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मनोज तिवारी के खिलाफ सीलिंग मामले में जारी हुआ अवमानना का नोटिस

दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी मुश्किलों से घिरे नजर आ रहें हैं। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अवैध निर्माण की सीलिंग हो रही है, ऐसे में दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में एक इमारत की सील तोड़ना मनोज तिवारी को भारी पड़ गया है। जिसके चलते कोर्ट ने उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करते हुए 25 सितंबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट में सीलिंग मामले की सुनवाई के दौरान मॉनिटरिंग कमिटी ने कोर्ट को बताया था कि बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने एक इमारत की सील तोड़ी है।  जो कि न सिर्फ सरकारी काम मे दखल है, बल्कि अदालत की भी अवमानना है, ऐसे में मनोज तिवारी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जानी चाहिए।

दरअसल बीते 16 सितंबर को मनोज तिवारी अपने लोकसभा क्षेत्र में एक सड़क के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे।  जहाँ स्थानीय लोगों ने उनसे सीलिंग से निजात दिलाने की मांग की और वह मकान भी दिखाया, जिसे निगम द्वारासील कर दिया गया था। जिसके बाद बीजेपी नेता ने तुरंत ही एक ईंट उठाकर मकान की सील तोड़ दी थी, दरअसल जिस मकान को सील किया गया था, वह एक रिहायशी मकान था। जिसे कुछ समय पहले अवैध निर्माण के चलते सील कर दिया गया था।

 

जानिए, आखिर सलमान को क्यों बदलना पड़ा फिल्म ‘लवरात्रि’ का नाम ?

सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्म ‘लवरात्रि’ का नाम बदलकर ‘लवयात्री’ रखा गया है। बताया जा रहा है कि फिल्म लवरात्रि के ऐलान के बाद से कई संगठन इसके विरोध में उतर आये थे। इन संगठनों का आरोप था कि इस नाम से हिंदुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं। क्योंकि फिल्म का टाइटल हिंदुओं के सबसे प्रमख त्‍योहार नवरात्रि के नाम से मिलता-जुलता है। वहीँ हाल ही में बिहार के मुज़फ्फरपुर की एक कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले में मिली एक शिकायत के बाद सलमान खान के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया था।

फिल्म ‘लवरात्रि’ से सलमान खान के बहनोई आयुष शर्मा और वरीना हुसैन डेब्यू कर रहे हैं। लेकिन अब फिल्म का नाम लवयात्री हो गया है। इस बारे में खुद सलमान ने ट्विटर पर जानकारी दी है । यह फिल्म 5 अक्टूबर को रिलीज होगी।  

तीन तलाक पर सख्त हुई मोदी सरकार, कैबिनेट ने अध्यादेश को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को बड़ी राहत देते हुए तीन तलाक पर अध्यादेश जारी किया है। कैबिनेट की बैठक में  तीन तलाक पर अध्यादेश को मंजूरी दी गई। अब इस अध्यादेश को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। मोदी सरकार का यह आध्यादेश 6 महीने तक लागू रहेगा। लेकिन 6 महीने बाद मोदी सरकार को इसे फिर से संसद में पेश करना होगा। लोकसभा से  तीन तलाक विधेयक पहले ही पास किया जा चुका है, जबकि राज्यसभा में ये विधेयक अभी भी लंबित है।

मोदी सरकार ने  तीन तलाक विधेयक में संशोधन कुछ बड़े भी किए हैं। जिसके मुताबिक दोषी को ज़मानत देने का अधिकार मेजिस्ट्रेट का होगा और साथ ही कोर्ट की इजाज़त से समझौते का प्रावधान भी किया गया है। हालाँकि इसके पहले  तीन तलाक के मामले में कोई भी केस दर्ज करा सकता था। लेकिन अब सिर्फ पीड़िता या फिर उसके सगे रिश्तेदार ही मामला दर्ज करा पाएंगे। जहाँ पहले इस तरह के मामलों में समझौते का कोई प्रावधान नहीं था, वहीँ अब  मजिस्ट्रेट के सामने पति-पत्नी के पास समझौते का विकल्प मौजूद होगा। इसके साथ ही अब मजिस्ट्रेट को ज़मानत देने का अधिकार दिया गया है, जबकि पहले तीन तलाक गैर जमानती अपराध था और पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती थी।

जानिए पीएम बनने के बाद कितनी बढ़ी नरेंद्र मोदी की संपत्ति ?

