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E-Shram Portal: मजदूरों, वर्कर्स के लिए सरकार की नई पहल, जानिए क्या होंगे इसके फायदे

नरेंद्र मोदी सरकार असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कामगारों के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च करने जा रही है. इस पोर्टल के जरिए देश के मजदूरों का राष्ट्रीय स्तर पर एक डेटाबेस तैयार किया जाएगा. जिससे इन मजदूरों को उनके क्षमताओं के मुताबिक योजना लाकर उसमें शामिल किया जा सके.

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय असंगठित क्षेत्र के करीब 38 करोड़ मजदूरों के लिए 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर और ई-श्रम कार्ड जारी करेगा, जो पूरे देश में मान्य होगा. ई-श्रम कार्ड से देश के करोड़ों असंगठित कामगारों को एक नई पहचान मिलेगी. ये श्रम कार्ड भविष्य में उन्हें सरकार के सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का फायदा देने में मदद करेगा. इस पोर्टल पर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स, प्रवासी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं.

सरकार की इस घोषणा के बाद अब असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना , प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का लाभ मिल सकेगा.

श्रम कल्याण के महानिदेशक और मंत्रालय में संयुक्त सचिव अजय तिवारी ने कहा कि डेटाबेस में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना , प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना सहित सामाजिक सुरक्षा (पेंशन, बीमा) योजनाओं को जोड़ा जाएगा. अनौपचारिक क्षेत्र के कार्यकर्ता इस डेटाबेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे.

इसमें कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के अलावा प्रवासी श्रमिक, रेहड़ी-पटरी वाले और घरेलू कामगार शामिल हैं. उन्होंने कहा कि पोर्टल की शुरुआत के बाद असंगठित क्षेत्र के श्रमिक उसी दिन से अपना रजिस्ट्रेशन शुरू कर सकते हैं यानी आज से ही पोर्टल हो जाएगा. आज से ही रजिस्ट्रेशन के लिए श्रमिकों की सहायता के लिए एक राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर 14434 भी शुरू किया जाएगा.

आयुष्‍मान भारत योजना (प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना) में प्रत्येक परिवार को सालाना 5 लाख रुपये का फ्री हेल्थ इंश्योरेंस कवर दिया जाता है.

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए बेहतर योजना है. इसके तहत रेहड़ी पटरी लगाने वालों, रिक्शा चालक, निर्माण कार्य करने वाले मजदूर और इसी तरह के कई दूसरे कामों में लगे असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपना बुढ़ापा सुरक्षित करने में मदद मिलेगी. इस योजना के तहत 3000 रुपये महीना यानी 36000 रुपये साल की पेंशन मिलेगी.

धर्मांतरण रोधी कानून की धारा-5 पर लगी रोक हटवाने हाई कोर्ट पहुंची गुजरात सरकार

गुजरात सरकार ने नए धर्मांतरण रोधी कानून के मुद्दे पर बुधवार को उच्च न्यायालय का रुख किया. सरकार ने न्यायालय से हाल में दिए गए उस आदेश में संशोधन करने का अनुरोध किया जिसके तहत धर्मांतरण रोधी कानून की धारा-5 पर रोक लगाई गई है. राज्य सरकार ने गुजरात उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में कहा कि गुजरात धार्मिक आजादी (संशोधन) अधिनियम-2021 की धारा-5 का विवाह से कोई लेना देना नहीं है. अदालत राज्य सरकार के आवेदन पर सुनवाई को तैयार हो गई है.

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने 19 अगस्त को दिए आदेश में गुजरात धार्मिक आजादी (संशोधन) अधिनियम-2021 की धारा- 3,4, 4ए से 4सी तक, 5,6 और 6ए पर सुनवाई लंबित रहने तक रोक लगा दी थी. राज्य सरकार ने बुधवार को मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बिरेन वैष्णव की पीठ का रुख किया और संशोधित अधिनियम की धारा-5 के संदर्भ में अदालत के आदेश में संशोधन के लिए नोट परिपत्र की अनुमति मांगी. इस धारा को दो याचिकाओं के जरिये चुनौती दी गई है.

एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने अदालत से कहा कि धारा-5 का विवाह से कोई लेना देना नहीं है और यह धर्मांतरण की अनुमति है, जो पिछले 18 साल से गुजरात धार्मिक आजादी अधिनियम-2003 के तहत ली जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘ माई लॉर्ड ने मेरे तर्क को रिकॉर्ड पर लिया, मैंने कहा कि जहां तक शादी का सवाल है तो उसपर रोक नहीं है…धारा-5 का उससे कोई लेना देना नहीं है… यह जो भी धर्मांतरण करता है उसकी अनुमति लेने की बात करता है और लोग वर्ष 2003 से इस तरह की अनुमति ले रहे हैं.’’

उन्होंने कहा कि धारा-5 में ‘शादी’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है और यह धर्मांतरण के लिए जिलाधिकारी से अनुमति से संबंधित है, जो शादी से पहले या शादी के बाद या बिना शादी के मामलों में भी ली जा सकती है. त्रिवेदी ने तर्क दिया, ‘‘ दरअसल, धारा-5 आज भी होनी चाहिए जबकि स्वेच्छा से धर्मांतरण किया जा सकता है. अगर मैं मुस्लिम लड़के से शादी करना चाहता हूं, तो लोग आगे आ रहे हैं और शादी से पहले या बाद में और यहां तक कि बिना शादी के भी धर्मांतरण की अनुमति ले रहे हैं.’’ अदालत ने मामले की सुनवाई पर सहमति देते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकीलों को इसकी सूचना दी जानी चाहिए.

गौरतलब है कि संशोधित कानून की धारा-5 के तहत धार्मिक पुजारी के लिए किसी व्यक्ति का धर्मांतरण कराने से पहले जिलाधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य है. इसके साथ ही धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को भी निर्धारित आवेदन भरकर अपनी सहमति से जिलाधिकारी को अवगत कराना होगा. पिछले महीने जमीयत उलेमा ए हिंद की गुजरात इकाई ने याचिका दायर कर दावा किया कि सरकार द्वारा पारित नए कानून की कुछ धाराएं असंवैधानिक हैं.

CoronavirusUpdates: एक दिन में आए 46,164 नए मामले, 607 लोगों की मौत

देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 46,164 नए मामले सामने आए हैं और 607 लोगों की मौत हो गई है. वहीं 25 अगस्त को 37,593 नए मामले सामने आए थे और 648 लोगों की मौत हुई थी.

हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक, देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 3,25,58,530 पहुंच गई है. अब तक कुल 4,36,365 मरीजों की मौत हो चुकी है. पिछले 24 घंटे में 34,159 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हुए हैं वहीं अब तक कुल 3,17,88,440 मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं. एक्टिव मामलों की संख्या 3,33,725 हैं.  रिकवरी रेट बढ़कर 97.67 फीसदी है.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक, संक्रमण शुरू होने के बाद से अब तक कुल 51,31,29,378 कोरोना टेस्ट किए गए हैं. वहीं 25 अगस्त को 17,87,283 कोविड टेस्ट किए गए हैं.

केरल में कोरोना वायरस के 31,445 नए मामले सामने आए हैं और 215 लोगों की मौत दर्ज की हुई है. राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 35 नए मामले सामने आए हैं. इस दौरान 86 लोग डिस्चार्ज हुए हैं और एक लोगों की मौत हुई है.

महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में 5,031 नए कोविड-19 मामले सामने आए हैं।राज्य में एक्टिव मामलों की संख्या 50,183 है. अब तक कुल 62,47,414 मरीज ठीक हो चुके हैं. राज्य में कोरोना संक्रमण से 1,36,571 लोगों की मौत हो गई है.

कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सरकार वैक्सीनेशन पर जोर दे रही है. पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस वैक्सीन की 80,40,407 डोज लगाई जा चुकी हैं. वहीं अब तक वैक्सीनेशन का आंकड़ा 60,38,46,475 पहुंच गया है.

Afghanistan Crisis : सभी अफगान नागरिकों को अब ई-वीजा पर ही भारत की यात्रा करनी होगी- सरकार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान में मौजूदा हालात के मद्देनजर सभी अफगान नागरिकों को अब सिर्फ ई-वीजा पर भारत का दौरा करना होगा.

