Home Blog Page 77

Uttar Pradesh : विधानसभा में विधायकों के साथ धरने पर बैठे ओम प्रकाश राजभर, सरकार से की ये मांग

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर बुधवार को विधानसभा भवन के अंदर डॉक्‍टर भीमराव आंबेडकर का तैल चित्र लगाने की मांग को लेकर अपने विधायकों के साथ धरने पर बैठे. इससे पहले मंगलवार को राजभर ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र देकर भीमराव आंबेडकर का तैल चित्र लगाने की मांग की थी.

बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सपा और कांग्रेस के सदस्य महंगाई को लेकर अध्यक्ष के आसन के सामने आकर नारेबाजी कर रहे थे, उसी दौरान सुभासपा के सदस्यों ने आंबेडकर की तस्वीर लगवाने की मांग को लेकर नारेबाजी की. बाद में सुभासपा सदस्यों ने विधानसभा प्रांगण में स्थित चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने धरना देकर नारेबाजी भी की.

विधानसभा में सुभासपा के दल नेता ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों संग विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर मंगलवार को पत्र सौंपा और कहा कि विधानसभा भवन के अंदर बाबा साहब डाक्‍टर भीमराव आंबेडकर का तैल चित्र लगाने के संबंध में पूर्व में सदन के अंदर बात उठी थी, लेकिन अभी तक तस्‍वीर नहीं लग सकी है.

ओमप्रकाश राजभर ने कहा, ”पिछले सत्र में मैंने सदन में बाबा साहब की आयल प्रिंट फोटो (तैल चित्र) लगाने की मांग की थी जिस पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार से आश्वासन मिला था, लेकिन आज तक उनकी फोटो नहीं लगाई गई है.” राजभर ने चेतावनी दी कि अगर बाबा साहब की तस्वीर नहीं लगाई गई तो उनके दल के सदस्य आंदोलन करेंगे.

वहीं दूसरी तरफ यूपी की योगी सरकार ने मानसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश कर दिया है. प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को अनुपूरक बजट पेश किया. अनुपूरक बजट पेश करने से पहले विपक्षी दलों का हंगामा देखने को भी मिला. विपक्षी दलों ने महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर प्रदर्शन किया. सपा नेता रामगोविंद चौधरी ने कहा कि प्रदेश में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है.

Afghanistan : काबुल की ऊंची इमारतें और चकाचौंध देखकर हैरान हैं युवा तालिबान लड़ाके

अफगानिस्तान की राजधानी पर कब्जा करने वाले हजारों तालिबान लड़ाकों में से एक 22 साल के एजानुल्ला ने ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा था. काबुल की पक्की सड़कों पर ऊंचे-ऊंचे अपार्टमेंट, इमारतों में शीशे के कार्यालय और शॉपिंग मॉल उसे अचम्भे में डाल रहे थे.

गृह मंत्रालय के भीतर उम्दा फर्नीचर के बारे में उसने कहा कि वह ऐसा था जैसा उसने सपने में भी नहीं सोचा था। एजानुल्ला ने कहा कि वह अपने कमांडर से पूछेगा कि क्या उसे यहां रहने की अनुमति मिलेगी. उसने कहा, “मैं वापस नहीं जाना चाहता.”

आज का काबुल और अन्य शहर वैसे नहीं हैं जैसे 20 साल पहले के तालिबान शासन में थे जिसके लड़ाके मुख्यतः ग्रामीण इलाकों से आते हैं. अफगानिस्तान की एक पूरी पीढ़ी आधुनिकता और पश्चिमी विकास के रंग में रंगी हुई है. बहुत से लोगों को डर है कि इतने सालों में जो हासिल किया है वह तालिबान के वापस आने के बाद कहीं फिर से न खो जाए. जब दो महिलाओं ने एजानुल्ला को सड़क पर हैलो कहा तो उसे विश्वास नहीं हुआ.

उसने कहा, “उन्होंने कहा कि वे हमसे डरती थीं और सोचती थीं कि हम डरावने हैं. लेकिन मैंने उनसे कहा कि तुम मेरी बहनों की तरह हो और हम तुम्हें स्कूल जाने देंगे शिक्षा लेने देंगे और सुरक्षा देंगे. बस तुम अपने हिजाब का ध्यान रखो.”

