध किया था. कई लड़कियों ने इस परेड में हिस्सा लेने मना कर दिया था, लेकिन राजा की जानकारी में इस बात के आने बाद उन लड़कियों के परिवारों को कॉफी जुर्माना देना पड़ा.

 पिछले साल देश की कई युवतियों ने इसका विरोध किया था. कई लड़कियों ने इस परेड में हिस्सा लेने मना कर दिया था, लेकिन राजा की जानकारी में इस बात के आने बाद उन लड़कियों के परिवारों को कॉफी जुर्माना देना पड़ा.

इसके अलावा इस देश के राजा पर लगातार ये आरोप लगते रहे हैं कि वे खुद बेहद शानो-शौकत से रहते हैं जबकि उनके देश में एक बड़ी आबादी बेहद गरीब है.

 इसके अलावा इस देश के राजा पर लगातार ये आरोप लगते रहे हैं कि वे खुद बेहद शानो-शौकत से रहते हैं जबकि उनके देश में एक बड़ी आबादी बेहद गरीब है.

लेकिन मौजूदा विवाद देश के उन पुरुषों को जेल भेजने के फरमान को लेकर उठा था. बाद में राजा ने इसे अफवाह बताया. इसके बाद सबको राहत मिली. क्योंकि पांच पत्नियां रखना वहां के लोगों के आसान नहीं था. वहां अब भी गरीब लोगों की संख्या अधिक है.

 लेकिन मौजूदा विवाद देश के उन पुरुषों को जेल भेजने के फरमान को लेकर उठा था. बाद में राजा ने इसे अफवाह बताया. इसके बाद सबको राहत मिली. क्योंकि पांच पत्नियां रखना वहां के लोगों के आसान नहीं था. वहां अब भी गरीब लोगों की संख्या अधिक है.


Bihar Board 10th Result 2020 : हिमांशु राज ने 96.20% अंक के साथ किया टॉप, देखें टॉप-10 स्टूडेंट्स की लिस्ट

बिहार बोर्ड (Bihar School Examination Board, BSEB) ने 10वीं कक्षा के रिज़ल्ट (Bihar Board 10th Result) जारी कर दिए हैं. इस परीक्षा में हिमांशु राज ने टॉप किया है. हिमांशु ने 96.20 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. बिहार बोर्ड की दसवीं क्लास की परीक्षा में राज्य भर के 15 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था. इस बार टॉप टेन स्टूडेंट्स में सिर्फ एक छात्रा ने जगह बनाई है. बता दें कि हिमांशु राज ने रोहतास के जनता हाई स्कूल, तेनुआज से पढ़ाई की है.





ये हैं 10 टॉपर
हिमांशु राज, कुल नंबर (481)
दुर्गेश कुमार, कुल नंबर (480)
शुभम कुमार, कुल नंबर (478)
राजवीर, कुल नंबर (478)
जूली कुमारी, कुल नंबर (478)
सन्नू कुमार, कुल नंबर (477)
मुन्ना कुमार, कुल नंबर (477)
नवनीत कुमार, कुल नंबर (477)
रंजीत कुमार गुप्ता, कुल नंबर (476)
अंकित राज, कुल नंबर (475)

आपको बता दें कि बिहार बोर्ड 10वीं की परीक्षा में कुल 14,94,071 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे. जिसमें 7,29,213 छात्र तथा 7,64,858 छात्राएं थे. इस बार कुल 4,03,392 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में, 5,24,217 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी में तथा 2,75,402 विद्यार्थी तृतीय श्रेणी में पास हुए हैं. बता दें कि हिमांशु राज को भी न्यूज 18 बिहार देखकर पता चला कि वे इस साल के टॉपर हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि वे टॉप टेन में आ सकते हैं. हिमांशु राज ने कहा कि वे सिर्फ एक ही ट्यूशन करते थे और उनके पिता जी भी उनको पढ़ाते थे. उन्होंने बताया कि वे रोजाना 14 घंटे पढ़ाई करते थे.