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने पीएम नरेन्द्र मोदी की संपत्ति का ब्यौरा पेश किया है। पीएमओ के अनुसार पीएम नरेन्द्र मोदी के पास लगभग 2.28 करोड़ रुपए की संपत्ति है, जिसमें तकरीबन 1 करोड़ 28 लाख रुपए की चल और बाकी अचल संपत्ति शामिल है। 

 

 

पीएम मोदी पर बरसे रामदेव, कहा बढ़ती महंगाई मोदी सरकार पर पड़ेगी भारी

योगगुरु बाबा रामदेव ने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में बड़ा बयान देकर सबको चौका दिया है। योगगुरु ने कहा है कि वह देश में ₹35 /प्रति लीटर डीजल और ₹40 / प्रति लीटर पेट्रोल बेच सकते हैं। देश में जहां एक लीटर पेट्रोल 90 रुपये प्रति लीटर तक है, वहीं बाबा रामदेव ने महज 35 से 40 रुपये लीटर पेट्रोल-डीजल बेचने का दावा करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से पतंजलि द्वारा इसके विक्रि कराए जाने की मांग की है।

बाबा रामदेव ने कहा है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी टैक्स स्लैब के न्यूनतम दर यानी पांच फीसदी पर शामिल किया जाना चाहिए। रामदेव ने कहा कि अगर सरकार मुझे अनुमति दे और टैक्स में थोड़ी छूट दे तो मैं खुद पेट्रोल-डीजल 35-40 रुपए लीटर बेच सकता हूं। ईंधन को जीएसटी के तहत लाना चाहिए न की 28 फीसदी के तहत। बाबा रामदेव ने इसके विक्रि के लिए मोदी सरकार से इजाजत मांगी है।

योगगुरु ने कहा किसी कीमत पर नहीं करूंगा किसी का प्रचार:-

रविवार को मीडिया से बातचीत  करते हुए उन्होंने कहा कि बहुत से लोग मोदी सरकार की नीतियों की खूब तारीफ करते हैं। मगर इनमें बहुत कुछ बदलाव करने की अहम जरुरत है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें बहुत बड़ा मुद्दा हैं। इसमें मोदी को जल्द ही सुधारात्मक काम करना होगा। वरना महंगाई की आग मोदी सरकार को बहुत महंगी पड़ेगी।

योगगुरु बाबा रामदेव के मुताबिक मोदी सरकार को पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने के लिए जरुरी कदम उठाने होंगे। इस दौरान उनसे जब पूछा गया कि क्या 2014 की तरह उन्हें अभी भी मोदी सरकार पर विश्वास है? तो वह इससे बचते नजर आए। इसके अलावा जब उनसे पूछा गया कि क्या वो इस बार भी मोदी के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे। इस जवाब में उन्होंने कहा, ‘मैं उनके पक्ष (बीजेपी और पीएम मोदी) में प्रचार नहीं करुंगा। मैंने खुद को राजनीति से वापस आते हुए बाहर रखा है। मैं सभी पार्टियों का हूं और मैं स्वतंत्र हूं,और जो अच्छे हैं उनके साथ हूँ।

(शिवरतन कुमार गुप्ता)

चुनाव आयोग ने लिया बड़ा फ़ैसला,अब ऐसे उम्मीदवारों की खैर नहीं

चुनाव आयोग ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए उम्मीदवारों द्वारा रात के समय मतदाताओं से फोन कॉल, एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए वोट मांगने पर रोक लगा दी है। चुनाव आयोग के सचिव एनटी भूटिया ने सभी राज्यों और संघशासित क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को यह दिशानिर्देश जारी किया है।

