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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की CM योगी के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका

महराजगंज जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के पञ्च रुखिया गोली काण्ड के मामले में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दायर  पुनरीक्षण याचिका की अपील को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के सीएम एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पुराने (10/फरवरी/1999) मामले में आपराधिक मुकदमा चलाये जाने की अपील को लेकर दाखिल रिवीजन (निगरानी याचिका) पर इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची (कांग्रेस-ई नेता श्रीमती तलत अजीज) अगर चाहे तो वह निचली अदालत में अपनी याचिका दायर कर सकती है।

 

उच्च न्यायालय ने यह आदेश महराजगंज निवासी तलत अजीज की निगरानी यचिका पर दिया। याची ने 10 फरवरी 1999 को महराजगंज जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के पचरुखिया में घटित घटना के संबंध में सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की अपील की थी। इस मामले में योगी आदित्यनाथ द्वारा दर्ज कराई गई क्रॉस एफआईआर में दाखिल अंतिम रिपोर्ट के विरुद्ध रिवीजन (याचिका) निचली अदालत महराजगंज में दाखिल की गई। जबकि अंतिम रिपोर्ट दर्ज करने के बाद दाखिल प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र को निचली अदालत ने 13 मार्च 2018 को परिवाद खारिज कर दिया था।

 

यह मामला 10 फरवरी 1999 की है, याची तलत अजीज ने 10 फरवरी 1999 को महराजगंज थाना कोतवाली में तत्कालीन गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। तलत अजीज ने योगी पर अपने समर्थकों के साथ असलहों से लैस होकर गोली चलाने की शिकायत में कहा था कि इस गोलीकांड में उनके गनर सत्यप्रकाश की मौत हो गयी थी।

 

योगी ने भी इस मामले में तलत अजीज, पूर्व विधायक जनार्दन ओझा व अन्य के विरुद्ध क्रास एफआईआर दर्ज कराई थी।

 
 ( शिवरतन कुमार गुप्ता  की रिपोर्ट )

इस तपस्वी ने स्थापित किया था महराजगंज का ओंकारेश्वर महादेव मंदिर

महराजगंज जिले के ग्रामीण क्षेत्र के खुटहा बाजार का श्री ओंकारेश्वर महादेव मंदिर शिव भक्तों की आस्था,विश्वास और मनोकामनापूर्ति का प्रमुख केंद्र है।यहां गवइं इलाकों से आने वाले शिव भक्तों की अपार भीड़ भगवान श्री ओंकारेश्वर महादेव के शिवलिंग पर जलाभिषेक कर जीवन धन्य करती है।सावन के महीने में तो यहां शिवभक्तों का रेला लगा रहता है। भक्तगण श्री ओंकारेश्वर महादेव को जलाभिषेक कर मन्नतें मांगते हैं। भगवान श्री ओंकारेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण की कहानी क्षेत्र के महान तपस्वी बाबा निरकेवल दास जी से जुड़ी है।

भगवान श्री ओंकारेश्वर महादेव मंदिर के बारे में बताया जाता है की पूर्व में हैजा,तपेदिक,मिर्गी,चेचक जैसी तमाम जानलेवा बीमारियां तथा बाढ़ एवं आग और सुखा जैसी दैवी आपदाएं आती रहती थीं।जिससे आमज नमानस के साथ खुटहा बाजार के महान तपस्वी बाबा निरकेवल दास जी के भी माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखती थीं।और सब लोगों ने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए युक्ति तलासते रहे,किन्तु असफल ही रहे। लेकिन एक वक्त आया जब खुद बाबा निरकेवल दास जी ने मंगलवार को नगर भ्रमण के दौरान एक जगह आ कर रुक गए।कुछ देर पश्चात उन्होंने गांव वालों से यहीं (रुके हुए स्थान पर) भगवान श्री ओंकारेश्वर महादेव की भव्य मंदिर की निर्माण कराने की बात (आज्ञा स्वरूप) कही,जिससे समाज का भला हो सके।

 

 