Bihar Board 10th Class Result: बिहार बोर्ड 10वीं के नतीजे जारी, 80.59% रहा रिजल्ट, यहाँ देखें नतीजे

Bihar Board Matric Result 2020 Released: बिहार बोर्ड मैट्रिक (10वीं) का रिजल्ट आज दिनांक 26 मई 2020 दिन मंगलवार को दोपहर बाद करीब 12.30 बजे घोषित कर दिया गया है. इसकी घोषणा बिहार राज्य के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के तहत किया. बिहार में दसवीं का रिजल्ट 80.59% रहा, 481 अंक (96.20%) के साथ हिमांशु राज (रौल न०-2000479) ने पहला स्थान हासिल किया.

वार्षिक माध्यमिक परीक्षा, 2020 में कुल 14,94071 विद्यार्थी शामिल हुए थे. इनमें से 403,392 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में, 5,24,217 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी में तथा 2.75,402 विद्यार्थी तृतीय श्रेणी उतीर्ण हुए है. 6,13,485 छात्र तो वहीं 5,90,545 छात्राएं पास हुई हैं.




बिहार बोर्ड 10वीं का रिजल्ट BSEB की ऑफिशियल वेबसाइट biharboardonline.com और onlinebseb.in पर जारी किया गया है. जो परीक्षार्थी इन परीक्षाओं में शामिल हुए थे. वो अब अपना रिजल्ट यहाँ से चेक कर सकते हैं. उन्हें अपना रिजल्ट चेक करने के लिए स्वयं का   अनुक्रमांक और जन्म तिथि की आवश्यकता है. इसी के माध्यम से वे अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं.

बिहार बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षा 17 फरवरी 2020 को शुरू होकर 24 फरवरी 2020 को समाप्त हुई थी. परीक्षा दोनों पालियों में आयोजित की गई. इस परीक्षा के लिए 15,29,393 छात्र-छात्राओं ने फॉर्म भरा था. इनमें 783034 लड़कियां और 746359 लड़के शामिल थे. बिहार बोर्ड 10वीं कक्षा की परीक्षा के फर्स्ट शिफ्ट में 774415 स्टूडेंट्स जबकि सेकेंड शिफ्ट में 754978 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे.



बिहार सरकार ने श्रम सुधारों पर डाला डाका !

बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग ने एक अधिसूचना जारी करते हुए श्रम अधिनियम को “सुधार” के नाम पर “कमजोर” करने की प्रक्रिया तीव्र कर दी है. यह प्रक्रिया आरंभ ही नहीं हुई है, बल्कि कोरोना के नाम पर 2014 के बाद श्रम सुधारों के नाम पर श्रमिक को नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रिया तीव्र कर दी गई है.

विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में बताया गया है कि ‘चूँकि वर्त्तमान में कोविड-19 वायरस महामारी के प्रकोप ने बिहार राज्य में औधोगिक क्रियाकलापों एवं आर्थिक गतिविधियों की गति को कम किया है’. इसलिए औधोगिक क्रियाकलापों एवं आर्थिक गतिविधियों को गति देने और प्रदेश में नये औधोगिक निवेश के अवसर पैदा करने हेतु कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 5 और 62 (2) द्वारा प्रदत शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए 9 मई 2020 से तीन माह के लिए “किसी भी व्यस्क कर्मकार श्रमिक से एक दिन में 12 घंटे से अधिक और सप्ताह में 72 घंटे से अधिक कार्य नहीं लिया जाएगा. किसी दिन में काम का विस्तार इस तरह निर्धारित होगा की प्रत्येक कर्मकार को 6 घंटे के बाद 30 मिनट का विश्राम अनिवार्य रूप से दिया जाएगा. कोई भी कर्मकार 6 घंटे से अधिक कार्य नहीं करेगा जब तक कि इसे 30 मिनट का विश्राम न दिया गया हो. इसके अनुसार प्रत्येक कर्मकार को अतिकाल कार्य हेतु कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 59 के प्रावधानों अतिकाल अवधि का नियमानुसार भुगतान किया जाएया.

