मीडिया कर्मियों पर हमले से चिंतित राज्यपाल राम नाईक, योगी आदित्यनाथ को लिखा पत्र
अब डेबिट कार्ड के बिना एटीएम से मिलेगा कैश, जानिए कैसे?
अगर आप एटीएम से कैश निकालना चाहतें है तो आपके पास एटीएम कार्ड होना जरुरी है। लेकिन जल्द ही आपको डेबिट कार्ड से निजात मिलने वाली है, क्योंकि आने वाले दिनों में एटीएम से कैश निकालने के लिए एटीएम कार्ड नहीं बल्कि स्मार्ट फ़ोन साथ रखना होगा।

सूत्रों के मुताबिक देश में जल्द क्यूआर कोड की मदद से एटीएम से कैश निकालने की सुविधा शुरू होने जा रही है । इसके लिए आपको अपने फोन में उस बैंक का ऐप डाउनलोड करना होगा, जिसमे आपका अकाउंट है। फिर इस एप की मदद से आपको QR कोड जैनेरेट करना होगा, जिसे एटीएम मशीन पर स्कैन करने के बाद आप कुछ ही सेकेंड में एटीएम से पैसे निकाल सकेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक डेबिट कार्ड से जहाँ पैसे निकालने में 30 से 40 सेकेंड का समय लगता है वहीँ इस तकनीक से महज 10 सेकेंड में आप एटीएम मशीन से पैसे निकाल सकेंगे।
यूपी एसटीएफ ने “खून चुसवा गिरोह” का किया पर्दाफास, 5 लोग हुए गिरफ्तार
जल्द धनवान बनने और हाई प्रोफाईल स्टेट्स की जिंदगी जीने के चक्कर में पैसे कमाने के लिए कई तरह के हथकण्डे जहां अपनाए जाते रहे हैं वहीं तमाम लोग इसके लिए कई अपराध भी करते रहते हैं। लेकिन इसके लिये किसी के मासूम जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर खून का कारोबार करना कितना सही है,जरा आप खुद सोंचें। लेकिन ऐसे काले व्यवसाय करना वास्तव में काफी चौकाने वाला है। यूपी एसटीएफ ने एक ऐसे ही मामले का पर्दाफाश करते हुए काले व्यवसाय से जुड़े मौत के पांच सौदागरों को गिरफ्तार किया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे चलता है यह काला धंधा…
यूपी एसटीएफ ने खून का काला कारोबार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मौत के पांच सौदागरों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किये गये आरोपियों के कब्जे से यूपी एसटीएफ ने अवैध ब्लड व कूट रचित दस्तावेज भी बरामद किये हैं। गिरफ्तार किये गये पांचों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले में कुछ सफेदपोशों के साथ अन्य आरोपियों के भी शामिल होने की आशंका है।

खून का अवैध कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए नसीम ने यूपी एसटीएफ को पूछताछ में बताया है कि वह अपने घर पर ही प्रोफेशनल ब्लड डोनर, जिनमें नशा करने वाले लोग शामिल हैं, उन्हें कुछ पैसों का लालच देकर ब्लड खुद ही निकाल लेता है। जिसके बाद वह एक यूनिट ब्लड से दो यूनिट ब्लड बनाता है। जिसमें ब्लड पूरा करने के लिए सलाइन वॉटर मिलाता था। आरोपी इसे होल ह्यूमन ब्लड (Whole human blood) कहकर PRBC (Packed Red Blood Cell) के नाम से बेचता था, क्योंकि PRBC यूनिट में ब्लड की मात्रा कम होती है, जिससे आसानी से दो यूनिट तैयार हो जाती है।
आरोपी नसीम ने यूपी एसटीएफ को पूछताछ में यह भी बताया है कि वह उससे जुड़े कुछ सफेदपोशों के साथ अन्य लोगों के जरिये शहर के प्रमुख हॉस्पिटलों में मरीजों के परिजनों को झांसे में लेकर उनको यह ब्लड बैचता था। इसके अलावा जरूरतमंदों को उचित दाम में खून दिलाने का पूरा भरोसा देकर उनको बिश्वास में लेकर यह अवैध रक्त रु 2000 से रु 3000 प्रति यूनिट बेचता था।

