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पाकिस्तान में बौद्ध काल का 2,300 साल पुराना मंदिर मिला

उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में पाकिस्तानी और इतालवी पुरातत्वविदों के एक संयुक्त दल ने बौद्ध काल के 2,300 साल पुराने एक मंदिर की खोज की है. इसके साथ ही कुछ अन्य बेशकीमती कलाकृतियां भी खुदाई में मिली हैं.

यह मंदिर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में बारीकोट तहसील के बौद्ध काल के बाजीरा शहर में मिला है. इस मंदिर को पाकिस्तान में बौद्ध काल का सबसे प्राचीन मंदिर बताया गया है.

इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘पाकिस्तान और इतालवी पुरातत्वविदों ने उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान में एक ऐतिहासिक स्थल पर संयुक्त रूप से खुदाई करने के दौरान बौद्ध काल के 2,300 साल पुराने एक मंदिर की खोज की है तथा इसके अलावा अन्य बेशकीमती कलाकृतियां भी बरामद की गयी हैं. स्वात में मिला यह मंदिर पाकिस्तान के तक्षशिला में मिले मंदिरों से भी पुराना है.’’

मंदिर के अलावा पुरातत्वविदों ने बौद्धकालीन 2,700 से अधिक अन्य कलाकृतियां भी बरामद की हैं जिनमें सिक्के, अंगूठियां, बर्तन और यूनान के राजा मिनांदर के काल की खरोष्ठी भाषा में लिखी सामग्री भी शामिल है.

इतालवी विशेषज्ञों ने भरोसा जताया है कि स्वात जिले के ऐतिहासिक बाजीरा शहर में खुदाई के दौरान और भी पुरातात्विक स्थल मिल सकते हैं.

पाकिस्तान में इटली के राजदूत आंद्रे फेरारिस ने पत्रकारों से कहा कि पाकिस्तान में पुरातात्विक स्थल दुनिया के विभिन्न धर्मों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.

महिलाओं के सम्मान को लेकर ‘तालिबानी सोच’ भारत में नहीं चलेगी: मुख्तार अब्बास नकवी

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता, सम्मान, सशक्तिकरण एवं संवैधानिक समानता पर ‘तालिबानी सोच और सनक’ हिंदुस्तान में नहीं चलेगी.

उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा आयोजित “अल्पसंख्यक दिवस” कार्यक्रम में यह टिप्पणी उस वक्त की है जब हाल ही में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 साल करने के सरकार के फैसले का समाजवादी के सांसदों शफुर्करहमान बर्क एवं एसटी हसन तथा कुछ अन्य लोगों ने विरोध किया है.

नकवी ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि कभी तीन तलाक की कुप्रथा को रोकने के लिए कानून बनाने का विरोध, कभी मुस्लिम महिलाओं को ‘मेहरम’ (नजदीकी पुरुष रिश्तेदार) के साथ ही हज यात्रा की बाध्यता खत्म करने पर सवाल और अब लड़कियों की शादी की उम्र के मामले में संवैधानिक समानता पर बवाल करने वाले लोग संविधान की मूल भावना के ‘पेशेवर विरोधी’ हैं.

उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘महिलाओं की स्वतंत्रता, सम्मान, सशक्तिकरण एवं संवैधानिक समानता पर तालिबानी सोच और सनक हिंदुस्तान में नहीं चलेगी.’’

उनके मुताबिक, “अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के राजनीतिक छल” को “समावेशी सशक्तिकरण के राष्ट्रवादी बल” से मोदी सरकार ने ध्वस्त किया है. भारतीय अल्पसंख्यकों की “सुरक्षा, समावेशी समृद्धि एवं सम्मान”, “संवैधानिक संकल्प” और भारतीय समाज की “सकारात्मक सोच” का नतीजा है. भारत के बहुसंख्यक समाज की सोच, अपने देश के अल्पसंख्यकों की “सुरक्षा और सम्मान के संस्कार एवं संकल्प” से भरपूर है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने 2014 के बाद 6 अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों- पारसी, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई और मुस्लिम- के 5 करोड़ से अधिक छात्रों को छात्रवृत्तियां प्रदान की. लाभार्थियों में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां शामिल हैं. इसके परिणामस्वरूप, मुस्लिम लड़कियों का स्कूल ड्रॉप आउट रेट जो पहले 70 प्रतिशत था अब घट कर लगभग 30 प्रतिशत से कम रह गया है आने वाले दिनों में जीरो प्रतिशत करना हमारा लक्ष्य है.’’

