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पंचतत्व में विलीन हुए अटल बिहारी वाजपेयी, बेटी नमिता ने दी मुखाग्नि

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। नई दिल्ली के राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने मुखाग्नि दी।

इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। इसके साथ ही भूटान नरेश जिग्मे खेसर, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका के विदेश मंत्री भी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।

सुबह नौ बजे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर को उनके आवास से भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय लाया गया था, जहां पर आम लोगों सहित गणमान्य लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। जिसके बाद करीब दो बजे स्मृति स्थल के लिए उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री की इस अंतिम यात्रा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह उनके पार्थिव शरीर के साथ साथ पैदल चल रहें थे। उनके पीछे-पीछे हजारों लोगों का हुजूम भी अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में शामिल था। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेता भी आम लोगों के साथ पैदल स्मृति स्थल पहुंचे थे।

अटल बिहारी वाजपेयी थे इस हीरोइन के फैन, 25 बार देखी थी फिल्म 

देश के पूर्व प्रधानमंत्री  और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी आज हमारे बीच नहीं  हैं। 93 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद राजधानी दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। गुर्दा नली में संक्रमण, छाती में जकड़न, मूत्रनली में संक्रमण की शिकायत के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को बीते 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था।

देश के सबसे लोकप्रिय राजनेताओं में से एक रहे अटल बिहारी वाजपेयी का साहित्य, कविताओं और फिल्मों से भी खास नाता रहा है। लेकिन क्या आपको पता है  कि उन्हें  हेमा मालिनी की एक फिल्म इतनी ज्यादा पसंद आई थी कि उन्होंने उस फिल्म को 25 बार देखी। इस बात का खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद सांसद हेमा मालिनी ने एक कार्यक्रम के दौरान किया था।

बीजेपी संसद ने मथुरा में इस राज का खुलाशा करते हुए कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी एक फिल्म इतनी ज्यादा पसंद आयी कि उन्होंने 25 बार देखी थी। यह फिल्म 1972 में आई सीता और गीता थी।

आपको बता दें कि फिल्म ‘सीता और गीता’ में हेमा ने डबल रोल प्ले किया था। रमेश सिप्पी  द्वारा निर्देशित इस फिल्म में हेमा के अलावा धर्मेंद्र और संजीव कुमार ने अहम् भूमिका निभाई थी। इस फिल्म के लिए हेमा मालिनी को फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी मिला था।

‘अटल’ की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, पार्थिव शरीर के साथ पैदल चले मोदी

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी अपनी अंतिम यात्रा पर निकल चुकें हैं। उनके पार्थिव शरीर को बीजेपी मुख्यालय से स्मृति स्थल ले जाया जा रहा है जहां पर उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा। देश के पूर्व प्रधानमंत्री की इस अंतिम यात्रा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह उनके पार्थिव शरीर के साथ साथ पैदल चल रहें हैं। उनके पीछे-पीछे हजारों लोगों को हुजूम भी चल रहा है।

अटल को अंतिम विदाई देने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर भी शवयात्रा में शामिल हैं।

वहीँ दूसरी तरफ , स्मृति स्थल में अंत्येष्टि की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जहाँ काफी बड़ी सख्या में लोगों का हुजूम मौजूद है। बीजेपी मुख्यालय से शुरू हुई अटल की अनंत यात्रा कुछ ही देर में स्मृति स्थल पर पहुंचेगी।

शिवरतन कुमार गुप्ता को मातृ शोक, खबर सुन क्षेत्र हुआ गमगीन

महराजगंज उत्तरप्रदेश में भारतीय समाचार के ब्यूरो चीफ शिवरतन कुमार गुप्ता की माता श्रीमती जड़ावती देवी (68 वर्षीया) पत्नी श्री मिट्ठू प्रसाद का 15 अगस्त 018 नागपंचमी की देर शाम करीब 06 बजे लखनऊ के सहारा हॉस्पिटल में निधन हो गया।श्रीमती जड़ावती देवी 19 अप्रैल 016 से हार्ट,सुगर,ब्लडप्रेशर, पैनक्रियाज,लिवर इंफेक्शन और सांस रोग से जूझ रहीं थीं।जिनका इलाज शुरुआती दिनों में मेरीगोल्ड (स्वास्तिक) हॉस्पिटल गोरखपुर,संजय गाँधी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कॉलेज लखनऊ और फिर सहारा हॉस्पिटल लखनऊ से चल रहा था।