मंत्रालय की ओर से यह फैसला उस वक्त किया गया है जब कुछ दिनों पहले ही सरकार ने अफगान नागरिकों के लिए ‘आपातकालीन व अन्य वीजा’ की शुरुआत की.

गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘अफगानिस्तान में मौजूदा हालात को देखते हुए और ‘आपातकालीन व अन्य वीजा’ की शुरुआत के माध्यम से वीजा प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के मद्देनजर यह फैसला किया गया है कि सभी अफगान नागरिक अब सिर्फ ई-वीजा पर ही भारत की यात्रा कर सकेंगे.’’

गृह मंत्रालय ने यह घोषणा भी की है कि कुछ अफगान नागरिकों के पासपोर्ट खो जाने संबंधी खबरों के मद्देनजर उन सभी अफगान नागरिकों को पहले जारी वीजा तत्काल प्रभाव रद्द किये जाते हैं जो फिलहाल भारत में नहीं हैं.’’

मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत का दौरा करने के इच्छुक अफगान नागरिक ई-वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं.’’

अधिकारियों ने कहा कि अफगानिस्तान में भारत के सभी राजनयिक प्रतिष्ठान बंद हैं, इसलिए आवदेनों की छानबीन और इस पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम नयी दिल्ली में होगा.

‘आपातकालीन व अन्य वीजा’ शुरुआत में छह महीने के लिए वैध होगा. सभी अफगान नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म के मानने वाले हों, इस यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन कर सकते हैं.

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद काबुल हवाई अड्डे पर बड़ी संख्या में लोग देश से बाहर निकलने के प्रयास में जमा हैं. इसी कोशिश में कई लोगों की जान भी चली गई.

भारत ने अपने राजनयिकों, नागरिकों और कई अफगान नागरिकों, जिनमें दो सांसद शामिल हैं, को भी अफगानिस्तान से बाहर निकाला है. सोमवार की रात तक अफगानिस्तान से लगभग 730 लोगों को बाहर निकाला जा चुका था. लोगों को निकालने की प्रक्रिया 16 अगस्त को शुरू हुयी थी. भारत, अमेरिका और अन्य मित्र देशों के समन्वय से निकासी अभियान चला रहा है.

Border Dispute : असम-मेघालय सीमा पर फिर बढ़ा विवाद, एक पुलिस अधिकारी घायल

मेघालय का एक पुलिस अधिकारी बुधवार को राज्य और पड़ोसी राज्य असम के लोगों के बड़े समूहों में विवादित अंतर्राज्यीय सीमा क्षेत्र के पास आमने-सामने आने के बाद स्थिति नियंत्रित करने के प्रयास में घायल हो गया. यहां गत दिन भी दिक्कत उत्पन्न हुई थी. यह जानकारी अधिकारियों ने दी. री-भोई जिले के पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी की स्थिति अब खतरे से बाहर है.

असम और मेघालय के पुलिस अधिकारियों ने कहा कि दोनों ओर के बल मौके पर पहुंच गए हैं और स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है. यह घटना असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले के उमलापर में हुई, जहां मेघालय के री-भोई जिले के लगभग 250-300 लोगों का एक समूह उन दो व्यक्तियों से मिलने गया, जिनके साथ असम के पुलिस कर्मी ने सोमवार रात कथित रूप से दुर्व्यवहार किया था. सीमापार के प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बंकर को क्षतिग्रस्त कर दिया था.

पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हालांकि गांव जाने के दौरान स्थानीय निवासियों ने सड़क जाम कर दी और मेघालय के लोगों से उनका विवाद हुआ. री-भोई जिले के एसपी एन लामारे ने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं. लामारे ने कहा कि इस दौरान हुई हाथापाई में एक डिप्टी एसपी घायल हो गए. उन्हें एक नजदीकी चिकित्सा इकाई ले जाया गया और वह अब खतरे से बाहर हैं.