बाबा जी का दिशानिर्देश मिलते ही ग्रामीणों ने धन जुटाना शुरू कर दिया और बाबा जी के निर्देशन में वर्ष 1958-59 के दरम्यान निर्माण कार्य शुरू हुआ जो अनवरत सात वर्षों तक चलता रहा।मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग की प्रतिमा को बाबा निरकेवल दास जी खुद चित्रकूट धाम से लाए थे,जिसकी प्राण प्रतिष्ठा भी उन्ही की दिशानिर्देशन में सम्पूर्ण हुआ और इतना ही नहीं वे खुद ही कार्यक्रम के मुख्य यजमान और निर्देशक भी रहे।

यहाँ शिवलिंग की स्थापना बाद बाबा जी ने कहा की भगवान श्री ओंकारेश्वर महादेव जी को जलार्पण मात्र से ही सारी ब्याधियों, रोग, शोक, आपदा,बिपदा,दुख,द्रद्रीता,गरीबी,भूत-प्रेत की बाधा का सामुल नाश हो जाएगा तथा यहां कभी कोई संकट नहीं आएगा।हर पशु पंक्षी स्वतंत्र और खुशहाल रहेंगे। बता दें की खुटहा बाजार श्री ओंकारेश्वर महादेव मंदिर आने वाले भक्त मंदिर के गर्भ गृह में जहां पूरे शिव परिवार का दर्शन,पूजन,अर्चन करते हैं। वहीं बगल में पंचमुखी हनुमान जी और राधा रानी का भी दर्शन प्राप्त करते हैं।

भक्त यहां शक्ति की भी उपासना करते हैं,मंदिर के ठीक बगल में समय माता जी की भव्य प्राचीन मंदिर है,जहां भक्तगण पूजन,अर्चन कर अपना जीवन सफल बनाते है।मंदिर और बाबा जी के बारे में तमाम बुजुर्ग बुद्धिजन बताते हैं की मंदिर के निर्माण वक्त एक मजदुर मंदिर की गुमब्बज पर स्वर्ण कलश रखते वक्त गिर पड़ा और लोगों ने सोच लिया की उक्त मजदूर अब तो दुनिया से रुखसत हो चला। लेकिन तब तक बाबा निरकेवल दास जी आ पहुंचे और उस मजदूर की हाथ पकड़ कर सिर्फ इतना ही कहा की “चलो उठो कब तक सोओगे”, बस इतनी सी बात सुन कर वह मजदूर उठ कर बैठ गया और पुनः काम पर लग गया।ग्रामीणों को समझाते हुए बाबा जी ने कहा की जो भक्त सोमवार को श्री ओंकारेश्वर महादेव को जल अर्पित कर समय माता को कपूर की भस्माहुति देगा उसकी सारी मनोकामनाओं की ,सिद्धि एवं पूर्ति होगी। वैसे सावन में यहां खुद भगवान श्रीओंकारेश्वर महादेव अपने भक्तों की कल्याण करने हेतु मौजूद रहेंगे।

मंदिर में होती है प्रवचन –

मंदिर के मुख्य पुजारी अनिरुद्ध गिरी जी महराज के मुताबिक शिव मंदिर युवा शक्ति की ओर से हर सोमवार को मंदिर परिसर में भजन गायकों की टोली भजन का आयोजन करती है जो पूरे दिन अनवरत चलता रहता है,और सप्ताह के हर बुधवार की शाम करीब 8 बजे श्रीरामचरित मानस का पाठ तथा हर शनिवार को कीर्तन का आयोजन होता है।मंदिर की पूरी देखरेख शिव मंदिर युवा शक्ति करती है।

 

मंदिर से जुड़ा है बिरन्दे मान सरोवर –

कहा जाता है की अबसे करीब 175 वर्ष पूर्व इस सरोवर से सोमवार (साप्ताहिक बाजार का दिन) को नौका (नाव) पर वर्तन निकला करता था, जिसका उपयोग बाजार आने वाले ब्यापारी खाना पकाने के लिए करते थे।लेकिन इस बर्तनों से भरी नौका पर एक ब्यक्ति की कुदृष्टि पड़ गई,और वह उन बर्तनों को बोरे में समेट लेकर जाने लगा।जैसे ही वह दो चार कदम आगे बढ़ा की अंधा हो गया और वह माता रानी समय को पुकारने लगा,तथा अपनी किए गलती का वहीं बीच सरोवर में पश्चाताप करने लगा। कुछ देर पश्चात उसकी रोशनी लौट आई और वह ब्यक्ति उन चोरी किए बर्तनों को नौका (नाव) को वापस कर अपने घर लौट गया।बताया जाता है की तभी से बर्तनों के निकलने की सिलसिला भी बंद हो गई।

