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खटिया सटाके निरहुआ- आम्रपाली ने किया रोमांस, 11 मिलियन से ज्यादा मिले व्यूज

भोजपुरी एक्ट्रेस आम्रपाली और निरहुआ का एक गाना ‘खटिया से खटिया’ (Khatiya Se Khatiya Sataib Ki Na) इन दिनों धूम मचा रहा है. इस गाने में दोनों की सिजलिंग केमिस्ट्री देखते ही बन रही है. फिल्म ‘बम बम बोल रहा है काशी’ के इस गाने को दिनेश लाल यादव और प्रिया सिंह ने गाया है. गाने को T-Series Hamaar Bhojpuri नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है. जहाँ अब तक इसे 11 मिलियन लोग देख चुके हैं.

‘खटिया से खटिया’ गाने में आम्रपाली निरहुआ के साथ फुल देसी अंदाज़ में खटिया पर अपने कातिलाना मूव्स दिखती नज़र आ रही हैं. वहीं निरहुआ भी उनके हुस्न के जाल में फंसने के लिए बेताब दिखाई दे रहे हैं. 

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गरीबों के लिए ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ के वादे तो सबने किए, पूरा कर रही है मोदी सरकार: भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कहा कि गरीबों के लिए ‘‘रोटी, कपड़ा और मकान’’ उपलब्ध कराने का वादा तो सभी पूर्ववर्ती सरकारों ने किया लेकिन इसे पूरा करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली आज की केंद्र सरकार कर रही है.

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भाजपा प्रवक्ता के के शर्मा के साथ पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के शासन के 60 साल और भाजपा के शासन के आठ साल की तुलना करते हुए कहा कि 60 साल में केवल 3.26 करोड़ घर बने जबकि भाजपा के आठ सालों में 2.50 करोड़ से अधिक घर बनाने का काम किया गया.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रति वर्ष केवल 11 लाख मकान ही बनाए जबकि भाजपा सरकार ने करीब 35 लाख से अधिक मकान प्रति वर्ष बनाए.

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने प्रति माह 94 हजार घर बनाए और उसके मुकाबले भाजपा की सरकार ने 2.62 लाख से ज्यादा आवास प्रति माह बनाए हैं.

सिंह ने कहा, ‘‘रोटी, कपड़ा और मकान की चर्चा तो सब सरकारों ने की लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब कल्याण योजना लाकर रोटी की व्यवस्था की और मकान एवं कपड़े की व्यवस्था और महिलाओं का सशक्तिकरण हम आवास योजना के द्वारा कर रहे हैं.’’

उन्होंने कहा कि अभी तक शहर में 58 लाख पक्के मकान बन चुके हैं और इसके लिए 1.18 लाख करोड़ रुपये शहरी गरीबों को दिए जा चुके हैं.

उन्होंने बताया कि सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत इस वर्ष नए 80 लाख आवास बनाने वाली है.

केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी आड़े हाथ लिया और कहा, ‘‘बंगाल ऐसा राज्य हो गया है जो संघीय ढांचे की व्यवस्था से अपने को बाहर रखना चाहता है, जिसके कारण वहां अव्यवस्था हो रही है.’’

उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया वह योजनाओं के नाम ना बदलें और पात्र लाभार्थियों तक ही योजनाओं के लाभ पहुंचाएं.

उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने अभी तक यह जानकारी भी नहीं उपलब्ध कराई है कि वहां आवास योजना के तहत कितने मकान बने हैं.

ज्ञात हो कि भारतीय जनता पार्टी सात अप्रैल से 20 अप्रैल तक ‘‘सामाजिक न्याय पखवाड़ा’’ मना रही है. इसके तहत पार्टी ने प्रत्येक दिन एक या दो केंद्रीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना तय किया है. पार्टी ने 8 अप्रैल का दिन पीएम आवास योजना के लिए नियत किया है.

मुंबई हमले के ‘मास्टरमाइंड’ हाफिज सईद का बेटा हाफिज तल्हा आतंकवादी घोषित

केंद्र सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक एवं 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमले के ‘मास्टरमाइंड’ हाफिज सईद के बेटे हाफिज तल्हा सईद को आतंकवादी घोषित कर दिया है.