तालिबान सचमुच बदल गया है या नहीं यह नहीं कहा जा सकता लेकिन यह वो देश नहीं है जिस पर संगठन ने गृह युद्ध के चार साल बाद 1996 में कब्जा किया था. सोवियत संघ की वापसी और 1992 में कम्युनिस्ट समर्थक सरकार के जाने के बाद अफगानिस्तान को गृह युद्ध झेलना पड़ा था जिसके बाद तालिबान का शासन रहा था.

उस जमाने में शहर खंडहर की शक्ल में हुआ करते थे जिस पर स्थानीय लड़ाके प्रशासन चलाते थे. ज्यादातर अफगान टूटी फूटी सड़कों, साईकिल या पीली टैक्सी में चला करते थे. पूरे देश में उस समय केवल एक कम्प्यूटर था जो तालिबान के नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के पास हुआ करता था.

मजे की बात यह थी कि उसे वह चालू करना तक नहीं आता था. वर्ष 2001 में तालिबान का शासन समाप्त होने और इस साल फिर से बहाल होने के बीच देश में बहुत बदलाव आ चुका है.

तालिबान शासन के तहत अफगानिस्तान में टेलीविजन और गीत संगीत प्रतिबंधित था, लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी थी और महिलाएं घरों के बाहर काम नहीं कर सकती थीं.

लेकिन आज देश में चार मोबाइल कंपनियां और कई सेटेलाइट टीवी स्टेशन हैं जहां महिला एंकर काम करती हैं जिनमें से एक ने सोमवार को तालिबान के एक अधिकारी का साक्षात्कार लिया था. स्वयं तालिबान लड़ाकों के हाथों में महंगे मोबाइल फोन देखे गए जिनसे वह सेल्फी लेते नजर आए.

तालिबान लड़ाके आधुनिकता के रंग में रंगे काबुल शहर को देखकर हैरान हैं. ऑनलाइन उपलब्ध वीडियो में वे एक मनोरंजन पार्क में मस्ती करते और जिम में देखे गए.

तालिबान के कब्जे के बावजूद राजधानी में ही रूकने का फैसला करने वाले देश के लोकप्रिय टोलो टीवी नेटवर्क के मालिक साद मोहसेनी ने कहा कि बहुत से अफगान लोगों को तालिबान के वेश में लुटेरों का डर सता रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘ ये तालिबान का रूप धरने वाले लुटेरे अधिक खतरनाक हैं क्योंकि ये केवल लफंगे हैं.’’

Sarkari Naukri 2021: इलाहाबाद हाई कोर्ट में निकली असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर के पद पर भर्ती, 1,42,400 रुपये तक होगी सैलरी

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने इलाहाबाद हाई कोर्ट(AHC) में रिव्यू ऑफिसर (RO) और असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर (ARO) के पद पर भर्ती के लिए अपनी वेबसाइट भर्ती.nta.nic.in और allahabadhighcourt.in पर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है. AHC ऑनलाइन आवेदन 17 अगस्त से 16 सितंबर 2021 तक उपलब्ध हैं.

रिव्यू ऑफिसर (R0) और असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर (ARO) के लिए कुल 396 पद खाली हैं. जिनमें से 46 रिव्यू अधिकारी के लिए और 350 असिस्टेंट रिव्यू अधिकारी (ARO) के लिए हैं.

पदों के लिए चयन रिव्यू ऑफिसर भर्ती परीक्षा-2021 और असिस्टेंटरिव्यू ऑफिसर भर्ती परीक्षा-2021 के आधार पर किया जाएगा जो ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जाएगा.

यहां जानें- भर्ती की जरूरी डिटेल्स

– आवेदन की प्रक्रिया- आज से (17 अगस्त 2021) शुरू हो गई है.

– आवेदन  करने की आखिरी तारीख-  16 सितंबर 2021

– आवेदन फॉर्म के विवरण में सुधार की अवधि (केवल ऑनलाइन) – 18 सितंबर से 21 सितंबर 2021

जानें सैलरी

असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर (ARO): 44900 से 142400 रुपये तक.