दर्जनों नथ पहनी मछलियां हैं सरोवर में –

बताया जाता है की इस बिरन्दे मान सरोवर में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों नथ पहनी मछलियां बिचरण करती हैं।जो केवल साल के दोनो नवरात्रों में भाग्यवान लोगों को ही दिख जाती हैं।यह भी बताया जाता रहा है की इस सरोवर में एक दो नहीं बल्कि सात जलकुण्ड भी हैं।

बाबा जी ने ही खुदवाया था सरोवर –

सरोवर की खुदाई के बारे में बताया जाता है की वर्ष 1940-41 के दरम्यान भयंकर सुखा पड़ा की पशु पंक्षी मानव पानी के लिए दम तोड़ने लगे।यह देख बाबा निरकेवल दास जी घबरा गए,और आनन फानन में सरोवर की खुदाई कराने का फैसला किया।ग्रामीणों के अथक प्रयास से बिरन्दे सरोवर की खुदाई सम्पूर्ण हुई।सरोवर को कभी न सूखने का बरदान बाबा निरकेवल दास जी ने दे डाला।

खुदाई के दौरान लगी थी ब्रह्मआग –

जब सरोवर की खुदाई होनी थी तो धन की जरूरत पड़ी,जिसके लिए बाबा निरकेवल दास जी और इनके संत मित्र बाबा मलंग शाह जी,दादा मियां और बाबा लंगड़ दास* जी चंदा इकट्ठा करने निकल पड़े।की उसी दौरान खुटहा बाजार के एक पुराने सेठ जी ने अहंकार बस कुछ कह दिया और वह बात संतों को नागवार गुजरी।जिस पर संतों ने “ऐसे धनियों के गांव में ब्रह्मआग लग जाए” का श्राप दे दिया।बताया जाता है की संतगण अभी अपनी कुटी पर पहुंचे भी नहीं थे की पूरी खुटहा बाजार धु धु कर जलने लगी और उस आग की लपटों में उस सेठ का 17 सौ मन सरसो,17 सौ मन तिशि,17 सौ मन गुण और चांदी के रुपयों से भरा तिजोरी जल कर राख हो गया था।बुजुर्गजन बताते हैं की यह ब्रह्मआग करीब सप्ताह भर धु धु कर जलती रही।जिसमें केवल धन का विनास हुआ।

( शिवरतन कुमार गुप्ता  की रिपोर्ट )

जानिए आखिर महिलाओं को क्यों नहीं स्पर्श करना चाहिए शिवलिंग ?

सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चन करने और उनके लिए व्रत रखने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण जरूर होती हैं। लेकिन शिव पूजा में आश्चर्यपूर्ण बात यह है कि विवाहित हों या अविवाहित, महिलाओं के लिए शिवलिंग का स्पर्श पूरी तरह वर्जित है।

हम सभी जानते हैं कि सावन का महीना शुरू हो गया है और इस महीने में शिवलिंग की पूजा का विशेष ही महत्व है। धर्म शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि इस महीने में भगवान शंकर की पूजा करने और उनके लिए व्रत रखने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं हर हाल में पूर्ण होती हैं। लेकिन शिव पूजा में चौंकाने वाली विशेष बात यह है कि विवाहित हों या अविवाहित, महिलाओं के लिए शिवलिंग का स्पर्श पूरी तरह वर्जित है।

आचार्य पं. वीरेंद्र मणि शास्त्री “सोहास” के मुताबिक शिवलिंग की पूजा से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि विवाहित महिलाओं को या कुंवारी कन्याओं को शिवलिंग को किसी भी स्थिति- परिस्थिति में स्पर्श नहीं करना चाहिए। महिलाओं को शिवलिंग के करीब जाने की आज्ञा भी नहीं होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान शिव बेहद गंभीर तपस्या में लीन रहते हैं। देवों के देव महादेव की ध्यान भंग न हो जाए इसलिए महिलाओं को शिवलिंग की पूजा न करने के लिए कहा गया है। जब शिव की ध्यान भंग होती है तो वे क्रोधित हो जाते हैं।