अधिसूचना के मुताबिक, 46 वर्षीय हाफिज तल्हा सईद भारत और अफगानिस्तान में भारतीय हितों को निशाना बनाने के लिए लश्कर-ए-तैयबा में कारिंदों की भर्ती करने, धन जुटाने और हमलों की साजिश रचने तथा उन्हें अंजाम देने के कृत्यों में सक्रिय रूप से शामिल है.

इसमें कहा गया है कि वह पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के विभिन्न ठिकानों का भी नियमित रूप से दौरा करता है और भारत, इजराइल, अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों में भारतीय हितों के खिलाफ जिहाद छेड़ने का आह्वान करने वाले बयान देता है.

अधिसूचना के अनुसार, ‘‘केंद्र सरकार का मानना है कि हाफिज तल्हा सईद आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है और उसे गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 (1967 का 37) के तहत आतंकवादी घोषित किया जाना चाहिए.’’

मालूम हो कि मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमले का सरगना हाफिज सईद था. इस हमले में 166 लोग मारे गए थे. उसे कुछ साल पहले इसी कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया गया था और वर्तमान में वह पाकिस्तान में आतंकवाद संबंधी आरोपों में जेल की सजा काट रहा है. भारत लगातार हाफिज सईद की हिरासत की मांग करता रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने उसे सौंपने से इनकार कर दिया है.

लश्कर-ए-तैयबा 26/11 के हमलों के अलावा भारत में कई घातक हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है. इनमें से ज्यादातर हमले जम्मू-कश्मीर में हुए हैं, जिनमें पिछले कुछ वर्षों में कई नागरिक और सुरक्षाबल मारे गए हैं.

नेहा शर्मा की बोल्ड अदाओं ने उड़ाए फैंस के होश, हॉटनेस देख आप भी हो जायेंगे दीवाने

बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा अपने बोल्ड अंदाज के चलते काफी सुर्खियों में रहती है, नेहा शर्मा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है और अक्सर अपनी बोल्ड और हॉट तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर करती रहती है, इस बार भी उनकी तस्वीरें इंटरनेट पर धूम मचा रही है.

इन तस्वीरों में नेहा शर्मा ने ब्लैक ब्रालेट के ऊपर व्हाइट शर्ट पहनी है, जिसके सारे बटन खुले हैं. उन्होंने अपने बालों को खुला छोड़ा है और मिनिमल मेकअप के साथ फैन्स को अपना दीवाना बना रहीं हैं.

आपको बता दें कि नेहा शर्मा के इंस्टाग्राम पर 13.9 मिलियन फ़ॉलोअर है.

Chaitra Navratri 2022: जानिए नवरात्रि की अष्टमी-नवमी की सही तिथि एवं शुभ मुहूर्त

नवरात्रि में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि नौ दिनों की पड़ रही है. ऐसे में इस वर्ष अष्टमी 9 अप्रैल को मनाई जाएगी. जहां कुछ लोग अष्टमी तिथि को ही कन्या पूजन के साथ व्रत पारण करते हैं. तो वहीं कुछ लोग राम नवमी के दिन कन्या पूजन करके व्रत पारण करते हैं.

आपको बता दें कि नवरात्रि में अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है. कन्या पूजन के बाद ही भक्तों के नवरात्रि व्रत संपन्न माने जाते हैं. इसमें 2 से 11 साल की बच्चियों की पूजा की जाती है.

अष्टमी-नवमी की तिथि और शुभ मुहूर्त

अष्टमी तिथि 09 अप्रैल शनिवार के दिन पड़ रही है. इसे दुर्गा अष्टमी भी कहते हैं. अष्टमी की शुरुआत 8 अप्रैल को रात 11 बजकर 05 मिनट से हो रही है. इसका समापन 9 अप्रैल की देर रात 1 बजकर 23 मिनट पर होगा. दिन का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक है.