दरअसल चुनाव आयोग के प्रचार अभियान संबंधी मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत चुनाव आचार संहिता  के दौरान उम्मीदवार रात को 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रचार थमने की अवधि में लाउडस्पीकर या जन सभाएं आयोजित कर चुनाव प्रचार नहीं कर सकते। लेकिन इस अवधि में उम्मीदवार घर-घर जाकर,फोन कॉल या फिर एसएमएस को अपने प्रचार का जरिया बना लेते थे। जिसे देखते हुए चुनाव आयोग ने अब इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के हवाले से बीते  20 अप्रैल को जारी निर्देश में संशोधन करते हुये यह फ़ैसला लागू किया है। अपने निर्देश में चुनाव आयोग ने कहा, ‘नागरिकों की निजता का सम्मान करने और सामान्य जनजीवन में अशांति को कम करने के लिये ऐसा करना आवश्यक है।’

चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, अन्य चुनाव अधिकारियों और सभी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त एवं गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों को इसका पालन सुनिश्चित करने को कहा है। वहीँ इसका उल्लंघन होने पर मतदाता चुनाव आयोग के ‘सी विजिल’ मोबाइल ऐप के जरिये शिकायत कर सकेंगे।

साल 2018 के अंत में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव के तहत  मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने हाल ही में इस ऐप को लॉंच किया था। चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन सहित अन्य किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की सी विजिल के जरिये की गयी शिकायत पर सौ मिनट के भीतर तत्काल कार्रवाई करना अनिवार्य है। एंड्रॉयड आधारित इस ऐप की मदद से कोई भी नागरिक चुनावी गड़बड़ी की तस्वीर अथवा वीडियो के जरिये शिकायत कर सकता है। इस ऐप का कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु विधानसभा क्षेत्र में सफल प्रायोगिक परीक्षण किया जा चुका है।

27 अक्टूबर को सुहागिनें रखेंगी करवा चौथ का व्रत, जानिए व्रत का महत्व

शारदीय नवरात्रि और दशहरा के बाद करवा चौथ का त्योहार सुहागिनों द्वारा मनाया जाता है। जो की कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पूरे विधि विधान से मनाया जाता है। उसका सुहागिन स्त्रियों के लिए बहुत अधिक महत्व होता है। इस साल करवा चौथ का पर्व 27 अक्टूबर शनिवार को मनाया जाएगा। ये एक दिन का त्यौहार प्रत्येक वर्ष भारत की विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। विवाहित महिलाएँ पूरे दिन का उपवास रखती हैं , ये व्रत सुबह सूर्योदय के साथ शुरु होता है और चन्द्रोदय के बाद खत्म होता है।

करवा चौथ का व्रत महिलाएँ अपने पति की सुरक्षा और लम्बी उम्र के लिए बिना पानी और बिना भोजन के पूरे दिन कठिन व्रत रखती हैं। मुख्य रुप से ये व्रत भारतीय राज्यों राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कुछ भागों, हरियाणा और पंजाब में मनाया जाता था हालांकि आज कल ये भारत के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में सभी महिलाओं द्वारा मनाया जाता है कभी करवा चौथ का व्रत कुछ अविवाहित लड़कियों द्वारा भी रखा जाता है अपने मंगेतर की लंबी उम्र के लिए रखती हैं।

करवा चौथ के मौके पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए दिनभर व्रत रखती हैं। इसके बाद रात को चांद को देखकर अपना व्रत तोड़ती हैं। इस दिन महिलाएं शिव, पावर्ती और कार्तिक की पूजा-अर्चना करती हैं। फिर शाम को छलनी से चंद्रमा और पति को देखते हुए पूजा करती हैं। फिर अंत में चांद का दीदार करने के बाद महिलाएं पति के हाथों पानी पीकर अपना व्रत तोड़ती हैं। ये माना जाता है कि अगर छलनी में चंद्रमा देखते हुए पति की शक्ल देखना शुभ माना जाता है।

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त:-

करवा चौथ के शुभ मुहूर्त के समय ही पूजा करनी चाहिए। 27 अक्टूबर को करवा चौथ पूजा के लिए शुभ अवधि 1 घंटे और 18 मिनट तक रहेगी। करवा चौथ पूजा का समय शाम 5:36 शाम को शुरू होगा। शाम 6:54 पर पूजा का समय खत्म होगा। और चंद्रोदय का समय रात 8:40 मिनट पर बताया जा रहा है।