रिव्यू ऑफिसर (RO): 47600 से 151100 रुपये तक

 कैसे होगा चयन

उम्मीदवार का चयन दो चरणों की परीक्षा के आधार पर किया जाएगा:

– मल्टीपल ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट

– कंप्यूटर नॉलेज टेस्ट

आवेदन फीस

जनरल / OBC उम्मीदवारों के लिए – 800 रुपये

उत्तर प्रदेश के SC-ST उम्मीदवारों के लिए- 600 रुपये

कैसे करना है आवेदन

इच्छुक उम्मीदवार इस पद पर आवेदन करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट allahabadhighcourt.in पर जा सकते हैं.

मुंबई हाई कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ दी मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति

मुंबई हाई कोर्ट ने कोविड-19 के मद्देनजर कुछ शर्तों के साथ शिया मुस्लिम समुदाय को मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति दे दी है. 

न्यायमूर्ति के के तातेड़ और न्यायमूर्ति पी के चव्हाण की खंडपीठ ने कहा कि 20 अगस्त को तीन घंटे के जुलूस के दौरान कोविड ​​​​-19 प्रोटोकॉल के अनुपालन के अलावा केवल सात ट्रकों के साथ जुलूस निकालने की अनुमति होगी. प्रत्येक ट्रक में 15 से अधिक लोग नहीं होने चाहिये.

हाई कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों ने कोविड-19 वैक्सीन की दोनों खुराक ले ली हैं और अंतिम खुराक लिये 14 दिन हो गए हैं, केवल उन्हें ही ट्रक में सवार होने की अनुमति होगी. 

कोर्ट ने कहा , “पांच ताजिया निकालने की अनुमति दी जाएगी. 105 व्यक्तियों में से केवल 25 को ही कर्बला के अंदर जाने की अनुमति होगी.”  याचिकाकर्ता ने 18 से 20 अगस्त तक प्रतिदिन दो घंटे के लिए 1,000 लोगों को जुलूस में शामिल होने की अनुमति मांगी थी.

मुंबई हाई कोर्ट ने ऑल इंडिया इदारा तहफ्फुज-ए-हुसैनियत की याचिका पर यह आदेश पारित किया. याचिका में मुहर्रम के दौरान जुलूस निकालने और धार्मिक क्रिया करने के लिए अनुमति देने का अनुरोध किया गया था.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजेंद्र शिरोडकर ने अदालत को सूचित किया कि ताजिया (इमाम हुसैन के मकबरे की प्रतिकृति) निकालना और भोजन व पानी के लिए सबील, स्टॉल लगाना शिया धर्म की रस्म हिस्सा है. इसके बिना अनुष्ठान पूरा नहीं होगा. हालांकि, सरकारी वकील पूर्णिमा कंथारिया ने याचिका का विरोध किया और दलील दी कि भीड़ को नियंत्रित करना, विशेष रूप से एक धार्मिक जुलूस में, मुश्किल हो जाता है.

Afghanistan Crisis : भारत काबुल से अपने राजनयिकों, अधिकारियों को वापस लाया

काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां खराब होते सुरक्षा हालात के मद्देनजर भारत अफगानिस्तान में अपने राजदूत और भारतीय दूतावास के अपने कर्मियों को एक सैन्य विमान से मंगलवार को स्वदेश लेकर आया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना का सी-17 विमान राष्ट्रीय राजधानी के निकट हिंडन एयरबेस के मार्ग में पूर्वाह्न करीब 11 बजकर 15 मिनट पर गुजरात के जामनगर स्थित भारतीय वायुसेना अड्डे पर उतरा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि यह फैसला किया गया है कि काबुल में भारत के राजदूत और उनके भारतीय कर्मियों को मौजूदा हालात के मद्देनजर तत्काल देश वापस लाया जाएगा.

बागची ने ट्वीट किया, ‘‘मौजूदा हालात के मद्देनजर, यह फैसला किया गया है कि काबुल में हमारे राजदूत और उनके भारतीय कर्मियों को तत्काल भारत लाया जाएगा.’’

भारत के राजदूत रुद्रेंद्र टंडन और अन्य अधिकारियों तथा दूतावास के सुरक्षा कर्मियों समेत 120 से अधिक लोगों को लेकर भारतीय वायुसेना के विमान ने पूर्वाह्न करीब 11 बजे काबुल हवाईअड्डे से उड़ान भरी. ऐसा बताया जा रहा है कि इस विमान से कुछ अन्य भारतीय नागरिक भी लौटे हैं.