‘अल्पसंख्यक दिवस’ कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री जॉन बारला, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा, उपाध्यक्ष आतिफ रशीद और कई अन्य लोग मौजूद थे. (PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गंगा एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखी. यह एक्सप्रेस वे 594 किलोमीटर लंबा और छह लेन का होगा, जिसे 36,200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित किया जाएगा.

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार मेरठ के बिजौली गांव के पास से शुरू होकर एक्सप्रेस-वे प्रयागराज के जुदापुर दांडू गांव तक जाएगा. यह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरेगा. पूरी तरह से निर्मित होने के बाद, यह राज्य के पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों को जोड़ने वाला उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे बन जाएगा.

विज्ञप्ति में बताया गया कि इस एक्सप्रेस-वे पर शाहजहांपुर में 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी निर्मित की जाएगी, जो वायु सेना के विमानों को आपातकालीन उड़ान भरने और उतरने में सहायता प्रदान करेगी. एक्सप्रेस-वे के साथ एक औद्योगिक गलियारा बनाने का भी प्रस्ताव है.

इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी उपस्थित रहे.

Omicron Threat : ओमीक्रोन को रोकने के लिए जन स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक उपाय तत्काल बढ़ाने की जरूरत – WHO

दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सात देशों में Covid-19 के नए ओमीक्रोन स्वरूप की पुष्टि होने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शनिवार को इसे फैलने से रोकने के लिए जन स्वास्थ्य सुविधाओं एवं सामाजिक उपाय तत्काल बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि देश ठोस स्वास्थ्य एवं सामाजिक उपायों से ओमीक्रोन को फैलने से रोक सकते हैं. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘हमारा ध्यान सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों की सुरक्षा पर केंद्रित रहना चाहिए.’’ ओमीक्रोन से पैदा होने वाला खतरा तीन अहम सवालों पर आधारित है – उसका प्रसार, टीके इसके खिलाफ कितनी अच्छी सुरक्षा प्रदान करते हैं और अन्य स्वरूपों की तुलना में ओमीक्रोन स्वरूप कितना संक्रामक है,

सिंह ने कहा, ‘‘अभी तक हम यह जानते हैं कि डेल्टा स्वरूप के मुकाबले ओमीक्रोन अधिक तेजी से फैलता दिखाई देता है. डेल्टा स्वरूप के कारण पिछले कई महीनों में दुनियाभर में संक्रमण के मामले बढ़े हैं.’’ उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका से आ रहे आंकड़ों से ओमीक्रोन स्वरूप से फिर से संक्रमित होने का खतरा बढ़ता दिख रहा है. हालांकि, ओमीक्रोन से गंभीर रूप से बीमार पड़ने को लेकर उपलब्ध आंकड़े सीमित हैं.

डब्ल्यूएचओ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें आगामी हफ्तों में और सूचना मिलने की संभावना है. ओमीक्रोन को हल्का मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि अगर इससे ज्यादा गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ते, तब भी बड़ी संख्या में मामले एक बार फिर स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ डाल सकते हैं.

उन्होंने कहा कि अत: आईसीयू बिस्तर, ऑक्सीजन की उपलब्धता, पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल कर्मी समेत स्वास्थ्य देखभाल क्षमता की समीक्षा करने तथा इसे सभी स्तरों पर मजबूत करने की आवश्यकता है. सिंह ने कहा, ‘‘हमें यह करना जारी रखना चाहिए. अपनी सुरक्षा कीजिए और एक-दूसरे की सुरक्षा कीजिए. टीके की खुराक लीजिए, मास्क पहनें, दूरी बनाकर रखें, खिड़कियों खोलकर रखें, अपने हाथों को साफ रखें और सुरक्षित तरीके से खांसे और छीकें. टीके की खुराक लेने के बाद भी सभी एहतियात बरतते रहे.’’