असम पुलिस शिविर के एक कर्मी द्वारा सीमावर्ती राज्य के दो लोगों के साथ सोमवार रात एक चौकी पर कथित तौर पर दुर्व्यवहार किये जाने के बाद मंगलवार सुबह उमलापर इलाके में तनाव उत्पन्न हो गया. मेघालय के लोगों के एक समूह ने मंगलवार को कथित दुर्व्यवहार का विरोध करते हुए अंतर्राज्यीय सीमा के पास असम पुलिस के एक बंकर को कथित रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया. अंतर्राज्यीय सीमा पर एक विवादित ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले 18 गांवों में से एक उमलापर की स्थिति तब दोनों पूर्वोत्तर पड़ोसी राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद शांत हो गई है.

प्रवर्तन निदेशालय ने ड्रग्स केस में रकुल प्रीत, राणा दग्गुबाती सहित 10 अन्य लोगों को किया तलब

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार साल पुराने ड्रग मामले में रकुल प्रीत सिंह, राणा दग्गुबाती और रवि तेजा सहित टॉलीवुड के 12 अभिनेताओं और निर्देशकों को तलब किया है.

ईडी के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि वित्तीय जांच एजेंसी ने रकुल प्रीत, दग्गुबाती, तेजा, पुरी जगन्नाथ, चार्ममे कौर और मुमैथ खान सहित अन्य को अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ के लिए तलब किया है.

अधिकारी ने कहा कि एजेंसी ने जगन्नाथ को 31 अगस्त को पेश होने के लिए कहा है, रकुल प्रीत को 6 सितंबर को जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है, जबकि दग्गुबाती और तेजा को क्रमश: 8 और 9 सितंबर को एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है.

अधिकारी ने कहा कि एजेंसी ने 2017 में तेलंगाना में एक हाई-एंड ड्रग्स रैकेट के संबंध में दर्ज एक मामले के आधार पर जांच का जिम्मा संभाला था.

इस मामले में ईडी ने एक्साइज डिपार्टमेंट को भी तलब किया है जो इस मामले की जांच कर रही है. दिलचस्प ये है कि जो एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है उसने सबूत के अभाव में इस मामले की जांच बीच में ही छोड़ दी है. आरोपित सितारों से भी पूछताछ हुई थी और उन्होंने इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया था.

इसके बाद ऐसा माना जा रहा था कि अप्रत्यक्ष रुप से इन सितारों को इस मामले में क्लीन चिट मिल गई है, क्योंकि इनके खिलाफ कोई चार्जशीट भी नहीं फाइल हुई थी.

तेलंगाना एसआईटी ने अगस्त 2017 में मुंबई से हैदराबाद को कोकीन की आपूर्ति करने के आरोप में एक दक्षिण अफ्रीकी नागरिक को गिरफ्तार किया था. 

दिल्ली : मनीष सिसोदिया का बड़ा दावा, बोले – केंद्र ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जांच नहीं चाहता

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को दावा किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन की कमी से संबंधित मौतों की जांच के लिए समिति गठित करने की जरूरत खारिज की है क्योंकि इस संबंध में जांच के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कार्यबल है. सिसोदिया ने कहा कि केंद्र जांच से भाग रहा है क्योंकि यदि मौतों की जांच की जाती है तो जनता स्पष्ट रूप से उनकी लापरवाही और धोखाधड़ी को देखेगी.

सिसोदिया ने यह दोहराते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा था कि ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की संख्या को सही तरीके से सामने रखने के लिए एक जांच समिति की आवश्यकता होगी. उन्होंने एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से बुधवार को प्राप्त पत्र में उन्होंने दावा किया है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद 6 मई को एक राष्ट्रीय कार्य बल का गठन किया गया था.

उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के पत्र के हवाले से कहा, ‘राष्ट्रीय कार्यबल के पास 12 संदर्भ की प्रासंगिक शर्तें हैं, जिनमें से पांच ऑक्सीजन के लिए हैं और इस कारण से दिल्ली सरकार द्वारा एक जांच समिति गठित करने की आवश्यकता नहीं है.’ सिसोदिया ने कहा कि मंडाविया ने दावा किया है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय कार्यबल को दिया गया अधिदेश ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई मौतों से संबंधित है लेकिन कार्यबल के लिए शीर्ष अदालत द्वारा निर्देशित 12 सूत्री एजेंडा अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति और भविष्य के लिए सिफारिशों और प्रबंधन से संबंधित है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘जब ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों की जांच के लिए कार्यबल के अधिदेश में कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया है, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री दावा कर रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी के कारण मौतों का आंकलन करने के लिए एक जांच समिति गठित करने की कोई आवश्यकता नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘यह केंद्र सरकार द्वारा बहुत बड़ी धोखाधड़ी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिया गया दूसरा कारण यह है कि उच्चतम न्यायालय ने इस आदेश में निर्देश दिया है कि कार्यबल के तहत दिल्ली के लिए एक उप-समूह बनाया जाए और एक अंतरिम रिपोर्ट पहले ही जारी की जा चुकी है, इसलिए जांच समिति का गठन महत्वपूर्ण नहीं है.’