जबकि नवमी तिथि 10 अप्रैल की रात्रि 1 बजकर 23 मिनट से शुरू हो रही है जो 11 अप्रैल सुबह 3 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी. इस दिन रवि पुष्य योग, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन है. इसलिए इस दिन सुबह से ही कन्या पूजन कर सकते हैं.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अविवाहित बेटी माता-पिता से शादी के खर्च का कर सकती है दावा

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कहा है कि अविवाहित बेटी हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम-1956 के प्रावधानों के तहत अपने माता-पिता से शादी के खर्च का दावा कर सकती है. बिलासपुर में उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की मूल निवासी 35 वर्षीय महिला राजेश्वरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

याचिकाकर्ता के वकील एके तिवारी ने बताया कि न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी और न्यायमूर्ति संजय एस अग्रवाल की पीठ ने 21 मार्च को याचिका पर सुनवाई की अनुमति यह स्वीकार करते हुए दी कि एक अविवाहित बेटी हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम-1956 के प्रावधानों के तहत अपने माता-पिता से शादी में खर्च होने वाली राशि का दावा कर सकती है.

पीठ ने दुर्ग पारिवारिक अदालत के प्रधान न्यायाधीश द्वारा 22 अप्रैल 2016 को पारित आदेश को रद्द कर दिया और अधिनियम की धारा-3(बी)(ii) की भावना के तहत गुणदोष के आधार पर मामले को फैसले के लिए परिवारिक अदालत के पास भेज दिया. उच्च न्यायालय ने पक्षकारों को पारिवारिक अदालत में पेश होने का निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता राजेश्वरी भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के एक कर्मचारी भानू राम की बेटी की है. उसने हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम-1956 के तहत दुर्ग की पारिवारिक अदालत में एक याचिका दायर कर वैवाहिक खर्च के रूप में 20 लाख रुपये की धनराशि दिए जाने की मांग की थी.

पारिवारिक अदालत ने सात जनवरी 2016 को यह कहते हुए राजेश्वरी की याचिका खारिज कर दी थी कि अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि एक बेटी अपनी शादी के खर्च का दावा कर सकती है. राजेश्वरी ने अपनी याचिका में कहा था कि प्रतिवादी भानू राम सेवानिवृत्त होने जा रहा है और सेवानिवृत्ति बकाया के रूप में उन्हें 55 लाख रुपये प्राप्त होने की संभावना है.

लिहाजा, उचित रिट दायर कर प्रतिवादी के नियोक्ता भिलाई स्टील प्लांट को भानू राम के सेवानिवृत्ति बकाये का एक हिस्सा यानी 20 लाख रुपये वैवाहिक खर्च के रूप उसकी अविवाहित बेटी के पक्ष में जारी करने का निर्देश दिया जाए. तिवारी के मुताबिक, राजेश्वरी ने पारिवारिक अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में यह कहते हुए चुनौती दी थी कि कानून के अनुसार अविवाहित बेटी अपने पिता से शादी के खर्च की मांग कर सकती है. उसने दावा किया था कि यह खर्च भरण-पोषण के दायरे में आता है.

राज्यसभा में BJP सदस्यों की संख्या पहुंची 100, साल 1990 के बाद इस आंकड़े को छूने वाली पहली पार्टी बनी

भारतीय जनता पार्टी अपने राजनैतिक इतिहास में पहली बार राज्यसभा में 100 के आंकड़े पर पहुंच गई है. राज्यसभा चुनावों में असम, त्रिपुरा और नागलैंड में एक-एक सीटों पर हुए चुनाव में जीत हासिल करने के बाद भाजपा का आंकड़ा आधिकारिक रूप से अपने सर्वोच्च संख्या पर पहुंच गया है.

भाजपा और इसके सहयोगी दलों ने असम से राज्यसभा की दोनों सीटें जीत ली हैं. पूर्वोत्तर में त्रिपुरा और नगालैंड से भी अन्य दो सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है. इस तरह भाजपा ने चार में चार सीटें जीत ली है. कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका. भाजपा के अब राज्यसभा में 100 सदस्य हैं.

लेकिन राज्यसभा में भाजपा के लिए 100 के जादुई आंकड़े पर लंबे समय तक बने रहने की संभावना कम है. ऐसा इसलिए कि आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड में राज्यसभा की सीटों के लिए चुनाव होने के बाद राज्यसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या में कमी हो सकती है.