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि एवं विधान:-

सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके पूजा घर की सफाई की जाती है। फिर सास जो भोजन देती हैं वो भोजन करें और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें। फिर बिना जल पिये सारा दिन भगवान का जाप करना चाहिए। यह व्रत शाम को सूरज अस्त होने के बाद चन्द्रमा के दर्शन करके ही खोलना चाहिए।शाम के समय मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें, 10 से 13 करवे रखें, पूजा में धूप, दीप, चन्दन, रोली और सिन्दूर थाली में सजा कर रखें।और दीपक चलाते समय पर्याप्त मात्रा में घी रखना चाहिए ताकि वो पूरे समय जलता रहे।चन्द्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरु हो जानी चाहिए।ये जब अच्छा माना जाता है तब पूरा परिवार पूजा में शामिल हो। पूजा के समय ही करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। चन्द्रमा को छलनी से देखा जाना चाहिए। फिर अंत में पति के हाथों से जल पीकर व्रत समाप्त हो  जाता है। 

हिंदू महिलाओं के सोलह श्रृंगार हर कोई भलीभांति नहीं जानता है,किन्तु हर कोई महिलाओं के सोलहो श्रृंगार की बात जरूर करता है तो आइए जानते हैं इनके सोलह श्रृंगार और वैज्ञानिक महत्व:-

(1) स्नान :–

16 श्रृंगारों में प्रथम चरण है स्नान। कोई भी श्रृंगार करने से पूर्व नियम पूर्वक स्नान करने का अत्यंत महत्व है। स्नान में शिकाकाई, भृंगराज, आंवला, उबटन और अन्य कई सामग्रियों और इनके नियम – इन सबका आयुर्वेद के ग्रंथों में विस्तार से जिक्र है।

(2) बिंदीया:-

इसे कोई भी महिला धारण कर सकती है।

(3) सिंदूर:-

यह सुहागन महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण श्रृंगार है।

(4) काजल:-

काजल आंखों के सौंदर्य की वृद्धि करता है।

(5) मेहंदी:-

हिन्दू धर्म में मेहँदी को एक शुभ प्रतीक माना जाता है। स्त्रियां इसे करवा चौथ और अन्य ऐसे कई मंगल पर्व हैं, जब हाथों पर मेहँदी बनवाती हैं। खूबसूरती से रची हुई मेहँदी बहुत सुन्दर भी लगती है, और लगभग सभी लड़कियों और महिलाओं में यह काफी प्रचलित है। कुछ बेहद ख़ास मौके जैसे शादी-विवाह पर तो पैरों पर भी मेहँदी लगायी जाती है। शादी में तो काफी हिन्दू पुरुष भी हाथों और पैरों पर मेहँदी बनवाते हैं। भारत के विभिन्न राज्यों, हिन्दू धर्म की अलग-अलग जातियों के अनुसार मेहँदी लगाने की भिन्न-भिन्न परम्पराएं हैं। जैसे की राजस्थानी या मारवाड़ी पुरुष शादी के वक्त पैरों और हाथों दोनों पर ही मेहँदी लगवाते हैं।

(6) फूलों का गजरा:-

इससे बालों से भी फूलों सी महक आती है।

(7) मांग टिका:-

दुल्हन को सर्वप्रथम जो आभूषण पहनाया जाता है, वो है मांग टिक्का। क्योंकि इसे मुख्यतर मांग पर लगाया जाता है, इस टिक्के को मांग टिक्का कहते हैं। इसका एक हिस्सा सामने माथे पर भी आता है। बाकी अलग-अलग डिज़ाइन के अनुसार इसमें थोड़े बहुत परिवर्तन किये जा सकते हैं।

(8) नथ:-

कई हिन्दू परम्पराएं वैज्ञानिक दृस्टि से भी उत्तम मानी जाती है। नथ पेहेन्ने के लिए जब कान छिदवाया जाता है, तो उससे महिलाओं को एक्यूपंक्चर के लाभ भी मिलते हैं।