इसके अलावा महिलाओं का शिवलिंग को स्पर्श कर पूजा करना भी मां पार्वती को भी पसंद नहीं है। मां पार्वती इससे नाराज होती हैं,और पूजा करने वाली महिलाओं पर इस तरह की गई पूजा का विपरीत असर भी हो सकता है। ऐसी मान्यता है कि लिंगम एक साथ योनि + लिंग (योनि) जो देवी शक्ति का प्रतीक है एवं महिला की रचनात्मक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।

( शिवरतन कुमार गुप्ता की रिपोर्ट )

शिवमंदिरों में गूंजा ओंम नमः शिवाय, श्रद्धा से किया गया दुद्धाभीषेक

श्रावण कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि, धनिष्ठा नक्षत्र व सौभाग्य योग के अद्भुत संयोग में सावन महीने के पहले सोमवार  (सोमवारी श्रावण) को शिवमंदिरों और शिवालयों में श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में सुबह से ही श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर दुद्धाभीषेक एवं जलाभिषेक कर भगवान शिव तथा माता पार्वती से अपनी मन्नत मांगी। इस दौरान मंदिरों में  हर – हर महादेव और ओंम नमः शिवाय के उदघोष गूंजते रहे।शिवभक्तों ने बिल्वपत्र,भांग,धतूरा,दूध, शहद,इत्र,कनेर पुष्प,दही,अनार,पान पत्र,चन्दन,नारियल अर्पित कर भूत भावन अवघड़दानी सदाशिव को अभिषेक किया।

  • महिलाएं एवं कुवाँरी कन्याएं रखी श्रद्धा की व्रत
  • व्रह्ममुहूर्त से ही शुरू हुआ जलाभिषेक का सिलसिला,जो दोपहर तक चलता रहा
  • भारी बारिश में भी पीताम्बर वेषधारी श्रद्धालुओं का तांता शिवमंदिरों की ओर बढ़ता ही रहा
  • आस्था को डिगा नहीं सका देवराज इन्द्र का प्रकोप

श्रावण मास का आगमन शनिवार (28/07/018) को श्रावण कृष्ण प्रतिपदा,श्रावण नक्षत्र व प्रीति योग के अद्भुत संयोग में हुआ।इस मौके पर शिवालयों में ओंम नमः शिवाय के पंचाछरी मन्त्रों की गूंज रही।घन्ट व नगारों की करतल आवाज गूंजा।महिलाओं के मंगलगीत ने माहौल को आधात्मिक बना दिया। 28 जुलाई को श्रावण की पहली किरण धरती को स्पर्श करते ही भक्ति की तैयारियां परवान चढ़ने लगीं थीं।जिले के खुटहा बाजार स्थित श्री ओंकारेश्वर महादेव मन्दिर,निचलौल के इटहिया पञ्चमुखी शिवमन्दिर,धानि के कांक्षेश्वरनाथ,कटहरा शिवमंदिर पर शिवभक्तों का अद्भुत सैलाब उमड़ा।नई-नई परिधानों में सजी महिलाएं युवतियां हाथों में पूजा की डलिया और उसमें रखी भांग,धतुर,पान पत्र,विल्वपत्र,गौ दूध,गंगाजल,चन्दन,कनेर पुष्प,अनार आदि नैवैद्य लेकर शिवमंदिरों की ओर बढ़ती गईं।महिलाओं सहित शिवभक्तों का रेला जब शिवमन्दिरों पर पहुंचा तो पूरा माहौल आध्यात्म चुंदरी ओढ़ लिया।मन्दिरों पर शिवभक्त भगवान शिव की एक झलक दर्शन पाने के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहे।

जब हर शिवभक्त के मुंख से ओंम जय शिव ओंमकारा का स्वर फूटा  तो पूरा माहौल ही भक्तिमय हो गया।व्रती महिलाएं एवं कुँवारी कन्याओं ने  शिव-पार्वती की पूजन-अर्चन की।तथा शिव पार्वती कथा का भी श्रवण किया।