जबकि कारखाना अधिनियम 1948 के पूर्व के प्रावधानों के अनुसार प्रतिदिन काम करने का समय 9 घंटा (विश्राम सहित) और प्रति सप्ताह कार्य के 48 घंटे अधिकतम था.सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस महामारी के उत्पन्न आर्थिक संकट के समय कार्य के घंटे बढ़ाने से नियोजक कम श्रमिकों की उपलब्धता में भी अपने कारखानों को चला सकेंगें. इसके साथ ही श्रमिकों को ओवरटाईम के द्वारा अपने आय में बढ़ोतरी करने का अवसर प्राप्त होगा.



परन्तु श्रमिकों के काम करने की अवधि 8 से 12 घंटे करने पर सरकार के दावों को ख़ारिज करते हुए जेवियर प्रबंधन संस्थान, जमशेदपुर के प्रोफ़ेसर केआर. श्यामसुंदर ने बताया कि ‘काम के घंटे को बढ़ाने से मजदूरों की कार्यक्षमता और उत्पादकता नकारात्मक तौर पर प्रभावित होगी. इससे मजदूरों के कामगार के तौर पर जो संतुलन स्थापित है उसपर प्रभाव पड़ेगा. यदि कोई श्रमिक किसी कारखाने में काम और विश्राम के समय मिलाकर 12.30 -13 घंटे बिताता है और 2 घंटे यात्रा में बिताता है तो उसे 14-15 घंटे इसके लिए निकालना होगा.’ इसके अतिरिक्त अगर वह अपने परिजनों के साथ नहीं रहता है तो उसको भोजन की तैयारी करनी होगी. इस तरह का जीवन लंबे समय तक गुजारना किसी श्रमिक की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है.

मजदूर-किसान शक्ति संगठन की अरुणा राय का मानना है कि यह एक लोकतान्त्रिक सरकार द्वारा विश्वासघात है, सरकार जिसे सुधार कह रही है दरअसल वह प्रतिगमन या अधिकारों का अलग होना है क्योंकि सुधार आमतौर पर बेहतर के बदलाब का संकेत माना जाता है, जबकि श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का निलंबन एक प्रकार का शोषण है जो श्रम सुधारों की अवहेलना करता है.

एटक (AITUC) की महासचिव अमरजीत सिंह का मानना है कि ‘जब औधोगिक इकाई कह रहे हैं कि एक तिहाई से अधिक श्रमिकों को काम पर नहीं रख पायेंगें तब 8 से 12 घंटे काम करने की बात की जा रही है. जो मजदूर पहले से उपलब्ध है उसको सरकार काम नहीं दे पा रही है तो 12 घंटे काम करने की बात क्यूँ की जा रही है? इस समय सबको रोजगार देने की जरुरत है इसलिए इकाइयों में कामगारों को दो-तीन शिफ्ट लगाना चाहिए, इस परिदृश्य में काम के घंटे को बढ़ाने का क्या तुक है’.
संसद की श्रम मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष भर्तहरी महताब का मानना है कि ‘एक संतुलन होना चाहिए, श्रमिकों की कीमत पर उद्योगों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है’. ऑल इंडिया किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज ने इसे मजदूरों की अस्मिता पर हमला माना. सीटू के महासचिव तपन कुमार सेन ने श्रम कानूनों में बदलाव न मानकर इसका विलोपन माना.




अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि भारत में श्रम कानूनों में हो रहे बदलाव अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होने चाहिए. इनका कहना है कि सरकार, श्रमिक और नियोक्ता इकाई के साथ त्रिपक्षीय सहमति के बाद ही श्रम कानूनों में किसी तरह का संशोधन किया जाना चाहिए. यह अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के नियमन की भी अवहेलना है.श्रम कानूनों के निलंबन से मजदूरों को मालिकों की दया पर निर्भर रहना होगा. उनके काम के घंटे बढ़ा दिए जायेगें. उनको अपनी बात रखने के अधिकार से भी हाथ धोना होगा और नौकरी से निकालना प्रबंधकों के लिए और आसन होगा. प्रबंधकों पर सरकारी नियंत्रण कमजोर होगा जो मजदूरों के शोषण की अंतहीन दिशा में ढकेल देगा.