लेकिन इसके साथ ही यह देखा जाना दिलचस्प होगा कि क्या उत्तर प्रदेश से भाजपा को मिलने वाले संभावित फायदे से इस नुकसान की भरपाई हो पायेगी या नहीं. आंकड़ों पर गौर करें तो राज्यों से राज्यसभा की 11 संभावित सीटों पर भाजपा कम से कम आठ पर विजय हासिल कर सकती है.

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 11 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें से पांच भाजपा से हैं. हाल में छह राज्यों में राज्यसभा की 13 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनावों में भाजपा ने पंजाब से अपनी एक सीट गंवा दी, लेकिन उसने पूर्वोत्तर के तीन राज्यों और हिमाचल प्रदेश में एक-एक सीटों पर अपने प्रत्याशियों को जीत भी दिलवाई, जहां से सभी पांच निवर्तमान सदस्य विपक्षी दलों से थे.

पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत का परचम लहराने वाली आम आदमी पार्टी ने राज्य की सभी पांच सीटें अपने नाम कर लीं. हालांकि अभी राज्यसभा की वेबसाइट पर नया आंकड़े की अधिसूचित जारी किया जाना बाकी है, लेकिन यदि हालिया चुनाव में भाजपा के खाते में आई तीन सीटों को उसकी मौजूदा संख्या 97 में जोड़ दें, तो राज्यसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या 100 पर पहुंच जाएगी.

हालांकि 245 सदस्यीय राज्यसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या अब भी बहुमत के आंकड़े से काफी कम है. राज्यसभा में अब से पहले किसी पार्टी के सदस्यों की संख्या 100 या इससे अधिक साल 1990 में थी। जब तत्कालीन सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के 108 सदस्य राज्यसभा में थे। हालांकि इसके बाद राज्यसभा में कांग्रेस सदस्यों की संख्या घट गई थी.

Jharkhand : पत्नी को मनाने ससुराल पहुंचे पति की ससुराल वालों ने पीट-पीट की हत्या

झारखंड के चतरा में घरेलू विवाद के बाद मायके गई पत्नी को मनाने पहुंचे युवक की कथित तौर पर उसकी पत्नी समेत ससुरालवालों ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि घरेलू विवाद का सुलह करके पत्नी को घर लाने अपनी ससुराल पहुंचे युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी. उन्होंने बताया कि ससुराल आए दामाद की पत्नी व अन्य ससुरालवालों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर दी.

उन्होंने बताया कि यह मामला चतरा जिले के घोर नक्सल प्रभावित कुंदा थाना क्षेत्र के सोहरलाट गांव की है. घटना की सूचना पाकर आज तड़के गांव पहुंची पुलिस ने मृतक का शव कब्जे में लेते हुए उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. मृत युवक के परिजनों के अनुसार कुंदा थाना क्षेत्र का बुटकुइया गांव निवासी 35 वर्षीय खेहाली गंझू दो दिन पूर्व अपने ससुराल सोहरलाट गांव गया था. जहां पूर्व के विवाद को लेकर पत्नी के साथ उसका पुनः विवाद हो गया. जिसके बाद झगड़े से नाराज पत्नी व अन्य ससुराल वालों ने मिलकर उसकी लाठियों से पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर दी.

मृतक के परिजनों का आरोप है कि खेहाली की पत्नी का दूसरे शख्स से अवैध सम्बंध था. इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद होता था. इस बात को लेकर गांव में कई बार पंचायत भी हुई थी. जिसमें पत्नी ने अपनी गलती भी स्वीकारी थी.

पुलिस ने मामले में मृतक के परिजनों के बयान के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302/328/201/34 के तहत मृतक की पत्नी रमिया देवी, ससुर उदय गंझू, फजेती गंझू, बालो गंझू, राजेंद्र गंझू व फतेहिया देवी के खिलाफ कांड संख्या 14/22 दर्ज किया है. थाना प्रभारी परमानन्द मेहरा ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी अभियान चलाया जा रहा है. वहीं घटना के बाद सभी आरोपी घर छोड़कर फरार हो गये हैं.