भारतीयों को निकालने के लिए अफगानिस्तान से भारत आने वाला यह दूसरा विमान है. इससे पहले, काबुल में हवाईअड्डा संचालन निलंबित होने से पहले एक अन्य सी-17 विमान के जरिए सोमवार को कुछ भारतीय दूतावास कर्मियों समेत करीब 40 लोगों को अफगानिस्तान से भारत लाया गया था. दोनों सैन्य विमान पाकिस्तानी हवाईक्षेत्र के बजाए ईरानी हवाईक्षेत्र से होते हुए काबुल पहुंचे थे.

इससे पहले जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से अफगानिस्तान में हालिया घटनाक्रम पर चर्चा की. जयशंकर अमेरिका के चार दिवसीय दौरे के लिए न्यूयॉर्क में हैं.

जयशंकर ने देर रात तीन बजे ट्वीट किया, ‘‘(अमेरिका के विदेश मंत्री) ब्लिंकन के साथ अफगानिस्तान में ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की. हमने काबुल में हवाईअड्डा संचालन बहाल करने की अत्यधिक आवश्यकता पर बल दिया. हम इस संबंध में अमेरिकी प्रयासों की बहुत सराहना करते हैं.’’

ऐसा बताया जा रहा है कि जयशंकर ने काबुल से भारतीय अधिकारियों को बाहर निकालने को लेकर अमेरिकी अधिकारियों समेत कई लोगों से वार्ता की.

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान से लोगों को बाहर ले जा रहे एक विमान में सवार होकर देश से निकलने की उम्मीद में हजारों हताश लोग हवाईअड्डे पहुंच गए थे, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने सोमवार को हवाई अड्डे की सुरक्षा अपने नियंत्रण में ले ली थी.

अफगानिस्तान में अमेरिका समर्थित सरकार के गिर जाने और देश के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़कर चले जाने के बाद रविवार को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया. तालिबान ने 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका नीत सेना के अफगानिस्तान में आने के 20 साल बाद फिर से देश पर कब्जा कर लिया है.

जयशंकर ने कहा कि भारत काबुल में हालात पर लगातार नजर रख रहा है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मैं काबुल में हालात पर लगातार नजर रख रहा हूं. भारत लौटने के इच्छुक लोगों की घबराहट समझता हूं. हवाईअड्डा संचालन मुख्य चुनौती है. इस संबंध में साझेदारों के साथ विचार-विमर्श जारी है.’’

उन्होंने एक अन्य ट्वीट किया, ‘‘अफगानिस्तान में घटनाक्रम पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आज महत्वपूर्ण चर्चा. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को जताया. संयुक्त राष्ट्र में मेरे कार्यक्रमों के दौरान इन पर चर्चा की उम्मीद है.’’

उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार काबुल में सिख और हिंदू समुदाय के नेताओं के लगातार संपर्क में है.

जयशंकर ने कहा, ‘‘काबुल में हालात के मद्देनजर, यह महत्वपूर्ण है कि हमारे पास वहां भारतीयों के बारे में सटीक जानकारी हो. अपील की जाती है कि सभी संबंधित लोग इस बारे में विदेश मंत्रालय के विशेष अफगानिस्तान प्रकोष्ठ को सूचना मुहैया कराएं.’’

Afghanistan : नकदी से भरे हेलीकॉप्टर में काबुल से भागे थे राष्ट्रपति अशरफ गनी-मीडिया रिपोर्ट में दावा

युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान से भागते हुए राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अपने हेलीकॉप्टर में ठूंस-ठूंस कर नकदी भरी, इसके बावजूद जगह की कमी के कारण नोटों से भरे कुछ बैग रनवे पर ही रह गए. इस आशय की जानकारी रूस की आधिकारिक मीडिया में सोमवार को आयी.

गौरतलब है कि रविवार को काबुल पर तालिबान के कब्जे के साथ ही गनी सरकार गिर गयी और राष्ट्रपति देश-विदेश के सामान्य लोगों की तरह देश छोड़ने पर मजबूर हो गए. काबुल स्थित रूसी दूतावास का हवाला देते हुए रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने खबर दी है कि 72 वर्षीय राष्ट्रपति गनी नकदी से भरा हेलीकॉप्टर लेकर काबुल से भागे.