इसके साथ श्रम कानूनों के निलंबन से श्रमिकों के शोषण को संस्थागत स्वरूप मिलेगा. इसे ऐसे समझा जा सकता है यदि किसी श्रमिक को 8 घंटे के लिए 240 रुपया मजदूरी मिलती है तो इसका मतलब है कि उसे 30 रुपया प्रति घंटा की दर से मजदूरी मिल रही है. इसके बाद अगर वह 4 घंटे ओवरटाईम करेगा तो उसे नियमानुसार प्रति घंटे का दुगुना भुगतान करना पड़ेगा, अर्थात् प्रति अतिरिक्त घंटे की मजदूरी 60 रुपया होगी. इसके अनुसार उसे ओवरटाईम का 240 रुपया और उसकी दैनिक मजदूरी 240 रुपया अर्थात् कुल मिलाकर कर्मकार के बारह घंटे का कुल मजदूरी 480 रुपया. परंतु, शोषण यंही से शुरू होता है जब मालिक उसे ओवरटाईम का भुगतान नहीं करता और श्रम कानूनों के निलंबन से कोई उसकी कारखाने की जांच नहीं करेगा. इससे मालिक का अधिकतम लाभ होगा और मजदूरों का अधिकतम नुकसान. इसके साथ कम मजदूरों से अधिकतम काम लिया जा सकेगा.

2015 में मैनुअल इंस्पेक्शन को रोककर ऑनलाइन इंस्पेक्शन की व्यवस्था को गई,जिसमे डाटा फीड नहीं होने के कारण मात्रा एक दो महीने ही यह प्रक्रिया चली और पिछले 6 वर्षों से इंस्पेक्शन लगभग बंद ही है. इस प्रकार संसद और विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों को मात्रा कार्यपालक आदेश की चतुराई से कुंद कर दिया गया है. यह कभी ऑनलाइन इंस्पेक्शन के भ्रम से तो कभी लेबर कोड के नाम पर तो कभी कोराना के नाम पर 2014 से आरंभ की गई प्रक्रिया में श्रमिक हितों के विरूद्ध तीव्रता लाई जा रही है.सरकार ने इसके अतिरिक्त औधोगिक विवाद अधिनियम 1947, ठेका मजदूर अधिनियम 1970, औधोगिक नियोजन (स्थायी आदेश) नियम, 1947 और कारखाना अधिनियम 1948 में “कारखाना” के परिभाषा में संशोधन प्रस्तावित है.

दूसरी तरफ बिहार सरकार पचास लाख श्रमिकों को रोजगार देने की तैयारी कर रही है. सरकार को अनुमान है की लगभग पच्चीस लाख प्रवासी श्रमिक बिहार वापिस आ सकते हैं जिनके लिए दीर्घकालीन रोजगार देने की तैयारी हेतु सभी जिलों में अध्ययन शुरू किया जा चुका है. सरकार ने अभी मनरेगा, नल-जल योजना, नाली-गली पक्कीकरण, सड़क निर्माण और जल-जीवन हरियाली में श्रमिकों को काम दे रही है. नयी योजनायों को शुरू करने की तैयारी चल रही है जिसमें निर्माण इकाइयों को प्रमुखता दी जाएगी. उद्योग से स्थायी रोजगार में मदद मिलेगी.

एक तरफ कोरोना काल में श्रमिकों को कानून की सुरक्षा से बाहर किया जा रहा है और श्रम सुधारों पर कुठाराघात किया जा रहा है. दूसरी तरफ पचास लाख श्रामिकों को रोजगार देने का वादा किया जा रहा है. अब देखना है की बिहार सरकार इस आपदा को अवसर में बदलती है या आपदा को महाविपदा में बदलती है. क्योंकि जब आगामी विधानसभा चुनाव होगी तो प्रवासी श्रमिक की नाराजगी सरकार हेतु परेशानी का सबब बन सकती है.