सुहागन महिलाएं सावन में क्यों पहनती हैं हरी कांच की चूड़ियां

जब खनकती हैं चूड़ियाँ तेरी कलाई में।

एक अजब सा साज़-ए-मुहब्बत फ़िज़ा में फैल जाती है।।

28 जुलाई शनिवार को श्रावण कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि श्रावण नक्षत्र व प्रीति योग के अद्भुत संयोग के साथ भगवान सदाशिव का पवित्र मास सावन का महीना शुरू हो चुका है । तो हर जगह इस महीने के तैयारी शुरू होने के साथ-साथ शिव भक्त कांवड़ यात्रा में जा रहे हैं तो कहीं गांव के मन्दिरों पर ही शिव को पूजने और मनाने की जोरदार तैयारी की जा रही है। इस सावन के महीने में कई सारे तीज – त्यौहार और व्रत पड़ने वाले हैं। इस महीने का पूरे साल के 12 महीनों में काफी खास माना जाता है और इसका विशेष महत्व भी होता है । ये तो  सभी जानते हैं कि ये महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय मास माना जाता है,जिसमें भक्तों को भी पूजा-पाठ,ध्यान,योग,साधना करने का विशेष ही इंतजार रहता है। कहा जाता है की सावन के महीने में भगवान शिव माता पार्वती संग धरती पर ही रहते हैं,और भक्तों के साथ-साथ ही रहते हैं। यहॉ तक माना जाता है की कावड़ियों के साथ भगवान सदाशिव भी होते हैं और उनके साथ भगवान शिव भी झूम कर नाचते-गाते चलते ही रहते हैं।

पं.आचार्य वीरेंद्र मणि शास्त्री “सोहास” के मुताबिक इसके अलावा सावन मास में कई चीज़ों का विशेष ही अपना महत्व होता है – जैसे झूले का और महिलाओं के लिए तीज और व्रत का। साथ ही महिलाएं सावन के महीने में हरी कांच की चूड़ियां पहनती हैं।

सावन में हरी चूड़ियाँ क्यों पहनी जाती हैं ?

हम आपको यही बता रहे हैं कि सावन में ही हरी चूड़ियां क्यों पहनी जाती हैं और इसके पीछे का क्या कारण है-

कहा जाता है की सावन महीने में हर जगह हरियाली -ही- हरियाली होती है, और हरा रंग प्राकृतिक रंग होता है। जो महिलाओं के लिए काफी खास होता है। साथ ही हरी चूड़ियां महिला के सुहाग का प्रतीक भी मानी जाती हैं। वहीं इस महीने में भगवान शिव को पूजा जाता है। इसलिए महिलाएं हरे रंग की चूडियां पहनती हैं जिससे उन्‍हें भगवान शिव का आशीर्वाद भी मिले। भगवान शिव प्रकृति के बीच रहते हैं और उन्हें हरे रंग का बिल्व पत्र और धतूरा भी चढ़ाया जाता है जिससे भगवान शिव काफी प्रसन्न रहते हैं। इसलिए सावन में अधिकतर महिलाएं (99%) हरे रंग की ही चूड़ियां पहनती हैं और पसन्द करती हैं।

चूड़ी नहीं ए मेरा दिल है देखो।
देखो टूटे ना,चूड़ी नहीं मेरा दिल है।।

( शिवरतन कुमार गुप्ता की रिपोर्ट )

महाराजगंज : भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष बनी मधु पाण्डेय

महाराजगंज : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की महराजगंज जिला संयोजिका मधु पांडेय को भाजपा महिला मोर्चा जनपद महाराजगंज का जिलाध्यक्ष मनोनीत किया है। जनपद वासियो ने जनपद की बेटी को इस पद पर मनोनीत होने पर बधाई दी है।

( महराजगंज जिला संयोजिका मधु पांडेय )

सांसद पंकज चौधरी ने बधाई देते हुए बताया कि श्रीमती मधु पांडेय पार्टी के कार्यो को वफादारी से लेती थी ,उनके नेतृत्व में पार्टी को पूर्व में भी काफी मजबूती मिली थी। आज उनको जनपद के महिलाओ का नेतृत्व मिलने पर हम सबको विश्वास है कि पार्टी नई ऊंचाई को तय करेगी।

( भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण शुक्ल ) 

भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण शुक्ल ने मधु पांडेय के मनोनयन पर कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी में महिलाओ को पूरा सम्मान मिला था ,आज मधु पांडेय जी को महिला मोर्चा के प्रदेश नेतृत्व ने मनोनयन किया है, उनके नेतृत्व में पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी।

( प्राक्कलन समिति उत्तरप्रदेश के सभापति एवं पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह )

उत्तरप्रदेश प्राक्कलन समिति के सभापति एवं पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि श्रीमती मधु पांडेय जी के नेतृत्व में पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी। श्रीमती पांडेय ऊर्जावान है। उनके पूर्व के पार्टी में दिए गए योगदान को पार्टी ने समझा और नई जिम्मेदारी दी है, मुझे पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व मे पार्टी नए आयाम तय करेगी।

( सदर विधायक जयमंगल कन्नौज्जिया )

सदर विधायक जयमंगल कन्नौज्जिया ने कहाकि श्रीमती मधु पांडेय को भारतीय जनता पार्टी का जनपद के महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष पद पर मनोनयन से पार्टी को मजबूती मिलेगी। आज पार्टी का  शीर्ष नेतृत्व आधी आबादी को सम्मान देने का कार्य कर रहा है। श्रीमती मधु पांडेय जी के मनोनयन से पार्टी को नई ताकत मिली है। श्रीमती मधु पांडेय के भाजपा  महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष मनोनीत होने पर फरेंदा विधायक बजरंग बहादुर सिंह उर्फ बजरंगी सिंह ने कहाकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं के सम्मान का ख्याल किया है। श्रीमती पांडेय के प्रति समर्पण को पार्टी ने सम्मान दिया है।

श्रीमती मधु पांडेय को भाजपा महिला मोर्चा जनपद महाराजगज के जिलाध्यक्ष मनोनीत किये जाने पर सिसवा विधायक प्रेम सागर पटेल, पूर्व विधायक व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष चौधरी शिवेंद्र सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष समीर त्रिपाठी, नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल, राजेश जायसवाल, जगदीश जायसवाल, जिला उपाध्यक्ष उमापति मिश्रा, अंगद गुप्ता, अरुणेश शुक्ल, मधुर सिंह, रामाज्ञा निषाद, जिला महामंत्री प्रमोद त्रिपाठी, ओम प्रकाश पटेल, परदेसी रविदास, जिला मंत्री प्रदीप सिंह, बच्चू लाल चौरसिया, कार्यालय प्रभारी गौतम तिवारी, नगर प्रभारी राघवेंद्र मिश्रा आदि लोगो ने श्रीमती मधु पांडेय के मनोनीत होने पर बधाई दी और शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

(शिवरतन कुमार गुप्ता की रिपोर्ट)

आखिर सावन और तीज पर्व में महिलाएं क्यों लगाती है मेहंदी ?

महिलाओं के सोलह श्रीगांर वैसे तो काफी खास होते हैं, लेकिन अगर उनमें मेहंदी ना हो तो सभी श्रींगार बेकार ही नहीं बल्कि अधूरे माने जाते हैं।इस लिए मेहंदी भी सोलह श्रींगारों में एक खास श्रींगार होता है। शादी हो या कोई त्योहार, भारतीय संस्कृति में महिलाएं मेहंदी लगाना बिल्कुल नहीं भूलती हैं। अगर बात महिलाओं के त्योहार तीज की की जाए, तो इसमें हरी व लाल चूड़ियों,हरी और लाल बिंदिया भी काफी मायने रखती है और इसके साथ-साथ मेहंदी लगाने का भी अलग महत्व हैं। हम आपको बताएंगे कि क्यों सावन महीने में और तीज के खास मौके पर महिलाएं हाथों पर मेहंदी लगाती है।

सावन में क्यों लगाई जाती हैं दोनो हाथों में मेहंदी ?

सावन में मेहंदी लगाना एक परंपरा है, ऐसी भारतीय मान्यता है कि तीज के पावन अवसर पर मेहंदी लगाने से पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होता है। वहीं मेहंदी के बारे में एक और मान्यता है कि जिसके हाथ की मेहंदी जितनी गहरी होती है, उसको उतना ही अपने पति और ससुराल का प्रेम मिलता है। जिस वजह से सावन महीने में महिलाएं मेहंदी लगाकर अपने हाथों को खूबसूरत बनाती हैं।