खबर में दूतावास के एक कर्मचारी के हवाले से कहा गया है, ‘‘शासन के समाप्त होने के कारणों को, गनी के वहां से भागने के तरीके से जोड़कर देखा जा सकता है. चार कारें नकदी से भरी हुई थीं और उन्होंने सारा पैसा हेलीकॉप्टर में भरने की कोशिश की, लेकिन सारी नकदी हेलीकॉप्टर में नहीं भरी जा सकी और उन्हें कुछ धन वहीं रनवे पर ही छोड़ना पड़ा.’’

हालांकि, तास ने दूतावास के कर्मचारी का नाम नहीं दिया है, लेकिन रूसी दूतावास की प्रवक्ता निकिता इशेंको के हवाले से रूसी वायर सेवा ‘स्पूतनिक’ ने खबर दी है कि काबुल से भागने के दौरान गनी के काफिले में नकदी से भरी कारें शामिल थीं.

इशेंको ने कहा, ‘‘उन्होंने सारा पैसा हेलीकॉप्टर में भरने की कोशिश की लेकिन जगह की कमी से ऐसा नहीं हो पाया. कुछ पैसा रनवे पर ही रह गया.’’

अफगानिस्तान छोड़ने के बाद अपने पहले बयान में गनी ने रविवार को फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा. राष्ट्रपति ने लिखा है कि उनके सामने दो ‘‘मुश्किल विकल्प’’ थे, पहला राष्ट्रपति भवन में घुसने की कोशिश कर रहे ‘हथियारबंद तालिबान’ और दूसरा ‘‘अपने प्रिय देश को छोड़ना, जिसकी रक्षा में में मैने अपने जीवन के 20 साल लगा दिये.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर फिर से अनगिनत संख्या में देश के नागरिक शहीद होते और काबुल में विध्वंस ही विध्वंस होता तो कुछ 60 लाख की आबादी वाले शहर के लिए उसका परिणाम बेहद घातक होता. तालिबान ने मुझे हटाने का फैसला कर लिया था, वे यहां काबुल और काबुल के लोगों पर हमला करने आए हैं. ऐसे में रक्तपात से बचने के लिए, मुझे वहां से निकलना ही मुनासिब लगा.’’

पड़ोसी देश ताजिकिस्तान में शरण लिए हुए गनी ने कहा, ‘‘तालिबान ने हथियार के बल पर लड़ाई जीत ली है और अब देशवासियों के सम्मान, धन और आत्मसम्मान की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है.

पेशे से शिक्षाविद और अर्थशास्त्री गनी अफगानिस्तान के 14वें राष्ट्रपति थे. पहली बार 20 सितंबर 2014 और दूसरी बार 28 सितंबर, 2019 में वह राष्ट्रपति चुनावों में जीत हासिल कर पद पर निर्वाचित हुए थे.

गौरतलब है कि अफगानिस्तान पर 1996 से 2001 तक तालिबान का शासन था और 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद अमेरिका नीत सैन्य बलों ने देश से उनका शासन समाप्त कर दिया था. 

Afghanistan : काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान का ‘आम माफी’ का एलान, महिलाओं को लेकर की ये अपील

तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में मंगलवार को ‘आम माफी’ की घोषणा की और महिलाओं से उसकी सरकार में शामिल होने का आह्वान किया. इसके साथ ही तालिबान ने काबुल में उत्पन्न संशय की स्थिति को शांत करने की कोशिश है, जहां एक दिन पहले उसके शासन से बचने के लिए भागने की कोशिश कर रहे लोगों की वजह से हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला था.

तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य इनामुल्ला समनगनी ने पहली बार संघीय स्तर पर शासन की ओर से टिप्पणी की है. काबुल में उत्पीड़न या लड़ाई की बड़ी घटना अब तक दर्ज नहीं की गई है और तालिबान द्वारा जेलों पर कब्जा कर कैदियों को छुड़ाने एवं हथियारों को लूटने की घटना के बाद कई शहरी घरों में मौजूद हैं, लेकिन भयभीत हैं.

पुरानी पीढ़ी तालिबान की अतिवादी विचार को याद कर रही है, जब 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क पर हमले के बाद अमेरिका की अफगानिस्तान में घुसपैठ से पहले सजा के तौर पर पत्थर से मारने और सार्वजनिक तौर पर फांसी की सजा दी जाती थी.