टीकों पर नए स्वरूप के असर के बारे में उन्होंने कहा कि प्रारंभिक आंकड़ों से पता चलता है कि ओमीक्रोन स्वरूप के खिलाफ टीकों का प्रभाव कम हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई में टीके एक महत्वपूर्ण औजार हैं लेकिन जैसा कि हम जानते हैं, केवल टीकों से कोई भी देश इस महामारी से बाहर नहीं निकल सकता. हमें टीकाकरण बढ़ाना होगा और साथ ही जन स्वास्थ्य एवं सामाजिक उपायों को लागू करना होगा, जो Covid-19 के प्रसार को सीमित रखने और मौत के मामलों को कम करने में अहम साबित हुए हैं.(भाषा)

Coronavirus Update : नवी मुंबई में एक स्कूल के 16 छात्र कोरोना वायरस से संक्रमित

नवी मुंबई में घनसोली के एक स्कूल के 16 छात्र कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं और उन्हें स्थानीय कोविड देखभाल केन्द्र में भर्ती कराया गया है. नवी मुंबई नगर निगम के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि ये आठवीं से 11वीं कक्षा तक के छात्र हैं. उन्होंने कहा,‘‘ इनमें से एक छात्र के पिता नौ दिसंबर को कतर से लौटे थे. वह घनसोली के गोथीवली में परिवार के साथ रहते हैं और उनकी Covid-19 जांच नेगेटिव आई थी, लेकिन जब उनके परिजन की जांच की गई तो स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ने वाला उनका बेटा संक्रमित पाया गया.’’

अधिकारी ने बताया कि इसके बाद शेतकरी शिक्षण संस्था के सभी छात्रों की जांच की गई और अब तक 16 छात्रों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन दिन में अब तक स्कूल के 811 छात्रों की जांच की गई और शनिवार को 600 छात्रों की जांच की जाएगी.’’ ये छात्र वाशी में कोविड देखभाल केन्द्र में भर्ती हैं.

IAF Chopper Crash: ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले वायु सेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का मध्यप्रदेश के भोपाल में पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.

तमिलनाडु में कुन्नूर के पास आठ दिसंबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे में देश के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य सैन्य कर्मियों की मौत हो गई थी. इस हादसे में एकमात्र जीवित बचे ग्रुप कैप्टन वरूण सिंह का बेंगलुरू के सैनिक अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां बुधवार सुबह उनका निधन हो गया था.

सिंह की चिता को उनके छोटे भाई तनुज सिंह एवं बेटे रिद्धिमान ने मुखाग्नि दी। तनुज नौसेना में लेफ्टिनेंट कमांडर हैं.

इससे पहले, तिरंगे में लिपटे सिंह के पार्थिव शरीर को यहां स्थित सैन्य अस्पताल से सेना के वाहन में बैरागढ़ के संत हिरदाराम मुक्तिधाम लाया गया. इस दौरान उन्हें अंतिम विदाई देने आये लोग ‘भारत माता की जय’ और ‘ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह अमर रहे’ के नारे लगा रहे थे.

पार्थिव शरीर के मुक्तिधाम पहुंचते ही सेना के जवानों ने उन्हें परंपरागत ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया, जिसके बाद सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रुप कैप्टन के ताबूत पर पुष्प माला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने भी उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की.

अंतिम संस्कार के वक्त ग्रुप कैप्टन की पत्नी, बेटी, उनके पिता कर्नल (सेवानिवृत्त) केपी सिंह और मां उमा के अलावा अन्य करीबी रिश्तेदार मौजूद थे और उन्होंने अपने नायक को नम आंखों से विदाई दी.

सिंह की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री चौहान ने ट्वीट किया, ‘‘शहीद ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह जी के परिवार से संत हिरदाराम मुक्तिधाम में भेंट की. अब उनका परिवार मेरा और सम्पूर्ण मध्यप्रदेश का परिवार है. उनके परिवार की सेवा एवं देखभाल अब हम सबका कर्तव्य है और हम पूरी निष्ठा से इसका निर्वहन करेंगे.’’

उन्होंने लिखा, ‘‘अनंत आकाश के प्रहरी, ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह जी को आज प्रदेश व देश ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी है. वे हमें छोड़कर गये नहीं हैं, बल्कि अमर हो गये हैं. वे अपनी कर्तव्य परायणता, देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए सदैव याद आयेंगे. वीर सपूत के चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि.’’