Gujarat : 10 हजार डाक्टर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

गुजरात में कम से कम 10,000 सरकारी डॉक्टरों ने तदर्थ सेवाओं को नियमित करने सहित अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जिससे सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में सेवाएं प्रभावित हुई हैं.

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के जीएमईआरएस (गुजरात मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान सोसाइटी) द्वारा संचालित सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में हड़ताल के पहले दिन सेवाएं प्रभावित हुयीं, क्योंकि डॉक्टरों ने मरीज़ों का इलाज करने से मना कर दिया.

गुजरात मेडिकल शिक्षक संघ (जीएमटीए) के प्रमुख डॉ रजनीश पटेल ने कहा, “ समूचे राज्य में करीब 10,000 सरकारी डॉक्टर सोमवार से हड़ताल पर चले गए हैं, क्योंकि हम अपनी मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे थे जो कभी नहीं हुआ। सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल, छह मेडिकल कॉलेज और जीएमईआरएस के नौ कॉलेज आदि के सरकारी कर्मचारी आज से हड़ताल पर हैं.”

जीएमटीए ‘गुजरात गवर्मेंट्स डॉक्टर्स फोरम’ का हिस्सा है. ‘गुजरात गवर्मेंट्स डॉक्टर्स फोरम’ में जीएमईआरएस के संकाय सदस्य, सेवारत डॉक्टर, ईएसआईसी, द्वितीय श्रेणी के चिकित्सा अधिकारियों समेत अन्य शामिल हैं.

पटेल ने बताया कि हड़ताली डॉक्टर तदर्थ सेवाओं को जारी रखने, नियमित करने, विभागीय पदोन्नति और सातवें वेतन आयोग के अनुसार गैर-प्रैक्टिसिंग भत्ते (एनपीए) की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अन्य अहम मांग अनुबंध के आधार पर नियुक्तियां बंद करना है. जीएमटीए के एक अन्य सदस्य ने कहा कि डॉक्टर पिछले साल नवंबर से यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें हड़ताल पर न जाना पड़े और सरकार के साथ बातचीत के जरिए उनके मुद्दों का समाधान हो जाए.

जीएमटीए के महासचिव डॉ जयेंद्र मकवाना ने कहा, “सरकार ने वादा किया था कि हमारी सभी मांगें 31 मार्च 2022 तक पूरी कर दी जाएंगी. आश्वासन के बाद हमने अपनी हड़ताल रद्द कर दी थी. लेकिन ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया है. हमें हाल फिलहाल कोई आदेश आने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है. हमारे पास हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.”

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग रही थीं. सिविल अस्पतालों में कुछ रेजिडेंट डॉक्टरों को तैनात किया गया था लेकिन मरीजों और उनके रिश्तेदारों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा.

इस बीच, ग्रेड वेतन के मुद्दे को लेकर पंचायत स्तर के स्वास्थ्यकर्मी भी राज्य की राजधानी गांधीनगर में जमा हो गए, जिसके बाद उनमें से कई को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “ हमने कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों की जान बचाई लेकिन राज्य सरकार हमारी मांगों के प्रति उदासीन है.”

Mumbai : नवाब मलिक की न्यायिक हिरासत 18 अप्रैल तक बढ़ाई गई

विशेष अदालत ने धनशोधन मामले में सोमवार को महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक की न्यायिक हिरासत 18 अप्रैल तक बढ़ा दी.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मलिक (62) को 23 फरवरी को भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों की गतिविधियों से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता सात मार्च तक ईडी की हिरासत में थे और बाद में उन्हें 21 मार्च तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. इसके बाद उनकी न्यायिक हिरासत को चार अप्रैल तक बढ़ा दिया गया था.

मलिक को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए नामित एक विशेष अदालत के समक्ष सोमवार को पेश किया गया. न्यायाधीश आर. एन. रोकाडे ने उनकी न्यायिक हिरासत 18 अप्रैल तक बढ़ा दी.

बंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ मंत्री ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जिसमें जेल से तत्काल रिहाई के अनुरोध वाली उनकी अंतरिम याचिका को खारिज कर दिया गया था.