आरोपी नसीम ने एक और सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि वह पैसा बचाने के लिए इस ब्लड का किसी भी तरह का कोई टेस्ट जैसे एचआईवी, हेपिटाइटिस बी, हेपिटाइटिस सी,वायरस वीडीआरएल, मलेरियल, पैरासाइट आदि की कोई टेस्ट न तो करता था और न ही कराता था।
गिरफ्तार किये गये आरोपी और उनके कारनामे…
1:- इस मामले में गिरफ्तार किये गये अन्य आरोपियों में राशिद अली उर्फ आतिफ पुत्र स्वर्गीय शौकत अली (लखनऊ सहादतगंज) शामिल है। राशिद का काम मुख्य रूप से अवैध ब्लड डोनर को सेंटर तक लाना तथा मिलावटी खून बेचने का काम करता था।
2:- राघवेंद्र प्रताप सिंह पुत्र राम देव वर्मा (नवाबगंज बाराबंकी) है। राघवेंद्र अपने आपको ब्लड बैंक का लैब टेकनीशियन बताता है,यह ब्लड बैग की अवैध सप्लाई मुख्य रूप से करता है।
3:- मोहम्मद नसीम पुत्र स्वर्गीय जाकिर अली (हसनगंज लखनऊ) को भी यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। मोहम्मद ही इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी है, जो अवैध ब्लड बैंक को अपने घर से संचालित करता था।जो अपनी घर को पूरी तरह से वीवीआईपी बना रखा है।
4:- पंकज कुमार त्रिपाठी पुत्र पारस नाथ त्रिपाठी (त्रिवेणी नगर लखनऊ) इस गैंग का मुख्य आरोपी है।पंकज ब्लड बैंक में लैब अटेंडेंट है, जो ब्लड बैंक से प्रोफेशनल डोनर से ब्लड निकाल कर नसीम को फौरन सप्लाई करता था।
5:- गिरफ्तार किए गए अंतिम आरोपियों में हनी निगम उर्फ रजनीश निगम पुत्र स्वर्गीय अमरेश कुमार (निशातगंज लखनऊ) शामिल है। हनी निगम ब्लड बैंक के फर्जी स्टीकर एवं अन्य पेपर प्रिंट कराता था, साथ ही ब्लड निकालना एवं ब्लड डोनर का इंतजाम भी करता था।
( शिवरतन कुमार गुप्ता की रिपोर्ट )
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जानिए कौन हैं एम. नागेश्वर राव, जिन्हें बनाया गया है सीबीआई का अंतरिम निदेशक
सीबीआई में चल रहे घमासान के बीच एम. नागेश्वर राव को सीबीआई के अंतरिम निदेशक का कार्यभार सौंपा गया है। वहीँ सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया है। एम. नागेश्वर राव सीबीआई में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी एम. नागेश्वर राव तेलंगाना के वारंगल जिले के रहने वाले हैं। एम. नागेश्वर राव को तेज-तर्रार और शख्त अधिकारी माना जाता है। ओडिशा में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान ही उन्होंने अवैध खनन के लिए बदनाम तलचर में अपराध पर लगाम लगाकर पहचान बनाई थी। नागेश्वर राव को मणिपुर में विद्रोही गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भी जाना जाता है। सीआरपीएफ के डीआईजी (ऑपरेशंस) के रूप में उन्होंने विद्रोहियों की कमर तोड़ दी थी। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चिटफंड घोटाले की जांच करने वाले नागेश्वर राव को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। जिनमें राष्ट्रपति पुरस्कार, ओडिशा राज्यपाल मेडल और स्पेशल ड्यूटी मेडल शामिल है।
नेपाल :₹ 37 लाख नकली नेपाली करेंसी और प्रिंटर के साथ पांच युवक गिरफ्तार
देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करने की एक बार फिर कोशिश की गई। लेकिन नेपाली पुलिस की सक्रियता एवं मजबूत गुप्त सूचना को आधार बना कर पुलिस ने नकली नोट के पांच सौदागरों को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। इन नकली नोट के सौदागरों के पास से नेपाली पुलिस ने ₹-37 लाख मूल्य के नेपाली नकली करेंसी,स्मार्ट मोबाइल फोन,कम्प्यूटर,लैपटॉप, प्रिंटर आदि सामान बरामद किया है।
अभी तक यह माना जाता रहा है की नकली नोट के कारोबार से भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की पूरी कोशिश की जा रही है।लेकिन इस कारोबार के खेल में अब पड़ोसी मुल्क नेपाल भी उलझता नजर आ रहा है। भारतीय नकली नोटों के कारोबारी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए पिछले वर्ष भारतीय प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने नोट बन्दी कर नोटों की शक्ल सूरत में बड़ा बदलाव किया। भारतीय नोटों में हुए बदलाव से सीख लेते हुए नेपाली सरकार भी काम कर रही थी। लेकिन यहां भी उसके अपने ही दगाबाज निकले। नेपाल के काठमाण्डू में ₹-37 लाख नेपाली नकली करेंसी, प्रिंटर, कम्प्यूटर, स्मार्ट मोबाइल फोन,करेंसी प्रिंटर पेपर 2 बण्डल सहित पांच युवकों को गुप्त सूचना के आधार पर काठमाण्डू और ललितपुर से नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गये अभियुक्तों की पहचान इंद्रबहादुर श्रेष्ठ, नारायण श्रेष्ठ,राज श्रेष्ठ,विकाश दोचे ,साहिल थापा के रूप में हुई है। आरोपी युवक काठमांडो के आसपास इलाके के ही रहने वाले बताए जाते हैं।नेपाली पुलिस इन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाकर कड़ाई से पूछ ताछ कर रही है ।
अयोध्या में तोगड़िया समर्थकों और पुलिस में भिड़ंत,दर्जनों हुए घायल, बढ़ा तनाव