खेती को कैमिस्ट्री की लैब से निकालकर प्रकृति की प्रयोगशाला से जोड़ना होगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भले ही रसायन और उर्वरकों ने हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो लेकिन अब खेती को रसायन की प्रयोगशाला से निकालकर प्रकृति की प्रयोगशाला से जोड़ने का समय आ गया है और इस दिशा में कृषि से जुड़े प्राचीन ज्ञान को ना सिर्फ फिर से सीखने की जरूरत है बल्कि उसे आधुनिक समय के हिसाब से तराशने की भी आवश्यकता है.

प्राकृतिक खेती पर आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया और कहा कि इस दिशा में नए सिरे से शोध करने होंगे और प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक सांचे में ढालना होगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती का सबसे अधिक लाभ छोटे किसानों को होगा और यदि वह प्राकृतिक खेती का रुख करेंगे तो उन्हें भी इसका लाभ होगा. उन्होंने सभी राज्यों से प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया.

उन्होंने कहा, ‘‘कृषि के अलग-अलग आयाम हो, खाद्य प्रसंस्करण हो या फिर प्राकृतिक खेती हो, यह विषय 21वीं सदी में भारतीय कृषि का कायाकल्प करने में बहुत मदद करेगा. आजादी के अमृत महोत्सव में आज समय अतीत का अवलोकन करने और उनके अनुभवों से सीख लेकर नए मार्ग बनाने का भी है.’’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद के दशकों में जिस तरह देश में खेती हुई और जिस दिशा में वह बढ़ी, वह सभी ने बहुत बारीकी से देखा है.

उन्होंने कहा, ‘‘अगले 25 वर्ष का जो हमारा सफर है, वह नई आवश्यकताओं और नयी चुनौतियों के अनुसार अपनी खेती को ढालने का है.’’ 

पिछले सात वर्ष में खेती और कृषि के क्षेत्र में उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में खेती को विभिन्न चुनौतियों से दो चार होना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘यह सही है कि रसायन और उर्वरक ने हरित क्रांति में अहम रोल निभाया है लेकिन यह भी उतना ही सच है कि हमें इसके विकल्पों पर भी साथ ही साथ काम करना होगा और अधिक ध्यान देना होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘इससे पहले खेती से जुड़ी समस्याएं भी विकराल हो जाएं, बड़े कदम उठाने का यह सही समय है. हमें अपनी खेती को कैमिस्ट्री की लैब से निकालकर प्रकृति की प्रयोगशाला से जोड़ना ही होगा. जब मैं प्रकृति की प्रयोगशाला की बात करता हूं तो ये पूरी तरह से विज्ञान आधारित ही है.’’ 

उन्होंने कहा कि खेती में उपयोग होने वाले खाद और कीटनाशक दुनिया के विभिन्न कोनों से अरबों-खरबों रुपए खर्च करके लाना होता है और इस वजह से खेती की लागत भी बढ़ती है, किसान का खर्च बढ़ता है और गरीब की रसोई भी महंगी होती है.

उन्होंने कहा कि यह समस्या किसानों और सभी देशवासियों की सेहत से भी जुड़ी है, इसलिए सतर्क व जागरूक रहने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि कम लागत और ज्यादा मुनाफा ही प्राकृतिक खेती है और आज दुनिया जितनी आधुनिक हो रही है, उतना ही वह जड़ों से जुड़ रही है.

इस शिखर सम्मेलन में प्राकृतिक खेती पर ध्यान केन्द्रित किया गया और किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके अपनाने के लाभों के बारे में सभी आवश्यक जानकारी उपलब्‍ध कराई गई.

केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी इस सम्मेलन को संबोधित किया. इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित कई नेता व केंद्रीय मंत्री उपस्थित थे. पांच हजार से अधिक किसानों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

Covid-19 Crisis : चीन में मिला कोरोना के डेल्टा वेरिएंट का नया स्ट्रेन, तेजी से बढ़ सकते हैं केस

चीन  के झेजियांग प्रांत में हाल ही में कोविड-19 के 138 मामले सामने आए हैं. ये सभी लोग कोरोना वायरस के ‘डेल्टा’ स्वरूप  के ‘उप वंश एवाई.4’ से संक्रमित हैं. इसके मद्देनजर अधिकारियों ने पूर्वी प्रांत के लाखों लोगों के बाहर यात्रा करने पर रोक लगा दी है. सरकारी ‘सीजीटीएन-टीवी’ की खबर के अनुसार, चीन में पहली बार ‘डेल्टा’ स्वरूप के नए उप वंश के मामले सामने आए हैं. सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने रविवार को अपनी एक खबर में बताया कि झेजियांग प्रांत में पांच से 12 दिसंबर के बीच कोविड-19 के 138 मामले सामने आए.