समानगनी ने कहा, ‘‘इस्लामी अमीरात नहीं चाहता कि महिलाएं पीड़ित हों. उन्हें शरीया कानून के तहत सरकारी ढांचे में शामिल होना चाहिए.’’ उन्होंने कहा,‘‘ सरकार का ढांचा अब तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन अनुभवों के आधार पर, कह सकता हूं कि यह पूर्णत: इस्लामिक नेतृत्व वाला होगा और सभी पक्ष इसमें शामिल होंगे.’’

इस बीच, मंगलवार को नाटो के अफगानिस्तान में वरिष्ठ नागरिक प्रतिनिधि स्टीफेनो पोंटेकार्वो ने वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें दिख रहा है कि हवाई अड्डे की उड़ान पट्टी खाली है और अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. तस्वीर में चैन से बनी सुरक्षा दीवार के पीछे सेना का मालवाहक विमान को देखा जा सकता है.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘रनवे खुल गया है. मैं विमानों को उड़ान भरते और उतरते देख रहा हूं.’’ फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, रात में अमेरिकी नौसेना कमान का केसी-130जे हरक्युलिस विमान काबुल हवाई अड्डे पर उतरा और इसके बाद कतर स्थित अमेरिकी ठिकाने अल उदेद के लिए रवाना हो गया. यह अमेरिकी सेना के मध्य कमान का मुख्यालय है. अब तक अफगान हवाई क्षेत्र में कोई दूसरा विमान नहीं देखा गया है.

पाकिस्तान में महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति तोड़े जाने की भारत ने की निंदा

पाकिस्तान के लौहार किले में महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति तोड़े जाने की घटना की भारत ने कड़े शब्दों में निंदा की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की सांस्कृतिक विरासत पर इस तरह के हमले पाकिस्तानी समाज में बढ़ती असहिष्णुता और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति सम्मान की कमी को उजागर करते हैं.

अरिंदम बागची ने कहा कि हमने आज लाहौर में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा को तोड़े जाने के बारे में मीडिया में परेशान करने वाली खबरें देखी हैं. 2019 में अनावरण के बाद से मूर्ति को तोड़े जाने की ये तीसरी घटना है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं, जिनमें उनके पूजा स्थलों, उनकी सांस्कृतिक विरासत और उनकी निजी संपत्ति पर हमले शामिल हैं, खतरनाक दर से बढ़ रही हैं. 12 दिन पहले ही पाकिस्तान के रहीम यार खान में एक हिंदू मंदिर पर भीड़ ने हमला किया था.

बता दें कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर किले में लगी प्रथम सिख शासक महाराजा रणजीत सिंह की नौ फुट ऊंची कांस्य की बनी प्रतिमा प्रतिबंधित तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के एक कार्यकर्ता ने मंगलवार को तोड़ दी. इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें आरोपी नारे लगाते हुए मूर्ति की बांह तोड़ते और मूर्ति को घोड़े से नीचे गिराते दिख रहा है. वीडियो में यह भी दिखा कि इसी दौरान एक दूसरा व्यक्ति प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति को आकर रोकता है.

समाचारपत्र ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने बताया कि टीएलपी कार्यकर्ता को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. लाहौर किले के प्रशासन ने कहा कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने एक ट्वीट में कहा कि इस तरह के ‘‘अनपढ़ वास्तव में पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि के लिए खतरनाक हैं.’’

राजनीतिक संचार पर प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक डॉ शहबाज गिल ने कहा कि आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी. समाचारपत्र ने गिल के हवाले से कहा, ‘‘ये बीमार मानसिकता के लक्षण हैं. यह पाकिस्तान के आकलन को कमजोर करने की कोशिश है.’’

सिख शासक महाराजा रणजीत सिंह की यह प्रतिमा नौ फुट ऊंची थी. इसमें उन्हें पूरे सिख पोशाक में हाथ में तलवार लिए घोड़े पर बैठे हुए दिखाया गया है. प्रतिमा का अनावरण जून 2019 में किया गया था. यह पहली बार नहीं है जब प्रतिमा को निशाना बनाया गया है. पिछले साल लाहौर में मूर्ति की बांह तोड़ दी गई थी. ‘जियो न्यूज’ के मुताबिक अगस्त 2019 में भी दो युवकों ने इसे क्षतिग्रस्त किया था. महाराजा रणजीत सिंह सिख साम्राज्य के संस्थापक थे, जिन्होंने 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में उत्तर पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया था.