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के राष्ट्रीय कार्यबल के तहत यह उल्लेख किया गया है कि ऑडिट करने का उद्देश्य केंद्र द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध कराये जाने वाले ऑक्सीजन आपूर्ति के उचित वितरण के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना है. सिसोदिया ने सवाल किया, ‘मैं केंद्रीय मंत्री से पूछना चाहता हूं कि अगर उच्चतम न्यायालय को ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों की जांच करनी थी तो केंद्र सरकार ने पहले राज्यों से मौतों की संख्या घोषित करने के लिए क्यों कहा? केंद्र सरकार किस तरह का नाटक है कर रही है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी मौतों के पीछे केंद्र द्वारा ऑक्सीजन का घोर कुप्रबंधन है. उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘इस तरह के घोर कुप्रबंधन के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैरजिम्मेदारी और उनका ध्यान हमारे देश के लोगों के बजाय पश्चिम बंगाल चुनावों की ओर होना है.’

कोरोना वैक्सीन की टेस्टिंग में शामिल लोगों को CoWIN के जरिए मिलेंगे डिजिटल सर्टिफिकेट

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि कोविड-रोधी टीके के परीक्षण में हिस्सा लेने वाले लोगों को ‘को-विन’ पोर्टल के जरिए डिजिटल प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे. मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसे परीक्षण में शामिल प्रतिभागियों से को-विन पोर्टल के माध्यम से प्रमाणपत्र जारी करने के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ट्वीट कर कहा, ‘एक स्वागत योग्य पहल के तहत अब कोविशील्ड और कौवैक्सिन के नैदानिक ​​​​परीक्षण (Clinical Testing) में हिस्सा लेने वालों को डिजिटल कोविड-19 टीकाकरण प्रमाणपत्र को-विन के जरिए जारी किए जाएंगे. राष्ट्र कोविड-19 टीका अनुसंधान एवं उपचार में उनके योगदान एवं प्रतिबद्धता के लिए आभारी है.’ उन्होंने कहा, ‘प्रतिभागी अब को-विन पोर्टल, आरोग्य सेतु, डिजिलॉकर या उमंग एप्लिकेशन के जरिए अपने प्रमाणपत्र डाउनलोड कर सकते हैं.’

इस बीच, देश में सोमवार को कोविड-19 रोधी टीके की 56,10,116 खुराक दिए जाने के साथ अब तक 58.82 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी. शाम सात बजे तक एक अनंतिम रिपोर्ट के मुताबिक टीकाकरण अभियान के 220वें दिन (23 अगस्त) को 39,62,091 लोगों को पहली खुराक और 16,48,025 लोगों को दूसरी खुराक दी गई.

सोमवार के लिए अंतिम रिपोर्ट देर रात तक तैयार हो जाएगी. मंत्रालय ने रेखांकित किया कि देश की जोखिम वाली आबादी की रक्षा के लिए एक औजार के तौर पर टीकाकरण अभियान की नियमित तौर पर समीक्षा की जा रही है और उच्च स्तर पर इसकी निगरानी की जा रही है.

कर्नाटक बना राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य

कर्नाटक ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू कर दिया है. इसके साथ ही कर्नाटक सोमवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि सरकार इस नई शिक्षा नीति को लागू करने में मदद करने के लिए डिजिटलीकरण और अनुसंधान एवं विकास की दो नीतियों को शुरू करेगी.

मुख्यमंत्री ने कर्नाटक में एनईपी की शुरुआत करते हुए कहा, ‘कर्नाटक एनईपी, 2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. अगर हम इसे सफल बनाना चाहते हैं तो हमें इसे राज्य के प्रत्येक बच्चे तक पहुंचाना होगा.’ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए और अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करने पर कर्नाटक की सराहना की.