राम भरोसे है सोनौली सीमा की सुरक्षा, घंटो घूमता रहा चीनी नागरिक

भारत नेपाल सीमा स्थित महराजगंज जिला सोनौली बॉर्डर पर एक चाइनीज नागरिक को आव्रजन अधिकारियों ने रोककर घंटों पूछताछ के बाद उसे वापस नेपाल लौटा दिया है। दरअसल बीते 27 जुलाई 2018को करीब 11:00 बजे एक चाइनीज युवक नेपाली गाइड के साथ नेपाल से एक बाइक पर सवार होकर भारत नेपाल सीमा के भारतीय कस्बा सोनौली में दाखिल हुआ। वह अपने मल्टीमीडिया मोबाइल से पूरे कस्बे का भ्रमण करते हुए वीडियो क्लिप बना रहा था।

मैले  कुचैले  वेशभूषाधारी चाइनीज नागरिक कस्बे की मोबाइल की दुकान पर घूम कर मोबाइल खरीदने का प्रयास कर रहा था, भारतीय सीमा में घूमकर वीडियो बनाने की चर्चा जब आम हुई  तो इसकी सूचना आव्रजन कार्यालय तक पहुंच गई।  जिसके बाद आव्रजन अधिकारी कस्बे के रामजानकी चौराहे से चाइनीज नागरिक को अपने कार्यालय ले गए, जहाँ से घंटों पूछताछ के बाद उसे नेपाल भेज दिए जाने की खबर है। पूछताछ में पता चला कि उक्त चाइनीज नागरिक सोनौली से मात्र 4 किलो मीटर दूर स्थित नेपाल के भैरहवा एक सुनार की दुकान में नौकरी करता है। वहा से मोबाइल खरीदने के लिए नेपाल से भारत में कैसे आ गया था, किसी को पता नही चला। जबकि बार्डर पर एसएसबी और आव्रजन के जवान मुस्तैदी से तैनात है।

इस सम्बंध में आव्रजन कार्यालय के सहायक प्रभारी राजवीर सिंह ने भारतीय समाचार को बताया कि रोके गए चाइनीज नागरिक का नाम वांग जियंग लीग है। जो नेपाल से आया था । सब कुछ ठीक ठाक था। इसलिए वापस नेपाल भेज दिया गया । उनका यह भी कहना था कि कोई भी विदेशी नागरिक बिना किसी रोक टोक के आव्रजन कार्यालय तक आ सकता है।

सूत्र बताते हैं कि उक्त विदेशी नागरिक भेष भूषा बदल कर भारत नेपाल सीमा पर स्थित सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे कर भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया और नेपाली युवक सुरेश के साथ सोनौली कस्बे में घण्टो घूमता रहा। पूछताछ में विदेशी नागरिक ने यह भी बताया कि सोनौली बार्डर पर बाइक से प्रवेश करते समय किसी ने नेपाली समझ कर हमे नही रोका इसलिये हम भारत मे प्रवेश कर गए।

(शिवरतन गुप्ता की रिपोर्ट)

नेपाल: त्रिशूली नदी में यात्री बस गिरने से 5 की मौत 16 घायल

नेपाल काठमांडू से पोखरा शहर की ओर जा रही एक यात्री वाहक बस में ट्रक की ठोकर लगने से यात्री वाहक बस त्रिशूली नदी में जा गिरा।जिसमें सवार यात्रियों में से5 की मौके पर ही मौत हो गई,और 16 यात्री घायल हो गए। सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए स्थानीय सशत्र पुलिस बल भरतपुर अस्पताल में भर्ती करायी है।
भारतीय समयानुसार शुक्रवार करीब  12:15 बजे  यात्रीयो से भरी बस त्रिशूली नदी में एक ट्रक की ठोकर लगने से गिर गई।बस में सवार यात्रियों के बीच से 5 यात्रियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि 16 अन्य सवारी घायल हो गये है। जिसमें घायल यात्रियों में 5 की हालत नाजुक बनी हुई है ।
सशस्त्र प्रहरी बल विपद व्यवस्थापन प्रशिक्षण केंद्र कुरिनटार के डीएसपी मुक्तिनाथ दाहाल ने भारतीय समाचार को बताया कि चितवन इच्छाकामना गांव पालिका के चुम्लिडयर में ना 5 खा 7409 नंबर ट्रक ने यात्री बस ना 6खा 2506 बस को जोरदार ठोकर लगने से त्रिशूली नदी में सड़क खंड से 100 मीटर नीचे गिर गया,इस हादसे में मौके पर ही 5 यात्रियों की मौत हो गई है,जबकि 16 लोग घायल हुए हैं।सभी घायलों का इलाज भरतपुर अस्पताल में हो रहा है।
(शिवरतन कुमार गुप्ता की रिपोर्ट )