(9) कानों के कुंडल:-

चाहे देश हो या विदेश, कान में झुमके पहनने की रुचि हर किसी को है। कानों के आभूषण को कोई भी महिला धारण कर सकती है। कान छिदवाने से शरीर पर एक्यूपंक्चर जैसा प्रभाव पड़ता है जो कि सेहत के लिए फायदेमंद है।

(10) मंगलसूत्र:-

मंगलसूत्र सुहाग की निशानी है जिसे केवल सुहागन औरतें ही धारण कर सकती हैं।

(11) बाजूबंद:-

सोने या चांदी के धातु से निर्मित होने के कारण इन धातुओं का स्पर्श हृदय और यकृत संबंधी रोग दूर होते हैं।

(12) चूड़ि:-

चाहे कुंवारी कन्या हो या फिर सुहागन, चूड़ियाँ पहनना हर एक महिला को पसंद है। ऐसा माना जाता है कि चूड़ियों की खनक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है।

(13) अंगूठी:-

आभूषणों में से अंगूठी का इस्तेमाल आज भी कम नहीं हुआ है। इसे पहनना सबसे आसान और आरामदायक भी है। इसे रोजाना पहनने से स्वास्थ्य संबंधी विकार दूर होते हैं और पाचन तंत्र भी मजबूत रहता है।

(14) कमरबंद यानी करधन:-

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कमरबंद को नियमित रूप से पहनने पर हर्निया जैसी बीमारी से बड़ी ही आसानी बचा जा सकता है।

(15) बिछिया:-

बिछुआ सुहाग का प्रतीक होते हैं। इन्हें केवल सुहागन औरतों ही धारण कर सकती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे पहनना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक सिद्ध होता है।

(16) पायल:-

पायल से निकलने वाली ध्वनि घर में सकारात्मक ऊर्जा का वर्चस्व स्थापित करने में सहायक होती है।

(शिवरतन कुमार गुप्ता ) 

रानी रूपमती के प्रेम का गवाह है मध्य प्रदेश का “मांडू” शहर

मांडू में हर कदम दर कदम पर इतिहास से आमना-सामना होता है। इस राजसी किले में मौजूद सदियों पुरानी विशाल मेहराबें, शानदार महल, सुंदर झीलें और रहस्यमयी मस्जिदें एक अद्भुत संसार की रचना करती हैं। मांडू ने बीती सदियों के दौरान यह सब कुछ देखा है। मध्य प्रदेश के दिल में बसे इस खूबसूरत शहर की यात्रा करने का अनुभव ऐसा है, मानो इतिहास के पन्ने आपके सामने जीवंत हो उठे हों।

जहाज़ महल:-

माडूं का राजसी सफर शुरू होता है जहाज़ महल से, जिसे 15 वीं शताब्दी में सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने बनवाया था। दिन के समय इस शानदार इमारत की परछाई किसी विशाल जहाज़ जैसी नजर आती है। कहा जाता है कि इसी महल में सुल्तान का हरम हुआ करता था, जिसमें 15000 महिलाएं थीं। इसमें तुर्की जैसे दूर-दराज़ के देशों की महिलाएं भी शामिल थीं। इस इमारत में बने थे कछुए के आकार के तालाब और पत्तियों के आकार वाले पानी साफ करने के यंत्र। सुल्तान ने यहां 31 वर्ष तक राज किया और अपना समय खूबसूरत महिलाओं एवं संगीत के बीच बिताया। उसने यह महल दो झीलों के बीच की पतली पट्टी पर बनवाया, जिससे यह महल पानी पर तैरता हुआ महसूस होता है।

इसी इमारत के पास बना है हिंडोला महल। जैसा कि नाम से ही जाहिर है – चूना पत्थर की ढ़लानदार दीवारों से बना यह महल झूलता सा नजर आता है। इसके संकरे गलियारों और विशाल मेहराबों के बीच से यहां के शासक अपने हाथियों पर बैठ कर गुजरते थे। कहा जाता है कि शायद इन गलियारों का इस्तेमाल लोगों को संबोधित करने के लिए किया जाता होगा।