मुकेश कुमार
(लेखक पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में मीडिया के पीएचडी स्कॉलर हैं. यह लेखक के निजी विचार हैं)




सलमान खान ने लॉन्च किया पर्सनल केयर ब्रांड FRSH, सैनिटाइजर्स से की शुरुआत

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान (Salman Khan) ने अपने नवीनतम व्यावसायिक उपक्रम में FRSH ब्रांड के तहत सैनिटाइजर्स (Sanitisers) लॉन्च किया. बॉलीवुड मेगास्टार ने 24 मई की देर रात सोशल मीडिया पर अपने नए सौंदर्य और पर्सनल केयर ब्रांड FRSH के लॉन्च की घोषणा की. एक वीडियो संदेश में खान ने कहा कि उन्होंने हाल ही में FRSH नाम से एक ब्रांड लॉन्च किया था. सलमान ने कहा, शुरुआत में हमने ब्रांड के तहत डिओडोरेंट लॉन्च करने की योजना बनाई थी, लेकिन समय की जरूरत के अनुसार हम सैनिटाइजर ला रहे हैं.


कोरोनो वायरस (Coronavirus) के चलते सैनिटाइजर्स की मांग बहुत ज्यादा है और दुनिया भर में इस जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए सैनिटाइजिंग एक महत्वपूर्ण हथियार है. जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार, कोरोना ने 54 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित किया है.



देश में शुरू हुई घरेलू उड़ान सेवा, सुबह पौने 5 बजे दिल्ली से पुणे गई पहली फ्लाइट

देश में लॉकडाउन (Lockdown) के बीच बस, ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद अब आज से घरेलू उड़ान सेवा भी शुरू हो गई है. करीब दो महीने तक उड़ानें निलंबित रहने के बाद घरेलू विमानों का संचालन देशभर में आज से बहाल हो गया है. घरेलू उड़ान सेवा शुरू होने के बाद दिल्ली (Delhi) के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 4 बजकर 45 मिनट पर पुणे के लिए सबसे पहली फ्लाइट रवाना हुई. ये फ्लाइट इंडिगो (Indigo) की थी. आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल को छोड़कर पूरे देश में देर रात से यात्री एयरपोर्ट यात्रियों को आना शुरू हो गया था. इस दौरान यात्री उत्साहित तो दिखे कोरोना को लेकर उनके मन में डर भी दिखा.

वहीं, दिल्ली एयरपोर्ट पर तमाम तैयारियां नज़र आयीं. एयरपोर्ट पर रविवार देर रात से यात्री उमड़ने लगे. सोशल डिस्टनसिंग के लिए एयरपोर्ट सिक्योरिटी तैनात की गई है. लगातार टर्मिनल के बाहर जो यात्रियों को सोशल डिस्टनसिंग करने की सलाह देते हुए नज़र आये. एयरपोर्ट पर लगातार अनोउंसमेन्ट होती हुई भी नज़र आई. उसी के साथ साथ सभी यात्री मास्क पहने हुए दिखे.

यात्रियों के बैठने की व्यवस्था में कुर्सियों पर एक सीट छोड़कर ही बैठने के इंतेज़ाम किए गए हैं, हालांकि यह भी सवाल है कि यदि लोगों की भीड़ ऐसे ही समय से पहले बढ़ जाती है है तो फिर कैसे लोग सोशल डिस्टनसिंग करेंगे. उसके साथ साथ एयरपोर्ट पर हर दूसरे गेट को छोड़ कर कीओस्क नज़र आये, जहां पर सैनिटाइजर, पीपीई किट्स, मास्क्स जैसे अन्य सामान लोगों के खरीदने के लिए उपलब्ध कराया गया है.