मुख्यमंत्री ने डिजिटलीकरण की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा, ‘डिजिटलीकरण शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जिसके लिए हम एक नई डिजिटलीकरण नीति लेकर आएंगे, जो प्रत्येक गांव, विद्यालय, विश्वविद्यालय पहुंचेगी और डिग्री स्तर के विद्यार्थियों को इसके तहत आईपैड प्रदान किया जाएगा.’ उन्होंने एनईपी के माध्यम से शिक्षा में बुनियादी बदलाव लाने के लक्ष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की.

वहीं कर्नाटक में कक्षा 9 से 12वीं तक के स्कूल 23 अगस्त से फिर से खोल दिए गए हैं. हालांकि स्कूल केवल कुछ चुनिंदा जिलों में ही खोले गए हैं. कर्नाटक राज्य सरकार ने एक स्टेटमेंट ऑफ प्रोसीजर (SOP) जारी किया है और सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए SOP में बताए गए मानदंडों का पालन करना अनिवार्य है.

400 रेलवे स्टेशन, 90 यात्री रेलगाड़ियों के साथ कोंकण रेल का होगा मौद्रिकरण, मिलेंगे 1.52 लाख करोड़ रुपये

सरकार ने मौद्रिकरण के लिए कुल 400 रेलवे स्टेशनों, 90 यात्री रेलगाड़ियों, रेलवे के कई खेल स्टेडियम और कॉलोनियों के साथ ही प्रसिद्ध कोंकण और पहाड़ी रेलवे की पहचान की है. सड़क के बाद रेलवे दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जिसे महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना में शामिल किया गया है. वित्त वर्ष 2025 तक चार वर्षों में रेलवे की ब्राउनफील्ड अवसंरचना संपत्तियों का मौद्रिकरण कर 1.52 लाख करोड़ रुपये से अधिक हासिल किए जाएंगे.

ब्राउनफील्ड संपत्तियों से आशय ऐसी अवसंरचनाओं से है, जो फिलहाल उपयोग में नहीं हैं और उन्हें विकसित किया जाना है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सोमवार को जारी की गई छह लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना (एनएमपी) में रेलवे की संपत्ति का 26 प्रतिशत योगदान होगा. वित्त वर्ष 2022-25 के दौरान मौद्रिकरण के लिए चिन्हित की गई प्रमुख रेल संपत्तियों में 400 रेलवे स्टेशन, 90 यात्री रेलगाड़ियां, 1400 किलोमीटर लंबी रेल की पटरी, कोंकण रेलवे का 741 किलोमीटर लंबा हिस्सा, 15 रेलवे स्टेडियम और चयनित रेलवे कॉलोनियां और चार पहाड़ी रेल शामिल हैं.

सीतारमण ने छह लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना (एनएमपी) की घोषणा की, जिसके तहत रेलवे, बिजली से लेकर सड़क जैसे अलग अलग बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में संपत्तियों का मौद्रिकरण किया जाएगा. चार साल की अवधि में रेलवे स्टेशनों और यात्री रेलों के परिचालन को निजी हाथों में देने से क्रमश: 76,250 करोड़ रुपये और 21,642 करोड़ रुपये की प्राप्ति होगी. माल परिवहन के लिए समर्पित गलियारे के माद्रिकरण से 20,178 करोड़ रुपये, वहीं पटरी, सिग्नल और पटरियों के ऊपर लगने वाले उपकरणों संबंधी इनविट से 18,700 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है.

कोंकण रेलवे से 7,281 करोड़ और पहाड़ों पर चलने वाली रेलवे के मौद्रीकरण से 630 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. केंद्रीय बजट 2021-22 में बुनियादी ढांचे के टिकाऊ वित्तपोषण को एक प्रमुख साधन के रूप में परिचालनगत सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की संपत्तियों के मौद्रिकरण की पहचान की गयी थी. इस दिशा में बजट में एक राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना तैयार करने का भी प्रावधान किया गया. ढांचागत क्षेत्र के मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श कर नीति आयोग ने एनएमपी पर रिपोर्ट तैयार की थी.