होशंगशाह का मक़बरा:-

इस जगह का इतिहास बहुत पुराना है। 12वीं सदी में यहां परमार राजाओं ने शासन किया। वे पास के शहर धार से अपनी राजधानी को यहां लेकर आए। धार की तुलना में पठार की चोटी पर बसा मांडू रणनीतिक रूप से ज्यादा बेहतर था। 14वीं सदी में यहां दिलावर खान गोरी और उसके बेटे होशंगशाह ने शासन किया। यहां बनी खूबसूरत जामी मस्जिद उनके शासन की याद दिलाती है। इस मस्जिद को दमिश्क की उमय्यद मस्जिद से प्रेरित होकर बनाया गया था। इस मस्जिद में हिंदू और इस्लामिक वास्तुकला का अनोखा मेल नज़र आता है। इसी के पास बना है होशंगशाह का मक़बरा। यह उस दौर का संगमरमर से बना पहला मक़बरा है। कहा जाता है कि शाहजहां को ताजमहल बनाने की प्रेरणा इसी इमारत से मिली थी।

रूपमती महल:-

सिर्फ मांडू की बेजोड़ वास्तुकला से इसकी कहानी पूरी नहीं होती। बल्कि इसमें यहां के राजा बाज़ बहादुर और उनकी प्रेमिका रानी रूपमती से जुड़ी किवदंतियां भी शामिल हैं। यहां का रूपमती महल इस कहानी का गवाह है। यह शानदार इमारत एक पहाड़ की चोटी पर बनी है। रानी रूपमती इस ऊंचाई से बाज़ बहादुर के महल और दूर निमाड़ के मैदानों में बहती नर्मदा नदी को निहारती थी। अगर आपको पुरातन किस्से कहानियों पर यकीन है, तो इस महल के परकोटों में आज भी बाज़ बहादुर के दिल टूटने की आवाज़ गूंजा करती है। इसलिए क्योंकि रूपमती ने अपने कारण हुई एक लड़ाई में बाज़ बहादुर के हारने की खबर सुनकर ज़हर खा लिया था।

हिंडोला महल यानी स्वर्ग द्वार:-

भारतीय-इस्लामी वास्तुकला की बेहतरीन मिसाल और अतीत की अनोखी झलका दिखाने वाले मांडू को इसके 12 प्रमुख दरवाज़ों के लिए भी जाना जाता है। इन खूबसरत नक्काशीदार दरवाज़ों और रास्तों को कई शताब्दियों के दौरान बनाया गया। शहर में घुसते समय इन दरवाज़ों से होकर गुजरना पड़ता है। ये दरवाज़े इस बात की गवाही देते हैं कि मध्यकालीन भारत में मांडू सबसे बेहतरीन किलेबंदी वाले शहरों में से एक था। मांडू पर अफगानों और मुगलों से लेकर मराठाओं तक ने अलग-अलग समय में राज किया। मांडू अपने भीतर इतने प्राचीन रहस्यों को समेटे है कि यह पुराना शहर आज भी पर्यटकों, इतिहास प्रेमियों और रोमांच की चाह रखने वालों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है।

(शिवरतन कुमार गुप्ता) 

जानिए हरतालिका तीज व्रत कथा और पूजन विधि

सुहागन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। वहीं विवाह योग्य कुवाँरी कन्याएं भी सुयोग्य व भगवान शिव जैसा पति पाने की कामना के साथ हरतालिका तीज  का व्रत रखती हैं। व्रत रखने के लिए प्राचीन काल से यूँ  तो बहुत सी कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन मुख्य कथा यही है कि ये व्रत सुयोग्य पति के पाने की कामना के साथ माता पार्वती जी ने किया था। आचार्य पण्डित वीरेंद्र मणि शास्त्री “सोहास” के अनुसार इस व्रत को विधि विधान और नि:स्वार्थ भाव से किया जाए, तो माता पार्वती जी और देवाधिदेव महादेव भगवान शिव व्रतधारी महिलाओं की हर मनोकामना को पूरी करते हैं।

 

हरतालिका तीज का व्रत कैसे करें :- 

सर्वप्रथम ‘उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये’

 