27 जुलाई को होगा 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण

 27 जुलाई 2018 को 21वीं सदी का सबसे लंबा खग्रास चंद्र ग्रहण होगा। ग्रहण 27 जुलाई की मध्य रात्रि में 11 बजकर 45 मिनट पर होगा और इसका मोक्ष काल यानी अंत 28 जुलाई की सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर होगा।

चंद्र ग्रहण शुरू होने से अंत होने तक करीब 4 घंटे का रहेगा। ग्रहण पर ज्योतिषियों की भविष्यवाणी डराने वाली है। उज्जैन के ज्योतिषी पंडित मनीष शर्मा ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा पर 27 जुलाई की रात खग्रास चंद्र ग्रहण होगा। यह 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा।इसे पूरे देश में इसे देखा जा सकेगा। भारत के साथ ही कई अन्य देशों पर भी 27 जुलाई को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण का बुरा प्रभाव हो सकता है। उन्होंने बताया कि जब भी सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण एक ही महीने में होते हैं, तो प्राकृतिक आपदाएं आती हैं।

ग्रहण से भूकंप, चक्रवात, ज्वालामुखी व सुनामी की आशंका के अलावा उपग्रहों और विमानों में खराबी आने की आशंका भी बढ़ जाती है। इससे पहले 26 जुलाई 1953 को सबसे लंबा चंद्र ग्रहण पड़ा था। यह बीसवीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण था। इस दौरान ग्रीस में भीषण भूकंप आया था।

जानिए क्यों खास है सदी का यह सबसे लंबा चंद्र ग्रहण

21वीं शताब्दी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण 27 जुलाई को पड़ने जा रहा है। इस ग्रहण की रोमांचकता को करीब से देखने के लिए हमारे पास पूरा मौका है। लेकिन इससे पहले इस चंद्र ग्रहण के बारे में कुछ चीजें जानना जरूरी हैं।

27 जुलाई 2018 दिन शुक्रवार को पूरे एशिया, यूरोप के ज्यादा हिस्सों में, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के इलाकों में चद्र ग्रहण देखा जा सकेगा।अंतरिक्ष वैज्ञानिक और भूगोलशास्त्र में गहरी दिलचस्पी रखने वाले लोग शाम 6 बजे से लाइवस्ट्रीमिंग ऑनलाइन देख सकेंगे।

यह चंद्र ग्रहण साल 2018 का दूसरा चंद्र ग्रहण है। इससे पहले 31 जनवरी को साल का पहला चंद्र ग्रहण पड़ा था तो तीन घंटे 23 मिनट तक चला था। इस चंद्र ग्रहण को ब्लड मून, ब्लू मून और सुपर मून का भी नाम दिया गया था।

  

तो इसलिए होता है पूर्ण चंद्र ग्रहण-

पूर्ण चंद्र ग्रहण यदा कदा ही देखने को मिलता है। यह ग्रहण तब देखने को मिलता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक ही सीध आ जाएं। चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य जब एक ही रेखा में होते हैं और चंद्रमा  पृथ्वी के पीछे गुजर रहा होता है तो उसक पर हमारे ग्रह यानी पृथ्वी की छाया पड़ती है। ऐसे में चंद्रमा दिखाई नहीं देता जिसे पूर्ण ग्रहण कहते हैं। चंद्रमा जब पृथ्वी की छाया से निकल रहा होता है तो यह हल्के लाल रंग का दिखता है जिसे वैज्ञानिकों की भाषा में ब्लड मून कहते हैं।

इसलिए ज्यादा स्पेशल है यह चंद्र ग्रहण-

इस बार का चंद्र ग्रहण ज्यादा स्पेशल है क्योंकि हमारी पृथ्वी पूरे जुलाई-सितंबर में सूर्य और मंगल के बीच से होकर गुजर रही है। 27 जुलाई को मंगल अपनी बेस्ट पोजिशन पर होगा जोकि 2003 के बाद ऐसी स्थिति बनी है। इस बार मंगल पृथ्वी से सबसे नजदीक और साफ दिखाई देगा जोकि 15 साल बाद होने जा रहा है।

(शिवरतन गुप्ता की रिपोर्ट )