इस शुरुआत के पहले चरण में 2800 उड़ानों को प्लान किया गया है. कोरोना वायरस (Coronavirus) को फैलने से रोकने के लिए देश में 24 मार्च से एयर ट्रैफिक को रोक दिया गया था. दिल्ली हवाईअड्डे पर आज करीब 380 विमानों का संचालन होगा. हवाईअड्डे से करीब 190 विमान रवाना होंगे और करीब 190 विमान यहां उतरेंगे.

बता दें कि विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिए चल रहा ‘मिशन वंदेभारत’ चलता रहेगा. टी-1 और टी-2 अभी बंद रहेंगे, सिर्फ टी-3 से ही डोमेस्टिक ऑपरेशंस शुरू किए जा रहे हैं.

Uttar Pradesh में खुलेंगे सरकारी ऑफिस, 3 शिफ्ट में होगा काम, 50% कर्मचारी आएंगे

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अब सभी सरकारी ऑफिस खुल जाएंगे. इन ऑफिसों में 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ काम काज शुरू होगा. नई व्यवस्था के मुताबिक सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक, सुबह 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक और सुबह 11 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक तीन शिफ्ट मे काम किया जायेगा. सभी कर्मचारियों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के पालन करना जरूरी होगा.



आदेश में लिखा गया है कि विभागाध्यक्ष या कार्यालयाध्यक्ष अपने ऑफिस में काम कर रहे कर्मचारियों का रोस्टर कुछ इस प्रकार से बनाएं ताकि सभी कर्मी अलटरनेट दिवस में कार्यालय आएं. लेकिन इस वजह से शासकीय काम में किसी तरह का व्यवधान नहीं उत्पन्न हो. आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी दफ्तरों में कार्यावधि के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही साथ अन्य सुरक्षात्मक उपायों का पूरा ध्यान रखा जाए. इसके अलावा इस बात पर भी जोर दिया गया है कि हर कर्मचारी अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल करें. सरकारी दफ्तरों में तीन पालियों में काम होगा.

अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मास्क नहीं पहनने वालों को जुर्माना किया जाए, साथ ही मौके पर ही उन्हें दो मास्क भी दिये जाएं. उन्होंने बताया कि मास्क नहीं पहनने पर अबतक प्रदेश में 8 हजार लोगों का जुर्माना किया गया है. उन्होंने बताया कि क्वारंटीन किए जाने वाले हर व्यक्ति के हर सामान जैसे बैग, मोबाइल, चार्जर को भी डिसइनफेक्ट किया जाएगा. इतना ही नहीं जब वह व्यक्ति क्वांरटीन से निकलेगा तो उस समय भी उसके सामान को डिसइनफेक्ट करने का निर्देश जारी किया गया है.



Maharashtra में COVID-19 संक्रमण के 2,608 नये मामले, संक्रमितों की संख्या पहुंची 47,000 के पार

महाराष्ट्र (Maharashtra) में शनिवार को कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के 2,608 नये मामले सामने आये, जबकि इस महमारी से 60 और लोगों की मौत हुई है. स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी दी. स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्य में संक्रमण के कुल मामले बढ़ कर 47,190 हो गये हैं और इस महामारी से मरने वाले लोगों का आंकड़ा 1,577 पहुंच गया है. विभाग ने बताया कि कोविड-19 (Covid-19) संक्रमण मुक्त हुए 13,404 लोगों को अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है. विभाग ने बताया कि राज्य में अब तक कुल 3,48,026 नमूनों की जांच हुई है.



वहीं मुंबई (Mumbai) में शनिवार को पिछले 24 घंटे में 1566 केस सामने आए. जबकि 40 लोगों की मौत हो गई. इतने केस आने के बाद मुंबई में संक्रमितों की संख्या 28,634 हो गई है.महाराष्ट्र में कोविड-19 से अब तक एक अधिकारी समेत कम से कम 18 पुलिस कर्मियों की मौत हो चुकी है. राज्य में लॉकडाउन (Lockdown) का पालन कराने में जुटी महाराष्ट्र पुलिस गंभीर रूप से इस महामारी की चपेट में है.