मंत्र का संकल्प करके मकान को मंडल आदि से सुशोभित कर पूजा सामग्री एकत्र करें। हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं। प्रदोष काल अर्थात् दिन-रात के मिलने का समय। संध्या के समय स्नान करके शुद्ध व स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात माता पार्वती तथा भगवान शिव की सुवर्णयुक्त प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजन करें। बालू के रेत अथवा काली मिट्टी से शिव-पार्वती एवं गणेशजी की प्रतिमा अपने हाथों से बनाएं। इसके बाद सुहाग (श्रींगार) की पिटारी में सुहाग की सारी सामग्री सजा कर रखें, फिर इन वस्तुओं को पार्वतीजी को अर्पित करें। शिवजी को धोती तथा अंगोछा (गमछा) अर्पित करें और तपश्चात सुहाग सामग्री किसी ब्राह्मणी को तथा धोती-अंगोछा ब्राह्मण को दान में दें।

हरतालिका व्रत कथा :-

तत्पश्चात सर्वप्रथम गणेशजी की आरती, फिर शिवजी और फिर माता पार्वती की आरती करें। भगवान की परिक्रमा करें। रात्रि जागरण करके सुबह पूजा के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं। ककड़ी-हलवे का भोग लगाएं और फिर ककड़ी खाकर उपवास तोड़ें, अंत में समस्त सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी या किसी कुंड में विसर्जित करें।

 

शास्त्रों के अनुसार मां पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर गंगा के तट पर अपनी बाल्यावस्था में अधोमुखी होकर घोर तप किया। कई वर्षों तक उन्होंने केवल हवा पीकर ही व्यतीत किया। माता पार्वती की यह स्थिति देखकर उनके पिता अत्यंत दुखी थे। एक दिन महर्षि नारद भगवान विष्णु की ओर से पार्वती जी के विवाह का प्रस्ताव लेकर मां पार्वती के पिता के पास पहुंचे, जिसे उन्होंने सहर्ष ही स्वीकार कर लिया। पिता ने जब मां पार्वती को उनके विवाह की बात बतलाई तो वह बहुत दुखी हो गई और जोर-जोर से विलाप करने लगी। सखी के पूछने पर माता ने उसे बताया कि वह यह कठोर व्रत भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कर रही हैं जबकि उनके पिता उनका विवाह विष्णु से कराना चाहते हैं। तब सहेली की सलाह पर माता पार्वती घने वन में चली गई और वहां एक गुफा में जाकर भगवान शिव की आराधना में लीन हो गई।

भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र को माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की स्तुति में लीन होकर रात्रि जागरण किया। तब माता के इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और इच्छानुसार उनको अपनी पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया।

( शिवरतन कुमार गुप्ता )

बिहार,पश्चिम बंगाल समेत पूर्वोत्तर भारत में भूकम्प के झटके

बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बुधवार को सुबह करीब 10:15 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.5 आंकी गई है। हालांकि किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है और अन्य आंकड़ों की प्रतीक्षा की जा रही है। बताया जा रहा है कि करीब 25 से 30 सेकंड तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।
 
बुधवार सुबह आए भूकंप का केंद्र असम के कोकराझार में था। सुबह सवा 10 बजे के करीब भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका असर बिहार के पूर्णिया, अररिया, कटिहार, कूचबिहार, किशनगंज और पटना में रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी व कुछ अन्य हिस्सों में भूकम्प के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप से घरों में पंखे हिलने लगे और लोग बाहर खुले मैदान की ओर भागने लगे।
 
असम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। नैशनल सिस्मॉलजी सेंटर के निदेशक विनीत गहलोत ने एक चैनल को बताया कि भूकंप सतह से करीब 10-12 किलोमीटर नीचे आया था।
 
इसी तरह असम, नगालैंड, मणिपुर, में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इससे पहले बुधवार को ही जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में बुधवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। कश्मीर में भूकंप की तीव्रता 4.6 थी। भूकंप के कारण किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। कश्मीर में सुबह सवा पांच बजे भूकंप आया और इसके कुछ देर बाद करीब पौने छह बजे हरियाणा के झज्जर जिले में 3.1 की तीव्रता का भूकंप आया।
 

बिहार के कटिहार में 30 सेकेंड तक झटके महसूस किए गए। राजधानी पटना में भूकंप के बाद लोगों में दहशत देखी गई। लोगों में तीन साल पहले आए भूकंप की यादें ताजा हो गईं।