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, राज्य में एंट्री के लिए कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज या RT-PCR रिपोर्ट जरूरी

कोरोना की दूसरी लहर से सबसे अधिक प्रभावित रहे महाराष्ट्र में एंट्री लेने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गाइडलाइन के मुताबिक, महाराष्ट्र में एंट्री के लिए लोगों को दो शर्तों में से एक का पालन करना होगा. पहली शर्त है कि जो लोग राज्य में जाना चाहते हैं उन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज का सर्टिफिकेट साथ रखना होगा. दूसरी वैक्सीन की डोज लगे भी 14 दिन होना जरूरी है. 

दूसरी शर्त है कि 72 घंटे के भीतर की कोरोना निगेटिव आरटी पीसीआर रिपोर्ट रखना होगा. दोनों में से किसी एक भी शर्त को पूरा नहीं करने की स्थिति में 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाएगा.

बता दें कि इससे पहले 11 अगस्त को राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी. इसमें 15 अगस्त से मॉल, रेस्तरां को 50 प्रतिशत क्षमता के साथ रात 10 बजे तक खुला रखने की अनुमति दी गई थी. हालांकि, इसके साथ यह शर्त भी होगी कि सभी कर्मचारियों का पूरी तरह से टीकाकरण होना चाहिए. कस्टमर को भी वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिखाना होगा.

इसके अलावा, दुकानें भी रात 10 बजे तक खुली रखने की अनुमति दी गई थी. गाइडलाइन में कहा गया था कि स्पा और जिम को भी इस शर्त पर 50 प्रतिशत क्षमता के साथ रात 10 बजे तक संचालित करने की अनुमति दी जाएगी कि इन प्रतिष्ठानों के सभी कर्मचारी दोनों टीके की दोनों खुराकें ले चुके हों.

गाइडलाइन में कहा गया था कि खुले स्थानों में होने वाली शादियों में 200 लोगों के शामिल होने की अनुमति होगी. जबकि बंद हॉल में होने वाले कार्यक्रमों में 100 या कार्यक्रम स्थल की क्षमता के 50 प्रतिशत लोगों को शामिल होने की इजाजत होगी.


महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस से 6,686 मरीज संक्रमित हुए हैं और 158 मरीजों की मौत हुई है. इसके बाद कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 63,82,076 हो गई है. राज्य में अब तक 1,34,730 मरीजों की जान गई है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार को राज्य में 6,388 नए मामले आए थे और 208 संक्रमितों की मौत हुई थी. 

(Source: ABP News)

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में महात्मा गांधी को अमेरिका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का प्रस्ताव पेश

अमेरिका की एक प्रभावशाली सांसद ने महात्मा गांधी को मरणोपरांत प्रतिष्ठित कांग्रेशनल गोल्ड मेडल से सम्मानित करने संबंधी एक प्रस्ताव अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में शुक्रवार को पुन: पेश किया. कांग्रेशनल गोल्ड मेडल अमेरिका में सर्वोच्च नागरिक सम्मान है.

न्यूयॉर्क से कांग्रेस सदस्य कैरोलिन बी मेलोनी ने प्रतिनिधिसभा में इस संबंध में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा, ‘विरोध प्रदर्शित करने के महात्मा गांधी के अहिंसक एवं ऐतिहासिक सत्याग्रह अभियान ने राष्ट्र और विश्व को प्रेरित किया. उनका उदाहरण हमें प्रोत्साहित करता है कि हम स्वयं को दूसरों की सेवा में समर्पित करें.’

मेलोनी ने कहा, ‘मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नस्ली समानता के लिए अभियान हो या फिर नेल्सन मंडेला की रंगभेद के खिलाफ लड़ाई, दुनियाभर के अभियानों ने उनसे (गांधी से) प्रेरणा ली है. एक लोक सेवक होने के नाते मैं उनके साहस और उनके आदर्श से प्रतिदिन प्रेरित होती हूं. आईए हम गांधी के इस निर्देश का पालन करें कि ‘जो परिवर्तन आप दुनिया में देखना चाहते हैं, सबसे पहले वह परिवर्तन आप स्वयं में लाएं’.

यह सम्मान जॉर्ज वॉशिंगटन, नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग जूनियर, मदर टेरेसा और रोजा पार्क्स को मिल चुका है.