अधिकारी ने बताया कि अभी तक विभाग के 174 अधिकारियों और 1,497 अन्य कर्मचारियों समेत 1,671 कर्मी संक्रमण का शिकार हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में संक्रमण और इससे हुई मौत के सर्वाधिक मामले मुंबई पुलिस में सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि अभी तक कोविड-19 से ग्रसित कम से कम 42 पुलिस अधिकारी और 499 कांस्टेबल उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने राज्य में कोविड-19 के हालात को लेकर शनिवार को समीक्षा बैठक की. इस मुद्दे पर पिछले आठ दिन में दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बैठक थी.



एनसीपी (NCP) ने ट्वीट किया कि पार्टी के महाराष्ट्र इकाई प्रमुख और जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल, शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत और मुख्य सचिव अजय मेहता भी बैठक में मौजूद थे.राउत ने दिन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी और उसके बाद बैठक हुई. राजभवन ने एक बयान में कोश्यारी से राउत की मुलाकात को ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया.

पाटिल ने उद्धव और ठाकरे के बीच बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस बैठक में महाराष्ट्र में वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गयी. खासकर मुम्बई और ठाणे में अधिक मामले देखे गये हैं. वहां (इन मामलों से निपटने के लिए) किये गये इंतजामों की समीक्षा की गयी.’’उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर अस्पताल निर्धारित किये हैं.



 

COVID-19 Lockdown : बंगाल से 56 दिन बाद ऊना लौटी थी बारात, बारीतियों में शामिल युवक कोरोना पॉजिटिव

हिमाचल प्रदेश के ऊना (Una) जिले में 56 दिन बाद लौटी बारात में शामिल युवक कोरोना प़ॉजिटिव (Corona) पाया गया है. अब जिला में कोरोनावायरस में मरीजों की संख्या 19 से बढ़कर 20 हो गई है. शनिवार शाम जिला के बंगाणा (Bangana) उपमंडल के प्रोईयां गांव के 27 वर्षीय युवक की कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.

गौरतलब है कि यह युवक 21 मार्च को बंगाणा के ही छपरोह नामक गांव से 18 बारातियों संग पश्चिम बंगाल के कोलकाता में शादी समारोह में हिस्सा लेने के लिए गया था. शादी के बाद यह सभी लोग लॉक डाउन के चलते कोलकाता में ही फंस गए. लॉक डाउन और कर्फ्यू के चलते इनकी घर वापसी का रास्ता बंद हो गया था. हालांकि, सरकार ने इन लोगों को कोलकाता में ही राशन एवं अन्य चीजें उपलब्ध भी करवाई थी.


इसी बीच इन 18 बारितियों की घर वापसी 15 मई को हुई थी. यह सभी लोग कोलकाता से वापस ऊना लौटे और सभी लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन में रखा गया था. शुक्रवार स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस युवक समेत 129 लोगों के सैंपल कोरोना जांच के लिए लिए गए थे, जिनमें से 126 लोगों रिपोर्ट शुक्रवार शाम ही नेगेटिव आ गई थी, जबकि तीन रिपोर्ट शनिवार को आनी थी. इन तीन रिपोर्टों में से दो लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है और प्रोइयां के 27 वर्षीय युवक की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है.

ऊना जिला में अभी तक करीब 20 लोग कोरोना वायरस संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें से 17 लोग ठीक होकर घर वापस जा चुके हैं. वही मुंबई से पिछले दिनों लौटे हरोली और कोटला खुर्द के दो युवक अभी संक्रमित हैं. वहीं अब प्रोइयां का यह युवक ऊना जिला से तीसरा एक्टिव केस पाया गया है. डीसी उना संदीप कुमार ने इस मामले की पुष्टि की है.