प्रांतीय मुख्यालय हांगझोऊ से रविवार को आई एक खबर में बताया गया कि झेजियांग में सामने आए 138 मामलों में से निंग्बो में 11, शाओक्सिंग में 77 और प्रांतीय राजधानी हांगझोऊ में 17 मामले सामने आए. खबर में, रोग नियंत्रण एवं रोकथाम के झेजियांग प्रांतीय केन्द्र के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया कि पूर्ण जीनोम अनुक्रमण  और विश्लेषण के बाद पता चला है, ये सभी कोरोना वायरस के ‘डेल्टा’ स्वरूप के उप वंश एवाई.4 से संक्रमित हैं. इसे अधिक संक्रामक और मूल कोरोना वायरस से अधिक ‘वायरल लोड’ वाला बताया गया है.

स्थानीय अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाते हुए जनसभाओं और यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. प्रांत की आबादी करीब 6.46 करोड़ है. सरकारी ‘सीजीटीएन-टीवी’ की खबर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के आंकड़ों के हवाले से कहा गया कि चीन में रविवार को कोविड-19 के 101 मामले सामने आए. नए 101 मामलों में से 17 लोगों को ही संक्रमण के लक्षण थे.

आयोग ने बताया कि सोमवार को सामने आए 80 मामलों में से 74 झेजियांग, पांच इनर मंगोलिया और एक शानक्सी प्रांत में सामने आए. आयोग के अनुसार, देश में अभी तक कोविड-19 के 99,780 मामले सामने आ चुके हैं और संक्रमण से 4,636 लोगों की मौत हुई है. देश में अभी 1,381 लोगों का कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जिनमें से 27 लोगों की हालत गंभीर है.

Omicron Threat : मुंबई में रैली पर राहुल गांधी की रैली को नहीं मिली इजाजत, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

मुंबई में राहुल गांधी की रैली को इजाजत न मिलने पर कांग्रेस ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बता दें कि राहुल गांधी की रैली 28 दिसंबर को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क मैदान में प्रस्तावित है. लेकिन पुलिस प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी है. इस पर मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष भाई जगताप ने आपत्ति जताई है.

बता दें कि महाराष्ट्र में तीन दलों के गठबंधन महा विकास अघाड़ी की सरकार है. इसका हिस्सा कांग्रेस भी है. इसके बाद भी राहुल गांधी की रैली को इजाजत नहीं मिलने से महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में सबकुछ ठीक न होने के कयास लगाए जा रहे हैं.

वहीं, मुंबई(Mumbai) कांग्रेस अध्यक्ष भाई जगताप ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा है कि मुंबई और महाराष्ट्र में अलग-अलग कार्यक्रम हो रहे हैं. बाजार भी खोल दिए गए है. मॉल और सिनेमाघर सभी खुले हैं. ऐसे में राहुल गांधी की मुंबई रैली को भी मंजूरी दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें समझ नहीं आ रहा है कि रैली को इजाजत क्यों नहीं मिल रही है?

वहीं, कोरोना को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वे कोविड को लेकर चिंतित हैं तो हम उन्हें अपने पत्र में पहले ही बता चुके हैं कि हम कोविड प्रोटोकॉल का पालन करेंगे. क्योंकि इसे लेकर अब ज्यादा समय नहीं बचा है इसलिए हमने अदालत का दरवाजा खटखटाया है.

India’s Tour Of South-Africa: दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट टीम के चयन से पहले वनडे कप्तानी से हटाने के बारे में बताया गया- विराट कोहली

भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली ( Virat Kohali) ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए टीम चयन से 90 मिनट पहले उन्हें एकदिवसीय टीम की कप्तानी से हटाया गया और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने उन्हें कभी टी20 टीम की कप्तानी छोड़ने पर पुनर्विचार करने को नहीं कहा जैसा बोर्ड ने दावा किया है.