पटाखों की बिक्री पर सख्त हुआ सुप्रीमकोर्ट, दिवाली पर सिर्फ 2 घंटे चला सकेंगे पटाखे
सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालाँकि कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर कुछ शर्तें जरुर रखीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलें में कहा कि केवल वही ट्रेडर्स पटाखे बेंच सकतें हैं जिनके पास पटाखे बेंचने सम्बंधित लाईसेंस है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक अब ई कामर्स पोर्टल्स ऑनलाइन पटाखे नहीं बेंच सकेंगे।
दरअसल वायु प्रदुषण का हवाला देते हुए सुप्रीमकोर्ट में पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने संबंधी याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जहाँ कम आवाज वाले पटाखे जलाने का आदेश दिया, वहीँ दिवाली पर पटाखे फोड़ने के लिए शाम 8 से 10 बजे तक की समय सीमा भी तय कर दी है।
जानिए प्रेगनेंसी के बाद स्ट्रेच मार्क्स हटाने के आसन तरीके



गर्भावस्था में महिलाओं के लिए फायदेमंद है तुलसी का पत्ता
गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होती है। दरअसल प्रेग्नेंसी के दौरान अगर गर्भवती महिलाएं कुछ भी ऐसा-वैसा खा लेती है तो इसका सीधा उनके पेट में पल गर्भस्थ शिशु पर होता है ऐसे में जरुरी है की वह प्रेग्नेंसी के दौरान हेल्दी खाना खाए तो ही बेहतर होगा। ऐसे में आयुर्वद में गर्भवती महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान तुलसी का सेवन करना बेहद ही फायदेमंद बताया गया है तुलसी एक औषधि है जिसका एक पत्ता गर्भवती महिला अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान खाएगी तो कई तरह की बीमारियों से उन्हे छुटकारा मिलेगा। यह एक प्राकृतिक औषधि है, जिसका कोई भी साइड एफेक्ट आप पर नही होगा। इसकी पत्तियां में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते है साथ ही यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी दुरुस्त रखने का काम करती है।
आइए जानते है की तुलसी के पत्तें प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को कैसे फायदा पहुंचाते है…
तुलसी की पत्तियों में हीलिंग क्वालिटी होती है। इसकी पत्तियों में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-फंगल गुण जो गर्भवती महिलाओ के लिए बेहद फायदेमंद है।
तुलसी की पत्तियां मैग्नीशियम का अच्छा स्त्रोत हैं। ये गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों का विकास करते है साथ गर्भवती महिला की टेंशन को भी खत्म करने का काम करते है कई महिलाए अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर टेंशन में होती है ऐसे में इसकी दो-तीन पत्तियां प्रतिदिन खाएगी तो आपकी सेहत को बेहतरीन लाभ होगा।

तुलसी के पत्ते गर्भवती महिला के पेट में पल रहे शिशु को संक्रमण से बचाते है ।तुलसी की पत्तियों में ‘विटामिन ए’ पाया जाता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए आवश्यक तत्व है। जिन बच्चों की ग्रोथ कम होती है, यदि वो गर्भवती महिलाए तुलसी के पत्तों का सेवन करेगी तो उन्हे बेहतर लाभ होगा।
रोजाना तुलसी की दो पत्तियां खाने से शरीर में खून की कमी नहीं होती है। अक्सर देखा जाता है की गर्भवस्था के दौरान अधिकर गर्भवती महिलाओं को एनिमिया की शिकायत होती है यदि आप भी एनेमिक हैं, तो हर रोज तुलसी की दो पत्तियां खाने से आपकी सेहत को भी लाभ होगा।
प्रेग्नेसी के दौरान अक्सर गर्भवती महिलाओं को खुजली की परेशानी होती है। जैसे किसी भी तरह का इन्फेक्शन या इचिंग होने जैसी ऐसे में तुलसी का अर्क अगर आप उस जगह पर लगाएगी तो आपको उस जगह पर बेहद फायदा होगा।
(शिवरतन कुमार गुप्ता )