RBI ने नए राहत उपाय किए, ब्याज दरों में कटौती, कर्ज वापसी पर रोक बढ़ाने का फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 संकट के प्रभाव को कम करने के लिए ब्याज दरों में कटौती, कर्ज किस्त भुगतान पर स्थगन को बढ़ाने और कॉरपोरेट को अधिक कर्ज देने के लिए बैंकों को इजाजत देने का फैसला किया. गौरतलब है कि चार दशकों से अधिक समय में पहली बार भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आने की आशंका है.

आरबीआई ने प्रमुख उधारी दर रेपो को 0.40 प्रतिशत घटाकर चार प्रतिशत कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अचानक हुई बैठक में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए रेपो दर में कटौती का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया. इस कटौती के बाद रेपो दर घटकर चार प्रतिशत रह गई है, जबकि रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत रह गई है.आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली एमपीसी ने पिछली बार 27 मार्च को रेपो दर (जिस दर पर केंद्रीय बैंक बैंकों को अल्पकालिक उधार देता है) में 0.75 प्रतिशत की कमी करते हुए इसे 4.40 प्रतिशत कर दिया था.

दास ने कहा कि कोरोना वायरस संकट के कारण कर्ज अदायगी पर स्थगन को तीन और महीने यानि अगस्त तक बढ़ा दिया गया है, ताकि कर्जदारों को राहत मिल सके.इससे पहले मार्च में केंद्रीय बैंक ने एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 के बीच सभी सावधि ऋण के किस्त की भुगतान पर तीन महीनों की मोहलत दी थी. इसके साथ ही इस तरह के सभी ऋणों की अदायगी पर रोक को तीन महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया था.

कर्ज पर किस्त भुगतान के तहत लोगों से कर्ज के लिए उनके खातों से ईएमआई नहीं ली गई. रिजर्व बैंक की ताजा घोषणा के बाद 31 अगस्त को ऋण स्थगन की अवधि खत्म होने के बाद ही ईएमआई भुगतान शुरू होगा. आरबीआई ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते आर्थिक गतिविधियां बाधित होने से भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वित्त वर्ष 2020-21 में नकारात्मक रह सकती है.

दास ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है और मुद्रास्फीति के अनुमान बेहद अनिश्चित हैं. उन्होंने कहा, ‘‘दो महीनों के लॉकडाउन से घरेलू आर्थिक गतिविधि बुरी तरह प्रभावित हुई है.’’ साथ ही उन्होंने जोड़ा कि शीर्ष छह औद्योगिक राज्य, जिनका भारत के औद्योगिक उत्पादन में 60 प्रतिशत योगदान है, वे मोटेतौर पर लाल या नारंगी क्षेत्र में हैं.

उन्होंने कहा कि मांग में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं और बिजली तथा पेट्रोलियम उत्पादों की मांग घटी है। गवर्नर ने कहा कि सबसे अधिक झटका निजी खपत में लगा है, जिसकी घरेलू मांग में 60 फीसदी हिस्सेदारी है. दास ने कहा कि मांग में कमी और आपूर्ति में व्यवधान के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि 2020-21 की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों में कुछ सुधार की उम्मीद है.

दास ने कहा कि मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण बेहद अनिश्चित है और दालों की बढ़ी कीमतें चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि कीमतों में नरमी लाने के लिए आयात शुल्क की समीक्षा करने की जरूरत है.उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रमुख मुद्रास्फीति की दर स्थिर रह सकती है और दूसरी छमाही में इसमें कमी आ सकती है. उनके मुताबिक चालू वित्त वर्ष की तीसरी या चौथी तिमाही में मु्द्रास्फीति की दर चार प्रतिशत से नीचे आ सकती है. इसके अलावा दास ने कहा कि महामारी के बीच आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने से सरकार का राजस्व बहुत अधिक प्रभावित हुआ है.

इसके अलावा बैंकों द्वारा कॉरपोरेट को दी जाने वाली ऋण राशि को उनकी कुल संपत्ति के 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है. ऐसे में बैंक कंपनियों को अधिक कर्ज दे सकेंगे.