14 अगस्त 018 की शाम करीब 06 बजे उनकी तबियत लगातार बिगड़ते रहने पर तत्काल उन्हें सहारा हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में ऐडमिट किया गया।इलाज के ही दौरान शाम करीब 06 बजे उन्होंने जिंदगी की आखिरी सांस लीं।श्रीमती जड़ावती देवी अपने पीछे अपने पति के साथ 5 पुत्रियां श्रीमती अनीता देवी गुप्ता,श्रीमती संगीता गुप्ता,श्रीमती सुनीता गुप्ता,श्रीमती पुनीता गुप्ता,सुश्री कुमारी वन्दना गुप्ता और दो पुत्र शिवरतन कुमार गुप्ता ,श्रीमती रेनू राज़ मद्धेशिया (पुत्र वधु) मनीष कुमार गुप्त के आलावा सुनील कुमार, सुधीर कुमार, आकाश कुमार, आदित्य कुमार,आर्यन,अनुभव,अनमोल,लकी,अभिराज और सुश्री कुमारी पूजा गुप्ता,सुश्री कुमार प्रियंका गुप्ता,सुश्री कुमारी ज्योती मद्धेशिया,कुमारी पल्लवी गुप्ता को छोड़ गई हैं। इनके देहावसान की खबर सुनते ही पैतृक गांव मुड़ीला बाजार के आलावा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ पड़ी।

शिवरतन कुमार गुप्ता की स्वर्गीया माता जी को सहारा हॉस्पीटल से 15 अगस्त की देर रात 02 बजे निजी साधन से घर लाया गया। जिन्हें अंतिम दर्शन के लिए सुबह साढ़े आठ बजे तक रखा गया था। उसके बाद शव यात्रा निकाली गई,जिसमें गांव सहित आसपास क्षेत्रों के बड़ी तादाद में पत्रकार,व्यवसायी,अध्यापक, एवं गणमान्य लोग सामिल हुए। सभी  लोगो ने उनकी असमय मृत्यु और मृदुभाषी स्वभाव को याद कर रुंठे गले से भाव भीनि श्रधांजलि अर्पित की।

जानिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुड़ी खास बातें

भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से पूरे देश में शोक व्याप्त है। दिल्ली के एम्स  अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। भारत सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में सात दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी  पहले गैर कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने  प्रधानमंत्री के रूप में 5 साल का कार्यकाल पूरा किया था। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी )के संस्थापकों में शामिल अटल  बिहारी वाजपेयी 1996 से 1999 के बीच तीन बार प्रधानमंत्री चुने गए। वे पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार मात्र 13 दिनों तक ही चल  पाई। वहीँ  1998 में वे दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीने तक चली और जब 1999 में अटल  बिहारी वाजपेयी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने सफलतापूर्वक 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया। 

अटल बिहारी वाजपेयी  मंजे हुए राजनीतिज्ञ  होने के साथ साथ एक पत्रकार, कवि और कुशल वक्ता भी थे। तो आईये जानतें हैं  उनके जीवन से जुड़ी खास बातें ।

1.  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी  अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर 1942 में  भारत छोड़ो आंदोलन  में  कूद पड़े थे, जिसके चलते उन्हें 23 दिन जेल में गुजारना पड़ा था। 

2. अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक  थे। वे 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे।

3. अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार बलरामपुर लोकसभा सीट से निर्वाचित होकर संसद पहुंचे थे।

4. साल 1977 में जब मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली बार केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो उसमें वाजपेयी को विदेश मंत्री बनाया गया था ।

5. विदेश मंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में हिंदी में भाषण दिया था, ऐसा करने वाले वे देश के पहले नेता थे। 

6. अटल बिहारी वाजपेयी लंबे समय तक पत्रिकारिता से जुड़े रहे। उन्होंने  राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन जैसी पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया।

8. अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री चुने गए। पहली बार 1996 में दूसरी बार 1998 में और फिर तीसरी बार 1999 से 2004 तक प्रधानमंत्री रहे।

9 .अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न, पद्म विभूषण, लोकमान्य तिलक पुरस्कार,श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार, और गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन

“भारत रत्न” से  सम्मानित  देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे  93 वर्ष के थे।उनका पिछले करीब दो महीने से एम्स में इलाज चल रहा था और बीते तीन दिनों से उन्हें  जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था।

एम्स की तरफ से  जारी  बयान के मुताबिक , ‘पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 अगस्त 2018 को शाम 05.05 बजे अंतिम सांस ली। पिछले 36 घंटों में उनकी तबीयत काफी खराब हो गई थी। हमने पूरी कोशिश की पर आज उन्हें बचाया नहीं जा सका।’ वाजपेयी को यूरिन इन्फेक्शन और किडनी संबंधी परेशानी के चलते 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। मधुमेह के शिकार वाजपेयी का एक ही गुर्दा काम कर रहा था।

पूर्व पीएम अटल  बिहारी के स्वास्थ्य में बीते दो दिनों  से गिरावट आ रही थी। इससे पहले एम्स ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया था कि पूर्व प्रधानमंत्री की तबीयत काफी खराब हो गई है। इसके बाद दूसरे मेडिकल बुलेटिन में उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने की बात कही गई। इसके बाद से ही अटल को देखने के लिए एम्स में नेताओं का तांता लग गया था। 

भारतीय जनता पार्टी ( बीजेपी )के संस्थापकों में शामिल अटल  बिहारी वाजपेयी 1996 से 1999 के बीच तीन बार प्रधानमंत्री चुने गए। वे पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार मात्र 13 दिनों तक ही चल  पाई। वहीँ  1998 में वे दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीने तक चली। और जब 1999 में अटल  बिहारी वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने सफलतापूर्वक 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया। 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले वह पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे।

अटल  बिहारी वाजपेयी  10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा के लिए चुने गए। उनके जन्मदिन 25 दिसंबर को ‘गुड गवर्नेंस डे’ के तौर पर भी  मनाया जाता है। साल 2015 में  उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया था। 

PM मोदी का लालकिले से ऐलान,25 सितंबर से शुरू होगी ‘जन आरोग्‍य योजना’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 72वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से ऐलान करते हुए कहा है कि आगामी 25 सितंबर से पंडित दीन दयाल उपाध्याय जयंती पर प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस योजना से करीब 50 करोड़  लाभान्वित होंगे। वहीँ इसके अंतर्गत लोगों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा दी जाएगी। 

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के सॉफ्टवेयर की जांच चल रही है जिसके लिए एक से दो महीना लग सकता है और उसके बाद इस योजना को लॉन्च कर दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि इस योजना से भारत के गरीब लोगों को एक बहुत ही बेहतरऔर सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाएंगी।

जानिए आखिर क्या है प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य अभियान :

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत आने वाले हर परिवार को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराया जाएगा।

इस स्कीम में हॉस्पिटलाइजेशन से पहले और बाद के खर्च को भी शामिल किया गया है।

परिवार के हर सदस्य को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत लाभ मिलेगा। महिला-पुरुष, बच्चे-बूढ़े सब इस योजना के लाभार्थी हो सकते हैं।

वहीँ अस्पताल में भर्ती होने के पहले के स्वास्थ्य संबंधी खर्चे और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद के खर्चे भी इसमें शामिल होंगे।

इस योजना में मिलने वाले बीमा कवर से आप छोटे और बड़े सभी तरह के अस्पतालों में इलाज करा पाएंगे। सरकारी और चुने हुए निजी अस्पताल में इलाज की सुविधा  आपको मिलेगी।

यह योजना पूरी तरह से कैशलेस होगी। प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर करेंगी, जिसमे 60 फीसद केंद्र सरकार और 40 फीसद  का हिस्सा राज्य सरकार का होगा।

 

फिक्स हुई दीपिका अौर रणवीर की शादी, जानिए तारीख और कौन होंगे गेस्ट ?

बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण अौर अभिनेता रणवीर सिंह 20 नवंबर को इटली में शादी करने जा रहें हैं। जानेमाने अभिनेता कबीर बेदी ने फिल्मफेयर की एक खबर को ट्वीट करते हुए रणवीर और दीपिका को बधाई दी है। साथ ही उन्होंने रणवीर और दीपिका के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट को टैग करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

खबरों के मुताबिक आगामी 20 नवंबर को इटली के लेक कोमो में दीपिका पादुकोण अौर रणवीर सिंह शादी के बंधन में बंध जाएंगे। जिसका इनके फैन्स काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे। दीपिका और रणवीर ने एकसाथ फिल्म  ‘पद्मावत’, ‘ गोलियों की रासलीला – राम लीला’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ में काम किया है।

 

ये हैं बिल्वपत्र के 7 आश्चर्य, जो रखे आपको स्वस्थ और निरोग

“बिल्वपत्र” जिसे बेलपत्र भी कहा जाता है। इसका प्रयोग किसी भी पूजा में तो किया ही जाता है लेकिन इसका खास तौर से भगवान शिव के पूजन और अभिषेक में किया जाता है।अगर इसके औषधिय गुण की बात करें तो इसकी एक पत्ती रोगों को शरीर से कोसो दूर करती है।नियमित रूप से इसका इस्तेमाल किया जाए तो यह आपकी सेहत का भरोसेमन्द दोस्त भी हो सकता है। यकीन नहीं हो तो बेलपत्र से होने वाले सेहत के इन निम्न फायदों को जरूर जानें…

1:- मधुमक्खी के डंक मारने पर:-

बुखार होने पर बेल की पत्तियों के काढ़े का सेवन लाभप्रद है। यदि मधुमक्खी, बर्र अथवा ततैया के काटने पर जलन होती है। ऐसी स्थिति में काटे गए स्थान पर बेलपत्र का रस लगाने से राहत मिलती है।

2:- हृदय रोग के लिए:-

हृदय रोगियों के लिए भी बेलपत्र का प्रयोग बेहद फायदेमंद है। बेलपत्र का काढ़ा बनाकर पीने से हृदय मजबूत होता है और हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। श्वास रोगियों के लिए भी यह अमृत के समान है। इन पत्तियों का रस पीने से श्वास रोग में काफी लाभ होता है।

3:-मुँह में छाले होने पर:-

शरीर में गर्मी बढ़ने पर या मुंह में गर्मी के कारण यदि छाले हो जाएं, तो बेल की पत्तियों को मुंह में रखकर चबाने से लाभ मिलता है और छाले समाप्त हो जाते हैं।

4:- बवासीर में लाभ:-

बवासीर आजकल एक आम बीमारी हो गई है। खूनी बवासीर तो बहुत ही तकलीफ देने वाला रोग है। बेल की जड़ का गूदा पीसकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को सुबह शाम ठंडे पानी के साथ लें। यदि पीड़ा अधिक है तो दिन में तीन बार लें। इससे बवासीर में फौरन लाभ मिलता है।

5:- शरीर की गर्मी:-

यदि किसी कारण से बेल की जड़ उपलब्ध न हो सके तो कच्चे बेलफल का गूदा, सौंफ और सौंठ मिलाकर उसका काढ़ा बना कर सेवन करना भी लाभदायक होगा। यह प्रयोग एक सप्ताह तक करें।

6:- तेज बुखार :-

बरसात में अक्सर सर्दी, जुकाम और बुखार की समस्याएं अधिक होती हैं। ऐसे में बेलपत्र के रस में शहद मिलाकर पीना फायदेमंद है। वहीं विषम ज्वर हो जाने पर इसके पेस्ट की गोलियां बनाकर गुड़ के साथ खाई जाती हैं।

7 :- पेट में कीड़े होना:-

पेट या आंतों में कीड़े होना या फिर बच्चें में दस्त लगने की समस्या हो, बेलपत्र का रस पिलाने से काफी फायदा होता है और यह समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।

( शिवरतन कुमार गुप्ता )

15 अगस्त को मनाई जाएगी नागपंचमी,चढ़ेंगे नाग देवता को दूध लावा

श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पञ्चमी तिथि का हिन्दू धर्म शास्त्रों में बड़ा ही काफी महत्व होता हैं। इस दिन हिन्दू  धर्म के लोग पूरे विधि सम्मत नाग देवता की पूजा अर्चन कर परिवार के खुशहाली एवं तरक्की की कामना करते हैं। ऐसी मान्यता है की इस दिन नाग देवता की पूजा सच्चे मन से करने से काल सर्प दोषों से भी मुक्ति मिलती है। जिन जातक की जन्म कुण्डली में काल सर्पदोष हो उन जातकों को योग्य ब्राह्मण से शिव का रुद्रा भीषेक और महामृत्युंजय मन्त्र का सवा लाख पाठ कराने से काल सर्प दोषों से मुक्ति मिलती है।आइए जानते हैं नाग पञ्चमी के दिन और क्या करने चाहिए….

हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का खास महत्व है और ये देश के कई राज्यों में सर्प पूजन के साथ ही मनाया जाता है।इस दिन नागों की पूजा की जाती है और उन्हें दूध पिलाया जाता है तथा धान का लावा खिलाया जाता है।कहा जाता है नाग को खुश करने से भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है।

 

नाग देवता के मंदिर या पास के शिवमन्दिर में जा कर फल, फूल, प्रसाद,अनार,बिल्वपत्र,दूध,लावा और मंत्रों के साथ सर्पों की पूजा करें और दूध से शिव जी का अभिषेक कराएं। कहा जाता है कि नाग देवता को खुश करने से भगवान शिव भी खुश होते हैं और मानव जीवन की रक्षा करते हैं। इसे गरुड़ पंचमी के नाम से भी जाना है और नाग के साथ आप गरुड़ की भी पूजा कर सकते हैं।

 
नागपंचमी का शुभ मुहूर्त :-

नागपंचमी 15 अगस्त को है

पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त:-

 15 अगस्त को सुबह 05:55 से 8:31 तक

पंचमी तिथि प्रारंभ :–

 15 अगस्त को सुबह 03:27 बजे शुरू

 
पंचमी तिथि समाप्ति :–

16 अगस्त को सुबह 01:51 बजे खत्म

क्यों मनाई जाती है नागपंचमी:-

कहा जाता है भगवान श्री राम चन्द्र जी के अनुज (छोटे भाई)  लक्ष्मण जी शेषावतार हैं,जो भाई की सेवा में तत्पर रहते हुए बहुत दिनों  (14 वर्षों तक) अपनी पत्नी से दूर रहे।जब उनकी पत्नी को यह बात मालूम हुई की मेरे पति शेषावतार हैं…। तो उन्होंने एक रात लक्ष्मण जी से कहा की पतिदेव यदि आप कभी सर्प रूप में मेरे पास आ जाएं तो मैं आपको कैसे पहचान पाउंगी,की आप ही मेरे पति हैं।इस पर लक्ष्मण जी ने कहा की अच्छा जब वक्त आएगा तो आप पहचान लेंगी।

वक्त बीता… और उर्मिला जी अपनी ही बातें भूल बैठी। एक रात लक्ष्मण जी सर्प रूप में आकर उनसे अठखेलियां करने लगे।जब उर्मिला जी की नींद खुली तो अपने बिस्तर पर सर्प देख शोर मचाई। इतने में राजदरबार के सैनिक आकर उस सर्प की खूब पिटाई कर दिए, किसी तरह ओ सर्प (लक्ष्मण जी) भग कर अपनी जान बचाए।जब सारा मामला शांत हो गया तब लक्ष्मण जी उर्मिला जी के पास आकर पूछे की प्रिये! आपने मेरे ऊपर कितनी लाठियां बरसायीं हैं,अपने सैनिकों से कितना पिटवाया है…? यह सुनकर उनकी होश उड़ गई। नहीं प्रभु ऐसा नहीं हो सकता,मेरे बिस्तर पर एक सर्प आया था उसकी पिटाई हुई है। उन्होंने कहा की उर्मिला वो कोई और नहीं मैं ही था इतने में उर्मिला जी अपने पति से क्षमायाचना करने लगीं। जिस पर लक्ष्मण जी ने श्राप और आशीर्वाद देते हुए कहा की कलयुग में जो व्यक्ति श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग की पूजा करेगा दूध लावा चढ़ाएगा और शिव जी का दूध से अभिषेक करेगा, उसकी हर प्रकार से रक्षा होगी और मैं आपको श्राप देता हूँ की उसी दिन कन्याएं आपकी प्रतिमा कपड़े की बना कर जलाशयों पर जाएंगी जिन्हें हमारे भाई डण्डे से पिटेंगे और कन्याएं उन्हें मटर का प्रसाद वितरण करेंगी और अपने इस दोष से मुक्त होंगी। तभी से नागपंचमी का पर्व मनाया जाने लगा।

 
( शिवरतन कुमार गुप्ता )