दक्षिण अफ्रीका दौरे पर रवाना होने से पहले प्रेस कांफ्रेंस में भारतीय कप्तान ने सभी कड़े सवालों का जवाब दिया और कहा कि वह सीमित ओवरों की टीम के नए कप्तान रोहित शर्मा और मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के ‘विजन’ का पूरा समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि वह समझ सकते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के सीमित ओवरों के टूर्नामेंटों में ट्रॉफी नहीं जीत पाने के कारण उन्हें हटाया गया.

बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली के इस बयान के संदर्भ में कि बोर्ड ने उनसे आग्रह किया था कि वह कप्तानी नहीं छोड़ें क्योंकि सीमित ओवरों के प्रारूपों में दो कप्तान होना शायद सही नहीं होगा, कोहली ने कहा, ‘‘जो फैसला किया गया उसे लेकर जो भी संवाद हुआ, उसके बारे में जो भी कहा गया वह गलत है. ’’

उन्होंने कहा, ‘‘आठ दिसंबर को टेस्ट श्रृंखला के लिए चयन बैठक से डेढ़ घंटा पहले मेरे साथ संपर्क किया गया और इससे पहले टी20 कप्तानी को लेकर मेरे फैसले की घोषणा के बाद से मेरे साथ कोई संपर्क नहीं किया गया था. ’’ 

कोहली ने कहा, ‘‘मुख्य चयनकर्ता ने टेस्ट टीम पर चर्चा की जिस पर हम दोनों सहमत थे. बात खत्म करने से पहले मुझे बताया गया कि पांच चयनकर्ताओं ने फैसला किया है कि मैं एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय कप्तान नहीं रहूंगा जिस पर मैंने कहा ‘ठीक है, कोई बात नहीं’.’’ 

अगले सवाल पर हालांकि कोहली और बीसीसीआई पदाधिकारियों के बीच के मतभेद सामने आ गए.

लेकिन आपने कहा था कि आप सिर्फ 2023 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय विश्व कप तक कप्तान बने रहना चाहते हो? इस पर कोहली ने हंसते हुए पूछा, ‘‘क्या यह सवाल था?’’ 

इस पर संवाददाता ने दोबारा पूछा, ‘‘हां, यह सवाल है क्योंकि आपने कहा था कि आप भारत की एकदिवसीय टीम का कप्तान बने रहना चाहते हैं.’’ 

कोहली ने कहा, ‘‘जब मैंने टी20 कप्तानी छोड़ी तो मैंने पहले बीसीसीआई से संपर्क किया और उन्हें अपने फैसले के बारे में बताया और उनके (पदाधिकारियों) सामने अपना नजरिया रखा.’’ 

भारतीय कप्तान ने गांगुली के कुछ दिन पहले के बयान से बिलकुल विपरीत जानकारी देते हुए कहा, ‘‘मैंने कारण बताए कि आखिर क्यों मैं टी20 कप्तानी छोड़ना चाहता हूं और मेरे नजरिए को अच्छी तरह समझा गया. कुछ गलत नहीं था, कोई हिचक नहीं थी और एक बार भी नहीं कहा गया कि आपको टी20 कप्तानी नहीं छोड़नी चाहिए. ’’ 

कोहली ने कहा कि बीसीसीआई के पदाधिकारियों ने उनके फैसले को प्रगतिशील बताया.

उन्होंने कहा, ‘‘इसके विपरीत बीसीसीआई ने इसे प्रगतिशील और सही दिशा में उठाया गया कदम करार दिया था. उस समय मैंने कहा था कि हां, टेस्ट और एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय में मैं (कप्तान) बरकरार रहना चाहता हूं जब तक कि पदाधिकारियों और चयनकर्ताओं को लगता है कि मुझे इस जिम्मेदारी को निभाते रहना चाहिए.’’ 

कोहली ने कहा, ‘‘बीसीसीआई के साथ मेरा संवाद स्पष्ट था. मैंने विकल्प दिया था कि अगर पदाधिकारियों और चयनकर्ताओं की सोच कुछ और है तो यह (फैसला) उनके हाथ में है.’’